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आखिर अमेठी से क्‍यों हार गए राहुल गांधी?

Rahul Gandhi
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
लोकसभा चुनाव 2014 से कांग्रेस और इसके समर्थक समस्त छद्दमों ने कोई शिक्षा लेने का प्रयत्न नहीं किया। यही कारण है कि चुनाव 2019 में भी कांग्रेस का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है। पार्टी को सिर्फ 52 सीटें मिली हैं। ऐसे में कांग्रेस को एक बार फिर से नेता प्रतिपक्ष का पद मिल पाना मुश्किल लग रहा है। लोकसभा के कुल सदस्यों की संख्या 543 है और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद हासिल करने के लिए कम से कम इसका 10 फीसदी यानि 55 सीटों की जरूरत होती है और कांग्रेस को केवल 52 सीटें मिली हैं। 2014 में कांग्रेस को 44 सीटें मिली थीं। बबूल का पेड़ बोकर उस पर आमों की इच्छा करना मूर्खता ही कहा जाएगा।  
मोदी सुनामी क्यों और कौन लाया?
आखिर वो क्या कारण थे, जिसने कांग्रेस और अन्य दलों को हाशिये पर ला दिया? दरअसल, मोदी सुनामी लाने वाले भी यही दल हैं, हिन्दू आतंकवाद, भगवा आतंकवाद, शिव पर दूध मत चढ़ाओ, होली पर पानी की बर्बादी, दिवाली पर प्रदूषण, करवाचौध पर भूखे रहना मूर्खता, राम एक काल्पनिक, रामसेतू राम ने नहीं बनवाया, अयोध्या खुदाई में मिले मन्दिर के प्रमाणों को कोर्ट से छुपाना, राममन्दिर में अवरोध उत्पन्न करना, भारत के वास्तविक इतिहास को धूमिल कर आतताई मुगलों का गुणगान, आर्मी प्रमुख को सड़क का गुण्डा बोलना, सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत माँगना, फिर बालाकोट में हुई एयर स्ट्राइक में मारे गए आतंकवादियों की लाशों की प्रमाणिकता माँगना, आतंकवाद के बहाने भारत में अस्थिरता उत्पन्न करने वाले पाकिस्तान को विश्व से अलग करने पर शोर मचाना, कश्मीरी अलगाववादियों पर कार्यवाही किये जाने पर बेचैनी, #metoo, #award vapsi, #not in my name, #moblynching आदि गैंगों के माध्यम से देश में अराजकता फ़ैलाने का प्रयास यानि स्पष्ट शब्दों में कहा जाए तो छद्दम धर्म-निरपेक्षों द्वारा तुष्टिकरण को चरम सीमा पर ले जाने ने ही भारत में मोदी सुनामी लाकर अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी दे मारी।    
उत्तर प्रदेश की प्रतिष्ठित अमेठी लोकसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की जीत के पीछे अमेठी की जनता का कहना है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से उन्हें वह आत्मीयता नहीं मिल सकी, जो उनके दिवंगत पिता एवं पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से मिलती थी। कांग्रेस का गढ़ माने जा रहे अमेठी सीट से भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार स्मृति ईरानी ने कांग्रेस अध्यक्ष को 55 हजार 120 मतों के अंतर से पराजित किया।
इस चुनाव में स्मृति को चार लाख 67 हजार 598 मत मिले, जबकि कांग्रेस अध्यक्ष को चार लाख 12 हजार 867 मत प्राप्त हुए। इससे पहले 2014 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी को 408,651 वोट मिले थे, जबकि भाजपा प्रत्याशी स्मृति ईरानी को 300,748 वोट मिले थे और कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्रीय मंत्री को 1,07,000 वोटों के अंतर से पराजित किया था। राहुल गांधी अमेठी से लगातार तीन बार सांसद रहे। उन्होंने 2009 में यह सीट 3,50,000 से भी ज्यादा मतों से जीती थी। कांग्रेस अध्यक्ष यहां से पहली बार 2004 में चुन कर संसद पहुंचे थे।
राहुल ने बेरोजगारी को बढ़ाया                        
