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बेशर्म केजरीवाल एंड गैंग : मोदी सरकार द्वारा निर्मित 10,000 बेड के कोविड सेंटर का लिया क्रेडिट

Today Will Be Arvind Kejriwal Corona Test - रिपोर्ट आने ...
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
एक बात समझ में नहीं आती कि आखिर कब तक अरविन्द केजरीवाल गैंग दिल्ली वालों को मूर्ख बनाकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकती रहेगा? आखिर दिल्लीवासी अभी भी इस गैंग की वास्तविकता को नहीं पहचाने तो ज़िंदगी में कभी नहीं पहचान सकते। आम आदमी पार्टी बनाने से पूर्व कई वर्ष सोनिया गाँधी की समिति में रहकर केजरीवाल गैंग ने जनता को मूर्ख बनाने की कला अच्छी तरह से सीख ली। दिल्ली और पंजाब वाले तो मुफ्त के चक्कर में इसके जाल में फंसते रहते हैं, लेकिन भारत के अन्य प्रदेशवासी इस पार्टी को घास तक नहीं डालते, शायद यही कारण है कि अन्य राज्यों में इसके उम्मीदवारों की जमानत जब्त होने के अलावा कई क्षेत्रों में तो NOTA से भी कम वोट मिलते हैं।

 
दूसरे, जो पार्टी एक छोटी से दिल्ली को संभाल नहीं सकती, देश संभालने की जिम्मेदारी देना आत्मघाती कदम होगा। दिल्ली वाले तो मुफ्त के जाल में फंस आत्मघात कर रहे हैं, जिसका प्रमाण कोरोना की गंभीरता को न समझना है। स्मरण हो, दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने जून 9 को कहा था कि "दिल्ली में 5.5 लाख केस होंगे और हम दिल्ली को नहीं संभाल पाएंगे।" ये उस केजरीवाल गैंग का बयान है जो दिल्ली को लंदन बनाने के सब्जबाग दिखाता था। 
झूठ की इंतिहा होती है, ये गैंग टीवी पर कहता है कि "हमने एक लाख लोगों को खाना दिया, 5000-5000 रूपए बांटे, जबकि कई क्षेत्रों में मात्र 2000 रूपए ही बांटे गए। यानि ये केजरीवाल गैंग कोरोना जैसी गंभीर बीमारी में भी घोटाला कर रहा है। दूसरे जब इस गैंग ने एक लाख लोगों को भोजन वितरित किया, फिर प्रवासी मजदूरों ने जाते वक़्त यह क्यों कहा कि "हमें किसी ने खाना तक नहीं दिया।" तो क्या इस गैंग ने रोहिंगिया को बांटा था भोजन, जिनके इस गैंग के विधायक अमानतुल्ला ने आधार कार्ड बनवाए हैं? कसम संविधान की खाते हैं, लेकिन काम संविधान के विरुद्ध करता है। इस गैंग के झूठ का पर्दाफाश तो उसी दिन से होना गया था, जिस दिन दिल्ली में 76 मौत का आंकड़ा दिया गया था, जबकि आईटीओ कब्रिस्तान में 91 दफ़न हो चुके थे।    
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल एंड गैंग के एक और झूठ पर्दाफाश हो गया है। दिल्ली में कोरोना महामारी के संकट को देखते हुए मोदी सरकार ने दिल्ली में 10,000 बेड का सरदार पटेल कोविड सेंटर का निर्माण कराया है लेकिन केजरीवाल और उसके गैंग के लोग इसका क्रेडिट लेकर सरकार को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। 
दरअसल, मोदी सरकार के गृह मंत्रालय ने दिल्ली में कोरोना संकट को देखते हुए 10,000 बेड का कोरोना केयर सेंटर का निर्माण कराया है। इस सेंटर के निर्माण के लिए राधा स्वामी ब्यास ने जमीन दी है और ITBP इसकी जिम्मेदारी संभाली है। प्लोरिंग का काम रेलवे के द्वारा किया गया है। इस सेंटर के निर्माण में दिल्ली सरकार की कोई भूमिका नहीं है लेकिन केजरीवाल एंड गैंग बेशर्म से इसकी क्रेडिट लेने में जुटी है।


आप आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने ट्वीट कर लिखा कि लौह पुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल की स्मृति में अरविंद केजरीवाल सरकार ने  दुनिया का सबसे बड़ा कोविड अस्पताल बनवाया जबकि भाजपाईयों ने मूर्ति बनवाई।

