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पश्चिम बंगाल : राजभवन वक्फ का, देश का सबसे बड़ा ‘कलकत्ता गोल्फ कोर्स’ भी वक़्फ़ का: बवाल होने पर बंगाल वक्फ बोर्ड ने पल्ला झाड़ा… फिर कौन ले रहा किराया?

                                             बंगाल का राजभवन (साभार: official website)
कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि पश्चिम बंगाल का राजभवन वक्फ संपत्ति है। जब पोस्ट वायरल हुआ तो पश्चिम बंगाल वक्फ बोर्ड ने उस दावे के खारिज कर दिया। बंगाल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष साहिदुल मुंशी ने कहा कि बोर्ड के पास इस बात की कोई तथ्यात्मक जानकारी नहीं है कि बंगाल राजभवन वक्फ संपत्ति है। उन्होंने कहा कि राज्य में 80,000 वक्फ संपत्तियाँ हैं।

मुंशी ने कहा कि बंगाल का राजभवन वक्फ संपत्ति के तहत पंजीकृत नहीं है। साहिदुल मुंशी ने कहा, “हम वक्फ रजिस्टर रखते हैं और जो हमारी संपत्तियाँ हैं उनका हम उसमें जिलेवार नामांकन हैं। बंगाल में वक्फ की करीब 8,000 नामांकित संपत्तियाँ हैं, जबकि कुल संपत्ति करीब 80,000 हैं।” उन्होंने कहा कि कोई भी RTI डालकर इसकी जानकारी हासिल कर सकता है।

बंगाल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष साहिदुल मुंशी ने भले ही बंगाल राजभवन को वक्फ संपत्ति मानने से इनकार कर दिया, लेकिन ममता बनर्जी की सरकार में मंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने यह दावा किया था। बंगाल में सामूहिक शिक्षा मंत्री चौधरी ने 16 नवंबर 2024 को जी मीडिया से बात करते हुए दावा किया था कि धर्मतल्ला से लेकर कॉलिन स्ट्रीट तक वक्फ संपत्ति है।

हालाँकि, राजभवन के वक्फ संपत्ति होने को लेकर इंडियन एक्सप्रेस एवं प्रभात खबर जैसे अंग्रेजी एवं हिंदी के प्रसिद्ध अखबारों ने एक विस्तृत रिपोर्ट छापी। इंडियन एक्सप्रेस ने 11 सितंबर 2013 को अपने वेब पोर्टल की रिपोर्ट में कहा कि 12 इमामों सहित 22 मुस्लिम संगठनों ने माँग की थी कि मुअज्जिन और इमामों को वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को किराए पर देने से उत्पन्न राजस्व से मासिक वजीफा दिया जाए।

ऑल बंगाल इमाम और मुअज्जिन समिति के अध्यक्ष एटीएम रफीकुल हसन ने कहा था, “हम भिखारी नहीं हैं। हम अपना अधिकार माँग रहे हैं। राज्य भर में 29,000 से अधिक वक्फ संपत्तियाँ हैं। कोलकाता में ही गवर्नर हाउस, राज्य विधानसभा और आकाशवाणी भवन जैसे कई प्रतिष्ठित प्रतिष्ठान वक्फ संपत्ति पर बने हैं। हमारी माँग है कि वक्फ बोर्ड को मौजूदा बाजार दर के अनुसार किराया दिया जाए।”

ऑल बंगाल माइनॉरिटी यूथ फेडरेशन के महासचिव एमडी कमरुज्जमां ने कहा था कि पुलिस-प्रशासन को अतिक्रमणकारियों से वक्फ संपत्तियों को खाली कराना चाहिए और उन्हें व्यावसायिक उपयोग में लाना चाहिए। इस संबंध में इमामों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और वक्फ बोर्ड को एक ज्ञापन भी सौंपा था। तब वक्फ बोर्ड के अधिकारियों ने भी राज्य में फैले वक्फ संपत्तियों पर अतिक्रमण की बात स्वीकार की।

पश्चिम बंगाल वक्फ बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष मोहम्मद अब्दुल गनी ने कहा था 356 बीघे में फैले गवर्नर हाउस से वक्फ बोर्ड को प्रति माह केवल 27.25 रुपए किराया मिलता है, जो नाकाफी है। उन्होंने कहा था कि कोलकाता में ही करीब 1,273 एकड़ जमीन वक्फ की है। ये नामांकित संपत्तियों में से हैं। उन्होंने कहा था कि कई संपत्तियाँ ऐसी हैं, जिनका नामांकन किया जाना बाकी है।

