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इकबाल अंसारी के खिलाफ FIR, इंटरनेशनल शूटर वर्तिका सिंह के सामने बोला था – पाकिस्तान जिंदाबाद

अयोध्या मामला, इकबाल अंसारी
अयोध्या मामले के पक्षकार इकबाल अंसारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। दरअसल अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज वर्तिका सिंह की याचिका के बाद पुलिस ने इकबाल अंसारी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की (आईपीसी) धारा 147, 504, 505 (2) और 506 के तहत राम जन्मभूमि थाने में केस दर्ज किया है।
वर्तिका सिंह ने फैजाबाद न्यायालय में न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय देवेंद्र प्रताप सिंह के समक्ष धारा 156/3 के तहत यह याचिका दायर की थी। वर्तिका ने कोर्ट में दी याचिका में इकबाल अंसारी पर मारपीट का आरोप लगाया था। साथ ही इकबाल अंसारी समेत 5 के खिलाफ देशद्रोह और कई अन्य मामलों को लेकर ये याचिका दायर की थी। देवेंद्र प्रताप सिंह ने इस याचिका को स्वीकार करते हुए इकबाल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने थाना राम जन्मभूमि को आदेश देते हुए कहा था कि वो 3 दिन के भीतर इस केस को दर्ज करके न्यायालय को सूचना दें।

यह पूरा मामला 3 सितंबर की उस घटना को लेकर है, जिसमें वर्तिका सिंह मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी से राम मंदिर को लेकर बात करने उनके घर पहुँची थीं। इस दौरान दोनों में विवाद हो गया था। अंसारी ने वर्तिका पर हाथापाई के आरोप लगाए थे और उनके ख़िलाफ़ पुलिस में केस दर्ज करवाया था। इसके बाद पुलिस ने वर्तिका सिंह को कस्टडी में लेकर 4 घंटे तक पूछताछ की थी और फिर लखनऊ भेज दिया था।
इस केस में वर्तिका की ओर से सर्वोच्च न्यायालय की वकील संगीता सिंह ने उनकी पैरवी की। वकील संगीता सिंह ने कहा कि अंसारी ने वर्तिका पर फर्जी आरोप में केस दर्ज कर उन्हें उत्पीड़ित किया और साथ ही वर्तिका के साथ बातचीत में देश के खिलाफ (पाकिस्तान जिंदाबाद, PM मोदी को अपशब्द आदि) कई बातें कही थीं।

PoK जाकर पॉलिटिक्स करें राहुल गॉंधी: इकबाल अंसारी, अयोध्या मामले के मुस्लिम पक्षकार


