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क्या हिजाब, गोहत्या और धर्मांतरण पर कानून बदलेगी कर्नाटक की कांग्रेस सरकार, एमनेस्टी की माँग पर खड़गे के मंत्री बेटे प्रियांक खड़गे

कर्नाटक में सरकार बनाते ही कांग्रेस ने अपने वादे के अनुसार मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति अपनानी शुरू कर दी है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे और कर्नाटक सरकार में राज्यमंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा कि राज्य मे हिजाब पर प्रतिबंध, गोवध प्रतिबंध और धर्मांतरण कानून सहित अन्य मामलों पर विचार किया जाएगा।

स्वतंत्रता मिलने से पूर्व से ही हिन्दू का निरंतर उपहास हो रहा है, लेकिन हिन्दू आज तक अपने दुश्मनों को नहीं पहचान पा रहा या अनदेखा कर रहा है। चुनावी हिन्दुओं के षड्यंत्र में फंस सनातन विरोधियों को वोट देकर, मोदी और योगी की ओर उनकी सहायता करने के लिए देखते हैं। लेकिन फ्री रेवड़ियों के लालच में अपने विरोधियों को वोट दे आते हैं।  

कर्नाटक के सिद्धारमैया सरकार में राज्यमंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा, “हम अपने रुख को लेकर बहुत स्पष्ट हैं। हम ऐसे किसी भी कार्यकारी आदेश की समीक्षा करेंगे, हम किसी भी विधेयक की समीक्षा करेंगे जो कर्नाटक की आर्थिक नीतियों के प्रतिकूल है। जो राज्य की खराब छवि प्रस्तुत करता है।”

उन्होंने आगे कहा, “कोई भी विधेयक जो आर्थिक गतिविधियों के लिए उपयोग नहीं किया जाता है, कोई भी विधेयक जो रोजगार पैदा नहीं करता है, कोई भी विधेयक जो किसी व्यक्ति के अधिकारों का उल्लंघन करता है, कोई भी विधेयक जो असंवैधानिक है उसकी समीक्षा की जाएगी और यदि आवश्यक हुआ तो उसे रद्द किया जाएगा।”

बताते चलें कि राज्य में कांग्रेस की सरकार बनते ही मानवाधिकार के नाम पर भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा फैलाने एमनेस्टी इंटरनेशनल (Amnesty International) ने अपनी तीन प्रमुख माँगें रखी थीं। उसने कहा था कि कर्नाटक में हिजाब पर प्रतिबंध, धर्मांतरण विरोधी कानून और गोवध कानून का सरकार समीक्षा करेगी।

एमनेस्टी इंडिया ने अपनी पहली माँग में शैक्षणिक संस्थानों में महिलाओं के हिजाब पहनने पर लगे प्रतिबंध को हटाने को कहा। उसने कहा, “यह प्रतिबंध मुस्लिम लड़कियों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धर्म की स्वतंत्रता और शिक्षा के अधिकार के बीच चयन करने के लिए मजबूर करता है। इससे समाज में सार्थक रूप से भाग लेने की उनकी क्षमता बाधित होती है।”

अपनी दूसरी माँग में पशु क्रूरता (रोकथाम) अधिनियम 2020 और कर्नाटक धार्मिक स्वतंत्रता अधिकार संरक्षण विधेयक 2022 के प्रावधानों की समीक्षा करने और उन्हें निरस्त करने के लिए कहा। दूसरे शब्दों में, एमनेस्टी इंडिया ने कर्नाटक में गोहत्या की अनुमति और हिंदू विरोधी ताकतों को राज्य में धर्मांतरण रैकेट (लव जिहाद) चलाने की माँग की है।

एमनेस्टी इंडिया ने अपने ट्वीट में आगे कहा कि गोवध और धर्मांतरण पर बने कानून का दुरुपयोग हो सकता है और इसे अल्पसंख्यकों के खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा, एमनेस्टी इंडिया ने मुस्लिम विक्रेताओं का बहिष्कार करने वाले हिंदुओं के खिलाफ कार्रवाई का आह्वान किया।

