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कथित किसानों का एजेंडा उनके ही नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल ने खोल दिया : ‘राम मंदिर से मोदी का ग्राफ चढ़ गया है, इसे गिराना है’; कितना नीचे गिरेगा विपक्ष? बेशर्मों अपनी कुर्सी नहीं, जनता की चिंता करो

                                     किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल (फोटो साभार : The Unmute)
लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी दल केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए तमाम कोशिशें कर रहे हैं। जनाधार की कमी का सामना कर रही इन पार्टियों के नेता किसी ना किसी तरह से सत्ता पाने की जुगत में लगे हुए हैं। अब चुनाव से पहले हार पक्की देख किसानों के कंधे पर बंदूक रख मोदी सरकार पर निशाना साधने की कोशिश कर रहे हैं। अब किसान आंदोलन की आड़ में दिल्ली को बंधक बनाने की कोशिश कर रहे इन किसानों के एक नेता के वायरल वीडियो से सनसनी फैल गई है। इस वीडियो में भारतीय किसान यूनियन (एकता सिद्धुपर) के अध्यक्ष जगजीत सिंह डल्लेवाल कह रहे हैं कि राम मंदिर के कारण मोदी का ग्राफ काफी ऊपर चला गया है। चुनाव से पहले हमारे पास बहुत कम समय है और हमें मोदी का ग्राफ नीचे लाना है। विरोध प्रदर्शन के बीच किसान नेता डल्लेवाल के इस वीडियो ने किसान आंदोलन को लेकर एक नया विवाद पैदा कर दिया है। लोग किसानों के प्रदर्शन की मंशा को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं। यह आंदोलन जितना लम्बा जाएगा, उतना ही विपक्ष के लिए हमेशा के लिए दुःखदायी होगा। 

शंभू बॉर्डर पर आंसू गैस के गोले दागते वक्त फेंके पत्थर

वीडियो 13 फरवरी और 14 फरवरी के दौरान का है जब किसानों ने दिल्ली कूच की कोशिश की थी। इस दौरान पुलिस की तरफ से आंसू गैस के गोले दागे जा रहे थे। दूसरी तरफ से युवा फोर्स के ऊपर पत्थर फेंकते दिख रहे हैं। वीडियो में दिख रहा है कि लोगों की भीड़ पत्थर इकट्ठा करके ला रही है, फिर उन्हें तोड़कर पुलिस के ऊपर फेंक रही है। 

18 हरियाणा पुलिस जवानों सहित 25 सुरक्षाकर्मी घायल

हरियाणा पुलिस के शीर्ष अधिकारी ने इसे एक सुनियोजित हिसा बताते हुए कहा, ''यह एक साजिश है क्योंकि वे कैरी बैग में पत्थर लेकर आए थे। पत्थरबाजी करने वालों ने अपना चेहरा भी ढक लिया था। वे सुरक्षा बलों के खिलाफ रॉड व डंडे का इस्तेमाल कर रहे हैं और पथराव भी किया। हम स्थानीय जनता से पथराव करने वाले प्रदर्शनकारियों की पहचान करने की अपील करते हैं।'' उन्होंने बताया कि इस घटना में 18 हरियाणा पुलिस जवानों सहित 25 सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं।

आखिर मोदी विरोध में विपक्ष नीचे गिर कर कब तक जनता को परेशान करता रहेगा? ये किसान आंदोलन है या देश में अराजकता फ़ैलाने की घिनौनी हरकत? विपक्ष को यह भी अब समझ लेना होगा कि अगर देश में उपद्रव मचा, 2024 चुनाव तो क्या भविष्य में आने वाले हर चुनाव में जनता तुम्हे धूल चटवाएगी, उसमे अधिकांश यही कथित किसान में होंगे। मोदी विरोध में राष्ट्र धर्म भूल विपक्ष गली-कूचे की सियासत पर उतर चुका है। ये जो ट्रेक्टर आंदोलन में जा रहा है या बॉर्डर पर लड़ने? क्या है ये तमाशा?  

