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जुमे पर भारत भर में निकला ‘उम्माह का जिन्न’: हमास-फिलस्तीन के समर्थन में लगे ‘अल्लाहू अकबर’ के नारे

फिलिस्तीन और हमास के समर्थन में भारत में प्रदर्शन (साभार: आजतक)
फिलिस्तीन के आतंकी संगठन हमास पर इजरायल की कार्रवाई के विरोध में देश के कई शहरों में जुमे पर प्रदर्शन किए गए। शुक्रवार यानी जुमे (13 अक्टूबर 2023) को देखते हुए कई शहरों में पुलिस पहले से ही सतर्क थी। हालाँकि, जिस बात की आशंका जाहिर की जा रही थी, वह सही ही साबित हुई। देश के कई शहरों में वामपंथी और इस्लामी कट्टरपंथियों ने फिलिस्तीन और हमास के समर्थन में प्रदर्शन किया।

जुमे पर प्रदर्शन के दौरान इजरायल मुर्दाबाद के नारे लगाए गए और इस दौरान इजरायल के झंडे भी जलाए गए। जम्मू-कश्मीर के बडगाम में जुमे की नमाज के लिए बड़ी संख्या में जुटे। इसके बाद उन्होंने ‘नारा ए तकबीर, अल्लाह हू अकबर’ के नारे लगाए। इसके साथ ही इजरायल और अमेरिका के खिलाफ भी नारे लगाए गए। उनके हाथों में उर्दू और अंग्रेजी में लिखी तख्तियाँ भी थीं।

प्रदर्शन करने वाले लोगों के हाथों में तख्तियाँ थीं। सामने आईं तस्वीरों में दिख रहा है कि उन तख्तियों में से एक पर ईरान के इस्लामी नेता मोहम्मद अली खुमेनेई की तस्वीर बनी हुई थी। एक तख्ती पर अंग्रेजी में ‘या अल्लाह गाजा और फिलिस्तीन में हमारे भाई-बहनों की हिफाजत करना’ लिखा हुआ दिख रहा है।

के चंद्रशेखर राव की पार्टी BRS द्वारा शासित तेलंगाना में भी इजरायल के खिलाफ और फिलिस्तीन एवं हमास के समर्थन में प्रदर्शन किए गए। तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में वामपंथी/कट्टरपंथियों ने तख्तियाँ लेकर प्रदर्शन किया। सामने आए वीडियो फुटेज में दिख रहा है कि एक तख्ती पर लिखा है, ‘गाजा कभी खत्म नहीं होगा’।

प्रदर्शनकारियों की हाथों में फिलिस्तीन के झंडे वाली भी तख्तियाँ थीं। कुछ तख्तियों पर उर्दू में कुछ लिखा हुआ था। इनके नीचे ‘नौजवान भारत सभा’ और ‘दिशा स्टूडेंट्स ऑरगेनाइजेशन’ का नाम लिखा हुआ था। इस दौरान ‘इजरायल का बॉयकॉट करो’ और ‘फिलिस्तीनी आवाम का संघर्ष जिंदाबाद’ के नारे लगाए गए।

ये सारे प्रदर्शनकारी डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के नीचे प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान पुलिस एवं कुछ महिला पुलिस इन प्रदर्शनकारियों के हाथों में से तख्तियाँ भी लेने की कोशिश कीं, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने इसे नहीं दी और अपने प्रदर्शन को जारी रखा।

वहीं, ममता बनर्जी की पार्टी TMC द्वारा शासित पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में भी फिलिस्तीन के समर्थन में प्रदर्शन किए गए। माइनॉरिटी यूथ फोरम के सदस्यों ने फिलिस्तीन के समर्थन में प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारी फिलिस्तीन की आजादी के बैनर लहराए। संगठन ने यह भी कहा कि भारत को इजरायल का समर्थन नहीं करना चाहिए। प्रधानमंत्री को भेजने के लिए उन्होंने राज्यपाल को ज्ञापन भी सौंपा।

