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जिस ‘इंटरन्यूज’ को अमेरिकी एजेंसी ने दिए 4100+ रूपए करोड़, उससे प्रशांत भूषण की ‘संभावना’ का रिश्ता; रवीश कुमार, प्रतीक सिन्हा… लेफ्ट-लिबरल गैंग के ‘अड्डे’ पर भी USAID की छाया

                      रवीश कुमार, प्रतीक सिन्हा और प्रशांत भूषण (फोटो साभार: द वायरल और विकिपीडिया)
कहते हैं जख्मी शेर बहुत खतरनाक होता है। जिसे सही साबित कर रहे हैं भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प। दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद से ट्रम्प का हर कदम सिर्फ अमेरिका ही नहीं विश्व के लिए फायदेमंद हो रहा है। इन जनविरोधी संस्थाओं पर कुठाराघात करने का असर भारत में भी देखा जा सकता है। आन्दोलनजीवी भी बिलों में छुप गए। पिछली लोकसभा में जो विपक्ष उनके विरुद्ध एक भी शब्द बोलते ही कोहराम मचा देता था, आज वही विपक्ष और वही संसद सत्तारूढ़ पक्ष एक से बढ़कर एक प्रहार विपक्ष पर प्रहार कर रहा है कोई कोहराम नहीं। क्योकि कोहराम करने की कीमत देने वाला कोई नहीं। ट्रम्प के कठोर कदमों का अभी असर दिखना बाकी है।   

आतंकवादियों की फांसी रुकवाने आधी रात को सुप्रीम कोर्ट खुलवाना, दंगाइयों और घुसपैठियों के बचाव में पैरवी करना, उनको निर्दोष साबित करने समाचार लिखना, अपने चैनल पर प्रसारित करना ये सब USAID की फंडिंग से हो रहा था क्या?  

गौरतलब यह है कि आज उन मुस्लिम कट्टरपंथियों --जो अयोध्या, काशी और मथुरा आदि तीर्थों का विरोध करते है,-- द्वारा कहा जा रहा है कि इस बार मुसलमानों ने बीजेपी को वोट दिया और हमारा मीडिया भी इसे खूब प्रसारित कर रहा है। जबकि आंकड़े विपरीत दिखा रहे हैं। अगर हिन्दू मुसलमानों की तरह एकजुट होकर बीजेपी को वोट नहीं देता दिल्ली बीजेपी नहीं आती। सबसे बड़ा सबूत दिल्ली दंगों का आरोपित 33000+ वोट कैसे ले गया?     

USAID के फंडिंग वाले विवाद में अब प्रोपगेंडाबाज प्रशांत भूषण का नाम उजागर हुआ है। X यूजर ‘द स्टोरी टेलर’ ने खुलासा किया है कि प्रशांत भूषण अपने संस्थान ‘Sambhaavnaa Institute of Public Policy and Politics’ के माध्यम से उस ‘इंटरन्यूज’ से जुड़े थे जिसे USAID फायदा दे रहा था।

इस Internews का काम दिखाने को दुनिया भर में ‘स्वतंत्र मीडिया’ को बढ़ावा देना है लेकिन हकीकत में ये फैलाता प्रोपगेंडा है। अगस्त 2024 में भी ये भारत विरोधी गुटों के साथ मिलकर सत्ता परिवर्तन के उद्देश्य से काम कर रहा था। इसके अलावा इसका उद्देश्य अलग-अलग मीडिया आउटलेट को पैसा देकर Fact Check  के नाम पर सोशल मीडिया पर सेंसरशिप करना और सूचनाओं को नियंत्रित करना है।

वहीं भूषण के Sambhaavnaa Institute of Public Policy and Politics की बात करें तो 20 साल पहले इसकी स्थापना Kumud Bhushan Education Society के अंतर्गत हुई थी। इसका उद्देश्य दिखाया जाता है कि ये संस्थान अन्याय से निपटने और उस पर चिंतन करने का काम करते हैं, लेकिन अगर इसकी परतें खंगालेंगे तो वामपंथी इकोसिस्टम का असर यहाँ पर पूरा-पूरा दिखेगा।