किसान आंदोलन के पीछे की असली वजह खुलकर सामने आ गई है। इस आंदोलन के पीछे की वजह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ नीचे गिराना है। खुद किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल ने एक यूट्यूब चैनल से बातचीत में ये बात स्वीकारी। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ राम मंदिर के बाद बहुत बढ़ चुका है। इस आंदोलन में उन्होंने किसानों की तरफ से पूरा जोर लगाने की बात कही, ताकि मोदी सरकार की लोकप्रियता कम हो और उनकी सारी बातें मान ली जाएँ। हालाँकि मोदी की लोकप्रियता को गिराने की उनकी चाहत ये साफ बताती है कि ये आंदोलन क्यों खड़ा किया गया है।

किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल ने 14 फरवरी 2024 को ‘द अनम्यूट’ से बातचीत में कहा कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ नीचे चला जाए तो सरकार कुछ भी मान लेगी। उन्होंने कहा कि किसानों पर लाठीचार्ज ये बताता है कि ये पीएम मोदी और बीजेपी के पतन का संकेत है।

दल्लेवाल ने अपनी मंशा साफ करते हुए बताया, अगर इस सरकार द्वारा किए गए वादे को सरकार से पूरा कराना है, तो फिर सरकार बदलने से पहले उसे हमारी बातों को मानने के लिए मजबूर करना पड़ेगा। वर्ना सरकार बदल जाएगी, तो नई सरकार कहेगी कि हमने तो वादा ही नहीं किया। इसके बाद किसानों को फिर से मेहनत करनी पड़ेगी। जिस तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ बढ़ रहा है, ऐसे में मुश्किल होगी।

दल्लेवाल ने कहा, “मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ मंदिर (अयोध्या रामलला मंदिर) बनने की वजह से तेजी से बढ़ा है। मैं लोगों से कहता रहा हूँ, उनके ग्राफ को नीचे लाना होगा। अगर उनका ग्राफ ऊपर रहेगा, तो वो कुछ नहीं करने वाले, लेकिन सरकार की लोकप्रियता गिरेगी, तो वो सारी बातों को मान लेगी।” इस दौरान उन्होंने दावा किया मोदी सरकार ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को भी मान लिया है।

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किसान आंदोलन से जुड़े किसानों ने पंजाब में रेल रोको आंदोलन किया। उन्होंने दिन में 12 बजे से शाम 4 बजे तक रेलवे ट्रैक पर बैठकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान किसानों ने कई टोल नाको को भी पूरी तरह से फ्री कर दिया। वहीं, सरकार और किसान नेताओं के बीच तीसरे दौर की बातचीत चंडीगढ़ में जारी है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही कोई रास्ता निकल सकता है।

राम मंदिर देख राकेश टिकैत को आया गुस्सा, शो में चिल्लाने पर एंकर ने फटकारा

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के मद्देनजर किसान नेता राकेश टिकैत जगह-जगह सक्रिय हैं। किसान आंदोलन भले ही खत्म हो गया हो लेकिन उनके राजनीति संबंधी बयान आने बंद नहीं हो रहे। हाल में उन्हें इंडिया टीवी ने अपने शो ‘चुनाव मंच’ में अतिथि के तौर पर बुलाया और वहाँ जानना चाहा कि आखिर ‘किसानों का मुख्यमंत्री कौन है’ लेकिन यहाँ भी टिकैत का रवैया राजनीतिक ही देखने को मिला।

बीच शो में राकेश टिकैत इस बात पर चिल्ला पड़े कि आखिर उनके पीछे लगे बैकग्राउंड में राम मंदिर की तस्वीर क्यों दिखाई जा रही है। उन्होंने कहा कैमरा और कलम पर अब बंदूक का पहरा है इसीलिए शो में राम मंदिर को दिखाया जा रहा है। इसके बाद उनकी आवाज तेज होती गई और वह चैनल पर प्रचार करने का आरोप लगाते रहे। उनके समर्थकों ने पीछे से हल्ला करना शुरू कर दिया। इसी बीच एंकर ने किसान नेता का ये रवैया भांपते हुए उन्हें फटकार लगाई और समझाया कि अगर वो मेहमान हैं चैनल के तो इसका मतलब ये नहीं है कि वो कुछ भी अनाप-शनाप बोलेंगे।