 
इससे पहले आप आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने एक ट्वीट कर दावा किया था कि दिल्ली सरकार द्वारा बनाये गये दुनिया के सबसे बड़े कोविड अस्पताल का गृह मंत्री अमित शाह “चोरी-चोरी, चुपके-चुपके” उद्घाटन कर रहे हैं।

 
संजय सिंह के इस दावे को पूर्वी दिल्ली के सांसद गौतम गंभीर ने खंडन किया और कहा कि गृह मंत्री कोविड सेंटर का उद्घाटन नहीं बल्कि निरीक्षण करने के लिए जा रहे हैं।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने अपने पहले कार्यकाल में राज्यपाल और केंद्.....
संजय सिंह के इस झूठ का पर्दाफाश तब हो गया है जब गृहमंत्री अमित शाह ने सरदार पटेल ने दौरा कर निरीक्षण किया, जबकि संजय सिंह द्वारा दावा किया था कि वे उद्घाटन करने के लिए गए हैं।

जनसेवा के नाम पर लूट मचाते नेता

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
आज हर कांग्रेस विरोधी कांग्रेस का विरोध करता नज़र आता है, लेकिन ऐसा नहीं है कि कांग्रेस ने कोई अच्छा काम नहीं किया। 
स्मरण हो, तत्कालीन प्रधानमंत्री इन्दिरा गाँधी ने राजे-रजवाड़ों को प्रिवी पर्स समाप्त किया था, ताकि देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हो। परन्तु समय परिवर्तन ने राजनीती को एक पेशा बना दिया है। समाजसेवक के नाम पर पार्षद से लेकर लोक/राज्य सभा तक सभी जनता के धन को लूट रहे हैं और जनता मात्र एक मूकदर्शक बनी इनको बहुत बड़ा नेता और समाज सुधारक मान अपना कामकाज छोड़ जय-जयकार करने निकल पड़ते हैं।  
चुनावों में जनता को नैतिकता और राजा हरिश्चन्द्र की ईमानदारी का लॉलीपॉप देने वाले नेता स्वयं किस तरह कानून को ताक पर रख जनता को लूट रहे हैं, जिसे हर जनता समझ नहीं पाती और इन्हे अपना सच्चा समाज सेवक समझने की भूल कर रहे हैं। 
लगभग तीन दशक पूर्व तक कोई निर्वाचित जनसेवक फ्री में इतनी सुविधाएं और पेंशन नहीं लेता था, लेकिन आज जनसेवा के नाम पर खुली लूट मची हुई है। आज वास्तव में जनसेवा के नाम सफेदपोशी लुटेरे राज कर रहे हैं। कोई राजनीती के नाम पर, कोई RWA के नाम, तो कोई एनजीओ के नाम पर। जबकि किसी राजनीतिक संरक्षण के कोई एनजीओ नहीं चलता, पब्लिक का क्या है, एक रूपए खर्च कर दस रूपए खर्चे में डालकर, तुम भी खाओ और हमें भी खिलाओ, पब्लिक को मरने दो। 
दो दशक पूर्व तक चीनी, गेहूँ, चावल, दूध अथवा घी पर 25 पैसे बढ़ने पर विपक्ष धरने और प्रदर्शन करता था, लेकिन आज दो रूपए बढ़ने पर सब अपने बिलों में छुपे रहते हैं। क्या इसी का नाम जनसेवा है?
सरकारी आवास कब्जाए 50 पूर्व सांसदों को दिल्ली पुलिस की मदद से बाहर करने की प्रक्रिया शुरू 
केंद्र सरकार ने उन सभी पूर्व सांसदों को सरकारी आवासों से निकाल बाहर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जो नियमों को ताक पर रख कर डेरा जमाए हुए थे। ये सभी पूर्व सांसद सरकार द्वारा दिए गए समय की अवधि होने के बावजूद सरकारी आवासों में टिके हुए थे। अब सरकार ने दिल्ली पुलिस की मदद से उन्हें निकाल बाहर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इन पूर्व सांसदों ने आवास खाली न करने के पीछे कई बहाने बनाए थे।
