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अब केजरीवाल की पार्टी AAP(आम आदमी पार्टी) का होगा BBP (भ्रष्टाचार बढ़ाओ पार्टी) नाम

किसन बाबूराव हजारे जिन्हें लोग समाजसेवी अन्ना हजारे के नाम से जानते हैं, उनके भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में सक्रिय रहे अरविंद केजरीवाल ने उनको धोखा देकर न सिर्फ आम आदमी पार्टी का दो अक्टूबर 2012 को गठन कर लिया, बल्कि अन्ना हजारे के मूल सिद्धांतों को भी तिलांजलि दे दी। आम आदमी पार्टी जिस भ्रष्टाचार विरोध के मुद्दे पर जन्मी थी, एक के बाद एक उसके नेता भ्रष्टाचार के जनक ही बनते गए। पार्षद, विधायक, मंत्री से लेकर अब उप-मुख्यमंत्री तक करोड़ों के भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे हैं। आप सरकार के कानून मंत्री की वकालत की डिग्री फर्जी मिली, तो महिला कल्याण मंत्री ही महिला का बलात्कार करते धरे गए। अन्ना हजारे को अब दुख हो रहा है कि उन्होंने कैसे भ्रष्ट नेताओं के साथ मंच शेयर करके उनको आगे बढ़ाया था। दिल्ली से लेकर पंजाब तक नित-नए घोटाले, घपले और घूसखोर नेता सामने आने के कारण लगता है कि आम आदमी पार्टी (AAP) को अपना नाम बदलकर भ्रष्टाचार बढ़ाओ पार्टी (BBP) कर लेना चाहिए। क्योंकि केजरीवाल की भ्रष्टाचार पर खोखली जीरो टालरेंस नीति की अब पूरी तरह पोल खुल चुकी है। सत्येंद्र जैन और मनीष सिसोदिया केसों की जाँच में अरविन्द केजरीवाल का नाम आने की संभावनाएं व्यक्त की जा रही हैं। 

दो मंत्रियों के इस्तीफे स्वीकार कर लेने से आप के पाप धुलने वाले नहीं

द‍िल्‍ली के ड‍िप्‍टी सीएम मनीष स‍िसोद‍िया की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल को दिन में तारे नजर आने लगे हैं। व‍िपक्ष इस घटनाक्रम में बाद आप सरकार और अरव‍िंद केजरीवाल पर भ्रष्टाचार को लेकर पूरी तरह से हमलावर हो गया है। इस सबको क‍िस तरह से जवाब द‍िया जाए और सरकार की धूम‍िल हो रही छव‍ि को कैसे बचाया जाए, इसको लेकर अब माथापच्ची की जा रही है। इसी के तहत कई महीने से जेल में बंद स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन और अब धरे गए मनीष सिसोदिया से इस्तीफा मांग लिया है। लेकिन केजरीवाल के इन दोनों मंत्रियों के इस्तीफे स्वीकार कर लेने भर से आप के पाप धुलने वाले नहीं है। क्योंकि यह कोई पहली बार नहीं हुआ है, जबकि आप का बड़ा नेता भ्रष्टाचार को लेकर एक्सपोज हुआ हो।

डिप्टी सीएम और मंत्री ही नहीं, दो दर्जन से ज्यादा विधायक भी आरोपी

इससे पहले भी दिल्ली से लेकर पंजाब तक आप सरकार के मंत्री जेल जा चुके हैं। बहुत उछलकूद कर बड़ी-बड़ी बातें कर रहे डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया भी अब इन्हीं नेताओं की पंगत में शुमार हो गए हैं। मंत्रियों के अलावा आप के करीब दो दर्जन विधायकों पर घूसखोरी के अलावा अन्य आरोप लगे हैं और कुछ जेल गए हैं। वहीं मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन के इस्तीफे के बाद दिल्ली की राजनीति उफान पर है। डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया से गत वर्ष 17 अक्तूबर को भी सीबीआई ने पूछताछ की थी। इसके साथ ही ईडी ने भी कई जगह छापेमारी की थी। इससे पहले दिल्ली सरकार में स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन को ईडी ने ही गिरफ्तार किया था। ईडी ने जैन की लगभग पौने पांच करोड़ रुपये की संपत्ति भी जब्त की है।