एंकर ने टिकैत को दिखाया कि कैसे वो मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहे हैं और उसे हिंदू-मुस्लिम रंग दे रहे हैं। एंकर सौरव शर्मा ने टिकैत को चेतावनी दी कि वो मंच का दुरुपयोग न करें, उन्हें बुलाया गया है ताकि ये बात हो सके कि किसानों का मुख्यमंत्री कौन है। सौरव ने बताया कि जहाँ बैकग्राउंड में मंदिर दिखाया जा रहा है वहाँ पर मस्जिद भी नजर आ रहा है।

राकेश टिकैत ने इस बीच मुद्दा पलटते हुए बोलना शुरू किया कि चैनल वालों को यहाँ पर अस्पताल दिखाना चाहिए न कि मंदिर-मस्जिद। इस पर सौरव ने टिकैत को फटकारा और कहा कि अगर उन्हें राजनैतिक बातें करनी हैं तो वो कोई पार्टी ज्वाइन करे इस तरह किसानों के नाम पर आकर वह राजनेताओं की तरह बात न करें। मंदिर-मस्जिद को मुद्दा राजनीतिक पार्टियाँ बनाती हैं। एंकर को गुस्से में देख राकेश टिकैत ने अपनी आवाज धीमी कर ली। एंकर ने टिकैत को झाड़ते हुए कहा कि आखिर ये कौन सा तरीका है बात करने का। सौरव ने कहा कि टिकैत उनके मेहमान हैं लेकिन वह उनकी मनमानी नहीं चलने देंगे।

किसान आंदोलन को ट्रेनिंग बता चुके हैं टिकैत

ऐसा पहली बार नहीं है कि चुनावों से पहले टिकैत के बयानों ने या उनके रवैये ने चर्चा बटोरी हो, उन्होंने दिल्ली की सीमाओं पर 13 महीने चले किसान आंदोलन को एक ट्रेनिंग बताया। उन्होंने कहा कि अगर इसके बाद भी उन्हें ही बताना पड़े कि किसे वोट देना है या किसे नहीं, तो ट्रेनिंग का क्या फायदा। उन्होंने कहा था कि अभी प्रदेश में हिंदू मुस्लिम और जिन्ना का भूत ढाई महीने और रहेगा। इसलिए वे लोग हिंदू-मुस्लिम वाली बातों में न आएँ।

उत्तर प्रदेश : SP-RLD को समर्थन से पीछे हटे टिकैत, BJP कैंडिडेट हमारे दुश्मन नहीं--नरेश टिकैत, किसान नेता

                                     सपा रालोद गठबंधन को समर्थन के बयान से पलट गए नरेश टिकैत 
राजनीति वह चीज है, जहाँ कौन नेता कब पलटी मार जाये, कह नहीं सकते। राकेश टिकैत के भाई नरेश टिकैत द्वारा पलटी मारने से किसी को हैरान नहीं होना चाहिए। किसान आंदोलन के दौरान भी इनका योगदान भी केवल भाई की ममता के लिए था। नरेश भी अच्छी तरह जानते हैं, कि कृषि कानून किसान विरोधी नहीं, बल्कि उसके हित में थे, लेकिन दलालों के चुंगल में फंस भाई राकेश का मजबूरी में समर्थन करते रहे। दूसरे, नरेश द्वारा समाजवादी और राष्ट्रीय लोक दल को समर्थन देने के बावजूद पीछे हटने का मुख्य कारण सर्वे में योगी सरकार की वापसी ने एक मनोवैज्ञानिक भय ने संकेत दे दिया कि आम जनमानस किसान विरोधी हो गया है, जो किसान संघ के बिलकुल भी हित में नहीं है। 

