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हरियाणा में हथियारों संग गिरफ्तार खालिस्तानी आतंकी SFJ से जुड़े तार

                                   खालिस्तानी आतंकी समूह सिख फॉर जस्टिस (साभार: zee news)
हरियाणा पुलिस ने हाल ही में करनाल से दो हथियारबंद खालिस्तानी आतंकवादियों को गिरफ्तार किया था जो ‘सिख फॉर जस्टिस’ (SFJ) के लिए काम कर रहे थे। गिरफ्तार किए गए आतंकवादियों ने पूछताछ के दौरान खुलासा किया कि वह अमेरिकी मूल के गुरमीत सिंह के संपर्क में थे। खालिस्तानी गुरमीत सिंह ने इनके खाते में मनीग्राम (MoneyGram) के ज़रिए लाखों रुपए भेजे थे। 

किसान प्रदर्शन के शुरू होते ही, प्रदर्शन पर अराजक तत्वों द्वारा कब्जे के समाचार आने लगे थे, वह शंका अब दूर हो चुकी है। यदि वह अपने मकसद में सफल हो जाते निश्चित रूप से देश में नागरिकता संशोधक कानून के विरोध में हुए हिन्दू विरोधी दंगों से कहीं अधिक भयानक दंगे हो रहे होते। जो 1984 से कहीं अधिक गाँधी हत्या के बाद हुए चितपावन ब्राह्मणों के हुए भयंकर नरसंहार से भी अधिक भयानक हो सकते थे। और इस प्रदर्शन को समर्थन दे रहे सियासतखोर नेता और पार्टियां विधवा विलाप कर रहे होते। केंद्र सरकार के साथ-साथ किसानों के दायित्व है कि आंदोलन में सम्मिलित ऐसे अराजक तत्वों को तुरंत पुलिस के हवाले करें, इसी में उनका और देश का हित है।  

पूछताछ में दोनों आरोपितों ने यह भी बताया कि गुरमीत सिंह ने उन्हें हथियार खरीदने और दो ऐसे लोगों की हत्या करने का आदेश दिया था जिन्होंने कथित तौर पर सिख धर्म के विरुद्ध बोला था। दैनिक जागरण में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक़ गिरफ्तार किए गए खालिस्तानियों का नाम तेजप्रकाश (काका) और आकाशदीप सिंह (सोनू) है। दोनों लुधियाना के रहने वाले हैं। हरियाणा की स्पेशल टास्क फ़ोर्स ने इनके पास से कई हथियार और ज़िंदा कारतूस बरामद किए हैं।

 

हरियाणा पुलिस ने इन खालिस्तानी आतंकियों को उस वक्त गिरफ्तार किया जब वे हथियार खरीदकर वापस लौट रहे थे। पूछताछ में उन्होंने बताया कि वे दो शिवसेना नेताओं (सुधीर सूरी और गुरशरणमंद) पर हमले की योजना बना रहे थे। वह फेसबुक के ज़रिए SFJ के गुरमीत सिंह से लगातार संपर्क में थे। गुरमीत सिंह ने इन दोनों को उनके कट्टरपंथी विचारों की वजह से योजना में शामिल किया था। गुरमीत सिंह ने दोनों को हथियार खरीदने के लिए MoneyGram से पैसे भेजे थे। दोनों खालिस्तानी आतंकियों को यूएपीए की धारा 10 और 13, आर्म्स एक्ट की धारा 25, 54, 59 और आईपीसी की धारा 120बी के तहत गिरफ्तार किया गया है। 

 SFJ के इन दो आतंकियों की गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है, जब किसान आंदोलन में इस प्रतिबंधित संगठन की घुसपैठ को लेकर लगातार आशंकाएँ जताई जा रही है।

