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चीन : कोरोना के बाद फैली ‘निमोनिया’ बीमारी, 1 दिन में 7000+ केस

                                                                                                             साभार: द इंडिपेंडेंट
कोरोना महामारी के बाद चाइना में फैल रहे H9N2 श्रेणी के निमोनिया वायरस के बारे में सुनकर एक बार फिर दुनिया के अलग-अलग देशों में डर बैठ गया है। 2 दिन पहले ही खबर आई थी कि 24 घंटे में वहाँ इस बीमारी से पीड़ित 13 हजार संदिग्ध मिले और अब भी वहाँ की हालत खराब ही है एक दिन में 7000 से ज्यादा केस आ रहे हैं। अस्पतालों में बीमार बच्चों की संख्या बढ़ती जा रही है। वहाँ की स्थिति देखते हुए डॉक्टरों ने भारतीयों को सचेत करना शुरू कर दिया है।

बच्चों को बचाएँ

NDTV रिपोर्ट के अनुसार, राम मनोहर लोहिया अस्पताल के निदेशक डॉ अजय शुक्ला ने बताया कि चीन में फैली बीमारी से पीड़ित अभी भारत में कोई बच्चा नहीं है। हालाँकि वह लोगों से अपील करते हैं कि सांस संबंधी बीमारी से बच्चों को बचाने के लिए साफ-सफाई पर ध्यान दें।
डॉक्टर शुक्ला ने कहा, “मैं बस लोगों को सावधान रहने की सलाह दूँगा। साफ-सफाई रखें और यदि आपको लगता है कि कोई है, जिसे यह साँस संबंधी बीमारी या संक्रमण है, क्योंकि इनमें से बहुत से मामले वायरल हैं और वे दूसरे इसकी चपेट में आ सकते हैं, तो दूसरों से दूरी बनाए रखने का प्रयास करें।”
डॉक्टरों का कहना है कि साँस संबंधी बीमारी से बचने के लिए आपको N95 और N99 मास्क का उपयोग करना चाहिए। साथ ही समय-समय पर अपने हाथ धोएँ और सुरक्षित, स्वस्थ व्यवहार बनाए रखें। इसी तरह डॉक्टरों का बच्चों को लेकर सलाह है कि अगर बच्चे स्कूल जा रहे हैं, तो इस बात का विशेष ध्यान रखें कि उन्हें खाँसी, जुकाम, बुखार या अन्य कोई लक्षण तो नहीं है? उनसे बात करें और पूछें कि क्या उनकी कक्षा में कोई बच्चा इस बीमारी से पीड़ित है? यदि ऐसा होता है, तो स्कूल टीचर को इसके बारे में सूचित करें और यदि आपका बच्चा बीमार है तो उसे स्कूल न भेजें।

भारत बीमारी से निपटने के लिए तैयार

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी इस विषय पर बैठक कर कहा कि स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय उत्तरी चीन में बच्चों में एच9एन2 मामलों के फैलने और श्वसन संबंधी बीमारियों के समूहों पर बारीकी से नजर रख रहा है। मंत्रालय ने इस बीमारी के बारे में बताने के साथ यह भी कहा था कि भारत मौजूदा स्थिति से उत्पन्न होने वाली किसी भी प्रकार की आपात स्थिति के लिए तैयार है।

WHO की चिंता

चीन में फैल रही ये रहस्यमयी बीमारी ने WHO की चिंता को भी बढ़ा दिया है। बताया जा रहा है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) चीन पर इसके प्रकोप पर अधिक विवरण प्रदान करने और अप्रत्याशित वृद्धि के परिणामस्वरूप बेहतर प्रतिक्रिया तंत्र की तलाश करने के लिए दबाव डाल रहा है।

