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'नकाबपोश' योगेश के मोबाइल से 4 किसान नेताओं की तस्वीरें बरामद

                                                                                                           साभार: Newsclick
किसान नेताओं ने शुक्रवार रात (22 जनवरी 2021) एक नकाबपोश को शूटर बताते हुए मीडिया के सामने पेश किया था। दावा किया गया था 26 जनवरी को प्रस्तावित ट्रैक्टर रैली के दौरान चार किसान नेताओं की हत्या की साजिश का वह हिस्सा था। ‘नकाबपोश’ योगेश सिंह ने शनिवार को चौंकाने वाले खु​लासे करते हुए बताया कि किसान नेताओं ने उसे प्रताड़ित कर पुलिस पर दोषारोपण करने को मजबूर किया था।

योगेश सिंह ने खुलासा करते हुए कहा कि किसानों ने उसका अपहरण कर लिया था और हरियाणा पुलिस को फँसाने के लिए कथित किसान नेताओं ने उसे झूठ बोलने के लिए मजबूर किया था।

शुक्रवार को हरियाणा पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए योगेश सिंह ने आज पुलिस के सामने स्वीकार कर लिया कि उसने प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसानों पर कथित हमले के बारे में झूठ बोला था। सोनीपत के 19 वर्षीय निवासी ने कहा कि ‘किसान’ नेताओं ने उसे चेतावनी दी थी कि अगर उन्होंने हमलों की झूठी साजिश की बात नहीं कही और इसके लिए हरियाणा पुलिस को दोषी नहीं ठहराया तो वो उसे जान से मार देंगे। 

‘किसान’ नेताओं की धमकियों के बाद, योगेश सिंह वह सब कुछ करने के लिए तैयार हो गया, जिसके लिए किसानों ने उसे मजबूर किया। इसी वजह से प्रेस कॉन्फ्रेंस में उसने 26 जनवरी को होने वाली ट्रैक्टर रैली के दौरान चार किसान नेताओं को मारने की साजिश रचने वाली एक हमला टीम का हिस्सा होने की बात कबूल की।

हरियाणा पुलिस ने चार किसान नेताओं की तस्वीरें बरामद की है

प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद हरियाणा पुलिस सिंघु बॉर्डर पहुँची और ‘नकाबपोश’ योगेश सिंह को हिरासत में ले लिया। जाँच के दौरान, योगेश सिंह ने खुलासा किया कि उसके मन में किसान विरोध या हरियाणा पुलिस के खिलाफ कुछ भी नहीं है। सिंह ने खुलासा किया कि कुछ प्रदर्शनकारी दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाकर उसे टेंट में ले गए, जहाँ उन्होंने उसे यह कहते हुए हरियाणा पुलिस को झूठा फँसाने के लिए मजबूर किया कि उसने चार नेताओं को मारने की साजिश रची थी।
‘किसानों’ ने कथित तौर पर उसे चेतावनी भी दी कि यदि वह उनके आदेश का पालन नहीं करेगा तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। अगले दिन भी, ‘किसान’ नेताओं ने उसे बेरहमी से पीटा और धमकी दी कि अगर वह उनके निर्देशों का पालन करने के लिए सहमत नहीं हुआ तो उसे मार देंगे।
सूत्रों के अनुसार, किसान नेताओं ने अपने दावे को विश्वसनीय बनाने के लिए योगेश सिंह के फोन में उन चार ‘किसान’ नेताओं की तस्वीरें भी डाली, जिन्हें मारने की ‘नकाबपोश शूटर’ ने साजिश रची थी। हरियाणा पुलिस ने उसके मोबाइल फोन से चार किसान नेताओं – बलबीर सिंह राजेवाल, बलदेव सिंह सिरसा, कुलदीप संधू और जगजीत सिंह की तस्वीरें बरामद की हैं। सूत्रों के मुताबिक, ये तस्वीरें ‘किसान नेताओं’ द्वारा डाली गई थी, जिन्होंने उसे प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान झूठ बोलने की धमकी दी और प्रताड़ित किया। 

‘नकाबपोश’ को पुलिस के हवाले करने में कर रहे थे संकोच

शुक्रवार देर रात सिंघु सीमा पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में ‘नकाबपोश’ योगेश सिंह को मीडिया के सामने पेश करने के बाद ‘किसान’ नेता उसे पुलिस के हवाले करने से संकोच कर रहे थे।
‘किसान’ नेता उसे पुलिस के सामने पेश करने से हिचक रहे थे और इसके बजाय हरियाणा पुलिस से उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करने की माँग कर रहे थे। उन्होंने पुलिस से तथाकथित किसानों के खिलाफ हमले की कथित साजिश करने वाले के लिए किसी तरह के कठोर कदम उठाने से मना किया। 

