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2873 संदिग्ध, 989 का आपराधिक रिकॉर्ड, 101 पर हत्या तो 284 पर डकैती-लूट के केस: CJP प्रदर्शन में शामिल चेहरों पर खुलासा, पुलिस ने हिंसा की जाँच की तेज

भारत के विरोधियों ने भारत की सांस्कृतिक पहचान नैतिकता और गरिमा को भीतर से खंडित किया है,भारत टूट रहा है,ऐसी बेहया और बदतमीज पीढ़ी का नेतृत्व करते हुए नेतृत्व का भी सिर शर्म से झुक गया है,कौन से माँ बाप को गर्व है ऐसी संतान पर ? आज भारत को शिक्षा से अधिक संस्कार और नैतिक मूल्यों को पुर्नजीवित करने की आवश्यकता है।
आहत है भारत माता की आत्मा !
दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में 20 जुलाई 2026 को संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा और उसके बाद 20 से 25 जुलाई के बीच जंतर-मंतर पर चले प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस की जाँच में बड़े खुलासे सामने आए हैं।

पुलिस के हवाले से खबरों में बताया जा रहा है कि प्रदर्शन स्थल पर मौजूद 2,873 ऐसे लोगों की पहचान की गई है जिनका आपराधिक रिकॉर्ड रहा है, जिनमें से 989 लोगों पर हत्या, हत्या के प्रयास, डकैती, लूट, दुष्कर्म, महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध, आर्म्स एक्ट, अपहरण, स्नैचिंग और NDPS जैसे गंभीर मामलों में केस दर्ज हैं।

पुलिस का कहना है कि इन लोगों की पहचान फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS), सीसीटीवी फुटेज, पुलिसकर्मियों और आम लोगों द्वारा बनाए गए वीडियो तथा अन्य तकनीकी माध्यमों से की गई है। जाँच में यह भी सामने आया कि कई आरोपित 20 से 25 जुलाई के बीच बार-बार प्रदर्शन स्थल पर लौटे।

पुलिस अब यह पता लगा रही है कि क्या इन्हीं लोगों ने जंतर-मंतर और नई दिल्ली के आसपास हुई हिंसा में सक्रिय भूमिका निभाई थी। पुलिस के मुताबिक, आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के खिलाफ गिरफ्तारी और जाँच की कार्रवाई जारी रहेगी, जबकि छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की तैयारी है।

प्रदर्शन में मिले हत्या, डकैती, दुष्कर्म और पॉक्सो समेत कई गंभीर मामलों के आरोपित

दिल्ली पुलिस की जाँच के अनुसार, हिंसा में शामिल लोगों में 101 ऐसे आरोपित पाए गए जिन पर हत्या के मामले दर्ज हैं, जबकि 62 लोगों पर हत्या के प्रयास, 284 लोगों पर डकैती और लूट, 61 लोगों पर दुष्कर्म, 25 लोगों पर छेड़छाड़, 6 लोगों पर पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत मामले दर्ज हैं।
इसके अलावा 229 लोग आर्म्स एक्ट, 135 स्नैचिंग, 19 अपहरण और 67 लोग नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट के मामलों में आरोपित पाए गए। पुलिस के अनुसार, इन आरोपितों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की भी है जो आदतन अपराधी हैं। हत्या के मामलों में शामिल 101 आरोपितों में से 42 पर दो या उससे अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं।
वहीं 12 लोगों का आपराधिक इतिहास 10 या उससे अधिक मामलों तक फैला हुआ है। हत्या के प्रयास के 62 आरोपितों में से 25 पर कई मामले दर्ज हैं। वहीं डकैती और लूट के 284 आरोपितों में से 155 पर दो या उससे अधिक केस हैं और 31 लोगों के खिलाफ 10 या उससे अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं।
दुष्कर्म के मामलों में शामिल 8 आरोपित, छेड़छाड़ के 6 आरोपित और NDPS के 9 आरोपित भी कई मामलों में पहले से आरोपित हैं।

FRS, CCTV और तकनीकी साक्ष्यों से हुई पहचान, पुलिस ने हिंसा में भूमिका की जाँच तेज की

