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अन्ना की अपील: केजरीवाल को वोट मत देना, वह शराब में पैसा लेकर नशे में डूब गया, आम आदमी पार्टी के 63% प्रत्याशियों पर क्रिमिनल केस; ‘यमुना में जहर’ के आरोपों पर अरविंद केजरीवाल के खिलाफ एक और मुकदमा


आम आदमी पार्टी की इमेज की पोल एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (ADR) की रिपोर्ट ने खोल कर रख दी है। आप को साफ-सुथरी और ईमानदार पार्टी बताने वाले अरविंद केजरीवाल ने जिन उम्मीदवारों को दिल्ली चुनाव में टिकट दी हैं, उनमें से 63 प्रतिशत के खिलाफ तो क्रिमिनल केस चल रहे हैं। दूसरी ओर केजरीवाल के गुरू रहे वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने भी दिल्ली के मतदाताओं के केजरीवाल को वोट ना देने की अपील की है। अन्ना हजारे ने मीडिया से बातचीत में साफ-साफ कहा कि केजरीवाल पैसे और नशे में डूब गया है। दिल्ली के विकास के लिए बेदाग उम्मीदवारों को अपना प्रतिनिधि चुनें, ना कि शराब और पैसे के नशे में डूबे अरविंद केजरीवाल और उसकी पार्टी के उम्मीदवारों को। दिल्लीवासियों का वोट बहुमूल्य है, इसलिए अपना वोट सिर्फ और सिर्फ निष्कलंक व्यक्ति को दें। इसी में दिल्ली और देश की भलाई है। गौरतलब है कि अन्ना ने लोकसभा चुनाव में भी केजरीवाल और उसकी पार्टी को वोट ना देने कि अपील की थी और आप दिल्ली की सातों सीटों पर हारी थी।
‘यमुना में जहर’ के आरोपों पर अरविंद केजरीवाल के खिलाफ एक और मुकदमा
यमुना के पानी में भाजपा सरकार द्वारा जहर मिलाने के आरोपों को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) के मुखिया अरविंद केजरीवाल के खिलाफ हरियाणा में एक और FIR दर्ज की गई है। कोर्ट के आदेश के बाद हरियाणा के कुरुक्षेत्र स्थित शाहाबाद पुलिस स्टेशन में अरविंद केजरीवाल और अन्य AAP के अज्ञात सदस्यों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है।
इससे पहले हरियाणा सरकार ने अरविंद केजरीवाल के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज कराई थी। हरियाणा के राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री विपुल गोयल ने बताया है कि केजरीवाल के खिलाफ सोनीपत की एक अदालत में आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस मामले में सोनीपत की अदालत ने केजरीवाल को 17 फरवरी को उपस्थित होने के लिए कहा है।

INDI ब्लॉक का हिस्सा रहीं 5 पार्टियां दिल्ली में एक-दूसरे के खिलाफ
दिल्ली के चुनाव में इंडी गठबंधन की मतलब की यारियों की भी पोल खुल गई है। राजनीतिक स्वार्थ की इंतेहा देखिए, गठबंधन की पांच पार्टियां अब विरोधी बन गई हैं। लोकसभा चुनाव में INDIA ब्लॉक का हिस्सा रहीं 5 पार्टियां एक-दूसरे के खिलाफ मैदान में हैं। इनमें आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस सभी 70 सीटों पर आमने-सामने हैं। वहीं, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) ने 6, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया- मार्कसिस्ट (CPM) और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया- मार्कसिस्ट लेनेनिस्ट (CPI-ML) ने 2-2 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं। चुनाव आयोग के मुताबिक निर्दलीय समेत विभिन्न पार्टियों के कुल 699 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं।

