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ईस्टर होली वीक पर इंडोनेशिया में चर्च के बाहर सुसाइड बम ब्लास्ट; दूर तक बिखरे क्षत-विक्षत टुकड़े

विश्व के सबसे बड़े इस्लामिक देश इंडोनेशिया के मकस्सर शहर में मार्च 28 को एक कैथोलिक चर्च के बाहर एक आत्मघाती हमलावर ने खुद को बम विस्फोट करके उड़ा लिया। ‘ईस्टर होली वीक’ के पहले दिन हुए इस ब्लास्ट में 2 लोगों की मौत जबकि 14 के घायल होने की रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय मीडिया में अब तक आई है।

दक्षिण सुलावेसी पुलिस के प्रवक्ता ई जुल्पान के मुताबिक जिस वक्त ये ब्लास्ट हुआ, उस दौरान अधिकतर लोग चर्च के भीतर ही थे। धमाके के बाद घटना स्थल पर मानव शरीर के क्षत-विक्षत टुकड़े मिले हैं। रिपोर्ट लिखे जाने तक हालाँकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वो केवल हमलावर के थे या किसी और के भी हैं।

चर्च पादरी ने कहा- 10 लोग घायल हुए

जिस चर्च के बाहर यह ब्लास्ट हुआ, उसके पादरी फादर विल्हेमुस तुलक ने स्थानीय मेट्रो टीवी को बताया कि एक व्यक्ति आत्मघाती हमलावर को पकड़े हुए घायल हो गया था, जिसे मिला कर कुल 10 लोग इसमें घायल हुए हैं, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर थी। ब्लास्ट इतना तेज था कि पास की पार्किंग में खड़ी कारें भी इससे क्षतिग्रस्त हो गईं। फिलहाल घटनास्थल के चारों तरफ से सील कर पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है।

आतंकी संगठन JAD पर हमले का शक

इस हमले के पीछे किसका हाथ है, यह अभी तक पता नहीं चल सका है। अभी तक किसी आतंकी संगठन ने इसकी जिम्मेदारी भी नहीं ली है। लेकिन, पुलिस ने इस सुसाइ़ड अटैक के लिए इस्लामिक स्टेट से प्रेरित आतंकी संगठन जमाह-अंशरुत-दौला (JAD) को जिम्मेदार माना है। इसी आतंकी संगठन ने 2018 में इंडोनेशिया के चर्चों और सुरबाया शहर में एक पुलिस चौकी पर हमला किया था। उस घटना में 30 से अधिक लोग मारे गए थे।
2020 में इंडोनेशिया में सबसे घातक इस्लामी आतंकवादी हमला बाली के पर्यटक द्वीप पर हुआ था, जिसमें हमलावरों ने 202 लोगों का कत्लेआम किया था। मरने वाले ज्यादातर विदेशी टूरिस्ट थे। एक समय इंडोनेशिया ने उग्रवाद को कुचल दिया था, लेकिन हाल के वर्षों में वहाँ इस्लामी उग्रवाद रह-रहकर अपना फन उठाना शुरू कर दिया है।

इंडोनेशिया : कोरोना संक्रमित मरीज के साथ हॉस्पिटल के बाथरूम में पुरुष नर्स ने किया सेक्स

कोरोना वायरस महामारी के दौरान लोगो से लगातार सोशल डिस्टेसिंग का पालन करने की अपील की जा रही है। ऐसे में इंडोनेशिया (Indonesia) से एक बेहद ही चौंकाने वाली खबर सामने आई है। जहाँ एक इंडोनेशियाई पुरुष नर्स को कोविड-19 मरीज के साथ अस्पताल के टॉयलेट में सेक्स (Sex) करने के बाद गिरफ्तार किया गया है।

अस्पताल के टॉयलेट में कोरोना संक्रमित मरीज से सेक्स करने के बाद आरोपित नर्स को पुलिस की जाँच का सामना करना पड़ रहा है। इंडोनेशिया एक्सपैट के मुताबिक, यह घटना जकार्ता के विस्मा एटलेट इमरजेंसी अस्पताल की है। नर्स को कानूनी प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।