कुछ पूर्व सांसदों ने कहा था कि उनके बच्चे दिल्ली में पढ़ रहे हैं, इसीलिए वे सरकारी आवास खाली नहीं कर सकते। कुछ सांसदों ने अपने किसी परिवारजन के स्थानीय अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती होने का बहाना बनाया था। कुछ अन्य पूर्व सांसदों ने तो अजोबोग़रीब तर्क देते हुए कहा था कि वे दिल्ली में कहीं और आवास नहीं ढूँढ पा रहे हैं, इसीलिए वे सरकार आवास खाली नहीं कर सकते। शहरी मामलों के मंत्रालय ने अंत में दिल्ली पुलिस की मदद ली है और कुछ पूर्व सांसदों द्वारा कब्जाए गए सरकारी आवास खाली करा भी लिया गया है।
अब पुलिस की मदद से सरकारी बंगलों पर कब्जा करे बैठे पूर्व सांसदों को निकाला जाएगा बाहर#Delhi #MemberOfParliament https://t.co/DMCLVzhWqR
— Intl. Business Times (Hindi) (@IBTimesHindi) October 7, 2019
अक्टूबर 4, 2019 तक की बात करें तो कुल 50 पूर्व सांसद ऐसे थे, जिन्होंने अपने सरकारी बंगले खाली नहीं किए थे। इन लोगों को कई बार लीगल नोटिस दिया जा चुका था। ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ के सूत्रों के अनुसार, इस लिस्ट में जन अधिकार पार्टी के संस्थापक पप्पू यादव, उनकी पत्नी और कॉन्ग्रेस नेता रंजीता रंजन, दीपेंद्र सिंह हुड्डा, मेघालय के मुख्यमंत्री कोर्नाड संगमा और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ का नाम शामिल है।
अभी इस बात पर स्थिति साफ़ नहीं है कि पूर्व उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और पूर्व भाजपा अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी अपने सरकारी आवासों में बने रह सकते हैं या नहीं। 91 वर्षीय आडवाणी और 85 वर्षीय जोशी के सुरक्षा की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार इस सम्बन्ध में निर्णय लेगी। अधिकारियों ने कहा है कि पूर्व सांसद जिस तरह से सरकारी आवासों में डेरा जमा कर बैठे हैं, उससे नए सांसदों को आवास उपलब्ध कराने में काफ़ी दिक्कतें आ रही हैं।
20 अगस्त को ख़बर आई थी कि जो भी पूर्व सांसद सरकारी आवास खाली करने में आनाकानी कर रहे हैं, उनके घर में बिजली और पानी की सप्लाई काट दी जाएगी। ऐसा करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दे दिया गया था। उस समय 200 ऐसे पूर्व सांसद थे जो सरकारी आवासों में जमे हुए थे। नियमानुसार, दोबारा चुन कर न आए सांसदों को लोकसभा भंग होने के एक महीने के भीतर अपना सरकारी आवास खाली करना होता है। राष्ट्रपति कोविंद ने 25 मई को ही पिछली लोकसभा भंग कर दी थी। इस हिसाब से देखें तो अब तक लगभग साढ़े 4 महीने हो चुके हैं।
पप्पू यादव ने सरकारी बंगले को खाली करने से पहले उखाड़े खिड़की, दरवाजे और टाइलें भी, देखें VIDEO
पप्पू यादव ने सरकारी बंगले को खाली करने से पहले उखाड़े खिड़की, दरवाजे और टाइलें भी 
लुटियन दिल्ली स्थित बलवंत राय मेहता लेन के 11 ए नंबर बंगले का नजारा युद्ध क्षेत्र की किसी इमारत में मची तबाही जैसा है. कमरों से उखाड़े गये खिड़की दरवाजे और दीवारों से निकाली गयी टाइलें, बिखरा पड़ा फर्नीचर, खंडहर में तब्दील हुये बरामदे, इस बंगले की ताजा तस्वीर का हिस्सा हैं. यह बंगला बिहार से पूर्व सांसद पप्पू यादव के नाम आवंटित है और बंगले में तबाही के मंजर की वजह, इसे खाली करने से पहले इसमें किये गये अतिरिक्त निर्माण कार्य को हटाना बताया गया है. आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा पूर्व सांसदों से बलपूर्वक सरकारी बंगला खाली कराने की कार्रवाई पप्पू यादव को आवंटित बंगले में शुरु होती, इससे पहले ही उन्होंने बंगले में किये गये सैकड़ों लोगों के रुकने के इंतजामों का नामोनिशान मिटाने के लिये अस्थायी निर्माण को ढहा दिया है.
