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क्या पाकिस्तान परमाणु हमले का खतरा उठा सकता है?

जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा समाप्त किए जाने के भारत सरकार के फैसले से बौखलाया पाकिस्तान कूटनीतिक मोर्चे पर नाकाम होने के बाद युद्धोन्माद फैलाने में जुटा है। उसने एलओसी के पास अपने एसएसजी कमांडो तैनात किए हैं और तनाव बढ़ाते हुए अपनी गजनवी मिसाइल का परीक्षण किया है। पाकिस्तान के रेल मंत्री शेख राशिद दोनों देशों के बीच युद्ध होने का समय बता चुके हैं। जबकि प्रधानमंत्री इमरान खान का कहना है कि दोनों देशों के बीच जंग परमाणु युद्ध की तरफ जा सकता है। पाकिस्तान के हुक्मरान परमाणु युद्ध की धमकी देने लगे हैं। हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने परमाणु हथियारों के इस्तेमाल पर भारत की 'नो फर्स्ट यूज' नीति में बदलाव के संकेत दिए हैं।  
दरअसल, परमाणु युद्ध होने पर क्षेत्र में भयंकर तबाही होगी और यह किसी भी देश के हित में नहीं होगा। बुलेटिन ऑफ द एटमिक साइंटिस्ट्स द्वारा एकत्र डाटा यही इशारा करता है कि विगत वर्षों में परमाणु हथियारों के संग्रह पर होड़ में लगातार कमी आई है। जबकि फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट का कहना है कि 1990 के दशक की तुलना में परमाणु हथियारों में कटौती करने की गति में उल्लेखनीय कमी आई है और परमाणु हथियारों की मौजूदा तस्वीर शीत युद्ध के समय से कहीं बेहतर है। आइए एक नजर डालते हैं दुनिया में परमाणु हथियारों के प्रसार और इनके इस्तेमाल पर होने वाले प्रभावों पर-
एक-दूसरे को कहीं पर भी निशाना बनाने की क्षमता रखते हैं भारत-पाकिस्तान 
भारत और पाकिस्तान दोनों के पास ऐसी मिसाइलें हैं जो एक-दूसरे के किसी भी क्षेत्र को परमाणु हथियारों से लैस अपनी मिसाइलों से निशाना बना सकते हैं। भारत के पास परमाणु हथियारों से लैस ऐसी बैलिस्टिक मिसाइलें हैं जो 350 किलोमीटर से से 5000 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक मार कर सकती हैं। भारत की मिसाइलों की जद में पूरा पाकिस्तान आता है। जबकि पाकिस्तान की मिसाइल 2750 किलोमीटर तक परमाणु हथियारों से हमला कर सकती है। इसकी मारक क्षमता के दायरे में भारत का अधिकांश क्षेत्र आता है। 

Indian missile
pakistan missileदुनिया ने जापान के शहरों हिरोशिमा एवं नागासाकी पर हुए परमाणु हमले की भयावहता एवं विनाशलीला देखी है। हिरोशिमा पर जो परमाणु बम गिराया गया था वह 15 किलोटन (केटी) टीएनटी का था जबकि नागासाकी पर गिराया गया परमाणु बम 20 (केटी) का था। भारत ने अब तक जो सबसे बड़ा परमाणु बम का टेस्ट किया है उसकी क्षमता 60 केटी की है। यदि 100 केटी का परमाणु बम दिल्ली अथवा इस्लामाबाद पर गिरता है तो दोनों जगहों पर बड़े क्षेत्र में तबाही होगी।
100 केटी का परमाणु बम यदि दिल्ली पर गिरे तो... 
दिल्ली के इंडिया गेट पर यदि 100 केटी की क्षमता वाला परमाणु बम गिरता है तो फॉयरबॉल (दायरा 0.79 किलोमीटर) के क्षेत्र में आने वाली सभी चीजें गैस में तब्दील हो जाएंगी यानि कि इंडिया गेट के 0.79 किलोमीटर के दायरे में आने वाली सभी चीजें विलुप्त हो सकती हैं। एयरब्लास्ट-1 का दायरा 3.21 किलोमीटर का होता है। इस दायरे में आने वालीं सभी इमारतें जमींदोज हो जाएंगी और सौ प्रतिशत तबाही होगी। इसका रेडिएशन 10.5 किलोमीटर तक फैलेगा जिससे 50 से 90 प्रतिशत तबाही होगी।