हरियाणा में हथियारों संग गिरफ्तार खालिस्तानी आतंकी SFJ से जुड़े तार

                                   खालिस्तानी आतंकी समूह सिख फॉर जस्टिस (साभार: zee news)
हरियाणा पुलिस ने हाल ही में करनाल से दो हथियारबंद खालिस्तानी आतंकवादियों को गिरफ्तार किया था जो ‘सिख फॉर जस्टिस’ (SFJ) के लिए काम कर रहे थे। गिरफ्तार किए गए आतंकवादियों ने पूछताछ के दौरान खुलासा किया कि वह अमेरिकी मूल के गुरमीत सिंह के संपर्क में थे। खालिस्तानी गुरमीत सिंह ने इनके खाते में मनीग्राम (MoneyGram) के ज़रिए लाखों रुपए भेजे थे। 

किसान प्रदर्शन के शुरू होते ही, प्रदर्शन पर अराजक तत्वों द्वारा कब्जे के समाचार आने लगे थे, वह शंका अब दूर हो चुकी है। यदि वह अपने मकसद में सफल हो जाते निश्चित रूप से देश में नागरिकता संशोधक कानून के विरोध में हुए हिन्दू विरोधी दंगों से कहीं अधिक भयानक दंगे हो रहे होते। जो 1984 से कहीं अधिक गाँधी हत्या के बाद हुए चितपावन ब्राह्मणों के हुए भयंकर नरसंहार से भी अधिक भयानक हो सकते थे। और इस प्रदर्शन को समर्थन दे रहे सियासतखोर नेता और पार्टियां विधवा विलाप कर रहे होते। केंद्र सरकार के साथ-साथ किसानों के दायित्व है कि आंदोलन में सम्मिलित ऐसे अराजक तत्वों को तुरंत पुलिस के हवाले करें, इसी में उनका और देश का हित है।  

पूछताछ में दोनों आरोपितों ने यह भी बताया कि गुरमीत सिंह ने उन्हें हथियार खरीदने और दो ऐसे लोगों की हत्या करने का आदेश दिया था जिन्होंने कथित तौर पर सिख धर्म के विरुद्ध बोला था। दैनिक जागरण में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक़ गिरफ्तार किए गए खालिस्तानियों का नाम तेजप्रकाश (काका) और आकाशदीप सिंह (सोनू) है। दोनों लुधियाना के रहने वाले हैं। हरियाणा की स्पेशल टास्क फ़ोर्स ने इनके पास से कई हथियार और ज़िंदा कारतूस बरामद किए हैं।

 

हरियाणा पुलिस ने इन खालिस्तानी आतंकियों को उस वक्त गिरफ्तार किया जब वे हथियार खरीदकर वापस लौट रहे थे। पूछताछ में उन्होंने बताया कि वे दो शिवसेना नेताओं (सुधीर सूरी और गुरशरणमंद) पर हमले की योजना बना रहे थे। वह फेसबुक के ज़रिए SFJ के गुरमीत सिंह से लगातार संपर्क में थे। गुरमीत सिंह ने इन दोनों को उनके कट्टरपंथी विचारों की वजह से योजना में शामिल किया था। गुरमीत सिंह ने दोनों को हथियार खरीदने के लिए MoneyGram से पैसे भेजे थे। दोनों खालिस्तानी आतंकियों को यूएपीए की धारा 10 और 13, आर्म्स एक्ट की धारा 25, 54, 59 और आईपीसी की धारा 120बी के तहत गिरफ्तार किया गया है। 

 SFJ के इन दो आतंकियों की गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है, जब किसान आंदोलन में इस प्रतिबंधित संगठन की घुसपैठ को लेकर लगातार आशंकाएँ जताई जा रही है।

किसान आंदोलन पर खालिस्तानियों का कब्ज़ा 

पिछले कुछ समय में ऐसे कई मामले सामने आए थे जिससे यह स्पष्ट था कि किसान आंदोलन पर खालिस्तानी तत्वों का कब्ज़ा हो चुका है और इससे देश की आंतरिक सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।कई खालिस्तानी आतंकी किसानों के भेस में प्रदर्शन स्थल पर पहुँचे और इंदिरा गाँधी की हत्या के मुद्दे पर अपनी पीठ थपथपाते हुए नज़र आए। इसके अलावा वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी धमकी देते हुए नज़र आए और कहा कि किसानों की माँग पूरी नहीं हुई तो उनका भी वही हाल होगा। किसान आंदोलन के बीच तमाम अराजक तत्वों ने खालिस्तान के समर्थन में नारे लगाए और कट्टरपंथियों को रिहा करने की माँग उठाई थी।