दिल्ली पुलिस का कहना है कि संदिग्धों की पहचान फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) कैमरों, सीसीटीवी फुटेज, पुलिसकर्मियों द्वारा रिकॉर्ड किए गए वीडियो और आम नागरिकों के वीडियो के आधार पर की गई। जाँच में कई संदिग्ध उन स्थानों पर दिखाई दिए, जहाँ हिंसा हुई थी।
पुलिस के अनुसार, ये लोग पथराव करते, पुलिसकर्मियों पर हमला करते, सरकारी वाहनों को नुकसान पहुँचाते और सार्वजनिक संपत्ति में तोड़फोड़ करते नजर आए। जाँच से स्पष्ट हुआ कि प्रदर्शन स्थल पर मौजूद लोगों में केवल ऐसे व्यक्ति नहीं थे जिनका एक-दो मामलों से संबंध रहा हो, बल्कि बड़ी संख्या में आदतन और बार-बार अपराध करने वाले लोग भी मौजूद थे।

जंतर-मंतर तक ही थी अनुमति, संसद मार्च पर नहीं: चेतावनी के बाद हुआ बल प्रयोग

पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को केवल जंतर-मंतर पर धरना देने की अनुमति दी थी, जबकि संसद तक मार्च निकालने की अनुमति नहीं दी गई थी। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी बैरिकेड तोड़ते हुए संसद के बेहद करीब तक पहुँच गए, जिससे संसद की सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव की स्थिति पैदा हो गई।
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 पुलिस वाले भी इंसान हैं, मार खाने के लिए नहीं हैं; पुलिस वालों का भी परिवार होता है जस्टिस साहब; व
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पुलिस वाले भी इंसान हैं, मार खाने के लिए नहीं हैं; पुलिस वालों का भी परिवार होता है जस्टिस साहब; व
सुभाष चन्द्र जुलाई 27 को सुप्रीम कोर्ट में जंतर मंतर पर पुलिस की कथित Exesses पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने ....
दिल्ली पुलिस का कहना है कि बल प्रयोग बार-बार चेतावनी दिए जाने के बाद ही किया गया, क्योंकि प्रदर्शनकारी लगातार एक के बाद एक बैरिकेड तोड़ते रहे। पुलिस के मुताबिक, हिंसा के दौरान कई वरिष्ठ अधिकारियों सहित अनेक पुलिसकर्मी घायल हुए, लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने काफी देर तक संयम बरता।
घटना के बाद पूरे घटनाक्रम की समीक्षा शुरू की गई, जिसमें उन असामाजिक तत्वों की भूमिका की भी जाँच की जा रही है, जो पुलिस के अनुसार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के बीच घुसकर हिंसा में शामिल हुए।

कट्टरपंथियों की ज्यादतियों से मचे कोहराम से MP के बाद अब कर्नाटक में भी अपराधियों के खिलाफ योगी के ‘बुलडोजर मॉडल’ को अपनाने की तैयारी

आज भाजपा विरोधी चाहे वह मुस्लिम कट्टरपंथी क्यों न हो, भाजपा से अधिक मोदी-योगी का विरोध करते हैं, उसका कारण है कि दोनों जनता को क्षति पहुँचाने वालों पर कानून की सीमा रहते हुए बख्शते नहीं। योगी का बुलडोज़र शस्त्र इतना कारगर सिद्ध हो रहा है कि विरोधी सकते में हैं।  
कर्नाटक में भारतीय जनता युवा मोर्चा के सचिव प्रवीण नेत्तारू समेत तीन लोगों की पिछले दिनों में ही हत्या होने से दक्षिणी कर्नाटक में तनाव का माहौल है। अचरज यह है कि इन हत्याओं का तरीका लगभग एक जैसा है। बाइक या कार पर सवार होकर तीन-चार युवक आते हैं और नृशंस हत्या कर भाग जाते हैं। शक है कि यह सब पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया द्वारा किया जा रहा है। भाजयुमो नेता की हत्या में जिन लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया है, उनमें से कई पीएफआई के जुड़े हैं। अतिवादी इस्लामिक संगठन अब कई राज्यों में अपना नेटवर्क फैला रहा है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने इस नेटवर्क को नेस्तनाबूत करने के लिए उत्तर प्रदेश के सीएम योगी का मॉडल अपनाने की तैयारी कर ली है। मध्यप्रदेश सरकार ने कुछ महीनों पहले योगी मॉडल से बुलडोजर आइडिया ले लिया था।