एयरब्रस्ट-2 के दायरे 14.2 किलोमीटर में आने वाली ज्यादातर इमारतें धराशायी हो जाएंगी। परमाणु हमले का थर्मल रेडिएशन 47.9 किलोमीटर तक फैलेगा और 100 प्रतिशत थर्ड डिग्री बर्न की आशंका रहेगी। एयरब्लास्ट-3 का दायरा 93.7 किलोमीटर का होता है। इस दायरे में इमारतों के कांच टूट जाएंगे। परमाणु हमले के विकिरण का प्रभाव बहुत कुछ हवा के बहाव पर निर्भर करेगा। परमाणु हमले से होने वाला विकिरण काफी दूर तक जाता है। दिल्ली पर गिरने वाले बम का विकिरण रेवाड़ी, रोहतक, हिसार, शहारनपुर, अलीगढ़, आगरा और अलवर तक को अपनी चपेट में ले लेगा।  
क्या होता है एयरब्लास्ट
एयर ब्लास्ट हवा में कराया जाता है। परमाणु हमले के एयरब्लास्ट से मचने वाली तबाही अन्य विस्फोटों से कहीं ज्यादा भीषण और कई तरह का प्रभाव वाली होती है। एयरब्लास्ट के बाद वायु में बनने वाला गैस का दबाव एवं विकिरण बड़े पैमाने पर विध्वंस करता है। यह थर्मल रेडिएशन पैदा करता है। हिरोशिमा में परमाणु बम का एयरब्लास्ट हुआ था।  

100 केटी का परमाणु बम इस्लामाबाद पर गिरने पर
इस्लामाबाद पर यदि 100 केटी का परमाणु बम गिरा तो वहां भी दिल्ली जैसी तबाही एवं बर्बादी देखने को मिलेगी। परमाणु हमले से पैदा होने वाले विकिरण के प्रभाव में एबटाबाद, पेशावर, बारामूला, श्रीनगर, पुलवामा और जलालाबाद आएंगे। 

Atom bomकिसके पास हैं कितने परमाणु हथियार
दुनिया के नौ देशों के पास परमाणु हथियारों से संपन्न हैं। फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स का अनुमान है कि 2019 तक नौ परमाणु हथियार संपन्न देशों के पास करीब 13890 न्यूक्लियर वारहेड्स हैं और परमाणु हथियारों का 90 प्रतिशत से ज्यादा जखीरा अमेरिका और रूस के पास है। यही नहीं दुनिया के प्रत्येक 10 परमाणु बमों में से 9 बम रूस और अमेरिका के हैं।

चार देशों ने 'रेडी टू यूज' स्तर पर तैनात किया है वारहेड्स 
फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स के मुताबिक चार देशों ने अपने सैन्य ठिकानों और अंतरमहाद्विपीय मिसाइलों पर 3600 वारहेड्स लगा रखे हैं। ये न्यूक्लियर वारहेड्स परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने वाले सैन्य बलों के नियंत्रण में हैं। इनमें से 1800 वारहेड्स हाई अलर्ट पर हैं जिनका शॉर्ट नोटिस पर इस्तेमाल किया जा सकता है। रूस और अमेरिका ने 1600 वारहेड्स, फ्रांस ने 280 और ब्रिटेन ने 120 वारहेड्स तैनात कर रखे हैं। (साभार)

