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मेयर जय प्रकाश का आरोप : ‘6 साल से केजरीवाल सरकार, और तब से ही डॉक्टर्स की सैलरी पर संकट’: रोक रखा है ₹10600 करोड़

उत्तरी दिल्ली नगर निगम के मेयर जय प्रकाश (बाएँ), केजरीवाल (दाएँ)
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
दिल्ली मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल प्रारम्भ से जनता को भ्रमित करते रहे हैं, मुफ्त रेवड़ियों बाँट सत्ता पर काबिज होते रहे हैं। इनकी महत्वकांशा इतनी अधिक है, लगता है राष्ट्रपति पद मिलने पर भी इन्हें लगेगा कि राष्ट्रपति के अधिकार बहुत कम है। इस स्वभाव के व्यक्ति कभी संतुष्ट नहीं हो सकते। 

केजरीवाल से पूर्व जितनी भी दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे, सभी के पास उतने अधिकार थे, जितने की आज केजरीवाल के पास, परन्तु किसी भी मुख्यमंत्री ने कभी किसी भी विभाग के कर्मचारी का वेतन नहीं रोका। समझ में नहीं आता कि आखिर क्यों इन्हे किसी का वेतन रोकने में कौन-सा सुख मिलता है? विज्ञापनों में कहते हैं कि "मैं आपके परिवार का सदस्य हूँ, आपका भाई हूँ", लेकिन परिवार के सदस्य एवं भाई होने का ढोंग रच कर्मचारियों का वेतन रोक, कौन-से पारिवारिक कर्तव्य निभा रहे हैं? 

कभी राज्यपाल से टकराव, तो कभी केन्द्र से, जबकि केजरीवाल से पूर्व किसी भी मुख्यमंत्री का राज्यपाल से लेकर केन्द्र तक से कभी कोई टकराव नहीं हुआ, केन्द्र में सत्ता में कोई भी पार्टी हो, सभी ने मिलजुल कर काम किया, एक ये केजरीवाल है, जो हमेशा किसी न किसी बात को लेकर टकराते रहते हैं, क्या ये अराजक पृष्ठभूमि से हैं? लक्षण तो यही बताते हैं।   

उत्तरी दिल्ली नगर निगम के तहत आने वाले डॉक्टर्स पिछले चार महीनों से वेतन का भुगतान नहीं करने पर आंदोलन कर रहे हैं। इस पर दिल्ली के हिंदू राव अस्पताल के डॉक्टर और कर्मचारियों ने कल, 16 अक्टूबर को दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन करने का फैसला लिया है। उत्तरी दिल्ली नगर निगम के मेयर जय प्रकाश का कहना है कि दिल्ली में 6 साल से अरविंद केजरीवाल सरकार है और पिछले 6 सालों से ही ये संकट है।

अभी तक मेडिकल स्टाफ सिर्फ अस्पताल परिसर में ही विरोध-प्रदर्शन कर रहा था, लेकिन अब उन्होंने सड़क पर उतरने का फैसला लिया है। हिन्दू राव अस्पताल के साथ ही उत्तरी दिल्ली नगर निगम द्वारा संचालित कस्तूरबा अस्पताल के रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) ने भी वेतन न मिलने के कारण अक्टूबर 14, 2020 से एक सप्ताह की हड़ताल पर जाने का फैसला किया और वेतन न मिलने पर इस्तीफा देने की धमकी भी दी है।

डॉक्टर्स और मेडिकल स्टाफ की इस समस्या पर बृहस्पतिवार (अक्टूबर 15, 2020) को उत्तरी दिल्ली नगर निगम के महापौर जयप्रकाश ने कहा है कि उन्होंने कल ही हिंदू राव और कस्तूरबा गाँधी समेत करीब 6 अस्पतालों के कर्मचारियों की 1 महीने की सैलरी जारी कर दी है और बकाया सैलरी भी जल्द से जल्द दे दी जाएगी।

समाचार एजेंसी एनआई के मुताबिक, हिंदू राव अस्पताल के डॉक्टरों की हड़ताल पर उत्तरी दिल्ली नगर निगम के मेयर जय प्रकाश ने कहा, “डॉक्टरों की तीन महीने की सैलरी बकाया थी, उसमें से एक महीने का वेतन मैंने कल रात को जारी करा दिया। सिर्फ दो महीने का वेतन बकाया है, जैसे महीना पूरा होगा एक महीने का वेतन हम और जारी कर देंगे।”

जयप्रकाश ने इसके पीछे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को दोषी ठहराते हुए कहा, “दिल्ली में 6 साल से अरविंद केजरीवाल सरकार है और पिछले 6 सालों से ही ये संकट है। दिल्ली सरकार ज़िम्मेदार रवैया अपनाते हुए हमारे इस साल के जो 1600 करोड़ रुपए और पिछले साल के 9,000 करोड़ रुपए रोक रखे हैं, उसे जारी करे और दिल्ली की जनता के साथ खिलवाड़ न करे।”

