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दिल्ली : केजरीवाल का वर्ल्ड क्लास शिक्षा मॉडल : बच्चों को पास कराने के लिए शिक्षक खुद लिख रहे कॉपियां

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के वर्ल्ड क्लास शिक्षा मॉडल की पोल खुल गई है। दिल्ली के सरकारी स्कूलों की कक्षा 9वीं और 11वीं का परीक्षा परिणाम इस बार बहुत ही खराब रहा है। दिल्ली के अधिकतर स्कूलों के परीक्षा परिणाम 40% से 50% के बीच ही रहे। पास होने से ज्यादा फेल होने वालों की संख्या है। रिजल्ट इतने खराब हुए कि अब शिक्षा निदेशालय की तरफ से दिल्ली के सरकारी स्कूलों को 6 अप्रैल तक रिजल्ट ठीक करने का समय दिया गया है। इससे केजरीवाल के उस दावे की भी पोल खुल गई जब वह शराब घोटाले में फंसे उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के लिए शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर काम करने के लिए ‘भारत रत्न’ से सम्मानित करने की मांग कर रहे थे।

अंक सुधार कर रिजल्ट वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा

एबीपी न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली के सरकारी स्कूलों के कक्षा 9वीं और 11वीं के परिणाम अनुमान के मुताबिक नहीं रहे हैं। एक शिक्षक के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि ज्यादातर सरकारी स्कूलों के रिजल्ट 40 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक ही सीमित रहे हैं। शिक्षा निदेशालय की ओर से दिल्ली के सरकारी स्कूलों को 6 अप्रैल तक का समय दिया गया है। इसके बाद अंक सुधार कर शिक्षा निदेशालय की वेबसाइट पर अंकों का विवरण पुनः अपलोड किया जाएगा।

बच्चों को पास कराने के लिए शिक्षक खुद लिख रहे कॉपियां

एबीपी न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों के हवाले से यह भी जानकारी है कि दोबारा अंकों को अपडेट किए जाने वाले निर्णय को लेकर अब शिक्षकों की ओर से खुद बच्चों को पास कराने के लिए कुछ कॉपिया भी लिखी गई है। इसके अलावा परिणाम को दोबारा बेहतर करने के लिए अब शिक्षकों की तरफ से प्रयास किए जा रहे हैं।

छात्रों की कापियों में सही उत्तर लिखने का शिक्षकों पर दबाव

वेबसाइट बेजोड़ रत्न के मुताबिक, बाहरी दिल्ली के एक सरकारी स्कूल के शिक्षक ने बताया कि स्कूलों का नौवीं और 11वीं का परिणाम बहुत खराब आया है। हालत ये हैं कि 96 प्रतिशत से अधिक छात्र फेल हुए हैं। 60 बच्चों की कक्षा में केवल चार से पांच बच्चे ही पास हैं। फेल छात्रों की इतनी बड़ी संख्या देखकर प्रधानाचार्य भी चकित हैं। अब शिक्षा निदेशालय की ओर से परिणाम जारी हो जाने के बाद छात्रों के अंकों में सुधार करने का समय दिया गया है। शिक्षकों का आरोप है कि प्रधानाचार्य अपने स्कूल के नौवीं और 11वीं के खराब परिणाम के चलते शिक्षा विभाग की नजर में न आएं और इन पर कोई खराब परिणाम आने का सवाल न उठाएं, इसके लिए शिक्षकों पर छात्रों की कापियों में सही उत्तर लिखकर दोबारा कापी जांच कर उनको पास करने का दबाव बनाया जा रहा हैं।