क्या है योगी मॉडल, क्यों बुलडोजर बाबा के नाम से मशहूर हुए योगी?
उत्तर प्रदेश ही नहीं, देशभर में सीएम योगी मॉडल की चर्चा है। बुलडोजर आइडिया यह है कि जो भी बड़ा अपराध करे, उसके घर पर बुल्डोजर चलाओ। ताकि देशद्रोहियों को, संगीन अपराधियों पर तत्काल कार्रवाई हो सके और दूसरे समाजकंटकों के दिलों में भी डर बैठ सके। यूपी में योगी ने अपराधियों के घरों पर खूब बुलडोजर चलवाए। यही वजह है यूपी में सीएम योगी अपने पहले कार्यकाल में ही बुल्डोजर बाबा के नाम से सुर्खियों में आ गए थे। हालांकि योगी मॉडल केवल बुलडोजर तक ही सीमित नहीं है। अपराधियों के पोस्टर चौराहों पर लगाना, उनका जुलूस निकलवाना, उन पर अलग तरीके की सख्ती बरतना, जैसे को तैसा वाला इलाज करना, ऐसे कई उपाय इसमें शामिल हैं।

कर्नाटक सरकार ने मोर्चा नेता की हत्या की जांच NIA से कराने की सिफारिश की
यूपी का मॉडल जनमानस को भाने के बाद मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान ने भी अपराधियों पर इस मॉडल को अपनाया। बुलडोजर से साथ-साथ अपराधियों के जुलूस भी निकाले। अब कर्नाटक में इस मॉडल को लागू करने पर गंभीरता से विचार हो रहा है। कर्नाटक सरकार कह रही है हम योगी मॉडल से भी चार कदम आगे जा सकते हैं। कर्नाटक के CM बसवराज बोम्मई ने युवा मोर्चा के नेता की हत्या की जांच NIA से कराने की सिफारिश की है।

कर्नाटक सरकार के मंत्रियों और बीजेपी नेताओं ने की योगी मॉडल की डिमांड
कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा कि हत्या के मामलों में सख्त एक्शन लिया जाएगा। अब आप इसे यूपी मॉडल कहिए या फिर कर्नाटक मॉडल। प्रवीण की हत्या के बाद कर्नाटक सरकार के कुछ मंत्रियों, बीजेपी नेताओं, विधायकों और भाजयुमो कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि अपराधियों के खिलाफ योगी मॉडल लागू किया जाए। जिस तरह यूपी में सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने वालों के घर बुलडोजर से गिराए जा रहे हैं, वैसा ही एक्शन कर्नाटक में भी लिया जाए।

कर्नाटक में हत्या और माहौल खराब करने के पीछे इस्लामिक अतिवादी संगठन PFI ?
यूपी मॉडल की चर्चा इसलिए की जा रही है कि हाल में, यानी पिछले एक हफ्ते में दक्षिण कर्नाटक में लगातार तीन हत्याएं हो चुकी हैं। इसमें पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया यानी पीएफआई का भी नाम आ रहा है। दरअसल, यह एक अतिवादी इस्लामिक संगठन है जो 2006 में वजूद में आया था। कर्नाटक सरकार और वहां के मुख्यमंत्री का कहना है कि हमारा राज्य प्रगतिशील राज्य है, लेकिन हत्याओं का यह सिलसिला जारी रहा तो हम योगी मॉडल अपनाने में जरा भी नहीं हिचकिचाएंगे। दो दिन पहले भाजपा युवा मोर्चा के नेता नट्टारू की कुल्हाड़ी से हत्या कर दी गई थी। क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ताओं में इसे लेकर भारी आक्रोश है। वे लगातार इस्तीफे दे रहे हैं।

