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राष्ट्रपति/राज्यपाल के लिए बिल की मंजूरी की टाइमलाइन तय नहीं कर सकती कोर्ट: SC का फैसला, कहा- अधिक देरी हुई तो दे गवर्नर को देंगे निर्देश


सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (20 नवंबर 2025) को एक अहम फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया कि गवर्नर और राष्ट्रपति को राज्य विधानसभाओं से आए बिलों पर फैसला लेने के लिए कोर्ट कोई टाइमलाइन तय नहीं कर सकता। कोर्ट ने कहा कि पिछले फैसले में तय की गई समय-सीमा और ‘डीम्ड असें’ (समय पर कार्रवाई न होने पर बिल को मंजूर मान लेना) संविधान के खिलाफ है। अदालत ने माना कि ऐसा करना गवर्नर और राष्ट्रपति की संवैधानिक शक्तियों में दखल होगा।

जानकारी के अनुसार, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि गवर्नर का काम किसी और संस्था से बदला नहीं जा सकता। यानी अगर गवर्नर बिल पर फैसला लेने में देर कर दें, तो भी अदालत उस प्रक्रिया में दखल नहीं दे सकती। कोर्ट तभी कदम उठा सकती है जब देरी बेहद ज़्यादा हो और उसकी कोई वजह न हो और तब भी अदालत सिर्फ इतना कह सकती है कि गवर्नर ‘उचित समय’ में फैसला लें, न कि क्या फैसला लें।

यह फैसला राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा भेजे गए सवालों पर दिया गया है, जिसमें उनसे पूछा गया था कि क्या अदालत गवर्नर और राष्ट्रपति की प्रक्रिया पर समय-सीमा तय कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि ऐसा करना सत्ता के विभाजन के सिद्धांत के खिलाफ है। कोर्ट ने यह भी कहा कि गवर्नर किसी ‘सुपर मुख्यमंत्री’ की तरह बर्ताव नहीं कर सकते, क्योंकि राज्य में दो सरकारें नहीं हो सकतीं।

 

हिंदू विरोधी AAP: कालनेमि अरविन्द केजरीवाल, सत्येंद्र जैन ने दिया था 22 से ज्यादा मंदिर तोड़ने का आदेश; दिल्ली और पंजाब से बाहर इस पार्टी के 99% उम्मीदवारों की जमानत ही जब्त नहीं बल्कि NOTA से भी कम वोट मिलते है

                                               मंदिरों में माथा टेकता हिन्दू विरोधी अरविन्द केजरीवाल 
तिहाड़ जाने से पहले और तिहाड़ से बाहर आने के हनुमान मन्दिर जाकर हनुमान भक्त कोई हनुमान भक्त नहीं कालनेमि हिन्दू है। दिल्ली के लोग एक खुलासे से सन्न रह गए हैं। एलजी सचिवालय की ओर से जारी दस्तावेजों के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और सत्येंद्र जैन की सिफारिशों के कारण दिल्ली में 22 से अधिक मंदिर तोड़ दिए गए थे। एलजी सचिवालय ने ये दस्तावेज दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी की ओर से उपराज्यपाल और बीजेपी पर मंदिर तोड़ने का आरोप लगाए जाने के बाद जारी किए हैं। जो यह साबित करता है कि केजरीवाल ही नहीं पूरी आम आदमी पार्टी ही एक fraud और हिन्दू विरोधी है। ये सब कालनेमि हिन्दू है। 

आतिशी ने कहा था कि धार्मिक समिति की सिफारिश पर एलजी ने दिल्ली में 7 धार्मिक स्थलों को तोड़ने का आदेश दिया है। इसका खंडन करते हुए एलजी सचिवालय ने दस्तावेज जारी कर कहा है कि अरविंद केजरीवाल और AAP के अन्य नेताओं के आदेश पर दिल्ली में 22 से अधिक मंदिर तोड़े गए हैं।  