अपनी तीसरी माँग को लेकर एमनेस्टी ने कहा, “राज्य में चुनावों से पहले मुस्लिम के आर्थिक बहिष्कार और उनके खिलाफ हिंसा का आह्वान किया गया था। धर्म-जाति आधारित भेदभाव से प्रेरित घृणा और घृणित अपराधों को समाप्त करने के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करें।” दिलचस्प बात यह है कि ऐसी कई रिपोर्ट आई हैं, जिनमें मुस्लिमों ने हिंदू व्यवसायों का बहिष्कार करने का आह्वान किया है, लेकिन एमनेस्टी ने इसे कभी भी घृणित नहीं कहा।

राज्य में प्रतिबंधित कट्टरपंथी इस्लामवादी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े बजरंग दल (Bajarang Dal) पर प्रतिबंध को लेकर भी प्रियांक खड़गे ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “कोई भी संगठन- धार्मिक, राजनीतिक या सामाजिक, जो असंतोष और वैमनस्य के बीज बोने जा रहा है… उसे कर्नाटक में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हम कानूनी और संवैधानिक रूप से उनसे निपटेंगे – चाहे वह बजरंग दल हो, पीएफआई हो या कोई अन्य संगठन हो। हम उन्हें प्रतिबंधित करने में संकोच नहीं करेंगे, यदि वे कर्नाटक में कानून और व्यवस्था के लिए खतरा बनेंगे।”

दरअसल, कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में कहा था कि अगर वह सत्ता में आएगी तो राज्य में बजरंग दल पर प्रतिबंध लगा देगी। बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने की कांग्रेस की घोषणा की देश भर में आलोचना हुई थी। भाजपा ने तो बजरंग दल को बजरंग बली से जोड़ दिया था।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अब्दुल की याचिका ख़ारिज कर, कहा- ‘गाय बेहद पवित्र, गौहत्या करने वाले नरक में सड़ते हैं’: गोवंश को संरक्षित राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए

उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच (Allahabad High Court) ने 3 मार्च 2023 को एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि देश में गोहत्या रोकने (Ban on Cow Slaughter) के लिए केंद्र सरकार को प्रभावी कदम उठाना चाहिए। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने गाय को संरक्षित राष्ट्रीय पशु घोषित करने की जरूरत बताई।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति शमीम अहमद की एकल पीठ ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि गाय की महिमा वैदिक काल से चली आ रही है। इसके साथ ही न्यायमूर्ति शमीम ने बाराबंकी के देवा थाना क्षेत्र के मोहम्मद अब्दुल खलीक की याचिका खारिज कर दी। खलीक को पुलिस ने गोवंश के मांस के साथ गिरफ्तार किया था और उसके खिलाफ उत्तर प्रदेश गोवध निवारण कानून के तहत आरोप था।

कोर्ट ने कहा, “आशा है कि केंद्र सरकार देश में गोहत्या रोकने के लिए उचित निर्णय लेगी और इसे संरक्षित राष्ट्रीय जीव घोषित करेगी।” कोर्ट ने आगे कहा, “गाय को हिंदू धर्म में सभी जानवरों में सबसे पवित्र माना गया है। इसे कामधेनु या दिव्य गाय और सभी इच्छाओं की पूर्ति करने वाली के रूप में जाना जाता है।”

न्यायमूर्ति शमीम ने अपने ऐतिहासिक निर्णय में हिन्दुओं की वर्षो से चल रही गाय हत्या पर प्रतिबन्ध लगाए जाने की मांग को एक नई ऊर्जा प्रदान कर सरकार को इस गंभीर मुद्दे पर मंथन करने को विवश कर दिया है।  

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाय को भारतीय संस्कृति का अहम हिस्सा बताते हुए कहा, “हम एक धर्मनिरपेक्ष देश में रह रहे हैं और सभी धर्मों के लिए सम्मान होना चाहिए। हिंदू धर्म का यह मत है कि गाय दैवीय और प्राकृतिक भलाई की प्रतिनिधि है। इसलिए इसकी रक्षा और पूजा की जानी चाहिए।”

