Showing posts with label Mamta Banerjee Government. Show all posts
Showing posts with label Mamta Banerjee Government. Show all posts

‘नाबालिग लड़कियों तक को नहीं छोड़ा गया’: बंगाल हिंसा पर कठघरे में ममता सरकार

                                      ममता सरकार और पुलिस की भूमिका पर ​गंभीर सवाल
कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव बाद भड़की हिंसा के मामलों पुलिस को एफआईआर दर्ज करने और राज्य सरकार को पीड़ितों का इलाज कराने का आदेश दिया है। इसके अलावा हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस राजेश बिंदल की अध्यक्षता वाली पीठ ने हिंसाग्रस्त जिलों के DM और SP को भी नोटिस जारी कर जवाब माँगा है। कोर्ट ने राज्य सरकार से यह भी कहा है कि वह पीड़ितों के राशन आदि की व्यवस्था करे और भाजपा कार्यकर्ता अविजीत सरकार की दोबारा ऑटोप्सी कराई जाए। 

2 जुलाई को अपने अंतरिम आदेश में कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में भाजपा समेत अन्य विपक्षी पार्टियों के कार्यकर्ताओं के खिलाफ जारी हिंसा के संबंध में राज्य की ममता बनर्जी सरकार की भूमिका को भी संदिग्ध माना है और कहा है कि भले ही प्रशासन इसे स्वीकार नहीं कर रहा, लेकिन चुनाव बाद शुरू हुई हिंसा की खबरें एकदम सत्य है।

NHRC की रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा है कि राज्य में चुनाव बाद शुरू हुई हिंसा के मामलों में राज्य की भूमिका संतोषजनक नहीं रही। कोर्ट का कहना है, “हिंसा में कई लोग मारे गए, गंभीर रूप से घायल हुए। कई पीड़ितों को यौन उत्पीड़न भी झेलना पड़ा, यहाँ तक कि नाबालिग लड़कियों को भी नहीं बख्शा गया। लोगों की संपत्ति को नष्ट किया गया और कई लोगों को अपना घर छोड़कर पड़ोसी राज्यों में शरण लेने के लिए मजबूर कर दिया गया। इसके बाद भी राज्य ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।“ कोर्ट ने यहाँ तक कहा कि कई पीड़ितों की शिकायतों को दर्ज ही नहीं किया गया, बल्कि उल्टा उन्हीं के ऊपर केस दर्ज कर लिया गया।

                                                   कलकत्ता हाई कोर्ट का आदेश

कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि पुलिस ने कई मामलों में शिकायत भी नहीं दर्ज की। जहाँ शिकायत दर्ज की गई वहाँ अधिकांश आरोपितों को जमानत दे दी गई। कोर्ट ने माना है कि जब उसके द्वारा इस मामले में संज्ञान लिया गया तब जाकर पुलिस ने कुछ गंभीर अपराधों में मामला दर्ज किया।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने NHRC की रिपोर्ट के आधार पर कहा कि यह बड़े आश्चर्य की बात है कि राज्य प्रशासन यह कहता रहा कि हिंसा की शिकायतें प्रशासन के पास आई ही नहीं। लेकिन जब NHRC और स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी लोगों के पास गई तो उनके पास शिकायतों की बाढ़ सी आ गई। कोर्ट ने कहा कि लोग इतना डरे हुए हैं कि अपना नाम तक नहीं बताना चाहते हैं। 

कोर्ट ने NHRC की कमेटी के द्वारा दर्ज किए गए प्रेक्षणों को बताते हुए अपने आदेश में कहा है कि कमेटी ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट में बताया है कि राज्य के विभिन्न अधिकरण कमेटी के द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देने में पूरी तरह से असमर्थ रहे। इससे यह पता चलता है कि हिंसा के मामले में प्रकट करने से अधिक छुपाने के लिए बहुत कुछ है।

कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी बताया है कि जाँच के लिए गई NHRC की टीम को भी पुलिस द्वारा सुरक्षा नहीं दी जा सकी। कोर्ट ने कहा कि 29 जून को जाधवपुर इलाके में जाँच के लिए गई टीम के सदस्य आतिफ रशीद और उनकी टीम को न केवल उनका काम करने से रोका गया बल्कि उन पर कुछ गुंडों द्वारा हमला भी किया गया। कोर्ट ने माना है कि यह घटना तब हुई है जब NHRC की टीम की सुरक्षा को लेकर स्थानीय प्रशासन और पुलिस को एडवांस में नोटिस दे दिया गया था। इस मामले में कोर्ट द्वारा साउथ कोलकाता के डेप्युटी कमिश्नर ऑफ पुलिस राशिद मुनीर खान के खिलाफ कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट के आधार पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। 

कलकत्ता हाई कोर्ट ने फिलहाल NHRC की जाँच रिपोर्ट को यह कहते हुए सार्वजनिक करने से मना कर दिया कि यह अंतिम रिपोर्ट नहीं है। हिंसा की जाँच जारी है और NHRC की कमेटी के द्वारा पेश की गई अंतरिम रिपोर्ट अभी कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के पास सुरक्षित रहेगी। सुनवाई हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल की अगुवाई वाली 5 सदस्यीय पीठ ने की। पीठ में जस्टिस आईपी मुखर्जी, जस्टिस हरीश टंडन, जस्टिस सौमेन सेन और जस्टिस सुब्रत तालुकदार शामिल थे।

बंगाल में हो रही हिंसाओं पर ममता सरकार का कोर्ट में सफ़ेद झूठ

वाकई सफ़ेद झूठ बोलना सीखना है तो कांग्रेस से सीखना चाहिए, ममता बनर्जी परिवारवाद के कारण कांग्रेस से अलग हुई थी, और देखिए हाई कोर्ट में ममता सरकार ने क्या सफ़ेद झूठ बोला यानि खुली आंखें दूध में मक्खी देख रही हैं, फिर भी दूध बेचने वाला न माने तो उसे सफ़ेद झूठ ही कहा जाएगा।  
पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हो रही हिंसाओं के विषय में दायर की गई याचिका पर कलकत्ता हाईकोर्ट की पाँच जजों की पीठ ने राज्य की ममता बनर्जी सरकार से रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा था जिस पर रिपोर्ट देते हुए सरकार ने कहा है कि राज्य में तृणमूल कांग्रेस की सरकार बनने के बाद कोई हिंसा नहीं हुई है। इसके अलावा राज्य सरकार ने जवाब देने के लिए समय माँगा जिस पर कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 18 मई 2021 की तारीख दे दी।

