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PoK जाकर पॉलिटिक्स करें राहुल गॉंधी: इकबाल अंसारी, अयोध्या मामले के मुस्लिम पक्षकार


Image result for इकबाल अंसारीआर.बी.एल. निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
जब से(अगस्त 5) मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को समाप्त किया है, विश्व में लगभग सभी देश भारत सरकार के निर्णय के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं, जबकि भारत में पाकिस्तान की बोली बोलने वाली कांग्रेस और इसके समर्थक दल एवं इनके प्रायोजित #not in my name, #awardvapsi, #intolerance, #moblynching आदि तथाकथित देशभक्त गैंग  तुष्टिकरण नीति त्यागने को तैयार नहीं। जो ये विरोधी तथाकथित देशभक्त बोलते हैं, उन्ही आवाज़ों को पाकिस्तान अपनी ताकत समझ अपने चैनलों पर प्रसारित कर, अपना पक्ष मजबूत करने का असफल प्रयास कर रहा है। 
भारत में पल रहे इन तथाकथित देशभक्त पाकिस्तान की तरह जनता की नब्ज पढ़ने में असफल हो रहे हैं। जिसकी मिसाल इतने वर्षो से अयोध्या में रामजन्मभूमि मन्दिर का विरोध कर बाबरी मस्जिद के पक्ष में अदालतों के खड़े होने वाले इक़बाल अंसारी भी इन तथाकथित देशभक्तों का विरोध कर रहे हैं। जो इस बात का भी संकेत दे रहे हैं, कि अयोध्या विवाद समाप्त होने पर इस बात के ऊपर से भी पर्दा हटेगा कि अयोध्या में राममन्दिर को विवादित करने में कौन-कौन पार्टी अवरोध कर रही थीं, वैसे तो 99%पर्दा उठ ही चूका है। लेकिन इक़बाल अंसारी के विरोधी स्वरों की भारत से लेकर पाकिस्तान तक कहीं कोई चर्चा नहीं।     
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी के जम्मू-कश्मीर दौरे को लेकर अयोध्या मामले के मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी ने सवाल उठाया है। इकबाल अंसारी ने राहुल गाँधी और कांग्रेस से पूछा है कि देश मे कई जगह मसले हैं, वहाँ उनके नेता कभी क्यों नहीं जाते हैं। अंसारी ने राहुल गाँधी से दो टूक पूछा है कि पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (POK) भारत का अभिन्न अंग है, वहाँ जाकर राजनीति क्यों नहीं करते हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने ही कश्मीर में धारा 370 लागू किया था और पार्टी के नेता 70 साल तक राजनीति कर अपना लाभ लेते रहे हैं।
इकबाल अंसारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने धारा 370 हटाकर देश में एक कानून का राज स्थापित किया है। धारा 370 के खत्म होने से कश्मीर के लोगों का भला हुआ है। राहुल और कांग्रेस को देश की चिंता है, तो पाकिस्तान जाकर मसले को हल करें या फिर अन्य जगहों पर जाकर मसले को हल करें, लेकिन कश्मीर पर कांग्रेस को राजनीति नहीं करनी चाहिए।
अंसारी ने भारतीय मुसलमानों की तुलना वीर अब्दुल हमीद से करते हुए कहा कि देश के मुसलमान वतन के लिए पाकिस्तान से लड़ने को तैयार है। पाकिस्तान हमेशा भारत से मुँह की खाता रहा है। वहीं, कांग्रेस कश्मीर पर राजनीति कर रही है। देश के हिन्दू-मुसलमान सिख व ईसाई अमन चाहते हैं। कांग्रेस ने कश्मीर पर राजनीति कर हमेशा फायदा उठाया है। उन्होंने कहा, “कांग्रेस अगर कश्मीर जाना चाहती है, तो जाए, लेकिन कश्मीर पर राजनीति न करे, क्योंकि कांग्रेस की राजनीति अब हिन्दुस्तान से खत्म होने वाली है और खत्म हो जाएगी।”
 