उधर, एमके स्टालिन के राज्य तमिलनाडु में भी इजरायल के विरोध में प्रदर्शन किए गए। चेन्नई में तमिलनाडु मुस्लिम मुनेत्र कझगम ने फिलिस्तीन और हमास के समर्थन प्रदर्शन किया। इसके अलावा, स्टूडेंट इस्लामिक ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया (SIO) ने भी जुमे के दौरान यानी आज 13 अक्टूबर को फिलिस्तीन के समर्थन में पूरे देश में प्रदर्शन करने की बात कही है। यह भी कहा जा रहा है कि प्रतिबंधित इस्लामी संघटन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से संबद्ध सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) फिलिस्तीन की आजादी को लेकर देश भर में प्रदर्शन करने जा रहा है। 

हमास के आतंकी हमले के खिलाफ इजरायल की कार्रवाई के विरोध में पश्चिम एशिया के कई देशों में जुमे पर विरोध प्रदर्शन की आशंका जाहिर की गई थी। भारत में भी एजेंसियाँ सतर्क हैं। दिल्ली-एनसीआर, तेलंगाना, केरल, यूपी, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु, जम्मू कश्मीर, कर्नाटक आदि राज्यों में सुरक्षा एजेंसियाँ अलर्ट पर हैं।

दिल्ली में सुरक्षा एजेंसियाँ विशेष रूप से चौकस हैं। ऐसे संगठनों पर विशेष रूप से नजर रखी जा रही है, जो लोगों को भड़का कानून व्यवस्था की स्थिति को खराब कर सकते हैं। इसको देखते हुए नमाज के बाद लोगों को एक स्थान पर एकत्रित नहीं होने के लिए कहा गया है।

इसके अलावा, दिल्ली स्थित इजरायल दूतावास और देश के यहूदी आबादी वाले इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई। दूतावास के अधिकारियों की भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है। इसके साथ ही देश में माहौल को खराब करने की कोशिश करने वाले सोशल मीडिया हैंडलों पर भी सरकार की पैनी नजर है।


कांग्रेस का हाथ फिलिस्तीन के साथ, CWC में प्रस्ताव पास कर किया समर्थन

फिलिस्तीन के खुलेआम समर्थन में उतरी कांग्रेस, CWC ने पास किया प्रस्ताव (साभार- X हैंडल कॉन्ग्रेस)
फ़िलिस्तीनी आतंकवादी समूह हमास द्वारा इज़राइल के लोगों पर क्रूर हमलों की निंदा करने के एक दिन बाद ही कांग्रेस ने 9 अक्टूबर, 2023 को खुलकर फ़िलिस्तीनियों के समर्थन में उतर आई।

कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक के दौरान आज पारित एक प्रस्ताव में फिलिस्तीन-इजरायल संघर्ष पर दुख व्यक्त किया गया और युद्धविराम की माँग की गई। CWC के 7 विंदुओं वाले प्रस्ताव में आखिरी विन्दु में फ़िलिस्तीनी लोगों के अधिकारों का समर्थन किया गया है।

कांग्रेस द्वारा पारित प्रस्ताव के 7वें विन्दु में लिखा गया है, “अंत में CWC मिडिल ईस्ट में छिड़े युद्ध और हजार से अधिक लोगों के मारे जाने पर गहरा दुःख और पीड़ा व्यक्त करती है। CWC फिलिस्तीनी लोगों के जमीन, स्वशासन और आत्मसम्मान एवं गरिमा के साथ जीवन के अधिकारों के लिए अपने दीर्घकालिक समर्थन को दोहराती है। CWC तुरंत युद्धविराम और वर्तमान संघर्ष को जन्म देने वाले अपरिहार्य मुद्दों सहित सभी लंबित मुद्दों पर बातचीत शुरू करने का आह्वान करती है।”  

                                                     कॉन्ग्रेस की CWC द्वारा जारी प्रस्ताव

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 7 अक्टूबर, 2023 से हमास और इजरायली रक्षा बलों के बीच लड़ाई में अब तक कुल मिलाकर लगभग 1,200 लोग मारे गए हैं। वहीं इस मामले में कांग्रेस पार्टी के एक आधिकारिक बयान में इज़राइल और फिलिस्तीन के बीच संघर्ष को सुलझाने के लिए “बातचीत और समझौता” की प्रक्रिया पर जोर दिया गया।

