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राजस्थान सरकार की बड़ी लापरवाही, केंद्र से मिले 1500 वेंटिलेटर में से ज्यादातर 10 महीनों से डिब्बों में बंद

मोदी विरोधी किस हद तक मोदी विरोध में जनता की जानों से खिलवाड़ कर रही है, वह कांग्रेस शासित राजस्थान में दिखने को मिल रही है। 
कोरोना की दूसरी लहर देश में लोगों को तेजी से संक्रमित कर रही है। रोजाना कोरोना के नए मामले रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं। इसके बावजूद राजस्थान सरकार आँखें मूँदकर बैठी है और अपनी नाकामियों के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहरा रही है।

कांग्रेस शासित राजस्थान को पीएम केयर फंड के तहत प्राप्त 1500 वेंटिलेटर में से ज्यादातर डिब्बों में बंद पड़े हैं। ये वेंटिलेटर राज्य सरकार को 10 महीने पहले मिले थे। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, इन 1,500 वेंटिलेटरों में से 230 खराब हैं। कोरोनो महामारी के बावजूद इनकी साल भर से ना तो रिपेयरिंग हुई है, ना ही इन्हें बदला गया है।

अब तक राजस्थान में 6,33,951 लोगों की कोविड-19 के लिए जाँच की जा चुकी है, जिसमें 1,89,178 एक्टिव मामले सामने आए हैं। वहीं अब तक कोरोना की वजह से राजस्थान में 4,558 लोग अपनी जान गँवा चुके हैं।

बताया जा रहा है कि जोधपुर में तो पीएम केयर फंड के 100 में से एक भी वेंटिलेटर को चालू नहीं किया गया है। इसके अलावा पहले से खरीदकर प्रदेश के अस्पतालों में लगाए गए 164 वेंटिलेटर भी काम नहीं कर रहे। वहीं, डॉक्टरों का कहना है कि मरीजों के हिसाब से अभी भी प्रदेश में 1000 और वेंटिलेटर्स की जरूरत है।

इसी तरह जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज में आईसीयू में इस साल फरवरी में 50 वेंटिलेटर लगाए गए थे। हालाँकि, इन्हें कुछ दिनों पहले ही पहली बार इस्तेमाल में लाया गया था। पिछले 6 महीनों से यहाँ 18 अन्य वेंटिलेटर काम नहीं कर रहे हैं। इसी तरह, अन्य मेडिकल कॉलेजों में भी वेंटिलेटर खराब हैं। जयपुरिया में एक साल से 7 वेंटिलेटर, कांवटिया में 2, गणगौरी में 6 वेंटिलेटर खराब हैं।

कोटा में मेडिकल कॉलेजों को 138 वेंटिलेटर दिए गए थे। इनमें से 65 या तो स्थापित नहीं थे या इनमें कमी बताकर इन्हें हटा दिया गया था। उदयपुर के आरएनटी मेडिकल कॉलेज को 95 वेंटिलेटर मिले थे, जो एक साल तक स्टोर हाउस में बंद रहे। इनमें से 22 को ईएसआईसी हॉस्पिटल में इंस्टॉल किया गया, लेकिन ये बार-बार बंद हो गए। अंत में 5 अप्रैल, 2021 के बाद 32 वेंटिलेटर अपडेट किए गए।

इसके अलावा, अजमेर में 300 और भरतपुर में 60 वेंटिलेटर हैं, ये भी अस्पताल में स्थापित किए जा चुके हैं। बांसवाड़ा में 22 वेंटिलेटर्स में से 5, नागौर में 52 में से 16 वेंटिलेटर ही स्थापित किए गए हैं।

राजस्थान से पहले कांग्रेस शासित पंजाब में भी इस तरह की लापरवाही का मामला सामने आ चुका है। पंजाब में 250 वेंटिलेटर एक साल से गोदाम में पड़े थे। द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल 20 मार्च को केंद्र सरकार ने राज्य में लगभग 30 करोड़ रुपए की लागत से 290 वेंटिलेटर भेजे थे। लेकिन राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने एक साल बाद भी इसका इस्तेमाल नहीं किया है। उसे गोदाम में बंदकर धूल जमने के लिए रखा गया।