 जेल में बंद सबसे करीबी सत्येंद्र जैन को केजरीवाल ने दी थी क्लीन चिट

मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य आरोपों में जेल में बंद स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन को केजरीवाल का बहुत करीबी माना जाता है। यही वजह है कि जैन के तिहाड़ जेल में जाने के बावजूद केजरीवाल ने अपने इस विश्वस्त मंत्री को पद से नहीं हटाया गया। खास बात ये रही कि अरविंद केजरीवाल की ओर से जैन को क्लीन चिट दी गई थी। उन्होंने कई अवसरों पर कहा कि राजनीतिक खुन्नस निकालने के लिए आप नेताओं को परेशान किया जा रहा है। लेकिन जांच एजेंसियों की लगातार की जा रही पड़ताल में दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया है। सत्येंद्र जैन के बाद मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी से केजरीवाल के भी तोते उड़ने लगे हैं। इसकी बड़ी वजह यही है कि उनकी पार्टी भ्रष्टाचारियों की फौज बनती चली जा रही है। पंजाब की जनता ने केजरीवाल की पार्टी को जिताया तो वहां भी स्वास्थ्य मंत्री विजय सिंगला भ्रष्टाचार के मामले जेल जा चुके हैं।
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन पर करोड़ों की मनी लॉन्ड्रिंग का केस
प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में शिकंजा कसते हुए दिल्ली में AAP सरकार में स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन को गिरफ्तार किया। ईडी ने जैन की 4.81 करोड़ की संपत्ति भी जब्त की थी। दरअसल, जैन के परिवार के लोग कुछ ऐसी फर्म से जुड़े थे जो PMLA के तहत जांच के दायरे में हैं। सत्येंद्र जैन की बेटी सौम्या जैन को मोहल्ला क्लीनिक के लिए सलाहकार नियुक्त किए जाने के मामले ने भी काफी तूल पकड़ा था। इस मामले की जांच सीबीआई तक को दी गई थी। ईडी की जांच में पता चला है कि साल 2015-16 के दौरान जब सत्येंद्र कुमार जैन एक लोक सेवक थे, तब जैन पर अधिकारों के दुरुपयोग के भी कई आरोप लग चुके हैं।
महिला कल्याण मंत्री संदीप कुमार ने महिला को बनाया हवस का शिकार
आम आदमी पार्टी के मंत्री भ्रष्टाचार में ही नहीं, रेप केस में भी संलिप्त पाए गए हैं। दिल्ली सरकार में मंत्री रहे संदीप कुमार 2016 में राशन कार्ड बनवाने के बहाने महिला से रेप केस में फंस चुके हैं। इस मामले में उनको जेल भेजा गया। इस घटना की एक सीडी भी सामने आई थी। संदीप कुमार 2015 में दिल्ली की सुल्तानपुर माजरा विधानसभा सीट से विधायक बना और उसको केजरीवाल सरकार में महिला एवं बाल कल्याण विकास मंत्री बनाया गया था। 2016 में एक ऐसी सीडी वायरल हुई, जिसमें संदीप कुमार को दो महिलाओं के साथ आपत्तिजनक हालात में देखे जाने के आरोप लगे। महिला का कहना था कि वह संदीप कुमार के पास राशन कार्ड बनवाने गई थी। यहां कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर पिला दिया गया। उसके बाद रेप किया गया। मंत्री के रेप केस में आने के बाद भारी दबाव पड़ने पर केजरीवाल को संदीप को हटाना पड़ा।
दिल्ली के कानून मंत्री जितेंद्र तोमर की ही वकालत की बोगस डिग्री
साल 2015 में दिल्ली सरकार में कानून मंत्री जितेन्द्र सिंह तोमर को गिरफ्तार किया गया था। उन पर वकालत की फर्जी डिग्री रखने के आरोप लगे। एक आरटीआई के हवाले से पता चला कि जितेंद्र की डिग्री बोगस है। भागलपुर यूनिवर्सिटी ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि जो पंजीकरण नंबर उनकी डिग्री पर है, उस नंबर पर कोई और पंजीकृत है। डिग्री पूरी तरह से गलत और बोगस है। जितेंद्र पहले कांग्रेस नेता भी रहे हैं। दिल्ली चुनाव में वो आम आदमी पार्टी से त्रिनगर से चुनाव जीते और केजरीवाल सरकार में कानून मंत्री बने। उनको दिल्ली के पर्यटन, कला और संस्कृति की भी जिम्मेदारी दी गई थी।
खाद्य आपूर्ति मंत्री आसिम खान ने खाई छह लाख की रिश्वत
दिल्ली सरकार में साल 2018 में मंत्री आसिम अहमद खान का नाम भी भ्रष्टाचार की सुर्खियों में आया। दिल्ली सरकार में खाद्य आपूर्ति मंत्री आसिम खान पर एक बिल्डर से 6 लाख रुपये की रिश्वत खाने के आरोप लगे। आसिम के ख‍िलाफ भ्रष्टाचार के आरोप की जांच CBI को सौंपी गई। भारी दबाव के बाद तब सीएम अरविंद केजरीवाल ने अपने कैबिनेट मंत्री आसिम अहमद खान को हटाना पड़ा था।