इससे पहले कांग्रेस सोशल मीडिया एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर रविवार को किए अपने पोस्ट में कहा, “भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का हमेशा मानना ​​रहा है कि आत्म-सम्मान, समानता और सम्मान के जीवन के लिए फिलिस्तीनी लोगों की वैध आकांक्षाएँ केवल बातचीत और बातचीत की प्रक्रिया के माध्यम से पूरी होनी चाहिए, जबकि इजरायली लोगों के वैध राष्ट्रीय सुरक्षा हितों को सुनिश्चित करना चाहिए। किसी भी प्रकार की हिंसा कभी भी समाधान नहीं देती है और यह रुकना चाहिए।”

इजरायल लगातार अपना ऑपरेशन चला रहा है और आतंकियों का सफाया कर रहा है। इजरायली सुरक्षा बलों द्वारा एक्स (पहले ट्विटर) पर दी गई जानकारी के अनुसार, अब तक वह 653 ठिकानों पर हमला कर चुका है। इजरायल ने गाजा की बिजली और पानी की आपूर्ति भी बंद कर दी है।

इजराइल की सेना ने सोमवार को घोषणा की कि उसने हमास के लड़ाकों को खदेड़ने के लिए लड़ाई के तीसरे दिन गाजा पट्टी के पास दक्षिणी इलाकों पर नियंत्रण हासिल कर लिया है। 

I.N.D.I.A. गठबंधन दोस्त : जमीन पर दुश्मन, मतभेद हजार, अंदर से तकरार, ऊपर से प्यार !

2024 में मोदी सरकार को हटाने विपक्षी एकजुट हो गए हैं, लेकिन यह गठबंधन उस भव्य भवन के समान जिसकी न नींव है और न ही कोई सीमेंट। I.N.D.I.A. गठबंधन देश के 26 विपक्षी दल भले ही ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ (I.N.D.I.A) के बैनर तले एकजुट होकर आगे बढ़ने पर सहमत हुए हों, लेकिन उनके लिए भविष्य में कई चुनौतियां भी खड़ी हैं जिनमें राज्य स्तर पर मतभेदों से निपटना और सीटों का तालमेल सबसे बड़ा सिरदर्द साबित होने वाला है। यही नहीं, चुनाव से पहले अगर वे इस गठबंधन के लिए नेता चुनने का फैसला करते हैं तो यह भी उनके लिए आसान नहीं होने वाला है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बेंगलुरु की बैठक में यह स्वीकार किया था कि विपक्षी दलों के बीच मतभेद हैं, हालांकि उन्होंने इन पार्टियों का आह्वान किया कि मतभेदों को अलग रखना होगा और मिलकर चुनाव लड़ना होगा। कई पार्टियों के सामने अप्रासंगिक होने का भी खतरा बना हुआ है इसी वजह से बेमन से ही सही इस गठबंधन का हिस्सा बने हुए हैं।

पहली बैठक में केजरीवाल, फिर नीतीश, तीसरी मीटिंग में ममता बनर्जी नाराज
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विपक्षी एकता की मुहिम शुरू की थी और I.N.D.I.A. गठबंधन की पहली बैठक भी पटना में हुई थी। इसके बाद बेंगलुरु और फिर मुंबई में मीटिंग हुई। लेकिन तीनों ही बैठकों में हर बार किसी न किसी नेता के नाराज होने की खबरें आती रहीं। पटना में पहली बार 23 जून को सीएम नीतीश कुमार की अध्यक्षता में मीटिंग हुई थी। इस बैठक में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल पहुंचे थे और वो पहली बैठक में नाराज होकर गए। उस समय दिल्ली सरकार के खिलाफ केंद्र के विधेयक को लेकर अरविंद केजरीवाल कांग्रेस के समर्थन नहीं देने की बात से नाराज चल रहे थे। पटना की बैठक में उन्होंने मुद्दा उठाया लेकिन बात नहीं बनी तो वो बैठक खत्म होने से पहले ही निकल गए। दूसरी बैठक बेंगलुरु में हुई तो नीतीश कुमार यहां से नाराज होकर निकल गए। तीसरी बैठक मुंबई में हुई तो बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नाराज हो गईं। प्रेस कांफ्रेंस शामिल हुए बिना वह भी उठकर चली गईं।