किसान आंदोलन पर खालिस्तानियों का कब्ज़ा 

पिछले कुछ समय में ऐसे कई मामले सामने आए थे जिससे यह स्पष्ट था कि किसान आंदोलन पर खालिस्तानी तत्वों का कब्ज़ा हो चुका है और इससे देश की आंतरिक सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।कई खालिस्तानी आतंकी किसानों के भेस में प्रदर्शन स्थल पर पहुँचे और इंदिरा गाँधी की हत्या के मुद्दे पर अपनी पीठ थपथपाते हुए नज़र आए। इसके अलावा वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी धमकी देते हुए नज़र आए और कहा कि किसानों की माँग पूरी नहीं हुई तो उनका भी वही हाल होगा। किसान आंदोलन के बीच तमाम अराजक तत्वों ने खालिस्तान के समर्थन में नारे लगाए और कट्टरपंथियों को रिहा करने की माँग उठाई थी।

इसके बाद पंजाब के किसानों को भड़काने के आरोप में SFJ की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े हुए थे। फ़िलहाल सुरक्षा एजेंसियाँ SFJ की संदिग्ध भूमिका को लेकर जाँच कर रही हैं। इसी बीच ऐसी बातें भी सामने आ रही हैं कि खालिस्तान समर्थक तत्वों ने किसान आंदोलन को हाइजैक कर लिया है। पाकिस्तान प्रायोजित खालिस्तानी संगठन SFJ ने कुछ समय पहले ऐलान किया था कि पंजाब और हरियाणा के जो किसान खालिस्तान का समर्थन करेंगे उन्हें 1 मिलियन डॉलर तक का इनाम दिया जाएगा। 

"मोदी तेरी कब्र खुदेगी" नारेबाजी करने वाले क्या किसान हो सकते हैं?


नागरिकता संशोधन कानून ( सीएए ) के खिलाफ प्रदर्शन के समय जिस तरह से ‘हिंदुओं की कब्र खुदेगी’ ‘हिंदुओं से आजादी’ के नारे लगाए गए थे उसी तरह से किसान आंदोलन के दौरान ‘मोदी तेरी कब्र खुदेगी के नारे लगाए गए। जबकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किसानों की आय दोगुनी करने के लिए खेती के अलावा कृषि से जुड़े अन्य क्षेत्रों के विकास पर जोर दिया है। मोदी सरकार किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठा चुकी है।
अब प्रश्न यह है कि यह आन्दोलन किसान समस्याओं को लेकर है या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरुद्ध? इस प्रदर्शन के आयोजकों और समर्थकों को इसका उत्तर देना होगा। ऐसा नहीं है कि केंद्र सरकार ने इन नारों का संज्ञान न लिया हो, सच्चाई तो सामंने आएगी, जिस तरह नागरिकता संशोधक कानून पर हुए उपद्रव की सच्चाई सामने आनी शुरू हो चुकी है, इसकी भी सच्चाई सामने आने पर आयोजक और समर्थक कहाँ छुपेंगे?

मैं ये ढृढ़तापूर्वक यह कहता हूँ की सिख धर्म, हिन्दुओं में से ही बना है और हिन्दू धर्म के साथ मानवता की रक्षा करने के लिए ही मेरे सिख गुरुओं ने सिख पंथ की स्थापना की थी। मैंने सांझी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए, उस प्यार को बढ़ाने के लिए, एक परिवार में घर के एक बेटे तो सिख बनाने की परमपरा देखी है।लेकिन अफ़सोस आज वोटों की राजनीती ने, धार्मिक कट्टरता ने इस बहुत "बड़ी सकारात्मक सोच" और "Undivided पंजाब" के इस बहुत बड़े प्यार के खजाने को बिखरा के रख दिया है। मैं फिर वो सांझे प्यार वाली विरासत वापस चाहता हूँ, वो "लालाजी और सरदारजी" वाला समय वापस चाहता हूँ। 

मोदी सरकार ने किसानों के कल्याण के लिए कई ऐसी पथ प्रदर्शक और क्रांतिकारी योजनाएं शुरू कीं, जिनमें देश को बदलने और जमीनी स्तर पर बदलाव लाने की क्षमता है। पिछले 6 वर्षों में किसानों के कल्याण के लिए इतना कुछ किया गया है, जो 70 वर्षों में नहीं हुआ। फिर भी आजादी के बाद से किसानों की जरूरतों पर ध्यान ना देने वाली कांग्रेस आज उन्हें भड़काने का काम कर रही है। कांग्रेस के शह पर किसान आंदोलन में खालिस्तान समर्थन जुटे हुए हैं। देश विरोधी नारे लगाए जा रहे हैं। किसान आंदोलन में शामिल लोग ‘मोदी तेरी कब्र खुदेगी के नारे लगाए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर यूजर्स सवाल कर रहे हैं कि CAA की तर्ज पर किसानों के बहाने भारत और प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ कौन चला रहा है अभियान?