अनुच्छेद 370: पाकिस्तान संभवत: विनाश का शिकार हो सकता है : PoK में आतंकी


आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार  जम्‍मू-कश्‍मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से पाकिस्‍तान बौखलाया हुआ है। इस समय पाकिस्तान को आगे कुआँ, पीछे खाई दिख रही है। अगर बौखलाहट में आतंक का सहारा लेता है, तो ब्लैकलिस्ट होता है, जिसका सीधे-सीधे तौर पर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी, कोई देश फूटी कौड़ी नहीं देखा, वैसे भी अमेरिका जाकर प्रधानमंत्री इमरान खान ने स्वीकार किया है कि "पाकिस्तान में 40 आतंकवादी संगठन और 40,000 आतंकवादी सक्रीय हैं।" दूसरे, जिस तरह भारत से युद्ध की बात कर रहे हैं, उस स्थिति में पाकिस्तान खुद ही मौत को नेवता दे देगा। क्योकि अब मोदी सरकार युद्ध जीती जमीन किसी भी दबाव में वापस नहीं करेगी। दूसरे अर्थों में यह भी कहा जा सकता है कि पाकिस्तान की हालत खरबूजे और चाकू वाली हों गयी है। चाकू खरबूजे पर गिरे या खरबूजा चाकू पर कटना खरबूजे ने ही है। क्योकि एक-दो को छोड़कर लगभग सभी देश इसे भारत का आंतरिक मामला बता रहे हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन न मिलता देख, पाकिस्‍तान ने अपना वहीं पुराना नापाक रास्‍ता इख्तियार कर लिया है। खबर है कि पाकिस्‍तान सरकार आतंकियों की मदद कर भारत में जिहाद छेड़ने के लिए भड़का रही है। पाक अधिकृत कश्‍मीर के एक वीडियो में पाकिस्‍तान के ये नापाक इरादे जाहिर हो गए हैं, जिसमें आतंकी एकजुट होकर भारत के खिलाफ किसी बड़े हमले की तैयारी कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री बनने से पहले से ही इमरान खान एक नए पाकिस्तान की बात बोलते आ रहे हैं, इसलिए अपनी ही बात को चरितार्थ करने के लिए पाकिस्तान हित में आतंकवादी गतिविधियों को बंद करने के लिए फौज पर लगाम लगाने की जरुरत है। इसके बदले अगर फौज के बगावत करने के कारण, उनकी सरकार जाती है, कुर्बान होने दें, विश्व में उदाहरण बन प्रधानमंत्री पद से कहीं अधिक चमकते रहेंगे। 
फिर भारत में पाकिस्तान समर्थकों को यहाँ की जनता सबक सीखा ही रही है। इनके भरोसे इतिहास में कलंकित न हो। कम्युनिस्टों की क्या स्थिति है, मालूम होनी चाहिए। इतना ही नहीं, कांग्रेस और ममता की भी लगभग वैसी ही स्थिति है। 
जिहाद छेड़ने की धमकी
पाकिस्‍तान हिज्बुल मुजाहिद्दीन और यूनाइटेड जिहाद काउंसिल जैसे आतंकी संगठन, जिसका सरगना सैयद सलाउद्दीन है उसकी मदद कर कश्‍मीर में आतंकवाद फैलाने की फिराक में है। पीओके के मुजफ्फराबाद में अगस्त 15 को हिज्‍बुल मुजाहिद्दीन के खालिद सैफुल्‍लाह और नेब अमीर प्रेस क्‍लब के सामने विरोध प्रदर्शन करते नजर आए। विरोध प्रदर्शन के दौरान ये आतंकी भारत के खिलाफ जिहाद छेड़ने के नारे भी लगा रहे थे। सैयद सलाउद्दीन ने इस दौरान कहा, ‘शब्‍दों से ज्‍यादा वार कारगर होता है। मेरे दोस्‍तों, हम सभी जिहाद के लिए तैयार हैं।’ वहीं सैफुल्‍लाह ने कहा कि हम सभी आपके साथ हैं। इस प्रदर्शन का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसे पीओके में सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है।
शायद मिट जाए पाकिस्‍तान का वजूद
सैफुल्‍लाह को शायद इस बात का इल्‍म है कि भारत के साथ अगर पाकिस्‍तान जंग करता है, तो उसका वजूद खत्‍म भी हो सकता है। उन्‍होंने कहा, ‘शायद हो कि पाकिस्‍तान का वजूद खतरे में पढ़ जाए। इसके बावजूद मुस्लिमों का अस्तित्‍व कायम रहेगा, क्‍योंकि विश्‍व में कई मुस्लिम देश मौजूद हैं। लेकिन भारत एक है और हिन्दुत्व को हम विश्‍व के नक्‍शे से मिटा देंगे।’ बता दें कि पाकिस्‍तान में इस तरह के विरोध प्रदर्शन और रैलियां इन दिनों आम हो गई हैं। इन प्रदर्शनों में कई आतंकी भी शामिल होते हैं, लेकिन सरकार का समर्थन होने के कारण ये बैखोफ नजर आते हैं।
दरअसल, पाकिस्‍तान को अब कोई रास्‍ता नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में पाकिस्‍तान, आतंकियों के सहारे जम्‍मू-कश्‍मीर में अशांति फैलाने की फिराक में है। हालांकि, भारतीय सेना ने जम्‍मू-कश्‍मीर में मोर्चा संभाला हुआ है। सेना हर मुमकिन खतरे के लिए तैयार है।