जातिगत जनगणना पर I.N.D.I.A. गठबंधन में घमासान
विपक्षी गठबंधन जातिगत जनगणना पर बीजेपी को घेरने की तैयारी कर रही है, लेकिन उसके पहले ही गठबंधन के दलों में इसे लेकर घमासान मच गया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यंमत्री ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन के घर पर 5 सितंबर 2023 को गठबंधन के नेताओं की बैठक में जातिगत जनगणना पर आपत्ति जताई है। ममता बनर्जी की यह कोई पहली नाराजगी नहीं है। विपक्षी दलों के इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल अलायंस (I.N.D.I.A.) की तीसरी बैठक मुंबई में 31 अगस्त और 1 सितंबर 2023 को हुई थी। इस बैठक के बाद प्रेस कांफ्रेंस में भी ममता बनर्जी ने हिस्सा नहीं लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी।

ममता बनर्जी जातिगत जनगणना के पक्ष में नहीं
टीवी9 की रिपोर्ट के अनुसार, जातिगत जनगणना के मुद्दे को विपक्षी गठबंधन INDIA लोकसभा चुनाव 2024 में बीजेपी के खिलाफ सबसे बड़े हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने की तैयारी कर रही कर रही थी। विपक्ष लगातार जातिगत जनगणना को लेकर सियासी बिसात बिछाने में जुटा हुआ था, लेकिन अब ये ‘INDIA’ के घटक दलों के बीच सिर्फ तकरार ही नहीं बल्कि गठबंधन के गले का फांस भी बन रहा है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री व टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने जातिगत जनगणना के पक्ष में नहीं है। ऐसे में ममता के स्टैंड से विपक्षी गठबंधन के घटक दल हैरान हैं, जिसके चलते सवाल उठ रहा है कि INDIA गठबंधन में फूट पड़ सकती है? जातिगत जनगणना के मुद्दे पर सपा, जेडीयू, जेएमएम, आरजेडी, एनसीपी, डीएमके और कांग्रेस एकमत हैं।

मल्लिकार्जुन खड़गे का एमपी में जातिगत जनगणना कराने का वादा
न्यूज18 की रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मध्य प्रदेश के सागर में 23 अगस्त को एक सभा को संबोधित करते हुए जनता से 5 गारंटी वाले वादे किए। इसके साथ ही खड़गे ने मध्‍य प्रदेश की जनता से सत्‍ता में आने पर जातिगत जनगणना कराने का भी वादा किया। उन्‍होंने कहा कि कांग्रेस की सरकार बनने पर जातिगत जनगणना कराई जाएगी और हर जाति के गरीब लोगों की पहचान की जाएगी।

डीएमके ने द्रौपदी मुर्मू की जगह यशवंत सिन्हा को वोट दिया
नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, विपक्ष की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा ने द्रविड मुनेत्र कषगम (द्रमुक) प्रमुख एवं तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन से मुलाकात की और चुनाव में उन्हें समर्थन देने का अनुरोध किया। सिन्हा के द्रमुक मुख्यालय ‘अन्ना अरिवालयम’ पहुंचने पर स्टालिन ने उनका स्वागत किया। स्टालिन ने वहां अपनी पार्टी और सहयोगी दलों की एक बैठक को संबोधित किया और उन्होंने पूर्व केन्द्रीय मंत्री को पूरा समर्थन देने का आश्वासन दिया।

डीएमके नेता मनिकम ने दलित लड़के के साथ दुर्व्यवहार किया
एक तरफ उदयनिधि जातिगत भेदभाव की बात करते हैं। वहीं उनके ही डीएमके नेता मनिकम ने महीनों पहले सलेम में मंदिर परिसर में प्रवेश करने पर एक दलित लड़के के साथ दुर्व्यवहार किया था।

नीच कर्म होते हैं, नीच जाति नहीं होतीः राहुल गांधी
एक तरफ उदयनिधि जातिगत भेदभाव की बात करते हैं वहीं राहुल गांधी कहते हैं- नीच कर्म होते हैं। नीच जाति नहीं होती, नीच कर्म होते हैं। नीच सोच होती है, गुस्से की सोच होती है, क्रोध की सोच होती है। नीच जाति नहीं होती।