आवास पर मौजूद पप्पू यादव के निजी सचिव अजय कुमार ने दावा किया कि बंगले में लगभग 400 लोगों के रुकने का इंतजाम था, उन्होंने बताया, ‘‘हमारे सांसद जी ने उन मरीजों के लिये आवास में रुकने ठहरने के इंतजाम किया था जो मधेपुरा सहित बिहार के अन्य इलाकों से इलाज कराने के लिये दिल्ली आते थे. इसीलिये बंगले के बाहर सुभाष चंद्र बोस सेवाश्रम का बोर्ड पर भी लगा है जिस पर लिखा है, आपका घर, सबका घर.'
कुमार ने हालांकि निर्माण कार्य को ढहाने और खिड़की दरवाजे उखाड़ कर ले जाने की तोहमत केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) के सिर पर मढ़ दी लेकिन सीपीडब्ल्यूडी ने इस आरोप को सिरे से खारिज करते हुये स्पष्ट किया कि पूर्व सांसद ने अभी बंगले का कब्जा हस्तांतरित नहीं किया है. कुमार ने बताया, ‘‘मंगलवार को सीपीडब्ल्यूडी के अधिकारियों की मौजूदगी में निर्माण कार्य को हटाया गया था और इससे निकले खिड़की दरवाजे भी सीपीडब्ल्यूडी का दल ले गया.''
सीपीडब्ल्यूडी के एक अधिकारी ने पप्पू यादव को आवंटित बंगले में ऐसी किसी कार्रवाई से इंकार करते हुये बताया कि इस तरह की कार्रवाई पुलिस की मौजूदगी में बलपूर्वक बंगला खाली कराते समय होती है जबकि बलपूर्वक बंगला खाली कराने वालों की सूची में पप्पू यादव का नाम शामिल नहीं है.
उल्लेखनीय है कि लुटियन दिल्ली स्थित बंगलों की देखरेख और रखरखाव की जिम्मेदारी केन्द्रीय भवन निर्माण एजेंसी सीपीडब्ल्यूडी की है. मंत्रालय का संपदा निदेशालय इन बंगलों के आवंटन के बाद आवंटी को कब्जा दिलाने और आवंटन रद्द होने पर कब्जा वापस लेने की जिम्मेदारी निभाता है. हाल ही में लोकसभा चुनाव के बाद संपदा निदेशालय ने 230 पूर्व सांसदों को बंगले खाली करने के नोटिस जारी किये थे. अक्टूबर के पहले सप्ताह तक बंगले खाली नहीं करने वाले लगभग 50 सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब तलब किया गया था. 
इस सूची में पप्पू यादव और उनकी पूर्व सांसद पत्नी रंजीत रंजन भी शामिल थी. सुपौल से पूर्व सांसद रंजीत रंजन को बलवंत राय मंहता लेन में ही सात नंबर बंगला आवंटित है. गत सोमवार को निदेशालय ने नोटिस का जवाब नहीं देने वाले 40 पूर्व सांसदों के बंगले बलपूर्वक खाली कराने की कार्रवाई शुरु कर दी है. निदेशालय के एक अधिकारी ने बताया कि पप्पू यादव और उनकी पत्नी ने एक सप्ताह में आवास खाली करने की सूचना दी थी, इसलिये बलपूर्वक आवास खाली कराने वालों की सूची में उनका नाम नहीं है.
सीपीडब्ल्यूडी के लुटियन दिल्ली स्थित कार्यालय ने पप्पू यादव के आवास में लोगों के रुकने ठहरने के अतिरिक्त इंतजाम किये जाने की जानकारी होने की बात को भी स्वीकार किया है. एक अधिकारी ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया, ‘‘नियमों के तहत विभाग ने इससे जुड़ी सभी जानकारियां लोकसभा सचिवालय को दे दी थी। अतिरिक्त निर्माण कार्य के खिलाफ कार्रवाई करने की पहल मंत्रालय के स्तर पर की जाती है.'अधिकारी ने कहा कि बंगले में की गयी तोड़फोड़ से सीपीडब्ल्यूडी का कोई संबंध नहीं है लेकिन बंगले के कब्जे के हस्तातंरण के समय इस पर संज्ञान लेकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. 