नेशनल नर्स एसोसिएशन के एसेप गुनवान ने कहा, “यह सच है कि विस्मा एटलेट इमरजेंसी अस्पताल में एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता और एक COVID-19 मरीज के बीच समान सेक्स रिलेसनशिप (same-sex relationship) की एक संदिग्ध घटना हुई है।”

यह घटना तब सामने आई, जब मरीज ने 25 दिसंबर को ट्विटर पर पुरुष नर्स के साथ बनाए गए संबंध की घटना को शेयर किया। इस विवरण में नर्स के साथ एक वॉट्सऐप चैट का स्क्रीनशॉट शेयर किया गया था, जिसमें उन्होंने प्राइवेट पार्ट के साइज के बारे में बात की थी। इसके अलावा बाथरूम के फर्श पर नर्स के पीपीई किट की एक तस्वीर भी शामिल थी। 

पोस्ट के वायरल होने के बाद मरीज और नर्स से पूछताछ की गई। पूछताछ के दौरान दोनों ने स्वीकार किया कि वे जकार्ता के विस्मा एटलेट आइसोलेशन फैसिलिटी में एक टॉयलेट में सेक्स के लिए मिले थे। क्षेत्रीय सैन्य कमान में सूचना के प्रमुख लेफ्टिनेंट कर्नल अरह हरविन बीएस ने खुलासा किया कि दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।

हरविन ने स्थानीय मीडिया को बताया, “यह मामला केंद्रीय जकार्ता पुलिस को स्थानांतरित कर दिया गया है। हमने स्वास्थ्य कार्यकर्ता को गवाह बनने और आगे की जानकारी माँगने के लिए सुरक्षित कर लिया है।”

सेंट्रल जकार्ता पुलिस को सौंपे जाने से पहले कोविड-19 के लिए पुरुषों का परीक्षण किया गया था। नर्स का कोविड-19 रिपोर्ट नेगेटिव आया, जिसके बाद उसे हिरासत में ले लिया गया, जबकि मरीज का कोविड-19 टेस्ट पॉजिटिव आया उसे आइसोलेशन के लिए फिर से अस्पताल में भेजा गया। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि वे आपराधिक मुकदमे का सामना कर सकते हैं। अगर उन्हें दोषी ठहराया जाता है तो 10 साल तक की सजा हो सकती है।

कपूर का वृक्ष

Image may contain: tree, sky, outdoor and natureआरती पूजा पाठ में कपूर का उपयोग वर्षो से होता आया है जो वातावरण को शुद्ध और सकारात्मक ऊर्जा से युक्त बनाता है लेकिन कटते पेड़ो और अधिक लाभ की लालसा ने असली कपूर को दुर्लभ बना दिया हैIआज अधिकांश कपूर केमिकल्स युक्त है,कपूर एक विशालकाय,बहुवर्षायु लगभग सदावहार वृक्ष है,इसका वृक्ष एशिया के विभिन्न भागों में पाया जाता है, भारत, श्रीलंका,चीन,जापान,मलेशिया,कोरिया,ताइवान,इन्डोनेशिया आदि देशों में बहुतायत पाया जाता है,अन्य देशों में भी यहीं से ले जाया गया है,कपूर का वृक्ष 100 फीट से भी ऊँचे आकार का पाया जाता है,इसी तरह आयु में भी हजारों वर्ष पुराने वृक्ष पाये गये हैं,इसके पुष्प अति सुंदर सुगन्धित और मनमोहक फल तथा पत्तियाँ बरबस ही अपनी ओर आकृष्ट करते हैंI यही कारण है कि कहीं-कहीं इसे श्रृंगारिक वृक्ष के रुप में भी अपनाया गया है,पत्तियाँ बड़ी सुन्दर,चिकनी,मोमी, लालीमायुक्त हरापन लिए होती हैं,वसन्त ऋतु में छोटे-छोटे अति सुगन्धित फूल लगते हैं, इसके फल भी बड़े मोहक होते हैं। कपूर वृक्ष की लकड़ियाँ सुन्दर फर्नीचर के काम में भी लायी जाती हैं,जो काफी मजबूत और टिकाऊ होती हैं, प्रौढ़ पौधे से प्राप्त लकड़ियों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट कर,तेज ताप पर उबाला जाता है....फिर वाष्पीकरण और शीतलीकरण विधि से रवादार कपूर का (crystalline substance )निर्माण होता हैI इसके अलावा अर्क और तेल भी बनाया जाता है जिसका प्रयोग प्रसाधन एवं औषधी कार्यों में बहुतायत होता है,आयुर्वेद में इसके अनेक औषधीय प्रयोगों का वर्णन है, अंग्रेजी और होमियोपैथी दवाइयों में भी कपूर का प्रयोग होता है, यह शीतवीर्य है,यानी ताशीर ठंढा है।भारतीय कर्मकांड और तन्त्र में तो कपूर रसाबसा है ही
कपूर की कज्जली और गौघृत से काजल भी बनाया जाता है जो बड़ा गुणकारी होता है।