सनातन धर्म को खत्म करना पहला काम होना चाहिएः स्टालिन
तमिलनाडु प्रोग्रेसिव राइटर्स एसोसिएशन ने 2 अगस्त को चेन्नई में एक सम्मेलन आयोजित किया था, जिसका नाम रखा गया था- सनातनम (सनातन धर्म) उन्मूलन सम्मेलन। इस सम्मेलन को उदयनिधि स्टालिन ने भी संबोधित करते हुए सनातन के खिलाफ यह जहरीला बयान दिया। उदयनिधि ने कहा- ”मच्छर, डेंगू, फीवर, मलेरिया और कोरोना, ये कुछ चीजें ऐसी हैं, जिनका केवल विरोध नहीं किया जा सकता, बल्कि उन्हें खत्म करना जरूरी होता है। सनातन धर्म भी ऐसा ही है। इसे खत्म करना हमारा पहला काम होना चाहिए।”

सनातन को मिटाने का ख्वाब अंग्रेजों, मुगलों ने भी देखा, सनातन नहीं मिटाः आचार्य प्रमोद कृष्णम
टाइम्सनाउ के अनुसार, कांग्रेस नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि सनातन को मिटाने की साजिशें हजारों साल से हो रही हैं। तैमूल लंग से लेकर लार्ड मैकाले तक सब सनातन को मिटाने में जुटे रहे लेकिन सनातन नहीं मिटा। जो सत्य है वो शाश्वत है जो शाश्वत है वही सनातन है। ये लार्ड मैकाले की कुछ नाजायज औलादें हैं। सनातन को मिटाने का ख्वाब देख रहे हैं। न सनातन धर्म मिटा है न सनातन मिटेगा। हिंदुओं को गाली देने की होड़ सी मची हुई है नेताओं में। एक हजार साल तक भारत गुलाम रहा है और एक हजार साल तक सनातन को मिटाने की साजिशें होती रही। महाराणा प्रताप, गुरु गोविंद सिंह जी महाराज, छत्रपति शिवाजी महाराज कितने महापुरुषों का लहू शामिल है सनातन धर्म की शक्ति में। सनातन को मिटाने का ख्वाब अंग्रेजों ने भी देखा, मुगलों ने भी देखा लेकिन सनातन नहीं मिट पाया।

 दिल्ली की सातों सीटों पर चुनाव लड़ेगी कांग्रेस, केजरीवाल को दिखाया ठेंगा
दैनिक जागरण के मुताबिक, अलका लांबा ने 16 अगस्त को कहा कि कांग्रेस दिल्ली में सभी लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, केसी वेणुगोपाल और दीपक बाबरिया की मौजूदगी में तीन घंटे चली बैठक में ये फैसला लिया गया है। कांग्रेस की इस घोषणा के बाद AAP के नेता सौरभ भारद्वाज का भी बयान आया है। उन्होंने कहा कि हमारा केंद्रीय नेतृत्व इस पर निर्णय करेगा।

एकजुटता को झटका! कांग्रेस बोली- पंजाब में ‘आप’ संग नहीं करेंगे गठबंधन
एडिटरजी की रिपोर्ट के अनुसार, एक तरफ जहां आगामी लोकसभा चुनाव के लिए विपक्षी दलों के गठबंधन ‘INDIA’ एकजुट होने की बात कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर गुटों की अंदरुनी कलह भी खुलकर सामने आ रही है। इसी अंदरुनी कलह और मनमुटाव की तस्दीक करता है पंजाब कांग्रेस प्रमुख अमरिंदर सिंह राजा वारिंग का बयान जिसमें उन्होंने कहा कि पंजाब में आम आदमी पार्टी के साथ कोई गठबंधन नहीं होगा और कांग्रेस सभी सीटों पर अकेले चुनाव मैदान में उतरेगी।

AAP का पंजाब में अकेले 13 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान
न्यूज18 की रिपोर्ट के अनुसार, आम आदमी पार्टी ने पंजाब में महागठबंधन I.N.D.I.A को बड़ा झटका दिया है। पंजाब की मंत्री अनमोल गगन मान ने 6 सितंबर 2023 को प्रेस कांफ्रेंस कर ऐलान किया कि 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव में पंजाब की 13 सीटों पर आम आदमी पार्टी अकेली लड़ेगी। कांग्रेस के साथ किसी भी तरह का सीट बंटवारा नहीं किया जाएगा। इसके अलावा गगन मान ने कहा, ‘हम कांग्रेस के साथ कोई भी गठबंधन नहीं करेंगे।