आम आदमी पार्टी के 44 उम्मीदवारों पर क्रिमिनल केस

इस बीच एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (ADR) की रिपोर्ट ने आम आदमी पार्टी की पोल खोलकर रख दी है। एडीआर ने इन उम्मीदवारों के हलफनामों की जांच करके एक रिपोर्ट तैयार की है। इसके मुताबिक करीब 19 फीसदी यानी 132 उम्मीदवार आपराधिक छवि के हैं। इनमें से 81 पर हत्या, किडनैपिंग, बलात्कार जैसे गंभीर मामले दर्ज हैं। 13 उम्मीदवार महिलाओं के खिलाफ अपराधों में आरोपी हैं। AAP के 63 प्रतिशत उम्मीदवारों पर क्रिमिनल केस हैं। यानी आप के 70 में से 44 उम्मीदवारों पर कोई ना कोई क्रिमिनल केस चल रहे हैं। कांग्रेस के भी 29 प्रत्याशियों के खिलाफ ऐसे केस चल रहे हैं।

अन्ना की दिल्ली चुनाव में एंट्री, केजरीवाल को वोट ना देने की अपील
उधर वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने दिल्ली चुनाव में एंट्री करते हुए केजरीवाल एंड कंपनी को वोट ना देने की अपील दिल्ली के मतदाताओं से की है। अन्ना हजारे ने कहा कि शराब में पैसे की कमाई करके केजरीवाल भी पैसे और नशे में डूब गया है। जनता की भलाई की अब उसे कोई परवाह नहीं है। उन्होंने कहा कि जनता का वोट बहुमूल्य है। इसलिए अपना वोट निष्कलंक व्यक्ति को दें, क्योंकि अरविंद केजरीवाल तो शराब और पैसे के नशे में डूब गया है। गौरतलब है कि अन्ना हजारे ने लोकसभा चुनाव से पहले भी अहमदनगर में केजरीवाल को वोट ना देने की अपील की थी। तब भी अन्ना हजारे ने यह कहा था कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शराब की लत में पैसा डूब जाने के कारण भ्रष्टाचार किया है। उन्होंने जनता से ऐसे लोगों को ना चुनने का आग्रह किया है। उन्होंने पत्रकारों को बताया कि देश की चाबी मतदाताओं के हाथ में है…इसलिए इस चाबी का सही इस्तेमाल कर सही उम्मीदवार को चुना जाना चाहिए। हमेशा याद रखें सही उम्मीदवारों को चुनें जो सही छवि वाला राजनेता हो, न कि जिसके पीछे ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) पड़ी हो। उन्होंने कहा कि “पैसे लेकर वोट देना देश का दुर्भाग्य है और बलिदानियों का अपमान है। इसलिए बेदाग उम्मीदवारों को चुनें।”

चुनाव से ठीक पहले दिल्ली की सीएम आतिशी पर दोहरी मुसीबत
दिल्ली चुनाव में आप की मुश्किलें कम होने के नाम नहीं ले रही हैं। चुनाव से ठीक पहले दिल्ली की सीएम आतिशी पर दोहरी मुसीबत आ गई है। एक तरफ जहां दिल्ली पुलिस ने मुख्यमंत्री आतिशी के खिलाफ आदर्श आचार संहिता उल्लंघन एवं लोकसेवकों को कर्तव्यों का पालन करने से रोकने के आरोप में मामला दर्ज किया है, तो दूसरी तरफ दिल्ली हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री आतिशी के खिलाफ दर्ज मानहानि का एक मामला खारिज किए जाने के विरुद्ध BJP नेता की याचिका पर मुख्यमंत्री को नोटिस जारी किया है। दरअसल आतिशी ने आरोप लगाया था कि भाजपा ने आम आदमी पार्टी (आप) के विधायकों को खरीदने का प्रयास किया था जिसके विरोध में भाजपा नेता ने उनके खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज कराया था। एक अधिकारी ने मुताबिक आतिशी आम आदमी पार्टी (आप) के समर्थकों के साथ थीं, जिन्होंने फतेह सिंह मार्ग पर एक अधिकारी को कथित रूप से उसका कर्तव्य पालन करने से रोका। उन्होंने बताया कि आप के 2 सदस्यों ने पुलिस कांस्टेबल पर हमला किया। बता दें कि CM आतिशी दिल्ली की कालकाजी विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी (आप) की उम्मीदवार हैं। पुलिस अधिकारी ने बताया, ”हमने कालकाजी से ‘आप’ उम्मीदवार आतिशी के खिलाफ गोविंदपुरी थाने में विभिन्न धाराओं के तहत एक प्राथमिकी दर्ज की है और आगे की जांच की जा रही है।