इसके बाद पंजाब के किसानों को भड़काने के आरोप में SFJ की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े हुए थे। फ़िलहाल सुरक्षा एजेंसियाँ SFJ की संदिग्ध भूमिका को लेकर जाँच कर रही हैं। इसी बीच ऐसी बातें भी सामने आ रही हैं कि खालिस्तान समर्थक तत्वों ने किसान आंदोलन को हाइजैक कर लिया है। पाकिस्तान प्रायोजित खालिस्तानी संगठन SFJ ने कुछ समय पहले ऐलान किया था कि पंजाब और हरियाणा के जो किसान खालिस्तान का समर्थन करेंगे उन्हें 1 मिलियन डॉलर तक का इनाम दिया जाएगा। 

पुन्हाना: महंत रामदास पर हमले की जाँच करने पर, पुलिस ने उल्टा 200 हिन्दू कार्यकर्ताओं पर ही दर्ज कर दिया FIR

पुन्हाना पुलिस महंत रामदासपुन्हाना में महंत रामदास पर किए गए जानलेवा हमले और धार्मिक टिप्पणियों पर पुलिस की उदासीनता के विरोध में इकट्ठे लोगों पर पुन्हाना सिटी पुलिस ने ड्यूटी मजिस्ट्रेट की शिकायत पर देशव्यापी बन्द का उल्लंघन व इकट्ठा होकर उचित दूरी न बनाकर महामारी फैलाने के साथ ही धार्मिक असहिष्णुता को बढ़ावा देने के खिलाफ 38 नामजद और अन्य 150-200 के खिलाफ FIR दर्ज की है।
हिन्दू संगठनों ने ऑपइंडिया से संपर्क कर बताया कि इसके विरोध में वो अब हाईकोर्ट का रुख करने पर विचार कर रहे हैं।
पुन्हाना में हुआ था महंत रामदास पर हमला 
30 अप्रैल को पुन्हाना में महंत रामदास पर कुछ मुस्लिम गुंडों ने धार्मिक टिप्पणियाँ करते हुए उन पर जानलेवा हमला किया था। इस घटना से आक्रोशित हिन्दू संगठनों ने पुलिस से कार्रवाई की माँग की थी लेकिन पुलिस ने उन्हें आपस में बातचीत कर मामला सुलझाने का सुझाव दिया था। हिन्दू संगठन इन सभी बातों से आक्रोशित थे कि पुलिस आरोपितों पर कार्रवाई के बजाए उन्हें बचाने के लिए समझौता करने की सलाह दे रही थी।
रिपोर्ट्स के अनुसार, ड्यूटी मजिस्ट्रेट अमित कुमार ने इस शिकायत में बताया कि हरियाणा के मेवात जिले में पुन्हाना कस्बा के लोगों ने 30 अप्रैल को महंत रामदास के खिलाफ मुस्लिम लोगों द्वारा टिप्पणी करने पर मुकदमा दर्ज कराया हुआ था। हिन्दू संगठनों का आरोप है कि महंत पर हमला करने वालों की जाँच और कार्रवाई के बजाए पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे 100 से 150 व्यक्तियों पर ही आपत्ति जताते हुए कहा कि उन लोगों ने लॉकडाउन के दौरान पुन्हाना की नथिया देवी धर्मशाला पर इकट्ठा होकर नारेबाजी की थी।
