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मर्द सेक्स के समय बिस्मि (Bismi) बोलें, वरना उनके लिंग में शैतान प्रवेश कर जाएगा: केरल का मौलाना

सेक्स के समय बिस्मि बोलें की सलाह वाले मौलाना (फाइल फोटो)
केरल के एक मौलाना का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में एक इस्लामी उपदेशक मलयाली भाषा में कह रहा है, ”जो लोग सेक्स के दौरान बिस्मि (Bismi) का जाप नहीं करते हैं, उनके शरीर में लिंग के माध्यम से शैतान प्रवेश कर जाता है।” केरल के इस मौलवी का सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो साल 2018 का है।

तीन साल पुराने वीडियो में मौलाना ने पुरुषों को सेक्स करते समय ‘बिस्मि’ का जाप करना जरूरी बताया है। मौलवी कह रहा है कि अगर पुरुष सेक्स के समय बिस्मि नहीं पढ़ते हैं, तो उनके लिंग में शैतान प्रवेश कर जाता है, जो महिला के शरीर में जाते ही उनके लिए बहुत बड़ा खतरा बन सकता है।

मौलवी यही नहीं रुकता है, वह आगे कहता है कि जो लोग सेक्स करते समय बिस्मि का जाप करना भूल जाते हैं, या फिर इसे नहीं करते हैं, वे शैतान को अपने लिंग से अपने पाटर्नर के शरीर में प्रवेश कराने का खतरा तो उठाते ही हैं। इसके अलावा उनके इस संबंध से पैदा हुई संतान भी शैतान के समान होती है।

केरल में यह कोई पहला मामला नहीं हैं, जब वहाँ से इस तरह का विवादित इस्लामिक भाषण का वीडियो सामने आया हो। इससे पहले केरल में मौलाना ईपी अबूबकर कासमी ने मलयाली भाषा में मुस्लिम होने के फायदा गिनाए थे। उन्होंने बताया था कि मुस्लिमों को जन्नत में क्या-क्या मिलता है? इस दौरान उन्होंने कहा था:

”जन्नत में बड़े-बड़े स्तनों वाली महिलाएँ मिलती हैं। जन्नत में शराब की नदियाँ बहती हैं और बड़े-बड़े बँगलों के साथ-साथ बाग-बगीचे की सुविधा भी मिलती है। अल्लाह की जन्नत में जो महिलाएँ होती हैं, वो न तो पेशाब करती हैं और न ही उन्हें शौच करने की कभी ज़रूरत पड़ती है और जन्नत जाने वाले मुस्लिमों को वहाँ की हूरों की गोद में बैठने का सौभाग्य प्राप्त होता है।”

आँकड़ों के हिसाब से केरल भारत का सबसे शिक्षित राज्य है। यहाँ के पुरुष और महिलाएँ सबसे शिक्षित हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार, राज्य में लगभग 96.11 प्रतिशत पुरुष और 92.07 प्रतिशत महिलाएँ साक्षर थीं। लेकिन इस आँकड़े के अलावा भारत के सबसे साक्षर राज्य ने दुनिया भर में अपनी पहचान कई इस्लामिक मौलवियों के कारण भी बनाई है, जो अपने बेतुके बयानों और कट्टरपंथी विचारधारा के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने इन मौलवियों को संरक्षण प्रदान कर, उन्हें फॉलो करके साक्षरता दर को झूठा साबित कर दिया है, जिसको लेकर राज्य और वहाँ के स्थानीय निवासी अक्सर डींगे मारा करते हैं।