चीन ने अक्टूबर में दी थी वायरस की जानकारी

इस बीमारी के बारे में चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग ने 13 नवंबर को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सूचना दी थी। बताया गया कि कुछ समय से साँस लेने संबंधी बीमारियों, विशेष रूप से इनफ्लूएँजा, माइकोप्लाज्मा निमोनिया, छोटे बच्चों को प्रभावित करने वाला एक सामान्य जीवाणु संक्रमण और श्वसन सिंकाइटियल वायरस में वृद्धि देखी जा रही है। इसके बाद धीरे-धीरे इस बीमारी पर खबरें आने लगीं। चाइना के नेशनल रेडियो ने भी बताया कि कि बीजिंग चिल्ड्रेन्स हॉस्पिटल में प्रतिदिन औसतन 7,000 मरीज भर्ती होते हैं, जो अस्पताल की क्षमता से अधिक है।

 


उत्तर प्रदेश : जीभ का इलाज कराने आए हिंदू बच्चे का खतना करने वाले डॉक्टर एम खान अस्पताल का लाइसेंस सस्पेंड

उत्तर प्रदेश के बरेली जिला प्रशासन ने डॉक्टर एम खान अस्पताल का लाइसेंस निलंबित कर दिया है। इस अस्पताल में जीभ का इलाज कराने के लिए लाए गए बच्चे का खतना किए जाने का मामला सामने आया था। लाइसेंस सस्पेंड किए जाने के बाद अस्पताल में अन्य मरीजों को इलाज के लिए दूसरी जगह शिफ्ट किया जा रहा है। राज्य सरकार को भेजने के लिए जिला प्रशासन रिपोर्ट तैयार कर रहा है। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने मामले की जाँच के लिए कमेटी के गठन की घोषणा की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के निर्देश पर स्थानीय प्रशासन अस्पताल के कागजातों की जाँच कर रहा है। प्रथम दृष्टया जाँच कमेटी ने हिंदू बच्चे के खतना मामले में अस्पताल को दोषी पाया है। इसी आधार पर अस्पताल का लाइसेंस निरस्त किया गया है। 4 सदस्यीय जाँच टीम रिपोर्ट तैयार करने में जुटी हुई है। जाँच टीम में अस्पताल मैनेजमेंट का बयान दर्ज कर चुकी है। 24 जून को जाँच टीम ने पीड़ित परिवार के बयान दर्ज किए। अपने बयान में अस्पताल प्रबंधन ने कहा है कि पीड़ित परिवार ने बच्चे के गुप्तांग का इलाज करने की लिखित सहमति दी थी।

जानकारी के मुताबिक पीड़ित परिवार ने बताया है कि उन्हें अंग्रेजी नहीं आती। उनसे अंग्रेजी के पर्चे पर दस्तख्त लिए गए थे। हस्ताक्षर लेने से पहले डॉक्टरों ने कहा था कि कोई गंभीर बात नहीं है। ऑपरेशन के बाद बच्चे को जब वार्ड में लाया गया तब उन्हें खतने की जानकारी मिली। पीड़ित परिवार ने अस्पताल पर साजिश रचकर बच्चे का खतना करने का आरोप लगाया है।

बारादरी थाना क्षेत्र में हरिमोहन यादव ने आरोप लगाया था कि डॉक्टर जावेद ने उनके बच्चे की जीभ का इलाज करने के बहाने खतना कर दिया। 23 जून को बरेली पुलिस मामले की जाँच की जानकारी ट्वीट कर दी थी।

उत्तर प्रदेश : डॉक्टर ने 12000 रूपए में नवजात हिन्दू लड़की मुस्लिम दंपति को बेच दी : अस्पताल सील