छात्रों को 80 अंकों की परीक्षा में 12 से 15 अंक आए

नई दिल्ली स्थित एक सरकारी स्कूल के शिक्षक ने बताया कि उनकी कक्षा में अंग्रेजी विषय में अधिकतर छात्र आठ से दस अंकों से फेल हैं। कई छात्रों ने उत्तरपुस्तिका के पन्नों को खाली छोड़ रखा है। कई छात्रों ने उत्तर ही गलत लिखे हैं। छात्रों को 80 अंकों की परीक्षा में 12 से 15 अंक आए हैं। अब शिक्षा निदेशालय ने जब छात्रों के अंकों में सुधार करने का समय दे दिया तो प्रधानाचार्य उन पर ज्यादा से ज्यादा छात्रों को पास करने का दबाव बना रहे हैं।

केजरीवाल ने की थी शिक्षा में सुधार के लिए भारत रत्न की मांग

केजरीवाल ने सिसोदिया को आजाद भारत और दुनिया का सबसे बेहतर शिक्षा मंत्री बताया था। उन्होंने एक बार कहा था- जिस व्यक्ति को पूरे देश की शिक्षा व्यवस्था सौंप देनी चाहिए। जिस व्यक्ति ने 5 साल के अंदर करिश्मा करके दिखा दिया, मौजूदा रवायती पार्टियां जो 70 साल में नहीं कर पाई वह 5 साल में कर दिया, जिस व्यक्ति ने सरकारी स्कूलों को शानदार बना दिया। ऐसे व्यक्ति को तो भारत रत्न मिलना चाहिए। प्रधानमंत्री को बुलाना चाहिए, कि जो भी पार्टी हो, पार्टीबाजी थोड़ी करनी है, देश का विकास करना है, मनीष जी बैठिए बताइए कैसे शिक्षा व्यवस्था ठीक करनी है।

स्कूल खूले – 0, शराब के ठेके खूले – 850

केजरीवाल के सिसोदिया को भारत रत्न दिए जाने की मांग के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने सिसोदिया के शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों का भी खुलासा किया। लोगों का कहना है कि सिसोदिया को भारत रत्न नहीं, भ्रष्टाचार करने के लिए लानत रत्न मिलना चाहिए। सिसोदिया ने दिल्ली में एक भी स्कूल नहीं खोला। यहां तक कि स्कूल के कमरे बनवाने में भ्रष्टाचार किया। स्कूल का एक कमरा बनवाने में 25 लाख रुपये खर्च किए। जबकि कमरा इससे कम में बन सकता था। वहीं शराब ठेके से तुलना करते हुए लोग कह रहे हैं कि दिल्ली में एक भी स्कूल नहीं खुला, लेकिन शराब के 850 ठेके खुल गए।

केजरीवाल के राज में अध्यापक जूता पॉलिस करने के लिए मजबूर

दरअसल दिल्ली विश्वविद्यालय के तहत आने वाले 12 कॉलेजों में से एक महाराजा अग्रसेन कॉलेज के अध्यापक जनवरी 2023 में सड़कों पर थे। कॉलेज के प्रोफेसरों ने कॉलेज के बाहर ही दिल्ली सरकार के खिलाफ नाराजगी जाहिर करने और अपनी बदहाली पर ध्यान आकर्षित करने के लिए लोगों के जूते पॉलिश किए। दिल्ली सरकार द्वारा इस कॉलजे का शत-प्रतिशत वित्तपोषण किया जाता है। लेकिन सरकार का खजाना खाली होने से कॉलेज के शिक्षकों को वित्तीय समस्याओं का सामना करना पड़ा।

दिल्ली शिक्षा मॉडल में भुखमरी के कगार पर पहुंचे कॉलेज अध्यापक

सम्मानजनक पेशे से जुड़े अध्यापक खुद को एकदम बेबस और अपमानित महसूस कर रहे हैं और मानसिक तनाव का शिकार हो रहे हैं। इससे परेशान अध्यापकों ने दिल्ली की केजरीवाल सरकार पर भी हमला बोला है। शिक्षकों का आरोप है कि शिक्षा क्षेत्र में बढ़-चढ़कर बखान करने वाली दिल्ली सरकार ने उन्हें भुखमरी के कगार पर ला दिया है। दिल्ली सरकार को बजट की समस्या से हो रही है जिसकी वजह से उन्हें समय पर वेतन नहीं दिया जा रहा है। सरकार सिर्फ आश्वासन पर आश्वासन दे रही है।