हिमाचल प्रदेश के कंगरा जिले के पालमपुर के कंदबारी गाँव में संगठन के लिए जगह ली गई थी, लेकिन बाद में ये अड्डा बना वामपंथियों का। जहाँ अक्सर योगेंद्र यादव, हर्ष मंदर, मेधा पाटकर, प्रतीक सिन्हा, नंदिनी राव, रवीश कुमार जैसे वामपंथी जुड़े रहते हैं। इसके अलावा प्रणजॉय गुहा, रवलीन कौर, मनु मुदगिन, नीतू सिंह, भाषा सिंह, स्वाति पाठक, अतुल चौरसिया, अपूर्वानंद झा जैसे पत्रकार प्रशांत भूषण के संगठन से प्रत्यक्ष तौर पर जुड़े हुए हैं। अब सबसे खास बात। अगस्त 2024 में इसी जगह एक वर्कशॉप हुई थी जिसे सपोर्ट कर रहा था वही इंटरन्यूज जिसे न सिर्फ जोर्ज सोरोस वाली Open Society Foundation  से फंड मिलता है बल्कि USAID भी इसे भारी मात्रा में फंडिंग देती है।

इंटरन्यूज और USAID का संबंध

विकीलिक्स द्वारा दी जानकारी के अनुसार, बता दें कि USAID ने इस Internews को करीबन 472.6 मिलियन डॉलर (4106 करोड़ रुपए) दिए हुए हैं और यही Internews भारत में Dead Leads के अंतर्गत चलने वाले ‘फैक्ट शाला’ के साथ काम करता है, जिसके प्रमुख चेहरे The Print के शेखर गुप्ता, The Quient की ऋतु कपूर और Beat root News के फाय डिसूजा हैं। इन कनेक्शन्स से समझा जा सकता है कि कैसे भारत में फैक्ट चेकिंग और मीडिया लिटरेसी के नाम पर सूचनाओं को सेंसर करने में USAID का पीछे से हाथ है।
इतना ही नहीं इसी USAID ने उस वार्षिक अंतर्राष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी सम्मेलन (आईएसीसी) को भी वित्त पोषित किया है जिसने साल 2022 में भारत विरोधी दिशा रवि को बोलने के लिए मंच दिया था। दिशा रवि वही हैं जिनका नाम 2021 में भारत विरोधी टूलकिट में आया था और दिल्ली पुलिस ने उन्हें पकड़ा था। आईसीसी की लिस्ट में एक संजय प्रधान भी थे जो ओपन गवर्नमेंट पार्टनरशिप के अंबेसडर हैं। यही ओजीपी उस ‘वी-डेम इंस्टिट्यूट’ को फंड देते हैं जो बेबुनियाद डेटा देकर भारत विरोधी प्रोपगेंडा फैलाने का काम करता है।

इक्वेलिटी लैब्स और इंटरन्यूज कनेक्शन

एक यूजर तापेश यादव ने इंटरन्यूज और इक्वेलिटी लैब्स के बीच फंड देने के कनेक्शन को भी उजागर किया है। ये इक्वेलिटी लैब्स अपने आपको दलित नागरिक अधिकार संगठन के रूप में बताता है, लेकिन हकीकत में ये जातिगत रंगभेद, इस्लामोफोबिया और धार्मिक असहिष्णुता पर केंद्रित एजेंडे को बढ़ाने का काम करता है।
इसी ने अन्य संगठनों के साथ मिलकर ‘संयुक्त राज्य अमेरिका में जाति: दक्षिण एशियाई अमेरिकियों के बीच जाति का सर्वेक्षण’ नामक रिपोर्ट तैयार की थी। इसके अलावा ट्विटर पर जब सीईओ जैक डोर्सी ने ‘ब्राह्माणवादी पितृसत्ता को तोड़ो’ लिखा अभियान चलाया था और बाद में पता चला था कि उसे डिजाइन करने वाले इक्वालिटी लैब्स के कार्यकारी निदेशक थेनमोझी सुंदरराजन ही थे।
अवलोकन करें:-
राजीव गाँधी फाउंडेशन-सैम पित्रोदा को USAID से मिला पैसा; भारत को तोड़ने के लिए जॉर्ज सोरोस को मिले 500
USAID का प्रोपगेंडा नेटवर्क अभी भी पूरी तरह से एक्सपोज नहीं हुआ है, ये किस संस्था को फंड देते थे, वो संस्था किससे जुड़ी थी, उस संस्था के लोग कैसे नैरेटिव बनाते थे और USAID द्वारा दी धनराशि का प्रयोग किन कामों में होता था… इन सबका खुलासा अभी और भी होना बाकी है। दशकों से USAID ने अमेरिकियों के पैसों का गलत इस्तेमाल किया है और अब धीरे-धीरे सबका पता चला रहा है।