भारतीय किसान यूनियन अध्यक्ष नरेश टिकैत ने अपने उस बयान पर यू टर्न ले लिया है जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 (UP Assembly Election 2022) में सपा और रालोद गठबंधन (SP-RLD Alliance) के प्रत्याशियों को खुला समर्थन देने की बात कही थी। यह यू टर्न उन्होंने 24 घंटे के ही अंदर लिया है। नए बयान में उन्होंने किसी का भी समर्थन न करने की घोषणा की है। यह बयान उन्होंने 16 जनवरी 2022 (रविवार) को जारी किया।

ANI को दिए इंटरव्यू में किसान नेता नरेश टिकैत ने अपने पिछले बयान को गलती माना है। नए बयान में नरेश टिकैत ने कहा, “वैसे तो कोई आ ही नहीं रहे। ये गठबंधन वाले ही आए। वहाँ किसान भवन में इकट्ठे हो रहे थे। मैंने भी कह दिया कि इनका ख्याल रखो। हम संयुक्त किसान मोर्चे के बंधन से फ़ालतू बोल पड़े। हमारे लिए किसान संयुक्त मोर्चा ही सर्वोपरि है। किसी भी पार्टी का कोई भी प्रत्याशी आया तो हम उसे आशीर्वाद देंगे। यहाँ कोई वोट माँगने न आए। 40 संगठनों का मोर्चा है किसान संयुक्त मोर्चा। हम अकेले जाएँगे तो वो हमें भी निकाल देंगे। 2014 में BJP की लहर थी तब हमने उन्हें समर्थन किया था। पर अब दूसरी बात है। भाजपा कैंडिडेट भी हमारे दुश्मन नहीं है। सबका स्वागत है।”

एक दिन पहले शनिवार (15 जनवरी) को नरेश टिकैत का एक वीडियो वायरल हुआ था। उस वीडियो में वो गठबंधन को सफल बनाने की बात कह रहे थे। उनके आस पास समाजवादी और RLD कार्यकर्ता दिखाई दे रहे थे। वीडियो में उन्हें कहते सुना गया था, “आप लोगन ते परीक्षा की घड़ी है। गठबंधन ते सफल बनाना है। गठबंधन को जिताने के लिए आप जो भी कर सकते हैं करें।”

अब टिकैत ने अपने इसी बयान पर सफाई दी है। उन्होंने वायरल वीडियो में जो कुछ भी कहा उसे गलती बताते हुए कहा कि वह कुछ ज्यादा बोल गए थे। अगर वह संयुक्त किसान मोर्चा से अलग गए तो मोर्चा उन्हें अलग कर सकता है। उन्होंने बीजेपी कैंडिडेट्स को समर्थन दिए जाने पर ये भी कहा कि अगर बीजेपी उम्मीदवार उनके पास जाएँगे तो वो उनका स्वागत करेंगे। चाय पानी की व्यवस्था करेंगे। बीजेपी के उम्मीदवार उनके दुश्मन नहीं है।

‘कमर में हाथ डाल नीचे खींच लिया… समझ नहीं पाई क्या हो रहा’: रैली में महिला किसान नेता से बदतमीजी

                 पहले अभिनेत्री सपना चौधरी की बाउंसर हुआ करती थीं किसान नेता पूनम पंडित (फाइल फोटोज)
केंद्र सरकार द्वारा कृषि सुधार के क्रम में लाए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ कई किसान संगठन पिछले एक साल से आंदोलन करने में लगे हुए हैं और भाजपा के खिलाफ चुनाव प्रचार भी कर रहे हैं। किसान आंदोलन के महिला चेहरों में एक पूनम पंडित भी हैं, जो पहले डांसर एवं मॉडल सपना चौधरी की बाउंसर हुआ करती थीं। उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर की रहने वाली किसान नेता पूनम पंडित के साथ मुजफ्फरनगर ‘किसान महापंचायत’ में दुर्व्यवहार हुआ।