आम आदमी पार्टी का 2000 करोड़ का शिक्षा घोटाला, आरटीआई से हुआ खुलासा

कुछ समय पहले दिल्ली के शिक्षामंत्री रहे मनीष सिसोदिया का एक घोटाला सामने आया था। ये घोटाला स्कूलों के निर्माण से जुड़ा है। दरअसल एक आरटीआई में ये खुलासा हुआ है कि एक स्कूल का कमरा 24,85,323 रुपए में बनाया गया है। आरटीआई से पता चला है कि 312 कमरे 77,54,21,000 रुपये में और 12748 कमरे 2892.65 करोड़ रुपये में बनाए गए हैं। लोग केजरीवाल और सिसोदिया से ये सवाल पूछ रहे हैं कि एक कमरे की लागत में 24 लाख रुपये कैसे हो सकती है। क्या केजरीवाल जी ने कमरे में सोने की टाइल्स लगवाईं हैं?

दिल्ली के अधिकांश सरकारी स्कूलों में प्रिंसिपल ही नहीं, 84 प्रतिशत पद खाली

देश की राजधानी दिल्ली के सरकारी स्कूलों में प्रिंसिपल, वाइस-प्रिंसिपल और शिक्षकों के ढेरों पद खाली हैं। इससे दिल्ली में शिक्षा व्यवस्था का बुरा हाल है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली के अधिकतर स्कूल कई सालों से बिना प्रिंसिपल के ही चल रहे हैं। स्वयं दिल्ली शिक्षा निदेशालय (DoE) की तरफ से साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, शहर के सरकारी स्कूलों में प्रिंसिपल के 84 प्रतिशत पद खाली पड़े हुए हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली के सरकारी स्कूलों के लिए प्रिंसिपल के कुल 950 पद स्वीकृत हैं जिसमें से अब तक केवल 154 ही भरे गए हैं, जबकि 796 पद खाली हैं। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि ज्यादातर स्कूल को वाइस-प्रिंसिपल चला रहे हैं। हालांकि, इन स्कूलों में वाइस-प्रिंसिपल की भी भारी कमी है। दिल्ली के सरकारी स्कूलों में वाइस-प्रिंसिपल के कुल 1,670 पद हैं और इनमें से 565 पद अभी भी खाली हैं।

दिल्ली के स्कूलों में शिक्षकों के 33 प्रतिशत पद खाली

शिक्षकों को लेकर रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल 65,979 पदों में से सिर्फ 21,910 को ही भरा जा सका। यानी की इन स्कूलों में अभी भी शिक्षकों के लगभग 33 प्रतिशत पद खाली हैं। दिल्ली सरकार ने इन रिक्तियों के कारण आए अंतर को 20,408 अतिथि शिक्षकों से जरूर भरा है, लेकिन इसके बाद भी इन स्कूलों में अभी 1,502 शिक्षकों की कमी है।

केजरीवाल-सिसोदिया के शिक्षा मॉडल की खुली पोल: दसवीं की टॉप 10 रैंकिंग से दिल्ली बाहर

दिल्ली में सरकारी स्कूलों के दसवीं का रिजल्ट 81.27 प्रतिशत रहा है, जो देश के ओवरऑल 94.40 प्रतिशत से काफी कम है। दिल्ली ना सिर्फ रिजल्ट बल्कि रैंकिंग के मामले में काफी नीचे आ गई है। दसवीं की रैंकिंग में दिल्ली टॉप 10 से बाहर हो गई है। दिल्ली को 15वें नंबर से संतोष करना पड़ा है। नोएडा और पटना रैंकिंग में दिल्ली से आगे हैं। इतना ही नहीं इस बार दिल्ली 10वीं और 12 वीं दोनों की रैंकिंग में टॉप तीन से बाहर है। ये है केजरीवाल के शिक्षा का दिल्ली मॉडल।

