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हमारी सरकार का लक्ष्य भ्रष्ट शासन देना है--उपमुख्यमंत्री पी.पुष्पा श्रीवानी, आंध्रा प्रदेश

डिप्टी CM की फिसली जुबान, कहा- हमारी सरकार का लक्ष्य भ्रष्ट शासन देना है
पी पुष्पा श्रीवानी
हैदराबाद से आर.बी.एल.निगम 
उपमुख्यमंत्री पी पुष्पा श्रीवानी को जुबान फिसलने की वजह से शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा।15 जून को उन्होंने कहा, 'हमारी सरकार का लक्ष्य आंध्र प्रदेश में भ्रष्ट शासन मुहैया कराना है।' दूसरे अर्थों में यह भी कहा जा सकता है "पूत के पॉँव पालने में ही नज़र आ गए।" एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा, 'हमारी सरकार का लक्ष्य राज्य में भ्रष्ट शासन देना है।' दरअसल नई डिप्टी सीएम 'भ्रष्टाचार मुक्त शासन' कहना चाहती थीं लेकिन उनकी जुबान से 'भ्रष्टाचार शासन' निकल गया। श्रीवानी डिप्टी सीएम बनने के बाद पहली बार अपने गृह जनपद आईं थीं।
इस मामले में विपक्षी पार्टी टीडीपी ने निशाना साधते हुए कहा, 'हम डिप्टी सीएम के बयान से सहमत हैं।' टीडीपी ने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर कहा, 'अपने लक्ष्य के बारे में बताने के लिए धन्यवाद मैडम, हम आपके बयान से सहमत हैं। बता दें कि सीएम जगन मोहन रेड्डी ने बीते हफ्ते राज्य में पांच डिप्टी सीएम की नियुक्ति की है। हाल ही में बीते विधानसभा चुनावों में रेड्डी के नेतृत्व में वाईएसआर कांग्रेस ने 151 सीटें जीती थीं और एन चंद्रबाबू नायडू की पार्टी टीडीपी केवल 23 सीटों पर ही निपट गई थी।
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हैदराबाद से आर.बी.एल.निगम आंध्र प्रदेश के विधानसभा चुनावों में एतिहासिक जीत दर्ज करने वाले जगन मोहन रेड्डी ने सत्त...

आंध्र प्रदेश के विधानसभा चुनावों में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने वाले जगन मोहन रेड्डी ने सत्ता में बिल्कुल अनोखा फार्मूला पेश किया है। वाईएसआर कांग्रेस की कैबिनेट में 5 डिप्टी सीएम हैं। भारत के सियासी इतिहास में संभवत: ऐसा पहली बार ही होगा जब कि सरकार में 5 उपमुख्यमंत्री होंगे। जगन मोहन रेड्डी की कैबिनेट में 25 सदस्य हैं जिनमें 5 उपमुख्यमंत्री शामिल होंगे। जगन मोहन ने 5 डिप्टी सीएम का फार्मूला राज्य में सभी वर्गों और जातियों संतुलन के लिए किया है। इन पांचों में एक अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और कापू समुदाय से होगा। (इनपुट: एएनआई)

'मोदी के पालतू कुत्ते' हैं केसीआर और जगनमोहन रेड्डी : चंद्रबाबू नायडू, आंध्र प्रदेश मुख्यमंत्री

ChandraBabu Naidu
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
आज नेताओं में इतना अधिक आक्रोश और संकुचित सोंच हो गयी है, कि इनके भाषण सुनने पर कई बार तो अब यह सोंचना पड़ता है कि बोलने वाला जनता हितैषी या कोई मवाली? जम्मू-कश्मीर में अब्दुल्ला परिवार और महबूबा मुफ़्ती अनुच्छेद 370 और 35A हटाए जाने के विरुद्ध भड़काऊ भाषण दे रहे हैं, तो जम्मू-कश्मीर से बाहर दूसरे नेता भी कम नहीं। क्या ऐसी अशोभनीय भाषा बोलने वाले नेताओं के हाथ देश अथवा प्रदेश की बाग़डोर देना हितकारी हो सकती है? क्यों नहीं ऐसे नेताओं का सामाजिक बहिष्कार किया जाए? जनता को चाहिए ऐसे नेताओं को एक भी वोट ना दी जाए। 
आभास होता है कि मोदी विरोध में अधिकतर नेता अपना मानसिक संतुलन खो चुके हैं। भारत में चुनाव पहले भी होते थे, तब विरोधी केवल नीतिगत एवं तर्कपूर्ण तथ्यों पर लड़ाई लड़ते थे, परन्तु आज अब पिछले कुछ चुनावों से विरोधी अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल कर पता नहीं किस संस्कृति का पालन कर भारतीय संस्कृति को ही नहीं, अपितु अपने माता-पिता एवं पूर्वजों को भी बदनाम कर, पता नहीं ऐसे नेता देश को किस पाताललोक में लेकर जा रहे हैं। प्रधानमंत्री का विरोध करने को बहुत मुद्दे हैं, लेकिन उस ओर किसी का लेशमात्र भी ध्यान नहीं। जिस तरह दिल्ली मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल का विरोध करने को दस-बीस नहीं हज़ारों कारण हैं, लेकिन कोई नहीं बोलता, क्योकि सभी नेताओं एवं पार्टियों का उसमे निजी स्वार्थ छुपा है, जिसे जनमानस समझ नहीं पाता।      
अपने राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ बयान देते हुए आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने अप्रैल 8 को वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष जगनमोहन रेड्डी और टीआरएस के अध्यक्ष व तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव को 'मोदी का पालतू कुत्ते' कहा है। मचिलीपटनम में अप्रैल 8 को एक रैली को संबोधित करते हुए नायडू ने कहा, 'बेशर्म जगनमोहन रेड्डी कत्ते के बिस्किट खा रहे हैं। वह ये बिस्किट हमें भी बांट रहे हैं। जगनमोहन और केसीआर मोदी के पालतू कुत्ते हैं, जो एक बिस्किट के लिए अपने घुटनों पर बैठे रहेंगे। होशियार रहिए, जगन ये बिस्किट आपको भी देने की कोशिश करेंगे।'
चंद्रबाबू नायडू ने बीजेपी और टीआरएस पर वाईएसआर कांग्रेस पार्टी को फंड देने का आरोप भी लगाया और कहा कि करोड़ो रुपए खर्च करने के बाद भी राज्य में उन्हें वोट नहीं मिलेगा। चंद्रबाबू नायडू  ने जगनमोहन रेड्डी को फंडिंग की  बात करते हुए कहा, 'मोदी और केसीआर ने 1000 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। केसीआर तुमने ये पैसे क्यों खर्च किए? तुम अपने राज्य का पैसा हमारे यहां क्यों खर्च कर रहे हो। एक हजार करोड़ रुपए खर्च करने के बावजूद यहां से तुम्हें एक भी वोट नहीं मिलने वाला। हमारे लोग तुमसे बहुत नाराज हैं।'
गौरतलब है कि चंद्रबाबू नायडू ने ऐसे समय में ये विवादित टिप्पणी की है जब राज्य में लोकसभा चुनाव 2019 के लिए सियासी गर्मी उच्चतम स्तर पर है। 11 अप्रैल को आंध्र प्रदेश में लोकसभा और विधानसभा सीटों के लिए वोटिंग होने जा रही है। मतगणना 23 मई को होगी।