शनिवार (अगस्त 24, 2019) को राहुल गाँधी समेत कई विपक्षी नेता श्रीनगर पहुँचे थे। हालाँकि, इन राजनेताओं को एयरपोर्ट से बाहर नहीं निकलने दिया गया और उन्हें एयरपोर्ट से ही वापस दिल्ली भेज दिया गया। इनमें गुलाम नबी आज़ाद, डी राजा, शरद यादव, मनोज झा, मजीद मेमन और अन्य नेता शामिल थे। 

इमरान खान की पूर्व पत्नी रेहम का आरोप : मोदी को खुश करने के लिए कश्मीर का सौदा

इमरान खान की पूर्व पत्नी रेहम का आरोप, बोलीं - पीएम मोदी को खुश करने के लिए कश्मीर का सौदा...
रेहम ने इमरान पर लगाया कश्मीर को लेकर सौदा करने का आरोप
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की पूर्व पत्नी रेहम खान ने उन पर कश्मीर को लेकर सौदा करने का आरोप लगाया है. रेहम ने कहा कि कश्मीर में हालिया घटनाक्रम का कारण इमरान खान में निर्णय लेने की क्षमता का अभाव और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुश करने की कोशिश है. 
उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा, "मैं कहूंगी कि कश्मीर का सौदा हो गया है. हमें शुरू से ही सिखाया गया कि कश्मीर बनेगा पाकिस्तान."
रेहम खान का यह साक्षात्कार सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है. 
रेहम के अनुसार, जिस दिन (पांच अगस्त) को कश्मीर मसले पर घोषणा हुई, उनकी टीम के एक सदस्य ने उनको फोन करके बताया, "मैडम, आपने जो कहा वह सच हो गया. मैंने उनसे कहा, दुआ कीजिए कि यह सच न हो."
उन्होंने कहा, "मैंने पिछले साल अगस्त में आपसे क्या कहा था, वह कौन-सा सौदा कश्मीर पर होगा?"
उन्होंने कहा, "मोदी ने वहीं किया जो उनको करना था. उन्होंने वही किया जो करने के लिए उनको जनादेश मिला था, अनुच्छेद 370 को हटाने के लिए."
रेहम खान ने कहा, "लेकिन आपके प्रधानमंत्री इमरान खान को जिस दिन नीति संबंधी बयान (कश्मीर मसले पर) देना था, उन्होंने कहा, मैं जानता था वह (मोदी) ऐसा करने जा रहे हैं." 
इमरान ने कहा, "मैं यह जानता था, बिमशेक में उनसे जब मैं मिला जो मेरे प्रति उनका व्यवहार रुखा था. मैं यह तभी जान गया था जब पुलवामा (Pulwama Attack) की घटना हुई."
रेहम खान ने सवालिया लहजे में कहा, "जब आपको मालूम था कि ऐसा होने जा रहा है तो आपने दोस्ती (मोदी से) का हाथ क्यों बढ़ाया और आप उनको मिस्ड कॉल क्यों दे रहे थे?"
उन्होंने कहा, "जब आपको इसके बारे में मालूम था और आपने कुछ नहीं किया तो इसका मतलब यही है कि आप कुछ करने में सक्षम नहीं हैं या आप बहुत कमजोर हैं."

पाकिस्तान की भारत से जंग लड़ने की ताकत नहीं : पाकिस्तानी स्कॉलर, लेखक और रक्षा मामलों की विशेषज्ञ आयशा सिद्दीका