ड्यूटी मैजिस्ट्रेट का भी आरोप है कि हिन्दू कार्यकर्ताओं ने लॉकडाउन के दौरान इकट्ठा होकर नारेबाजी कर सरकार के आदेशों की अवहेलना की है और इन सभी लोगों ने महंत के साथ धर्मशाला में उचित दूरी न बनाकर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं करके महामारी फैलाने को बढ़ावा दिया है।
जबकि हिन्दू संगठन के कार्यकर्ताओं ने ऑपइंडिया से बातचीत में बताया कि उन सभी लोगों ने महंत रामदास पर हुए हमले और अभद्र व्यवहार करने वालों की गिरफ्तारी की माँग के लिए इकट्ठा हुए थे, जिसके बाद ड्यूटी मजिस्ट्रेट की शिकायत पर उल्टा उन्हीं के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया।
पुलिस खुद कर चुकी है उल्लंघन 
हिन्दू कार्यकर्ताओं का कहना है कि कुछ दिन पहले ही गाँव में ही हुई एक अन्य घटना में मुस्लिमों का पक्ष लेते हुए पुलिस भारी संख्या में वहाँ समर्थकों के साथ इकट्ठी हुई थी और खुद पुलिस ने सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों को तोड़ा था। जबकि ताजा प्रकरण में हिन्दू संगठनों ने सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए ही पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन किया था।
महंत को धमकी देने वाला गिरफ्तार 
पुलिस का कहना है कि मुक्तिधाम आश्रम के महंत रामदास पर धार्मिक टिप्पणी करने और उन्हें जान से मरने की धमकी देने के आरोप में मुख्य आरोपित धुरूरा को शुक्रवार (मई 01, 2020) को गिरफ्तार कर लिया गया है।
महंत ने बताया था कि उन पर धार्मिक टिप्पणियाँ की गईं और इसका विरोध करने पर झुंड में लोग उन्हें मारने के लिए उनके पीछे दौड़े थे, जहाँ से वो किसी तरह अपनी जान बचाकर निकल पाए थे। आरोपितों ने उन्हें धमकाते हुए कहा था कि हिन्दू साधु गुंडे होते हैं और उन्हें जलाकर मार दिया जाना चाहिए।
घटना के दिन महंत रामदास जमालगढ़ रोड स्थित एक मेडिकल स्टोर से दवाई खरीदने गए थे। वहाँ वीआईपी पान भंडार के सामने एक व्यक्ति सब्जी बेच रहा था। उसने उन्हें देख कर अभद्र टिप्पणी व बदसलूकी की। यही नहीं, कुछ देर में वहाँ और भी लोग लाठी-डंडे के साथ पहुँच गए और उन्हें जान से मारने की धमकी देने लगे।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार आखिर किस आधार पर अपने आपको धर्म-निरपेक्ष और संविधान के कहने वाले छद्दम नेता पत्रकारो.....
इसके बाद महंत वहाँ से किसी तरह भाग निकले। यह मामला प्रकाश में आने के बाद पंचायत बैठी, जिसमें सभी लोगों ने कहा कि साधु संतों पर हमले बर्दाश्त नहीं किए जाएँगे। महाराष्ट्र के पालघर में हुई साधुओं की मॉब लिंचिंग की घटना के बाद हिन्दू साधुओं और भगवा झंडों को निशाना बनाया जा रहा है।