पुराणों और महाभारत आदि ग्रंथों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा, “पुराण कहते हैं कि गायों के दान/उपहार से अधिक धार्मिक और कुछ भी नहीं है। भगवान राम के विवाह में भी गायों को उपहार के रूप में दिया गया था। महाभारत में भीष्म पितामह का मानना है कि गाय जीवन भर मानव को दूध प्रदान करके एक सरोगेट माँ के रूप में कार्य करती है। इसलिए वह वास्तव में दुनिया की माँ है।”

गाय के महत्व को बताते हुए हाईकोर्ट ने आगे कहा, “किंवदंतियों में यह भी कहा गया है कि ब्रह्मा ने एक ही समय में पुजारियों और गायों को जीवन दिया, ताकि पुजारी धार्मिक ग्रंथों का पाठ कर सकें और गाय अनुष्ठानों के लिए प्रसाद के रूप में घी दे सकें।” कोर्ट ने कहा कि गाय के चारों पैरों को चार वेद कहा गया है।

कोर्ट ने आगे कहा, “जो कोई भी गायों को मारता है या दूसरों को मारने की अनुमति देता है, माना जाता है कि उसे तब तक नरक में सड़ता रहेगा जब तक कि उसके शरीर पर बाल हैं। इसी तरह बैल को भगवान शिव के वाहन के रूप में दर्शाया गया है। यह नर मवेशियों के सम्मान का प्रतीक है।”

हाईकोर्ट ने कहा कि गाय को अन्य देवताओं के साथ भी जोड़ा गया है, विशेष रूप से भगवान शिव, भगवान इंद्र, भगवान कृष्ण और देवी (कई के मातृ गुणों के कारण) के साथ। कोर्ट ने कहा कि हिंदू धर्म में गाय को सबसे पवित्र जानवर माना गया है। कोर्ट ने कहा कि गोवंश का वैदिक काल से लेकर मनुस्मृति, महाभारत, रामायण में वर्णित धार्मिक महत्व के साथ ही व्यापक अर्थिक महत्व भी है। गाय से मिलने वाले पदार्थों से पंचगव्य तक बनता है।

इसके पहले सितंबर 2021 में भी इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाय को संरक्षित राष्ट्रीय पशु घोषित करने का सुझाव दिया था। उस वक्त विश्व हिंदू परिषद ने स्वागत किया था। वीएचपी (VHP) के अंतराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा था कि गाय सदियों से गाय इस देश की प्राणवायु की तरह रही है। इसलिए केंद्र और राज्य सरकारों को न्यायाधीश के सुझाव का पालन करते हुए गोहत्या पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा देना चाहिए।

स्कूल में बुर्का/हिजाब आर्टिकल 25 के तहत यह अधिकार नहीं : कर्नाटक Advocate General


कर्नाटक बुर्का विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कहा कि यूनिफॉर्म की अनिवार्यता किसी भी छात्र या छात्रा के धार्मिक/मजहबी अधिकारों का हनन नहीं है। कर्नाटक सरकार के महाधिवक्ता (AG: Advocate General) ने कोर्ट को यह भी बताया कि ऐसे कदम से शैक्षणिक संस्थानों में किसी भी प्रकार के मज़हबी कपड़े पहन कर आने से रोक लगेगी, जिसमें हिजाब भी शामिल है। उच्चतम न्यायालय में यह सुनवाई 21 सितम्बर 2022 को हुई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये सुनवाई जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस सुधांशु धूलिया की बेंच कर रही है। इसी सुनवाई के दौरान कर्नाटक सरकार के महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) प्रभुलिंग नवदगी ने दलील देते हुए कहा कि हिजाब समर्थक तमाम छात्राएँ इसे स्कूल के बाहर पहन सकती हैं। समान यूनिफॉर्म को कर्नाटक सरकार के महाधिवक्ता ने एकता और अनुशासन के लिए बेहद जरूरी बताते हुए कहा कि इससे पढ़ाई का अच्छा माहौल तैयार होता है।

वहीं हिजाब के समर्थन में बहस कर रहे वकीलों ने आर्टिकल 25 का उल्लेख करते हुए कोर्ट को बताया कि इसे पहनना मुस्लिम छात्राओं का ‘मज़हबी अधिकार’ है। इन्हीं वकीलों ने हिजाब की माँग को भी आर्टिकल 19 के तहत ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी’ करार दिया।