दस्तावेजों के अनुसार तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने खुद 8 फरवरी 2023 को दिल्ली में 9 मंदिरों को तोड़ने के आदेश को मंजूरी दी थी। दिल्ली के तत्कालीन गृहमंत्री मनीष सिसोदिया ने इन 9 मंदिरों को तोड़ने की सिफारिश की थी। इसके पहले 23 जून 2016 को तत्कालीन गृहमंत्री सत्येन्द्र जैन ने भी 8 मंदिरों को तोड़ने की मंजूरी दी थी। जारी दस्तावेजों के अनुसार साल 2016 से 2023 तक केजरीवाल और उनके मंत्रियों ने कुल 24 धार्मिक ढांचों को तोड़ने की मंजूरी दी गई थी जिनमें 22 मंदिर और सिर्फ 1 दरगाह शामिल थी। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि सत्येन्द्र जैन ने 2017 में 2 अज्ञात मजारों को तोड़ने की सिफारिशों को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि इससे लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं। अशोक विहार फ्लाईओवर पर बनी मजार पर कितना शोर मचाया था। केजरीवाल और उनकी पार्टी बताए कि फ्लाईओवर पर कौन पीर आया था? दूसरे मुसलमानों में मुर्दे को जमीन में दफनाया जाता है फ्लाईओवर पर नहीं। 

समय आ गया है हिन्दू हिन्दू-विरोधी आम आदमी पार्टी से दूरी बनाए। इनके घड़ियाली आंसुओं पर शोक प्रकट करें सहानुभूति नहीं। वक़्फ़ बोर्ड को मालामाल करने का वायदा करने वाला कभी हिन्दू-हितैषी हो ही नहीं सकता। दूसरे, अभी पुजारियों और ग्रन्धियों को 18000 रूपए देने वाले केजरीवाल बताएं कि जब इमामों और मौलवियों को सौगात दे थी तब पुजारियों और ग्रंथियों को क्यों नहीं दी? सिखों का मानना है कि असली ग्रंथि इसे कभी स्वीकार ही नहीं करेगा। गुरुद्वारों में ही इतना दान आता है कि किसी गुरूद्वारे के ग्रंथी को किसी सरकारी मदद की जरुरत हो।      

एलजी ऑफिस के इस खुलासे से चुनाव से पहले दिल्ली की सियासत गरमा गई है। चुनाव से पहले मंदिर-मंदिर जाकर हिंदुओं की हमदर्दी हासिल करने की केजरीवाल की कोशिश को तगड़ा झटका लगा है। लोग इस खुलासे के बाद AAP संयोजक केजरीवाल और पार्टी पर तंज कस रहे हैं।

 

Modi के शपथ ग्रहण समारोह से लौटते ही चीन के जासूसी जहाज को दी मंजूरी; मालदीव के चीनपरस्त राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू बाज नहीं आए

मालदीव के चीनपरस्त राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने एक बार फिर भारत विरोधी कदम उठाया है। राष्ट्रपति बनते ही वे भारत के खिलाफ लगातार मुखर हैं। हालांकि राष्ट्रपति मुइज्जू ने लोकसभा चुनाव में एनडीए की शानदार जीत पर बधाई दी और वे पिछले सप्ताह भारत में पीएम मोदी के तीसरे शपथ समारोह में शामिल हुए। उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भी मुलाकात की थी। लेकिन, भारत से लौटते ही मुइज्जू अपने असली रंग में आ गए और चीन-प्रेम एक बार फिर उजागर हो गया है। ताजा मामले में मुइज्जू ने चीनी जासूसी जहाज को अपने देश में रुकने के लिए मंजूरी दे दी है। चीन ने मालदीव से अपने खोजी जहाज को डॉक करने के लिए मालदीव से मंजूरी मांगी है। हैरान करने वाली बात ये है कि श्रीलंका की सरकार द्वारा मना करने के बाद चीन के इस जासूसी जहाज को मालदीव ने अपने पोर्ट पर खड़े रहने की अनुमति दी है। हालंकि अभी यह साफ नहीं है कि यह जहाज मालदीव के एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन (ईईजेड) के समुद्र में खोज करेगा या नहीं! लेकिन चीन की समुद्री खनिज भंडारों पर निगाह जगजाहिर है। इसी बीच चीन की पीपुल्स पोलिटिकल कंसल्टेटिव कांफ्रेंस के वाइस चैयरमेन तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर मालदीव पहुंचे हैं।