वकील अनिंद्या सुंदर दास के द्वारा पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हो रही हिंसा पर कार्रवाई की माँग करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी जिसमें दास ने कहा था कि राज्य में विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद कानून व्यवस्था बिगड़ गई है और राज्य में कई हत्याएँ हो चुकी हैं। इसके कारण कई राजनैतिक कार्यकर्ता और आम नागरिक राज्य छोड़कर जा रहे हैं। इस याचिका पर आदेश देते हुए हाईकोर्ट ने राज्य की ममता बनर्जी सरकार से हिंसा पर रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा था।
अब चर्चा है कि जब बंगाल में कोई हिंसा ही नहीं हुई या नहीं हो रही थी, फिर किस आधार पर हाई कोर्ट ने ममता सरकार से हिंसा पर रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा था? कोर्ट ने ममता सरकार के वकील द्वारा झूठ बोलने पर गंभीरता से नहीं क्यों नहीं लिया? क्या अगली होने वाली सुनवाइयों के माननीय कोर्ट हिंसा पर सफ़ेद झूठ बोलने पर ममता सरकार को अड़े हाथों लेगी?
कलकत्ता हाईकोर्ट में राज्य की ओर से जवाब देते हुए महाधिवक्ता किशोर दत्ता ने कहा कि उनकी रिपोर्ट के अनुसार राज्य में 09 मई के बाद से कोई चुनाव बाद हिंसा नहीं हुई है। इसके अलावा दत्ता ने याचिका में पुलिस पर लगाए गए निष्क्रियता और लापरवाही के आरोपों पर कहा कि पुलिस ने सभी शिकायतों पर ध्यान दिया है। दत्ता ने माँग की कि सभी तथ्यों और याचिका से संबंधित सभी पहलुओं पर जवाब प्रस्तुत करने के लिए राज्य सरकार को और समय दिया जाए, जिस पर कोर्ट ने सुनवाई आगे बढ़ा दी। अगली सुनवाई 18 मई 2021 को होगी।
केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल वाय जे दस्तूर ने कहा कि दूसरी पार्टियों के प्रवक्ता भी मीडिया में कह रहे हैं कि उनके लोगों के साथ भी हिंसा हुई है। दस्तूर ने कोर्ट में कहा कि राष्ट्रीय और राज्य मानवाधिकार आयोग दोनों को ही हिंसा की शिकायतें मिल रही हैं। साथ ही महिला आयोग और राज्य अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग को भी शिकायतें मिली हैं। ये शिकायतें उन लोगों की हैं जो पुलिस के पास नहीं जा पा रहे हैं। दस्तूर ने कोर्ट से इन आयोगों के पास पहुँची शिकायतों पर पुलिस द्वारा मामला दर्ज करने का आदेश देने की माँग की।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने यह कहते हुए कि पहले से कुछ बेहतर दिखाई दे रही हैं, राज्य सरकार को याचिका पर अपना जवाब देने के लिए समय दे दिया।
पश्चिम बंगाल में भाजपा कार्यकर्ताओं और कई अन्य व्यक्तियों के खिलाफ लगातार हिंसा जारी है। राज्य से लगातार लूटपाट, हत्या, आगजनी और मारपीट की खबरें आ रही हैं। इस पर गृह मंत्रालय ने भी अपनी एक 4 सदस्यीय टीम बंगाल भेजी है जो हिंसा की जाँच करेगी और सीधे ही गृह मंत्रालय को रिपोर्ट सौंपेगी। 06 मई को बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने भी आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हिंसा की रिपोर्ट उन्हें सौंपने से राज्य के अधिकारियों को रोक दिया था। ममता बनर्जी सरकार द्वारा जवाब देने से इनकार करने के बाद राज्यपाल धनखड़ ने कहा कि अब वे स्वयं हिंसा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगे। 
ममता सरकार द्वारा कोर्ट में सफ़ेद झूठ बोलने पर ट्विटर पर लोगों का गुस्सा फूटना शुरू हो गया है:-   अवलोकन करें:-
हिंसा पर ममता सरकार नहीं दे रही जवाब : बंगाल गवर्नर का त्राहिमाम
NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
हिंसा पर ममता सरकार नहीं दे रही जवाब : बंगाल गवर्नर का त्राहिमाम

हिंसा पर ममता सरकार नहीं दे रही जवाब : बंगाल गवर्नर का त्राहिमाम

                                              हिंसा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगे राज्यपाल जगदीप धनखड़
उत्तर प्रदेश या किसी अन्य भाजपा शासित राज्य में हिंसा होने पर चीखने-चिल्लाने वाले समस्त मोदी विरोधी बंगाल में हो रही हिंसा पर खामोश क्यों? अपने-अपने राज्य छोड़ वहां पिकनिक मनाने पहुँच जाते हैं, लेकिन बंगाल में हिंसा होने पर किस आधार पर खामोश हैं? कहाँ है अरविन्द केजरीवाल, राहुल गाँधी, प्रियंका वाड्रा, अखिलेश यादव और अन्य मोदी विरोधी आदि? जबकि इस हिंसा के वह भी पीड़ित हो रहे हैं। NCW की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने मई 7, 2021 को उन्होंने बताया कि पीड़ित महिलाएँ अपने साथ हुए अत्याचार को लेकर आवाज़ भी नहीं उठाना चाहतीं, क्योंकि उन्हें डर है कि इसके बाद उनके साथ कुछ बुरा किया जा सकता है। पश्चिम बंगाल में चुनावी नतीजे आने के साथ ही TMC के गुंडों पर भाजपा, कांग्रेस और CPI(M) ने हिंसा के आरोप लगाए हैं। भाजपा के डेढ़ दर्जन कार्यकर्ता मारे जा चुके हैं। 