अपनी चुनावी रैलियों में प्रधानमन्त्री मोदी पर देश में बेरोजगारी को बढ़ाने का आरोप लगाने वाले राहुल ने अपने ही संसदीय क्षेत्र में कितने लोगों को बेरोजगार किया, कभी नहीं बताया। इतना ही नहीं, कांग्रेस समर्थित समस्त पार्टियाँ भी चुप्पी साधे रहीं, क्योंकि चोर-चोर मौसेरे भाई। अमेठी के लोगों का कहना है कि राजीव गांधी के समय शुरू की गई कई परियोजनाएं और कार्यक्रम राहुल के सांसद रहते एक-एक कर बंद हो गए, जिससे हजारों लोगों की रोजी-रोजगार पर असर पड़ा। इसके चलते बड़ी संख्या में लोगों ने रोजगार के लिए अमेठी से पलायन किया। उनका कहना है कि और तो और गांधी परिवार से बरसों से पूरी निष्ठा से जुड़े बुजुर्गों का भी मन टूटा दिखता है। उन्हें मलाल है कि गांधी परिवार की वर्तमान पीढी से उन्हें वह प्यार और इज्जत नहीं मिली, जो इसे पहले की पीढियों से मिला करती थी।
अमेठी से सांसद रह चुके कैप्टन सतीश शर्मा के समय बनी मालविका स्टील फैक्टरी भी राहुल के समय में ही बंद हो गई। किसानों की जो जमीन गई, वह तो गई ही। साथ ही 10 हजार लोग बेरोजगार हो गए। ये वही बेरोजगार थे, जिन्हें किसानों से जमीन के बदले एक परिवार से एक व्यक्ति को फैक्टरी में रोजगार के लिए रखा गया था।
किसानो से धोखा  
अमेठी संसदीय सीट को कांग्रेस का दुर्ग कहा जाता है और इस सीट पर इससे पहले तक 16 लोकसभा चुनाव और 2 उपचुनाव हुए हैं। इनमें से कांग्रेस ने यहां 16 बार जीत दर्ज की है। 1977 में लोकदल और 1998 में भाजपा को यहां से जीत मिली थी जबकि बसपा और सपा इस सीट से अभी तक अपना खाता भी नहीं खोल सकी है। 'राजीव गांधी ने सम्राट बाइसिकिल्स नामक कंपनी स्थापित करने में मदद की थी। फैक्टरी घाटे में चली गई और उसे बंद कर दिया गया। उसके बाद कंपनी की जमीन नीलामी पर लग गई, क्योंकि कंपनी पर कर्ज था। जमीन को राजीव गांधी चैरिटेबिल ट्रस्ट ने खरीद लिया। ट्रस्ट में राहुल गांधी ट्रस्टी हैं और किसानों को जमीन लौटाने की मांग को लेकर स्मृति ईरानी ने पांच साल तक लड़ाई लड़ी। स्मृति के अलावा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्थानीय लोगों से किसानों की जमीन वापस लौटाने का वादा किया।
स्वास्थ्य सेवाएँ बाधित
राहुल ने दिल्ली के मुख्यमन्त्री अरविन्द केजरीवाल तक से कुछ नहीं सीखा। केजरीवाल लाख मोदी सरकार पर उनके कामों में अवरोध उत्पन्न करने का आरोप लगाते रहते हैं। फिर भी जगह-जगह मौहल्ला क्लिनिक खोल जनता को लाभ पहुंचा जा रहे हैं। 1986 से पालम गांव आना-जाना लगा रहता है, परन्तु जब से वहाँ आप विधायक निर्वाचित हुआ है, वहाँ की काया ही पलट गयी। पक्की सड़क, सीवर और पीने के पानी की लाइन एवं घर-घर पाइप गैस लाइन ने वहाँ का वातावरण ही बदल दिया।    
राजीव गांधी सचल स्वास्थ्य सेवा के तहत नौ गाड़‍ियां गांव-गांव जाकर गरीबों का इलाज करती थीं और मुफ्त में दवा बांटती थीं, लेकिन यह सेवा भी राहुल के सांसद रहते ही बंद हो गई और जनता की भारी मांग के बावजूद इसे पुन: शुरू कराने का प्रयास नहीं किया गया। 'राजीव गांधी जीवन रेखा एक्सप्रेस' साल में एक बार महीने भर के लिए अमेठी आती थी। इस ट्रेन पर डाक्टरों की विशेषज्ञ टीम होती थी, जो उपचार के साथ साथ सर्जरी भी करती थी । इस सेवा से लाखों लोगों को फायदा हुआ। लेकिन यह सेवा राहुल के सांसद रहते बंद हो गई और इस महत्वपूर्ण चिकित्सा सेवा को बहाल करने का कोई प्रयास नहीं किया गया।
राजीव गांधी गांव-गांव घर-घर जाकर एक-एक व्यक्ति से व्यक्तिगत तौर पर मिलते थे और इससे उनका अमेठी की जनता के साथ आत्मीय संबंध कायम हो गया था, राहुल ने अमेठी के दौरे तो बहुत किए, लेकिन कहीं न कहीं लोगों के साथ वह सीधा संवाद नहीं स्थापित कर पाए, जो राजीव गांधी के साथ होता था। राजीव गांधी के समय के पुराने और निष्ठावान कांग्रेसी धीरे-धीरे पार्टी से दूर होते चले गए, जबकि सच्चाई यह है कि ये लोग ही पार्टी के चुनाव अभियान की पूरी कमान संभालते थे। अगर ये लोग साथ होते तो शायद नतीजे राहुल के पक्ष में नजर आते।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 1977 में इंदिरा गांधी रायबरेली सीट से 55,202 मतों से हार गईं थीं। 1977 में ही संजय गांधी अमेठी स.....