भारत से युद्ध छिड़ सकता है : इमरान खान 
पाकिस्तान ने जाने-अनजाने पहली बार कुबूल कर लिया है कि भारत ने बालाकोट में भीषण हवाई हमला किया था। बौखलाए प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा है कि पाकिस्तान के पास ठोस जानकारी है कि भारत बालाकोट पर हुए भयावह हवाई हमले से भी बड़े हमले की योजना बना रहा है। कश्मीर के ताजा हालात से दुनिया का ध्यान हटाने के लिए वह ऐसा करने वाला है। मेरा मोदी को यही संदेश है कि अगर वह कार्रवाई करेंगे तो हम भी मुनासिब जवाब देंगे।
गुलाम कश्मीर की राजधानी मुजफ्फराबाद में बुधवार को इमरान खान ने कथित विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित करते हुए कहा, ‘भारत अब पुलवामा के बाद किए हवाई हमले से भी खतरनाक योजना बना रहा है। वह कश्मीर (गुलाम कश्मीर) में कुछ कार्रवाई कर सकता है। इस आधार पर हम राष्ट्रीय सुरक्षा कमेटी की दो बैठकें कर चुके हैं।’ इमरान ने धमकाते हुए कहा, ‘हम हर ईंट का जवाब पत्थर से देंगे। आप जो भी करेंगे हम उसका जवाब देंगे। अगर आप हमको सबक सिखाने की सोच रहे हैं तो ध्यान से सुनें, अब हम आपको सबक सिखाएंगे।’
इमरान ने कहा कि अगर अब पाकिस्तान और भारत के बीच युद्ध छिड़ा तो इसके लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय जिम्मेदार होगा। खान ने दावा किया कि विश्व की मुस्लिम आबादी समेत पूरी दुनिया इस समय संयुक्त राष्ट्र की ओर देख रही है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के सितंबर में होने वाले वार्षिक सत्र का हवाला देते हुए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने यह प्रपंच रचा है। भारत के आंतरिक मामले को लेकर पाकिस्तान ने सुरक्षा परिषद की आपात बैठक भी बुलाने की मांग की है।
इमरान खान ने पहली बार भारत से युद्ध छिड़ने की बात की है। पिछले हफ्ते भी पाकिस्तानी संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए इमरान खान ने धमकी दी थी कि जम्मू और कश्मीर में पुलवामा जैसे और हमले हो सकते हैं। तब भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता कहा था कि पाकिस्तान बिना बात के अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने बिगड़े हुए हालात दिखाने की कोशिश कर रहा है। जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ऐसा नहीं सोचता।
अनुच्छेद 370 हटाकर मोदी ने की गलती
उन्होंने कहा कि भाजपा और संघ की नफरत भरी विचारधारा से सिर्फ कश्मीर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे पाकिस्तान में फैलेगी। उन्होंने कहा कि जम्मू और कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाकर मोदी सरकार ने राजनीतिक गलती की है। इसके लिए भारत को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। पाकिस्तान ने अपना आजादी दिवस मनाते हुए ‘कश्मीरियों से एकजुटता दिवस’ मनाया। इस मौके पर इमरान ने कहा,’मैं मानता हूं मोदी ने सामरिक गलती कर दी है। यह मोदी और उनकी भाजपा सरकार को बहुत महंगा पड़ेगा।’
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के प्रमुख इमरान ने कहा, ‘मैं कश्मीर के मुद्दे को आगे तक लेकर जाऊंगा। मैं कश्मीर की आवाज बनूंगा, कश्मीर का दूत बनूंगा।’ उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघन की ओर ध्यान खींचना मुश्किल था। लेकिन अब मोदी की एक गलती से कश्मीर का मुद्दा स्पॉटलाइट यानी वैश्विक मीडिया की नजरों में आ गया है। मोदी ने असल में इस विवाद का अंतरराष्ट्रीयकरण करने में मदद की है। क्रिकेटर से नेता बने इमरान ने भारतीय स्वतंत्रता दिवस को बतौर काला दिवस मनाने की तैयारी की है।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार भारत सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर में धारा 370 खत्म किए जाने के बाद पाकिस्तान में खलबली मच ...