उन्होंने कहा कि नगर निगम की कमाई के 2 ही साधन हैं, पहला- राजस्व, संपत्ति कर, विज्ञापन, कार पार्किंग, लाइसेंस, नक्शे पास करने की फीस, चालान और जुर्माने इकट्ठा होने वाला पैसा और दूसरा साधन वो पैसा, जो ग्रांट के तौर पर दिल्ली सरकार से मिलता है। जयप्रकाश का कहना है कि पिछले 4-5 महीने से दिल्ली सरकार ने एक भी रुपया नहीं दिया है।

कर्नाटक : कांग्रेस नेता के अस्पताल में डॉक्टरों को 16 महीने से वेतन नहीं मिला, राजदीप कर रहे मोदी सरकार की आलोचना

राजदीप सरदेसाई
कोरोना महामारी के बीच एक ओर जहाँ हर किसी का ध्यान इन हालातों से उबरने पर है। वहीं मीडिया गिरोह के लोग इस समय भी कोई न कोई जुगाड़ करके प्रोपगेंडा चलाने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं। राजदीप सरदेसाई इस कड़ी में सबसे सक्रिय नाम हैं। ऐसा लगता है राजदीप मोदी फोबिया से ग्रस्त है। 
राजदीप ने दिल्ली में सफाई कर्मचारियों को समय से वेतन न मिलने के लिए कभी दिल्ली सरकार की आलोचना नहीं की। इतना ही दिल्ली सरकार के अंतर्गत लोकनायक जयप्रकाश हॉस्पिटल में डॉक्टरों को वेतन न मिलने को कभी उजागर करने का साहस नहीं किया। 
राजदीप ने जुलाई 1 को गणपति पर अपमानजनक ट्वीट किया था। अब उनका एक अन्य ट्वीट उनकी फजीहत का कारण बन गया है। दरअसल, राजदीप ने 1 जुलाई को अपने इस ट्वीट में कर्नाटक के दावणगेर जिले में स्थित एक अस्पताल में स्वास्थ्य कर्मचारियों को 16 महीने से वेतन न मिलने का मुद्दा उठाया। इसके बाद वह इस पूरे मामले को भी मोदी सरकार की आलोचना पर ले आए।
राजदीप ने लिखा, “कर्नाटक के दावणगेर अस्पताल में कुछ डॉक्टर्स को 16 महीने से वेतन नहीं मिला। बिलकुल 16 महीने। यहाँ थाली बजाकर कोरोना वॉरियर्स को सैल्यूट करने की कोई बात ही नहीं है अगर उन्हें उनका मेहनताना समय से न दिया जाए। ये समय बात करने का है।”

इसके बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स ने राजदीप के ट्वीट मे उल्लेखित अस्पताल से जुड़ी जानकारी निकाली। पता लगाया गया कि जिस अस्पताल में डॉक्टरों से होते अत्याचार के लिए मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, उसकी हकीकत क्या है।
इसी खोजबीन में यह पाया गया कि राजदीप जिस अस्पातल के नाम पर अपना प्रोपगेंडा चलाने की कोशिशों में जुटे थे। वो अस्पताल जेजेएम मेडिकल कॉलेज है। जिसका नाम तक राजदीप ने बताना जरूरी नहीं समझा। लेकिन जब इसके बारे में जानकारियाँ जुटाई गईं तो ज्ञात हुआ कि इसके चेयरमैन तो कॉन्ग्रेस विधायक शमनूर शिवशंकरप्पा हैं। जो कॉन्ग्रेस सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। मगर, राजदीप को इन तथ्यों से क्या? उन्हें तो खुद को कायम रखने के लिए सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर इन्हीं पब्लिक स्टंट का सहारा है।


खैर! राजदीप के इस ट्वीट के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ हैं। कुछ लोगों का कहना है कि डॉक्टरों को 16 महीने से वेतन नहीं दिया गया। जबकि भाजपा सरकार तो वहाँ केवल 11 महीने से है। क्या कॉन्ग्रेस बता सकती है कि उससे पहले से डॉक्टरों को उनकी सैलरी क्यों नहीं मिल रही थी।
कुछ लोग ऐसे भी है। जो कर्नाटक के अस्पताल के हालातों के लिए कॉन्ग्रेस नेताओं को जिम्मेदार बता रहे हैं। एक यूजर लिखता है- “अधिकांश मेडिकल व डेंटल कॉलेज कॉन्ग्रेस और उनके नुमाइंदो ने खरीदे। इन्होंने लगातार फ्रॉड किया। अब समय आ गया है इनके ख़िलाफ़ जाँच की जाए।”


इसके अलावा कुछ यूजर्स, डॉक्टरों को वेतन न दिए जाने पर राजदीप सरदेसाई की तरह मोदी सरकार को जिम्मेदार मान रहे हैं। वहीं, कुछ प्रमाण के साथ ये दावा कर रहे हैं कि येदियुरप्पा सरकार ने स्वास्थ्यकर्मियों को उनका बकाया वेतन लौटाने के लिए निर्देश दे दिए हैं।