अमेठी लोकसभा सीट के तहत पांच विधानसभा सीटें आती हैं, इनमें अमेठी जिले की तिलोई, जगदीशपुर, अमेठी और गौरीगंज सीटें शामिल हैं, जबकि रायबरेली जिले की सलोन विधानसभा सीट आती है। 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में 5 सीटों में से 4 सीटों पर भाजपा और महज एक सीट पर समाजवादी पार्टी को जीत मिली थी। सोनिया गांधी ने राजनीति में जब कदम रखा तो उन्होंने 1999 में अमेठी को ही अपनी कर्मभूमि बनाया था। वह इस सीट से जीतकर पहली बार सांसद बनीं, लेकिन 2004 के चुनाव में उन्होंने अपने बेटे राहुल गांधी के लिए ये सीट छोड़ दी और इसके बाद से राहुल ने लगातार तीन बार यहां से जीत हासिल की।
योगी आदित्यनाथ 
आखिर उत्तर प्रदेश के मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ क्यों कहते थे "जितनी जल्दी हो सके, राहुल गाँधी को अध्यक्ष बनाइए", क्योकि उन्हें मालूम था, राहुल ने अमेठी का सांसद बनने के बाद कांग्रेस के कहे जाने वाले दुर्ग की जड़ों को खोखला कर दिया है। जिसे बहुत ही सोंची-समझी निति से धवस्त किया जा सकता है। और उसको क्रियाविन्त करने के लिए स्मृति को मोहरा बनाकर व्यूरचना रची गयी। 
दूसरे, सोनिया ने हिन्दू विरोधी छवि होने के कारण पार्टी को जो क्षति पहुंचाई है, उसका भरपूर लाभ उठाकर मोदी-योगी-अमित रूपी त्रिमूर्ति केवल कांग्रेस ही नहीं, समस्त छद्दमों की दुकानें बंद करने को कटिबद्ध हैं। और इस महान कार्य में साध्वी प्रज्ञा, साक्षी महाराज आदि साधुओं का साधुवाद महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। 
कांग्रेस और इनके समर्थक छद्दम दल अब भारतीय संस्कृति को कलंकित करने का साहस नहीं कर पाएंगे। इन लोगों ने भारतीय संस्कृति को जितना नुकसान पहुँचाना था पहुंचा दिया, अब फ्रेंच ज्योतिष नॉस्त्रेदमस की भविष्यवाणियों के चरितार्थ होने का समय है, जिसका श्रीगणेश 2014 से हो चूका है। भारतीय संस्कृति की धूम अब केवल भारत तक सीमित नहीं रहने वाली, विश्व में अपना ध्वज फहराएगी।           