कश्मीर की हकीकत बदली नहीं जा सकती : बाजवा
पाकिस्तान के आजादी दिवस पर ट्विटर पर संदेश जारी कर सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा ने कहा है कि कश्मीर पर कोई समझौता नहीं हो सकता है। कश्मीर की हकीकत को ना तो 1947 के अवैध दस्तावेज से बदला जा सकता था और ना ही अभी या भविष्य में कोई कार्रवाई करके ही बदला जा सकता है। जनरल बाजवा ने बुधवार को कहा कि पाकिस्तानी सेना जम्मू और कश्मीर के लिए जान लगा देगी। सेना कश्मीर के लिए अपने राष्ट्रीय दायित्व को निभाने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

पाकिस्तान: हाफिज सईद को गुजराँवाला अदालत ने दोषी ठहराया, ट्रांसफर किया गया मामला

Breaking Newsजम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 खत्म करने के भारत के फैसले से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। पाकिस्तान ने अगस्त 6 को ही भारत को कश्मीर को लेकर युद्ध की गीदड़भभकी दी थी। वहीं पाकिस्तान आर्मी ने भी कश्मीर को लेकर हरसंभव कदम उठाने की धमकी थी। अब पाकिस्तान की एक अदालत ने हाफिज सईद को रिहा कर दिया है। पिछले महीने 18 जुलाई को ही पाकिस्तान ने हाफिज को लाहौर से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। आतंकी गतिविधियों को आर्थिक मदद देने के आरोपों के चलते पाकिस्तान के काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट ने हाफिज की गिरफ्तारी की थी।
यदि सीमा पार से आने वाली यह खबर सच्ची है, तो डोनाल्ड ट्रम्प को इमरान खान से हाफिज की गिरफ़्तारी के नाटक पर प्रश्न कर, विश्व में पाकिस्तान के झूठ का पर्दाफाश करना चाहिए। वैसे भी यह पहली बार नहीं है जब हाफिज को गिरफ्तार कर रिहा किया गया हो बल्कि कई बार पहले भी हाफिज के साथ ऐसा हो चुका है। लेकिन ऐसे समय में जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने यह बात स्वीकार की थी कि पाकिस्तान में इस समय 40 हजार से ज्यादा आतंकी सक्रिय हैं, ऐसे में हाफिज को जेल से रिहा करना पाकिस्तान के दोगलेपन को उजागर करता है। 
दूसरे चर्चा यह भी है कि हाफिज की गिरफ़्तारी महज अमेरिका और दुनियाँ को गुमराह करने के लिए की गयी थी ताकि अमेरिका से पाकिस्तान को कुछ मदद मिल जाए। उस मकसद पाकिस्तान सफल हो गया। पाकिस्तान द्वारा किसी आतंकवादी सरगना को गिरफ्तार करने का साहस ही नहीं है। जिस दिन पाकिस्तान आतंकवाद के मुद्दे पर गंभीर हो गया, उसी दिन वहां तख्ता पलट दिया जाएगा। लेकिन भारत में मोदी सरकार ने आर्थिक तंगी से गुजर रहे पाकिस्तान पर कश्मीर से अनुच्छेद 370 को समाप्त कर जख्मों पर नमक छिड़क दिया। उसी तड़पन में आतंकी सरगना को जेल से बाहर कर दिया। 
कई बार हो चुका है गिरफ्तार
हाफिज सईद ही वह सरगना है जो 26/11 मुंबई हमले  का मास्टरमाइंड था। इस हमले में 166 लोगों की मौत हो गई थी जिसमें विदेशी नागरिक भी शामिल थे। हाफिज को गिरफ्तार कर रिहा करना अंतरराष्‍ट्रीय समुदाय की आंखों में धूल झोंकने जैसा है। इससे पहले दिसंबर 2001, मई 2002, अक्‍टूबर 2002, अगस्‍त 2006 में दो बार, दिसंबर 2008, सितंबर 2009, जनवरी 2017 में भी हाफिज को गिरफ्तार किया गया था।
अमेरिका घोषित कर चुका है वांटेड
हाफिज को अमेरिका ने 2014 में अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित कर दिया था। अमेरिकी कार्रवाई के बाद पाकिस्तान पर लगातार दबाव बनता रहा।लश्कर-ए-तैयबा पर बैन लगने के बाद हाफिज ने अपने संगठन का नाम बदल कर जमात उद दावा और  फलह-ए-इंसानियत रख लिया था। धार्मिक संस्था की आड़ में वो गरीब युवाओं को आतंक की राह पर ले जाता है और आतंक की ट्रेंनिग देकर पाक आर्मी के जरिए कश्मीर में आतंकवाद फैलाता है।
 Pakistan PM Imran Khan threatens India of Pulwama type attack after scrapping article 370भारत सहित विश्व को पाकिस्तान प्रधानमंत्री की धमकी 
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म किए जाने के बाद पाकिस्तान बौखला गया है। उसने भारत सहित दुनिया के देशों को धमकी दी है। अगस्त 6 को अपने पार्लियामेंट के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने खुले तौर पर धमकी दी कि भारत में पुलवामा जैसा अगर हमला हुआ तो इसके लिए पाकिस्तान जिम्मेदार नहीं होगा। 