राजस्थान में आम आदमी पार्टी की 200 सीटों पर लड़ने की तैयारी
जीन्यूज के मुताबिक, आम आदमी पार्टी राजस्थान की 200 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए ताल ठोक रही है। हालांकि अभी इसकी घोषणा नहीं हुई है। आप के प्रदेश अध्यक्ष नवीन पालीवाल ने कहा- आम आदमी पार्टी के प्रति जनता का लगाव प्रदेश में आम आदमी पार्टी की सरकार बनाएगा और उसके बाद दिल्ली और पंजाब की तर्ज पर राजस्थान में भी जनहित के कार्य किए जाएंगे। यानि वे सीधे-सीधे कांग्रेस की गहलोत सरकार को चुनौती दे रहे हैं।

छत्तीसगढ़ः आम आदमी पार्टी ने 90 सीटों पर चुनाव लड़ने का किया एलान
नई दुनिया के अनुसार, आम आदमी पार्टी (आप) ने छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव में 90 सीटों पर चुनाव लड़ने का एलान किया है। 29 अप्रैल 2023 को राजधानी के शहीद स्मारक भवन में प्रदेश स्तरीय पदाधिकारियों के शपथ ग्रहण समारोह में प्रदेशभर से पदाधिकारी व कार्यकर्ता जुटे। समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय संगठन महामंत्री डा. संदीप पाठक ने कहा कि सरकार बदलने के लिए पांच वर्ष नहीं बल्कि पांच महीना ही काफी है। छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव में आप 90 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

केजरीवाल ने किया अनुच्छेद 370 हटाने का समर्थन
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने पर दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि उनकी पार्टी जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को खत्म करने के केंद्र सरकार के कदम का समर्थन करती है। बीएसपी के बाद आम आदमी ऐसी दूसरी पार्टी थी जिसने सरकार के पक्ष को समर्थन देकर सबको चौंका दिया। इन पार्टियों के अलावा बीजेडी, एआईएडीएमके और और शिवसेना ने भी सरकार के फैसले का समर्थन किया।

UCC: समान नागरिक संहिता को केजरीवाल और नीतीश का समर्थन
अमर उजाला के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समान नागरिक संहिता का मुद्दा उठाने के एक दिन बाद जनता दल यूनाइटेड (जदयू) व आम आदमी पार्टी (आप) ने इसे सशर्त सैद्धांतिक समर्थन देने की घोषणा की। जदयू के महासचिव केसी त्यागी ने कहा कि जदयू व सीएम नीतीश कुमार समान नागरिक संहिता का विरोध नहीं कर रहे हैं। हम चाहते हैं, सबको साथ लेकर व्यापक विमर्श के बाद इस पर आगे बढ़ा जाए। आप के वरिष्ठ नेता संदीप पाठक ने कहा, आप सैद्धांतिक रूप से संहिता के पक्ष में है। संविधान का अनुच्छेद 44 भी संहिता का समर्थन करता है। हालांकि संहिता पर सभी धर्म और संप्रदायों के साथ बातचीत कर आम सहमति बनाई जाए।


क्या पांच राज्यों में होने वाले चुनावों में कांग्रेस लुप्त हो जाएगी? राजीव गाँधी के खास रहे नटवर ने ‘गाँधी परिवार’ को बताया सत्यानाश का जिम्मेदार

                                                                                                                          साभार : जनसत्ता 
पंजाब सहित कई राज्यों में कांग्रेस आंतरिक लड़ाई से जूझ रही है। पंजाब के मुख्यमंत्री पद से अमरिंदर सिंह की छुट्टी करने के फैसले को लेकर कई वरिष्ठ नेता अपनी नाराजगी जता चुके है। कपिल सिब्बल जैसे पार्टी नेता तो यहॉं तक कह चुके हैं कि पार्टी में फैसले कौन ले रहा इसकी किसी को खबर नहीं। इन्हीं मुद्दों पर केंद्रित एक इंटरव्यू में पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह ने कहा है कि कांग्रेस का जो हाल है उसमें वह लुप्त हो जाएगी। उनका यह भी दावा है कि अगले साल जिन 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं उनमें कहीं भी पार्टी को सफलता नहीं मिलेगी। इस हालात के लिए उन्होंने पार्टी के शीर्ष परिवार को जिम्मेदार बताया है।