हिन्दू बनने के लिए गढ़ी झूठी कहानी

आर.बी.एल.निगम,वरिष्ठ पत्रकार 
चुनावी मौसम में गांधी परिवार खुद को हिन्दू साबित करने की भरपूर कोशिश करता रहा है। इस चक्कर में उन्हें मंदिर-मंदिर चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। लेकिन असलियत फिर भी सामने आ ही गई। दरअसल चैत्र नवरात्र के पहले दिन खुद को कश्मीरी पंडित दिखाने की कोशिश में प्रियंका ने पारसी धर्म के त्यौहार की बधाई दे डाली। सोशल मीडिया पर जब लोगों ने उनकी इस गलती की तरफ ध्यान दिलाने की कोशिश की तब भी उन्होंने भूल-सुधार नहीं किया। 
स्मरण हो, राहुल और प्रियंका के दादा, फिरोज जहांगीर, एक पारसी मुस्लिम है।उनकी मां सोनिया और पति रॉबर्ट वाड्रा ईसाई हैं। ऐसे में प्रियंका खुद को हिन्दू और वो भी कश्मीरी पंडित किस आधार पर कह रही है। ऐसे में प्रश्न यह भी होता कि फिरोज जहांगीर परिवार कब हिन्दू बना? कुछ समय पूर्व हुए, विधानसभा चुनावों में राहुल जनेऊधारी हिन्दू बन, अपना गोत्र दत्तात्रेय तक बता दिया था। मन्दिरों के चक्कर काटने वाला परिवार शायद ही कभी अपने पूर्वज फ़िरोज़ जहांगीर की मजार पर गया हो। 
हिन्दू बनने के चक्कर में रंगे हाथ पकड़ी गईं प्रियंका वाड्रा
खुद को हिन्दू दिखाने के लिए उन्होंने जो फर्जी कहानी रची उसकी सच्चाई भी सामने आ गई। पूर्वी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की महासचिव बनाई गई प्रियंका वाड्रा ईसाई होने के बावजूद सॉफ्ट हिन्दुत्व के नाम पर हिंदुओं को मूर्ख बनाने की कोशिश कर रही हैं। लेकिन गच्चा खा गईं। फिलहाल प्रियंका वाड्रा की इस गलती पर सोशल मीडिया पर उनका जमकर मज़ाक उड़ रहा है। इतनी बड़ी चूक के बावजूद उनकी तरफ से या कांग्रेस पार्टी की तरफ से कोई सफाई वगैरह सामने नहीं आई है।
हिन्दू बनने के लिए गढ़ी झूठी कहानी
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कश्मीरियों को नवरेह की जगह नवरोज की शुभकामनाएं दे दीं। इसके बाद लोगों ने उन्हें याद दिलाया कि आज नवरोज नहीं नवरेह है। प्रियंका के इस ट्वीट पर पाकिस्तानी मूल के लेखक तारीक फतेह ने ट्वीट किया कि डियर प्रियंका नवरोज पिछले महीने था। आज नवरेह का त्योहार है। ये कश्मीरी हिंदुओं का त्यौहार होता है। प्रियंका ने ट्विटर पर लिखा था कि “मेरे सभी कश्मीरी भाइयों और बहनों को नवरोज की शुभकामनाएं। मेरी मां (सोनिया गांधी) ने कहा था कि “थाली बनाना मत भूलना”, इसके बावजूद मुझे थाली बनाने का समय नहीं मिला, लेकिन रोड शो के बाद जब मैं घर पहुंची, तो मुझे डाइनिंग टेबल पर सजी हुई थाली मिली। मां कितनी प्यारी होती है?” आप समझ सकते हैं कि जिसे त्यौहार का सही नाम तक नहीं पता है वो कश्मीरी होने का दावा कर रहा है। इससे पहले प्रियंका वाड्रा को कभी नवरेह मनाते नहीं देखा गया है। यह पहली बार था जब इसका प्रचार किया गया, लेकिन अनाड़ीपन के कारण झूठ खुल गया।
कश्मीरी मनाते हैं नवरेह का त्यौहार
चैत्र नवरात्र के पहले दिन को देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग नाम के साथ मनाया जाता है। उत्तर भारत में नवरात्र, महाराष्ट्र में गुड़ी पाड़वा और दक्षिण भारत में इसे उगादी के रूप में मनाया जाता है। ये हिन्दू कैलेंडर का पहला दिन भी होता है। कश्मीर में इसी का नाम नवरेह होता है। इसे कश्मीरी पंडित हर साल बेहद धूमधाम से मनाते हैं क्योंकि ये सर्दी जाने के बाद मनाया जाता है और इस समय कश्मीर घाटी में मौसम बेहद सुहाना होता है। प्रियंका पिछले कुछ समय से लगातार कोशिश में हैं कि वो किसी तरह खुद को हिन्दू साबित कर दें। हाल ही में उत्तर प्रदेश दौरे में वो पहली बार हिन्दू मंदिरों में भी गईं। यहां तक कि काशी विश्वनाथ मंदिर में भी गईं, जहां पर गैर-हिन्दुओं का प्रवेश वर्जित है। 
प्रियंका वाड्रा का खुद को कश्मीरी पंडित जताना बेहद हास्यास्पद भी है क्योंकि उन्हीं की पार्टी की गलत नीतियों के कारण लाखों कश्मीरी पंडितों को अपना घर-बार छोड़कर देश के दूसरे हिस्सों में रहना पड़ रहा है। कांग्रेस पार्टी ने हाल ही में जो चुनावी घोषणापत्र जारी किया है उसमें भी कश्मीरी पंडितों को कोई जगह नहीं दी गई है, जबकि उन पर अत्याचार करने वाले कश्मीरी मुसलमानों के भले के लिए ढेरों वादे किए गए हैं।