केरल में इन इस्लामी उपदेशकों का उदय हाल में नहीं हुआ है, बल्कि इनकी तरह अन्य लोग भी दशकों से इस राज्य में सक्रिय रहे होंगे, लेकिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने इनका पर्दाफाश करने में अहम भूमिका निभाई है। केरल इस तरह के मौलवियों को अपने राज्य में पनाह देता है और उनके खिलाफ कोई कार्रवाई भी नहीं करता है। इससे यह स्पष्ट है कि इसमें कहीं न कहीं उनकी भी रजामंदी शामिल है। सोशल मीडिया के जरिए इन मौलाना का सच सामने आने के बाद यह साबित हो गया है कि देश का सबसे साक्षर राज्य किस दिशा की ओर अग्रसर हो रहा है।

कोरोना : बिहार, झारखंड के बाद अब तमिलनाडु में 38 विदेशी मौलवियों की मौजूदगी से हड़कंप, टेस्ट में दो को पाया गया पॉजिटिव

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
जब मिडिल स्कूल में पढ़ते थे, तब हिन्दी, संस्कृत और अंग्रेजी में एक अध्याय था, क्रमशः "ईश्वर जो करता है अच्छा करता है", "ईश्वरम येत करोति शोभनम एव करोति", "It's all for the best" नाम से सबने अपने-अपने दिमाग से कहानियां लिखी थी। वास्तव में उस समय बहुत ही दार्शनिक और दूरदर्शी शिक्षा दी जाती थी। 
कहने का अभिप्राय यह है कि नागरिकता संशोधक कानून के विरोध में हो रहे प्रदर्शन और धरनों में अलगाववादी, हिन्दुत्व, मोदी, योगी और अमित शाह विरोधी नारे लगने के साथ-साथ कहा जाता था, "कागज नहीं दिखाएंगे" उसकी असलियत कोरोना संक्रामक बीमारी ने उजागर कर दी। पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान से आए घुसपैठियों के अलावा जमात के नाम पर देश का माहौल ख़राब करने आए इन घुसपैठियों को बचाने के लिए कहा जाता था कि "कागज नहीं दिखाएंगे"? यदि ये लोग इस्लाम प्रचार के लिए आये थे, फिर मस्जिदों में क्यों छुपकर बैठे थे? केंद्र और राज्य सरकारों को मस्जिदों में छुपाकर रखने वालों से पूछताछ करनी चाहिए। इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।  
"क्या कोरोना संक्रामक बीमारी भारत के लिए वरदान बनकर आयी है?"
यह संक्रामक बीमारी देश में  नागरिकता संशोधक कानून विरोधियों और विरोधियों के समर्थक को बेनकाब करने में सार्थक सिद्ध हो रही है। जिसे देख यह सोंचने को मजबूर होना पड़ता है कि "क्या कोरोना संक्रामक बीमारी भारत के लिए वरदान बनकर आयी है?" इसीलिए  कहते हैं "सकारात्मक काम करो, सकारात्मक सोंचों, हर काम सकारात्मक होगा।" कहावतें गिल्ली डंडा खेलकर नहीं बनी, जीवन के अनुभव के आधार पर बनी हैं। 
भारत में लॉक डाउन केवल जनता को कोरोना संक्रामक बीमारी से बचाने के लिए जरूर किया है, साथ में यह भी सिद्ध कर रहा है कि सरकार एक साथ कितने मोर्चों पर लड़ रही है। यदि इस बीमारी का डर नहीं होता, शायद मस्जिदों में छुपे बैठे विदेशियों का पता भी नहीं चलता।  
क्या "कागज नहीं दिखाएंगे" से देश में अराजकता फ़ैलाने वाले चीन से आए मौलवियों से पूछेंगे कि "चीन में मुसलमान ही नहीं इस्लाम की इतनी दुर्गति होने पर क्यों मुंह में दही जमाए बैठे हो?" क्या वहां इस तरह की हरकत करने का साहस है। चीन में लगी पाबंदियों पर यदा-कदा इस ब्लॉग पर लिखता रहा हूँ। 
लिखते-लिखते फेसबुक पर एक मित्र द्वारा भेजे Capital TV की इस निम्न वीडियो में संपादक डॉ अनिल कुमार शंकाओं की पुष्टि कर रहे हैं। 
   