इसी तरह, हिंदी अखबार प्रभात खबर ने अपने पोर्टल पर 24 जनवरी 2014 के लेख में कहा है कि कोलकाता में 27 एकड़ में फैले राजभवन का किराया केवल 147 रुपया है। राजभवन वक्फ की संपत्ति है और अब्दुल मतीन एवं मोहम्मद अयूब इस वक्फ संपत्ति के मोतवल्ली (केयर टेकर) हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि 1797 ईस्वी में इस संपत्ति को वक्फ किया गया था। हालाँकि, रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया है कि इस संपत्ति को किसने दान की थी।

तब पश्चिम बंगाल वक्फ बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष मोहम्मद अब्दुल गनी ने कहा था, “यह मामला राज्यपाल के निवास स्थान का है। इसलिए हम लोग कोई कानूनी कार्रवाई करने से पहले इस मुद्दे पर राज्य सरकार से बात करेंगे।” उन्होंने कहा था कि कोलकाता में राजभवन के अलावा और भी कई बड़ी संपत्तियाँ वक्फ की हैं। इन संपत्तियों के किराए के नाम पर ‘भीख’ दी जाती है।

इसी रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि 20+ बीघा जमीन पर फैले देश का सबसे बड़ा गोल्फ कोर्स ‘रॉयल कलकत्ता गोल्फ कोर्स’ भी वक्फ की संपत्ति है। प्रिंस अनवर शाह चौराहे पर बनी टीपू सुल्तान मस्जिद के नाम यह वक्फ संपत्ति है। किराए के मुद्दे पर काफी विवाद के बाद गोल्फ कोर्स प्रबंधन ने कुछ वर्ष पहले एक लाख रुपए मासिक किराया देना मंजूर किया था।

इसके अलावा, बैंकशाल कोर्ट के सामने बनी बहुमंजिली ‘शॉ वालिस बिल्डिंग’ को भी वक्फ संपत्ति बताया गया है। इस इमारत का किराया 32,000 रुपए दिया जाता और काफी तूल के बाद इसका वक्फ बोर्ड को छह लाख रुपए मिलता है। हालाँकि, इस किराए से भी वक्फ बोर्ड संतुष्ट नहीं है। इतना ही नहीं, पश्चिम बंगाल विधानसभा, आकाशवाणी भवन, इडेन गार्डेस को भी वक्फ की संपत्ति बताया गया था।

अब सवाल है कि वर्तमान बंगाल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सहिदुल मुंशी कह रहे हैं कि राजभवन के वक्फ बोर्ड होने की जानकारी नहीं है, तो पहले के अध्यक्षों ने इस तरह का दावा क्यों किया। इसके अलावा, राजभवन की जमीन के लिए 147 रुपए का किराया किसे दिया जाता है और किस आधार पर दिया जाता है। क्या वर्तमान वक्फ बोर्ड ने इस किराया को लेने से यह कहकर कभी इनकार किया कि राजभवन की संपत्ति वक्फ है इसका प्रमाण उसके पास नहीं है और इसलिए वह इसका किराया नहीं ले सकता।

संभवत: पश्चिम बंगाल वक्फ बोर्ड के किसी भी अधिकारी या अध्यक्ष या किसी मुस्लिम संगठन ने ऐसा नहीं कहा। ऐसे में मुंशी का हालिया बयान संदेह उत्पन्न करने वाला है। तो क्या वर्तमान वक्फ कानून को ध्यान में रखते हुए मुंशी कह रहे हैं कि राजभवन वक्फ संपत्ति नहीं है, क्योंकि बंगाल की कई संपत्तियाँ जाँच के दायरे में आ जाएँगी, जिन पर मुस्लिम संगठन एवं वक्फ बोर्ड पहले से दावा करते रहे हैं?