क्या लोकसभा 2019 परिणाम देश में अराजकता फैलाएगा?

अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्ट ने ये तस्वीर छापी है, जिसमें पीएम मोदी को फौजी तानाशाह के ड्रेस में दिखाया गया है, जबकि राहुल गांधी को गरीब फटेहाल दिखाया गया है। दोनों के मुकाबले में देश टूट रहा है।
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
23 मई को चुनाव परिणाम घोषित होते ही, 1555 में फ्रेंच ज्योतिष नोस्त्रेदामस की भविष्यवाणी एक बार पुनः चरितार्थ होने जा रही है। भारत को अखण्ड भारत देखने के सपने को संजोय समस्त नागरिकों को हर पल सतर्क रहना होगा। परिणामों के बाद देश में #not in my name, #awardvapasi, #intolerance, #metoo, #mob lynching आदि गैंगों के प्रायोजक अपनी नापाक हरकतों के साथ किसी न किसी नाम से देश में अराजकता फ़ैलाने का प्रयास कर सकते हैं, ये वही नेता होंगे जिन्हे आज तक जनमानस अपना हितैषी समझता रहा है, वास्तव में ये लोग जनसुविधाओं के नाम पर जनता का उपहास करते रहे हैं। 
उपेन्द्र कुशवाह का मीडिया के समक्ष मोदी सरकार की वापसी होने की स्थिति में खून-खराबे की बात ने सिद्ध कर दिया है कि बिल्लियाँ थैले से बाहर(Cats are trying to come out from the bags) आने को लालायित हैं। भाजपा उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा द्वारा नाथूराम गोडसे पर व्यक्त किए विचारों पर मोदी विरोधी साध्वी प्रज्ञा के विरुद्ध लामबंद हो सकते हैं, लेकिन कुशवाह के देश में खून-खराबा करने की गम्भीर बात का विरोध करने की बजाए गुप्त समर्थन कर रहे हैं।      
2019 के लोकसभा चुनाव में अगर भारतीय जनता पार्टी जीतती है तो क्या देश में गृहयुद्ध छिड़ जाएगा? ये सवाल सोशल मीडिया से लेकर आम लोगों की बातचीत में छाया हुआ है। देश के अलग-अलग इलाकों से जो इनपुट्स आ रहे हैं, उनके मुताबिक यह शक बिल्कुल सही है। खुफिया एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक उन्हें भी यह जानकारी मिली है कि 23 मई को होने वाली मतगणना के बाद देश में अराजकता फैलाने की कोशिश हो सकती है। दरअसल ज्यादातर एग्जिट पोल में नरेंद्र मोदी सरकार की वापसी का अनुमान लगाया गया है, वैसे भी गठबंधन की सहयोगी पार्टी के एक नेता, कुशवाह ने तो स्पष्ट रूप से भाजपा के पुनः सत्तारूढ़ होने पर खून-खराबे की बात मीडिया में बोल दी है। जिसके बाद से कांग्रेस की अगुवाई में पूरा विपक्ष हमलावर है। फिलहाल ईवीएम में धांधली के आरोप लगाए जा रहे हैं, जिनमें से अब तक एक भी सही नहीं पाया गया। 
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार लोकसभा चुनावों के लिए पांचवें चरण की वोटिंग के बाद देश में अगली सरकार फिर से नरेन्द्र ...

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बालाकोट का मुस्लिम क्षेत्रों पर असर आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार आखिर भारत के प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी के किन ...