Image result for Ayesha Siddiqaजम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 और 35A को निष्प्रभावी किए जाने के बाद से ही पाकिस्तान दुनियाभर में प्रोपेगेंडा फैलाने में जुटा हुआ है. साथ ही भारत को युद्ध के लिए भी ललकार रहा है. इन सबके बीच पाकिस्तान की खस्ता माली हालत की पोल उसके ही देश की एक महिला स्कॉलर ने खोल दी है. पाकिस्तानी स्कॉलर, लेखक और रक्षा मामलों की विशेषज्ञ आयशा सिद्दीका ने पाकिस्तान और उसकी सेना को आईना दिखाते हुए कश्मीर को भूल जाने की हिदायत दी है. 
रक्षा मामलों की विशेषज्ञ आयशा सिद्दीका ने कहा कि पाकिस्तान और उसकी सेना कश्मीर को लेकर भारत के साथ युद्ध छेड़ने की स्थिति में नहीं है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में आर्थिक मंदी और बढ़ती महंगाई ने पाकिस्तानी अवाम पर मुसीबतों का पहाड़ गिरा दिया है. ऐसे में भारत के साथ युद्ध की बात करना पाकिस्तान और उसकी सेना के लिए सही नहीं है. आयशा सिद्दीका ने सिने इंक से बातचीत में यह बात कही.
आयशा ने कहा कि मैंने अपने पाक अधिकृत कश्मीर के एक दोस्त से पूछा कि सेना युद्ध क्यों नहीं कर रही है. इस पर मेरे मित्र ने जवाब दिया कि पाकिस्तानी सेना हार जाएगी. अब, आम जनता भी समझती है कि यह भारत के खिलाफ युद्ध लड़ने का सही समय नहीं है. उन्होंने कहा कि यह पहली बार है कि पाकिस्तान की जनता को अहसास हो रहा है कि युद्ध मुमकिन नहीं है. इसमें दर्द है और घोर दुख है. लेकिन ऐसा नहीं है कि कुछ नहीं हो सकता. पाकिस्तानी सेना इस पर कैसे रिएक्ट करेगी यह देखना होगा. 
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केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक बार फिर पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि जब तक वह आतंकवाद नहीं ....

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार एक समय था, जब 1947 से लेकर आज तक कश्मीर का राग रो-रोकर विश्व ही नहीं अपनी ही जनता को मूर्ख ब.....

आयाशा सिद्दीका ने कहा कि बीते 72 सालों से पाकिस्तान का फोकस कश्मीर और भारत पर था. एक दिन वो उठे और पता चला कि कुछ बचा ही नहीं है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सेना में कुछ समूह हैं, जो गहरे दुख और गुस्से में हैं. उन्होंने कहा कि ये समूह सवाल उठाएंगे कि पाकिस्तान ने क्या किया.  
पाकिस्तान को अपेन प्रोपेगेंडा के चलते हर जगह से मुंह की खानी पड़ रही है. हाल ही में यूएन में पाकिस्तान की ओर से कश्मीर का मुद्दा उठाया गया था. इस पर यूएन ने साफ शब्दों में कहा था कि यह भारत का आंतरिक मामला है.

जम्‍मू-कश्‍मीर के लोगों तक अपनी बात रखने के लिए 5 भाषाओं का इस्‍तेमाल मोदी ने किया

Image result for नरेंद्र modiजम्‍मू-कश्‍मीर पुनर्गठन बिल लोकसभा में भी पास होने के बाद पीएम मोदी ने जम्‍मू-कश्‍मीर के लोगों तक अपनी बात अलहदा अंदाज में रखी. उन्‍होंने 5 भाषाओं-इंग्लिश, हिंदी, उर्दू, पंजाबी और लद्दाखी में अपनी बात रखी. दरअसल जम्‍मू-कश्‍मीर और लद्दाख क्षेत्र में ये पांच भाषाएं बोली जाती हैं. उन्‍होंने कहा, ''ऐतिहासिक क्षण. एकता और अखंडता के लिए सारा देश एकजुट. जय हिंद! हमारे संसदीय लोकतंत्र के लिए यह एक गौरव का क्षण है, जहां जम्मू-कश्मीर से जुड़े ऐतिहासिक बिल भारी समर्थन से पारित किए गए हैं. मैं जम्मू-कश्मीर की बहनों और भाइयों के साहस और जज्बे को सलाम करता हूं. वर्षों तक कुछ स्वार्थी तत्वों ने इमोशनल ब्लैकमेलिंग का काम किया, लोगों को गुमराह किया और विकास की अनदेखी की. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख अब ऐसे लोगों के चंगुल से आजाद है. एक नई सुबह, एक बेहतर कल के लिए तैयार है!

उन्‍होंने कहा, ''ये कदम जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के युवाओं को मुख्यधारा में लाएंगे, साथ ही उन्हें उनके कौशल और प्रतिभा को प्रदर्शित करने के अनगिनत अवसर प्रदान करेंगे. इससे वहां के इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार होगा, व्यापार-उद्योग को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार के नए अवसर बनेंगे और आपसी दूरियां मिटेंगी. लद्दाख के लोगों को विशेष रूप से बधाई! मुझे इस बात की बेहद खुशी है कि केंद्र शासित प्रदेश घोषित करने की उनकी दशकों पुरानी मांग आज पूरी हो गई है. इस फैसले से लद्दाख के विकास को अभूतपूर्व बल मिलेगा. लोगों के जीवन में समृद्धि और खुशहाली आएगी.''

