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बियर बार में भगवान कृष्ण और बिकनी में 7 युवतियाँ: अकरम हुसैन की पेंटिंग

अकरम हुसैन श्रीकृष्ण पेंटिंग
बेंगलुरु में जिस श्रीकृष्ण पर विवादित टिप्पणी के कारण दंगे हुए, उसी के चलते असम में कांग्रेस के कार्यकाल में एक मुस्लिम पेंटर अकरम हुसैन ने श्रीकृष्ण की आपत्तिजनक स्थिति में पेंटिंग बनाई थी। और तत्कालीन कांग्रेस तुष्टिकरण और छद्दम सेकुलरिज्म के चलते ऐसे सिरफिरे पेंटरों को आंख का तारा बनाए रखती रही, क्यों नहीं उसको जेल में डाला? जिस एम एफ हुसैन ने हिन्दुओं के देवी-देवताओं की ऐसी ही अश्लील पेंटिंग्स बनाई, उसको राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित देकर सेकुलरिज्म को प्रमाणित किया था। 
असम के एक कलाकार द्वारा बनाई गई भगवान श्रीकृष्ण की आपत्तिजनक पेंटिंग का मामला 5 साल बाद फिर से चर्चा में आ गया है। भगवान श्रीकृष्ण का अपमान करने वाली ये पेंटिंग असम के पेंटर अकरम हुसैन ने बनाई थी, जिसके खिलाफ कार्रवाई करने की माँग तेज हो गई है। इससे पहले जब अप्रैल 2015 में गुवाहाटी स्थित स्टेट आर्ट गैलरी में इसे प्रदर्शित किया गया था, तब भी इसका खासा विरोध हुआ था।
उस समय असम में कॉन्ग्रेस पार्टी की सरकार थी। जब इस पेंटिंग का प्रदर्शन हुआ था, तब हिंदूवादी संगठनों ने इसका विरोध करते हुए FIR दर्ज कराई थी। हिन्दू जागरण मंच ने अकरम हुसैन पर श्रीकृष्ण को आपत्तिजनक व अश्लील अवस्था में दिखाने के लिए मामला दर्ज कराया था। इस FIR के आधार पर केस भी फाइल हुई थी। उस समय गुवाहाटी के डीसीपी रहे अमिताभ सिन्हा ने इसकी पुष्टि की थी।

सोशल मीडिया पर सवा पाँच साल बाद वायरल हो रही इस पेंटिंग में देखा जा सकता है कि भगवान श्रीकृष्ण एक बियर बार में खड़े हैं। उनके पीछे वाली रैक पर शराब की कई बोतलें रखी हुई हैं। साथ ही 7 युवतियों को अश्लील अवस्था में उनके आस-पास और उनसे लिपटे हुए दिखाया गया है। ये सभी युवतियाँ बिकनी पहने हुए हैं। इनमें से एक जहाँ उनका चुम्बन ले रही है, वहीं दूसरी उनका पाँव पकड़ कर बैठी हुई है।
भगवान श्रीकृष्ण के भक्तों की अंतरराष्ट्रीय संस्था इस्कॉन ने भी इस पेंटिंग पर आपत्ति जताते हुए असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनवाल से अकरम हुसैन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की माँग की है। संस्था ने इस पेंटिंग को ऑफेंसिव करार देते हुए कहा कि सरकार को पेंटर के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। जब 2015 में इसे लेकर विवाद हुआ था तो पेंटर अकरम हुसैन ने माफ़ी माँगते हुए इस पेंटिंग को हटा लिया था।
भगवान श्रीकृष्ण की बचपन में गोपियों के साथ की गई रासलीला, राधा के साथ उनके प्रेम सम्बन्ध और 16 हजार रानियों वाली कथाओं को अक्सर गलत तरीके से पेश किया जाता रहा है। हालाँकि, जब गोपियों के साथ वो शरारत करते थे तब वो बच्चे थे और जिन रानियों को उन्होंने एक क्रूर राजा के चंगुल से आज़ाद किया था, लेकिन, लिबरल गैंग बिना कुछ जाने आलोचना का आदी रहा है।

‘व्यभिचारी और पागल Fuckboy थे श्रीकृष्ण, मैंने हिन्दू ग्रंथों में पढ़ा है’ : HT की सृष्टि जसवाल

सृष्टि जसवाल, HT, श्रीकृष्ण
हिंदुस्तान टाइम्स की पत्रकार सृष्टि जसवाल ने भगवान श्रीकृष्ण का किया अपमान
हिंदुस्तान टाइम्स (HT) की पत्रकार सृष्टि जसवाल के खिलाफ भगवान श्रीकृष्ण का अपमान करने के लिए भाजपा नेता गौतम अग्रवाल ने शिकायत दर्ज कराई है। HT की पत्रकार सृष्टि जसवाल ने भगवान श्रीकृष्ण का खुलेआम अपमान किया है। उन्होंने श्रीकृष्ण को व्यभिचारी, Fuckboy और फोबिया ग्रसित पागल (उन्मत्त) करार दिया था। HT की सृष्टि जसवाल का कहना है कि भगवान श्रीकृष्ण के बारे में ये सब उन्होंने हिन्दू माइथोलॉजी में पढ़ा है।
भाजपा नेता गौतम अग्रवाल ने ट्विटर पर सृष्टि के खिलाफ शिकायत दर्ज कराए जाने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि HT की पत्रकार ने भगवान श्रीकृष्ण का अपमान कर के हिन्दुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाई है, इसीलिए उन्होंने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। साथ ही उन्होंने सृष्टि जसवाल के ट्विटर प्रोफाइल का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया, जहाँ उन्होने ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ का लिंक दे रखा है।

