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कर्नाटक : हनीट्रैप में पहले हिंदू युवकों को फँसाती, फिर ISIS में धकेलती: पूर्व कांग्रेस MLA की बहू ‘मरियम’ का पूरा चिट्ठा

पिछले साल जनवरी में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने दीप्ति मरला उर्फ मरियम को कुख्यात आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) से कथित संबंधों के आरोप में गिरफ्तार किया था। कर्नाटक के कोडागु की रहने वाली दीप्ति बीएम बाशा के बेटे अनस अब्दुल रहमान की पत्नी हैं। इनके पिता इदिनब्बा कभी कांग्रेस  के विधायक थे। इदीनाबा की 2009 में मृत्यु हो गई।

NIA के अधिकारियों ने दीप्ति से मरियम बनी युवती के बारे में संदेह के आधार पर जाँच की थी। जाँच के दौरान पता चला कि मरियम इस्लामिक स्टेट (ISIS) नेटवर्क में युवाओं को भर्ती करने के रैकेट में शामिल थी। उसे गिरफ्तार करने के लिए सुरक्षा एजेंसी ने पाँच महीनों तक उसके खिलाफ सबूत जुटाए थे।

उल्लेखनीय है कि NIA ने अगस्त 2021 में उसके घर पर छापा मारा था और अनस अब्दुल रहमान के चचेरे भाई अम्मार को ISIS लिंक के लिए गिरफ्तार किया था। NIA ने उस वक्त मरियम से पूछताछ की थी। हालाँकि, उस वक्त उसे हिरासत में नहीं लिया गया था। सबूत मिलने के बाद उसे जनवरी 2022 में गिरफ्तार कर लिया गया।

पेशे से दंत चिकित्सक दीप्ति मरला, अनस से निकाह करने से पहले हिंदू थीं। जब वह UAE में पढ़ती थी, उस दौरान वह इस्लाम की ओर ‘आकर्षित’ हो गई। बाद में मैंगलोर के डेरलकट्टे के एक कॉलेज में बीडीएस की पढ़ाई के दौरान उसे अनस से प्यार हो गया। उसने इस्लाम धर्म अपना लिया और अपना नाम मरियम रख लिया। इसके बाद उसने अनस से निकाह कर ली।