कुमार ने बताया कि बिहार में बाढ़ राहत कार्यों में लगे पप्पू यादव शुक्रवार तक दिल्ली पंहुच रहे हैं. इसके बाद दोनों बंगलों का कब्जा सीपीडब्ल्यूडी को सौंपा जाएगा. सरकारी आवास में व्यापक पैमाने पर किये गये निर्माण कार्य और तोड़फोड़ के मामले में प्रतिक्रिया के लिये पप्पू यादव और रंजीत रंजन उपलब्ध नहीं थे.
अखिलेश और तेजस्वी यादव भी कर चुके हैं ऐसी हरकत 
इसके पहले उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी ऐसी ही हरकत कर चुके हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव हारने के बाद पहले तो उन्होंने ये-वो बहाने कर के बंगला छोड़ा ही नहीं, और जब छोड़ा, तो उसकी टोंटियाँ तक साथ ले गए। वहीं पप्पू यादव के ही गृह राज्य बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव का बंगला लंबी जद्दोजहद के बाद जब यादव का पदभार संभालने वाले सुशील मोदी को मिला तो पता चला कि तेजस्वी यादव ने बंगले में तमाम निर्माण कार्य करा रखा था। मोदी ने पत्रकारों को आलीशान बंगले का भ्रमण कराया, और उसके सौन्दर्यीकरण में तेजस्वी यादव के खर्च को करोड़ों के सरकारी धन का दुरुपयोग बताया था। 
पुलिस की मदद से खाली कराया गया पूर्व सांसद हरी मांझी और पप्पू यादव का बंगला
अरुण जेटली के परिवार को नहीं चाहिए पेंशन, पत्नी ने जरूरतमंद कर्मचारियों के लिए की दान
अरुण जेटली के परिवार को नहीं चाहिए पेंशन, पत्नी ने जरूरतमंद कर्मचारियों के लिए की दान
पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली के परिवार ने मौत के बाद मिलने वाली उनकी पेंशन दान कर दी है। दिवंगत नेता की पत्नी संगीता जेटली ने इस बारे में राज्यसभा सभापति और उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू को चिट्ठी लिखी है।संगीता जेटली ने अपने पति की पेंशन उन कर्मचारियों को दान करने को कहा है जिनकी सैलरी कम है। जेटली परिवार के फैसले के बाद अब उनकी पेंशन राज्यसभा के कम सैलरी वाले कर्मचारियों को दी जा सकती है। बता दें कि पेंशन के रूप में परिवार को सालाना करीब 3 लाख रुपये मिलते
अरुण जेटली के परिवार में पत्नी संगीता जेटली के अलावा बेटी सोनाली और बेटा रोहन हैं। ये दोनों ही अपने पिता की तरह वकील हैं। वकालत में ये जेटली परिवार की तीसरी पीढ़ी है। अरुण जेटली वकालत और राजनेता के साथ-साथ दिल्ली व जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) के अध्यक्ष भी रहे
पेंशन जरूरतमंद लोगों को देने की बात ने जनता में उपज रहे रोष को बल दे दिया है। काफी समय से जनता सरकार से प्रश्न कर रही है कि "आखिर किस आधार पर अपने आपको जनसेवक कहलवाने पेंशन और मुफ्त में सुविधाओं क्यों लेते हैं? पार्षद से लेकर सांसद तक सबको पेंशन भी चाहिए, क्यों? जनता इनसे पूछे "आप लोग कर्मचारी हो या जनसेवक?" 
यदि पेंशन के नाम पर इन जनसेवकों द्वारा मचाई जा रही लूट पर अंकुश लगता है, देश का बजट लाभ में जाएगा ही नहीं, महंगाई एवं दूसरे संसाधन भी प्रभावित होंगे, जिसका लाभ जनता को ही मिलेगा।  
अरुण जेटली का निधन?
बता दें पूर्व वित्त मंत्री और बीजेपी के वरिष्‍ठ नेता अरुण जेटली का 24 अगस्त को दिल्‍ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था। जेटली काफी समय से एक के बाद एक बीमारी से लड़ रहे थे। इसी के चलते उन्‍होंने लोकसभा चुनाव, 2019 में बीजेपी को मिली प्रचंड जीत के बाद पीएम नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर कैबिनेट में शामिल नहीं करने की गुजारिश की थी