भाजयुमो नेता की हत्या मामले में 2 गिरफ्तार, PFI से जुड़े 21 संदिग्धों से पूछताछ जारी
कर्नाटक में तीसरी हत्या तब हुई, जब सीएम बसवराज बोम्मई भाजपा युवा विंग के नेता प्रवीण नेट्टारु के परिजन से मिलने उनके घर गए थे। बोम्मई ने प्रवीण के परिवार को सरकार की ओर से 5 लाख और पार्टी की ओर से 25 लाख रुपए मुआवजा दिया है। प्रवीण भाजपा युवा मोर्चा के जिला सचिव थे। उनकी हत्या के केस में दो लोगों को गुरुवार को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों के नाम शफीक बेल्लारे और जाकिर सवनुरु हैं। अभी 21 लोग पुलिस की हिरासत में जिनसे पूछताछ जारी है। ये सभी आरोपी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) से जुड़े हैं।

प्रवीण की मां और पत्नी के आंसुओं की आवाज- हत्यारों को फांसी हो
प्रवीण की हत्या को लेकर दक्षिण कन्नड़ में कार्यकर्ता बेहद गुस्से में हैं। भाजपा युवा मोर्चा के प्रवीण की 26 जुलाई की रात कुल्हाड़ी से हत्या कर दी गई थी। प्रवीण ने 29 जून को उदयपुर में कत्ल किए गए कन्हैयालाल के समर्थन में एक पोस्ट की थी। उनकी हत्या को इस पोस्ट से भी जोड़कर देखा जा रहा है। हत्या का शक PFI के टेरर मॉड्यूल पर है। केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने गृहमंत्री अमित शाह को लेटर लिखकर NIA से जांच कराने की मांग की है। प्रवीण की मां ने रोते हुए कहा- जिसने भी बेटे की हत्या की, उसे फांसी दी जानी चाहिए। वो हमारा इकलौता बेटा था। प्रवीण की पत्नी ने मांग की है कि हत्यारों को हर हाल में फांसी होनी चाहिए।

निर्दोष हिंदू कब तक कट्टरतावादी सोच से शिकार होकर खून से लथ-पथ होते रहेंगे?
कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ में भारतीय जनता युवा मोर्चा नेता प्रवीण नेत्तारू की बर्बर हत्या के बाद हिंदुओं में आक्रोश का संचार होना लाजिमी है। बीजेपी की निलंबित प्रवक्ता नुपूर शर्मा मामले के बाद देश में एक के बाद एक जो हिंसक घटनाएं सुनियोजित तरीके से घटित हो रही हैं, उनमें सभी के पीछे एक ही समुदाय के लोगों दोषी निकल रहे हैं। ऐसी घटनाओं के बाद भी मुस्लिम धर्म गुरु, मौलाना, काजी और तथाकथित धार्मिक ‘विद्वानों’ की चुप्पी न सिर्फ हिंसक घटनाओं को बढ़ावा दे रही है, बल्कि यह भी बताती है कि एक अनपढ़ मुस्लिम से लेकर पूर्व उप राष्ट्रपति तक की सोच धर्म के मामले में एक-सी और लड़ाने वाली ही है। हिंदू जनमानस में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि ऐसा आखिरकार कब तक चलेगा? कब तक निर्दोष हिंदू धार्मिक उन्मादियों, उग्रपंथियों और कट्टरतावादी सोच से शिकार होकर खून से लथ-पथ होते रहेंगे ?

उदयपुर के गरीब दर्जी कन्हैया की बात लिखी तो कर्नाटक में प्रवीण का बर्बर मर्डर
कर्नाटक पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि उदयपुर में टेलर कन्हैया लाल की जघन्य हत्या के विरोध में प्रवीण ने फेसबुक पर किया पोस्ट था, जिसके कारण उन्हें निशाना बनाया गया। कर्नाटक के प्रवीण नेत्तारू ने 29 जून को एक फेसबुक पोस्ट में लिखा था, ‘एक गरीब दर्जी का गला काटकर वीडियो बना दिया गया, सिर्फ इसलिए क्योंकि उसने एक राष्ट्रीय सोच का समर्थन किया था। अब वे कह रहे हैं कि हमारा अगला टारगेट प्रधानमंत्री मोदी हैं। आप सब अब कहां हैं?’ क्या ऐसा उस राज्य में नहीं हो रहा, जहां आपकी अपनी कृपा पर बनी कांग्रेस सरकार है…अब जीभ नहीं हिलाओगे..? क्या तुम जैसे पाखंडी हमदर्द को उस गरीब की जिंदगी पर रहम नहीं आया ? जवाब दो!