हिंदुओं को हनीट्रैप में फँसाती थी मरियम

पूछताछ के दौरान दीप्ति मरला उर्फ मरियम ने NIA को बताया कि वह हनीट्रैप के जरिए हिंदुओं को फँसाती थी और इस्लाम में धर्मांतरित करती थी। इसके बाद वह उन्हें ISIS में भर्ती करने की कोशिश करती थी। उसने पूरे कर्नाटक में 10 से अधिक हिंदू युवकों को इस्लाम में धर्मांतरित करने की बात कबूल की।
मरियम ने फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हिंदू और मुस्लिम नामों से 15 से ज्यादा अपनी ID बना रखी थी। वह अपने शौहर के कहने पर ISIS के लिए इंस्टाग्राम पेज क्रॉनिकल फाउंडेशन को हैंडल करती थी।
मरियम अश्लील चैट के जरिए युवाओं को फँसाती थी। जान-पहचान बढ़ाने के बाद मरियम ने हिंदू युवकों को वीडियो कॉल किया। उसकी यौन उत्तेजक बातचीत युवकों को लुभाती थी और उन्हें प्यार के जाल में फँसा लेती थी। फिर वह उनसे शादी करने का वादा करती थी।
एक बार जब हिंदू युवक उसकी जाल में पूरी तरह से फँस जाते थे तो वह उन्हें इस्लाम कबूल करने और फिर आईएसआईएस में शामिल होने के लिए मजबूर करती थी। अगर उसका संभावित निशाना कोई मुस्लिम युवक होता तो वह प्यार का नाटक करती और उन्हें आईएसआईएस में शामिल होने के लिए उकसाती थी।
NIA ने कहा कि मरियम के बहकावे में आकर 2020 और 2021 में चार से पाँच युवक केरल से सीरिया चले गए। गिरफ्तारी से पाँच महीने पहले बेंगलुरू में गिरफ्तार मदेश पेरुमल उर्फ अब्दुल भी मरियम के झाँसे में आ गया था। उसने धर्म परिवर्तन करके इस्लाम अपना लिया था।
मदेश पेरुमल ने कथित तौर पर आतंकवादी संगठन के संचालकों को देश में बम विस्फोट करने का वादा किया था। एजेंसी ने बताया कि मरियम ने मदेश पेरुमल को लुभाने के लिए 10 लाख रुपए खर्च किए हैं। ISIS के साथ संबंध होने के अलावा दीप्ति मरला उर्फ मरियम के जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी संगठनों के साथ भी संबंध थे।
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, NIA ने कहा, “जाँच के दौरान यह पता चला है कि सीरिया/ईराक में ISIS खिलाफत खत्म होने के बाद दीप्ति मरला और मोहम्मद अमीन ने जनवरी और मार्च 2020 में हिजरा (धार्मिक प्रवास) के तहत कश्मीर का दौरा किया था। वह कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने और ISIS की गतिविधियों का समर्थन करने के लिए के लिए वहाँ गए थे।
जाँच के दौरान यह भी पता चला है कि मोहम्मद अमीन के साथ-साथ दीप्ति मरला भी ISIS की साजिश का सरगना थी। मार्च 2021 में दर्ज मामले के संबंध में NIA द्वारा गिरफ्तार किए गए लोगों में मोहम्मद अमीन उर्फ ​​अबू याहया और उसके दो सहयोगी- डॉ. रहीस रशीद और मुसहब अनवर भी शामिल थे।
कुख्यात इस्लामी आतंकी संगठन ISIS के साथ संबंधों को लेकर दीप्ति मरला उर्फ मरियम की गिरफ्तारी होने के बाद उसके माता-पिता ने उससे संबंध तोड़ लिए। कहा जाता है कि इसके लिए उसके माता-पिता ने एक समाचार पत्र में विज्ञापन देकर अपने संबंध खत्म करने की घोषणा की।