सांसदों को कितनी मिलती है पेंशन?
साल 2010 में हुए संशोधन के अनुसार संसद से रिटायर होने के बाद सदस्यों को 20 हजार रुपये प्रति माह पेंशन मिलती है। साथ ही उनके कार्यकाल के एक साल के आधार पर 1500 रुपये अधिक मिलते हैं।खास बात ये है कि पेंशन हर सदस्य को मिलती है, चाहे उन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया हो गया या नहीं। इसके अलावा किसी भी पूर्व सांसद के निधन के बाद उनके पति या पत्नी को पेंशन का आधा हिस्सा दिया जाता है

मोदी सरकार-2 के 50 दिन

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार के दूसरे कार्यकाल की हाफ सेंचुरी 21 जुलाई को पूरी हो गई। मोदी सरकार 2.0 ने अपने पहले 50 दिनों में सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के मंत्र के तहत देश के हर वर्ग, हर क्षेत्र के विकास के लिए तीव्र गति से काम किया है। 30 मई को शपथ लेने के बाद से ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मंत्रिमंडल के सहयोगी दिन-रात एक कर के पूरी क्षमता के साथ काम में जुटे हैं।
इस बार 2014 से भी बड़े जनमत से सत्ता में दोबारा लौटे प्रधानमंत्री मोदी ये बाखूबी समझते हैं कि जनता की उनके अपेक्षाएं बहुत ज्यादा हैं और पांच वर्षों में देशवासियों की आकाक्षाओं को पूरा करना उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। यही वजह है कि मोदी सरकार ने अपने दूसरी कार्यकाल के पहले 50 दिनों मे गांव, गरीब और किसान से लेकर उद्यमियों और श्रम सुधारों की दिशा में जबरदस्त काम किया है। 
मोदी-योगी-अमित त्रिमूर्ति यदि मंडल स्तर और जिला स्तर के पदाधिकारियों को पुराने कमर्ठ कार्यकर्ताओं के संगठित कर जन-जन तक पहुँच समस्याओं का समाधान करें, ताकि लोकसभा की भाँति स्थानीय चुनावों में भी भाजपा विरोधियों को चारों-खाने चित किया जा सके। हकीकत यह है कि इन स्तरों पर पदाधिकारी केवल इस त्रिमूर्ति पर निर्भर रहते हैं। मोदी द्वारा किसी अभियान पर केवल कुछ ही लोग सीमित लोगों तक पहुंच व्हाट्सअप पर फोटो डाल जान-संपर्क दर्शा कर उच्च केन्द्रीय नेतृत्व को भ्रमित किया जा रहा है। 
एक नजर डालते हैं मोदी सरकार के 50 दिन के कामकाज पर-
* सेना के जवान और पुलिस के शहीदों के बेटे-बेटियों की छात्रवृति बढ़ाई
* सेना के अनेक वर्गों के साथ न्याय किया
* सभी किसानों को किसान सम्मान निधि के दायरे में लाया गया, 14 करोड़ से अधिक किसानों को सालाना 6000 रुपये मिलेंगे
* किसानों के लिए लागत से 50 फीसदी ज्यादा मूल्य सुनिश्चित किया
* सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने के लिए 14 सूत्रीय फॉर्मूले पर काम शुरू किया
* खरीफ फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने का फैसला किया गया
* 10 हजार फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन (FPO) के गठना का ऐलान
* गांव और गरीबों के कल्याण पर फोकस, 2022 तक हर घर तक गैस और बिजली कनेक्शन पहुंचाने का लक्ष्य
* 2022 तक पीएम आवास योजना(ग्रामीण) के तहत 1.95 करोड़ घर बनाने का लक्ष्य, इस दिशा में तेजी से काम
* हर घर तक साफ पेयजल पहुंचाने का फैसला, सरकार ने महत्वाकांक्षी परियोजना ‘जल जीवन मिशन’ पर काम शरू किया। इसके लिए अलग जल शक्ति मंत्रालय का गठन
* श्रम कानूनों में सुधार करते हुए कामगारों के लिए चार कोड लाने का फैसला। सरकार ने 44 श्रम कानूनों को मिलाकर 4 श्रम संहिताएं बनाने का फैसला किया
* 13 श्रम कानूनों को मिलाकर बने स्वास्थ्य और कार्यदशाओं से संबंधित बिल ‘ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन बिल 2019’ के मसौदे को मंत्रिमंडल से मंजूरी
* स्वास्थ्य और कार्यदशा से संबंधित बिल से 40 करोड़ कर्मचारी लाभान्वित होंगे। छोटे कारखानों में काम करने वाले कामगारों को भी नियुक्ति पत्र मिलेगा। हर साल श्रमिकों के स्वास्थ्य की जांच भी जरूरी की गई है।
* न्यूनतम वेतन से संबंधित प्रावधान को भी सरकार की मंजूरी
* स्टार्ट अप के लिए टीवी चैनल शुरू करने का फैसला
* निवेश बढ़ाने के लिए विशेष प्रावधान किया गया
* जम्मू-कश्मीर में सरकार ने सख्ती की और अलगाववादियों को अलग-थलग कर दिया
* मोदी सरकार संसद सत्र में ही जम्मू-कश्मीर रिजर्वेशन बिल दोनों सदनों में पास कराने में सफल रही। इस विधेयक के तहत जम्मू कश्मीर में अंतरराष्ट्रीय सीमा के 10 किलोमीटर के दायरे में रहने वालों को शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी नौकरियों में 3 फीसदी आरक्षण को विस्तार दिया गया।
* जम्मू कश्मीर आरक्षण अधिनियम सीधी भर्ती, प्रमोशन और विभिन्न श्रेणियों में कई व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आरक्षण देता है, लेकिन इसका विस्तार अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे व्यक्तियों के लिए नहीं था। लेकिन इस बिल के कानून बन जाने के बाद यह लोग भी आरक्षण के दायरे में आ जाएंगे।

