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शारदा चिट फंड स्कैम: कोलकाता के पूर्व पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के खिलाफ सीबीआई ने जारी किया लुक आउट नोटिस

rajeev kumar
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
कोलकाता के पूर्व पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार मई 27 को सीबीआई के सामने नहीं पेश हुए। उन्हें सुबह 10 बजे पेश होने के लिये कहा गया था। राजीव कुमार मे पेशी के लिए सात दिन की मोहलत मांगी है। ये बात अलग है कि सीबीआई की तरफ से फिलहाल उन्हें राहत नहीं मिली है। 
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने कोलकाता के पूर्व पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के खिलाफ करोड़ों रुपये के शारदा चिट फंड घोटाले में उन्हें देश छोड़ने से रोकने के लिए लुक आउट नोटिस जारी किया है। नोटिस जारी होने के बाद राजीव कुमार, जो पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी हैं, विदेश नहीं जा सकते हैं क्योंकि यदि वे भारत छोड़ने की कोशिश करते हैं, तो सभी हवाई अड्डा प्राधिकरण सीबीआई को सूचित करेंगे।
पिछली मोदी सरकार द्वारा जिन घोटालों पर जाँच चल रही थी, मोदी सरकार के पुनः वापसी की भनक पड़ते ही, समस्त एजेन्सियाँ सतर्कता से अधूरे कामों को अंतिम रूप देने में सजग हो गयीं। 
जैसाकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी चुनावी सभाओं में स्पष्ट कहा था कि जनता का लूटने वालों को जेल के दरवाज़े तक पहुंचा दिया है, जमानत पर हैं, बस जेल के अन्दर पहुँचाना बाकी है। लगता अब काम सभी जमानतियों को एक-एक करके जेल के अन्दर पहुँचाने की प्रक्रिया शुरू हो रही है।  
मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि 23 मई को जारी किया गया यह नोटिस एक साल तक प्रभावी रहेगा।इससे पहले मई 24 को सुप्रीम कोर्ट ने कुमार की याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें सीबीआई द्वारा गिरफ्तारी से सुरक्षा बढ़ाने की मांग की गई थी।
कुमार ने इससे पहले एक याचिका दायर की थी जिसमें गिरफ्तारी से सुरक्षा बढ़ाने की मांग की गई थी, जब तक कि पश्चिम बंगाल में संबंधित न्यायिक अदालत उनकी अग्रिम जमानत याचिका का फैसला नहीं कर देती।कोलकाता पुलिस के पूर्व प्रमुख को पहले शीर्ष अदालत ने सात दिनों तक गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान की थी, जो मई 24 को समाप्त हो गई।
इसी साल फरवरी में कोलकाता के पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के आवास पर उस समय हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला था जब वहां पहुंची सीबीआई की टीम को राज्य के पुलिसकर्मियों ने रोक दिया और इसके बाद एजेंसी के अधिकारियों को जबरदस्ती पुलिस थाने भी ले गए। हालांकि बाद में उन्हें छोड़ दिया गया।