कुछ समय पहले कर्ज माफ़ी को लेकर हुए आन्दोलन में जब सडकों पर दूध, फल और सब्जियों को फेंके जाने पर भी लोगों ने प्रश्न किया था कि कर्जदार अपने उत्पाद को क्यों बर्बाद करेगा? क्या किसी भूखे अथवा कर्जदार को इस तरह अपने ही उत्पाद को बर्बाद करते देखा है? फिर यदि कोई कर्जदार ऐसा करता है तो स्पष्ट है कि किसी ने उसको उस उत्पाद का पैसा देकर ऐसा करने को बोला है, जैसे ही इन प्रश्नों की भरमार होनी शुरू हुई, आंदोलन समाप्त हो गया। 

थम नहीं रहा नवजोत सिंह सिद्धू के पाकिस्‍तान दौरे पर विवाद

Subramanian Swamyनवजोत सिंह सिद्धू के पाकिस्‍तान दौरे पर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इन विवादों को उस वक्‍त तब और बल मिला, जब सिद्धू की तस्‍वीर खालिस्‍तानी आतंकी गोपाल चावला के साथ नजर आई। अकाली दल ने जहां इसे गंभीर मसला बताते हुए उन्‍हें पंजाब कैबिनेट से बाहर करने की मांग की और उन्‍हें 'पाकिस्‍तान का एजेंट' बताया, वहीं बीजेपी नेता सुब्रमणयम स्‍वामी ने अब उनके खिलाफ नेशनल इंवेस्‍टीगेशन एजेंसी (NIA) से जांच कराने और गिरफ्तार करने की मांग की है।
सिद्धू पाकिस्‍तान में करतारपुर कॉरि‍डोर के शिलान्‍यास समारोह में हिस्‍सा लेने के लिए मंगलवार को वहां पहुंचे थे। पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने नवंबर 28 को अपने देश के हिस्‍से में बनने वाले करतारपुर कॉरिडोर का शिलान्‍यास किया, जिसमें भारत सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और हरसिमरत कौर बादल ने भी श‍िरकत की थी। इसी समारोह में खालिस्‍तानी आतंकी गोपाल सिंह चावला भी नजर आया, जो मुंबई हमलों के मास्‍टरमाइंड हाफिज सईद का करीबी माना जाता है।
बाद में उसने सिद्धू के साथ अपनी तस्‍वीर फेसबुक पर शेयर की, जिसे लेकर भारतीय राजनीति में बवाल मच गया। अकाली दल के दिल्‍ली में विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने जहां ट्वीट कर पंजाब के मुख्‍यमंत्री कैप्‍टन अमरिंदर सिंह से सिद्धू को मंत्रिमंडल से बर्खास्‍त करने की मांग की, वहीं हरसिमत ने कहा कि सिद्धू 'पाकिस्‍तान के एजेंट' बन गए हैं।View image on Twitter
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Subramanian Swamy on Navjot Sidhu denies knowing pro-Khalistani leader Gopal Chawla whom he was clicked with: Then you say that I've nothing to do with Khalistan & condemn it.But he should be investigated by NIA(National Investigation Agency)& arrested under National Security Act
अब बीजेपी नेता सुब्रमण्‍यम स्वामी ने सिद्धू पर हमला बोला है और कहा है कि उनकी जांच एनआईए से कराई जानी चाहिए। स्‍वामी का बयान सिद्धू के यह कहे जाने के बाद आया है कि पाकिस्‍तान में उनकी हजारों फोटो ली गई और उन्‍हें नहीं पता कि गोपाल चावला कौन है? पाकिस्‍तान में तीन दिन ब‍िताने के बाद गुरुवार को भारत लौटे सिद्धू ने अपनी सफाई में ये बात कही।
बीजेपी नेता सुब्रमण्‍यम स्‍वामी ने इस पर प्रतिक्रिया व्‍यक्‍त करते हुए कहा कि अगर सिद्धू खालिस्‍तानी आतंकी चावला को नहीं जानते हैं तो उन्‍हें खालिस्‍तान की आलोचना करनी चाहिए। लेकिन उनकी जांच एनआईए से कराई जानी चाहिए और उन्‍हें राष्‍ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया जाना चाहिए।
Navjot Singh Sidhu
मेरी हज़ारो फोटो ली गयी, मुझे नहीं पता कौन है खालिस्तानी गोपाल चावला --नवजोत सिंह सिद्धू 
पंजाब की कैप्टन अमरिंदर सरकार में कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू बुधवार को करतापुर कॉरिडोर की आधारशिला कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान एक सिद्धू की दो ऐसी तस्वीर वायरल हो गई जिससे हंगामा मच गया। ये तस्वीरें थी खालिस्तानी आतंकी गोपाल चावला की। एक तस्वीर में गोपाल चावला पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा से हाथ मिला रहा है तो दूसरी तस्वीर में वह कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू  के साथ दिखाई दे रहा है। सिद्धू की इस तस्वीर को लेकर वह भारत में सियासी घमासान मचा हुआ है।
अब इस मामले को लेकर खुद सिद्धू ने सफाई दी है। गुरुवार को पाकिस्तान से पंजाब लौटे सिद्धू ने मीडिया बात करते हुए खालिस्तानी आतंकी गोपाल सिंह चावला को पहचानने से इनकार किया। सिद्धू ने कहा, 'मेरी 5 से 10 हजार फोटो हुई हैं मुझे नहीं पता कि गोपाल सिंह चावला कौन है।'
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एक ग्रुप फ़ोटो में @narendramodi जी से बहुत दूर नीरव मोदी के खड़े होने पर बवाल मचाने वाला @RahulGandhi आज @sherryontopp की फ़ोटो पर क्या कहेगा?