* जम्मू-कश्मीर पर भी सरकार का खास फोकस रहा। टेरर फंडिंग की शिकायतों को केंद्र ने गंभीरता से लिया। जम्मू-कश्मीर बैंक के चेयरमैन को हटाने के साथ स्थानीय नेताओं की सिफारिशों पर हुई सौ से ज्यादा भर्तियों की जांच शुरू की।
* छोटे कारोबारियों के लिए प्रधानमंत्री कर्म योगी मानधन योजना की शुरुआत की गई। इसके तहत 1.5 करोड़ से कम वार्षिक टर्नओवर वाले करीब तीन करोड़ दुकानदारों को पेंशन मिलेगी।
* बड़े कारोबारियों को भी सहूलियत देने का फैसला किया गया। 400 करोड़ सालाना टर्नओवर पर 25 प्रतिशत कॉरपोरेट टैक्स लगेगा। पहले 250 करोड़ पर यह दर लगती थी।
* बैंकिंग सेक्टर की दशा सुधारने के लिए 70 हजार करोड़ रुपये जारी करने का फैसला

* सड़क, पुल, बिजली जैसे इन्फ्रास्ट्रक्चर के प्रोजेक्टों में 100 लाख करोड़ रुपये के निवेश का फैसला
* भ्रष्टाचार पर सख्ती, करप्शन के आरोपी अफसरों को नियम 56 के तहत नौकरी से हटाया गया
* भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए पुख्ता रोडमैप तैयार
* पोंजी स्कीमों से होने वाली लूट को खत्म करने के लिए बिल लाया गया
* मेडिकल पीजी में प्रवेश के लिए एक ही नीट परीक्षा का निर्णय
* 17वीं लोकसभा के मौजूदा सत्र के दौरान पिछले 20 साल में सबसे अधिक कामकाज हुआ। कामकाज का स्तर 128 प्रतिशत रहा है।
* मानसून सत्र के दौरान 17 बिल पास हुए। वहीं 104 नए बिल पेश किए गए हैं।

बेरोजगारी : चुनावी रैलियों में झूठलाया, सत्ता आते ही स्वीकारा

                                                                                         साभार 

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
भारत भले ही विकास के रथ पर सवार हो सरपट दौड़ने को तैयार है लेकिन बेरोजगारी की  हकीकत है जो आने वाले दिनों में देश की इस तस्वीर को धुंधला कर सकती है। इंटरनेशनल लेबर आर्गनाइजेशन की रिपोर्ट मोदी सरकार और देश के युवाओं की चिंता बढ़ाने वाली है।इंटरनेशनल लेबर आर्गनाइजेशन की रिपोर्ट दावा करती है कि 2019 तक देश में बेरोजगारों की संख्या एक करोड़ 90 लाख तक पहुंच सकती है।
बेरोजगारी दर 45 साल के ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल में  इसे आधिकारिक तौर पर स्वीकार कर लिया गया है। जबकि  कुछ महीने पहले लीक हुई इसी रिपोर्ट को खारिज कर दिया था। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, देश में जुलाई 2017 से लेकर जून 2018 के दौरान एक साल में बेरोजगारी  6.1 फीसदी बढ़ी। इससे पहले 1972-73 में बेरोजगारी दर का यही आंकड़ा था। 6.1% का आंकड़ा नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस (एनएसएसओ) की जनवरी में लीक हुई रिपोर्ट में भी बताया गया था। लेकिन तब नीति आयोग ने रिपोर्ट खारिज करते हुए कहा था कि यह फाइनल डेटा नहीं, बल्कि ड्राफ्ट रिपोर्ट है और सरकार ने नौकरियों पर कोई डेटा जारी नहीं किया है। हालांकि रिपोर्ट जारी करते हुए सांख्यकी सचिव प्रवीण श्रीवास्तव ने बताया कि सर्वे नए डिजाइन और नए मेट्रिक्स पर आधारित है। इसलिए पिछली रिपोर्टों से तुलना सही नहीं है। 45 साल में सबसे ज्यादा बेरोजगारी की व्याख्या मीडिया की है। 