ये वही राजदीप हैं, जिसने कहा था कि "2002 गोधरा दंगों के लिए मोदी जिम्मेदार नहीं, मीडिया ने फैलाया झूठ।" 

दिल्ली : उत्तरी नगर निगम : डॉक्टरों को जनवरी से नहीं मिली सैलरी

केजरीवाल, डॉक्टर
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
दिल्ली सहित पूरे देश में कोरोना वायरस का प्रकोप बढ़ता जा रहा है और केंद्र सरकार इससे निपटने के लिए जनता को लगातार जागरूक करने में लगी हुई है। उधर दिल्ली सरकार पर इस मामले में असंवेदनशीलता दिखाने के आरोप लग रहे हैं।
अब अरविंद केजरीवाल सरकार पर आरोप लगा है कि उसने पिछले 3 महीनों से डॉक्टरों को सैलरी नहीं दी है। ऐसा दिल्ली की एक अधिकारी के ट्वीट से पता चला है। नॉर्थ दिल्ली म्युनिसिपल कॉरपोरेशन की कमिश्नर वर्षा जोशी ने ट्वीट कर बताया है कि डॉक्टरों को जनवरी 2020 से लेकर अब तक सैलरी नहीं दी गई है।
इससे पूर्व सफाई कर्मचारियों को वेतन न मिलने के कारण, दिल्ली की सफाई व्यवस्था चौपट होने पर केंद्र में मोदी सरकार पर समय से अनुदान न किए जाने का ठीकरा फोड़ते रहे। वही स्थिति अब डॉक्टरों के वेतन के हो रही है। दिल्ली सरकार के पास उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों में पीड़ितों पर रूपए लुटाने के लिए धन था, लेकिन डॉक्टरों को वेतन देने के लिए नहीं। केजरीवाल बताएं कि "जब से दिल्ली की सत्ता में आए हैं, किसी मंत्री अथवा विधायक का वेतन रुका? 
दरअसल, वर्षा जोशी ने एक फोटो शेयर किया था, जिसमें नॉर्थ दिल्ली म्युनिसिपल कॉरपोरेशन की डॉक्टरों की टीम इंदिरा गाँधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर मुस्तैद दिख रही है। कई लोगों ने इस तस्वीर के सामने आने के बाद डॉक्टरों की तारीफ करते हुए लिखा कि इन विषम परिस्थितियों में भी वो निःस्वार्थ भाव से जनसेवा में लगे हुए हैं। इस तस्वीर में IGI एयरपोर्ट पर डॉक्टरों को स्क्रीनिंग के लिए कार्यरत देखा जा सकता है। मास्क और ग्लव्स पहने ये डॉक्टर्स यात्रियों का मेडिकल टेस्ट करने के लिए वहाँ जमे हुए हैं।


इस तस्वीर को ट्वीट करने के बाद वर्षा जोशी ने बताया कि उन्होंने जनवरी से लेकर अब तक डॉक्टरों को सैलरी नहीं दी है, क्योंकि दिल्ली सरकार ने अभी तक फंड रिलीज नहीं किया है। अभी तक उनकी ट्वीट का दिल्ली सरकार के किसी मंत्री या नेता ने कोई जवाब नहीं दिया है। लोगों ने कहा कि केजरीवाल अपनी खुशामदी में किए गए ट्वीट्स का जवाब देते हैं, लेकिन ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर बयान नहीं दे रहे। हालाँकि, एक व्यक्ति ने IAS अधिकारी वर्षा को सलाह दी कि वो दूसरे संसाधनों का प्रयोग करते हुए डॉक्टरों को सैलरी दें। वर्षा ने कहा कि अगर उनके पास दूसरे संसाधन होते तो फिर वो सैलरी के लिए दिल्ली सरकार के फंड्स का इन्तजार ही क्यों करती?
आज रविवार (मार्च 20, 2020) को पूरे देश में जनता कर्फ्यू का ऐलान किया गया है और आज 14 घंटों के लिए लोग सेल्फ-क्वारंटाइन का पालन करते हुए घरों में ही रहेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपील की है कि शाम को सभी लोग अपने घर के दरवाजे, खिड़की या बालकनी में के पास जाकर ताली, घंटी या थाली बजा कर उन डॉक्टरों और कर्मचारियों का धन्यवाद करें, जो इन विषम परिस्थितियों में भी लगातार काम कर रहे हैं।
भारत में अब तक कोरोना वायरस के 327 मामले आ चुके हैं। इनमें से 26 मामले अकेले दिल्ली के हैं। ऐसे में डॉक्टरों को सैलरी न दिया जाना दिखाता है कि दिल्ली सरकार इस समस्या को लेकर गंभीर नहीं है। जब सीएम केजरीवाल से शाहीन बाग़ प्रदर्शन के कारण कोरोना फैलने का सवाल किया गया था तो उन्होंने इसे हँसी-मजाक में टाल दिया था।