राहुल की करीबी अदिति सिंह ने फिर दिया कांग्रेस को झटका

राहुल की करीबी अदिति सिंह ने फिर दिया कांग्रेस को झटका, कहा- जो सही लगता है, मैं वही करती हूंपूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की करीबी मानी जानें वाली रायबरेली से कांग्रेस विधायक अदिति सिंह ने महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर बुलाये गये उत्तर प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र में हिस्सा लिया. हालांकि उनकी पार्टी ने इस सत्र का बहिष्कार किया है. उन्होंने अक्टूबर 2 से शुरू हुए 36 घंटे चलने वाले विशेष सत्र में हिस्सा लिया और अपनी बात भी रखी. विपक्षी पार्टियों समाजवादी पार्टी, बसपा, कांग्रेस, एसबीएसजे ने इस सत्र का विरोध किया है और उनका दावा है कि राज्य सरकार सिर्फ रिकॉर्ड बनाने के लिए ऐसा कर रही है.
जब अदिति से विपक्षी पार्टी के बहिष्कार के बाद भी सदन में आने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘ अगर आपने मेरा भाषण सुना होगा तो मैंने सिर्फ विकास और सतत विकास लक्ष्य के बारे में चर्चा की. मैं अपने पिता के रास्ते पर चलते हुए राजनीति करती हूं. मुझे जो सही लगता है, मैं करती हूं.’’ इस दौरान अदिति सिंह ने केंद्र की बीजेपी सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने के फैसले का समर्थन भी किया.
उन्होंने कहा कि वह सदन में आईं और चर्चा में हिस्सा लिया क्योंकि उन्हें ऐसा करना सही लगा. जब उनसे पार्टीलाइन का उल्लंघन करने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘‘ मैं पार्टी लाइन से ऊपर उठी और विकास पर बात करने की कोशिश की…यह मेरी पहली और शीर्ष प्राथमिकता है.’’
सिंह से जब पार्टी द्वारा अनुशासनात्मक कार्रवाई की संभावना के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘‘ यह पार्टी का निर्णय होगा और पार्टी जो भी निर्णय लेगी मैं उसे स्वीकार करने के लिए तैयार हूं.’’ बता दें कि महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर बुधवार को कांग्रेस ने देशभर में पदयात्रा निकाली. लखनऊ में प्रियंका गांधी ने भी पदयात्रा निकाली लेकिन अदिति सिंह उसमें भी शामिल नहीं हुईं थीं.
उत्तर प्रदेश में सोनिया गांधी की रायबरेली सीट ही कांग्रेस के लिए सबसे सुरक्षित मानी जाती रही है. इस बार हुए लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस ने यहां बहुत खराब प्रदर्शन करते हुए भी 1 लाख के अंतर से बीजेपी प्रत्याशी दिनेश सिंह को हराया है. लेकिन पिछली बार की तुलना में कांग्रेस की जीत का अंतर घट गया है. दरअसल कांग्रेस की हालत यहां पर 2017 में हुई विधानसभा चुनाव से ही खराब होती दिख रही थी.   लोकसभा सीट में पांच विधानसभा सीटें हैं जिनमें से दो कांग्रेस, दो बीजेपी और एक समाजवादी पार्टी के पास थी. बीजेपी रायबरेली में सोनिया के गढ़ को ध्वस्त करना चाहती है. इसके पहले उसने गांधी परिवार के बहुत करीबी माने जाने वाले कांग्रेस के एमएलए दिनेश सिंह को बीजेपी  ज्वाइन करवाई थी. दिनेश सिंह के छोटे भाई अवधेश सिंह रायबरेली की हरचंदपुर सीट से कांग्रेस विधायक हैं. उनके बड़े भाई के बीजेपी में जाने के बाद वे भी बीजेपी के साथ ही माने जा रहे हैं.
लेकिन क्षेत्र की इन सभी राजनीतिक उठापटक के बाद भी कांग्रेस के पास एक तुरुप का पत्ता था ऐसा था जो जिले के सभी बाहुबलियों पर अकेले पड़ा था. वह थे रायबरेली सदर से पूर्व विधायक और बाहुबली नेता अखिलेश सिंह. मौजूदा सदर विधायक अदिति सिंह उन्हीं की बेटी हैं. अखिलेश सिंह रायबरेली सदर से अजेय विधायक रहे हैं. उनको हराने के लिए कांग्रेस ने एड़ी-चोटी का जोर कई बार लगाया लेकिन सफल नही हो पाई. इसके बाद अखिलेश सिंह को कांग्रेस में शामिल कराया गया. कांग्रेस को इसका फायदा मिला और लोकसभा चुनाव में अखिलेश सिंह के रसूख के चलते रायबरेली में सदर से कांग्रेस के एकतरफा वोटें मिलती थीं जो सोनिया गांधी की जीत का अंतर बहुत ज्यादा बढ़ा देती थीं. लेकिन कुछ दिन पहले ही बीमारी के चलते अखिलेश सिंह का निधन हो गया.
अखिलेश सिंह के रहने पर जिले में उनके प्रतिद्वंदी अदिति सिंह पर हावी होने की कोशिश करते दिखे. कुछ दिन पहले ही रायबरेली लखनऊ रोड पर अदिति सिंह पर एक कथित हमले की भी घटना हुई. इसकी गूंज दिल्ली तक सुनाई दी और इस घटना का प्रियंका गांधी ने भी विरोध किया. इस घटना के बाद अदिति सिंह को भी समझ आ गया कि जिले के बदलते समीकरणों के बीच यहां की राजनीति को दिल्ली के नेताओं को भरोसे नहीं थामा जा सकता है. 
अदिति सिंह जिनको राजनीति में लाने का सबसे बड़ा हाथ प्रियंका गांधी  का माना जाता है, उन्हीं से खुली बगावत का ऐलान कर दिया. 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती के दिन लखनऊ में प्रियंका गांधी की अगुवाई में कांग्रेस का मार्च था जिसको लेकर कांग्रेस ने ह्विप भी जारी किया था. वहीं दूसरी ओर योगी सरकार की ओर से 36 घंटे तक चलने वाला विधानसभा सत्र बुलाया गया जिसका समूचे विपक्ष ने बायकॉट किया. लेकिन अदिति सिंह ने अपनी पार्टी की ह्विप को नजरंदाज कर विधानसभा सत्र में हिस्सा लिया. जब इस पर उनसे सवाल किया गया तो सीधा कोई जवाब देने के बजाए उन्होंने कहा, 'मुझे जो ठीक लगा वो मैंने किया. पार्टी का क्या निर्णय होगा मुझे नहीं मालूम. मैं पढ़ी-लिखी युवा एमएलए हूं. विकास का मुद्दा बड़ा मुद्दा है. यही गांधी जी को सच्ची श्रद्धांजलि है.'
रायबरेली की 5 विधानसभा सीटों में से दो कांग्रेस, दो बीजेपी और एक समाजवादी पार्टी के पास थी. लेकिन दिनेश सिंह के बीजेपी में जाने के बाद से उनके भाई जो कि हरचंदपुर से विधायक हैं वो भी एक तरह से बीजेपी में ही माने जाते हैं. यानी चार विधायक पहले से ही बीजेपी के खाते में हैं. अदिति सिंह के जाने पर विधायकों की संख्या 5 हो जाएगी. इस लोकसभा चुनाव में जीत का अंतर देखते हुए ऐसा लगता है कि अदिति सिंह का बीजेपी में जाना कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा खतरा होगा. 