‘उसके बारे में गंदी बातें करो, उसकी पर्सनल फोटो लीक करो’: स्वाति मालीवाल ने खोला AAP का गेम; केजरीवाल का नार्को टेस्ट करे दिल्ली पुलिस : जयहिंद मालीवाल का पूर्व पति; वीडियो

एक कहावत है कि जब सियार की मौत आती है शहर की तरफ भागता है, यानि हमज़ुल्फ़ रही स्वाति मालीवाल के साथ मारपिटाई कर अरविन्द केजरीवाल ने भिड़ के छत्ते को छेड़ दिया है। अरविन्द केजरीवाल और स्वाति मालीवाल की लड़ाई कहाँ तक जाएगी और इसका आम आदमी पार्टी के पतन में कितना योगदान होगा, भविष्य के गर्भ में छिपा है। सोशल मीडिया पर चर्चा है भी है कि मालीवाल ने आतिशी मर्लेना को कहा है कि 'तुम बच्ची हो....अगर मैंने मुंह खोला केजरीवाल अपनी फॅमिली में भी मुंह दिखाने लायक नहीं रहेगा...' आप से जुडी शाज़िया इल्मी ने भी एक चैनल को इंटरव्यू में केजरीवाल को 'शौक़ीन' बताया, यानि ये आग बहुत दूर तक जाने वाली है। ईमानदार केजरीवाल का नकाब बहुत जल्दी उठने वाला है।   

राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल से बदसलूकी मामले में जहाँ दिल्ली पुलिस विभव कुमार को मुंबई से वापस दिल्ली ले आई है, तो वहीं उनकी एक हरकत की वजह से आम आदमी पार्टी को रोज शर्मंसार होना पड़ रहा है। स्वाति मालीवाल ने हालिया पोस्ट में दावा किया है कि पार्टी के अन्य बड़े नेताओं पर प्रेशर बनाया जा रहा है कि वो लोग स्वाति के खिलाफ बोलें, उनकी निजी तस्वीरें लीक करें और उनके फर्जी स्टिंग ऑपरेशन करके लाएँ।

स्वाति ट्वीट में लिखती हैं– “कल पार्टी के एक बड़े नेता का फोन आया। उसने बताया कैसे सब पर बहुत ज़्यादा दबाव है, स्वाति के ख़िलाफ़ गंदी बातें बोलनी हैं, उसकी पर्सनल फ़ोटोज़ लीक करके उसे तोड़ना है। ये बोला जा रहा है कि जो उसको सपोर्ट करेगा उसको पार्टी से निकाल देंगे। किसी को PC करने की और किसी को ट्वीट्स करने की ड्यूटी मिली है। किसी की ड्यूटी है अमेरीका में बैठे वॉलंटियर्स को फ़ोन करके मेरे ख़िलाफ़ कुछ निकलवाने को कहा गया है। आरोपित के कुछ करीबी बीट रिपोर्टर्स की ड्यूटी है कुछ फ़र्ज़ी स्टिंग ऑपरेशन बनाकर लाओ।”