अरब देशों ने सैंकड़ों पाकिस्‍तानी डॉक्‍टरों की डिग्री मानी अमान्‍य, कहा- जल्‍द देश छोड़ दें

अरब देशों ने सैंकड़ों पाकिस्‍तानी डॉक्‍टरों की डिग्री मानी अमान्‍य, कहा- जल्‍द देश छोड़ दें, वरना...
आर.बी.एल. निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
जब से इमरान खान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने हैं, लगता है सिर मुंडाते ओले पड़ने लगे। कर्ज में डूबी सरकार मिली, भारत से आतंकवाद की आड़ में छद्दम युद्ध करने वाली नीति ने विश्व में अलग-थलग कर दिया, भारत की तरफ से कभी सर्जिकल तो कभी एयर स्ट्राइक ने नाम में दम ही किया था कि अब तक कश्मीर के नाम से वहां के अवाम को गुमराह कर राज करने वालों को अगस्त 5 और 6 को भारतीय संसद के दोनों सदनों ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 को समाप्त कर बेचैन ही किया था। पाकिस्तान अभी इस जख्म से उभर भी नहीं पाया था कि अरब देशों ने ऐसी चोट मारी, जिसने पाकिस्तान डॉक्टरों के लिए संकट उत्पन्न कर दिया। अरब देशों ने जो पाकिस्तानी डॉक्टरों पर प्रश्नचिन्ह लगाया है, उसने विश्व के अन्य देशों में गए पाकिस्तानी डॉक्टरों पर सन्देह पैदा करवा दिया है। अरब देशों ने पाकिस्तानी डॉक्टरों की फर्जी डिग्रियाँ होने के कारण तुरन्त देश छोड़ने का आदेश दे दिया है। यानि पाकिस्तान में फर्जी डिग्रियां भी मिलती हैं। दूसरे अर्थों में कहा जाए फर्जीवाड़ा। स्पष्ट शब्दों में कहा जाए तो इमरान खान तो विश्व में पाकिस्तान की बेइज्जती कर रहे थे, जनता ने सोंचा हम भी क्यों पीछे रहे।


अरब देशों में काम कर रहे पाकिस्‍तानी डॉक्‍टरों के सामने एक अजब मुसीबत खड़ी हो गई है सऊदी अरब और कुछ अन्य अरब देशों ने पाकिस्तान के सदियों पुराने स्नातकोत्तर डिग्री कार्यक्रम- एमएस (मास्टर ऑफ सर्जरी) और एमडी (डॉक्टर ऑफ मेडिसिन) को अस्वीकार कर दिया है इस तरह उन्‍होंने इन डिग्री धारक डॉक्‍टरों को उच्चतम भुगतान की पात्रता सूची से हटा दिया है इस निर्णय ने कथित तौर पर पाकिस्‍तान के सैकड़ों उच्च योग्यता वाले डॉक्‍टरों की नौकरी पर संकट खड़ा कर दिया है इनमें से ज्‍यादातर सऊदी अरब में हैं, जिन्‍हें कह दिया गया है कि या तो वे खुद उनका देश छोड़ दें या फिर उन्‍हें निर्वासित कर दिया जाएगा
वहीं, भारत, मिस्‍त्र, सूडान और बांग्‍लादेश की डिग्रियों को वैधता प्रदान की है यानि इन देशों के डिग्रीधारक डॉक्‍टर वहां मेडिकल प्रैक्टिस जारी रख सकते हैं
पाकिस्तान के एमएस/एमडी की डिग्री को अस्वीकार करते हुए सऊदी स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया कि इसमें संरचित प्रशिक्षण कार्यक्रम का अभाव है, जो महत्वपूर्ण पदों के लिए मेडिक्स को रखने के लिए एक अनिवार्य आवश्यकता है। सऊदी सरकार के कदम के बाद, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन ने भी इसी तरह का कदम उठाया है
दरअसल, 2016 में सऊदी के स्वास्थ्य मंत्रालय की एक टीम ने अधिकतर प्रभावित डॉक्टरों को काम पर रखा था, जब उन्होंने ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित करने के बाद कराची, लाहौर और इस्लामाबाद में साक्षात्कार आयोजित किए थे