‘मज़हबी अधिकार’ या ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी’ वाली दलील के जवाब में कर्नाटक सरकार के महाधिवक्ता ने साल 1958 में सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई का हवाला देते हुए बताया कि कैसे तब बकरीद में गाय की कुर्बानी को जायज ठहराने की माँग उठाते हुए उसे मजहबी अधिकार बताया गया था, जिसे मुख्य न्यायाधीश सहित 5 जजों की बेंच ने ख़ारिज कर दिया था।

कर्नाटक सरकार के महाधिवक्ता ने अपनी दलील में आगे बताया कि साल 1958 के बाद सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न मौकों पर धार्मिक/मजहबी अधिकारों के स्वतंत्रता की व्याख्या की है। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ये बता चुका है कि हर मज़हबी गतिविधि को धार्मिक/मजहबी अधिकारों की स्वतंत्रता के नाम पर लागू करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।

महाधिवक्ता ने कहा कि शिक्षा में समानता स्थापित करने के लिए क्लास 10 तक के सभी बच्चों को मुफ्त में यूनिफॉर्म देने का फैसला किया है। इसी मामले में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने दलील देते हुए कहा कि क्या इसी को धार्मिक/मजहबी अधिकारों की स्वतंत्रता कहा जाएगा कि सुप्रीम कोर्ट में ही मुस्लिम नमाज़ और हिन्दू हवन करना शुरू कर दें? उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक/मजहबी अधिकारों को मिलाने का विरोध भी किया।

उडुप्पी के जिस संस्थान से बुर्का विवाद की शुरुआत हुई थी, वहाँ के शिक्षकों ने इसी सुनवाई के दौरान अपने वकील आर वेंकटरमानी के माध्यम से कहा कि स्कूल में धार्मिक/मजहबी प्रतीकों की लड़ाई से वहाँ पढ़ाई का माहौल खराब होता है। अध्यापकों का पक्ष रखते हुए एक अन्य वकील डी शेषाद्रि नायडू ने कहा कि धर्म/मजहब बच्चों के दिल में होना चाहिए और उन्हें धार्मिक/मजहबी विवादों से दूर रह कर सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट में 8 दिनों से चल रही यह सुनवाई अब अपने अंतिम दौर में है। इन 8 दिनों में 6 दिनों तक हिजाब समर्थक वकीलों ने अपना पक्ष कोर्ट में रखा था। बाकी 2 दिनों में कर्नाटक सरकार ने अपने पक्ष से सुप्रीम कोर्ट को अवगत करवाया है।

'बंगाल में कोई गोकशी नहीं रोक सकता' : ममता के मंत्री सिद्दीकुल्ला चौधरी

                                                          ममता के मंत्री सिद्दीकुल्लाह चौधरी
तृणमूल कांग्रेस के विधायक सिद्दीकुल्ला चौधरी ने मार्च 6, 2021 को हिंदू भावनाओं का मजाक उड़ाते हुए एक नया विवाद खड़ा कर दिया। टीवी 9 भारतवर्ष के मुताबिक उन्होंने पश्चिम बंगाल में गोहत्या के मुद्दे पर धमकी दी। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में गोहत्या को कोई नहीं रोक सकता।

आगामी राज्य विधान सभा चुनावों से पहले उन्होंने कहा, “उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने यहाँ आकर कहा था कि अगर भाजपा सत्ता में आती है, तो वह राज्य में गोहत्या को समाप्त कर देगी।” उन्होंने आरोप लगाया, “पिछले 1000-1200 वर्षों से बंगाल में गोहत्या हो रही है। हर कोई गोमांस खाता है, जिसमें मुसलमान और अन्य शामिल हैं। गोमांस को वोट से क्या मिला? यह कोशिश हिंदू मानसिकता को आगे बढ़ाने की है।”

यह पूछे जाने पर कि क्या वो गोहत्या का समर्थन करते हैं, चौधरी ने दावा किया कि 5-स्टार रेस्टॉरेंट और विदेशी पर्यटकों के बीच भारत में गोमांस खाना आम है। उन्होंने कहा, “अगर गोमांस पर प्रतिबंध लगाया जाता है तो बंगालियों को 100% गुस्सा आएगा। यदि हम इसे नहीं खाते हैं, तो हम इसे कहाँ रखेंगे? फिर हमें जबरदस्ती खाना खिलाना होगा।” उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में ज्यादातर बीफ निर्यातक हिंदू मारवाड़ी हैं, मुसलमान नहीं।