Image may contain: flower, plant and nature, text that says 'कपूर के मोहक फल और अति सुगत्थित सफेद फूल'

इंडोनेशिया : पाकिस्तान के पूर्व राजदूत ने बेच दी दूतावास की इमारत

पाकिस्तान इंडोनेशिया दूतावास
पाकिस्तान के पूर्व राजदूत अनवर (साभार: इंडिया टुडे)
पाकिस्तान की एंटी करप्शन बॉडी नेशनल अकॉउंटेबिलिटी ब्यूरो (NAB) ने इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता के अपने पूर्व राजदूत को चोरी छिपे दूतावास की एक इमारत भेजने का मुल्जिम पाया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, द नेशनल अकॉउंटेबिलिटी ब्यूरो ने कोर्ट में इस संबंध में रेफरेंस दायर किया है। अपनी शिकायत में उन्होंने इंडोनेशिया के पूर्व राजदूत व मेजर जनरल सैयद मुस्तफा अनवर के ख़िलाफ़ कहा है कि उन्होंने साल 2001-2002 के दौरान जकार्ता में पाकिस्तान दूतावास की इमरात को बेच दिया।
द ट्रिब्यूनल की रिपोर्ट के अनुसार, अनवर पर अवैध रूप से इमारत बेचने और पाकिस्तान के राष्ट्रीय खजाने को 13.20 लाख डॉलर का नुकसान पहुँचाने का आरोप है। रजिस्ट्रार को प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार, अनवर ने विदेश मंत्रालय की मंजूरी के बिना इमारत की बिक्री के लिए एक विज्ञापन जारी किया था। वो भी इंडोनेशिया में अपनी तैनाती के तत्काल बाद।
इसके लिए उन्होंने पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय से इजाजत लिए बिना एक विज्ञापन भी जारी कर दिया था। बिक्री की प्रक्रिया चालू होने के बाद अनवर ने इससे जुड़ा प्रस्ताव विदेश मंत्रालय को भेजा था। लेकिन विदेश मंत्रालय ने बिल्डिंग की बिक्री पर रोक लगा दी थी और अनवर को कई लेटर भेज जानकारी भी दी थी।
जकार्ता में पूर्व राजदूत की तैनाती जनरल परवेज मुशर्रफ के शासन में हुई थी। दिलचस्प बात ये है कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल मुशर्रफ ने अनियमितताओं के लिए पूर्व राजदूत के खिलाफ कार्यवाही करने के बजाय, एक अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की थी जिसने इस धोखाधड़ी के संबंध में विदेश मंत्रालय को शिकायत की थी।
पाकिस्तानी मीडिया की मानें तो जनरल अनवर ने दूतावास की इमारत को प्रमुख स्थान से बेच दिया था और दूतावास के लिए कम कीमत वाले क्षेत्र में स्थित नई संपत्ति खरीदने की प्रक्रिया शुरू की थी। इन्हीं अनियमतताओं को एनएबी की धारा 9(ए) 6 के तहत बिक्री शक्तियों का दुरुपयोग कहा गया है। साथ ही दावा किया गया है कि उन्होंने 2001-2002 के दौरान जकार्ता स्थित पाकिस्तानी दूतावास की इमारत को ‘कौड़ियों के मोल’ बेचा
इसके अलावा यह भी पाक मीडिया की रिपोर्ट्स से पता चलता है कि मुशर्रफ ने साल 2007-2008 में अपनी सेवानिवृत्ति तक अधिकारी को OSD के रूप में रखा हुआ था। केवल इसलिए ताकि वे विदेशी कार्यालय से दूर रहें और मुशर्रफ ने मेजर जनरल सैयद मुस्तफा अनवर को ये बड़ा पद भी इसलिए दिया था क्योंकि वह उनकी पत्नी के रिश्तेदार थे।