खुफिया सूत्रों के मुताबिक असली नतीजे भी अगर इसी तर्ज पर रहे तो विपक्ष उस प्लान पर काम करने को तैयार बैठा है, जिसे अब तक ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ का प्लान कहा जाता रहा है। इसके तहत देश की तमाम विपक्षी पार्टियां एकजुट होकर पूरी चुनावी प्रक्रिया को चुनौती देंगी और कहेंगी कि उन्हें इस चुनाव पर भरोसा नहीं है।एक तरफ लड़ाई को सुप्रीम कोर्ट ले जाया जाएगा, दूसरी तरफ देश के अलग-अलग सड़कों पर बड़े पैमाने पर हिंसा भड़काने की कोशिश हो सकती है।

दक्षिण भारत को अलग देश बनाने की मांग?

दरअसल बीते कुछ हफ्तों से तमिलनाडु की पार्टी डीएमके और दक्षिण भारत की दूसरी पार्टियों के बीच बैठकों का सिलसिला अचानक तेज है। डीएमके के नेता स्टालिन, आंध्र प्रदेश के चंद्रबाबू नायडू, कर्नाटक के कुमारस्वामी और केरल की वामपंथी पार्टियां मुलाकातों के इस सिलसिले में शामिल हैं। एक प्राइवेट न्यूज़ चैनल के खुलासे के मुताबिक ये सभी नेता मिलकर दक्षिण भारत के सारे राज्यों को आपस में मिलाकर अलग देश बनाने की मांग रख सकते हैं। इसके मुताबिक शुरुआत स्टालिन करेंगे और कहेंगे कि उन्हें भारत की चुनावी प्रक्रिया और लोकतंत्र पर भरोसा नहीं है ऐसे में उनकी लड़ाई अब अलग देश के लिए होगी। तेलंगाना के चंद्रशेखर राव से भी कई दौर की मुलाकातें हुई हैं। हालांकि यह साफ नहीं है कि क्या वो भी इस प्लान में शामिल हैं। प्लान के मुताबिक दक्षिण भारत के साथ ही बंगाल में ममता बनर्जी भी कहेंगी कि चुनाव में धांधली हुई है और इसके विरोध में भारी तादाद में एक धर्म विशेष के लोगों को सड़कों पर उतारा जाएगा। जाहिर है ये दंगों की स्थिति होगी और हिंदुओं को इसका शिकार बनाया जाएगा। बंगाल में अभी से हिंदुओं के इलाकों पर हमलों की खबरें लगातार आ रही हैं। चैनल का दावा है कि दक्षिण भारत में केंद्र सरकार के दफ्तरों को निशाना बनाया जा सकता है। इन पर भीड़ से हमले करवाए जा सकते हैं। चेन्नई के मरीना बीच को प्रदर्शनकारियों का अड्डा बनाने की भी बात चैनल ने अपनी रिपोर्ट में दिखाई है।

चुनाव के नतीजे रद्द कराने की होगी कोशिश

जो जानकारी सामने आ रही है, उसके मुताबिक कांग्रेस पार्टी कोर्ट के आगे ये प्रस्ताव देगी कि लोकसभा चुनावों को रद्द करके कोई राष्ट्रीय सरकार बनाई जाए। वरना देश में इजिप्ट जैसी अराजकता की स्थिति पैदा हो जाएगी। ऐसा नहीं है कि ये सारी योजना एग्जिट पोल के बाद ही बनी है। संकेतों से यही लगता है कि इस पर लंबे समय से काम चल रहा था। कई विदेशी एजेंसियां इस साजिश पर अमल में दिन रात जुटी हुई हैं। इसी के तहत पिछले दिनों अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्ट और टाइम मैगजीन में पीएम मोदी के खिलाफ लेख छपवाए गए थे। इन दोनों ही लेखों में उन्हें ‘डिवाइडर’ यानी देश का बंटवारा करवाने वाले के तौर पर दिखाया गया है। इसके अलावा कांग्रेस पार्टी अपने और अपने सहयोगी दलों के नेताओं से लगातार ऐसे बयान दिलवा रही है जिससे मंसूबों का पता चलता है। मिसाल के तौर पर दिल्ली में आम आदमी पार्टी की प्रवक्ता ने तो बाकायदा ट्वीट करके लोगों को सड़कों पर उतरने के लिए उकसाया।

क्या कर रही है केंद्र सरकार?