दिल्ली चुनाव में भाजपा के चक्रव्यूह में फंसी आम आदमी पार्टी
देश की राजधानी दिल्ली के विधानसभा चुनाव में सत्ता में वापसी के लिए भाजपा ने हर तरह की रणनीति अपना कर आम आदमी पार्टी (आप) के लिए चक्रव्यूह बुन दिया है। भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के बाद अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में 2013 में पहली बार सत्ता में आई आप 11 साल बाद अपने किले को बचाने की सबसे बड़ी चुनौती का सामना कर रही है। क्योंकि केजरीवाल समेत आप के कई मंत्रियों और विधायकों पर भ्रष्टाचार के ही आरोप हैं। पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल और डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया करोड़ों के शराब घोटाले में जेल की हवा खा आए हैं। दरअसल, केंद्र की सत्ता भाजपा के पास तीसरी बार आ चुकी है। अब दिल्ली की सत्ता पर काबिज होने के लिए भाजपा ने ऐडी चोटी का जोर लगा दिया है। आप को तगड़ी चुनौती देने के लिए भाजपा ने भी बिजली, छात्रवृत्ति, साफ पानी, यमुना की सफाई के साथ महिलाओं को हर माह पैसे देने जैसी ‘मोदी गारंटी’ दी है, वहीं मौजूदा कल्याणकारी योजनाएं बंद नहीं करने का भी ऐलान किया जा रहा है। इसके अलावा केंद्र सरकार ने कर्मचारियों को लुभाने के लिए आठवें वेतन आयोग और बजट में मध्यम वर्ग के लिए 12 लाख रुपए की आय को करमुक्त कर बहुत बड़ी सौगात दे दी है।

‘आप’ की कमजोरी
● केजरीवाल और सिसोदिया समेत कई नेताओं का जेल में जाना
● आप के विधायकों और नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप
● आम आदमी पार्टी में भाऱी असंतोष व भितरघात का खतरा
● आप पार्टी से अल्पसंख्यक व दलित वोटर्स में नाराजगी
● एक दशक की एंटी एन्कंबेसी के चलते हार का खतरा ज्यादा
● दिल्ली में विकास कार्य ना होना, बुनियादी सुविधाओं का अभाव
● इंडिया ब्लॉक में शामिल कांग्रेस का मजबूती से चुनाव लड़ना

सरकारी म्यूजियम से नेहरू से लेकर एडविना तक की चिट्ठी उठाकर ले गईं सोनिया गाँधी, PMML ने वापस माँगे दस्तावेज

                       सोनिया गाँधी, जवाहरलाल नेहरू और एडविना (फोटो साभार: मिंट/आज तक)
अहमदाबाद के इतिहासकार और लेखक रिजवान कादरी ने कॉन्ग्रेस नेता सोनिया गाँधी को एक पत्र लिखकर भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से संबंधित निजी दस्तावेजों की वापसी, उनकी प्रतियाँ या उनके डिजिटल एक्सेस की माँग की है। इन दस्तावेजों में नेहरू और जयप्रकाश नारायण, एडविना माउंटबेटन, अल्बर्ट आइंस्टीन, अरुणा आसफ अली, विजया लक्ष्मी पंडित और बाबू जगजीवन राम के बीच हुए पत्राचार शामिल हैं। कादरी, जो प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय सोसायटी (PMML) के सदस्य हैं, ने इस मामले को उठाते हुए इन दस्तावेजों को सार्वजनिक शोध और ऐतिहासिक अध्ययन के लिए आवश्यक बताया है।

कादरी ने अपने पत्र में लिखा कि इन दस्तावेजों का ऐतिहासिक महत्व अत्यधिक है, और इन तक पहुँच सुनिश्चित करना जरूरी है ताकि देश के इतिहास को समग्रता से समझा जा सके। उनका कहना है कि इन कागजातों तक पहुँच होने से भारत के स्वतंत्रता संग्राम, राष्ट्रीय निर्माण और भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस की महत्वपूर्ण जानकारी हासिल की जा सकेगी। उनके अनुसार, गाँधी जी के लेखन को व्यवस्थित रूप से दस्तावेज किया गया है, लेकिन सरदार पटेल के योगदान को लेकर इतने व्यापक दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए नेहरू और उनके पिता मोतीलाल नेहरू द्वारा छोड़े गए दस्तावेज बेहद महत्वपूर्ण हैं।