सिद्दीकुल्ला चौधरी ने दावा किया कि राम मंदिर के फैसले में पीएम मोदी का हाथ है

इसके अलावा, उन्होंने दावा किया कि राम मंदिर के फैसले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि धूमिल हुई है। Tv9 Bharatvarsh के रिपोर्टर द्वारा सूचित किए जाने पर कि निर्णय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिया गया था, फिर भी उन्होंने न्यायपालिका की अखंडता पर सवाल उठाए।

सिद्दीकुल्ला चौधरी ने टिप्पणी की, “पीएम का पद सर्वोच्च न्यायालय से बड़ा है। पीएम मोदी कॉलेजियम के गठन, जजों की नियुक्ति और उनके ट्रांसफर में शामिल हैं… मुसलमान मोदी को वोट नहीं देंगे। बाबरी मस्जिद का मुद्दा और राम मंदिर निर्माण स्थल पर मुसलमानों को मोदी के लिए वोट देने से पहले 10 बार सोचना पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से मुस्लिम समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुँची है। हम सच बोलने से नहीं डरते। बाबरी अभी भी एक मुद्दा है।”

सिद्दीकुल्ला चौधरी ने कहा कि कुरान संविधान पर हावी रहेगा

सिद्दीकुल्लाह वही व्यक्ति है जिसने सितंबर 2018 में कहा था कि कुरान संविधान पर हावी रहेगा। वह जमीयत उलेमा-ए-हिंद (पश्चिम बंगाल) के अध्यक्ष भी हैं। ट्रिपल तलाक पर प्रतिबंध लगाने वाले अध्यादेश के प्रति अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा था, “हमारे लिए हमारा पवित्र ग्रंथ, कुरान शरीफ सर्वोच्च है और यदि कोई संवैधानिक प्रावधान या कोई कानून कुरान का खंडन करता है, तो हमारा धर्मग्रंथ प्रबल होगा, कानून या संविधान नहीं। बीजेपी धर्म कार्ड खेल रही है और संविधान के साथ खिलवाड़ कर रही है। अध्यादेश का मुसलमानों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। कोई भी इसका पालन नहीं करेगा, लेकिन धर्म और पवित्र पुस्तक का पालन करेगा”

योगी के पहुँचते ही ‘जय श्रीराम’ से गूँज उठा बंगाल; गो हत्या पर ममता को घेरा

पश्चिम बंगाल में आठ चरणों में होने वाले विधानसभा चुनाव के ऐलान के साथ ही प्रचार ने जोर पकड़ लिया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2 मार्च 2021 को बंगाल के मालदा में रैली की। इस दौरान ‘जय-जय श्री राम’ के नारों से पूरा कार्यक्रम स्थल गूँज रहा था।

योगी ने कहा कि कभी देश को नेतृत्व देने वाला बंगाल आज बदहाल है। सत्ता के संरक्षण में अपराध और आतंकवाद देश की सुरक्षा के लिए चुनौती बन गई है। उन्होंने कहा कि बंगाल शक्ति की पूजा के लिए जाना जाता है। लेकिन अब यहाँ दुर्गा पूजा पर पाबंदी लगाई जाती है। गोवंश की हत्या होती है। राम का नाम नहीं लेने दिया जाता है।

उन्होंने कहा, “आज बंगाल में सत्ता प्रायोजित अपराध और आतंकवाद न केवल यहाँ की सुरक्षा के सामने संकट खड़ा कर रहा है, बल्कि देश की सुरक्षा को भी चुनौती देता दिखाई देता है। आज बंगाल में दुर्गापूजा पर प्रतिबंध लगाया जाता है। ईद में जबर्दस्ती गौ हत्याएँ कराई जाती हैं।”

इससे पूर्व जनवरी 6, 2021 को कोलकाता हाई कोर्ट ने अंधाधुंध हो रही गौ-हत्या पर नगर निगम को बंद करने का निर्देश दे चुकी है। (नीचे पढ़िए रपट) 