                                            हिंदू बच्ची को डॉक्टर ने बेचा (फोटो साभार: दैनिक भास्कर)
उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर से हैरान कर देने वाला एक मामला सामने आ है। यहाँ के एक प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टर पर पैसों के लिए नवजात हिंदू बच्ची को बेचने का आरोप है। हिंदू संगठनों के विरोध के बाद प्रशासन भी सचेत हुआ और उस बच्ची को वापस उसकी जन्म देने वाली माँ को सौंपा गया। वहीं अस्पताल को भी सील कर दिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर के ‘नवजीवन अस्पताल’ के एक डॉक्टर पर आरोप है कि उसके एक नवजात हिंदू बच्ची को कुछ पैसों के लालच में आकर एक मुस्लिम परिवार को बेच दिया। जब इसकी भनक हिंदू संगठनों को पड़ी तो उन्होंने इसके खिलाफ हंगामा किया और फिर पुलिस ने मामले में दखल देते हुए मामले को शांत करवाया।

बताया जा रहा है कि नवजात बच्ची के पिता का नाम रमाकांत है और वो पहले से ही 5 बेटियों के पिता है। रमाकांत ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि डॉक्टर ने उनसे कहा कि तुम्हारी पूर्व में 5 बेटियाँ हैं तो तुम इस नवजात बच्ची का पालन पोषण कैसे कर पाओगे। बच्ची को उनसे माँगा और कहा इसके बदले इलाज के पैसे मत देना। इसके बाद उसने बच्ची को ले लिया।

इस बात की खबर लगने के बाद हिंदू संगठन के नेता राजेश अवस्थी ने अपने कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर अस्पताल के सामने विरोध प्रदर्शन किया। राजेश अवस्थी ने बताया कि डॉक्टर अशोक राठौर ने गरीब हिंदू दंपति की नवजात बच्ची को मुस्लिम समुदाय के दंपति से मोटी रकम लेकर बेच दिया।

हिंदू नेता के अनुसार, उन्होंने इस प्रकरण की जानकारी प्रशासन को दे दी हैं और उनसे डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है। वहीं इस मामले में SO रविंद्र सिंह ने बताया कि मामले कि जाँच की जा रही है। विरोध होने के बाद बच्चा वापस कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि पूछताछ उस परिवार से भी होगी, जिसने बच्चे को गोद लिया था। इस घटना का आरोपित डॉक्टर फ़िलहाल फरार है।

IMA के डॉक्टर जीतेन्द्र नागर ने ईसाई धर्मांतरण पर चीफ जॉन जयलाल का माँगा इस्तीफा

बाबा रामदेव दूसरे शब्दों में कहा जाए तो आयुर्वेद के खिलाफ बोलकर डॉ जयलाल ने IMA को बेनकाब कर, इसकी प्रतिष्ठा पर कुठाराघात कर इसकी विश्वसनीयता को भी बहुत नुकसान पहुँचाया है। निकट भविष्य में जिसकी भरपाई बहुत कठिन है। जीतेन्द्र नागर की भांति अन्य डॉक्टरों को भी जयलाल की विरोध में आना चाहिए। 
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के अध्यक्ष प्रोफेसर डॉक्टर जॉनरोज ऑस्टिन के खिलाफ अब उनके ही संगठन में विरोध के स्वर फूटने लगे है। IMA के ही एक डॉक्टर ने उनका इस्तीफा माँगा है। डॉक्टर जितेंद्र नागर ने कहा कि जहाँ वो एक तरफ ‘एविडेंस बेस्ड’ एलोपैथी पर गर्व करते हैं, वहीं दूसरी तरह हमारे पूर्वजों की महान वैदिक विरासत आयुर्वेद का भी सम्मान करते हैं। उन्होंने डॉक्टर JA जयलाल का इस्तीफा माँगा।

डॉक्टर जितेंद्र नागर ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि IMA के मुखिया ईसाई धर्मांतरण के कटु एजेंडा का प्रचार-प्रसार करने में लगे हुए हैं, ऐसे में वो जब तक इन सबसे पाक-साफ़ होकर नहीं निकलते, उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने IMA को एक पत्र लिख कर संगठन के अध्यक्ष पर सोशल मीडिया पर लगे आरोपों के सम्बन्ध में आगाह किया। उन्होंने कहा कि डॉक्टर JA जयलाल ईसाई मिशनरी एजेंडा का उपदेश देने और प्रचार-प्रसार में लगे हुए हैं।