मालदीव से रिश्तों को लगातार मजबूत करने में जुटा हुआ है चीन
मालदीव की मोहम्मद मुइज्जू की सरकार ने चीन के जासूसी जहाज को अपने देश में आने की मंजूरी दी है। इसके बाद चीनी जहाज मालदीव की ओर जा रहा है। एक भारतीय सैन्य अधिकारी और शोधकर्ता ने ये जानकारी दी है। मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने कुछ समय पहले चीन यात्रा के समय दोनों देशों के बीच रिश्तों को मजबूत करने की बात कही थी। मुइज्जू की यात्रा के बाद चीन के कुछ नेताओं ने भी मालदीव की यात्रा की है। जिसके बाद चीनी जहाज को माले आने की इजाजत दी गई है। ये मालदीव की मौजूदा सरकार के भारत विरोध और चीन की तरफ लगाव के रुख को भी दिखाता है। भारत के लिए चीन के जहाज का माले की तरफ जाना चिंता पैदा करता है। इसी बीच चीन की पीपुल्स पोलिटिकल कंसल्टेटिव कांफ्रेंस के वाइस चैयरमेन 3 दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर मालदीव पहुंच गए है।

एडलैब रिपोर्ट : छोटे देशों को कर्ज के बोझ तले फंसाने की है चीन की साजिश
दरअसल, चीन के सत्ताधीश छोटे देशों को कर्ज के मर्ज में फंसाकर अपने रणनीतिक और कूटनीतिक हित साधते रहे हैं। सूदखोर चीन भारत के पड़ोसी देशों पाकिस्‍तान, श्रीलंका, मालदीव आदि देशों पर 1.1 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज है। चीन के मकड़जाल का खुलासा हाल ही में अमेरिकी शोध संस्‍था एडलैब की एक रिपोर्ट में किया है। पाकिस्तान तो चीन का पैसा चुकाने के लिए अमेरिका से लेकर सऊदी अरब तक से कर्ज की भीख मांग रहा है। श्रीलंका मदद के लिए भारत से दोस्ती चाहता है। लेकिन चीन के टार्गेट पर मालदीव है। इसके लिए वह मालदीव के भारत विरोधी राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू से लगातार सांठगांठ कर कर रहा है। यह अलग बात है कि दुनिया के कुछ देश जहां बढ़ती आबादी को लेकर चिंतित हैं, वहीं चीन अब घटती आबादी से बुरी तरह परेशान है। लगातार दूसरे साल चीन की आबादी घटी है। इसका असर चीन की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है, जो खस्ताहाल हो रही है। पिछले साल चीन की इकोनॉमी 5.2 प्रतिशत पर आ गई। 2016 के बाद पहली बार निर्यात बुरी तरह गिरा है। विदेशी निवेशक व कंपनियां दूर हो रही हैं। एक्सपर्ट कहते हैं, आबादी घटती रही तो वर्कफोर्स घटेगी। इससे चीन की इकोनॉमी बड़े संकट में आ जाएगी।

सर्वे की आड़ में हिंद महासागर में जासूसी करता है चीनी जहाज, मालदीव बना टूल
विशेषज्ञों के अनुसार चीन अपने जासूसी जहाज के जरिए हिंद महासागर में सर्वे करने की कवायदों में जुटा रहता है। कहने को तो चीन अपने जहाज को रिसर्च शिप कहता है, लेकिन रिसर्च के बहाने वह भारत के आसपास हिंद महासागर में जासूसी करता है। माना जा रहा है कि चीन भविष्‍य में हिंद महासागर में सैन्‍य अभियान चला सकता है,  और इसके लिए वह जासूसी जहाज से सर्वे कर रहा है। चीन का यह कदम भारत की सुरक्षा के लिए खतरा साबित हो सकता है। ओपन सोर्स इंटेलिजेंस अनैलिस्ट ने सैटलाइट तस्वीरों के आधार पर यह जानकारी दी है। ये चीनी जहाज इतने शक्तिशाली रेडॉर से लैस हैं कि वे उड़ीसा में भारतीय मिसाइलों के परीक्षण तक निगरानी कर सकने में सक्षम हैं।