शायद इसी मकसद से हाफिज सईद को जेल से बाहर किया है। 
इमरान खान ने कहा कि जम्मू-कश्मीर पर भारत सरकार के इस फैसले से हालात और गंभीर होंगे और देश में पुलवामा जैसे आतंकवादी हमले हो सकते हैं। पाकिस्तानी पीएम ने कहा कि कश्मीर पर मध्यस्थता का अनुरोध उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से किया था। इमरान ने कहा, 'कश्मीर पर भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय बातचीत बंद है और इसे देखते हुए मैंने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से मध्यस्थता करने का अनुरोध किया।'
सूत्रों के अनुसार, सत्ता के गलियारों में चर्चा है कि यदि अब पाकिस्तान ने पुलवामा और कारगिल जैसी गलती दुबारा की, इसके भयंकर परिणाम भी भुगतने के लिए तैयार रहे। अब हमले की स्थिति में कहीं ऐसा न हो पाकिस्तान सिकुड़कर दिल्ली से छोटा हो जाये या पाकिस्तान ही नक़्शे से न मिट जाए। क्योकि आज परिस्थितियाँ पूर्व में हुए युद्धों के समय से एकदम विपरीप है। जहाँ तक परमाणु की बात है, यह पाकिस्तान ही नहीं, विश्व भी भलीभांति जानता है, परमाणु प्रयोग करते ही, पाकिस्तान आर्थिक संकट की इतनी खाई में चला जाएगा, जहाँ से निकलना पाकिस्तान के लिए जरुरत से ज्यादा कठिन होगा। और उसका जिम्मेदार प्रधानमंत्री इमरान खान, फौज और आईएसआई होगी। दूसरे, अगर युद्ध हुआ और विश्व ने युद्ध बंद करने का दबाव बनाया, उस स्थिति में भारत-पाक सीमा वहां से होगी, पाकिस्तान के अंदर जहाँ तक भारतीय सेना पहुँच चुकी होगी, वह धरती वापस नहीं होगी, बल्कि भारत में सम्मिलित होगी।   
इमरान ने कहा कि जम्मू-कश्मीर पर भारत सरकार के फैसले को वह दुनिया के सभी मंच पर उठाएंगे। उन्होंने कहा, 'इस मसले को हम संयुक्त राष्ट्र, दुनिया के देशों सहित सभी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाएंगे। इमरान ने आगे कहा, 'बिश्केक सम्मेलन के बाद मुझे इस बात का अंदेशा हो गया था कि भारत सरकार कश्मीर को लेकर कोई बड़ा फैसला कर सकती है। जम्मू-कश्मीर पर मोदी सरकार ने अचानक फैसला नहीं किया बल्कि यह इनके चुनावी घोषणापत्र का हिस्सा था। भाजपा की विचारधारा आरएसएस के नजरिए पर आधारित है। मोदी सरकार पूरी तरह से अपनी विचारधारा पर चल रही है। कश्मीर अब बहुत गंभीर मसला बन गया है।'
हकीकत यह है कि वाकई "कश्मीर अब बहुत गंभीर मसला बन गया है।" क्योकि कश्मीर से अनुच्छेद 370 समाप्त होते ही सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं, भारत में भी कुछ पार्टियों की नींद हराम हो गयी है।  
जम्मू-कश्मीर पर बयान देने से पहले इमरान ने अपने देश की अर्थव्यवस्था और आर्थिक हालात पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, 'हमारी सरकार बनने पर सबसे बड़ी चुनौती लोगों को गरीबी से बाहर निकालने की थी और हमने इसके लिए प्रयास किए। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था सुधारने के लिए हम सभी पड़ोसी देशों के पास गए। हम हिंदुस्तान के पास गए और कहा कि आप एक कदम बढ़ाइए हम आपकी तरफ दो कदम आएंगे। मैंने अफगानिस्तान से मतभेद दूर करने और रिश्ते में नया अध्याय जोड़ने की पहल की। मैं ईरान गया उनसे मुद्दों पर बात की। चीन से ताल्लुकात हमारे हमेशा से अच्छे रहे हैं। इनके अलावा मैं अन्य मुल्कों में गया। अमेरिका जाकर उसके साथ रिश्ते अच्छे करने की कोशिश की। हमारी कोशिश पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था सुधारने और विकास दर बढ़ाने की रही है। हम चाहते हैं कि पाकिस्तान में निवेश आए ताकि यहां गुरबत खत्म हो सके।'
पाकिस्तान के पीएम ने कहा कि दोनों देशों के बीच पारंपरिक युद्ध अगर हुआ तो पाकिस्तान के पास दो रास्ते बचेंगे। एक रास्ता होगा कि हम हार मानने के लिए अपने हाथ खड़े कर दें और दूसरा रास्ता होगा कि हम आखिरी खून तक लड़ते रहें। उन्होंने कहा कि दुनिया आज कार्रवाई नहीं करेगी तो भारत और आगे जाएगा।' इमरान ने धमकी भरे लहजे में कहा कि जम्मू-कश्मीर में स्थिति यदि गंभीर हुई तो उसके लिए पाकिस्तान जिम्मेदार नहीं होगा। 
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एक तरफ भारत में कांग्रेस और कुछ भाजपा विरोधी जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35A समाप्त होने पर जो विरोधी बातें कर रहे ह...