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बंगाल में जय श्रीराम का नारा लगाने से रोका जाता है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में रामभक्तों पर गोली चलवाने वालों का हाल सबने देखा है। बंगाल में भी जो राम द्रोही हैं, उनका कोई काम नहीं है।

सीएए के विरोध की आड़ में हुई हिंसा को लेकर भी उन्होंने बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस और उसकी मुखिया ममता बनर्जी को घेरा। उन्होंने सीएए लागू होने के बाद बंगाल में हुई हिंसा को सत्ता प्रायोजित करार दिया। उन्होंने कहा कि बंगाल की सरकार घुसपैठियों के साथ खड़ी है। उसे राज्य की जनता से कोई मतलब नहीं है।

आयुष्मान भारत सहित अन्य केंद्रीय योजनाओं को लागू नहीं करने के लिए भी योगी ने ममता सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि बंगाल में लव जिहाद को अंजाम दिया जा रहा है, लेकिन यहाँ की सरकार इसे रोक नहीं पा रही।

उन्होंने कहा, “जब बंगाल में अराजकता और बदहाली दिखाई देती हैं तो पूरे देश को पीड़ा होती है। आज बंगाल में गरीबी और बदहाली है। बंगाल में केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को लागू नहीं होने दिया जाता है।”

 रैली से पहले सीएम योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट कर कहा था, “नमस्कार बंगाल…। सनातन संस्कृति की जागृत धरा पर आज आप सभी के बीच उपस्थित होने का सौभाग्य मुझे प्राप्त हो रहा है। ‘वंदे मातरम्’ के अमर उद्घोष से सम्पूर्ण देश की राष्ट्रीय चेतना को जागृत करने वाली वीर भूमि को मेरा नमन। जय श्री राम।”

गाय और अन्य पशुओं की अंधाधुंध हत्या बंद हो: कोलकाता नगर निगम को हाई कोर्ट का निर्देश

गाय सहित अन्य पशुओं की हत्या और उनके मांस की बिक्री पर कलकत्ता हाई कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। हाई कोर्ट ने कोलकाता नगर निगम को मवेशियों की गैर कानूनी तरीके से हत्या और मांस बिक्री को रोकने के लिए उपायों को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है।

एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस थोथाथिल बी. राधाकृष्णन और जस्टिस अरिजीत बनर्जी की खंडपीठ ने ये निर्देश दिए। लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार हाईकोर्ट ने निगम अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे गाय सहित अन्य मवेशियों को अनधिकृत या अनियंत्रित तरीके से काटने और इसके बाद मांस की बिक्री करने वालों पर कार्रवाई करे।

इसके लिए खंडपीठ ने उन उपायों को सख्ती से लागू करने को कहा है जिनका जिक्र निगम ने अदालत के समक्ष दायर शपथ-पत्र में किया है। 6 जनवरी 2021 को अदालत ने इस सबंध में हलफनामा दायर करने का निर्देश निगम के आयुक्त को दिया था।

जनहित याचिका में कहा गया था कि बकरीद व अन्य मौकों पर कानूनों का पालन किए बगैर बड़े पैमाने पर गाय सहित अन्य मवेशियों को काटा जाता है। हलफनामा दायर करते हुए निगम ने अदालत को विस्तार से बताया कि वह ऐसी स्थिति में क्या कार्रवाई कर रहा है और इस स्थिति से कैसे निपटेगा।

इसके मुताबिक बकरीद जैसे मौकों पर पशुओं की कुर्बानी के लिए निगम स्थान तय करेगा और संचार के विभिन्न माध्यमों के जरिए एक महीने पहले इसके बारे में लोगों को सूचित किया जाएगा। नगर निगम के पास 5 बूचड़खाने हैं। इनके अलावा किसी अन्य जगह की बूचड़खाने के तौर पर इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी जाएगी। कसाई, मछली और मांस का व्यापार बगैर लाइसेंस के करने की अनुमति नहीं होगी।

चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि यदि निगम हलफनामे में बताए गए उपायों को सख्ती से लागू करता है तो मवेशियों को काटने की बेलगाम प्रवृत्ति बंद हो जाएगी। ऐसा नहीं होने पर अदालत ने निगम के अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई की बात भी कही