इन वेंटिलेटर को मेडिकल कॉलेजों या अन्य कोविड सेंटर में भेजा जाना था, जहाँ पर L-3 केयर प्रदान किया जाता है। L-3 केयर उन मरीजों को दी जाती है, जिन्हें दो या दो से अधिक ऑर्गन सपोर्ट या मैकेनिकल वेंटिलेशन की आवश्यकता होती है। बताया गया कि मेडिकल कॉलेजों या कोविड सेंटरों से माँग इसलिए नहीं की गई, क्योंकि वेंटिलेटर पर मरीजों की देखभाल करने वाले कुशल मैन पावर की कमी थी। 

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट में आगे कहा गया कि यह पहला मौका नहीं था जब राज्य के अस्पताल वेंटिलेटर का उपयोग करने में विफल रहे। पाँच साल पहले, 10 वेंटिलेटर सिविल अस्पताल, लुधियाना भेजे गए थे, लेकिन पाँच साल तक उनका इस्तेमाल नहीं किया गया था। बाद में विवाद होने और महामारी के बढ़ने पर एक स्थानीय निजी अस्पताल को वेंटिलेटर सौंपा गया। 

केजरीवाल 7 प्लांट के रूपए कहां है? केंद्र सरकार द्वारा 8 PSA ऑक्सीजन प्लांट का फंड देने के बाद भी केजरीवाल सरकार ने मात्र 1 ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हो रही मीटिंग को सार्वजनिक कर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने अपनी मूर्खता का परिचय देकर साबित कर दिया कि दिल्ली वालों ने मुफ्त के चक्कर में कैसे झूठे आदमी को अपना मुख्यमंत्री बना दिया। हमेशा अपनी नाकामियों को मोदी सरकार पर थोपने वाले ने स्वयं ही साबित कर दिया कि उसे या उसकी पार्टी को जनहित नहीं बल्कि अपनी तिजोरियों की चिंता है। 

जिस मुख्यमंत्री को यह भी नहीं मालूम कि जिस काम के लिए वह बोल रहे हैं, वही एयर फ़ोर्स और रेलवे पहले ही से कर रहे हैं। क्या ऐसे व्यक्ति को मुख्यमंत्री बने रहने का हक़ है? आखिर कब तक झूठ बोल और मुफ्त की रेवड़ियों के दम पर राज करते रहोगे? यह मुख्यमंत्री केवल विज्ञापनों के माध्यम से जनता को मुर्ख बनाने का काम कर रहा है, वह धन जनहित के लिए जारी हुए धन का अधिकांश भाग है। 

रंगे हाथ पकडे गए केजरीवाल 

देश में न तो कोरोना की दूसरी लहर आने की कोई चेतावनी थी और न ही इतनी अधिक ऑक्सीजन की मांग बढ़ने की संभावना थी। फिर भी केंद्र की मोदी सरकार सजग थी। पूरे देश में ऑक्सीजन की समस्या से निजात दिलाने के लिए पहल की, लेकिन केजरीवाल जैसे असफल मुख्यमंत्रियों की घटिया राजनीति की वजह से आज जनता ऑक्सीजन के लिए संघर्ष कर रही है।  

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की लापरवाही का खामियाजा आज दिल्ली की जनता भुगत रही है। दिल्ली में जो ऑक्सीजन संकट है, वो केजरीवाल की लापरवाही और राजनीति की वजह से उत्पन्न हुआ है। कोरोना की पहली लहर से सबक लेते हुए मोदी सरकार ने दिल्ली सरकार को 8 ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए पीएम केयर्स फंड से पैसे जारिए किए थे, लेकिन केजरीवाल सिर्फ एक ही प्लांट लगा पाये। आज अपनी नाकामियों का ठीकरा केंद्र सरकार पर फोड़ कर महामारी पर राजनीति करने में लगे हैं। 

केजरीवाल की इस नाकामी का खुलासा केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दिल्ली हाई कोर्ट में किया। मंत्रालय ने कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार ने पीएम केयर्स फंड से दिसंबर 2020 में ही केजरीवाल सरकार को ऑक्सीजन के लिए राशि मुहैया कराई थी। केंद्र सरकार द्वारा यह राशि दिल्ली में 8 PSA (Pressure Swing Absorption) ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करने के लिए दी गई थी लेकिन केजरीवाल सरकार ने अब तक मात्र एक ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किया है।  

दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले पर केजरीवाल सरकार को जमकर फटकार लगाई और कहा कि सरकार के कुप्रशासन और अक्षमता के कारण आज राजधानी में ऑक्सीजन का संकट उत्पन्न हुआ है। कोर्ट ने सरकार से यह सवाल भी किया कि केंद्र सरकार द्वारा फंड दिए जाने के बाद भी केजरीवाल सरकार अब तक मात्र एक PSA ऑक्सीजन प्लांट क्यों स्थापित कर पाई है? 

केंद्र सरकार के अधिकारी निपुण विनायक के मुताबिक दिल्ली में सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र अस्पताल और वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज एवं सफ़दरगंज अस्पताल में अभी तक PSA ऑक्सीजन प्लांट की स्थापना हेतु साइट क्लियरेन्स नहीं दिया गया है। दो अस्पतालों में साइट क्लियरेन्स का काम पूरा हो गया है जहां 30 अप्रैल तक ऑक्सीजन संयंत्र के उपकरण स्थापित कर दिए जाएँगे। कोर्ट ने आदेश दिया है कि राज्य के बाकी अस्पताल भी केंद्र की योजनाओं के साथ सामंजस्य बैठाकर कार्य करें।

23 अप्रैल 2021 को हुई बैठक में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने हाथ जोड़कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि वह कुछ राज्यों से बात करें और दिल्ली की ऑक्सीजन की समस्या हल करवाएँ।


हालाँकि, अरविंद केजरीवाल की आपदा में भी राजनीति करने की प्रवृत्ति के बीच केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि केंद्र सरकार ने पीएम केयर्स फंड से दिसंबर 2020 में ही केजरीवाल सरकार को ऑक्सीजन के लिए राशि मुहैया कराई थी। केंद्र सरकार द्वारा यह राशि दिल्ली में 8 PSA (Pressure Swing Absorption) ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करने के लिए दी गई थी लेकिन केजरीवाल सरकार ने अब तक मात्र एक ऐसा ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किया।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मामले पर केजरीवाल सरकार को फटकार लगाई है और कहा है कि सरकार के कुप्रशासन और अक्षमता के कारण आज राजधानी में ऑक्सीजन का संकट उत्पन्न हुआ है। न्यायालय ने सरकार से यह प्रश्न भी किया है कि केंद्र सरकार द्वारा फंड दिए जाने के बाद भी केजरीवाल सरकार अब तक मात्र एक PSA ऑक्सीजन प्लांट क्यों स्थापित कर पाई है?

उच्च न्यायालय के आदेश में कहा गया है कि केंद्र सरकार के अधिकारी निपुण विनायक ने बताया कि दिल्ली में सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र अस्पताल और वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज एवं सफ़दरगंज अस्पताल में अभी तक PSA ऑक्सीजन प्लांट की स्थापना हेतु साइट क्लियरेन्स नहीं दिया गया है। दो अस्पतालों में साइट क्लियरेन्स का काम पूरा हो गया है जहाँ 30 अप्रैल तक ऑक्सीजन संयंत्र के उपकरण स्थापित कर दिए जाएँगे।

                                                   दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश का एक भाग
न्यायालय ने यह भी आदेश दिया है कि राज्य के बाकी अस्पताल भी केंद्र की योजनाओं के साथ सामंजस्य बैठाकर कार्य करें और अगली सुनवाई में इसकी रिपोर्ट न्यायालय को सौंपी जाए। न्यायालय ने यह भी कहा है कि केंद्र सरकार को प्रतिदिन के हिसाब से ऑक्सीजन आपूर्ति की स्थिति का आकलन करना चाहिए जिससे बेहतर तरीके से ऑक्सीजन की समस्या को सुलझाया जा सके। 