पश्चिम बंगाल में चुनावी नतीजों के बाद भड़की हिंसा को लेकर राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने एक बार फिर चिंता जताई है। उन्होंने राज्य की ममता बनर्जी सरकार पर इस संबंध में जवाब नहीं देने का आरोप लगाया है। साथ ही कहा है कि प्रशासनिक असहयोग के बावजूद वे हिंसा प्रभावित इलाकों के दौरे पर जाएँगे।

राज्यपाल ने कहा कि चुनावी नतीजों के बाद राज्य के हालात बेहद चिंताजनक हैं। राजनीतिक बदले की हिंसा, आगजनी, लूट की घटनाएँ अब डराने-धमकाने और जबरन वसूली तक पहुँच गई है। राज्यपाल ने यह बात ऐसे समय में कही है जब सोमवार (10 मई 2021) को ही राज्य में 43 मंत्रियों ने शपथ ली है। इससे पहले उन्होंने 5 मई को भी हिंसा पर चिंता जताई थी, जब ममता बनर्जी ने लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।

राज्यपाल धनखड़ ने कहा है कि अपने संवैधानिक दायित्वों के तहत उन्होंने प्रभावित इलाकों का दौरान करने का फैसला किया। इस संबंध में राज्य सरकार से आवश्यक इंतजाम करने को कहे। लेकिन, राज्य सरकार की प्रतिक्रिया बेहद दुर्भाग्यपूर्ण थी। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद वे आने वाले दिनों में हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में जाएँगे।

उन्होंने कहा कि हिंसा को लेकर राज्य सरकार के रवैए को उनसे बेहतर कोई नहीं जानता। कोई जवाबदेही नहीं है। तीन मई को इस संबंध में राज्य के डीजीपी, कोलकाता के पुलिस कमिश्नर और एडिशनल होम सेक्रेटरी से रिपोर्ट तलब की थी, जो अब तक नहीं मिली है। अधिकारियों ने एडिशनल चीफ सेक्रेटरी होम को रिपोर्ट भेजी, पर उन्होंने आज तक ये रिपोर्ट मुझे फॉरवर्ड नहीं की है। राज्यपाल ने कहा कि जमीनी हालात बेहद खराब हैं, लेकिन सरकार का रवैया ऐसा है जैसे कोई हिंसा ही नहीं हुई हो।

हेलीकाप्टर मांगने पर पायलट समस्या का बहाना 

राज्यपाल का कहना है कि उन्होंने प्रभावित इलाकों में जाने के लिए हेलिकॉप्टर की माँग की थी। लेकिन इसका कोई जवाब नहीं मिला। अनाधिकारिक तौर पर उन्हें बताया गया कि हेलिकॉप्टर और पायलट्स के साथ कुछ समस्या है। उन्होंने पूछा कि क्या संवैधानिक मुखिया को सूचना देने का ये तरीका होता है। साथ ही यह भी कहा कि कोलकाता पुलिस कमिश्नर ने जो रिपोर्ट उन्हें देने के लिए चीफ सेक्रेटरी होम को भेजी थी, वह भी उन्हें नहीं दी गई।