दिल्ली कांग्रेस : केजरीवाल सरकार करवा रही थी नेताओं की जासूसी, होता था कैश पेमेंट, दो चाबियों से खुलती थी तिजोरी

                                                                                                                           साभार 
अन्ना हजारे के नेतृत्व में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से पैदा हुई आम आदमी पार्टी अब भ्रष्टाचार के आरोपों से इस कदर घिर चुकी है कि उसका किला ढहने ही वाला है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की सरकार घोटालों और भ्रष्टाचार के दलदल में धंस चुकी है। आम आदमी पार्टी के फाइनेंसर माने जाने वाले केजरीवाल के करीबी कैबिनेट मंत्री सत्येंद्र जैन पहले से ही जेल में थे और अब शराब घोटाले में मनीष सिसोदिया भी जेल पहुंच चुके हैं। केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी की सरकार भ्रष्टाचार में इस कदर आकंठ डूब चुकी है कि अब उनके खिलाफ जासूसी कांड में जांच का आदेश भी दे दिया गया है।

जासूसी मामले में सिसोदिया के खिलाफ जांच को मंजूरी

दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के खिलाफ मामला दर्ज करने के सीबीआई के अनुरोध को मंजूरी दे दी। उनपर आरोप है कि दिल्ली सरकार ने राजनीतिक खुफिया जानकारी जुटाने के लिए विजिलेंस डिपार्टमेंट के तहत फीडबैक यूनिट का गठन किया था।

राजनीतिक जासूसी के लिए बनाई गई फीडबैक यूनिट

दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार फीडबैक यूनिट का इस्तेमाल राजनीतिक जासूसी के लिए कर रही थी, सीबीआइ ने अपनी रिपोर्ट में इस बार से पर्दा उठाया है।सीबीआइ ने कहा है कि यह यूनिट वैसे तो दिल्ली सरकार के विभागों में कामकाज की निगरानी के लिए बनाई गई थी। लेकिन असल मकसद कुछ और निकला।

सत्ता में आने के बाद AAP ने बनाई थी फीडबैक यूनिट

2015 में सत्ता में आने के बाद आम आदमी पार्टी सरकार ने अपने सतर्कता विभाग को मजबूत करने के लिए फीडबैक यूनिट बनाई थी। आरोप है कि इसके माध्यम से नेताओं की कराई गई जासूसी थी।

जासूसी के लिए तिजोरी में रखा था कैश, दो चाबियों से खुलता था

केजरीवाल सरकार ने विजिलेंस डिपार्टमेंट में बनाए गए ‘फीडबैक यूनिट’ से नेताओं की जासूसी कराई। दिलचस्प बात यह है कि इस सीक्रेट ऑपरेशन में खर्च होने वाले पैसे के भुगतान के लिए ‘सीक्रेट सर्विस फंड’ बनाया गया था। वहीं इस फंड को रखने के लिए एक ऐसी तिजोरी का इस्तेमाल हुआ जोकि दो चाबियों को एक साथ घुमाने पर खुलता था।

सीक्रेट ऑपरेशंस के लिए होता था नकद में पेमेंट

फीडबैक यूनिट (FBU) को 2015 में AAP सरकार द्वारा गठित किया गया था। इस यूनिट के तहत सीक्रेट ऑपरेशंस के लिए नकद में पेमेंट किया जाता था और इसकी डिटेल एक रजिस्टर में रखी जाती थी। इसमें ‘S’ के आगे नंबर लिखा जाता था।

सतर्कता विभाग के अधिकारी ने की जासूसी की शिकायत

फीडबैक यूनिट का गठन 2015 में किया गया था। 2016 में सतर्कता विभाग के एक अधिकारी ने शिकायत दर्ज करायी थी कि इसकी आड़ में जासूसी की जा रही है। 2015 में ही इस यूनिट के खिलाफ आवाज उठी थी और बाद में मामला सीबीआई को सुपुर्द कर दिया गया था।