कादरी ने पत्र में कहा कि नेहरू परिवार के प्रतिनिधि के रूप में सोनिया गाँधी द्वारा कुछ निजी दस्तावेज 2008 में वापस ले लिए गए थे। ये दस्तावेज 51 बॉक्सों में थे और इनमें से कुछ को निजी और सरकारी दस्तावेजों के रूप में वर्गीकृत किया गया था। कादरी ने इन दस्तावेजों को PMML में वापस लाने या उनकी प्रतियां उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है ताकि वे शोधकर्ताओं और आम जनता के लिए उपलब्ध हो सकें। उन्होंने कहा कि अगर ये दस्तावेज वापस नहीं किए जा सकते, तो उनका डिजिटलाइजेशन किया जा सकता है ताकि उन्हें बिना नुकसान पहुँचाए संरक्षित रखा जा सके।

कादरी ने सुझाव दिया है कि वह दो योग्य सहायकों की मदद से इन दस्तावेजों को स्कैन कर सकते हैं ताकि वे वैज्ञानिक दृष्टिकोण से व्यवस्थित और सुरक्षित रहें। उन्होंने कहा कि वह इस प्रक्रिया के खर्चे को वहन करने के लिए तैयार हैं और इस बात का ध्यान रखेंगे कि दस्तावेजों की समयरेखा में कोई छेड़छाड़ न हो।

इस मामले पर सोनिया गाँधी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालाँकि, कादरी ने अपने पत्र में आशा जताई है कि यह मांग राष्ट्रीय हित और इतिहास के सही अध्ययन के लिए की गई है, और इसे स्वीकार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नेहरू के योगदान का निष्पक्ष और राजनीतिक प्रभाव से मुक्त अध्ययन किया जाना चाहिए, ताकि उनकी भूमिका को सही परिप्रेक्ष्य में समझा जा सके।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, इन दस्तावेजों की वापसी का मामला पहली बार फरवरी 2023 में PMML की वार्षिक बैठक में उठाया गया था। यह बैठक रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई थी, जिसमें यह चर्चा हुई थी कि सोनिया गाँधी द्वारा 2008 में 51 बॉक्स वापस लिए गए थे। इन दस्तावेजों में नेहरू और एडविना माउंटबेटन के बीच हुए पत्राचार भी शामिल थे, जिनके बारे में कई बार सवाल उठाए गए हैं। कुछ सदस्यों ने इस बात पर भी जोर दिया है कि इन पत्रों को वापस लाया जाए और यह सुनिश्चित करने के लिए फॉरेंसिक ऑडिट की मांग की है कि कोई महत्वपूर्ण दस्तावेज गायब न हों।

कादरी का कहना है कि इतिहासकारों को नेहरू, गाँधी और पटेल के योगदान को सही ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में अध्ययन करने का मौका मिलना चाहिए। उन्होंने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि सोनिया गाँधी द्वारा किए गए दस्तावेजों की वापसी अच्छे इरादों से की गई थी ताकि इनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। हालाँकि, अब समय आ गया है कि इन दस्तावेजों तक पहुँच प्रदान की जाए ताकि राष्ट्र के इतिहास का व्यापक अध्ययन हो सके।

कादरी ने यह भी सुझाव दिया कि अगर सोनिया गाँधी इन दस्तावेजों को वापस नहीं करना चाहतीं, तो वह उनकी प्रतियाँ उपलब्ध करा सकती हैं। इससे दस्तावेज सुरक्षित भी रहेंगे और साथ ही शोधकर्ताओं को उनका उपयोग करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि वह इस प्रक्रिया में पूरी मदद करने के लिए तैयार हैं और उम्मीद करते हैं कि सोनिया गाँधी इस पर सकारात्मक रुख अपनाएँगी।