उन्‍होंने कहा, ''इन विधेयकों का पारित होना देश के कई महान नेताओं को सच्ची श्रद्धांजलि है: सरदार पटेल, जो देश की एकता के लिए समर्पित थे; बाबासाहेब अम्बेडकर, जिनके विचार सर्वविदित हैं; डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, जिन्होंने भारत की एकता और अखंडता के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया. संसद में जिस प्रकार विभिन्न पार्टियों ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर और वैचारिक मतभेदों को भुलाकर सार्थक चर्चा की, उसने हमारे संसदीय लोकतंत्र की गरिमा को बढ़ाने का काम किया है. इसके लिए मैं सभी सांसदों, राजनीतिक दलों और उनके नेताओं को बधाई देता हूं.

उन्‍होंने कहा, ''जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों को गर्व होगा कि सांसदों ने वैचारिक मतभेदों को भुलाकर उनके भविष्य को लेकर चर्चा की. साथ ही साथ वहां शांति, प्रगति और समृद्धि की राह सुनिश्चित की. RS में 125:61 और LS में 370:70 का विशाल बहुमत इस फैसले के प्रति भारी समर्थन को दिखाता है.

जम्मू-कश्मीर से पूरी तरह से नहीं हटा है अनुच्छेद 370, खंड-1 अब भी है कायम : संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप

जम्मू-कश्मीर से पूरी तरह से नहीं हटा है अनुच्छेद 370, खंड-1 अब भी है कायम : संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
2019 का सावन अमर हो गया। सावन के पहले सोमवार को चंद्रयान, दूसरे सोमवार को तीन तलाक़ बिल पास और आज तीसरे सोमवार को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को समाप्त कर डॉ श्यामा प्रसाद मुख़र्जी की आत्मा जरूर खुश होगी, उनका बलिदान रंग ले आया।
लेकिन संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप के अनुसार अनुच्छेद 370 पूर्णरूप से समाप्त नहीं हुआ है। 
जम्मू-कश्मीर को लेकर राज्यसभा में गृहमंत्री अमित शाह ने जो प्रस्ताव अनुच्छेद 370 को लेकर पेश किया है. उसको लेकर जो खबरें हैं पूरी तरह से सही नहीं हैं. संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप ने कहा है कि प्रस्ताव में अनुच्छेद 370 को पूरी तरह से नहीं हटाया गया है. उनका कहना है कि अनुच्छेद 370 तीन भागों में बंटा हुआ है. जम्मू-कश्मीर के बारे में अस्थाई  प्रावधान है जिसको या तो बदला जा सकता है या फिर हटाया जा सकता है. अमित शाह के बयान के मुताबिक 370(1) बाकायदा कायम है सिर्फ 370 (2) और (3) को हटाया गया है. 370(1) में प्रावधान के मुताबिक जम्मू और कश्मीर की सरकार से सलाह करके राष्ट्रपति आदेश द्वारा संविधान के विभिन्न अनुच्छेदों को जम्मू और कश्मीर पर लागू कर सकते हैं.  370(3) में प्रावधान था कि 370 को बदलने के लिए जम्मू और कश्मीर संविधान सभा की सहमति चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि 35A के बारे में यह तय नहीं है कि वह खुद खत्म हो जाएगा या फिर उसके लिए संशोधन करना पड़ेगा.
गौरतलब है कि सरकार ने सोमवार(अगस्त 5) को राज्यसभा में एक ऐतिहासिक संकल्प पेश किया जिसमें जम्मू कश्मीर राज्य से संविधान का अनुच्छेद 370 हटाने और राज्य का विभाजन जम्मू कश्मीर एवं लद्दाख के दो केंद्र शासित क्षेत्रों के रूप में करने का प्रस्ताव किया गया है.  जम्मू कश्मीर केंद्र शासित क्षेत्र में अपनी विधायिका होगी जबकि लद्दाख बिना विधायी वाली केंद्रशासित क्षेत्र होगा.
जम्मू-कश्मीर: सरकार के बड़े फ़ैसले
  • जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का संकल्प पत्र पेश
  • जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा ख़त्म किया गया
  • दो हिस्सों में बंटेगा जम्मू-कश्मीर राज्य
  • लद्दाख को जम्मू-कश्मीर से अलग किया गया
  • जम्मू-कश्मीर भी केन्द्रशासित प्रदेश बनेगा
  • जम्मू-कश्मीर विधानसभा के साथ केन्द्रशासित प्रदेश
  • लद्दाख बिना विधानसभा के अलग केन्द्रशासित प्रदेश
  • जम्मू-कश्मीर पर संसद में सरकार ने बिल पेश किया
  • जम्मू-कश्मीर की भौगोलिक स्थिति बदलने के लिए बिल पेश 
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केंद्र सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बड़ा बयान द....