जम्मू-कश्मीर पर भारत सरकार ने ऐतिहासिक फैसला करते हुए अनुच्छेद 370 को समाप्त कर दिया है। इसके साथ ही लद्दाख को जम्मू-कश्मीर से अलग किया है। जम्मू-कश्मीर विधानसभा युक्त केंद्रशासित प्रदेश होगा जबकि लद्दाख विधानसभा रहित केंद्रशासित राज्य होगा। संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक को मंजूरी मिल गई है। अनुच्छेद 370 के समाप्त हो जाने पर अब जम्मू-कश्मीर में भारत का संविधान पूरी तरह से लागू हो सकेगा। अब बाहरी प्रदेश के लोगों को वहां की सरकारी नौकरियां मिल सकेगी और वे अपनी लिए जमीन खरीद सकेंगे। 

भारत से युद्ध करने पर कहीं का नहीं रहेगा पाकिस्तान

Image result for इंडो-पाक युद्धभारत ने पाकिस्तान से पुलवामा हमले का बदला ले लिया है। फरवरी 26 की सुबह भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान में घुसकर जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों हमला किया। वायु सेना के 12 मिराज विमानों ने बालाकोट में करीब 1000 किलो बम गिराए। यह सर्जिकल स्ट्राइक 2016 में हुई सर्जिकल स्ट्राइक से कहीं ज्यादा बड़ी है। देखा जाए तो यह पाकिस्तान के लिए एक सबक है कि अगर वह भारत से युद्ध करने के बारे में सोच रहा है तो संभल जाए। इस समय भारत जिस मजबूत स्थिति में है और पाकिस्तान की हालत जिस तरह खस्ताहाल हो रही है, अगर युद्ध होता है तो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह डूब जाएगी। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी प्रारम्भ से ही पाकिस्तान को समझाने का प्रयत्न करते रहे, लेकिन पाकिस्तान शासक और फौज इसे भारत की कमजोरी समझते रहे। ये सब यह भूल गए कि भारत का वर्तमान प्रधानमंत्री का नाम नरेन्द्र मोदी है कोई और नहीं। भारत में अपने विरोधियों के निशाने पर रहे, एक के बाद एक आतंकवादी हरकत होती रही, परिणाम फरवरी 26 को पाकिस्तान स्थित आतंकी अड्डों की तबाही। 

पाकिस्तान कहीं का नहीं रहेगा।

इतना ही नहीं, अब पाकिस्तान पर और आर्थिक संकट गहराने वाला है। सम्भावना है, सऊदी अरब और मलेशिया पाकिस्तान में निवेश करने से पीछे हट सकते हैं। यह बात खुद इस्लामाबाद चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के प्रेसिडेंट अहमद हसन मोघुल ने स्वीकारी है। उनके मुताबिक सऊदी, मलेशिया समेत कई देशों ने पाकिस्तान में निवेश करने की इच्छा जताई थी, लेकिन भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ रहे तनाव के चलते पाकिस्तान में इन देशों का निवेश रुक सकता है।

सकल घरेलू उत्पाद (GDP)

भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की सातवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। हमारा जीडीपी 2.6 लाख करोड़ डॉलर (185 लाख करोड़ रुपए) है। वहीं The Tribune के मुताबिक पाकिस्तान का जीडीपी महज 313 अरब डॉलर यानी भारतीय मुद्रा के हिसाब से 22.2 लाख करोड़ रुपए है।

विकास दर

विश्व बैंक के मुताबिक 2018-19 में भारत की विकास दर 7.5 फीसदी रहने की उम्मीद है। जबकि पाकिस्तानी सरकार ने 5.8 फीसदी की विकास दर का लक्ष्य रखा है।

प्रति व्यक्ति आय (Per capita income)

टाइम्स ऑफ इस्लामाबाद के मुताबिक पाकिस्तान में प्रति व्यक्ति आय 2017-18 में 1,80,204 रुपए थी। वहीं भारत की प्रति व्यक्ति आय 2018 में 1,12,835 रुपए थी।
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भारतीय वायु सेना की सर्जिकल स्ट्राइक के बाद अब पाकिस्तान पर आर्थिक संकट गहराने वाला है। सऊदी अरब और मलेशिया पाकिस....

गोल्ड रिजर्व्स

फिलहाल भारत के पास 598 टन गोर्ल्ड रिजर्व है। इसकी तुलना में पाकिस्तान का गोल्ड रिजर्व तकरीबन नौ गुना कम है। पाकिस्तान के पास सिर्फ 64.6 टन सोने का भंडार है।

फाॅरेन एक्सजेंज रिजर्व

पाकिस्तान के पास 1491.9 करोड़ डॉलर (1.96 लाख करोड़ रुपए) का फाॅरेन रिजर्व है। भारत के पास 39827 करोड़ डॉलर (28.3 लाख करोड़ रुपए) का फॉरेन रिजर्व है।

विदेशी निवेश

भारत के पास दिसंबर, 2018 तक 33.49 अरब डॉलर (2.38 लाख करोड़ रुपए) का विदेशी निवेश था। पाकिस्तान के पास विदेशी निवेश के नाम पर 13.22 करोड़ डॉलर (941 करोड़ रुपए) ही हैं।(एजेंसीज इनपुट्स सहित) 