पटपड़गंज का मैक्स अस्पताल ऑक्सीजन की भारी कमी को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय पहुँच गया था जिस पर न्यायालय ने तत्काल सुनवाई की थी। न्यायालय ने केंद्र को कहा था कि चाहे भीख माँगनी पड़े या चोरी करनी पड़ जाए लेकिन चिकित्सा उद्देश्यों के लिए ऑक्सीजन की आपूर्ति की जानी चाहिए। न्यायालय ने यह भी कहा था कि यदि उद्योगों से ऑक्सीजन खरीदने से वो उद्योग बंद होते हैं तो उन्हें बंद हो जाने दीजिए लेकिन लोगों की जान ज्यादा कीमती है। 

प्रधानमंत्री के साथ बैठक में केजरीवाल का झूठ 

एक ओर जहाँ दिल्ली के अस्पताल ऑक्सीजन की कमी से लगातार जूझ रहे हैं और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ऑक्सीजन की कमी का रोना रो रहे हैं, वहाँ यह खबर आ रही है कि शुक्रवार की बैठक से पहले उन्होंने केंद्र से कभी ऑक्सीजन के मसले पर बात ही नहीं की। प्रधानमंत्री के साथ हुई बैठक में केजरीवाल ने भारतीय रेलवे की ऑक्सीजन एक्सप्रेस का मुद्दा उठाया लेकिन भारतीय रेलवे ने भी यह बयान जारी किया है कि दिल्ली सरकार ने फिलहाल इस मुद्दे पर उनसे कोई भी चर्चा नहीं की है। 

रेलवे के द्वारा जारी बयान में बताया गया है कि महाराष्ट्र की सरकार ने 15 अप्रैल को रेल मंत्रालय से रेल के द्वारा लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन के परिवहन की संभावनाओं पर चर्चा की थी जिस पर विचार करते हुए रेलवे ने एक विस्तृत प्लान तैयार किया और 19 अप्रैल को पहली ऑक्सीजन एक्सप्रेस विशाखापट्टनम से मुंबई के लिए रवाना हुई।

ऑक्सीजन के टैंकरों को उतारने और चढ़ाने के लिए रेलवे ने मात्र 24 घंटों में रैम्प का निर्माण करवाया। ऑक्सीजन एक्सप्रेस के इस सफल परिचालन के बाद अन्य राज्यों ने भी ऑक्सीजन एक्सप्रेस के द्वारा ऑक्सीजन के परिवहन में रुचि दिखाई है जिनमें आंध्रप्रदेश, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश शामिल है लेकिन रेलवे ने दिल्ली के द्वारा ऐसी किसी भी माँग की जानकारी नहीं दी है।

सोनिया गाँधी के खिलाफ FIR दर्ज : PM केयर्स फंड मामला

सोनिया गांधी के ये 5 सुझाव कोरोना से ...
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
पीएम-केयर फंड को लेकर कांग्रेस पार्टी द्वारा फैलाई जा रही लगातार गलत जानकारियों के बाद कर्नाटक के शिमोगा में कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। दर्ज FIR में सोनिया गाँधी पर भ्रामक और गलत जानकारी देने का आरोप लगाया गया है।
जानकारी के मुताबिक कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी के खिलाफ आईपीसी की धारा 153, 505 के तहत ये एफआईआर दर्ज की गई है। एफआईआर में अपील की गई है कि सोनिया गाँधी के खिलाफ कानूनी कार्यवाही होनी चाहिए। दरअसल जिस सोशल मीडिया एकाउंट से पीएम केयर्स फंड को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे थे, उसमें कांग्रेस अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी की पहचान हैंडलर के रूप में की गई है।
कथित तौर पर कांग्रेस पार्टी ने 11 मई को एक ट्वीट किया था, जिसमें पीएम केयर्स फंड के बारे में गलत जानकारी दी गई थी। दरअसल यह एफआईआर कर्नाटक में शिमोगा जिले के वकील प्रवीण द्वारा कराई गई है।
इससे पहले सोनिया गाँधी ने कोरोना महामारी से लड़ने के लिए बनाए गए PM CARES यानी ‘प्राइम मिनिस्टर सिटीजन्स असिस्टेंस एंड रिलीफ इन इमरजेंसी सिचुएशन’ कोष में जमा राशि को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में ट्रांसफर करने की माँग की थी, हालाँकि यह साफ नहीं हो सका है कि किस ट्वीट के खिलाफ सोनिया गाँधी पर यह FIR दर्ज की गई है।