यह मामला न केवल नेहरू के व्यक्तिगत दस्तावेजों की वापसी का है, बल्कि इससे जुड़ा एक बड़ा सवाल यह भी है कि ऐतिहासिक दस्तावेजों तक पहुँच कैसे सुनिश्चित की जाए ताकि राष्ट्र के इतिहास का सही ढंग से अध्ययन हो सके। कादरी जैसे इतिहासकारों का कहना है कि इन दस्तावेजों का महत्व इतना अधिक है कि इन्हें सिर्फ एक परिवार की निजी संपत्ति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इन्हें सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराना राष्ट्रीय हित में है, और इस दिशा में उचित कदम उठाए जाने चाहिए।

बिक गई है कलकत्ता हाई कोर्ट… एक भी वोट मत देना BJP को: ममता बनर्जी

घोटाले उजागर होने पर विपक्ष बौखला गया है। उनकी और हिटलर की कार्यशैली कोई अंतर नहीं। शिक्षक घोटाले पर कार्यवाही करने पर कलकत्ता हाई कोर्ट को कहना कि बिक गयी है। या तो घोटालेबाज़ों को घोटाले करने दो, वरना कोर्ट पर भी कीजड़ फेंकेंगे। 

बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा सुनाए गए ‘शिक्षक घोटाला’ मामले में फैसले पर कहा है कि भारतीय जनता पार्टी ने हाई कोर्ट को खरीद लिया है। उन्होंने घोटाले के तहत भर्ती हुए 26000 शिक्षकों की भर्ती रद्द किए जाने के मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी। जनता को भड़काते हुए सीएम ममता ने अपील की कि चाहे कुछ भी हो जाए भाजपा और सीपीएम को टीचरों और सरकारी मुलाजिमों से एक भी वोट नहीं मिलना चाहिए।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले पर नाराजगी जाहिर करने के दौरान कहा, “भाजपा और सीपीए या कॉन्ग्रेस को एक भी वोट नहीं मिलना चाहिए।” उन्होंने कहा कि भाजपा ने हाई कोर्ट को खरीद लिया है। अब बस उम्मीद बची है तो सुप्रीम कोर्ट से।

अपनी बात कहते हुए ममता बनर्जी बोलीं, “उन्होंने (भाजपा) हाई कोर्ट को खरीद लिया है। उन्होंने सीबीआई को खरीद लिया है। उन्होंने एनआईए को खरीद लिया है। उन्होंने बीएसएफ को खरीद लिया है। उन्होंने सीएपीएफ को खरीद लिया है। उन्होंने दूरदर्शन का रंग भगवा करवा दिया है। वो सिर्फ भाजपा और मोदी की बात करता है। उसे बिलकुल मत देखो। उसका बहिष्कार करो।”

ममता के इस बयान के बयान के बाद वरिष्ठ वकील विकास रंजन भट्टाचार्य ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयानों पर स्वत: संज्ञान लेने के लिए एक याचिका दायर की। उन्होंने कह कि ये कोर्ट की अवमानना है। लोग अदालत पर हँस रहे हैं। जजों को पक्षपाती कहा जा रहा है। अपनी याचिका के साथ उन्होंने पेपर की कटिंग भी दी है। उनकी इस याचिका पर कोर्ट ने मामले को लिस्ट करते हुए इसपर हलफनामा दायर करने को कहा है।

हाई कोर्ट का फैसला और टीएमसी की राजनीति

बंगाल के शिक्षक भर्ती घोटाले में लंबे समय से जाँच चल रही थी। इस केस में पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी समेत कई तृणमूल नेता जेल जा चुके हैं। वहीं कुछ दिन पहले ही SSC भर्ती घोटाले में फैसला सुनाते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली TMC सरकार को झटका दिया था।
स्कूल भर्ती घोटाले पर फैसला सुनाते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय ने कहा था कि 2016 के पूरे पैनल को रद्द किया जाए। 9वीं से लेकर 12वीं ग्रुप C एवं D में हुई सभी नियुक्तियों को अवैध ठहराते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा कि 23,753 नौकरियों को रद्द किया जाए। इतना ही नहीं, इन सभी को 4 सप्ताह के भीतर पूरा वेतन लौटाना होगा, वो भी 12% ब्याज के साथ।
अब ममता बनर्जी इसी कोर्ट के फैसले के खिलाफ जनता में जो गुस्सा उमड़ा है उसका प्रयोग चुनाव जीतने के लिए कर रही हैं। कुछ समय से संदेशखाली मुद्दे पर उनकी सरकार को बहुत आलोचना झेलनी पड़ी थी लेकिन इस मुद्दे को टीएमसी इस्तेमाल करने का कोई मौका नहीं छोड़ रही।