इंडोनेशिया से आया इस्लामी प्रचारक दल, जहाँ घूमा वहाँ कोरोना के 13 मामले

कोरोना, तेलंगाना
                                                                                                                                                   प्रतीकात्मक 
तेलंगाना में बुधवार(मार्च 18) देर शाम को कोरोना वायरस के सात नए मामले सामने आए। इसके बाद राज्य सरकार ने घोषणा करते हुए बताया कि तेलंगाना राज्य में कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है। वहीं सार्वजनिक स्वास्थ्य निदेशालय ने जानकारी दी कि कोरोना वायरस के सभी 7 नए मामले इंडोनेशिया से आए हैं, जोकि सभी इस्लामिक प्रचारक हैं।
ये सभी सात नए मामले एक सदस्य की रिपोर्ट पॉजीटिव मिलने के एक दिन बाद आए। यह सदस्य एक टीम का हिस्सा था। बताया जा रहा है कि 10 इस्लामिक प्रचारकों का समूह तीन दिन की करीमनगर की यात्रा पर था और ये सात लोग भी इसी ग्रुप से ही हैं। सभी का मंगलवार को परीक्षण किया गया। वहीं इस ग्रुप में तीन भारतीय भी थे, जो कि हैदराबाद के गाँधी अस्पताल में रहते थे।

इंडोनेशियाई से आए ग्रुप के बारे में बताया जा रहा है कि ये ग्रुप 22 फरवरी को नई दिल्ली आया था और इनमें से 10 भारतीय तीन मार्च को करीमनगर पहुँचे। इस ग्रुप ने आंध्र प्रदेश संपर्क क्रांति के कोच नंबर S9 में यात्रा की और रामागुंडम में उतर गया। इसके बाद यह ग्रुप मुकरमपुरा और हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी क्षेत्रों की दो मस्जिदों में भी रहा। वहीं अपने धार्मिक अभियान के दौरान ये कस्बे के कुछ इलाकों में घूमे और कई लोगों से मिलने भी गए। इसी बीच विशेष शाखा पुलिस, जो कि शहर में विदेशी नागरिकों को ढूँढती थी, उन्हें जिला मुख्यालय के अस्पताल ले आई, जहाँ एक व्यक्ति को खाँसी, सर्दी और बुखार जैसे लक्षण दिखाई दिए।
स्वास्थ्य मंत्री इटाला राजेंदर ने कहा कि उन लोगों का पता लगाना बड़ा ही मुश्किल होगा, जो इंडोनेशियाई से आए लोगों के साथ निकट संपर्क में आए थे। हालांकि राज्य सरकार ने इस मामले के बारे में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को पहले ही सूचित कर दिया है ताकि अन्य राज्यों में संपर्क ट्रेसिंग की कार्रवाई की जा सके।
वहीं देश में कोरोना के अब तक 150 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं और तीन लोगों की अलग-अलग राज्यों में मौत हो चुकी है। इसकी रोकथाम के लिए केन्द्र सरकार के साथ राज्यों ने अपने-अपने स्तर पर कई तरह की योजनाओं के साथ घोषणाएँ की है। वहीं अधिकांश राज्यों ने अपने यहाँ स्कूल, कॉलेज, मॉल, सिनेमा हॉल यहाँ तक कि मंदिरों को भी बंद कर दिया है।