CBI Sources: Kolkata former Commissioner Rajeev Kumar has not yet joined the probe, earlier CBI had issued summons asking him to appear before agency officials in Kolkata in the morning today, but he has not turned up yet
ऐसे में अब यह भी प्रश्न होता है, यूपीए सरकार के कार्यकाल में जिन पर घोटालों की गाज गिरी थी, उन पर भी क्या कार्यवाही होगी? दूसरे, यह कि बिना राजनीतिक संरक्षण के कोई उच्च अधिकारी तो क्या कोई चपरासी तक रिश्वत लेने का साहस नहीं कर सकता।
एजेंसी 2500 करोड़ रुपये के सारदा पोंजी घोटाले में 1989 बैच के आईपीएस अधिकारी कुमार से हिरासत में पूछताछ करना चाहती है। वह इस मामले की जांच सीबीआई के संभालने से पहले पश्चिम बंगाल पुलिस के विशेष जांच दल की अगुवाई कर रहे थे।सीबीआई ने उच्चतम न्यायालय से कहा था कि कुमार से हिरासत में पूछताछ जरूरी है क्योंकि वह जांच में सहयोग नहीं कर रहे और वह एजेंसी द्वारा उनसे पूछताछ में रखे गये सवालों पर टालमटोल तथा अड़ियल रवैया अपना रहे हैं।
Rajeev KuamrEC द्वारा हटाए गए कई अधिकारियों की ममता सरकार ने की बहाली, राजीव कुमार के घर पहुंची CBI
आम चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद पश्चिम बंगाल में प्रशानसिक फेरबदल होने शुरू हो गए हैं। चुनाव आयोग ने राज्य के जिन पुलिस अधिकारियों का तबादला किया था या जिन्हें हटाया था उन्हें ममता सरकार ने दोबारा बुला लिया है। कोलकाता के पुलिस कमिश्नर अनुज शर्मा, जिन्हें ममता सरकार ने राजीव कुमार के बदले जिम्मेदारी सौंपी गई थी उन्हें भी चुनाव आयोग ने हटा दिया था लेकिन अब ममता सरकार ने उन्हें वापस अपना कार्यभार संभालने को कहा है।
चुनाव आयोग ने राजीव कुमार को दिल्ली भेजा था लेकिन ममता सरकार ने एक बार उन्हें वापस बुला लिया है। राजीव कुमार कल कार्यभार ग्रहण करेंगे। इसके अलावा ममता सरकार ने बैरकपुर के पुलिस कमिश्नर को भी बदला है और डीपी सिंह को नया सीपी बनाया गया है। बैरकपुर वहीं जगह है जहां से टीएमसी के दिग्गज नेता दिनेश त्रिवेदी को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था और भाजपा के अर्जुन सिंह ने उन्हें मात दी थी।
भाटपारा जहां चुनाव के दौरान काफी हिंसा हुई थी वो भी इसी क्षेत्र के तहत आता है और अब वहां के नए पुलिस कमिश्नर (सीपी) डीपी सिंह होंगे। इसके अलावा ज्ञानवंत सिंह को फिर से बिधानगर का पुलिस कमिश्नर बनाया गया है जिन्हें चुनाव आयोग ने हटा दिया था। इसके अलावा राज्य सरकार ने और भी फेरबदल किए हैं।

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Saradha chit fund scam: CBI team reaches at the office of the Deputy Commissioner of Police in Park Street, Kolkata. The team had earlier gone to the residence of Kolkata Police Commissioner, looking for Rajeev Kumar.
वहीं चिटफंड घोटाले के आरोपों का सामना कर रहे कोलकाता के पूर्व कमिश्नर राजीव कुमार से पूछताछ के लिए सीबीआई उनके घर पहुंच गई है। सीबीआई ने राजीव कुमार को अपने कोलकाता स्थित कार्यालय में सोमवार को पेशी के लिये तलब किया है। राजीव कुमार सारदा चिटफंड घोटाले के सबूत मिटाने का आरोप है। खबरों की मानें तो सीबीआई कल राजीव कुमार को गिरफ्तार कर सकती है।

क्या है सारदा चिट फंड घोटाला? क्यों ममता बनर्जी परेशान हो रही है?

Saradha chit fund case
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
सारदा चिट फंड घोटाला एक बार फिर सुर्खियों में है। इस घोटाले की जांच को लेकर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और पश्चिम बंगाल की ममता सरकार आमने-सामने आ गईं। मामले की जांच करने कोलकाता पहुंचे सीबीआई के अधिकारियों को हिरासत में ले लिया गया जबकि अपने पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के बचाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी धरने पर बैठ गईं। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो शीर्ष अदालत ने राजीव कुमार को जांच में सहयोग करने का आदेश दिया और पश्चिम बंगाल सरकार को नाटिस जारी किया। इस घोटाले में करीब 40 हजार करोड़ रुपये का हेर-फेर हुआ है। साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने भी सीबीआई को जांच का आदेश दिया था। साथ ही पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम पुलिस को आदेश दिया था कि वे सीबीआई के साथ जांच में सहयोग करें !सारदा चिट फंड घोटाले ने देश का राजनीतिक पारा बढ़ा दिया है। आइए जानते हैं इस घोटाले के बारे में-
सारदा चिटफंड आम लोगों को सब्जबाग दिखाकर बेवकूफ बनाने की ऐसी दास्तान है 2004 से शुरू होती है। इस कंपनी की स्थापना जुलाई 2008 में की गई थी। हालांकि देखते ही देखते ये कंपनी हजारों करोड़ की मालिक बन गई। आरोप लगाया जाता है कि इस कंपनी के मालिक सुदिप्तो सेन ने ‘सियासी प्रतिष्ठा और ताक़त’ हासिल करने के लिए मीडिया में खूब पैसे लगाए और हर पार्टी के नेताओं से जान पहचान बढ़ाई ! जब केन्द्र में मनमोहन सिंह सरकार थी और बंगाल में लेफ्ट की। और केन्द्र में मनमोहन सरकार लेफ्ट की बैसाखी पर ही टिकी थी। यह वही दौर था, जब बंगाल में शारदा चिटफंड कम्पनी ने अपना कारोबार का श्रीगणेश कर, बंगाल की मासूम जनता को रातों-रात अमीर बनने का सपना दिखाया जा रहा था। और इस लालच में मिडिल और गरीब लोग आ गए। लोगों ने अपनी जमा पूंजी लगानी शुरू कर दी।
जैसाकि हर जालसाज कम्पनी के साथ होता है, शुरू में शारदा चिटफंड ने अपने वायदे के मुताबिक लोगों को उनकी जमा राशि के मुताबिक के अनुसार दुगना-तिगुनी राशि दी। लालच बढ़ता देख, लोगों ने अपना सबकुछ दांव पर लगा दिया। लेकिन 2013 में अचानक कंपनी कहीं गायब हो गयी।
कोलकाता के पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार

राजीव कुमार का क्या है रोल ?

शारदा चिटफंड घोटाले में कोलकाता के पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार सीबीआई जांच के घेरे में हैं। दरअसल राजीव कुमार ने ही चिटफंड घोटालों की जांच करनेवाली एसआईटी टीम की अगुवाई की थी। साथ ही कहा गया था कि इस जांच के दौरान घोटाला हुआ था। इस कमेटी की स्थापना साल 2013 में की गई थी। सूत्रों के अनुसार घोटाले की जांच से जुड़ी कुछ अहम फाइल और दस्तावेज गायब हैं ! वहीं सीबीआई गुम फाइलों और दस्तावेजों को लेकर पुलिस कमिश्नर से पूछताछ करना चाहती है। साथ ही सीबीआई ने पुलिस कमिश्नर को फरार बताया था!

चिंदबरम की पत्नी के खिलाफ भी आरोप पत्र

हाल ही में सीबीआई ने पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की पत्नी नलिनी चिदंबरम के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दावा किया है कि चिट फंड घोटाले में घिरे शारदा ग्रुप की कंपनियों से उन्हें 1.4करोड़ रुपये मिले !
शारदा चिटफंड का चीटिंग फार्मूला
फार्मूला नंबर एक: शारदा चिटफंड कंपनी की सबसे लोकप्रिय स्कीम थी सागौन  खेती के बांड्स की। वायदा था कि अगर कोई इसमें 1 लाख रूपए लगाए तो 25 वर्षों बाद उसे 34 लाख मिलेंगे। लाखों मिडिल क्लास के लोगों ने अपने बच्चों के सुरक्षित भविष्य की उम्मीद में एक-एक लाख वाली स्कीम में राशि निवेश कर दी। इस आशा में की 25 वर्ष उपरांत उन्हें 34 लाख मिलने पर उनका और उनके परिवार का भविष्य सुखमय हो जाएगा। लेकिन हुआ उसके विपरीत।
स्मरण हो, पूर्व में भी पेरू आदि नामों से इस तरह के बहुत घोटाले होते रहे हैं, सबके सब ठंठे बस्ते में दफ़न हो गए। शोर मचा, जनता पागल बनती गयी। किसी को आज तक कुछ नहीं मिला। कुछ कंपनियों ने बाकायदा हर वर्ष होने वाली आय के इकट्ठे चैक तक दे दिए थे।
फार्मूला नंबर दो:
कंपनी की एक स्कीम थी कि आप उनसे आलू की खेती का अनुबन्ध लें। कंपनी का कहना था कि वो आलू बोयेंगे और उसमे निवेश की गयी राशि को 15 महीने में दुगुना करके वापस कर देंगे। लेकिन किसी ने कंपनी से यह तक नहीं पूछा कि आलू बोने के लिए खेती की जमीन कहाँ है? और आलू की फसल से दुगुना रिटर्न देने का आखिर तरीका क्या है?
फार्मूला नंबर तीन:
सारदा चिटफंड सागौन की खेती के भी बांड्स बेचती थी। ऐसी ही लुभावनी स्कीमों में लगभग 10 लाख जनता फंस गयी और अपनी पूरी ज़िन्दगी की जमा पूंजी लगा दी। ढेरों लोग ऐसे भी थे, जिन्होंने अपनी रिटायरमेंट में मिली पूंजी को भी दांव पर लगा दी थी। कंपनी का मालिक सुदीप्तो सेन इस राशि पर ऐश करता था और उसने एक न्यूज़ चैनल भी खोल कर नेताओं से अपने सम्पर्क बनाता रहा।
कैसे खुली इस जालसाजी की पोल