कोरोनो वायरस जैसी महामारी के खिलाफ लड़ने को लेकर सार्वजनिक रूप से दान प्राप्त करने के लिए इस वर्ष 27 मार्च को पीएम केयर्स फंड ट्रस्ट का गठन किया गया था। इस ट्रस्ट के अध्यक्ष स्वयं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और इसके सदस्य के रूप में रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और वित्त मंत्री शामिल हैं।
PM केयर्स फंड से ही भारत सरकार ने कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में 3100 करोड़ रुपये खर्च करने की घोषणा की थी। 3100 करोड़ रुपये में से, लगभग 2000 करोड़ रुपये की राशि वेंटिलेटर्स की खरीद के लिए, 1000 करोड़ रुपये का उपयोग प्रवासी मजदूरों की देखभाल के लिए 100 करोड़ रुपये वैक्सीन विकसित करने के लिए दिया जाएगा।
केंद्रीय सरकार की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक पीएम केयर्स फंड से लगभग 2000 करोड़ रुपए खर्च करके मेड-इन-इंडिया निर्मित 50000 वेंटिलेटर खरीदे जाएँगे। यह वेंटिलेटर सरकार द्वारा चलाए सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में चलाए जा रहे कोरोना अस्पतालों में दिए जाएँगे, जिससे गंभीर कोरोनो मरीजों का बेहतर इलाज किया जा सके। यह कदम देश भर में कोरोना वायरस के मामलों से निपटने के लिए सहायक साबित होगा।
congress president Rahul Gandhi Sonia Gandhi Rajiv Gandhi Indira ...PM CARES ने एक हफ्ते में जुटाए ₹6500 करोड़, इसे PMNRF में ट्रांसफर किया जाए : सोनिया गाँधी 
कांग्रेस की वर्तमान अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने कोरोना महामारी से लड़ने के लिए स्थापित किए गए PM केयर्स के अंतर्गत अब तक जमा हुई संपूर्ण धनराशि को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) में ट्रांसफर करने के लिए प्रधानमंत्री से कहा है। सोनिया गाँधी के अनुसार बेहतर पारदर्शिता, जवाबदेही के लिए यह कदम उठाया जाना बेहद जरूरी है।
भले ही सोनिया गाँधी का यह बयान सामान्य लग रहा हो, लेकिन ऐसे समय में जब देश एक वैश्विक महामारी से निपटने की कोशिश कर रहा है, यह बयान राजनीति से प्रेरित है। इस संदर्भ में बताना जरूरी है कि PMNRF हमेशा एक प्रबंधन समिति की देखरेख में संचालित होता है, जो जमा हुई धनराशि का नियोजन प्रधानमंत्री के विवेकानुसार सुनिश्चित करती है। बता दें कि पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा PMNRF की स्थापना के समय से लेकर आज तक इसकी प्रबंध समिति में कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष भी हमेशा शामिल रहता है, जो कि वर्तमान में सोनिया गाँधी हैं।
यहाँ तक की 1985 में राजीव गाँधी कार्यकाल के दौरान इस कोष की मैनेजिंग कमेटी ने कोष के प्रबंधन से संबंधित सभी अधिकार प्रधानमंत्री को सौंप दिए। प्रधानमंत्री को अधिकार मिल गया कि वह अपने प्रतिनिधि के रूप में किसी को ‘कोष का सचिव’ नियुक्त कर सकते हैं जिसके पास अन्य बातों के अलावा इस कोष के बैंक अकाउंट संचालित करने का भी अधिकार था।
वुहान कोरोना वायरस के इस संकट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने PM CARES फंड लॉन्च किया है, जिसमें सहयोग करने के लिए उन्होंने पूरे देश का आव्हान किया है। यह एक आपातकालीन कोष है जिसका उपयोग कोरोना वायरस से निपटने के लिए किया जाएगा। PM CARES यानी ‘प्राइम मिनिस्टर सिटीजन्स असिस्टेंस एंड रिलीफ इन इमरजेंसी सिचुएशन’ कोष की स्थापना पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट के रूप में की गई है। प्रधानमंत्री जहाँ इस ट्रस्ट के चेयरमैन हैं, वहीं देश के रक्षा मंत्री, वित्त मंत्री तथा गृह मंत्री इस ट्रस्ट के सदस्य हैं।
जैसे ही यह कोष लॉन्च हुआ, देश के हर ख़ास-ओ-आम से इसे अपार सहयोग मिलना प्रारम्भ हो गया। जिसमें आम जनता से लेकर उद्योगपतियों, फिल्म स्टार्स आदि ने अपना अपना अंशदान करना शुरू कर दिया। यहाँ ये सवाल लगातार पूछा जा रहा कि आखिर PM CARES फंड नामक नए फंड की जरूरत क्या थी जब कि PMNRF मौजूद था ही?
यह दिलचस्प है कि सोनिया गाँधी पीएम केयर्स में अब तक जमा हुई धनराशि ₹6500 करोड़ को PMNRF में ट्रांसफर करने की माँग करेंगी, जबकि पीएम केयर्स सिर्फ कोरोना महामारी से लड़ने के लिए स्थापित किया गया है और PMNRF हर एक आपदा से निपटने के लिए बनाया गया है।

