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अखिलेश यादव-जयंत चौधरी ने ‘8 करोड़ रूपए में बेच दिए टिकट’: प्रदेश अध्यक्ष मसूद अहमद ने इस्तीफा देकर खोली की पोल

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में हार के बाद समाजवादी पार्टी और ‘राष्ट्रीय लोकदल (RLD)’ गठबंधन के बीच दरार आनी शुरू हो गई है। पिछले साढ़े 5 वर्षों से RLD के प्रदेश अध्यक्ष रहे मसूद अहमद ने अपने पद और पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने 7 पन्ने के एक पत्र को भी सार्वजनिक किया है, उन्होंने आरोप लगाया है कि जयंत चौधरी और अखिलेश यादव ने पैसे लेकर टिकट बाँटे। उनका आरोप है कि हापुड़ की सीट को 8 करोड़ रुपए में बेचा गया।

साथ ही उन्होंने इस गठबंधन में दलितों और मुस्लिमों को नज़रअंदाज़ किए जाने का भी आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने कहा कि ‘भीम आर्मी’ के संस्थापक चंद्रशेखर आज़ाद रावण को गठबंधन में साथ नहीं लेने से नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि चुनाव के ऐन वक्त पर भाजपा छोड़ कर सपा में गए स्वामी प्रसाद को अचानक कुशीनगर के फाजिलनगर भेजे जाने से उनकी हार हुई। साथ ही SBSP अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर की ‘ओछी बयानबाजी’ को भी हार के लिए जिम्मेदार ठहराया।

मसूद अहमद ने बाहरियों को टिकट वितरण में प्राथमिकता दिए जाने का आरोप लगाया। उनका आरोप है कि दिल्ली के कार्यालय में बैठे नेता टिकट के लिए करोड़ों की माँग करने लगे। उन्होंने उदाहरण दिया कि गजराज सिंह के पार्टी में शामिल होने के दो घंटे के भीतर उन्हें टिकट दे दिया गया। उन्होंने कहा कि जाट समुदाय में ऐसा सन्देश गया कि जयंत चौधरी ने अखिलेश यादव के समक्ष घुटने टेक दिए हैं। उन्होंने कहा कि शिवपाल यादव के अपमान से भी गलत सन्देश गया।

उत्तर प्रदेश : SP-RLD को समर्थन से पीछे हटे टिकैत, BJP कैंडिडेट हमारे दुश्मन नहीं--नरेश टिकैत, किसान नेता

                                     सपा रालोद गठबंधन को समर्थन के बयान से पलट गए नरेश टिकैत 
राजनीति वह चीज है, जहाँ कौन नेता कब पलटी मार जाये, कह नहीं सकते। राकेश टिकैत के भाई नरेश टिकैत द्वारा पलटी मारने से किसी को हैरान नहीं होना चाहिए। किसान आंदोलन के दौरान भी इनका योगदान भी केवल भाई की ममता के लिए था। नरेश भी अच्छी तरह जानते हैं, कि कृषि कानून किसान विरोधी नहीं, बल्कि उसके हित में थे, लेकिन दलालों के चुंगल में फंस भाई राकेश का मजबूरी में समर्थन करते रहे। दूसरे, नरेश द्वारा समाजवादी और राष्ट्रीय लोक दल को समर्थन देने के बावजूद पीछे हटने का मुख्य कारण सर्वे में योगी सरकार की वापसी ने एक मनोवैज्ञानिक भय ने संकेत दे दिया कि आम जनमानस किसान विरोधी हो गया है, जो किसान संघ के बिलकुल भी हित में नहीं है। 

भारतीय किसान यूनियन अध्यक्ष नरेश टिकैत ने अपने उस बयान पर यू टर्न ले लिया है जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 (UP Assembly Election 2022) में सपा और रालोद गठबंधन (SP-RLD Alliance) के प्रत्याशियों को खुला समर्थन देने की बात कही थी। यह यू टर्न उन्होंने 24 घंटे के ही अंदर लिया है। नए बयान में उन्होंने किसी का भी समर्थन न करने की घोषणा की है। यह बयान उन्होंने 16 जनवरी 2022 (रविवार) को जारी किया।

ANI को दिए इंटरव्यू में किसान नेता नरेश टिकैत ने अपने पिछले बयान को गलती माना है। नए बयान में नरेश टिकैत ने कहा, “वैसे तो कोई आ ही नहीं रहे। ये गठबंधन वाले ही आए। वहाँ किसान भवन में इकट्ठे हो रहे थे। मैंने भी कह दिया कि इनका ख्याल रखो। हम संयुक्त किसान मोर्चे के बंधन से फ़ालतू बोल पड़े। हमारे लिए किसान संयुक्त मोर्चा ही सर्वोपरि है। किसी भी पार्टी का कोई भी प्रत्याशी आया तो हम उसे आशीर्वाद देंगे। यहाँ कोई वोट माँगने न आए। 40 संगठनों का मोर्चा है किसान संयुक्त मोर्चा। हम अकेले जाएँगे तो वो हमें भी निकाल देंगे। 2014 में BJP की लहर थी तब हमने उन्हें समर्थन किया था। पर अब दूसरी बात है। भाजपा कैंडिडेट भी हमारे दुश्मन नहीं है। सबका स्वागत है।”