अपने ट्वीट में स्वाति ने यह बात पार्टी के बड़े नेता के हवाले से बताई है। उन्होंने अपने ट्वीट में आम आदमी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा, “तुम हजारों की फौज को खड़ी कर दो। अकेले सामना करूँगी क्यों सच मेरे साथ है।” मालीवाल ने साफ इशारा कर दिया है कि खेल की शुरुआत करो, अंजाम तक मै पहुँचाऊँगी। यानि खेल बहुत खतरनाक होने वाला। जो चुनाव ख़त्म होने या परिणाम आने के बाद अपने चरम पर पहुंचता प्रतीत होता है। 

दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष स्वाति ने पोस्ट में यह भी कहा है कि उन्हें ऐसे नेताओं से कोई नाराजगी नहीं लेकिन आरोपित बहुत शक्तिशाली आदमी है। बड़े से बड़ा नेता भी उससे डरता है। किसी की हिम्मत नहीं उसके ख़िलाफ़ स्टैंड ले पाए। ऐसे में स्वाति के मुताबिक वो किसी से उम्मीद भी नहीं करती कि कोई उनके लिए खड़ा होगा। लेकिन उन्हें दुख इस बात का लगा कि दिल्ली की महिला मंत्री कैसे हंसते मुस्कुराते पार्टी की एक पुरानी महिला साथी का चरित्र हरण किया। स्वाति कहती हैं, “मैंने अपनी स्वाभिमान की लड़ाई शुरू की है, इंसाफ़ मिलने तक लड़ाई लड़ती रहूँगी। इस लड़ाई में मैं पूरी तरह अकेली हूँ पर हार नहीं मानूँगी!”

सोशल मीडिया पर वायरल 
स्वाति मालीवाल का एक ट्वीट 
दिल्ली के मुख्यमंत्री निवास पर राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल से कथित मारपीट के आरोप में 23 मई तक पुलिस हिरासत में लिए गए अरविंद केजरीवाल के पूर्व पीए को मुंबई से वापस दिल्ली ले आया गया। हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार एक अधिकारी ने इस संबंध में बताया कि दिल्ली पुलिस बुधवार (22 मई 2024) को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के पीए रहे विभव कुमार को मुंबई से वापस ले आई है। उन्हें वहाँ एक दिन पहले उनके आईफोन के डेटा की खोज के लिए ले जाया गया था।

दिल्ली के मुख्यमंत्री निवास पर राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल से कथित मारपीट के आरोप में 23 मई तक पुलिस हिरासत में लिए गए अरविंद केजरीवाल के पूर्व पीए को मुंबई से वापस दिल्ली ले आया गया। हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार एक अधिकारी ने इस संबंध में बताया कि दिल्ली पुलिस बुधवार (22 मई 2024) को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के पीए रहे विभव कुमार को मुंबई से वापस ले आई है। उन्हें वहाँ एक दिन पहले उनके आईफोन के डेटा की खोज के लिए ले जाया गया था।

बताया जा रहा है कि विभव ने गिरफ्तारी से पहले अपने फोन को फॉर्मेट कर दिया था और डेटा किसी और को ट्रांसफर कर दिया था। पुलिस फिलहाल सारे एंगल पर पड़ताल कर रही है। विभव के फोन, लैपटॉप और केजरीवाल के घर की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग की फॉरेंसिक जाँच के लिए भेजा गया है। कल यानी 23 मई को उसकी हिरासत खत्म हो रही है। इससे पहले दिल्ली पुलिस ने 18 मई को विभव की 7 दिन की कस्टडी माँगी थी, लेकिन उन्हें 5 दिन की ही रिमांड मिली। उनके ऊपर दिल्ली की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल के साथ बदसलूकी करने का आरोप है।