दिल्ली : कालिंदी कुंज में 4 गायों को काट कर अवशेष मंदिर के पास फेंका

                                          कालिंदी कुंज में 4 गायों को काट कर फेंका
दिल्ली के कालिंदी कुज इलाके से गाय को काट कर फेंकने का मामला सामने आया है। घटना कालिंदी कुंज थाने के मदनपुर खादर इलाके की है। यहाँ पर कम से कम 4 गायों को काट कर फेंकने की बात कही जा रही है।

इस बाबत ऑपइंडिया ने बीजेपी के पूर्व मंडल अध्यक्ष प्रभु नारायण से बात की। बता दें कि घटना के बारे में सबसे पहले इनको ही जानकारी मिली। जिसके बाद उन्होंने मामले को उजागर किया। उन्होंने बताया कि घटना रात के 2 से 4 बजे के बीच हुई है। उन्होंने बताया कि आरोपित ने गाय को काट कर उसके अंदर का लोथड़ा तीन-चार जगहों पर फेंक रखा है।

वो कहते हैं, “कुल मिलाकर आरोपितों ने 4 गायों को काटा। एक उन्होंने शीतला माता मंदिर पॉकेट-1 के पास फेंका। दूसरे गाय का अवशेष उन्होंने डी ब्लॉक के पार्क के पास स्थित मंदिर के पास फेंके। इसके अलावा कंचनकुंज के नाले के पास उन्होंने गाय का सिर और बाकी अपशिष्ट फेंके। वहाँ पर हमें एक आईडी कार्ड भी मिला था। जो हमने ACP को दे दिया है।”

उनका कहना है कि आरोपित गाय के अपशिष्ट को फेंकने के लिए वहाँ गए थे, मगर गलती से उन्होंने उसका सिर भी फेंक दिया, जो कि वो फेंकते नहीं हैं। यहीं पर नाले में उसका पर्स गिर गया। जिसमें उसके आईडी कार्ड थे। बरामद हुई आईडी कार्ड के मुताबिक उसका नाम इसानुल होडा और उसके पिता का नाम अब्दुल जलील है। 

प्रभु नारायण ने कहा कि ये लोग इधर-उधर घूमती गायों को कुछ खिला देते हैं, जिससे वह अधमरा होकर वहीं पड़ी रहती है। इसके बाद वो वहीं पर उसे काटकर गाड़ी में भर कर चल देते हैं। अवशेष को फेंक देते हैं।

कार्रवाई के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि फिलहाल अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज किया गया है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि बरामद आईडी कार्ड के आधार पर तफ्तीश कर रही है। पुलिस का कहना है कि वो बदरपुर के हरि नगर का रहने वाला है। 

पूर्व मंडल अध्यक्ष ने पुलिस पर मामला दबाने का आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस गाड़ी लेकर आ गई और कहा कि इसको जल्दी से भरो इसमें। तुम्हें कैसे पता कि गाय है, सूअर हो सकता है, भैंस हो सकता है। इसके बाद वो लोग इस बात पर अड़ गए कि चेक करवाया जाए कि गाय का है या नहीं। तब जाकर SHO और ACP ने सैंपल इकट्ठा किया। उनका कहना है कि पुलिस का रवैया सहयोगात्मक नहीं है।

उन्होंने कहा कि अगर पुलिस ने कल (फरवरी 19, 2021) तक कार्रवाई नहीं की या फिर संतोषजनक जवाब नहीं दिया तो रविवार (फरवरी 21, 2021) को भारतीय जनता पार्टी और हिंदू संगठन प्रदर्शन करेंगे, विशाल जुलूस निकालेंगे। उन्होंने बताया कि स्थानीय नागरिक विपिन चौहान ने 100 नंबर पर कॉल करके शिकायत दर्ज करवाई थी। वहीं गौरक्षा संगठन से गब्बर चौहान समेत अन्य लोग भी वहाँ पर आए थे। हालाँकि, हमने पुलिस से भी बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने फोन उठा कर एक लाइन सुन कर काट दिया। दोबारा कॉल करने पर रिसीव नहीं हुआ।