घोर सेकुलरवादियों, कांग्रेसियों और कट्टरपंथियों से प्रवीण ने मांगा था जवाब
भाजयुमो नेता प्रवीण ने अपनी पोस्ट में जिन सबको संबोधित किया वे हैं-कर्नाटक में कांग्रेस आईटी सेल की सचिव वी. शैलजा अमरनाथ, सीएए और एनआरसी की विरोधी नजमा नजीर चिकंनरेले, मेंगलूरु की कांग्रेस नेता और पूर्व पार्षद प्रतिभा कुलई, कांग्रेस की पूर्व सांसद दिव्या स्पंदना और वो सब घोर सेकुलरवादी, जो हमेशा अहिंसा का नाटक करते रहते हैं। लेकिन हिंसा को रोकने के लिए कोई जतन नहीं करते। प्रवीण की बर्बर हत्या नुपूर शर्मा के मामले के बाद कोई पहला-दूसरा केस नहीं है। उदयपुर के जघन्यतम लाइव हत्याकांड के बाद कई राज्यों में इसके खिलाफ कई घटनाएं हो चुकी हैं।

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव : 15 साल में शिवराज के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनी कांग्रेस

मध्यप्रदेश में 15वीं विधानसभा की  230 सीटों के लिए आज(नवंबर 28)  सुबह 8 से शाम 5 बजे तक मतदान हो रहा है और परिणाम 11 दिसंबर को आएंगे। लगातार चौथी बार सरकार बनाने के लिए प्रयासरत भाजपा के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सामने पिछले 15 सालों में सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस के कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया की एकता है। 
हालांकि तीनों ही कांग्रेस से मुख्यमंत्री पद के दावेदार के रूप में परस्पर प्रतिद्वंद्वी हैं, लेकिन चुनाव प्रचार के दौरान इनकी एकजुटता ने कांग्रेस को कड़ी टक्कर में ला दिया। वहीं बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी और आम आदमी पार्टी भी दोनों प्रमुख दलों को चुनौती दे रहे हैं।
इस चुनाव में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित भाजपा की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है। अगले साल आम चुनाव से पहले जिन पांच राज्यों में चुनाव हो रहे हैं उनमें मध्यप्रदेश में सबसे अधिक 29 लोकसभा सीटें हैं। विधानसभा चुनाव के परिणाम लोकसभा में भी असर डालेंगे, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता। चौहान के अलावा राज्य के वित्त मंत्री जयंत मलैया, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव, जनसंपर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा समेत केबिनेट के तमाम चेहरे चुनाव मैदान में हैं। 
कांग्रेसी दिग्गजों में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ‘राहुल’, प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव, सुरेश पचौरी और भाजपा छोड़कर होशंगाबाद से कांग्रेस के उम्मीदवार बने पूर्व केंद्रीय मंत्री सरताज सिंह का भविष्य दांव पर लगा है।

भाजपा के 3 सांसद भी मैदान में, कांग्रेस के दो सीएम चेहरे बाहर

इस बार भाजपा के तीन लोकसभा सदस्य अनूप मिश्रा, मनोहर ऊंटवाल और नागेन्द्र सिंह भी चुनाव मैदान में हैं। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के भांजे मिश्रा ग्वालियर की भितरवार, ऊंटवाल आगर मालवा और नागेन्द्र सतना की नागौद सीट से किस्मत आजमा रहे हैं। जबकि कांग्रेस से सीएम के दो चेहरे कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। 
हालांकि शिवपुरी जिले में कोलारस से कांग्रेस उम्मीदवार महेंद्र सिंह यादव ने अभी से ऐलान कर दिया है कि कांग्रेस की सरकार बनने पर यदि सिंधिया सीएम बने तो वह चुनाव जीतने पर उनके लिए अपनी सीट खाली कर कर देंगे। यादव ने सिंधिया के सामने भरी सभा में यह ऐलान किया और सिंधिया ने भी इसे स्वीकार कर लिया।
30 सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबले के आसार
राज्य में अधिकांश सीटों पर भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर है। लेकिन करीब 30 सीटें ऐसी हैं, जहां दोनों पार्टियों के बागियों और कुछ स्थानों पर बसपा-सपा के कारण त्रिकोणीय संघर्ष के हालात हैं। डैमेज कंट्रोल के लिए दोनों ही दलों के प्रबंधकों ने आखिर तक जोर लगाया, पर बात बनी नहीं। यह स्थिति प्रदेश के हर अंचल में है।