या तो मोदी जी से माफ़ी माँगो राहुल गांधी या फिर सिद्धू को sack करो!

(With Sidhu is Gopal Singh, well-known close aide of Hafiz Saeed)
अटारी वाघा बॉडर्र पर मीडिया से बात करते हुए सिद्धू ने कहा, 'आज 71 साल का इंतेजार बदलने जा रहा है, इस सकारात्मक कदम से शुरुआत हुई है। आज का दिन ऐतिहासिक है। दोनों देशों को दुश्मनी खत्म करनी चाहिए, परमात्मा रास्ता बनाता है और उसने दोनों देशों को एक करने का रास्ता बनाया।'
सिरसा ने लिखा, 'कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पाकिस्‍तान जाने से इसलिए मना कर दिया, क्‍योंकि वह भारत-विरोधी और पंजाब-विरोधी गतिविधियों का समर्थन करता है। लेकिन उन्हीं के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू उनकी इच्छा के विपरीत पाकिस्तान गए और उस गोपाल चावला के साथ तस्वीर खिंचवाई, जो हाफिज सईद का करीबी सहयोगी है और भारत-विरोधी व्यक्ति है। क्या कैप्टन साहब अपने गैरजिम्मेदार मंत्री को बर्खास्त करेंगे?'

ऐसी खुफिया सूचनाएं भी हैं कि चावला पाकिस्‍तानी खुफिया एजेंसी इंटर सर्विसेज इंटेलीजेंस (ISI) और आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के साथ मिलकर भारतीय राज्‍य पंजाब में एक बार फिर हिंसा व आतंक फैलाने की साजिश कर रहा है। कुछ समय पहले चावला की मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के साथ तस्‍वीर भी सामने आई थी