सीक्रेट सर्विस फंड की तिजोरी पर अधिकारी ने उठाया सवाल

2016 में फीडबैक यूनिट की शिकायत करने वाले विजिलेंस डिपार्टमेंट के एक अधिकारी ने अपने पत्र में यह सब बातें लिखी हैं। जिसे सीबीआई ने सबूत के तौर पर शामिल किया है। इस यूनिट के कथित रूप से गठन होने के सात महीने बाद और इसमें शामिल होने के चार महीने बाद दो में से एक अधिकारी पुलिस उपाधीक्षक शम्स अफरोज ने सीक्रेट सर्विस फंड की तिजोरी की दो चाबियों में से एक को अपने पास रखने का दावा किया। अफरोज ने विजिलेंस विभाग के विशेष सचिव को तीन पेज का पत्र लिखकर इसकी वित्तीय कार्यप्रणाली के संबंध में सवाल खड़े किए। अफरोज को दिल्ली सरकार में उप निदेशक (प्रशासन और वित्त) के रूप में नियुक्त किया गया था। वो 30 मई को कथित रूप से गठित की गई यूनिट में शामिल हुए थे और उन्होंन 22 सितंबर 2016 को पत्र लिखा था।

मामला उठा तो CBI को सौंपा गया जांच का जिम्मा

उपराज्यपाल अनिल बैजल ने परियोजनाओं की फीडबैक लेने और कर्मचारियों के भ्रष्टाचार की जानकारी देने के लिए आप सरकार द्वारा गठित फीडबैक यूनिट के कर्मचारियों को बर्खास्त कर इसके दफ्तर को हमेशा के लिए बंद कर दिया गया था। इससे पूर्व उपराज्यपाल रहे नजीब जंग ने उपराज्यपाल की मंजूरी लिए बिना गोपनीय तरीके से फीडबैक यूनिट बनाने के जांच का मामला सीबीआइ को सौंपा था और उस समय से सीबीआइ इस मामले की जांच कर रही है।

फीडबैक यूनिट को करना था विजिलेंस विभाग के अधीन काम

एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक फीडबैक यूनिट को भले ही परियोजनाओं की फीडबैक लेने और भ्रष्टाचार की जानकारी देने के नाम पर गठित की गई थी लेकिन इसकी गतिविधियां रहस्यमयी थीं। सतर्कता विभाग के सचिव ने सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय के अधीन काम करने वाली फीडबैक यूनिट की जानकारी कई बार पत्र लिखकर मांगी थी लेकिन उन्हें कभी जानकारी नहीं दी गई। जबकि फीडबैक यूनिट को विजिलेंस विभाग के अधीन काम करना था। सूत्र बताते हैं कि इसके फंड व खर्च आदि को लेकर भी गोपनीयता बरती गई।

फीडबैक यूनिट के स्टाफ को दी जा रही थी गाड़ी, आफिस, टेलिफोन 

उपराज्यपाल द्वारा फीडबैक यूनिट पर कड़े तेवर दिखाने के बाद दिल्ली सरकार का विजिलेंस विभाग भी सतर्क हो गया।उसने कई कर्मचारियों के काम को एक साल का मियाद पूरी होने के बाद कांट्रैक्ट को आगे नहीं बढ़ाया। वहीं कई कर्मचारियों ने यूनिट को लेकर बढ़ते विवाद को देखते हुए नौकरी छोड़ दी। बाकी बचे कर्मचारियों को बर्खास्त कर यूनिट को हमेशा के लिए बंद करने का आदेश जारी किया गया।एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक यूनिट के स्टाफ को वेतन के अलावा गाड़ी, आफिस व टेलिफोन आदि की सुविधा दी गई थी।

राजनीतिक खुफिया जानकारी जुटाने में लग गई यूनिट

सीबीआई की शुरुआती जांच में सामने आया है कि FBU को जो काम दिया गया था, वह उसके अलावा खुफिया राजनीतिक जानकारियां जुटाने में भी लग गई। वह किसी व्यक्ति की राजनीतिक गतिविधियों, उससे जुड़े संस्थानों और AAP के राजनीतिक फायदे वाले मुद्दों के लिए जानकारी जुटाने लगी।

सीबीआई की जांच में क्या-क्या पाया?