पाक को कर्ज में डुबोने के बाद अब मालदीव बना चीन का नया गुलाम
चीन के इन जासूसी जहाजों का भारत के साथ ही अमेरिका ने भी कड़ा विरोध किया है। इसके बावजूद मालदीव की मंजूरी साफ तौर पर मुइज्जू के चीनपरस्त रुख को स्पष्ट करती है। भारत ने श्रीलंका और मालदीव दोनों से ही चीन को अनुमति नहीं देने का अनुरोध किया था। भारत के सख्‍त रुख के बाद जहां श्रीलंका ने चीन से किनारा कर लिया है, वहीं अब चीन का नया गुलाम मालदीव बन गया है। चीन ने भारत के पड़ौसी दुश्मन पाकिस्तान के पहले ही अपने कर्ज के जाल में फांस रखा है। श्रीलंका के इनकार के बाद अब मालदीव में चीनी जासूसी जहाज को रुकने की मंजूरी दे दी है। यही नहीं, चीनी जासूसी जहाज हिंद महासागर में पहुंच गया है। इस जहाज का नाम शियांग यांग होंग है, जो मालदीव की राजधानी माले के आसपास रह सकता है।

हिंद महासागर में मौजूद खनिजों के भंडार पर भी है चीन की निगाह
कोलंबो स्थित थिंक टैंक फैक्टम की लीड इंटरनेशनल एनालिस्ट उदिथा देवप्रिया का कहना है कि पिछले एक दशक से चीन हिंद महासार में डीप सी माइनिंग (डीएसएन) अभियान का लीडर है। आने वाले समय में चीन ज्यादा से ज्यादा खोजी जहाजों को हिंद महासागर में उतारेगा, क्योंकि यहां पर कोबाल्ट, निकल, मैगनीज और कॉपर के बड़े भंडार हैं। साथ ही, जो देश इन भंडारों का खनन करना चाहता है उसे पहले इंटरनेशनल सीबेड अथॉरिटी (आईएसए) से अनुमति लेनी पड़ती है। चीन पहले ही हिंद महासागर में दो स्थानों पर खोज के लिए 15 साल का लाइसेंस प्राप्त कर चुका है। मौजूदा खनिजों के भंडार पर निगाह गढ़ाने के साथ-साथ चीन की नजर मालदीव का उपयोग सामरिक दृष्टि से भी करने पर है।

श्रीलंका ने एक साल के लिए चीनी जहाजों पर बैन लगाया
चीन के जासूसी जहाज अंडमान निकोबार द्वीप समूह से लेकर दक्षिणी हिंद महासागर तक गहरे समुद्र में मैपिंग कर रहे हैं। इससे पहले श्रीलंका ने चीन को बड़ा झटका देते हुए अगले 1 साल तक के लिए ड्रैगन के जासूसी जहाजों को अपने यहां रुकने की मंजूरी देने से इंकार कर दिया था। भारत ने पहले भी 2022 में श्रीलंका सहित अपने तटों के पास ऐसे जासूसी जहाजों की उपस्थिति पर कड़ा एतराज जाहिर किया था। इससे बाद श्रीलंका चीन के जहाजों को अपने पोर्ट पर खड़े रहने के लिए मना कर चुका है। 2023 में श्रीलंका ने विदेशी खोजी जहाजों को अपने यहां खड़े होने की मंजूरी देने से एक साल तक के लिए मना कर दिया है। हाल में श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे पीएम मोदी के शपथ समारोह में शामिल हुए थे। उन्होंने पीएम मोदी को श्रीलंका यात्रा का न्यौता दिया।

दूसरे देशों को कर्ज देकर बेहाल करने वाले खुद चीन की नीतियां हो रही विफल 
दिलचस्प तथ्य यह है कि करोड़ों डॉलर का कर्ज देकर दूसरे देशों को परेशान करने वाले चीन की खुद की हालत भी अब खराब होने की कगार पर है। दुनिया के कई देश जहां बढ़ती आबादी को लेकर परेशान हैं, वहीं, चीन अब घटती आबादी से तनाव में है। लगातार दूसरे साल चीन की आबादी घटी है। चीन के राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक 2023 के अंत तक चीन की कुल आबादी 140.97 करोड़ थी, जो 2022 की 141.18 करोड़ से 20 लाख कम है। 2023 में 90.02 लाख बच्चे पैदा हुए, जो 2022 के 95.6 लाख से कम हैं। इसी अवधि में 1.11 करोड़ लोगों की मौत हुई। राष्ट्रपति शी जिनपिंग के ज्यादा बच्चे पैदा करने के आह्वान और सरकारी कोशिशों के बावजूद जनसंख्या में कमी आई। स्थिति ऐसी बनी की चीन सरकार की सारी नीतियों तक विफल रो रही हैं।