कोरोना वायरस के आतंक की वजह से पूरे देश में लॉकडाउन घोषित किया गया है। कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए हर तरह के उपाय किए जा रहे हैं। विदेशों खासकर चीन से आने वाले लोगों की गहन जांच की जा रही है। इसी दौरान बिहार, झारखंड और तमिलनाडु के मस्जिदों में छिपे विदेशी मौलवियों की सूचना से हड़कंप मच गया है। इनमें से दो को कोरोना टेस्ट में पॉजिटिव पाया गया है। कोरोना वायरस से सर्वाधिक प्रभावित चीन के मौलवियों की मौजूदगी से लोगों के मन में उत्सुकता के साथ ही भय व्याप्त हो गया है। पुलिस ने सभी विदेशी मौलवियों को हिरासत में लेकर कोरोना वायरस की जांच के लिए अस्पताल भेज दिया है।
झारखंड में रांची पुलिस ने तमाड़ स्थित राड़गांव मस्जिद में छिपे 11 मौलवियों को हिरासत में लिया, जिसमें 3 मौलवी चीन से हैं, जबकि 4-4 किर्गिस्तान और कजाकिस्तान से हैं। जांच के दौरान प्राप्त पहचान पत्रों से इनकी शिनाख्त चीन के मा मेंनाई, ये देहाइ, मा मेरली, किर्गिस्तान के नूर करीम, नारलीन, नूरगाजिन, अब्दुल्ला और कजाकिस्तान के मिस्नलो, साकिर, इलियास आदि के रूप में हुई है। डीएसपी अजय कुमार ने बताया कि सभी के कागजात की जांच की जा रही है। तमाड़ चिकित्सा प्रभारी आशुतोष त्रिपाठी ने बताया कि सभी 11 विदेशियों की प्रारंभिक जांच कर ली गई है। किसी के कोरोना संक्रमित रोग के लक्षण नही मिले हैं। फिर भी सभी मौलवियों को क्वारनटाइन के लिए मुसाबनी स्थिति कांस्टेबल ट्रेनिंग स्कूल भेज दिया गया।
इन मौलवियों ने भी खुद को अब तक पूछताछ में मजहब प्रचारक बताया है। इनका कहना है कि इन्होंने 1 महीने से भारत के विभिन्न मस्जिदों में पनाह ली और 19 मार्च को रांची से बस द्वारा जमशेदपुर जाने के दौरान तमाड़ में राड़गांव के पास स्थित एक मस्जिद में रुके। यानि ये सभी रांची के इस मस्जिद में पिछले 5 दिन से थे।
इससे पहले बिहार के पटना में 12 विदेशियों को एक मस्जिद से हिरासत में लिया गया था। जानकारी के मुताबिक, ये मामला राजधानी के भीड़भाड़ वाले इलाके कुर्जी का है। यहां गेट नं 74 के पास स्थित एक मस्जिद में कुछ विदेशी लोगों को छिपाकर रखा गया था। छिपे हुए विदेशी लोगों की संख्या 12 बताई जा रही है। जब आसपास के मोहल्ले वालों को इसका पता चला तो लोगों ने विरोध किया और हंगामा शुरू कर दिया। हंगामे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस आई जिसके बाद पुलिस ने 12 विदेशियों को अपनी कस्टडी में ले लिया।
इनसे पूछताछ में पता चला कि सभी तजाकिस्तान के निवासी हैं और पटना में धार्मिक प्रचार प्रसार के लिए आए थे। दीघा थानेदार मनोज कुमार सिंह ने बताया कि एहतियातन जाँच के लिए सभी को एम्स भेजा गया। ये सभी चार महीने पूर्व धार्मिक प्रचार के लिए भारत आए थे और सोमवार की सुबह नमाज के लिए दीघा मस्जिद गए थे, पुलिस ने सूचना पर जाँच के लिए एम्स भिजवाया।
उधर तमिलनाडु के अंबुर, इरोड और सलेम से 38 इस्लामिक प्रचारकों को हिरासत में लिया गया है। जिनमें 23 इंडोनेशिया, 8 म्यांमार और 7 थाईलैंड से हैं। जिनमें से दो को कोरोना वायरस की जांच में पॉजिटिव पाया गया है।