कांग्रेस और पार्टी में परिवारभक्तों को कोई प्रभावी अध्यक्ष ही दिखाई नहीं दे रहा, जबकि इस परिवार के कहीं अधिक नेता पार्टी में पहले भी थे और आज भी हैं, लेकिन परिवारभक्त हैं, किसी की सुनने को ही तैयार नहीं, पार्टी डूबती हो डूब जाए, इनको परिवार भक्ति से फुर्सत नहीं। जब पार्टी में राहुल को अध्यक्ष बनाने की चर्चा चल ही रही थी, योगी आदित्यनाथ ने ऐसे ही नहीं कहा था कि जितनी जल्दी हो अध्यक्ष बनाइए। अंजाम सबके सामने है। और रही प्रियंका की बात उसका भी हाल देख रहे हैं, यानि परिवार ही कांग्रेस को ख़त्म करने में लगी है।  

उन्होंने कहा कि इन तीनों लोगों को कैप्टन के सामने अपनी गलती मान लेनी चाहिए थी लेकिन वह ऐसा करेंगे नहीं, क्योंकि वह तीनों खुद को तीस मार खां समझते हैं। पूर्व विदेश मंत्री ने कहा कि कांग्रेस में फिलहाल कुछ भी सही नहीं है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के पास कोई पद नहीं है, लेकिन पार्टी से जुड़े सभी मामलों में वह फैसले लेते हैं। कांग्रेस के पूर्व नेता ने कहा कि अब न तो CWC की मीटिंग होती है और न ही राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई जाती है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नटवर सिंह ने कहा कि राहुल गांधी ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाने का फैसला लिया, जबकि सिद्धू को प्रदेश अध्यक्ष बनाने का फैसला प्रियंका गांधी का था। यह पहला मौका है, जब किसी सीनियर नेता द्वारा गांधी परिवार का नाम लेकर निशाना साधा गया हो। इससे पहले कपिल सिब्बल ने भी ऐसे ही तेवर दिखाते हुए पार्टी में बड़े बदलावों वकालत थी और एक एक नियमित अध्यक्ष चुने जाने की मांग की थी।

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के करीबी रहे नटवर सिंह ने दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में पंजाब में हुए बदलाव को लेकर सवाल किया गया था। इस पर उन्होंने कहा कि पंजाब में जो हुआ वो नहीं होना चाहिए था। उन्होंने कहा कि देश को इस समय एक मजबूत विपक्ष की जरूरत है, लेकिन कांग्रेस कुछ नहीं कर रही है। राहुल गाँधी पर हमला बोलते हुए कहा कि जिनके पास पार्टी में कोई पद नहीं है, वो फैसला लेते हैं। इससे पार्टी में असंतोष फैलता है और जनता में गलत संदेश जा रहा है।

वहीं प्रियंका गाँधी को निशाने पर लेते हुए उन्होंने कहा कि उनका पंजाब की राजनीति में हस्तक्षेप करना सही नहीं था। वो यूपी की प्रभारी हैं तो पंजाब में दखलअंदाजी करना सही नहीं था। उन्होंने नवजोत सिंह सिद्धू के इतिहास को जाने बिना उन्हें पंजाब का अध्यक्ष बना दिया। हालाँकि अमरिंदर सिंह ने इसके लिए हाइकमान को मना किया था, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। उन्होंने कांग्रेस हाइकमान को ही पार्टी के सत्यानाश का कारण बताया।

भाजपा के कांग्रेस मुक्त नारे को लेकर पूछे जाने उन्होंने कहा कि अगर ऐसी ही स्थिति आगे भी बनी रही तो कांग्रेस का लुप्त होना लाजिमी है। उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा कि अभी भी चुनाव में कांग्रेस को 20 फीसदी वोट ही मिलता है। वहीं 5 राज्यों में होने वाले चुनावों को लेकर उन्होंने कहा कि अगर पार्टी जीत जाती है तो अच्छी बात है, लेकिन इसकी उम्मीद नहीं है। उनका मानना है कि पार्टी को पाँचों राज्यों में हार का मुँह देखना पड़ेगा।