दिल्ली हिन्दू-विरोधी दंगों की फंडिंग का इंटरनेशनल कनेक्शन : इंडोनेशिया-दुबई-पाकिस्तान-लश्कर-ए-तैयबा

दिल्ली दंगा
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
भारतीय जाँच एजेंसियों ने दिल्ली दंगों के नाम पर धन जुटाने के लिए इंडोनेशिया के एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) को चिन्हित किया है। इस NGO का पूर्व में पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा की तथाकथित चैरिटी विंग फलाह-ए-इन्सानियत (FIF) के साथ लिंक था। 
यह पैसा 24-25 फरवरी को दिल्ली में हुए दंगों के दौरान पीड़ित मुस्लिमों को भेजा जाना था। हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक ये पैसे उन मुस्लिमों को भेजे जाने थे, जो या तो इन दंगों में अपने परिवार के सदस्य को खो देते, घायल हो जाते या फिर जिनकी संपत्तियाँ नष्ट हो जाती। बता दें कि इन दंगों में 53 लोग मारे गए थे, जबकि 500 से अधिक घायल हो गए थे।
जानकारी के मुताबिक यह धन दिल्ली दंगों के नाम पर और इंटरनेट पर उपलब्ध फोटो और मैसेज को प्रोपेगेंडा की तरह इस्तेमाल करके जुटाए गए थे। यह धन हवाला के जरिए दुबई से भारत भेजा जा रहा था।
इसका खुलासा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संसद में दिए बयान के बाद हुआ है। अमित शाह ने संसद में कहा था कि दिल्ली में दंगा भड़काने के लिए विदेशों से पैसे भेजे गए थे। उन्होंने बताया कि दंगे से पहले धन बाँटने के लिए पाँच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इसके साथ ही अमित शाह ने कहा कि कुछ सोशल मीडिया अकाउंट ऐसे थे, जो दंगों से पहले शुरू किए गए और हिंसा के बाद बंद कर दिए गए। इनसे दंगा, नफरत और घृणा फैलाने का काम किया गया। 
उन्होंने कहा, “दिल्ली में हुए दंगों की जाँच पड़ताल में सोशल मीडिया में 60 ऐसे अकाउंट मिले हैं, जो 22 फरवरी को शुरू हुए और 26 फरवरी को बंद हो गए। अगर ये लोग सोचते हैं कि अकाउंट बंद करके वो बच जाएँगे तो मैं बता दूँ कि वो जहाँ पर भी हैं, पुलिस उनको ढूँढ निकालेगी।”
मिली जानकारी के मुताबिक इंडोनेशिया स्थित यह NGO दिल्ली दंगा पीड़ितों को 25 लाख रुपए भेजने की कोशिश में था। इसके लिए संस्था के ट्रस्टी ने दिल्ली के स्थानीय मुस्लिम संस्थानों से संपर्क भी किया था, ताकि वो उनको सहायता प्रदान कर सकें। 
यह NGO अपने ट्विटर हैंडल और अन्य प्लेटफार्मों के माध्यम से दंगा से संबंधित चुनिंदा फोटो एवं मैसेज को अपने प्रोपेगेंडा के हिस्से के रूप में प्रसारित कर रहा है। इसके अलावा यह NGO इंडोनेशिया से एक टीम को भी भेजने की योजना बना रहा है, ताकि ये यहाँ पर आकर उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों की समीक्षा कर सके और ‘पीड़ितों’ को आर्थिक मदद दे सके।
इस NGO को एक अत्यधिक कट्टरपंथी ग्रुप माना जाता है और संस्था अपनी इस्लामी प्रसार के हिस्से के रूप में विभिन्न देशों में मुस्लिम समुदायों को आर्थिक सहायता प्रदान करता है। इसने म्यांमार की सीमा के पास सांप्रदायिक झड़पों के बाद बांग्लादेश में कॉक्स बाजार में विस्थापित रोहिंग्या मुसलमानों के लिए एक शिविर भी स्थापित किया था।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार दिल्ली में करीब तीन महीने पहले सीएए विरोध के नाम पर शुरू हुए धरना प्रदर्शन से एक नई मा.....
इसके अलावा इस NGO ने 2015 में लश्कर के मूल संगठन जमात-उद-दावा (JUD) को इंडोनेशिया के बांदा आचे क्षेत्र में रोहिंग्या शिविरों में बाहरी गतिविधियों को अंजाम देने में भी मदद की थी। NGO के इस तरह की गतिविधियों के फोटोग्राफिक रिकॉर्ड इनके ट्विटर हैंडल पर उपलब्ध हैं। यह इस तथ्य को दर्शाता है कि लश्कर ए तैयबा रोहिंग्या समुदाय और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के बीच अपना विस्तार बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