उत्तर प्रदेश : हलाला के डर से अस्मत बनी नेहा सिंह, मुस्लिम शिक्षिका : महाकाल का आशीर्वाद लेकर बोली- इस्लाम में औरतों की इज्जत नहीं

                          मुस्लिम शिक्षिका ने अपनाया हिंदू धर्म, बनीं नेहा सिंह (फोटो साभार: अमर उजाला)
बरेली के एक प्राइवेट स्कूल की 33 साल की शिक्षिका नेहा असमत ने इस्लाम में हलाला और ‘तीन तलाक’ के डर से हिंदू धर्म अपना लिया है। अब नेहा सिंह बन चुकी इस टीचर का कहना है कि उसने अपनी मर्जी से हिंदू धर्म अपनाया है। वो भगवान शंकर को अपना आराध्य मानती हैं।

उन्होंने इस बात का ऐलान किया कि उज्जैन के महाकाल के दरबार में आशीर्वाद लेकर उन्होंने हिंदू धर्म अपना लिया। दरअसल, इस टीचर के परिवार ने उनके साथी शिक्षक मोहित सिंह पर उन्हें अगवा करने का शक जताते हुए सोमवार (11 नवंबर, 2023) को बारादरी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अब इस टीचर ने अपनी और अपने साथी मोहित को जान का खतरा बताकर बरेली एसएसपी, डीएम और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सुरक्षा की गुहार लगाई है। जानकारी के मुताबिक, नेहा की अम्मी रानी बेगम ने सोमवार को बारादरी थाने में नेहा के अपहरण की रिपोर्ट कराई थी।

इस रिपोर्ट के आधार पर बारादरी पुलिस नेहा की तलाश कर रही थी। इस दौरान नेहा का उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर का फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस दौरान नेहा सिंह बन चुकी टीचर ने बरेली SSP के दफ्तर में अपनी सुरक्षा के लिए पत्र लिखा है।

इस पत्र के मुताबिक, उसने लिखा है कि वो बरेली के मुस्लिम बाहुल्य इलाके फाइक एनक्लेव की रहने वाली है। शुरू से ही उनका सनातन धर्म के लिए झुकाव था। उन्होंने बरेली कॉलेज से ग्रेजुएशन किया है और उसके बाद बीएड कर रही हैं और इसके साथ ही स्कूल में पढ़ा रही हैं। नेहा सिंह के मुताबिक, वो पढ़ी-लिखी और नौकरीपेशा है और खुद अच्छा-बुरा सब समझती हैं। उनके मुताबिक, बीज विकास निगम में लेखाकार रहे अब्बा असमत अली की मौत हो चुकी है।

                   मुस्लिम शिक्षिका नेहा असमत का पुलिस को दिया शिकायत पत्र (फोटो साभार: दैनिक भास्कर )

उनका आरोप है कि इसके बाद से ही उनकी अम्मी रानी बेगम के साथ मिलकर उनकी बहन गजाला, शबाना, बहनोई डॉ आसिफ और तनवीर अहमद उनका निकाह एक ऐसे अधेड़ शख्स से कराने की साजिश रच रहे हैं जो अपनी बीवी से तलाक लेने के बाद उसका हलाला करा चुका है। टीचर नेहा के मुताबिक, उन्हें यह शादी पसंद नहीं थी और परिवार ने अधिक दबाव बनाया तो उन्होंने घर छोड़ दिया। नेहा ने पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में अपने धर्म परिवर्तन का प्रमाणपत्र नत्थी किया है लेकिन इसमें अपनी शादी का जिक्र नहीं किया है।