धारा-370 और 35 A के हटने से बेचैनी क्यों?

कश्मीर में सुरक्षा इंतजामों को लेकर न्यूज चैनलों पर बहस क्यों?
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
सुरक्षा की दृष्टि से सरकार ने कश्मीर में जो इंतजाम किए हैं उन पर न्यूज चैनलों पर लगातार बहस हो रही है।

इन चर्चाओं में आतंकियों के समर्थक भी भाग ले रहे हैं जो हमारे सुरक्षा बलों की तैनाती पर एतराज कर रहे हैं। ऐसी चर्चाओं से आतंकियों के समर्थकों को सरकार के खिलाफ जहर उगलने का अवसर मिल रहा है। सब जानते हैं कि कश्मीर में पाकिस्तान की दखलंदाजी है। हाल ही में जो घातक हथियार बरामद किए है उनसे पता चलता है कि आतंकी बड़ी कार्यवाही करने वाले हैं। ऐसे में यदि सुरक्षा इंतजाम किए जाते हैं तो एतराज क्यों? क्या विदेशी आतंकियों से कश्मीर को बचाने का हक सरकार और सुरक्षा बलों को नहीं है? यदि इन सुरक्षा इंतजाम पर भी चैनलों पर बहस होगी तो किसी सरकार का काम करना मुश्किल हो जाएगा। वैसे भी आतंक से ग्रस्त कश्मीर के सुरक्षा इंतजाम गुप्त ही रहने चाहिए। सरकार कितने सुरक्षा बल तैनात कर रही है इससे कोई सरोकार नहीं होना चाहिए। न्यूज चैनल वालों को कम से कम कश्मीर से लाइव प्रसारण नहीं करना चाहिए।
महबूबा की घबराहट:
कश्मीर की पूर्व सीएम और पीडीपी की नेता महबूबा मुफ्ती इन दिनों कुछ ज्यादा ही घबराई हुई हैं। दो अगस्त को भी अलगाववादी नेता सज्जाद लोन को साथ लेकर राज्यपाल सत्यपाल मलिक से मुलाकात की। यह वो ही महबूबा है जिन्होंने कहा था कि अनुच्छेद 370 और 35-ए के साथ छेड़छाड़ की गई तो कश्मीर में तिरंग को कांधा देने वाला कोई नहीं मिलेगा। सवाल उठता है कि महबूबा की वो दबंगता कहां गई? अब अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती से ही महबूबा इतनी घबराह गई हैं? असल में अब महबूबा जैसे नेताओं की दुकान कश्मीर से उखड़ चुकी है। महबूबा हों या फारुख अब्दुल्ला। ऐसे नेताओं की पोल कश्मीर के लोगों के सामने खुल चुकी है। रोज रोज के आतंक से कश्मीर के आम लोग भी परेशान हो गए हैं। कश्मीर के लोग अब अमन और सुकून चाहते हैं। विदेशी पैसा बंद हो जाने से पत्थरबाज भी खामोश है।