सीबीआई की शुरुआती जांच में सामने आया है कि फीडबैक यूनिट (एफबीयू) को जो काम दिया गया था, वह उसके अलावा खुफिया राजनीतिक जानकारियां जुटाने में भी जुटी थी। वह किसी व्यक्ति की राजनीतिक गतिविधियों, उससे जुड़े संस्थानों और आम आदमी पार्टी के राजनीतिक फायदे वाले मुद्दों के लिए जानकारी जुटाने लगी थी।

एफबीयू ने कुल 700 केसों की जांच की। इनमें 60% राजनीतिक निकले। जिनका सरकार के कामकाज से कोई लेनादेना नहीं था। सीबीआई के अनुसार, अभी यह साफ नहीं कि एफबीयू अभी भी एक्टिव है या नहीं।

सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में सरकारी खजाने में नुकसान का भी जिक्र किया। एजेंसी की मानें तो फीडबैक यूनिट के गठन और काम करने के गैरकानूनी तरीके से सरकारी खजाने को लगभग 36 लाख रुपये का नुकसान हुआ। सीबीआई ने कहा था कि किसी अधिकारी या विभाग के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।

सीबीआई रिपोर्ट के मुताबिक, एफबीयू की स्थापना के लिए कोई प्रारंभिक मंजूरी नहीं ली गई थी, लेकिन अगस्त 2016 में सतर्कता विभाग ने अनुमोदन के लिए फाइल तत्कालीन एलजी नजीब जंग के पास भेजी थी। जंग ने दो बार फाइल को खारिज कर दिया।

फीडबैक यूनिट पर देशविरोधी गतिविधियों में संलिप्तता का आरोप

फीडबैक यूनिट (एफबीयू) मामले में दिल्ली सरकार की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। एलजी कार्यालय ने पूर्व सांसद संदीप दीक्षित और दो पूर्व मंत्रियों के पत्र को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई के लिए मुख्य सचिव को भेज दिया है। खुफिया जानकारियां इकट्ठा करने के लिए एफबीयू के गठन पर सवाल उठने के बाद पूर्व सांसद सहित दो पूर्व मंत्री मंगत राम सिंघल और किरण वालिया ने एलजी को पत्र लिखकर एनआईए या सीबीआई से जांच करवाने की मांग की थी।

इसे भ्रष्टाचार से अलग मानते हुए देशविरोधी गतिविधियों में संलिप्तता का आरोप लगाते हुए दिल्ली सरकार के मंत्रियों और अधिकारियों के खिलाफ राजद्रोह की कार्रवाई की मांग की गई थी। इस मामले में आम आदमी पार्टी ने भी एलजी, कांग्रेस और भाजपा पर निशाना साधते हुए कई सवाल उठाए हैं।

‘सत्येंद्र, सिसोदिया, केजरीवाल…शराब घोटाले के तीन दलाल’ : राजघाट पर बीजेपी का मौन प्रदर्शन, दिल्ली मुख्यमंत्री से माँग रहे इस्तीफा