हाल ही में राकेश टिकैत सहित ‘भारतीय किसान यूनियन (BKU)’ ने मुजफ्फरनगर में भाजपा के खिलाफ रैली आयोजित की थी, जहाँ से ‘अल्लाहु अकबर’ का भी नारा दिया गया। वहाँ पूनम पंडित को मंच पर चढ़ने से रोक दिया गया। इसके बाद कई मीडिया संस्थानों से बात करते हुए पूनम पंडित ने कुछ गंभीर आरोप लगाए। कभी हरियाणा के करनाल में नौकरी करने वाली पूनम पंडित का कहना है कि कृषि कानूनों की बारीकियों को समझने के बाद वो ‘किसान आंदोलन’ से जुड़ीं।

सपना चौधरी खुद को अंतरराष्ट्रीय शूटर भी बताती हैं। नेपाल में स्वर्ण पदक जीतने का दावा करने वाली पूनम पंडित को इस बात का मलाल है कि एक कलाकार होने के बावजूद सपना चौधरी किसानों के समर्थन में नहीं आईं। उन्होंने कुछ लोगों पर ज़हर फैला कर ‘किसान आंदोलन’ को बदनाम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यही कारण है कि मुजफ्फरनगर में उनके साथ बदतमीजी की गई थी।

इस सम्बन्ध में पूनम पंडित ने बताया, “एक लड़के ने मुझे कोली भर के, अर्थात कमर में हाथ डालकर नीचे खींच लिया। इसके बाद मुझे मंच पर चढ़ने से रोक दिया गया। उसने धमकाया कि मैं किसी भी हालत में तुम्‍हें मंच पर नहीं चढ़ने दूँगा। मेरे साथ धक्‍का-मुक्‍की भी की गई। मैं पसीने से तरबतर हो गई और मेरी तबीयत भी खराब हो गई थी। मैं कुछ समझ ही नहीं पाई की मेरे साथ ये क्या किया जा रहा है।”

पूनम पंडित ने दावा किया कि खुद BKU प्रवक्ता राकेश टिकैत ने उन्हें महापंचायत में आमंत्रित किया था। बाद में राकेश टिकैत ने उन्हें मंच पर भी जगह दी। आखिरी दम तक ‘किसान आंदोलन’ से जुड़ी रहने की बात करते हुए पूनम पंडित ने बताया कि वो अभी 25 साल की हैं और उन्होंने हाल ही में अपनी छोटी बहन की शादी की है। उनके पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं और माँ ने ही बच्चों की परवरिश की है।

हरियाणवी और यूपी के लहजे में भाषण देने वाली पूनम पंडित का कहना है कि कई लोग उन्हें पसंद नहीं करते और उनके साथ पहले भी दुर्व्यवहार हो चुका है। टिकरी सीमा पर चल रहे प्रदर्शन में भी उन्हें रोक दिया गया था। करनाल में किसानों पर लाठीचार्ज का आरोप लगा कर हुए आंदोलन में भी वो सक्रिय रही थीं। हरियाणा को अपने घर जैसा बताने वाली पूनम पंडित ने कहा कि कुछ लोगों की नफरत के कारण वो हार नहीं मान सकतीं।

सोशल मीडिया पर कई लोगों ने किसान नेता पूनम पंडित की तस्वीर शेयर करते हुए उन पर भाजपा का एजेंट होने का आरोप लगा उन्हें ‘विश्वासघाती’ भी कह रहे हैं। ध्रुव राठी जैसों ने उनकी तस्वीर शेयर कर के दावा किया कि वो भाजपा दफ्तर में बैठी हुई हैं। लोगों का कहना है कि पूनम पंडित इन तस्वीरों को एडिटेड बता रही हैं, लेकिन भाजपा दफ्तर में बैठे उनके वीडियोज को लेकर वो क्या कहेंगी? लोग उन्हें ‘किसान आंदोलन’ से अलग करने की माँग भी कर रहे हैं।