असम में 1 करोड़ मुस्लिम… इनमें असमिया सिर्फ 40 लाख: हिमंता सरकार करेगी सामाजिक-आर्थिक मूल्यांकन, कैबिनेट ने दी मंजूरी

                              असम के मुस्लिमों की होगी जनगणना (तस्वीर साभार: Mint/India Today NE)
चलो देर आए दुरुस्त आए, मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वास सरमा द्वारा अपने प्रदेश से रोहिंग्या, बांग्लादेशी और पाकिस्तानी घुसपैठियों को निकालने की शुरुआत प्रशंसनीय कदम है। जिन रोहिंग्यों को छद्दम धर्म-निरपेक्षों ने अपनी कुर्सी बनाये रखने के लिए बसा रखा है, उन्हें शायद नहीं मालूम कि कोई भी मुस्लिम देश इन्हे घुसने नहीं देता, जिस तरह फिलिस्तीनी मुसलमानों को। अगर असम सरकार इन्हे राज्य से निकालने में सफल हो जाती है, यह भारत का सबसे शांत प्रदेश बन जायेगा। क्योकि दंगों में स्थानीय मुसलमान नहीं, ये सब घुसपैठिये होते हैं। सरमा सरकार को इनके समर्थकों के विरुद्ध भी अति कठोर कदम उठाने होंगे। 

असम कैबिनेट ने शुक्रवार (8 जनवरी 2023) को राज्य की मूल मुस्लिम आबादी के सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण को मंजूरी दे दी। इस फैसले के तहत असम के पाँच स्वदेशी मुस्लिम समुदायों- गोरिया, मोरिया, देशी, सैयद, जोल्हा के सामाजिक-आर्थिक मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू होगी। 

जानकारी के मुताबिक, इस फैसले से पहले जनता भवन में कैबिनेट बैठक आयोजित हुई, जिसके बाद कैबिनेट मंत्री जयंत मल्ला बरुआ ने बताया कि कैबिनेट ने चार क्षेत्र विकास निदेशालय, असम का नाम बदलकर अल्पसंख्यक मामले और चार क्षेत्र, असम निदेशालय करने का फैसला किया है। इस फैसले के पीछे का कारण है कि मूल जनजातीय अल्पसंख्यकों का व्यापक सामाजिक-राजनीतिक और शैक्षणिक उत्थान किया जाए।

रिपोर्ट्स के अनुसार, 2011 में जो जनगणना हुई थी, उसके मुताबिक, असम की 34% से अधिक आबादी मुसलमानों की है, जो लक्षद्वीप और जम्मू-कश्मीर के बाद सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में तीसरी सबसे बड़ी आबादी है।

ये भी बताया जा रहा है कि राज्य की कुल आबादी 3.1 करोड़ में से 1 करोड़ से अधिक मुस्लिम हैं। जिनमें से केवल 40 लाख मूल निवासी, असमिया भाषी मुस्लिम हैं, और बाकी बांग्लादेशी मूल, बंगाली भाषी आप्रवासी हैं। इससे पहले अक्टूबर में, हिमंत सरकार ने स्वदेशी मुस्लिम समुदायों का सामाजिक-आर्थिक मूल्यांकन करने की योजना की घोषणा की थी।

मुख्यमंत्री ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा था, “ये निष्कर्ष सरकार को राज्य के स्वदेशी अल्पसंख्यकों के व्यापक सामाजिक-राजनीतिक और शैक्षिक उत्थान (एसआईसी) के उद्देश्य से उपयुक्त उपाय करने के लिए मार्गदर्शन करेंगे।”