जो मालवा-निमाड़ जीता, वही सिकंदर

मालवा-निमाड़ क्षेत्र में सर्वाधिक 66 सीटें हैं। माना जाता रहा है कि जिसने यहां किला फतह कर लिया, वो सिकंदर हो जाता है। पिछली बार 66 में से 57 (एक निर्दलीय) सीटें भाजपा के पास थीं। सवाल है कि इस बार भी क्या दृश्य ऐसा ही रहने वाला है? यही हाल राज्य के दूसरे हिस्सों विंध्य, महाकौशल, बुंदेलखंड, ग्वालियर-चंबल और मध्य भारत का है।
पहली बार छह किन्नर भी मैदान में 
पहली बार छह किन्नर प्रत्याशी भी अपनी किस्मत आजमा रही हैं। इनके नाम हैं- अनूपपुर जिले की कोतमा सीट से पूर्व विधायक शबनम मौसी उर्फ शबनम कोल (61), मुरैना जिले की अंबाह सीट से नेहा किन्नर (28), दमोह जिले की दमोह सीट से रिहाना शब्बो बुआ (56), शहडोल जिले की जयसिंह नगर सीट से सल्लू मौसी (30), होशंगाबाद जिले की होशंगाबाद सीट से पांची देशमुख (44) और इंदौर जिले की इंदौर-2 सीट से बाला वैश्वरा (28)। इनमें अंबाह में नेहा किन्नर को सपाक्स पार्टी का समर्थन मिल रहा है।
किसके कितने प्रत्याशी
सीटें : 230
भाजपा : 230
कांग्रेस : 229 (जतारा सीट शरद यादव की पार्टी के लिए छोड़ी)
बसपा : 227
सपा : 51
सपाक्स : 109
आप : 208
शिवसेना : 81
गोंडवाना : 73
निर्दलीय : 1102
कुल उम्मीदवार : 2907
महिला प्रत्याशी : 235

2013 का परिणाम
भाजपा – 165
कांग्रेस – 58
बसपा – 04
अन्य – 03

कुल मतदाता : 5,04,95251
पुरुष मतदाता : 2,63,01,300
महिला मतदाता : 2,41,30,390
थर्ड जेंडर : 1389
पोस्टल बैलेट : 62,172

पहली बार के मतदाता : 10,93,445
इनमें नवयुवक : 6,48,043
नवयुवती : 4,45,330

कुल मतदान केंद्र : 65,340
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार अपनी 2014 चुनाव रैलियों में प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी कहते थे, "ना खाऊंगा, ना खाने दूँ.....

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भिंड के लहार विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस प्रत्याशी डॉ गोविंद सिंह, भाजपा प्रत्याशी रसाल सिंह और बसपा प्रत्याशी...