इंडोनेशिया : दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम देश में मिली 1300 साल पुरानी गणेश भगवान की मूर्ति, सिर और हाथ ग़ायब

इंडोनेशिया, भगवान गणेश की मूर्ति
इंडोनेशिया में खुदाई के दौरान मिली भगवान गणेश की मूर्ति (साभार: swarajyamag.com)
इंडोनेशिया में भगवान गणेश की करीब 1300 साल पुरानी मूर्ति मिली है। मध्य जावा के वोनोसोबो ज़िले के डेंग (Dieng) वेटन गाँव में खुदाई के दौरान यह मूर्ति मिली। सेंट्रल जावा इंस्टीट्यूट फॉर प्रिजर्वेशन ऑफ कल्चरल हेरिटेज (BPCB) ने 12 जनवरी को खुदाई कर यह मूर्ति निकाली।
इंडोनेशिया सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश है। यहॉं की करीब 90 फीसदी आबादी इस्लाम धर्म को मानती है। बावजूद उसके करेंसी पर गणपति विराजमान हैं। दरअसल, भगवान गणेश को इंडोनेशिया में शिक्षा, कला और विज्ञान का देवता माना जाता है।
खुदाई में मिली भगवान गणेश की मूर्ति एंडीसाइट धातु से बनी हुई है। मूर्ति की ऊँचाई 140 सेमी और चौड़ाई 120 सेमी है। लेकिन, मूर्ति के सिर और हाथ का हिस्सा ग़ायब है। डेंग मंदिर इकाई संस्थान के प्रमुख, एरी बुदिर्तो (Eri Budiarto) ने बताया,
ख़बर के अनुसार, भगवान गणेश की मूर्ति एक किसान ने खोजी थी। दिसंबर 2019 में जब वह अपने धान के खेत की जुताई कर रहा था तो 50 सेमी की गहराई में उसे मूर्ति का पता चला। डेंग पठार कलिंगा साम्राज्य से हिन्दू मंदिरों का स्थान रहा है, जो जावा के सबसे पुराने हिन्दू-बौद्ध राज्यों में से एक है। इस मूर्ति को देखकर अनुमान लगाया जा रहा है कि इसका निर्माण 7वीं से 8वीं शताब्दी के बीच हुआ होगा।
इसके बाद इस द्वीपीय राष्ट्र में इस्लाम ने प्रवेश किया और आज जावा की 90 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है। लेकिन, इस्लाम के बावजूद अभी भी यहाँ हिन्दू-बौद्ध का प्रभाव है। खुदाई के दौरान मिली भगवान गणेश की मूर्ति के मिलने के बाद से साइट से और भी महत्वपूर्ण वस्तुओं के मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।(साभार)

1200 साल बाद 12 नवंबर को सबसे बड़े मुस्लिम देश में हिन्दुओं ने किया शिव का अभिषेक