झूठे सपने और फरेबी स्कीम बेचने का आलम यह था कि सारदा ग्रुप ने सिर्फ 5 साल में बंगाल समेत झाड़खंड, ओडिसा, और नार्थ-ईस्ट राज्यों में लगभग 300 दफ्तर खोल लिए थे। उसके हज़ारों कमीशन एजेंट थे। जो लोगों को कंपनी की स्कीमों में पैसा निवेश करने के लिए समझाते थे। लेकिन धोखे की पोल खुलते ही एजेंट दफ्तरों में ताले डाल गायब होने लगे। कहते हैं कि कुछ एजेंटों ने डर के मारे आत्महत्या भी कर चुके हैं। इतना ही नहीं लगभग 600 एजेंटों ने कम्पनी के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया। कंपनी की ढगी का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि 2013 से पहले बंगाल में दुर्गा पूजा और फुटबॉल मैचों तक में बतौर प्रायोजक पैसा निवेश कर अपना प्रचार कर रही थी।
ममता की पार्टी को चिटफंड का धन मिला
मई 2011 ममता बनर्जी बंगाल की मुख्यमंत्री बनी थी। सारदा चिटफंड बंगाल में यूँ तो पहले से ही चल रहा था, लेकिन ममता के आते ही मानो इसके पंख लग गए। इसके बाद ही कंपनी पुरे बंगाल में पैर पसारने में सफल हो गयी। माना जाता है कि विधान सभा चुनाव में ममता की तृणमूल पार्टी को सारदा चिटफण्ड ने करोडो रूपए बतौर चंदा दिया था। और इसी पैसे के दम पर ममता ने 2011 में प्रचंड बहुमत हासिल किया था। 2013 में जब इसका भांडा फूटा तो ममता ने इस पर पर्दा डालने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी थी, यहाँ तक की सरकारी खातों से कुछ छोटे निवेशकों को उनकी राशि देने का प्रयास किया गया था। लेकिन घोटाले में तृणमूल नेताओं के नाम आने से मामले ने राजनितिक रूप ले लिया। 
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कोलकाता में ममता बनर्जी के धरने में शामिल होने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो गई है। गृह म...

यह बात भी सामने आयी कि ममता की घटिया पेंटिंग को सारदा कंपनी ने करोड़ों में ख़रीदा था, जिस कारण ममता बनर्जी का नाम घोटाले में शामिल हो गया। जाँच के लिए ममता ने राजीव कुमार की अध्यक्षता में SIT का गठन किया। लेकिन उन्होंने जाँच की बजाए घोटाले को ठंठे बस्ते में डाल दिया। 2014 में मामला सुप्रीम कोर्ट गया और कोर्ट ने सीबीआई को जाँच के आदेश दिए।
  1. सारदा ग्रुप चिटफंड घोटाला भारत में अब तक के सबसे बड़े घोटालों में से एक है जिसमें करीब 14 लाख लोगों को ज्यादा रिर्टन का लालच देकर उनसे 1200 करोड़ रुपए का ठगी हुआ। यह समूह अपने निवेश से प्राप्त आय की जगह पुराने निवेशकों को भुगतान नए निवेशकों से प्राप्त धन से करता था। बाद में पाया गया कि कंपनी ने भारतीय दंड संहिता के विभिन्न प्रावधानों,  कंपनी एवं सेबी अधिनियम का गंभीर उल्लघंन किया है।

  2. पश्चिम बंगाल एवं पड़ोसी राज्यों में लाखों लोगों के साथ हजारों करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का यह मामला साल 2013 में सामने आया। बाद में इस केस ने राजनीतिक मोड़ ले लिया और इसे लेकर पश्चिम बंगाल की ममता सरकार पर सवाल उठने लगे। पश्चिम बंगाल सरकार पर चिट फंड ग्रुप के चेयरमैन सुदिप्ता सेन के साथ सीधा संपर्क होने के आरोप लगे