हमारे सूत्र ने बताया कि केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों को किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहने को कहा गया है। इसके मुताबिक 23 मई के बाद से देशभर में पूरी सतर्कता बरती जाएगी। मंगलवार को इस खतरे के बारे में केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से भी सवाल पूछा गया। इस पर राजनाथ सिंह ने कहा कि किसी भी शरारती तत्व के साथ मजबूती से निपटा जाएगा। केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कि अगर किसी तरह की साजिश रची जा रही है तो केंद्र सरकार ‘टिट फॉर टैट’ यानी दुष्ट के साथ दुष्टता का नियम पालन करेगी।
ये सब एक सोची समझी साजिश का हिस्सा है. जैसे नेहरू ने PM बनने के लिये देश का बंटवारा करा दिया था और लाखो लोग मरवा दिये, ऐसे ही कांग्रेस राहुल को PM बनने के लिये कुछ भी कर सकते है. मोदी को PM चुनने वाले लोग सजग और सावधान हो जाएं और इनका बहिष्कार करे.

I am sensing opposition is trying to drag the election result to the Supereme Court. What a mammoth conspiracy is being hatched, ordinary citizen can't even fathom what these India-haters are up to.

मोदी की नोटबंदी से विदेशी फंड और भ्रष्ट संशाधनों से चल रहे 20 हजार बंद NGO ही आज वामपंथियों और कांग्रेस की मदद से अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं के द्वारा उनकी छवि खराब करना चाहते हैं, लेकिन उनकी यह साजिश फिर भी नाकाम होगी !

पीएम मोदी के खिलाफ विदेशी मीडिया की साजिश


बालाकोट का मुस्लिम क्षेत्रों पर असर 
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
आखिर भारत के प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी के किन लोगों को डर सता रहा है? स्पष्ट है जो लोग हिन्दुत्व विरोधी, पाकिस्तान और आतंकवाद समर्थक हैं, खुलकर मोदी का विरोध कर रहे हैं। आज(मई 12) दिल्ली में चुनाव के दौरान whatsapp पर निम्न सन्देश मिला:-     
Bhaio Aam admi ko vote dene se musalman bhaio ka vote kat jaega
Jis trh hindu ek sath mil kr BJP ko vote kr rhe h isi trah hm musalmano ko bhi chahiye ki ek sath mil kr sirf congress ko vote de
Bade election m Congress 🤚
Chote election m Aam aadmi
 Kyuki AAP ke sirf 12 candidates all over India h to koi faeda nai he apna keemti vote waste karne ka Congress se Gadbandhan bhi nahi kiya Bawajood Congress ne Unki demand maan li thi Delhi ke Coalition ke liye . khaali apne Selfish aur bewakoofi ki wah se . 
Congress ko vote kren
Is msg ko aage musalman bhaio ko forward kre 
मई 12 को मतदान के दिन 10 बजे का
 मटिया महल का माहौल 
जिसे पढ़कर आभास हुआ कि पुरानी दिल्ली के मुस्लिम क्षेत्र, विशेषकर मटिया महल, चाँदनी चौक और बल्ली मरान विधानसभा क्षेत्र, में कर्फ्यू जैसा माहौल क्यों था? कांग्रेस को झोड़ मतदान केंद्र पर पोलिंग एजेंट और सड़क से मेज-कुर्सी भाजपा का कोई नामोनिशान नहीं दिखा। प्रेसिडिंग अधिकारी से मालूम हुआ कि "सुबह तो था, अब कहाँ है ये पार्टी को मालूम होगा?" आज मुस्लिम क्षेत्र में ऐसी हालात तत्कालीन भारतीय जनसंघ(वर्तमान भाजपा) के समय तक में नहीं देखी। जबकि उन दिनों संघ और जनसंघ का कोई अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ नहीं था। और आज दोनों का अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ हैं। कहाँ गए अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के पदाधिकारी और कार्यकर्ता? 
आज की स्थिति को देख पूर्व में लिखे भाजपा और संघ के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के विरुद्ध मेरे शत-प्रतिशत सत्यापित हो गए। इन प्रकोष्ठों का अपने कार्यकाल से ही विरोध करता हूँ, पदाधिकारियों तक से प्रत्यक्ष रूप में चुनाव में दोगली नीति पर प्रश्नचिन्ह लगाता रहा हूँ। परन्तु आज तो मेरे प्रश्नचिन्हों को भी प्रमाणित कर दिया। कोई पोलिंग एजेंट नहीं कोई टेबल नहीं, क्या है ये सब तमाशा? ये लोग पार्टी को भ्रमित कर रहे हैं, जिस पर भाजपा शीर्ष नेतृत्व को मंथन करना होगा। 
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चाँदनी चौक से भाजपा उम्मीदवार डॉ हर्षवर्धन के कार्यक्रम की सुचना में भयंकर चूक। ऐसा…


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राजनेता चाहे जिस तरह की राजनीति खेले, लेकिन जनता उनसे दस कदम आगे ही चलती है। आज नेता समाज जिस तरह तुष्टिकरण नीति अपन...