इरोड जिले के एक अस्पताल में दो मस्लिम प्रचारकों को कोरोना टेस्ट में पॉजिटिव पाया गया। इसके बाद प्रशासन ने पेरुदुरई में नौ सड़कों को सील कर दिया, जिनका इस्तेमाल मुस्लिम धर्मप्रचारकों ने किया था। सात प्रचारक 12 मार्च को थाईलैंड से इरोड जिले पहुंचे थे। 15 मार्च तक वे पेरुदुरई के तीन मस्जिदों में रुके थे और उनमें से एक की बाद में कोयंबटूर सरकारी अस्पताल में मौत हो गई थी।
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तमाड़ मस्जिद से पकड़े गए विदेशी मौलवी (साभार: दैनिक भास्कर) झारखंड की राजधानी राँची के एक ...
पड़ोसी सलेम जिले में 11 इंडोनेशियाई नागरिकों को मोहन कुमारमंगलम मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में 5 अन्य स्थानीय मुसलमानों के साथ क्वेरेंटाइन किया गया था । जिलाधिकारी ने बताया कि इंडोनेशिया के 11 नागरिकों की यह टीम शहर का दौरा कर धार्मिक सभाओं में हिस्सा ले रही थी। इस टीम ने आसपास के इलाकों और संन्यासी कुंडू स्थित एक मस्जिद का भी दौरा किया। जिलाधिकारी के मुताबिक मुस्लमि धर्मप्रचारकों ने शेवपेट, पोनममापेट और एरूमालियाम गांवों के तीन मस्जिदों में धार्मिक बैठकों में भाग लिया था।

कोरोना की जाँच के बिना पटना की मस्जिद में छिपा रखे थे 12 विदेशी मुसलमान

पटना मस्जिद विदेशी मुसलमानबिहार की राजधानी पटना में स्थित एक मस्जिद में विदेशियों को छिपाने का मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, ये मामला राजधानी के भीड़भाड़ वाले इलाके कुर्जी का है। यहाँ गेट नं 74 के पास स्थित एक मस्जिद में कुछ विदेशी लोगों को छिपाकर रखा गया था। छिपे हुए विदेशी लोगों की संख्या 12 बताई जा रही है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ये सभी सोमवार (16 मार्च) को पटना पहुँचे थे। मगर, पहले इस बारे में किसी को सूचना नहीं थी। लेकिन, खुलासा होते ही आसपास के मोहल्ले में ये खबर फैल गई और लोगों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया। हंगामे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस भी फौरन इलाके में पहुँची और 12 विदेशियों को अपनी कस्टडी में ले लिया। पुलिस फिलहाल पूरे इलाके में छापेमारी कर रही है। अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों की मानें तो कुछ इन्हें तुर्की का बता रहे हैं, कुछ तुर्कमेनिस्तान का। इनकी कद-काठी देखते हुए चाइनीज उइगर होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। फिलहाल पुलिस इनसे पूछताछ कर रही है।

न्यूज 18 की खबर के अनुसार, स्थानीय लोगों का कहना था कि सरकार को इन विदेशियों के बारे में जानकारी होनी चाहिए थी लेकिन कुछ लोगों की मदद से इन लोगों को धार्मिक स्थल की आड़ लेकर छिपाया गया। साथ ही इन लोगों ने अपनी मेडिकल जाँच भी नहीं करवाई। इन पर आरोप है कि धार्मिक स्थल में छिपकर ये लोग बिहार में घूम-घूमकर धर्म विशेष का प्रचार करते हैं।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार दिल्ली में कोरोना वायरस के फैलते प्रभाव को देखकर हर कोई हैरान है। धीरे-धीरे राष्ट्री.....