देश में आपातकाल के बाद 1977 में हुए चुनावों में एक नारा "नसबंदी के तीन दलाल इंदिरा, संजय बंसी लाल" प्रमुख था, जिसका नुकसान कांग्रेस को हुआ कि सत्ता चली गयी, और अब 2023 में अरविन्द केजरीवाल की आम आदमी पार्टी द्वारा हुए शराब घोटाले में "शराब घोटाले के तीन दलाल सत्येंद्र, सिसोदिया केजरीवाल" नारा चर्चा में है।   
शराब घोटाला मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ आज राजघाट पर भारतीय जनता पार्टी के कुछ नेता मौन प्रदर्शन कर रहे हैं। इस धरने पर बैठे लोगों के हाथ में कई पोस्टर हैं। जिनमें केजरीवाल, सिसोदिया और सत्येंद्र जैन का नाम लिखा गया है।

धरने के बैनर पर पीछे देख सकते हैं कि लिखा है- “शराब घोटाले के सरगना केजरीवाल इस्तीफा दो। दिल्ली के भ्रष्ट मुख्यमंत्री की सदबुद्धि के लिए मौन व्रत।”

इसके अलावा नेताओं ने जो हाथ में पोस्टर लिए हैं उन पर लिखा है- “केजरीवाल के दो मंत्री गए जेल। केजरीवाल इस्तीफा दो-इस्तीफा दो।”, एक पर लिखा है- “दिल्ली सरकार घोटाले का खेल, मनीष सिसोदिया चले जेल।”, “शराब घोटाले के तीन दलाल, सत्येंद्र, सिसोदिया और केजरीवाल”, “गली-गली में शोर है, सिसोदिया चोर है।”

इस मौन प्रदर्शन में शामिल नेता लगातार धरने की तस्वीरें साझा कर रहे हैं। उनका कहना है, “भ्रष्टाचारी केजरीवाल के इस्तीफे तक भाजपा का संघर्ष जारी रहेगा। भ्रष्टाचारी केजरीवाल इस्तीफा दो!”

सुकेश चंद्रशेखर ने लिया केजरीवाल का नाम

मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी के बाद से शराब घोटाला मामले में अरविंद केजरीवाल से भी इस्तीफा माँगा जा रहा है। पिछले दिनों जेल में बंद सुकेश चंद्रशेखर ने भी केजरीवाल को लेकर दावा किया था कि अब अगला नंबर केजरीवाल का आएगा। सुकेश ने कहा था, “मैंने यह लिखित में दिया है कि मैं उनके कितने करीब रहा हूँ और मैं उनमें से हर एक को बेनकाब करने जा रहा हूँ। अरविंद केजरीवाल किंगपिन हैं। वह ‘वजीर’ हैं और उन्हें बहुत जल्द पकड़ लिया जाएगा…मैं उनके साथ चार अलग-अलग मामलों में शामिल था, लेकिन शराब घोटाले में नहीं।”

केजरीवाल को मोदी के विकल्प के रूप में देख रहे हैं लोग : मनीष सिसोदिया

ऊंट अपने आपको हमेशा सबसे बड़ा समझता है, वही स्थिति आम आदमी पार्टी की है, जिसे दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने अरविन्द केजरीवाल की तुलना नरेंद्र मोदी से करके सिद्ध कर दी। बड़बोले मनीष को शायद नहीं मालूम की मोदी कभी यू-टर्न नहीं लेते, जबकि केजरीवाल पता नहीं बार यू-टर्न ले चुके हैं; दूसरे, केजरीवाल अराजकताओं का समर्थन करते हैं, जबकि मोदी ऐसे तत्वों को बख्शते नहीं; तीसरे, जिन कृषि सुधारों को लाने का पिछले पंजाब चुनावों में आम आदमी पार्टी के घोषणा-पत्र में उल्लेख था, उसी को मोदी द्वारा कानून का रूप देते ही, सबसे पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने लागु किया, लेकिन आंदोलन होते देख आन्दोलनजीवी ने तुरंत यू-टर्न ले, आंदोलन को समर्थन देना शुरू कर दिया। 