उन्होंने ये भी साफ किया कि उनके परिवारवालों की संजयनगर के रहने वाले मोहित सिंह के खिलाफ अपहरण की रिपोर्ट झूठी है। जबकि उन्होंने खुद की मर्जी से घर छोड़ा और बगैर किसी दबाव के सनातन धर्म अपनाया है।

नेहा का कहना है कि उनके परिवार से उन्हें, मोहित और उसके परिवार को भी जान का खतरा है। वो उनका कत्ल करा सकते हैं। उन्होंने कहा है कि उनके और मोहित के साथ कुछ भी अनहोनी हुई तो इसके लिए उनका मुस्लिम परिवार जिम्मेदार होगा।

बच्चे खेल-खेल में पत्थर चला देंगे… बखेड़ा खड़ा हो जाएगा… इसलिए जुमे की नमाज में न आएँ: जहाँगीरपुरी की जामा मस्जिद का ऐलान

हनुमान जयंती की शोभायात्रा में हुई हिंसा के बाद दिल्ली के जहाँगीरपुरी स्थित जामा मस्जिद ने बच्चों को लेकर ऐलान किया है। मस्जिद प्रबंधन ने आज शुक्रवार (22 अप्रैल 2022) को होने वाली जुमे की नमाज़ में बच्चों को न आने के लिए कहा है। उधर दिल्ली भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने कुछ क्षेत्रों में अभी भी बुलडोजर की कार्रवाई जारी रखने की माँग की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जहाँगीरपुरी की जामा मस्जिद द्वारा बच्चों के जुमे की नमाज़ में न आने की वजह एहतियात बताया जा रहा है। बताया गया है कि मस्जिद के प्रबंधक नहीं चाहते कि कोई छोटा बच्चा खेल-खेल में पत्थर आदि चला दे और उससे बखेड़ा खड़ा हो जाए। फिलहाल मौके पर मस्जिद के आस-पास पुलिस और पैरामिलिट्री के जवानों के साथ-साथ मीडियकर्मियों भी मौजूद हैं।

‘बुलडोजर जारी रखें’ – दिल्ली भाजपा अध्यक्ष का पत्र

भाजपा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने दिल्ली के पूर्वी और दक्षिणी मेयर को अतिक्रमण के खिलाफ पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने कुछ क्षेत्रों के नाम देकर वहाँ बुलडोजर की कार्रवाई जारी रखने की माँग की है।

लोगों में चर्चा है कि इतने वर्षों से नगर निगम में भाजपा क्या कर रही थी? अवैध निर्माण, अतिक्रमण और अवैध रूप से रह रहे पाकिस्तानी, बांग्लादेशी और रोहिंग्या को क्यों नहीं निकाला गया? चुनाव आने पर या यूँ कहा जाए कि हनुमान जयंती शोभा यात्रा पर हुए पत्थराव के बाद ही क्यों याद आयी? दूसरे, नगर निगम से भ्रष्टाचार तक 1% भी दूर नहीं हुआ, विपरीत इसके बढ़ा है, क्यों? 

आदेश गुप्ता के मुताबिक, “दिल्ली में अतिक्रमण ज्यादातर बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों ने किया है। इन सभी को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल का संरक्षण प्राप्त है। यह अतिक्रमण लगभग 8 साल पुराना है।” 20 अप्रैल 2022 (बुधवार) को जारी हुए इस पत्र में आदेश गुप्ता ने अतिक्रमण करने वालों को ‘असामाजिक तत्व’ कहा है।

रोहिंग्या, बांग्लादेशियों को भगाने के लिए आंदोलन

एक अन्य ट्वीट में आदेश गुप्ता ने दिल्ली में रोहिंग्या और बांग्लादेशी समस्या के लिए कॉन्ग्रेस पार्टी को दोषी ठहराया है। उनके मुताबिक, “कॉन्ग्रेस द्वारा बसाए गए घुसपैठियों का भरण पोषण मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल कर रहे हैं। दिल्ली में घुसपैठियों के लिए कोई जगह नहीं है। इन्हें भगाने के लिए भाजपा आंदोलन करेगी।”