साथ ही गौतम ने ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ से पूछा है कि क्या वो सृष्टि जसवाल की आपत्तिजनक टिप्पणियों को देखते हुए उनके खिलाफ एक्शन लेंगे? साथ ही उन्होंने जनता से अपील करते हुए कहा कि वो इस ट्वीट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें, ताकि सृष्टि की इन अपमानजनक टिप्पणियों के खिलाफ आवाज़ उठे। साथ ही गौतम ने अपनी शिकायत की प्रति भी सोशल मीडिया पर शेयर की और सृष्टि की ट्वीट का स्क्रीनशॉट भी डाला।
अपनी शिकायत में खुद को हिन्दू आईटी सेल का सदस्य बताते हुए गौतम ने लिखा कि सृष्टि जसवाल HT से जुडी हुई हैं, जो देश-विदेश में लाखों लोगों पर प्रभाव डालता है। साथ ही उनकी ट्वीट को ‘भड़काऊ और आपत्तिजनक’ करार दिया। उन्होंने अंदेशा जताया कि ऐसे बयानों को सोशल मीडिया में डालने से सांप्रदायिक द्वेष और मजहबी दुश्मनी को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने इस मामले में कड़ी कार्रवाई की माँग की।

दिल्ली : अरविन्द केजरीवाल ने किया भागवत गीता का अपमान

अरविन्द केजरीवाल, भगवद्गीता
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
सत्ता पुनः प्राप्त करने के लिए दिल्ली का मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल इतने धर्म-भ्रष्ट हो जाएंगे कि भागवत गीता का ही अपमान करे, उस स्थिति में ऐसे व्यक्ति को क्या कहा जाए? अगर इन्हे गीता का ज्ञान नहीं था, क्या जरुरत थी भगवान श्रीकृष्ण का नाम लेने की? 
अरविन्द केजरीवाल इससे पहले भी हिन्दुओं की भावनाएँ भड़काने का काम कर चुके हैं। उन्होंने हनुमानजी को लेकर आपत्तिजनक कार्टून शेयर किया था। साथ ही उन्होंने पवित्र चिह्न स्वस्तिक को लेकर भी आपत्तिजनक चित्र ट्वीट किया था।
अरविन्द केजरीवाल ने भगवद्गीता का अपमान किया है। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की बातों को भी ग़लत तरीके से झूठ बोल कर पेश किया है। दिल्ली के मुख्यमंत्री ने अमित शाह पर निशाना साधने के लिए भगवद्गीता के नाम पर आरोप-प्रत्यारोप का बाण तो चलाया लेकिन इससे उनकी पोल भी खुल गई। उन्होंने जो बातें भगवान श्रीकृष्ण के हवाले से कहा, वो बातें उन्होंने अर्जुन से कही ही नहीं थी। जहाँ एक तरफ़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भगवद्गीता के एक श्लोक का शब्दशः जिक्र कर असम के लोगों का दिल जीत लिया, केजरीवाल का चुनावी प्रोपेगंडा लोगों को रास नहीं आया।
दरअसल, अरविन्द केजरीवाल ने अमित शाह को बहस के लिए चुनौती दी थी। अब उन्होंने दावा किया है कि केंद्रीय गृहमंत्री ने उनकी चुनौती को स्वीकार नहीं किया है। केजरीवाल ने दावा किया कि अमित शाह डर कर भाग गए हैं। ये अलग बात है कि भाजपा के कई नेता केजरीवाल को बहस की चुनौती देते हैं लेकिन इसका उनके या उनकी पार्टी की तरफ़ से कोई जवाब नहीं आता। केजरीवाल ने कहा:
“गीता में लिखा है कि एक सच्चा हिन्दू बहादुर होता है वो कभी मैदान छोड़कर भागता नहीं। मैंने अमित शाह को खुली बहस की चुनौती दी लेकिन वो मैदान छोड़कर भाग गए।”
सोशल मीडिया पर इतिहास विशेषज्ञ ‘ट्रू इंडोलॉजी’ ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के झूठ की पोल खोल दी। दरअसल, श्रीकृष्ण ने पूरे भगवद्गीता में कहीं भी ‘हिन्दू’ शब्द का जिक्र ही नहीं है। इस बारे में कई विशेषज्ञों ने बताया है कि भगवद्गीता में श्रीकृष्ण ने कहीं नहीं कहा है कि वो हिन्दुओं के देवता हैं। अव्वल तो ये कि उस समय ‘धर्म’ का प्रयोग उस अर्थ में नहीं होता था, जैसे आज किया जाता है। जैसे- हिन्दू, मुस्लिम, सिख ईसाई वगैरह। इसीलिए, श्रीकृष्ण ने ‘एक सच्चा हिन्दू’ कहीं कहा ही नहीं।
उधर असम के कोकराझार में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भगवद्गीता का उदाहरण देते हुए लोगों को समझाया कि भगवान श्रीकृष्ण ने बीच युद्ध में पाण्डवों से कहा था कि किसी भी प्राणी से बैर न रखने वाला प्राणी भी मेरा है। उन्होंने निम्लिखित श्लोक का जिक्र किया:
मत्कर्मकृन्मत्परमो मद्भक्तः सङ्गवर्जितः।
निर्वैरः सर्वभूतेषु यः स मामेति पाण्डव।।11.55।।
हे पाण्डव! जो पुरुष मेरे लिए ही कर्म करने वाला है, और मुझे ही परम लक्ष्य मानता है, जो मेरा भक्त है तथा संगरहित है, जो भूतमात्र के प्रति निर्वैर है, वह मुझे प्राप्त होता है।