  3. जनता के बीच अपनी छबि साफ रखने के लिए सारदा ग्रुप ने कोलकाता के फुटबाल क्लब मोहन बागान और ईस्ट बंगाल में निवेश किए। साथ ही उसने दुर्गा पूजा कार्यक्रमों को भी प्रायोजित किए।

  4. इस घोटाले से सबसे अत्यधिक जो राज्य प्रभावित हुए उनमें पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम, झारखंड और त्रिपुरा शामिल हैं।

  5. चिटफंड छोटे व्यापारियों और कारोबारियों को रोज अतिरिक्त पैसों की बचत करने में मदद करता है। ग्रामीण इलाकों में बचत का इसे बेहतर विकल्प माना जाता है। इस बचत पर सलाना ब्याज करीब 12 प्रतिशत मिलता है। सूदखोरों के ब्याज को देखते हुए इसे कम माना जाता है। जबकि फिक्स्ड डिपॉजिट पर बैंक सात से आठ प्रतिशत का ब्याज देते हैं।

  6. मिडिया रिपोर्ट के अनुसार सारदा ग्रुप जिसने सारदा घोटाले को अंजाम दिया, समझा जाता है कि अप्रैल 2013 में कानूनी गिरफ्त में आने से पहले उसने अपने चिट फंड के जरिए करीब 1200 करोड़ रुपए का हेरफेर किया।   

  7. 2013 में घोटाला सामने आने के बाद ममता बनर्जी सरकार ने योजना में पैसा लगाने वाले छोटे निवेशकों के लिए  500 करोड़ रुपए का रिलिफ फंड जारी किया।

  8. 14 मार्च 2013 को कॉरपोरेट मामलों के मंत्री सचिन पायलट ने लोकसभा में ऐसी 87 कंपनियों की सूची जारी की जो पोंजी योजनाओं में संलिप्त थीं। इनमें से 73 कंपनियां पश्चिम बंगाल से थीं।

  9. 23 अप्रैल 2013 को सारदा ग्रुप के एमडी एवं चेयरमैन सुदिप्ता सेन, देबजानी मुखर्जी और अरविंद सिंह चौहान को कश्मीर से गिरफ्तार किया गया।

  10. अप्रैल 2013 में सेबी के चेयरमैन यूके सिन्हा ने मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि तथाकथित इस पोंजी योजनाओं के जरिए 10,000 करोड़ रुपए से ज्यादा रकम जुटाई गई। उन्होंने कहा, 'ऐसी योजनाओं में निवेश करने वाले सामान्य लोग एवं कर्मचारी हैं।' कहा जाता है कि सेन ने अकेले निवेशकों के 4000 करोड़ रुपए की हेराफेरी की और इसे देखते हुए इन कंपनियों द्वारा जमा की गई रकम सेबी के अनुमान से ज्यादा हो सकता है।

  11. मिडिया रिपोर्ट के अनुसार सीबीआई द्वारा केस संभालने के बाद एसआईटी ने 11 लोगों को गिरफ्तार किया और 224 अचल संपत्तियों का पता लगाया। इसके अलावा एसआईटी ने 54 वाहनों को जब्त एवं करीब 300 मामलों में आरोपपत्र दाखिल किए।

  12. जांच के दौरान कई बड़े नाम उजागर हुए जिनमें तृणमूल कांग्रेस के 2 सांसद कुणाल घोस और सृंजॉय बोस, पश्चिम बंगाल के पूर्व पुलिस महानिदेशक रजत मजमूदार, पूर्व खेल एवं परिवहन मंत्री मदन मित्रा एवं पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की पत्नी निलनी के नाम शामिल हैं।

ममता-मोदी की लड़ाई के पीछे 20,000 करोड़ का घोटाला : किसने किया था 20,000 करोड़ का गबन?