एक दिन पहले शनिवार (15 जनवरी) को नरेश टिकैत का एक वीडियो वायरल हुआ था। उस वीडियो में वो गठबंधन को सफल बनाने की बात कह रहे थे। उनके आस पास समाजवादी और RLD कार्यकर्ता दिखाई दे रहे थे। वीडियो में उन्हें कहते सुना गया था, “आप लोगन ते परीक्षा की घड़ी है। गठबंधन ते सफल बनाना है। गठबंधन को जिताने के लिए आप जो भी कर सकते हैं करें।”

अब टिकैत ने अपने इसी बयान पर सफाई दी है। उन्होंने वायरल वीडियो में जो कुछ भी कहा उसे गलती बताते हुए कहा कि वह कुछ ज्यादा बोल गए थे। अगर वह संयुक्त किसान मोर्चा से अलग गए तो मोर्चा उन्हें अलग कर सकता है। उन्होंने बीजेपी कैंडिडेट्स को समर्थन दिए जाने पर ये भी कहा कि अगर बीजेपी उम्मीदवार उनके पास जाएँगे तो वो उनका स्वागत करेंगे। चाय पानी की व्यवस्था करेंगे। बीजेपी के उम्मीदवार उनके दुश्मन नहीं है।

आरएलडी चीफ अजीत सिंह ने पत्नी को लेकर मोदी पर की अमर्यादित टिप्पणी

चुनाव को जीतने के लिए नेता बिरादरी हर वो काम करने को तैयार नजर आती है जिससे उन्हें चुनाव में जीत हासिल हो, लोकसभा चुनाव एकदम सिर पर हैं ऐसे में सारे प्रत्याशी विजयश्री हासिल करने के लिए हर जोड़ घटाने में जुटे हैं। वहीं कुछ नेताओं की बिरादरी ऐसी है वो वोट के लिए पब्लिक के सामने कुछ भी बोलने में गुरेज नहीं करते हैं चाहे इसके लिए भाषा का स्तर कितना भी गिर जाये, कुछ ऐसा ही नजारा दिखा आरएलडी चीफ अजीत सिंह की एक रैली में जहां अजीत सिंह भाषा की मर्यादा ही भूल गए।
आरएलडी चीफ अजीत सिंह ताबड़तोड़ चुनावी रैलियां कर रहे हैं और वो पब्लिक के वोट पाने के लिए हर चुनावी हथकंडा अपना रहे हैं। अजीत सिंह के निशाने पर पीएम मोदी अक्सर ही रहते हैं, बागपत में एक रैली को संबोधित करते हुए अजीत सिंह कुछ ज्यादा ही जोश में आ गए और पीएम मोदी पर आरोपों की बौछार कर दी साथ ही पीएम मोदी की खिल्ली भी उड़ाई।

Embedded video

RLD Chief Ajit Singh on PM Modi: Ye jhoot nahi bolta..bas isne aaj tak sach nahi bola.Bacchon ko kehte hain sach bola kar,lekin iske Ma baap ne nahi sikhaya.Mahilaon ka pakshdhar hai,teen talaq teen talaq..apni patni ko ek baar bhi talaq nahi bola aur chhod diya (3.4.19)
9:09 AM - Apr 4, 2019 
अजीत सिंह की इस रैली का एक वीडियो सामने आया है जिसमें अजीत सिंह प्रधानमंत्री मोदी पर वार कर रहे हैं इसमें अजीत सिंह कहते हैं- ये झूठ नहीं बोलता..बस इसने आज तक सच नहीं बोला...
चौधरी अजित सिंह ने अप्रैल 3 को भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए तीखी टिप्पणी की थी। उत्तर प्रदेश के बागपत में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को लगता है उनके अलावा देश में कोई और काम नहीं कर सकता।
अजित सिंह ने इससे दो कदम आगे जाकर कहा था, 'मोदी इतने होशियार और शातिर आदमी हैं कि अगर ये श्रीलंका चले जाते तो कहते कि रावण को मैंने ही मारा। क्योंकि देश में और किसी ने तो कुछ किया ही नहीं है।' गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2017 में श्रीलंका का दौरा किया था।
इससे पहले भी हाल ही में लोकसभा चुनाव की सुगबुगाहट के बीच अजित सिंह ने मुजफ्फरनगर में एक रैली को संबोधित करते हुए देश के प्रधानमंत्री और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के खिलाफ विवादित टिप्पणी की थी।
गौरतलब है कि आरएलडी मुखिया अजित सिंह मुजफ्फरनगर सीट से और उनके बेटे जयंत चौधरी बागपत से लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। अजित सिंह हाल के दिनों में कह चुके हैं कि यह उनका अंतिम चुनाव होगा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रालोद का जनाधार माना जाता है लेकिन पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनावों में उसे नकुसान उठाना पड़ा है। 
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कानपुर से आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार कभी एक म्यान में दो तलवारें नहीं समां सकती, और यह बात चरितार्थ होती है, सपा और...

हालांकि, कैराना लोकसभा सीट पर हुए उप चुनाव में मिली जीत ने उसे वापसी का मौका दिया।बागपत लोकसभा सीट से अजित सिंह ने आठ बार चुनाव लड़ा है और दो बार इस सीट पर उन्हें हार का सामना करना पड़ा है।