अवलोकन करें:-

बंगाल हिंसा वाली रिपोर्ट राज्यपाल तक नहीं पहुँचे: ममता बनर्जी का ऑफिसरों को आदेश

NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
बंगाल हिंसा वाली रिपोर्ट राज्यपाल तक नहीं पहुँचे: ममता बनर्जी का ऑफिसरों को आदेश
आतंकियों के लिए सुप्रीम कोर्ट आधी रात को खुल सकता है लेकिन बंगाल हिंसा के खिलाफ याचिका लिस्ट तक
NIGAMRAJENDRA.BLOGSPOT.COM
आतंकियों के लिए सुप्रीम कोर्ट आधी रात को खुल सकता है लेकिन बंगाल हिंसा के खिलाफ याचिका लिस्ट तक
पश्चिम बंगाल में चुनाव परिणाम आने के बाद से ही हिंसा जारी है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के गुंडे बी...

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे दो मई को आए थे। नतीजों में तृणमूल कॉन्ग्रेस की जीत तय होते ही राजनीतिक खून खराबे का नया दौर शुरू हो गया था। टीएसमी के गुंडों पर विपक्षी दलों खासकर बीजेपी के कार्यकर्ताओं, उनके घरों और दफ्तरों को निशाना बनाने का आरोप है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा द्वारा पार्टी के 14 कार्यकर्ताओं की हत्या होने की बात कहे जाने बाद से भी पार्टी की राज्य ईकाई कुछ और कार्यकर्ताओं की हत्या का दावा कर चुकी है। इस हिंसा में पिछले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी 16 लोगों की मौत की पुष्टि की थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय की चार सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग टीम भी राज्य का दौरा कर चुकी है।

बंगाल हिंसा वाली रिपोर्ट राज्यपाल तक नहीं पहुँचे: ममता बनर्जी का ऑफिसरों को आदेश

यदि ममता बनर्जी के प्रथम कार्यकाल से ही हिन्दुओं पर हो रहे प्रहारों को भाजपा ने गंभीरता से लिया होता, आज बंगाल की सत्ता भाजपा के हाथों में होती और जितनी सीटें अभी संपन्न हुए चुनाव में आयी हैं, उससे अधिक पिछली विधान सभा में होतीं। फिर ममता द्वारा बांग्लादेशियों, रोहिंग्यों आदि के आधार कार्ड और पहचान पत्र आदि बनाए जाने के मुद्दे को भी भाजपा ने गंभीरता से नहीं लिया। वैसे यथासंभव दिल्ली की भी ऐसी ही स्थिति है, लेकिन दिल्ली भाजपा भी सोई हुई है। दिल्ली से लेकर बंगाल तक हिन्दुओं पर होते हमलों पर सारे छद्दम सेक्युलरिस्ट, संविधान की दुहाई देने वाले, #award vapasi, #mob lynching, #intolerance और "गंगा-जमुनी तहजीब" का नारे आदि लगाने वाले गैंगस्टर खामोश हैं, क्यों? यदि यही विपरीत दुर्घटनाएं किसी भाजपा शासित राज्य में हो रही होती, सबके सब सड़क से लेकर UNO तक पहुँच गए होते।  

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर यह आरोप लगाया है कि उन्होंने राज्य के अधिकारियों को चुनाव परिणाम के बाद शुरू हुई हिंसा पर रिपोर्ट देने से मना कर दिया। हिंसा पर आधारित यह रिपोर्ट राज्यपाल को दी जानी थी लेकिन सीएम ममता बनर्जी के कहने पर गृह सचिव ने राज्य की कानून व्यवस्था की रिपोर्ट राज्यपाल को दी ही नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि डीजीपी और पुलिस कमिश्नर द्वारा दी गई रिपोर्ट भी आगे नहीं बढ़ाई गई।

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने हिंदुस्तान टाइम्स के विनोद शर्मा से बात करते हुए उक्त आरोप लगाए हैं। इसके अलावा उन्होंने ट्वीट करके भी यह जानकारी साझा की।

Another sleepless night with reports of rampant post poll violence continually pouring. Ashamed of such anarchy and lawlessness @MamataOfficial.