प्रम्बानन मंदिर, इंडोनेशिया
प्रम्बानन मंदिर में 1163 वर्षों के बाद हिन्दुओं ने किया
भगवान शिव का अभिषेक
अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ़ होने और दक्षिण में सबरीमाला मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला भगवान अय्यप्पा के पक्ष में आने के बाद अब एक और प्राचीन मंदिर से हिन्दुओं के लिए शुभ समाचार आ रहा है। इंडोनेशिया के प्राचीन प्रम्बानन मंदिर में सैकड़ों हिन्दुओं ने 1163 वर्षों के बाद मंदिर में भगवान शिव का अभिषेक किया। यहाँ यह जान लेना ज़रूरी है कि इंडोनेशिया केवल मुस्लिम बहुल देश ही नहीं है, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी (22.5 करोड़) का घर है।
इस आयोजन को इंडोनेशिया के अलावा पड़ोसी चीन की शिन्हुआ न्यूज़ एजेंसी की खबरों में भी कवर किया गया है।
मूलतः शिवगृह कहा जाने वाला प्रम्बानन मंदिर इंडोनेशिया के तीन प्रांतों स्लेमान, योग्यकर्ता, और मध्य जावा के क्लाटेन के बीच में स्थित है। यह पूजा विधि मंगलवार (12 नवंबर, 2019) को सम्पन्न हुई और हिन्दुओं ने इसमें बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। “बकौल अभिषेक का आयोजन करने वाली समिति के सदस्य मदे अस्त्र तनया, उन्हें एक शिलालेख मिला था, जिसमें इस मंदिर के उद्घाटन की तारीख 12 नवंबर, 856 ईस्वी दर्ज थी। उसमें यह भी उल्लिखित था कि मंदिर की स्थापना के समय भी ऐसा ही अभिषेक और पूजा पाठ हुआ था। उसके बाद हिन्दुओं ने इस पूजा की तैयारी शुरू की। इस अनुष्ठान का आयोजन रकाई पिकतन द्यः सेलाडु द्वारा इस भव्य मंदिर की स्थापना का उत्सव मनाने के लिए हुआ है।


अंतारा न्यूज़ डॉट कॉम नामक वेबसाइट का कहना है कि यह अभिषेक मातरम नामक हिन्दू साम्राज्य के स्वर्ण काल का भी परिचायक है। उस समय के हिन्दू तावुर अगुंग नामक एक अनुष्ठान करते थे, जिसके बारे में वे मानते थे कि इससे मनुष्यों के साथ समस्त ब्रह्माण्ड को ही पवित्र किया जाता है। प्रम्बानन मंदिर का जीर्णोद्धार इंडोनेशिया की सरकार ने 1953 में कराया था।
शनिवार, 9 नवंबर (संयोगवश भारत में श्री रामजन्मभूमि मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिन) को शुरू हुए इस अनुष्ठान का उल्लेख मातरम साम्राज्य के 25 शिलालेखों में मिलने की बात स्थानीय मीडिया में कही गई है। इसमें पहली पूजा मातुर पिउनिंग नामक थी, जिसमें आगे के कर्मकांडों के लिए पूर्वजों से अनुमति माँगी जाती है। यह भारत में मृत पितरों के स्मरण जैसा है। इसके बाद म्रापेन नामक अग्नि प्रज्ज्वलित की गई और 11 पवित्र कुँओं का पानी लाकर पास के बोको मंदिर से प्रम्बानन देवालय तक छिड़काव हुआ। उसके बाद पूजा पाठ और भारत की ही तरह मंदिरों की प्रदक्षिणा भी की गई।
पूजा के बाद शिलालेख के अनुसार मनुसुक सिमा नामक एक और प्रथा के अनुसार शिवगृह देवालय के पारम्परिक नृत्य का भी आयोजन हुआ जिसमें प्रम्बानन मंदिर के पुनर्निर्माण से जुड़ी गाथाओं का वर्णन होता है।