अगर जनता केजरीवाल में मोदी का विकल्प देख रही होती, 2014 में पंजाब से लोकसभा की 4 सीटें 2019 में मात्र एक नहीं रह जाती। इतना ही नहीं, आम आदमी पार्टी ही एक मात्र ऐसी पार्टी है जिसके 96+ प्रतिशत उम्मीदवारों की जमानत जब्त होती है। अभी गुजरात में हुए चुनावों में 500+ उम्मीदवारों में से लगभग 492 उम्मीदवारों की जमानत जब्त। 2014 और 2019 लोक सभा चुनावों में कितने उम्मीदवारों की जमानत जब्त हुई थी, यह भी आंकड़ा देकर मोदी का विकल्प बताते, तब अधिक अच्छा लगता। इतना ही नहीं, हैदराबाद में हुए निकाय चुनावों में आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार आज़ाद उम्मीदवार की हैसियत से लड़े। कोई आप समर्थित आज़ाद उम्मीदवार भिन्न-भिन्न चिन्हों पर मैदान में थे। दिल्ली की तरह कोई मुफ्त की रेवड़ियां नहीं खाने के चक्कर में फंसता।     

लोकसभा के बाद राज्यसभा में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सरकार (संशोधन) विधेयक, (GNCTD) बिल 2021, पास होने के बाद आम आदमी पार्टी के नेता मोदी सरकार पर निशाना साध रहे हैं। 

दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि इस विधेयक के पास होने से पता चलता है कि भाजपा सरकार सीएम अरविंद केजरीवाल और उनके कामों से कितना असुरक्षित महसूस कर रही है। लोग इस बात को कहने लगे हैं कि अरविंद केजरीवाल, मोदी के विकल्प हो सकते हैं। ये बिल मुख्यमंत्री केजरीवाल को आगे बढ़ने से रोकने के लिए लाया गया है।

मनीष सिसोदिया ने कहा, “पीएम मोदी आज नकारात्मक राजनीति में उतर आए हैं। तो उन्हें राजनीतिक जवाब मिलेगा। हम अपने कानूनी विशेषज्ञों से बात कर रहे हैं और हमारे विकल्प तलाश रहे हैं। सीएम केजरीवाल एक योद्धा हैं, पिछले 6 वर्षों में उनकी कोशिशों के बावजूद उन्होंने अपने सभी वादे पूरे किए जिनका मेनिफेस्टो में उल्लेख था।”

केंद्र सरकार ने GNCTD विधेयक को लोकसभा और राज्यसभा से पारित करवा लिया है। ये नया बिल एजली को विशेष शक्ति देने वाला विधेयक है। विधेयक में यह स्पष्ट किया गया है कि दिल्ली में सरकार का मतलब उप राज्यपाल है। इसके पास होने पर आम आदमी पार्टी के नेता जमकर विरोध कर रहे हैं। उनका मानना है कि इससे सीएम की शक्तियाँ कम हो जाएँगी। राज्यसभा में विधेयक पेश होने के वक्त भी विपक्ष ने जमकर हंगामा किया। राज्यसभा सांसद सुशील गुप्ता ने भी इस दौरान भाजपा सरकार पर सवाल उठाए।

सुशील गुप्ता ने कहा कि दिल्ली की जनता ने धर्म और जाति की राजनीति को फेल करके अरविंद केजरीवाल के विकास के मॉडल को तवज्जो दी है। आज दिल्ली का विकास मॉडल जिस तरीके से पूरे देश में फैल रहा है। अरविंद केजरीवाल की लोकप्रियता से घबराकर मोदी जी ने इस सवाल का जवाब संसद में खुद दे दिया।

आगे आप नेता सुशील ने भी PM मोदी का विकल्प अरविंद केजरीवाल को बताया और कहा कि दिल्ली मॉडल को रोकने के लिए यह बिल पास किया गया है। उनके अनुसार, आदमी जिस से डरता है, उसका रास्ता रोकता है। दिल्ली में किस तरीके से विकास हुआ, उस विकास को पसंद कर अब देश के अन्य राज्य भी अरविंद केजरीवाल की तरफ बढ़ रहे हैं।