हिसार: सरकारी गोदाम में सड़ रहे गेहूं का जिस पत्रकार ने मामला उठाया उसके ही खिलाफ दर्ज हो गया केस, क्यों?

हिसार: सरकारी गोदाम में सड़ रहा था गेहूं, पत्रकार ने उठाया मामला तो उसके ही खिलाफ दर्ज हो गया केस
पत्रकार अनूप कुंडू
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
क्या भाजपा सरकार के विरुद्ध कुछ लिखना अपराध है? क्या भाजपा सरकार दूध की धुली है? क्या भाजपा में भ्रष्टाचार नहीं है? यदि नहीं, फिर किस आधार पर सच्चाई सामने पर पत्रकार के विरुद्ध केस दर्ज किया गया? क्या यह पत्रकारिता पर आघात नहीं? रपट मिथ्या होती, उस स्थिति में तो केस करना, क्या उचित है? अगर भाजपा ने रपट सही सिद्ध होने पर भी पत्रकारों को प्रताड़ित करेगी, मोदी-योगी-अमित के देश और जनहित में किए जाने वाले समस्त प्रयासों पर मीडिया ही उसी प्रकार पानी फेर देगा, जिस तरह 1977 में आपातकाल समाप्त होने पर चुनावों में कांग्रेस के कुकृत्यों को उजागर कर किया था। दूसरे, अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान खूब "Feel Good" के नाम पर जनता पर जनता को भ्रमित किया गया, परन्तु चुनाव घोषित होने पर जो मीडिया वाजपेयी वाजपेयी के नाम की माला जप रहे थे, सरकार को धरातल पर लाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इस कटु सच्चाई को नहीं भूलना चाहिए।  
सरकार को चाहिए यह था, जब रपट सत्यापित हो गयी थी, फिर पत्रकार के खिलाफ केस दर्ज करने वालों पर कार्यवाही करती। आखिर कब तक गोदामों में पड़ा माल सड़ता रहेगा, जिसे कोई भूखा तो क्या कोई जानवर भी न खा पाए। क्या दान में मिला अनाज गोदामों में सड़ने के रखा हुआ है? आखिर वह गोदाम किस अधिकारी के अधीन था, क्यों नहीं गोदाम में नियुक्त अथिकारी और कर्मचारियों के विरुद्ध कोई कार्यवाही की गयी? क्या उनको वेतन नहीं मिलता?  
हिसार के पत्रकार अनूप कुंडू पर मानहानि और अवैध घुसपैठ का मामला दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई जिला पुलिस द्वारा इसलिए की गई है क्योंकि अनूप ने उकलाना में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के गोदाम में खराब हो रही गेहूं की खबर को कवर किया था। वहीं एफआईआर में कहा गया है कि पत्रकार ने विभाग को बदनाम करने के लिए अपने चैनल पर फर्जी वीडियो चलाया। बता दें कि 17 जुलाई को पता लगा कि उकलाना के डीएफएससी गोदाम में पानी की वजह से गेहूं खराब हो रहा है। इस बारे में पत्रकार ने सिक्योरिटी गार्ड से बात की और घटना का वीडियो बनाया। उन्होंने फूड सप्लाई इंस्पेक्टर राम फल से भी बात की लेकिन उन्होंने उसे धमका दिया। 
FIR की कॉपी-
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18 जुलाई को इस बारे में चैनल पर 21 मिनट की स्टोरी चलाई गई। मंत्री करन देव कंबोज ने चैनल से बात की और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का वादा किया। इसी दिन मंत्री ने डीएफएससी सुभाष को जांच का सुझाव दिया जिसके बाद पत्रकार समेत कुछ बीजेपी नेता और जिला फूड सप्लाई कंट्रोलर ने गोदाम का निरीक्षण किया
इस दौरान अधिकारियों को खराब अनाज मिला। अधिकारियों ने गलती को स्वीकार किया और साउंडबाइट दिया। लेकिन 19 जुलाई को जब करनाल में मंत्री से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि पत्रकार ने गलत खबर दी है
25 जुलाई को पत्रकार ने डीसी हिसार के पास शिकायत दर्ज कराई और इस शिकायत को डीएफएससी हिसार के पास भी भेजा लेकिन यह अभी तक पेंडिंग है। इसके बाद 8 सितंबर को पत्रकार के खिलाफ धारा 451, 465 और 500 के तहत मामला दर्ज किया गया
अनूप कुण्डू पर दर्ज मुकदमे को लेकर जिले भर के पत्रकारों ने स्थानीय मीडिया सेंटर में एक बैठक का आयोजन कर रोष प्रकट किया और बैठक में जिले के सभी खंडों के पत्रकारों ने शिरकत की। यहां सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर जिला उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक को एक शिकायत सौंपी गई जिसमें पत्रकार पर दर्ज मुकदमे को खारिज करते हुए फर्जी जांच रिपोर्ट पेश करने वाले जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी सुभाष सिहाग और जिला परिषद के निवर्तमान कार्यकारी अधिकारी विकास यादव के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्यवाही करने की मांग की गई। 
अतिरिक्त उपायुक्त उत्तम सिंह ने कहा कि पत्रकारों को डिमांड को संबंधित अधिकारी को प्रेषित करते हुए दोबारा निष्पक्ष जांच करवाई जाएगी. साथ ही कहा कि किसी भी तरीके से मीडियाकर्मी के साथ गलत नही होने दिया जाएगा। अतिरिक्त उपायुक्त उत्तम सिंह ने खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के उस आरोप को भी नकारा जिसमे कहा गया है कि अवैध रूप से परिसर में घुसे हैं। उत्तम सिंह ने कहा कि इस तरीके की धाराएं प्राइवेट प्रॉपर्टी पर लागू होती हैं ना कि पब्लिक प्रॉपर्टी पर।  
हिसार के जिला पुलिस कप्तान के बाहर होने पर शिकायत की कॉपी पुलिस उपाधीक्षक अशोक कुमार को सौंपी गई जिस पर प्रतिक्रिया देते हुए अशोक कुमार ने कहा कि दोबारा से जांच कर दोनों पक्षों को शामिल किया जाएगा और निष्पक्षता से कार्यवाही करते हुए दूध का दूध और पानी का पानी किया जाएगा