अब्दुल्ला परिवार और महबूबा मुफ़्ती याद करों हिन्दुओं के पलायन और उनकी माँ-बहनों के होते बलात्कार का दर्द 
कश्मीर में ऐसा डर का माहौल मैने पहले कभी नही देखा ..कहना है पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती का..
30-31 साल की उम्र रही होगी महबूबा मुफ्ती की
जब 1989/90 में घाटी की सभी मस्जिदों से मूल निवासी हिन्दुओं को कश्मीर छोड़कर जाने के ऐलान हो रहे थे।
किसके कहने पर मस्जिदों से ऐलान हो रहे थे? कौन करवा रहा था, मस्जिदों से ऐलान? किसके इशारे पर मस्जिदों का दुरूपयोग हो रहा था? 
जब रातोंरात हिन्दुओं के घरों पर क्रास के निशान लगा दिए गये थे । 
जब हिन्दुओं को अपनी जवान बेटियाँ वहीं छोड़कर जाने के फरमान सुनाये गये थे।   
मैडम मेहबूबा जी ... 30 साल की उम्र इतनी कम नही होती की आज 60 की उम्र में आपको याद भी नही कि किस डर के माहौल में हिन्दुओं ने अपना घर छोड़ा होगा या अपनो का कत्लोग़ारत होते या अपनी आँखों के सामने अपनी माँ और बहनों का बलात्कार होते देखा होगा ! ! ये खौफ का नंगा नाच आपकी उस कश्मीरियत ने ही किया था जिसे बचाने की दुहाई देते हुए आप हाथ जोड़ रहीं हैं।  
हो सकता है उस समय आप अपनी बहन का फर्जी अपहरण करवाकर.. भारत के केन्द्रीय गृहमंत्री रहे अपने पिता मुफ़्ती मोहम्मद सईद के साथ मिलकर अपने खास आतंकवादियों को छुड़वाने के ड्रामे में व्यस्त हो इसलिये आपको घाटी के हिन्दुओं का खौफ नही दिखा होगा। कंधार विमान अपहरण में तो निर्दोषों को बचाने सभी पार्टियों के समर्थन उपरांत आतंकवादियों को छोड़ा गया था, जिसका आज तक समस्त भाजपा विरोधी रोना-रोते हैं, लेकिन डॉ रुबैया मुफ़्ती के फर्जी अपहरण के कारण छोड़े गए आतंकवादियों पर सब चुप्पी साधे हुए हैं। 
आज इन्हीं पीड़ित परिवारों को अब्दुल्ला खानदान और महबूबा मुफ्ती के चेहरे पर पसरा खौफ उतना ही आकर्षक लग रहा है जितनी आकर्षक मोदीजी की कुटिल मुस्कान लगती है।  
2 अगस्त को जम्मू कश्मीर सरकार ने अमरनाथ यात्रियों और कश्मीर घूमने आए पर्यटकों को कश्मीर छोडऩे का फरमान जारी किया तो तनाव पूर्ण हालात हो गए लेकिन तीन अगस्त को घाटी और जम्मू में हालात सामान्य दिखे। राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने एक बार फिर दोहराया है कि सुरक्षा की दृष्टि से अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। उन्होंने अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की। राज्यपाल ने साफ कहा कि कश्मीर में कोई बड़ी घटना नहीं होने जा रही। हालांकि तीन अगस्त को पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने भी राज्यपाल से मुलाकात की। उमर भी जानना चाहते थे, कि आखिर कश्मीर में क्या हो रहा है? राजपाल ने उमर से भी कहा कि किसी को भी बघराने की जरुरत नहीं है। सारे कदम सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाए गए हैं।
कश्मीर का जिक्र आए और धारा 370 और 35 ए की बात ना हो ऐसा हो नहीं सकता, इसको लेकर अक्सर ही विरोध के सुर उठते रहे हैं, दरअसल भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष स्वायत्तता दी गई है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 370 एक ऐसा लेख है जो जम्मू और कश्मीर राज्य को स्वायत्तता का दर्जा देता है।
वहीं 35 A की बात करें तो भारतीय संविधान का 35 ए अनुच्छेद एक अनुच्छेद है जो जम्मू और कश्मीर राज्य विधानमण्डल को 'स्थायी निवासी' परिभाषित करने तथा उन नागरिकों को विशेषाधिकार प्रदान करने का अधिकार देता है। यह भारतीय संविधान में जम्मू और कश्मीर सरकार की सहमति से राष्ट्रपति के आदेश पर जोड़ा गया, जो कि भारत के राष्ट्रपति द्वारा 14 मई 1954 को जारी किया गया था। यह अनुच्छेद 370 के खण्ड (1) में उल्लेखित है।