हिमंता सरकार ने गोरिया, मोरिया, जोलाह, देसी और सैयाद समुदायों को मूल असमिया मुसलमानों के रूप में वर्गीकृत किया था, जिनके पास पहले पूर्वी पाकिस्तान और अब से प्रवास का कोई इतिहास नहीं है।

माना जाता है कि ये समुदाय 13वीं से 17वीं शताब्दी के मध्य इस्लाम में परिवर्तित हुए थे, जिनकी मातृभाषा बंगाली नहीं असमिया ही है और इनकी संस्कृति हिंदुओं से मिलती-जुलती है। ऐसे ही गोरिया-मोहिया, जिन्होंने अहोम राजाओं के लिए काम किया था वो हकीकत में कोच राजबोंग्शी लोग थे, जो इस्लाम में परिवर्तित हो गए थे। इसी तरह जिन मुस्लिमों को ब्रिटिश छोटानागपुर से चाय बागानों में काम करने के लिए लाए वो जोल्हा हो गए और सूफी संतों के अनुयायी सैयद हो गए।

स्वीडन : अब सेक्स भी स्पोर्ट्स, 8 जून से पहली चैंपियनशिप: 45-60 मिनट का गेम, ऑर्गेज्म-सिडक्शन-पेनेट्रेशन पर मिलेंगे नंबर; कामसूत्र के नॉलेज पर बोनस प्वाइंट

स्वीडन में सेक्स बना खेल (तस्वीर साभार: ग्राउंड रिपोर्ट)
स्वीडन में अब सेक्स एक स्पोर्ट्स है। वहाँ इसे आधिकारिक रूप से खेलों की लिस्ट में शामिल किया गया है। इसे लेकर वहाँ गोथनबर्ग में 8 जून से पहली यूरोपियन सेक्स चैंपियनशिप भी होगी।

प्रतियोगिता को स्वीडिश सेक्स फेडरेशन की देख-रेख में 6 दिन के लिए कराया जाएगा। इस दौरान अलग-अलग तरह की यौन गतिविधियों में प्रतिभागी शामिल होंगे।

जानकारी के मुताबिक 8 जून से शुरू इस प्रतियोगिता में 45 मिनट से लेकर 1 घंटे तक सेक्सुअल एक्टिविटी में शामिल रहना होगा। कहा जा रहा है कि एक दिन में यह खेल ज्यादा से ज्यादा 6 घंटे तक चलेगा और पैनल फिर निर्णय होगा कि आखिर जीता कौन।

इस खेल में अलग-अलग देशों से 20 लोग के भाग लेने की बात सामने आई है। विजेताओं का फैसला करने के लिए दो मानक बनाए गए हैं। एक जजों का पैनल अपना फैसला देगा और दूसरा दर्शक अपना फैसला व्यूअरशिप रेटिंग और मूल्यांकन से देंगे। अंतिम नतीजों में दर्शकों के वोट का भार 70% होगा जबकि बचे हुए शेष 30% जजों के स्कोर से आएगा।

खेल में ओरल सेक्स, सिडक्शन, पेनेट्रेशन, एनड्यूरेंट, नंबर ऑफ ऑर्गेस्म, सेक्स के बारे जानकारी, दो लोगों के बीच केमेस्ट्री आदि चीजें देखते हुए प्रतिभागियों को जज किया जाएगा और उन्हें 5 से 10 के बीच नंबर दिए जाएँगे। इतना ही नहीं अगर किसी प्रतिभागी को कामसूत्र के बारे में जानकारी है तो उसे इस प्रतियोगिता में प्लस प्वाइंट मिलने वाला है।

स्वीडन ने इस खेल की शुरुआत करने के बाद उम्मीद जताई है कि अन्य यूरोपीय देश भी इस खेल को अपनाएँगे और ऐसी प्रतियोगिता करवाएँगे। स्वीडिश फेडरेशन ऑफ सेक्स के अध्यक्ष ड्रैगन ब्राटिच ने भी खेल के तौर पर सेक्स की महत्वता पर जोर डाला। उन्होंने कहा कि अन्य किसी भी खेल की तरह सेक्स में मनचाहा नतीजा पाने के लिए ट्रेनिंग की जरूरत है तभी लोग इसमें भाग ले पाएँगे।