हमले का दिया जायेगा माकूल जवाब --इमरान खान

Imran Khan on Pulwama Attack
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
पुलवामा में आतंकवादी हमले के पांच दिन बीत जाने के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने फरवरी 19 को अपनी चुप्पी तोड़ी और कहा कि भारत यदि उनके देश पर हमला करता है तो पाकिस्तान इसका माकूल जवाब देगा। उन्होंने कहा कि जंग की शुरुआत करना तो आसान है लेकिन यह जंग कहां लेकर जाएगा इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। इमरान खान ने कहा कि हमला होने की सूरत में उनका देश चुप नहीं बैठेगा और जवाबी कार्रवाई करेगा।
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद भारत के साथ बढ़े तनाव के बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने मंगलवार (19 फरवरी 2019) को पहली बार बयान दिया। उन्होंने कहा कि यह नया पाकिस्तान है, अगर भारत सबूत देगा तो हम कार्रवाई करेंगे। उन्होंने कहा कि भारत ने बिना सबूत के पाकिस्तान पर आरोप लगा दिया। भारत ने कोई सबूत नहीं दिया। उन्होंने कहा कि मैं भारत सरकार को जवाब दे रहा हूं।
पुलवामा हमले के बाद पांच दिनों तक चुप रहने वाले इमरान ने सफाई देते हुए कहा कि उनके यहां सऊदी अरब का शिष्टमंडल आया था और वह उसकी तैयारी में लगे थे। इसलिए उन्हें पुलवामा हमले की निंदा करने का समय नहीं मिला। 
उन्होंने कहा, 'भारत के मीडिया में पाकिस्तान को सबक सिखाने की बातें कही जा रही हैं। भारत ने यदि पाकिस्तान पर हमला किया तो हम जवाबी कार्रवाई करते हुए उसे माकूल जवाब देंगे। जंग की शुरुआत करना तो आसान है लेकिन यह जंग कहां पर लेकर जाएगा इसके बारे में कोई कुछ नहीं कह सकता।' इमरान का इशारा अपने न्यूक्लियर हथियारों की तरफ था।  
उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने पुलवामा हमले का आरोप बिना सबूत के सीधे तौर पर पाकिस्तान पर लगा दिया। उन्होंने कहा, 'आतंकवाद से पाकिस्तान को कोई फायदा नहीं है। वह इसका शिकार है। हमारा देश स्थिरता की ओर जा रहा है इसलिए हम आतंकवादी गतिविधियों का साथ नहीं दे सकते। भारत यदि पुलवामा हमले का सबूत यदि देता है तो हम कार्रवाई करेंगे।'




Pakistan PM Imran Khan: If you (Indian govt) thinks you will attack us and we will not think of retaliating, we will retaliate. We all know starting a war is in the hands of humans, where it will lead us only God knows. This issue should be solved through dialogue.





Pakistan PM Imran Khan's statement on terrorist attack: Pakistan ko isse kya faayda hai? Kyu Pakistan karega iss stage ke upar jab Pakistan stability ki taraf ja raha hai?
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उन्होंने कहा, 'कश्मीर समस्या के लिए पाकिस्तान को हर बार जिम्मेदार ठहराना गलत है। यह नया पाकिस्तान है और यहां नई सोच है। हम स्थायित्व चाहते हैं। इस समस्या का समाधान बातचीत के जरिए हो सकता है। दहशतगर्दी के लिए यदि कोई हमारी जमीं का इस्तेमाल करता है तो हम उसके खिलाफ एक्शन लेंगे।'
पाकिस्तान प्रधानमंत्री इमरान खान ऐसे छोटे बच्चों की झूठ रहे हैं, जैसे कि उन्हें कुछ नहीं मालूम। क्या उनको नहीं मालूम की आतंकवादियों के सरगना पाकिस्तान में रहकर खुनी खेल खेल रहे हैं? फिर जब भारत ने सर्जिकल स्ट्रीक की थी, क्यों नहीं अपनी फौज, गुप्तचर और अन्य सुरक्षा संस्थानों से किसी ऐसी आतंकवादी गतिविधियों के बारे में जानकारी ली? पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बने उन्हें इतना समय हो गया है, क्यों नहीं इन दहशतगर्तों पर कोई कार्यवाही की?  
मुंबई हमला पुलवामा से अधिक भयानक था 
भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दोनों देशों के साथ मधुर सम्बन्ध बनाने के लिए जब-जब उन्हें पलटे में क्या मिला, पठानकोट जैसे हमले। वास्तव में भारत को इस तरह के कठोर कदम उस समय उठाने थे, जब मुंबई में आतंकवादी हमला हुआ था, जो शायद पुलवामा हमले से अधिक खतरनाक था। लेकिन तुष्टिकरण की पुजारिन पिछली सरकार "हिन्दू आतंकवाद, भगवा आतंकवाद" आदि से भारत ही नहीं बल्कि विश्व को भ्रमित कर, लाशों पर अपनी कुर्सी बचाने में व्यस्त रही। भारत में रह रहे पाकिस्तान समर्थक पुस्तकें लिखते रहे। और कुर्सी के भूखे नेता उन पुस्तकों का विमोचन करते रहे। आज भारत के दृढ़ इच्छाशक्ति वाला प्रधानमंत्री है, जो भारत की आन, बान और शान बनाए रखने के लिए दुनियां से लड़ने में सक्षम है। यह इसी प्रधानमंत्री का दृढ़ संकल्प था कि बड़े साहस के साथ विश्व पटल पर आतंकवाद के मुद्दे को उठा, विश्व को इस गम्भीर समस्या के प्रति सचेत किया। यही कारण है कि आज एक के बाद एक देश आतंकवाद की लड़ाई में भारत को अपना हर संभव सहयोग देने आगे आ रहा है, परन्तु पाकिस्तान के पीछे शायद समस्त मुस्लिम देश भी नहीं।     (एजेंसीज इनपुट्स सहित)