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आगामी रमजान में रोजा रखने वालों के लिए RSS की मुस्लिम शाखा उत्तर प्रदेश में इफ़्तार पार्टी आयोजित करेगी। लेकिन इस इफ...


अब विदेशी मीडिया भी पीछे नहीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ सिर्फ देश में ही अंग्रेजी मीडिया का एक वर्ग ने अभियान नहीं चला रखा है बल्कि विदेशी मीडिया भी एक साजिश के तहत अभियान चला रखा है। एक खास साजिश के तहत देश के उदारवादियों के आधार पर विदेशी मीडिया ने मोदी और हिंदुओं को तानाशाह, हिंसक और घृणा फैलाने वाले के रूप में स्थापित करने का अभियान चलाया हुआ है। टाइम मैगजीन में मोदी को डिवाइडर इन चीफ बताना उसी साजिश का हिस्सा है। इससे पहले द न्ययॉर्क टाइम्स, द गार्जियन और वाशिंगटन पोस्ट में भी मोदी के खिलाफ भ्रम फैलाने वाली स्टोरी प्रकाशित हो चुकी है।
न्यूयॉर्क टाइम्स ने मोदी के कैंपेन को बताया था डरावना
टाइम मैगजीन से पहले न्ययॉर्क टाइम्स ने 17 अप्रैल 2019 के अपने संस्करण में मोदी के खिलाफ स्टोरी प्रकाशित की थी। उस स्टोरी में जहां मोदी के चुनावी कैंपेन को डरावना बताया था वहीं बहुसंख्यक हिदुओं को मुसलमान और पाकिस्तान के लिए खतरनाक बताया है।
द गार्जियन ने मोदी को बताया था हिंदू तालिबान
पीएम मोदी के सत्ता में आने के करीब डेढ़ साल बाद ही द गार्जियन ने भारत में मोदी सरकार को हिंदू तालिबान का शासन बताया था। अनीश कपूर ने अपने लेख के शीर्षक में ही लिखा था भारत में हिंदू तालिबान का शासन चल रहा है। उन्होंने मोदी को तालिबान बताया था।
मोदी को दमनकारी नेता के रूप में किया गया प्रोजेक्ट
मोदी को लेकर विदेशी मीडिया शुरू से ही एकांगी और पूर्वाग्रह से ग्रसित रहा है। अपने पूर्वाग्रह के कारण ही विदेशी मीडिया मोदी को दमनकारी मान चुका है। अब तो दमनकारी ठहराने के लिए प्रश्न भी वैसे गढ़े और पूछे जाने लगे हैं। दो दिन पहले ही एक पत्रकार ने  अमेरिका की राष्ट्रपति उम्मीदवार तुलसी गावार्ड से मोदी की दमनकारी नीति पर सवाल पूछा है।  
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार देश से लेकर विदेश तक में कुछ लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस लोकसभा चुनाव में किस....

हनुमान को आतंकी बताया, स्वास्तिक का गलत प्रचार
विदेशी मीडिया शुरू से ही स्वास्तिक को लेकर गलत धारणा फैलाता रहा है। निकी हैली की स्वास्तिक वाली तस्वीर को हटाकर रायटर ने अपनी अज्ञानता ही प्रदर्शित किया है। मोदी के साथ हिंदुओं को अपमानित करना जारी है। वाशिंगटन पोस्ट ने हिंदू देवता हनुमान के चेहरे को हिंदूवादी आतंकी के रूप में स्थापित किया है।देश के अधिकांश लोग न तो टाइम मैगजीन पढ़ते हैं न ही न्यूयॉर्क टाइम और ना वाशिंगटन पोस्ट या द गार्जियन। विदेशी मीडिया देश और मोदी के खिलाफ जो साजिश रच रहा है उसका परिणाम दीर्घ अवधि के लिए घातक साबित हो सकता है। भले कम समय के लिए भारतीय जनमानस पर इसका असर न हो।