देश के विभिन्न हिस्सों में वक्फ बोर्डों द्वारा हजारों साल पुराने मंदिरों से लेकर हिंदुओं के गाँव के गाँव पर वक्फ संपत्ति होने का दावा ठोका जा रहा है। कर्नाटक, तमिलनाडु सहित कई राज्यों में पिछले कुछ दिनों से ऐसे मामले सामने आए हैं। इस बीच मोदी सरकार वक्फ संशोधन बिल शीतकालीन सत्र में पेश करने की तैयारी कर रही है। इसको लेकर वक्फ बोर्ड में हाहाकार मचा हुआ है।

रेलवे और रक्षा मंत्रालय के बाद वक्फ बोर्ड भारत की तीसरी सबसे अधिक संपत्ति वाली संस्था है। दिसंबर 2022 तक वक्फ बोर्ड के पास कुल 8,65,646 अचल संपत्ति थीं, जिसकी कीमत 9.4 लाख करोड़ रुपए से भी अधिक है। वहीं, साल 2009 तक वक्फ के पास चार लाख एकड़ ज़मीन पर 3 लाख पंजीकृत संपत्तियाँ थीं। पिछले 13 सालों में वक्फ की संपत्ति दोगुनी हो ग है।

देश के 25 हाई कोर्ट में 749 जज, लेकिन संपत्ति का ब्यौरा केवल 98 का मौजूद

जज अपनी संपत्ति का खुलासा सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के सामने करते हैं (चित्र साभार: Generated By Leonardo AI)
मोदी सरकार 2.0 के अंतिम दिनों में देश के सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों की संपत्ति का ब्यौरा अनिवार्य रूप से सार्वजनिक करने को लेकर नियम बनाने की बात कही गई थी। इस संबंध में दिवंगत राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति को सरकार ने फरवरी, 2024 में नियम बनाने की जानकारी दी थी।

देश में वर्तमान में हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों का अपनी संपत्ति का ब्यौरा जनता के सामने रखना अनिवार्य नहीं है। इसी कड़ी में एक रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में हाई कोर्ट के लगभग 87% जजों की संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है। देश के सुप्रीम कोर्ट के जजों का संपत्ति का ब्यौरा भी सार्वजनिक नहीं है।

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर भी यह जानकारी दी गई थी कि यहाँ सेवाएँ देने वाले 27 जजों ने अपनी संपत्ति का ब्यौरा चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ को दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इन जजों के नाम बताए थे लेकिन संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक पटल पर नहीं रखा गया था।

क्या बताती है रिपोर्ट?

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में देश के अलग-अलग 25 हाई कोर्ट में 749 जज सेवाएँ दे रहे हैं। इनमें से मात्र 98 की संपत्तियों का ब्यौरा सार्वजनिक तौर पर मौजूद है। इन 98 जजों की संपत्ति का ब्यौरा उन हाई कोर्ट की वेबसाइट पर डाला गया है जहाँ यह वर्तमान में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं।
रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली हाई कोर्ट के 39 में से 11, पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के 55 में से 31, हिमाचल प्रदेश के 12 में से 10 और केरल के 39 में से 37 जजों की अपनी संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक पटल पर रखा गया है। इनके अलावा मद्रास हाई कोर्ट के 62 में से 5, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के 17 में से 2 और कर्नाटक हाई कोर्ट के 50 में से 2 जजों की संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक किया गया है।
रिपोर्ट बताती है कि देश के बाकी 18 हाई कोर्ट के एक भी जज की संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसमें जजों की सबसे बड़ी संख्या वाले इलाहाबाद और बॉम्बे हाई कोर्ट भी शामिल हैं। रिपोर्ट का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि किसी भी हाई कोर्ट के 100% जजों की संपत्ति सार्वजनिक नहीं की गई है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में बताया गया है कि जिन हाई कोर्ट के जजों की संपत्ति का का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं है, उन्हें RTI भी भेजी गई है। RTI के जवाब में अधिकांश हाई कोर्ट ने जजों की संपत्ति का खुलासा ना करने को लकर अलग-अलग कारण बताए हैं।
जहाँ बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा है कि वह RTI की परिभाषा के तहत नहीं आता तो वहीं उत्तराखंड हाई कोर्ट ने जजों की संपत्ति का ब्यौरा RTI के तहत लाने पर ऐतराज जताया है। गुवाहाटी हाई कोर्ट ने कहा है कि उसे जजों की संपत्ति घोषित करने में कोई ‘जनहित’ नहीं दिखाई पड़ता। अन्य हाई कोर्ट ने भी कमोबेश ऐसे ही जवाब दिए हैं।

जजों की संपत्ति सार्वजनिक करने को लेकर अभी क्या नियम?

सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट बताती है कि उसकी एक फुल बेंच ने यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया था कि प्रत्येक जज को अपनी संपत्ति का ब्यौरा सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को देना होगा। इसके अलावा उन्हें किसी बड़ी खरीद-फरोख्त का ब्यौरा भी देना होगा। हालाँकि, यह जानकारी वेबसाइट पर डाल कर सार्वजनिक करना उनकी मर्जी की बात होगी।
जिस निर्णय की सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर बात की गई है, वह वर्ष 1997 में लिया गया था। इस दौरान कहा गया था कि जजों को अपने घरों और बाकी संपत्तियों की जानकारी चीफ जस्टिस को देनी होगी। इसमें उनके पति/पत्नी और उन पर आश्रित लोगों की संपत्ति का ब्यौरा भी होता।
संपत्ति का ब्यौरा वेबसाइट पर अपलोड कर उसे सार्वजनिक करने को लेकर 2009 में सुप्रीम कोर्ट की फुल बेंच ने एक और निर्णय लिया था। कहा गया था कि सभी जज अपनी संपत्ति का ब्यौरा वेबसाइट पर डालेंगे, लेकिन कहा गया था कि यह जजों की स्वेच्छा पर निर्भर होगा।

केंद्र सरकार ने उठाए हैं कदम

भारत में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों की संपत्ति सार्वजनिक करने को लेकर अभी कोई कानून नहीं है। यह पूरी तरह से जज पर निर्भर है कि वह अपनी संपत्ति का ब्यौरा वेबसाइट पर अपलोड करें। इस संबंध में केंद्र सरकार कानून बनाने को लेकर कदम बढ़ा चुकी है।
मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के अंतिम दिनों में कानून मंत्रालय ने राज्यसभा की एक कमिटी को यह जानकारी दी थी कि वह जजों की संपत्ति सार्वजनिक करने सबंधित नियम बना रही है। यह जवाब इस कमिटी की रिपोर्ट पर दिया गया था। कमिटी ने अगस्त, 2023 में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।
30 सदस्यों वाली इस कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया था कि आखिर नेता और अफसर ही क्यों बल्कि जजों को भी अपनी संपत्ति जनता के सामने रखनी चाहिए। कमिटी का कहना था कि इससे जनता का व्यवस्था पर विश्वास बढ़ाने में सहायता मिलेगी।
यह जानकारी भी सामने आई है कि केंद्र सरकार संपत्ति सार्वजनिक करने के संबंध में सुप्रीम कोर्ट से सलाह मशविरा कर रही है। अभी तक इस संबंध में कोई नियम सामने नहीं आए हैं। केंद्र सरकार अब आगे इस पर क्या एक्शन लेती है और न्यायपालिका का इस पर क्या रुख होता है, यह देखने वाला होगा।

हाई कोर्ट जजों पर लगे हैं भ्रष्टाचार के आरोप

देश के हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों की संपत्ति के सार्वजनिक किए जाने की माँग लम्बे समय से उठती रही है। तर्क दिया जाता रहा है कि जज भी एक सार्वजनिक पद है और ऐसे में उसकी शुचिता अनिवार्य है। पूर्व में भी हाई कोर्ट के जजों पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने के आरोप लगते आए हैं।
2008 के ऐसे ही एक मामले में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट की पूर्व जज निर्मला यादव पर ₹15 लाख कि रिश्वत लेने के आरोप लगे थे। या ₹15 लाख की रिश्वत एक जमीनी विवाद में फैसला दिए जाने को लेकर लगाए गए थे। इस रिश्वत से भरा हुआ एक बैग निर्मला यादव के घर भेजा जाना था लेकिन गलती से यह दूसरे जज के पास पहुँच गया और भेद खुल गया। वर्तमान में इस मामले की सुनवाई अंतिम चरण में है।
इसी तरह के एक और मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व जज एसएन शुक्ला और उनकी पत्नी पर आय से अधिक संपत्ति का मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले में भी CBI जाँच और मुकदमा चल रहा है। एक अन्य मामले में मद्रास हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस मार्कन्डेय काटजू ने एक जज के भ्रष्ट होने की बात कही थी।

मोदी को अपमानित करने वाले राहुल गाँधी की मोदी राज में 115% बढ़ गई, BJP सरकार की लाई योजनाओं में भी कर रखा है निवेश

दिन-रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कोसने वाले राहुल गाँधी की आमदनी कैसे बढ़ रही है? क्या व्यापार करते हैं? 
कांग्रेस नेता राहुल गाँधी लगातार पिछले 10 वर्षों से मोदी सरकार पर अर्थव्यवस्था को लेकर हमले बोलते आए हैं। उनका दावा रहा है कि देश में गरीबी और बेरोजगारी बढ़ रही है। वह यह भी दावा करते रहे हैं कि इस दौरान लोगों की कमाई घटी है। राहुल गाँधी के यह दावे स्वयं उन पर ही फिट नहीं बैठ रहे। राहुल गाँधी की सम्पत्ति बीते 10 वर्षों में 115% बढ़ी है। यह जानकारी उनके द्वारा लोकसभा चुनाव के लिए जमा किए गए हलफनामे से मिली है।