डॉक्टर जितेंद्र नागर ने पत्र में लिखा, “आखिर कैसे कोई व्यक्ति IMA जैसी संस्था के शीर्ष पद पर बैठ कर ईसाई धर्मांतरण के कटु एजेंडे को बढ़ावा दे सकता है? ऐसे आरोपों ने IMA की धर्मनिरपेक्ष और संप्रभु छवि को नुकसान पहुँचाया है, एक चिंता का भाव पैदा किया है। मैं IMA के राष्ट्रीय पदाधिकारियों से निवेदन करता हूँ कि डॉक्टर जॉनरोज ऑस्टिन जयलाल पर लगे आरोपों की जाँच के लिए एक समिति का गठन किया जाए।”

उन्होंने माँग रखी कि जब तक डॉक्टर JA जयलाल इन आरोपों को लेकर हुई जाँच में पाक-साफ़ साबित नहीं हो जाते, तब तक उन्हें IMA अध्यक्ष का पद छोड़ देना चाहिए। गुजरात के बनासकांठा स्थित डीसा के रहने वाले डॉक्टर जितेंद्र नागर IMA के सदस्य भी हैं। उन्होंने गुरुवार (मई 29, 2021) को ये पत्र लिखा था, जिसे 5 दिन बाद सोशल मीडिया पर शेयर किया। वो ‘डायबिटीज स्कूल’ संस्था के अध्यक्ष भी हैं।

उधर JA जयलाल ने कहा है कि उनके संगठन IMA की बाबा रामदेव या आयुर्वेद से कोई दुश्मनी नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि योग गुरु बाबा रामदेव ने भारत सरकार की कोरोना वैक्सीन नीति के खिलाफ अफवाह फैला कर लोगों को गुमराह किया। तमिलनाडु के तिरुनेलवेली मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में सर्जरी के प्रोफेसर जयलाल ने कहा कि बाबा रामदेव के देश-विदेश में लाखों अनुयायी हैं, ऐसी में अगर वो माफ़ी माँगते हैं तो उनके खिलाफ शिकायत वापस ली जा सकती है।

‘मनीकंट्रोल’ से बात करते हुए उन्होंने केंद्रीय मंत्रियों द्वारा बाबा रामदेव का साथ देने के सवाल पर कहा कि सरकार के कार्यप्रणाली पर वो टिप्पणी नहीं कर सकते। साथ ही उन्होंने कहा कि IMA भारत सरकार के नियमों का ही अनुसरण करता है। उन्होंने दावा किया कि IMA आयुर्वेद के आक्रामक प्रचार-प्रसार के पक्ष में है, लेकिन मिक्सिंग के खिलाफ है। उन्होंने ये भी कहा कि हजारों लोगों की तरह वो भी एक योग गुरु के रूप में बाबा रामदेव का सम्मान करते हैं।

जयलाल लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित भारतीय जनता पार्टी के नेताओं पर निशाना साधते हुए अपनी विचारधारा और मंशा को उजागर करने वाली खबरें (कुछ तो फेक भी), कार्टून और हैशटैग साझा करते रहते हैं। उन्होंने आयुर्वेद की निंदा करने वाले साक्षात्कार, व्याख्यान और सेमिनार देने में महीनों बिताए। उन्होंने कोरोना से ठीक होने का श्रेय भी जीसस को दिया।

 

अरब देशों ने सैंकड़ों पाकिस्‍तानी डॉक्‍टरों की डिग्री मानी अमान्‍य, कहा- जल्‍द देश छोड़ दें