Saradha scam PM modi vs mamta banerjee
शारदा चिटफंड घोटाले पर केन्द्र की मोदी और पश्चिम बंगाल की ममता सरकार आमने-सामने आ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जांच कर रही सीबीआई की टीम रविवार शाम कोलकाता पुलिस आयुक्त राजीव कुमार के लाउडन स्ट्रीट स्थित आधिकारिक निवास पर तलाश व पूछताछ के लिए पहुंचने के बाद मामला नाटकीय ढ़ंग से गरमा गया। सीबीआई टीम को डिटेन कर थाने ले जाया गया। बाद में कोलकाता पुलिस ने सीबीआई के कोलकाता स्थित दोनों दफ्तरों को घेर लिया। ममता सीबीआई के जरिए केंद्र पर तानाशाही का आरोप लगा रही हैं वहीं केंद्र घोटाले के पीछे सत्‍तारूढ़ टीएमसी को मुख्‍य आरोपी मान रही है। ये पूरा मामला रोज वैली और सारदा चिटफंट घोटाले का है। आइए जानते हैं पूरा मामला :
Saradha scam

करीब 20 हजार करोड़ के हैं दोनों घोटाले


इस विवाद की पृष्‍ठभूमि में दो बड़े घोटाले हैं। पहला है सारदा स्कैम जिसमें करीब 2500 करोड़ रुपए के हेरफेर का आरोप है। वहीं, दूसरा घोटाला रोज वैली स्कैम का है। इसमें करीब 17,000 करोड़ रुपए से ज्यादा के गबन का आरोप है। जांच से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, दोनों ही मामलों में आरोपियों के कथित तौर पर सत्ताधारी टीएमसी से लिंक पाए गए हैं। इन दोनों ही चिटफंड घोटालों की जांच सीबीआई कर रही है। इस मामले में बीती 11 जनवरी को सीबीआई ने पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम की पत्नी नलिनी चिदंबरम के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया।

कैसे हुआ घोटाला 

बताया जाता है कि इन चिटफंड कंपनियों ने निवेशकों को आकर्षक ब्याज का लालच दिया। मैच्योरिटी के बाद जब जमाकर्ता अपना रिटर्न लेने पहुंचे तो कंपनियों ने पैसे देने से मना कर दिया। आखिरकार इन कंपनियों ने अपनी दुकानों और दफ्तरों को बंद कर दिया। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में इन मामलों को जांच के लिए सीबीआई को सौंप दिया था। 

जानिए शारदा चिटफंड और रोज वैली घोटाले के बारें में…

शारदा चिटफंड घोटाला पश्चिम बंगाल का एक बड़ा आर्थिक घोटाला है। इसमें कई बड़े नेताओं के नाम जुड़े हैं। साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को आदेश दिए थे कि इस मामले की जांच करे। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम पुलिस जांच में सहयोग करने का आदेश दिया था।

रोज वैली घोटाला 

शारदा चिटफंड की तरह ही रोज वैली घोटाले पर भी काफी वक्त से हड़कंप मचा हुआ है। इसमें कई बड़े नेताओं का नाम भी शामिल होने की बात सामने आ चुकी है। दरअसल, रोज वैली चिटफंड घोटाले में रोज वैली ग्रुप ने लोगों 2 अलग-अलग स्कीम का लालच दिया और करीब 1 लाख निवेशकों को करोड़ों का चूना लगा दिया था। इसमें आशीर्वाद और होलिडे मेंबरशिप स्कीम के नाम पर ग्रुप ने लोगों को ज्यादा रिटर्न देने का वादा किया। ग्रुप एमडी शिवमय दत्ता इस घोटाले के मास्टरमाइंड बताए जाते हैं। जिसके बाद लोगों ने भी इनकी बातों में आकर इसमें निवेश कर दिया। 
इस सन्दर्भ में अवलोकन करें:--

तीन स्‍कीमों में उलझे निवेशक

जांच रिपोर्ट के मुताबिक, सारदा ग्रुप की चार कंपनियों का इस्तेमाल तीन स्कीमों के जरिए पैसा इधर-उधर करने में किया गया। ये तीन स्कीम थीं- फिक्स्ड डिपॉजिट, रिकरिंग डिपॉजिट और मंथली इनकम डिपॉजिट। इन स्कीम के जरिए भोले भाले जमाकर्ताओं को लुभाने की कोशिश हुई और उनसे वादा किया गया कि बदले में जो इनसेंटिव मिलेगा वो प्रॉपर्टी या फॉरेन टूर के रूप में होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, 2008 से 2012 की ग्रुप की समरी रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि ग्रुप की चार कंपनियों ने अपनी पॉलिसियां जारी करके 2459 करोड़ रुपये को ठिकाने लगा