In morning another shocker from print media! All is well ? How can this be ?

And today Central Minister attacked. pic.twitter.com/xgKlEltWeJ

— Governor West Bengal Jagdeep Dhankhar (@jdhankhar1) May 6, 2021

चुनाव बाद शुरू हुई हिंसा पर बात करते हुए राज्यपाल धनखड़ ने कहा कि बंगाल में 02 मई को विधानसभा चुनाव परिणाम के आने के बाद से ही हत्या, लूटपाट और महिलाओं एवं बच्चों के खिलाफ अपराध जारी है। ऐसे में राज्यपाल ने बताया कि उन्होंने राज्य के गृह सचिव, डीजीपी और कोलकाता पुलिस कमिश्नर को हिंसा की रिपोर्ट देने के लिए आदेशित किया। उन्होंने बताया कि इस दौरान उनके द्वारा कई बार मुख्यमंत्री से बात की गई लेकिन उनके द्वारा किसी भी प्रकार का कोई एक्शन नहीं लिया गया।

राज्यपाल धनखड़ से यह प्रश्न किया गया कि हिंसा प्रारंभ होने के समय ममता बनर्जी ने राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ नहीं ली थी तो क्या उन पर यह आरोप लगाया जा सकता है कि उन्होंने अधिकारियों को रिपोर्ट सबमिट करने से मना किया होगा?

इस पर राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने उत्तर देते हुए कहा कि राज्य गृह सचिव ने उनसे खुद यह बात कही कि उन्हें ममता बनर्जी द्वारा रिपोर्ट न देने के बारे में निर्देश आया था। इसके अलावा गृह सचिव ने राज्यपाल धनखड़ को यह भी अवगत कराया कि उन्हें डीजीपी और पुलिस कमिश्नर द्वारा राज्य कानून व्यवस्था पर दी गई रिपोर्ट भी राज्यपाल को न देने का निर्देश दिया गया था। राज्यपाल ने बताया कि 03 मई को चुनाव आचार संहिता समाप्त होने के बाद ममता बनर्जी के पास मुख्यमंत्री की सभी शक्तियाँ थीं।

ममता बनर्जी के शपथ ग्रहण के बाद वक्तव्य देने के प्रश्न पर राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने कहा कि स्वयं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ही इसके लिए उनसे आग्रह किया था और राज्य में लगातार चल रही हिंसा को देखते हुए उन्होंने इस मुद्दे को शपथ ग्रहण के बाद उठाना उचित समझा।

भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने हिंसा के दौरान राज्य का दौरा किया और हिंसा से पीड़ित लोगों से मिले। भाजपा अध्यक्ष के इस दौरे पर अपनी राय देते हुए बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने कहा कि वह एक संवैधानिक प्रमुख हैं और भाजपा अध्यक्ष के दौरे के विषय में विचार करना उनका अधिकार क्षेत्र नहीं है जब तक कि Covid-19 के प्रोटोकॉल्स का कोई उल्लंघन न हो। उन्होंने कहा कि वर्तमान में बंगाल की स्थिति को देखते हुए यह आवश्यक है कि सभी पार्टियाँ इस मुद्दे पर आगे आएँ और लोगों में विश्वास उत्पन्न करें।

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद से ही लगातार हिंसा हो रही है। भाजपा के कार्यकर्ताओं को प्रमुख रूप से निशाना बनाया जा रहा है। हजारों की तादाद में भाजपा कार्यकर्ता बंगाल से पलायन कर रहे हैं और असम की ओर जा रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में न केवल राज्यपाल अपितु गृह मंत्रालय ने भी राज्य में हो रही हिंसा की रिपोर्ट माँगी लेकिन उचित कार्रवाई न होने पर गृह मंत्रालय ने अपनी एक 4 सदस्यीय टीम बंगाल भेजी है जो सीधे गृह मंत्रालय को हिंसा की रिपोर्ट सौंपेगी।