अरब देशों ने सैंकड़ों पाकिस्‍तानी डॉक्‍टरों की डिग्री मानी अमान्‍य, कहा- जल्‍द देश छोड़ दें, वरना...
आर.बी.एल. निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
जब से इमरान खान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने हैं, लगता है सिर मुंडाते ओले पड़ने लगे। कर्ज में डूबी सरकार मिली, भारत से आतंकवाद की आड़ में छद्दम युद्ध करने वाली नीति ने विश्व में अलग-थलग कर दिया, भारत की तरफ से कभी सर्जिकल तो कभी एयर स्ट्राइक ने नाम में दम ही किया था कि अब तक कश्मीर के नाम से वहां के अवाम को गुमराह कर राज करने वालों को अगस्त 5 और 6 को भारतीय संसद के दोनों सदनों ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 को समाप्त कर बेचैन ही किया था। पाकिस्तान अभी इस जख्म से उभर भी नहीं पाया था कि अरब देशों ने ऐसी चोट मारी, जिसने पाकिस्तान डॉक्टरों के लिए संकट उत्पन्न कर दिया। अरब देशों ने जो पाकिस्तानी डॉक्टरों पर प्रश्नचिन्ह लगाया है, उसने विश्व के अन्य देशों में गए पाकिस्तानी डॉक्टरों पर सन्देह पैदा करवा दिया है। अरब देशों ने पाकिस्तानी डॉक्टरों की फर्जी डिग्रियाँ होने के कारण तुरन्त देश छोड़ने का आदेश दे दिया है। यानि पाकिस्तान में फर्जी डिग्रियां भी मिलती हैं। दूसरे अर्थों में कहा जाए फर्जीवाड़ा। स्पष्ट शब्दों में कहा जाए तो इमरान खान तो विश्व में पाकिस्तान की बेइज्जती कर रहे थे, जनता ने सोंचा हम भी क्यों पीछे रहे।


अरब देशों में काम कर रहे पाकिस्‍तानी डॉक्‍टरों के सामने एक अजब मुसीबत खड़ी हो गई है सऊदी अरब और कुछ अन्य अरब देशों ने पाकिस्तान के सदियों पुराने स्नातकोत्तर डिग्री कार्यक्रम- एमएस (मास्टर ऑफ सर्जरी) और एमडी (डॉक्टर ऑफ मेडिसिन) को अस्वीकार कर दिया है इस तरह उन्‍होंने इन डिग्री धारक डॉक्‍टरों को उच्चतम भुगतान की पात्रता सूची से हटा दिया है इस निर्णय ने कथित तौर पर पाकिस्‍तान के सैकड़ों उच्च योग्यता वाले डॉक्‍टरों की नौकरी पर संकट खड़ा कर दिया है इनमें से ज्‍यादातर सऊदी अरब में हैं, जिन्‍हें कह दिया गया है कि या तो वे खुद उनका देश छोड़ दें या फिर उन्‍हें निर्वासित कर दिया जाएगा
वहीं, भारत, मिस्‍त्र, सूडान और बांग्‍लादेश की डिग्रियों को वैधता प्रदान की है यानि इन देशों के डिग्रीधारक डॉक्‍टर वहां मेडिकल प्रैक्टिस जारी रख सकते हैं
पाकिस्तान के एमएस/एमडी की डिग्री को अस्वीकार करते हुए सऊदी स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया कि इसमें संरचित प्रशिक्षण कार्यक्रम का अभाव है, जो महत्वपूर्ण पदों के लिए मेडिक्स को रखने के लिए एक अनिवार्य आवश्यकता है। सऊदी सरकार के कदम के बाद, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन ने भी इसी तरह का कदम उठाया है
दरअसल, 2016 में सऊदी के स्वास्थ्य मंत्रालय की एक टीम ने अधिकतर प्रभावित डॉक्टरों को काम पर रखा था, जब उन्होंने ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित करने के बाद कराची, लाहौर और इस्लामाबाद में साक्षात्कार आयोजित किए थे