Article 370 अक्सर ही जम्मू-कश्मीर से धारा 370 को हटाये जाने की मांग की जाती रही है जबकि कश्मीर के नेता और स्थानीय निवासी ऐसी किसी भी संभावना मात्र का पुरजोर विरोध करते आ रहे हैं।
धारा 370 के प्रावधानों पर एक नजर-
धारा 370 के प्रावधानों के अनुसार, संसद को जम्मू-कश्मीर के बारे में रक्षा, विदेश मामले और संचार के विषय में कानून बनाने का अधिकार है लेकिन किसी अन्य विषय से सम्बन्धित क़ानून को लागू करवाने के लिये केन्द्र को राज्य सरकार का अनुमोदन चाहिये।

इसी विशेष दर्ज़े के कारण जम्मू-कश्मीर राज्य पर संविधान की धारा 356 लागू नहीं होती।
इस कारण राष्ट्रपति के पास राज्य के संविधान को बर्ख़ास्त करने का अधिकार नहीं है।
1976 का शहरी भूमि क़ानून जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होता।
इसके तहत भारतीय नागरिक को विशेष अधिकार प्राप्त राज्यों के अलावा भारत में कहीं भी भूमि ख़रीदने का अधिकार है। यानी भारत के दूसरे राज्यों के लोग जम्मू-कश्मीर में ज़मीन नहीं ख़रीद सकते।
भारतीय संविधान की धारा 360 जिसके अन्तर्गत देश में वित्तीय आपातकाल लगाने का प्रावधान है, वह भी जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होती।
धारा 370 के तहत कुछ विशेष अधिकार कश्मीर की जनता को मिले हुए हैं-
कश्मीर में पंचायत को अधिकार प्राप्त नहीं है।
कश्मीर में अल्पसंख्यकों [हिन्दू-सिख] को 16% आरक्षण नहीं मिलता।
धारा 370 की वजह से कश्मीर में बाहर के लोग जमीन नहीं खरीद सकते हैं।
धारा 370 की वजह से ही कश्मीर में रहने वाले पाकिस्तानियों को भी भारतीय नागरिकता मिल जाती है।
धारा 370 की वजह से कश्मीर में आरटीआई (RTI) और सीएजी (CAG) जैसे कानून लागू नहीं होते है।
जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता होती है।
जम्मू-कश्मीर का राष्ट्रध्वज अलग होता है।
जम्मू - कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल 6 वर्षों का होता है जबकि भारत के अन्य राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है।
जम्मू-कश्मीर के अन्दर भारत के राष्ट्रध्वज या राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान अपराध नहीं होता है।
भारत के उच्चतम न्यायालय के आदेश जम्मू-कश्मीर के अन्दर मान्य नहीं होते हैं।
भारत की संसद को जम्मू-कश्मीर के सम्बन्ध में अत्यन्त सीमित क्षेत्र में कानून बना सकती है।
जम्मू-कश्मीर की कोई महिला यदि भारत के किसी अन्य राज्य के व्यक्ति से विवाह कर ले तो उस महिला की नागरिकता समाप्त हो जायेगी। इसके विपरीत यदि वह पकिस्तान के किसी व्यक्ति से विवाह कर ले तो उसे भी जम्मू-कश्मीर की नागरिकता मिल जायेगी।

अनुच्छेद 35A  के क्या हैं मायने
35A से जम्मू-कश्मीर राज्य के लिए स्थायी नागरिकता के नियम और नागरिकों के अधिकार तय होते हैं
14 मई 1954 के पहले जो कश्मीर में बस गए थे वही स्थायी निवासी माना जाएगा
वह व्यक्ति जो जम्मू और कश्मीर का स्थायी निवासी नहीं है, राज्य में सम्पत्ति नहीं खरीद सकता।
वह व्यक्ति जो जम्मू और कश्मीर का स्थायी निवासी नहीं है, जम्मू और कश्मीर सरकार की नौकरियों के लिये आवेदन नहीं कर सकता।