उत्तर प्रदेश जाकर कांग्रेस को ‘EXPOSE’ करेंगे राजस्थान के हजारों बेरोजगार

ऐसे कितने लोग हैं जो 2014 में मोदी सरकार के केंद्र में आने के बाद पैदा हुए और युवा होकर बेरोजगार घूम रहे हैं? आरोप लगाओ जिनका आधार हो, आधारहीन नहीं। भ्रष्टाचार कह दो या घोटाला का जन्म प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के समय में हुआ था और वह जीप घोटाला। उसके बाद से आज तक एक बहुत लम्बी लिस्ट है।   

राजस्थान में युवाओं और बेरोजगारों के साथ लगातार अन्याय हो रहा है। पहले तो युवाओं के लिए नौकरियां और रोजगार के साधनों का अभाव है। यदि कभी भर्तियां निकलती भी हैं, तो वो विवादों में फंसकर रह जाती हैं। रीट परीक्षा (राजस्थान अध्यापक पात्रता परीक्षा) इसका ताजा उदाहरण है। रोजगार पाने के युवाओं के सपने पूरे नहीं हो पा रहे हैं। बेरोजगार युवाओं ने अब राजस्थान सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।

‘राजस्थान की गूंगी-बहरी सरकार नहीं कर रही है सुनवाई’
बेरोजगारों के संगठनों का आरोप है कि अपने हक के लिए कई महीनों से राजस्थान में अलग-अलग जगहों पर आंदोलन किए हैं। धरने दिए हैं। बेरोजगारों के प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री और मंत्रियों के लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष तक मिले हैं, लेकिन राजस्थान की गूंगी-बहरी कांग्रेस सरकार उनकी सुनवाई ही नहीं कर रही है। इसलिए अब आंदोलन की रणनीति बदली गई है।

बेरोजगार यूपी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का विरोध करेंगे


राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष उपेन यादव ने बताया कि सरकार की कथनी और करनी में अंतर है। प्रदेश के बेरोजगार काफी समय से धरने पर बैठकर आंदोलनरत हैं। लेकिन सरकार के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही। ऐसे में अब बेरोजगार उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का विरोध करेंगे। इसके साथ ही कांग्रेस के आला नेताओं को राजस्थान सरकार की कार्यशैली से भी अवगत कराएंगे।

बेरोजगारों का आंदोलन अब आर-पार की लड़ाई

राजस्थान सरकार के खिलाफ बेरोजगारों का आंदोलन अब आर-पार की लड़ाई में तब्दील हो गया है। राजस्थान के बेरोजगारों का प्रतिनिधिमंडल उत्तर प्रदेश के लिए रवाना हुआ। इस दौरान प्रदेश में जगह-जगह बेरोजगारों का स्वागत किया गया। जिसमें बेरोजगारों के प्रतिनिधि मंडल ने युवाओं को उत्तर प्रदेश महापड़ाव में आने का न्योता दिया।

प्रियंका गांधी की रैली में विरोध करने यूपी पहुंचेंगे युवा
महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष उपेन ने कहा कि 1000 से ज्यादा बेरोजगार 24 नवंबर को प्रियंका गांधी की रैली में विरोध करने पहुंचेंगे। ताकि राजस्थान सरकार की कारगुजारी का कांग्रेस के आला नेताओं को भी पता चल सके। उपेन यादव ने कहा कि महेश जोशी ने जूठ बोल बेरोजगारों का अनशन तुड़वाया है। जबकि रीट भर्ती परीक्षा में हुई धांधली के आरोपियों को पुलिस अब तक पकड़ नहीं पाई है।

रीट प्रकरण पर खानापूर्ति कर वाहवाही लूटना चाह रही सरकार
सरकार ने आनन-फानन में रीट का रिजल्ट जारी कर दिया। जबकि जिन लोगों तक फर्जी तरीके से पेपर पहुंचा था। उनकी मान्यता निरस्त कर उन्हें पकड़ा जाना चाहिए था। लेकिन सरकार इस पूरे प्रकरण पर खानापूर्ति कर वाहवाही लूटना चाह रही है। जिसे प्रदेश के बेरोजगार कभी भी बर्दाश्त नहीं करेंगे। कांग्रेस को इसके परिणाम भुगतने पड़ेंगे।