Image result for इकबाल अंसारीआर.बी.एल. निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
जब से(अगस्त 5) मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को समाप्त किया है, विश्व में लगभग सभी देश भारत सरकार के निर्णय के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं, जबकि भारत में पाकिस्तान की बोली बोलने वाली कांग्रेस और इसके समर्थक दल एवं इनके प्रायोजित #not in my name, #awardvapsi, #intolerance, #moblynching आदि तथाकथित देशभक्त गैंग  तुष्टिकरण नीति त्यागने को तैयार नहीं। जो ये विरोधी तथाकथित देशभक्त बोलते हैं, उन्ही आवाज़ों को पाकिस्तान अपनी ताकत समझ अपने चैनलों पर प्रसारित कर, अपना पक्ष मजबूत करने का असफल प्रयास कर रहा है। 
भारत में पल रहे इन तथाकथित देशभक्त पाकिस्तान की तरह जनता की नब्ज पढ़ने में असफल हो रहे हैं। जिसकी मिसाल इतने वर्षो से अयोध्या में रामजन्मभूमि मन्दिर का विरोध कर बाबरी मस्जिद के पक्ष में अदालतों के खड़े होने वाले इक़बाल अंसारी भी इन तथाकथित देशभक्तों का विरोध कर रहे हैं। जो इस बात का भी संकेत दे रहे हैं, कि अयोध्या विवाद समाप्त होने पर इस बात के ऊपर से भी पर्दा हटेगा कि अयोध्या में राममन्दिर को विवादित करने में कौन-कौन पार्टी अवरोध कर रही थीं, वैसे तो 99%पर्दा उठ ही चूका है। लेकिन इक़बाल अंसारी के विरोधी स्वरों की भारत से लेकर पाकिस्तान तक कहीं कोई चर्चा नहीं।     
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी के जम्मू-कश्मीर दौरे को लेकर अयोध्या मामले के मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी ने सवाल उठाया है। इकबाल अंसारी ने राहुल गाँधी और कांग्रेस से पूछा है कि देश मे कई जगह मसले हैं, वहाँ उनके नेता कभी क्यों नहीं जाते हैं। अंसारी ने राहुल गाँधी से दो टूक पूछा है कि पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (POK) भारत का अभिन्न अंग है, वहाँ जाकर राजनीति क्यों नहीं करते हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने ही कश्मीर में धारा 370 लागू किया था और पार्टी के नेता 70 साल तक राजनीति कर अपना लाभ लेते रहे हैं।
इकबाल अंसारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने धारा 370 हटाकर देश में एक कानून का राज स्थापित किया है। धारा 370 के खत्म होने से कश्मीर के लोगों का भला हुआ है। राहुल और कांग्रेस को देश की चिंता है, तो पाकिस्तान जाकर मसले को हल करें या फिर अन्य जगहों पर जाकर मसले को हल करें, लेकिन कश्मीर पर कांग्रेस को राजनीति नहीं करनी चाहिए।
अंसारी ने भारतीय मुसलमानों की तुलना वीर अब्दुल हमीद से करते हुए कहा कि देश के मुसलमान वतन के लिए पाकिस्तान से लड़ने को तैयार है। पाकिस्तान हमेशा भारत से मुँह की खाता रहा है। वहीं, कांग्रेस कश्मीर पर राजनीति कर रही है। देश के हिन्दू-मुसलमान सिख व ईसाई अमन चाहते हैं। कांग्रेस ने कश्मीर पर राजनीति कर हमेशा फायदा उठाया है। उन्होंने कहा, “कांग्रेस अगर कश्मीर जाना चाहती है, तो जाए, लेकिन कश्मीर पर राजनीति न करे, क्योंकि कांग्रेस की राजनीति अब हिन्दुस्तान से खत्म होने वाली है और खत्म हो जाएगी।”
 
शनिवार (अगस्त 24, 2019) को राहुल गाँधी समेत कई विपक्षी नेता श्रीनगर पहुँचे थे। हालाँकि, इन राजनेताओं को एयरपोर्ट से बाहर नहीं निकलने दिया गया और उन्हें एयरपोर्ट से ही वापस दिल्ली भेज दिया गया। इनमें गुलाम नबी आज़ाद, डी राजा, शरद यादव, मनोज झा, मजीद मेमन और अन्य नेता शामिल थे। 

अयोध्‍या विवाद कांग्रेस की वजह से हल नहीं हो पाया, उसने हमेशा हिंदू-मुस्लिमों को लड़ाया- इकबाल अंसारी