कांग्रेस नेता राहुल गाँधी ने बुधवार (3 मार्च, 2024) को केरल के वायनाड में एक रोड शो के बाद अपना नामांकन किया। यहाँ दाखिल हलफनामे में उन्होंने बताया कि उनके पास 20.39 करोड़ रूपए की कुल चल-अचल सम्पत्ति है। 2014 के लोकसभा चुनाव में अमेठी में दाखिल किए गए हलफनामे में राहुल गाँधी ने बताया था कि उनके पास कुल 9.4 करोड़ रूपए की सम्पत्ति है। इस प्रकार देखा जाए तो पिछले 10 वर्षों में उनकी सम्पत्ति में 115% की वृद्धि हुई है।

राहुल गाँधी ने अपने हलफनामे में सारी जानकारियाँ दी हैं। इस हलफनामे के अनुसार, राहुल गाँधी को वित्त वर्ष 2022-23 में 1.02 करोड़ रूपए की कमाई हुई है। इससे पहले के भी 4 वर्षों में उन्हें औसतन 1.25 करोड़ रूपए की कमाई हुई है। उनके पास वर्तमान में 55000 रूपए नकद है।

                                                        राहुल गाँधी की बीते वर्षों में कमाई

उनके पास ITC, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस, हिन्दुस्तान यूनिलीवर, इंफोसिस समेत कई नामी कम्पनियों में शेयर हैं। उनके पास कुल 25 कम्पनियों में 4.33 करोड़ रूपए के बाजार मूल्य के शेयर हैं। उनके पास कांग्रेस के अखबार नेशनल हेराल्ड वाली कम्पनी यंग इंडिया में भी 1.9 लाख रूपए के शेयर हैं। राहुल गाँधी ने कई प्रकार के म्यूच्यूअल फंड में भी निवेश कर रखा है।

                                        राहुल ने म्यूच्यूअल फंड्स में भी निवेश किया हुआ है

 राहुल गाँधी के हलफनामे के अनुसार, उनके पास HDFC बैंक के 4 म्यूच्यूअल फंड है जो कि अलग-अलग कैटेगरी के हैं। उनका इन म्यूच्यूअल फंड में 3.81 करोड़ रूपए का निवेश है। इसके अलावा उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा द्वारा जारी किए जाने वाले गोल्ड बॉन्ड्स भी 15.21 लाख रूपए का निवेश किया हुआ है। यह योजना मोदी सरकार ने नवम्बर 2015 में चालू की थी।

राहुल गाँधी के पास 4.20 लाख रूपए का सोना भी है। इसके अलावा उन्होंने 61.52 लाख रूपए निवेश भी PPF खाते में किया हुआ है। उनके अचल सम्पत्ति की कुल कीमत 9.24 करोड़ रूपए है।

                                                             राहुल गाँधी की चल सम्पत्ति

राहुल गाँधी के पास अपनी बहन प्रियंका गाँधी के साथ संयुक्त स्वामित्व में दिल्ली में एक जमीन है। यह दिल्ली में महरौली में है जिसकी कीमत 2.10 करोड़ रूपए है। इसके अलावा गुरुग्राम में दो ऑफिस स्पेस भी ले रखे हैं, इनकी कीमत खरीद के समय 7.93 करोड़ रूपए थी। इन अचल संपत्तियों का वर्तमान बाजार मूल्य 11.15 करोड़ रूपए है। राहुल गाँधी की वर्तमान में कुल सम्पत्ति 20.39 करोड़ रूपए है। उनके ऊपर 49 लाख रूपए का बकाया भी है। 2019 से तुलना की जाए तो उनकी सम्पत्ति में इजाफा हुआ है।

                                                         राहुल गाँधी की अचल सम्पत्ति

उन्होंने इस हलफनामे में बताया है कि उनके ऊपर 18 आपराधिक मामले हैं जिनमें से सूरत में उनके खिलाफ दायर किए गए मामले में उन्हें 2 वर्षों की सजा भी हुई है। उनको यह सजा ‘सारे मोदी चोर होते हैं’ बयान पर मिली थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई हुई है। उनके खिलाफ एक नाबालिग रेप पीड़िता के अभिभावकों की पहचान उजागर करने के मामले में POCSO के तहत मुकदमा दर्ज है।