वह व्यक्ति जो जम्मू और कश्मीर का स्थायी निवासी नहीं है, जम्मू और कश्मीर सरकार के विश्विद्यालयों में दाखिला नहीं ले सकता, न ही राज्य सरकार द्वारा कोई वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकता है।
हालांकि धारा 370 में समय के साथ-साथ कई बदलाव भी किए गए हैं। 1965 तक वहां राज्यपाल और मुख्यमंत्री नहीं होता था। उनकी जगह सदर-ए-रियासत और प्रधानमंत्री हुआ करता था, जिसे बाद में बदला गया।
इसके अलावा पहले जम्मू-कश्मीर में भारतीय नागरिक के जाने पर उसे अपने साथ पहचान-पत्र रखना जरूरी होता था, लेकिन बाद में विरोध के बाद इस प्रावधान को हटा दिया गया था।
श्यामा प्रसाद मुखर्जी इस संवैधानिक प्रावधान के पूरी तरह ख़िलाफ़ थे। उन्होंने कहा था कि इससे भारत छोटे-छोटे टुकड़ों में बंट रहा है। हाल ही में घाटी में इस आशंका की खबरें गरमा रही हैं कि शायद सरकार राज्य से इसे हटा सकती है और इसको लेकर पीडीपी नेता और राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फ़ारूक़ और उमर अब्दुल्ला सभी एकजुट होकर इस हालात पर चिंता जताते दिख रहे हैं।
जम्मू कश्मीर को लेकर सरगर्मियां तेज हैं और सरकार ने राज्य में जारी अमरनाथ यात्रा को लेकर अगस्त 2 को अमरनाथ यात्रियों को यहां से जाने संबधी एक एडवायजरी जारी की थी, बताया जा रहा है कि यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए ये कदम उठाया गया है।
इस मसले पर राज्य की सभी राजनैतिक पार्टियों में खासी हलचल है और सबको लग रहा है कि घाटी में कुछ बड़ा होने वाला है, इसके मद्देनजर पीडीपी और नेशनल कांफ्रेस के नेताओं ने गवर्नर से मुलाकात की।
वहीं पीडीपी की मुखिया महबूबा मुफ्ती ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों के भेजे जाने से लोगों को लगता है कि केंद्र सरकार राज्य को मिले विशेषाथिकारों पर हमला करने जा रही है।
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भूली बिसरी यादें : इतिहास के धूमिल पृष्ठों से भारतीय जन संघ के संस्थापक सदस्यों में से एक, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी...

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार सेवा निर्वित उपरान्त एक हिन्दी पाक्षिक को सम्पादित करते सितम्बर 2014 में आमुख लेख शीर्.....

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आर.बी.एल.निगम,वरिष्ठ पत्रकार 80 के दशक में स्वतन्त्र पत्रकारिता करते दिल्ली के मुस्लिम बहुत क्षेत्र के एक जाने-माने ...

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार एक तरफ मोदी सरकार कश्मीर से आतंकवाद का जनाज़ा निकालने के लिए कमर कस, आतंकवादियों को चुन...


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पीडीपी प्रमुख और जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने आर्टिकल 35 A को लेकर एक ऐसा बयान दिया है जिससे व..... 
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लोकसभा चुनाव 2019 के संकल्प पत्र (घोषणा पत्र) में भारतीय जनता पार्टी ने कश्मीर में धारा 370 हटाने की बात कही है। इस पर जम्...

महबूबा मुफ्ती ने कहा कि वैसे तो इस्लाम में हाथ जोड़ने की मनाही है। लेकिन वो पीएम मोदी से हाथ जोड़कर अपील करती हैं कि जम्मू-कश्मीर को जो संवैधानिक आजादी मिली है उसमें वो किसी तरह की छेड़छाड़ न करें। उन्होंने कहा कि मोदी जी आप बहुत बड़ा जनमत लेकर आए हैं। आप से अपील है कि आप हमारी खास पहचान को बरकरार रखें। जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा एडवाइजरी जारी किये जाने के बाद अफरातफरी का माहौल है। 
सैलानियों को कश्मीर से निकालने के लिए अतिरिक्त उड़ान​