आकाश के बाद अब दबंगई पर उतरे कांग्रेस विधायक नीलेश राणे समर्थकों से इंजीनियर पर फिंकवाई कीचड़

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कांग्रेस विधायक नितेश राणे को सिंधुदुर्ग-गोवा हाईवे पर गढ्ढों को लेकर शिकायत मिली थी 
नेताओं की बिरादरी लगता है सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के पीछे हाथ धोकर पड़ गई है नेता सरकारी कर्मियों को सरेआम पीट रहे हैं और उनके ऐसे कामों के वीडियो भी खासे वायरल हो रहे हैं। ताजा मामला महाराष्ट्र से सामने आया है यहां एक कांग्रेस नेता के समर्थकों ने एक कंस्ट्रक्शन साइट पर जाकर इंजीनियर के उपर कीचड़ लौट दी। 
कांग्रेस विधायक नितेश नारायण राणे के समर्थकों ने कांकावली में मुंबई-गोवा राजमार्ग के पास एक पुल पर इंजीनियर प्रकाश शेडेकर पर कीचड़ फेंका, जब वे गड्ढों से भरे राजमार्ग का निरीक्षण कर रहे थे। बाद में उन्होंने इंजीनियर को नदी पर बने पुल से बांध भी दिया। कांग्रेस विधायक नितेश राणे को सिंधुदुर्ग-गोवा हाईवे पर गढ्ढों को लेकर शिकायत मिली थी कहा जा रहा है कि लोगों की शिकायत थी कि इस हाईवे पर गढ्ढे हैं जिससे बारिश के मौसम में इनमें पानी भर जाता है जिससे लोगों को खासी परेशानी होती है।
इस स्थिति के चलते अक्सर यहां कई रोड एक्सीडेंट भी हो चुके हैं इन दुर्घटनाओं को लेकर काफी रोष था जिसकी जानकारी विधायक को हुई तो वो गुस्सा गए और पहुंच गए जिम्मेदार अधिकारियों को सबक सिखाने। 

Embedded video

: Congress MLA Nitesh Narayan Rane and his supporters throw mud on engineer Prakash Shedekar at a bridge near Mumbai-Goa highway in Kankavali, when they were inspecting the potholes-ridden highway. They later tied him to the bridge over the river.
वीडियो में बहस के बाद कुछ लोग इंजीनियर पर बाल्टी से कीचड़ डालते हुए देखा जा सकता है, इसके बाद उन्होंने इंजीनियर को पकड़कर नदी पर बने पुल से रस्सी से बांध दिया।
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2:06 PM - Jul 4, 2019Twitter Ads info and privacyहाल ही में मध्य प्रदेश में बीजेपी के नेता कैलाश विजयवर्गीय के बेटे और बीजेपी विधायक आकाश विजयवर्गीय द्वारा नगर निगम अधिकारी को बैट से पीटे जाने की घटना सामने आई थी जिसमें आकाश विजयवर्गीय ने नगर निगम के एक अधिकारी को बल्ले से पीटा था इस कांड के बाद उन्हें जेल भी जाना पड़ा था।