खबर के अनुसार, पुलिस इस मामले में जाँच कर रही है और मालूम हुआ है कि ये सभी जनवरी में यहाँ आए थे और इनके पास से मिला वीजा, पासपोर्ट भी सही है। जिस कारण इन्हें केवल मेडिकल जाँच के लिए भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि मेडिकल जाँच के बाद इन्हें छोड़ दिया जाएगा।

इंडोनेशिया से आया इस्लामी प्रचारक दल, जहाँ घूमा वहाँ कोरोना के 13 मामले

कोरोना, तेलंगाना
                                                                                                                                                   प्रतीकात्मक 
तेलंगाना में बुधवार(मार्च 18) देर शाम को कोरोना वायरस के सात नए मामले सामने आए। इसके बाद राज्य सरकार ने घोषणा करते हुए बताया कि तेलंगाना राज्य में कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है। वहीं सार्वजनिक स्वास्थ्य निदेशालय ने जानकारी दी कि कोरोना वायरस के सभी 7 नए मामले इंडोनेशिया से आए हैं, जोकि सभी इस्लामिक प्रचारक हैं।
ये सभी सात नए मामले एक सदस्य की रिपोर्ट पॉजीटिव मिलने के एक दिन बाद आए। यह सदस्य एक टीम का हिस्सा था। बताया जा रहा है कि 10 इस्लामिक प्रचारकों का समूह तीन दिन की करीमनगर की यात्रा पर था और ये सात लोग भी इसी ग्रुप से ही हैं। सभी का मंगलवार को परीक्षण किया गया। वहीं इस ग्रुप में तीन भारतीय भी थे, जो कि हैदराबाद के गाँधी अस्पताल में रहते थे।

इंडोनेशियाई से आए ग्रुप के बारे में बताया जा रहा है कि ये ग्रुप 22 फरवरी को नई दिल्ली आया था और इनमें से 10 भारतीय तीन मार्च को करीमनगर पहुँचे। इस ग्रुप ने आंध्र प्रदेश संपर्क क्रांति के कोच नंबर S9 में यात्रा की और रामागुंडम में उतर गया। इसके बाद यह ग्रुप मुकरमपुरा और हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी क्षेत्रों की दो मस्जिदों में भी रहा। वहीं अपने धार्मिक अभियान के दौरान ये कस्बे के कुछ इलाकों में घूमे और कई लोगों से मिलने भी गए। इसी बीच विशेष शाखा पुलिस, जो कि शहर में विदेशी नागरिकों को ढूँढती थी, उन्हें जिला मुख्यालय के अस्पताल ले आई, जहाँ एक व्यक्ति को खाँसी, सर्दी और बुखार जैसे लक्षण दिखाई दिए।
स्वास्थ्य मंत्री इटाला राजेंदर ने कहा कि उन लोगों का पता लगाना बड़ा ही मुश्किल होगा, जो इंडोनेशियाई से आए लोगों के साथ निकट संपर्क में आए थे। हालांकि राज्य सरकार ने इस मामले के बारे में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को पहले ही सूचित कर दिया है ताकि अन्य राज्यों में संपर्क ट्रेसिंग की कार्रवाई की जा सके।
वहीं देश में कोरोना के अब तक 150 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं और तीन लोगों की अलग-अलग राज्यों में मौत हो चुकी है। इसकी रोकथाम के लिए केन्द्र सरकार के साथ राज्यों ने अपने-अपने स्तर पर कई तरह की योजनाओं के साथ घोषणाएँ की है। वहीं अधिकांश राज्यों ने अपने यहाँ स्कूल, कॉलेज, मॉल, सिनेमा हॉल यहाँ तक कि मंदिरों को भी बंद कर दिया है।