अयोध्‍या विवाद कांग्रेस की वजह से हल नहीं हो पाया, उसने हमेशा हिंदू-मुस्लिमों को लड़ाया- इकबाल अंसारी
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
चलो देर आए, दुरुस्त आए। इतने वर्षों उपरान्त बाबरी मस्जिद पक्षकार इक़बाल अंसारी ने अयोध्या विवाद की असलियत से पर्दा हटा ही दिया। लेकिन अब जनता अंसारी और कांग्रेस दोनों से पूछना चाहती है, कि "इस विवाद में जिन हिन्दुओं की जानें गयीं और मन्दिरों को क्षति पहुंची, उसका कौन जिम्मेदार होगा?" अंसारी की आवाज़ पहले क्यों नहीं निकली? इससे पहले तो अंसारी खुद भी खूब मालपुए खा रहे थे, लेकिन केन्द्र और प्रदेश में सख्त प्रशासक के होने से इतने वषों बाद सच्चाई सामने आयी। 
ज्ञात हो, जब प्रधानमन्त्री चन्द्रशेखर इस विवाद को समाप्त करने वाले ही थे कि कांग्रेस के समर्थन से चल रही चंद्रशेखर सरकार से राजीव गाँधी ने समर्थन वापस लेकर, सरकार गिरा दी थी। क्योकि चंद्रशेखर ने मुख्य न्यायधीश को प्रधानमन्त्री आवास पर बुलाकर कहा था कि "मुझे रामजन्मभूमि पर अब फैसला चाहिए, तारीख नहीं। "  और राजीव गाँधी से यह बर्दाश्त नहीं हुआ। जबकि हर राजनीतिक दल भलीभाँति सच्चाई जानता है, लेकिन कांग्रेस सहित समस्त गैर-भाजपाई पार्टियाँ अपने वोट बैंक को सेधने के चक्कर में अयोध्या मसले को सुलझाने की बजाए विवादित बनाते रहे। पुरुषोत्तम श्रीराम और रामसेतू को लेकर उल्टा-पुल्टे बयान देते रहे, परन्तु अब जब विवाद पैदा करने वालों की असलियत सामने आ गयी है, कांग्रेस, समाजवादी, बसपा, वामपंथी और अन्य दलों की मानसिकता भी जगजाहिर हो गयी है यानि साम्प्रदायिक न भाजपा है, न आरएसएस है और न ही कोई अन्य हिन्दू संगठन, बल्कि इनके विरोधी स्वयं साम्प्रदायिक हैं। इससे बड़ा प्रमाण और क्या हो सकता है। 
अंसारी ने उगल दी सच्चाई  
अयोध्‍या विवाद में बाबरी मस्जिद के पक्षकार इकबाल अंसारी ने कांग्रेस पर हमला बोला है अंसारी ने कहा है कि कांग्रेस की वजह से अयोध्‍या विवाद हल नहीं हो पाया उन्‍होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने हमेशा हिंदू-मुस्लिमों को लड़ाया है। उन्‍होंने कहा कि अयोध्‍या विवाद कांग्रेस की ही देन है। अयोध्‍या में प्रियंका गांधी सिर्फ राजनीति कर रही हैं। वह वहां केवल राजनीति करने गई हैं. दर्शन पूजा का कोई राजनीतिक फायदा नहीं होगा। 
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा उत्तर प्रदेश दौरे पर हैं और दौरे के तीसरे दिन वह अयोध्या पहुंची हैंअमेठी के मोहनगंज पहुंची कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी का कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने फूल मालाओं से स्वागत किया। जानकारी के मुताबिक, प्रियंका गांधी हनुमानगढ़ी के दर्शन कर वहां पूजन करेंगी, लेकिन रामलला के दर्शन नहीं करेंगी। प्र‍ियंका गांधी हनुमानगढ़ी में महंत ज्ञानदास से भी मुलाकात करेंगीं। इस मुलाकात में महंत ज्ञानदास राम मन्दिर पर चर्चा करेंगे। आपको बता दें कि प्रियंका गांधी से पहले प्रधानमंत्री पण्डित जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राहुल गांधी ने भी हनुमानगढ़ी अयोध्या के राजा हनुमान जी का दर्शन कर आशीर्वाद लिया है। 
उल्‍लेखनीय है कि सर्वोच्च न्यायालय ने बीते 8 मार्च को राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद अयोध्या विवाद मामले को बातचीत के जरिए सुलझाने के लिए तीन सदस्यीय समिति से मध्यस्थता कराए जाने का आदेश दिया। इस समिति के अध्यक्ष सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एफ.एम.आई. कलीफुल्ला हैं और उनके साथ आर्ट ऑफ लीविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर व वरिष्ठ वकील श्रीराम पंचू इसके सदस्य हैं। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित तीन सदस्यीय पैनल ने बीते 13 मार्च को बाबरी मस्जिद-रामजन्मभूमि विवाद को सुलझाने के लिए बुधवार को अपनी पहली बैठक फैजाबाद में की। अवध विश्वविद्यालय परिसर में गेस्ट हाउस की ओर जाने वाले मार्ग पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। 
प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने अपने आदेश में कहा था, "हमने विवाद की प्रकृति पर विचार किया हैइस मामले में पक्षकारों के बीच सर्वसम्मति की कमी के बावजूद, हमारा विचार है कि मध्यस्थता के जरिए विवाद को सुलझाने का एक प्रयास किया जाना चाहिए"
मुस्लिम वादकारियों ने मध्यस्थता पर सहमति जताई थी, लेकिन हिंदू वादकारियों ने इसका विरोध कियाहिंदू पक्ष ने कहा था कि उनके लिए भगवान राम का जन्मस्थान निष्ठा व मान्यता का विषय है और वे इस मध्यस्थता में विपरीत स्थिति में नहीं जा सकते। 
अवलोकन करें:-

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इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने 2010 के फैसले में विवादित स्थल को तीन समान भागों में बांटा है, जिसमें निर्मोही अखाड़ा, रामलला व सुन्नी वक्फ बोर्ड प्रत्येक को एक-एक भाग दिया है।