भाजपा के संजय पाठक की संपत्ति सबसे ज्यादा

दोबारा चुनाव लड़ रहे भाजपा और कांग्रेस उम्मीदवारों की औसत संपत्ति 5-5 करोड़ रुपए है। इनमें भाजपा के 89 और कांग्रेस के 71 करोड़पति उम्मीदवार हैं। सबसे ज्यादा संपत्ति भाजपा के संजय पाठक के नाम है। विजयराघवगढ़ से उम्मीदवार पाठक ने अपनी संपत्ति 141 करोड़ रुपए दर्शाई है। दूसरे नंबर पर भाजपा के ही चेतन कश्यप (120 करोड़ रु.) हैं। कांग्रेस से सबसे ज्यादा संपत्ति वाले उम्मीदवार संजय शर्मा हैं, जो चुनाव से ठीक पहले भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए। उन्होंने अपनी संपत्ति 65 करोड़ दर्शाई है।
शीर्ष पांच अमीर उम्मीदवार
उम्मीदवार      पार्टी       संपत्ति(रुपए में)
संजय पाठक   भाजपा        141 करोड़
चेतन कश्यप    भाजपा       120 करोड़
संजय शर्मा       कांग्रेस        65 करोड़
केपी सिंह          कांग्रेस        60 करोड़
सुरेंद्र पटवा।       भाजपा       38 करोड़

भाजपा के पवैया, कांग्रेस के गिरीश पर सबसे ज्यादा गंभीर मामले

दोबारा चुनाव में उतरे भाजपा के 28 और कांग्रेस के 41 उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें से भाजपा के 18 और कांग्रेस के 27 उम्मीदवारों पर गंभीर केस दर्ज हैं। भाजपा के 14 प्रतिशत और कांग्रेस के 27 प्रतिशत उम्मीदवारों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले हैं। भाजपा के जयभान सिंह पवैया और कांग्रेस के गिरीश कुमार पर सबसे ज्यादा 8-8 गंभीर केस दर्ज हैं।

छत्तीसगढ़ में भाजपा की कमाई कांग्रेस से चार गुना ज्यादा

छत्तीसगढ़ में सत्तारूढ़ भाजपा को हर साल करीब एक हजार करोड़ का चंदा मिलता है जबकि विपक्षी कांग्रेस की चंदे से आय भाजपा की तुलना में एक चौथाई से भी कम है। चंदा उगाही के मामले में राज्य मंे बहुजन समाज पार्टी तीसरे नंबर की पार्टी है।
छत्तीसगढ़ इलेक्शन वॉच और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की ताजा रिपोर्ट में बताया गया है कि वित्तीय वर्ष 2016-17 में छत्तीसगढ़ में भाजपा की कुल आय 1034.27 करोड़ रुपये थी। इसी दौरान कांग्रेस की आय 225.36 करोड़ रुपये बताई गई है। भाजपा ने कुल आय में से 710.057 करोड़ रुपये का व्यय दर्शाया है जबकि कांग्रेस ने इस दौरान आय से अधिक 321.36 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। बसपा की आय इस अवधि में 173.58 करोड़ रुपये रही। बसपा ने 51.83 करोड़ खर्च किया है।
90 में से 66 विधायक करोड़पति, 14 पर आपराधिक मामले
एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक छत्तीसगढ़ की 90 सदस्यीय विधानसभा मेंं 66 विधायक करोड़पति हैं। भाजपा के 49 में से 34 विधायक करोड़पति हैं जबकि कांग्रेस के 39 में से 30 विधायक करोड़पति हैं। बसपा के एकमात्र विधायक और एकमात्र निर्दलीय विधायक भी करोड़पतियों की श्रेणी में शामिल हैं।
2013 में सदन में करोड़पति विधायकों की संख्या मात्र 30 थी जो अगले चुनाव के बाद गठित सदन में बढ़कर 66 पहुंच गई। सदन में 14 विधायक ऐसे भी रहे जिनपर आपराधिक मामले दर्ज हैं। भाजपा के छह और कांग्रेस के आठ विधायकों पर विभिन्न् मामले दर्ज हैं।
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राजस्थान विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी उठापटक तेज होती जा रही है। इस बीच राज्य विधानसभा का अब तक का इतिहास देखें त.....

टीएस सिंहदेव सबसे अमीर
प्रदेश के विधायकों में कांग्रेस के टीएस सिंहदेव सबसे अमीर हैं। उनकी संपत्ति 565 करोड़ है। दूसरे नंबर पर कांग्रेस विधायक गुरुमुख सिंह होरा और भाजपा के गौरीशंकर अग्रवाल हैं। दोनों ने अपनी संपत्ति 11-11 करोड़ रुपये बताई है। कांग्रेस विधायक मोतीलाल देवांगन और भूपेश बघेल आठ-आठ करोड़ के मालिक हैं।