राहुल गाँधी ने अपनी शिक्षा के विषय में बताया है कि उन्होंने 1989 में CBSE से सीनियर सेकेंडरी, 1994 में अमेरिका के फ्लोरिडा से बीए और कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के ट्रिनिटी कॉलेज एम फिल किया है। एम फिल उन्होंने 1995 में किया है।

बुशरा बीवी की सहेली फराह खान के घर पर हुआ था इमरान खान का निकाह, हो गयी मालामाल: 4 गुना बढ़ी संपत्ति

                                              फराह खान (बाएँ) और इमरान खान (साभार: ट्विटर/मनोरमा)
आर्थिक रूप से कंगाल पाकिस्तान में सियासी संग्राम चल रहा है। इसी बीच एक नाम चर्चा में आया है, वो है फराह खान (फरहत शहजादी) का। ये पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की बीवी बुशरा बीबी की सहेली हैं, जो कि इमरान सरकार में लगातार अमीर हुई हैं। इमरान सरकार में उनकी संपत्ति चार गुना बढ़ी है। ये संपत्ति 2017 में 231 मिलियन (करीब 200 करोड़ पाकिस्तानी रुपए) थी, जो कि 2021 में बढ़कर 971 मिलियन (साढ़े 900 करोड़ पाकिस्तानी रुपए) से भी ज्यादा हो गई।

हालाँकि, 2018 में उनकी टैक्स फाइलिंग बिल्कुल शून्य थी। फराह खान के कई सारे नाम भी हैं। वो फराह गुर्जर या फरहत शहजादी के नाम से भी जानी जाती हैं। बुशरा बीवी और इमरान खान का जब निकाह हुआ था तो वो भी फराह खान के घर पर हुआ था। इससे इमरान खान के साथ उनकी नजदीकी का अंदाजा लगाया जा सकता है।

एक न्यूज इन्वेस्टिगेशन से इस बात का खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने उस्मान बुजदार को जब से पंजाब प्रान्त का मुख्यमंत्री बनाया है। तभी से फराह खान की किस्मत के सितारे बुलंदी पर हैं। इमरान सरकार के पहले तीन वर्षों के भीतर फराह ने अलग-अलग शहरों में कई संपत्तियाँ खरीदीं और विभिन्न प्रकार के बिजनेस में भी करोड़ों का निवेश किया। रिपोर्टों में खुलासा किया गया है कि फराह खान ने 2019 में ब्लैक मनी स्कीम (टैक्स एमनेस्टी स्कीम) लाभ लिया और इसके तहत 328 मिलियन रुपए (300 करोड़ से अधिक पाकिस्तानी रुपए) की संपत्ति घोषित की।

उन्होंने लाहौर और इस्लामाबाद में प्रॉपर्टी खरीदी। इस्लामाबाद में फराह खान ने पॉश इलाके में एक विला भी खरीदा। दस्तावेजों के अनुसार, फराह खान ने इस्लामाबाद के सेक्टर एफ-7/2 में 933 वर्ग गज के घर का खुलासा किया, जिसे उन्होंने 195 मिलियन रुपए ( 200 करोड़ पाकिस्तानी रुपए) में खरीदा था।

हालाँकि, फराह खान के करीबियों का कहना है कि उन्होंने भ्रष्ट्रचार नहीं किया है औऱ सही तरीके से संपत्तियाँ अर्जित की हैं। बहरहाल फराह के शौहर अहसान जामिल गुज्जर पहले ही अमेरिका चले गए हैं। जबकि हाल ही में फराह भी पाकिस्तान छोड़ दुबई भाग गई।

एक करोड़ से अधिक कीमत के हैंडबैग के कारण आईं चर्चा में

पाकिस्तान की ट्रांसफर-पोस्टिंग क्वीन कही जाने वाली फराह खान की हवाई जहाज में बैठे तस्वीर वायरल हुई थी, जिसमें उनके हैंडबैग को लेकर दावा किया गया था कि उसकी कीमत 90,000 डॉलर (1.66 करोड़ पाकिस्तानी रुपए) थी। पीएमएल-एन नेता और पूर्व वित्त मंत्री मिफ्ताह इस्माइल ने फराह पर पंजाब प्रान्त में सिविल सर्विस के 3 अधिकारियों के ट्रांसफर के बदले में मोटी रकम घूस के रूप में लेने का आरोप लगाया था।