शायद ऐसा इसलिए है, क्योंकि PMNRF सीधे प्रधानमंत्री के नियंत्रण में है और सोनिया गाँधी को उम्मीद है कि भविष्य में एक दिन देश का प्रधानमंत्री गाँधी परिवार से ही होगा। इस तरह यह धनराशि प्रधानमंत्री के नियंत्रण में होगी। यह कहना गलत नहीं होगा कि पीएम केयर्स PMNRF की तुलना में कहीं अधिक उचित और पारदर्शी है।
PM CARES, PMNRF की तुलना में कहीं ज्यादा पारदर्शी और सक्षम है हालाँकि, PMNRF भी समय-समय पर नागरिकों की मदद के लिए आगे आता रहा है। यहाँ यह भी बताते चलें कि PM CARES में 13 विशेषज्ञों को भी शामिल करने का प्रावधान है जो अपनी सेवाएँ देश के लिए निःशुल्क प्रदान करेंगे। इसमें सलाहकारी बोर्ड के तौर पर भी 10 व्यक्तियों को शामिल करने की व्यवस्था है, जिन्हें ट्रस्टीज द्वारा डॉक्टरों, स्वास्थ्य सेवा प्रोफेशनलों, अकादमिक जगत के लोगों, अर्थशास्त्रियों और वकीलों में से चुना जाएगा।
वरिष्ठ अधिकारी ने इकनॉमिक टाइम्स को बताया कि “PMNRF के विपरीत, पीएम केयर्स में ट्रस्टियों की जिम्मेदारी परिभाषित की गई है। PMNRF में सलाहकार बोर्ड का कोई प्रावधान नहीं है। इसमें ट्रस्ट के सदस्यों के रूप में प्रधानमंत्री, उप प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री, कांग्रेस अध्यक्ष और टाटा ट्रस्ट के प्रतिनिधि और फिक्की का चुना गया उद्योग प्रतिनिधि हैं।”
बीजेपी के एक सीनियर नेता ने PM CARES पर कांग्रेस के विरोध को खुद के स्वार्थों से प्रेरित बताते हुए कहा कि वे सिर्फ इसलिए विरोध कर रहे हैं क्योंकि PM CARES में PMNRF की भाँति कांग्रेस अध्यक्ष को जगह नहीं दी गई है। बीजेपी नेता ने आगे कहा, ”इस फंड में बीजेपी से भी कोई नहीं है- ट्रस्ट में जो भी लोग हैं वो सरकार में अपनी पोजीशन की वजह से हैं।” 
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वक्तव्य अब शायद देश में कानून बन चुके हैं। शायद ही उनकी किसी बात को मानने से देशवासी .....
उन्होंने आगे कहा कि पीएम केयर्स का उद्देश्य सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल या किसी अन्य प्रकार की आपातकालीन आपदा जैसे कि संकट में राहत या सहायता और मानव निर्मित या प्राकृतिक आपदाओं के बीच स्वास्थ्य एवं दवा जैसी सुविधाएँ शामिल हैं।