दो सदस्यों ने दिया था इस्तीफा

गौरतलब है कि रिपोर्ट जारी नहीं करने पर राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग के दो सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया था। केंद्र सरकार को महत्वपूर्ण आंकड़ों को रोकने के लिए विपक्षी दलों के आरोपों को झेलना पड़ा था। विपक्ष का आरोप था कि सरकार अपनी नाकामयाबी को जानबूझकर छिपा रही है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, शहरी क्षेत्र में रोजगार की चाहत रखने वाले 7.8 फीसदी युवा बेरोजगार हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्र में यह आंकड़ा 5.3 फीसदी है। बेरोजगारी दर का निर्धारण कुल कार्यबल में बेरोजगार व्यक्तियों की तादाद की गणना फीसदी में करके किया जाता है।

Image result for बेरोजगारीशहरी क्षेत्र में युवा ज्यादा बेरोजगार 

इंटरनेशनल लेबर आर्गनाइजेशन की रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस रिपोर्ट में 15 से 24 साल तक के युवाओं को शामिल किया गया है जो रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं।  रिपोर्ट का दावा है कि साल 2017 में एक करोड़े 83 युवा बेरोजगार हुए हैं और 2019 तक इनकी संख्या में बेतहासा वृद्धि हो सकती है।
एनएसएसओ रिपोर्ट में कहा गया था कि 2017-18 में बेरोजगारी दर ग्रामीण क्षेत्रों में 5.3% और शहरी क्षेत्र में सबसे ज्यादा 7.8% रही। पुरुषों की बेरोजगारी दर 6.2% जबकि महिलाओं की 5.7% रही। इनमें नौजवान बेरोजगार सबसे ज्यादा थे, जिनकी संख्या 13% से 27% थी। 2011-12 में बेरोजगारी दर 2.2% थी। जबकि 1972-73 में यह सबसे ज्यादा थी। बीते सालों में कामगारों की जरूरत कम होने से ज्यादा लोग काम से हटाए गए।

इतने लोगों पर किया गया सर्वे

सरकार के शुक्रवार को यहां जारी आंकड़ों के अनुसार जुलाई 2017 से जून 2018 की अवधि की रिपोर्ट के अनुसार कुल 12 हजार 800 बस्तियों में सर्वेक्षण किया गया। इन बस्तियों में 7024 गांव और 5776 शहर शामिल हैं। एक लाख दो हजार 113 परिवारों में सर्वेक्षण किया गया। इनमें 56 हजार 108 ग्रामीण तथा 46 हजार पांच शहरी परिवार शामिल हैं। सर्वेक्षण में चार लाख 33 हजार 339 लोगों ने हिस्सा लिया। इनमें से दो लाख 46 हजार 809 ग्रामीण और एक लाख 86 हजार 530 शहरी इलाकों से हैं।

नोटबंदी के बाद का पहला सर्वे

यह रिपोर्ट काफी महत्वपूर्ण है। यह जुलाई 2017 से जून 2018 के बीच जुटाए गए डेटा पर आधारित है। यानी यह नोटबंदी के बाद का पहला आधिकारिक सर्वेक्षण है। सरकार पर यही रिपोर्ट दबाने का आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग के कार्यकारी अध्यक्ष सहित दो सदस्यों ने जनवरी में इस्तीफा दे दिया था। उनका कहना था कि रिपोर्ट को आयोग की मंजूरी मिलने के बाद भी सरकार जारी नहीं कर रही। यह रिपोर्ट दिसंबर 2018 में जारी की जानी थी।
रिपोर्ट में इस बात पर चिंता जाहिर की गई है कि 2019 तक 77 प्रतिशत युवाओं के रोजगार अपने आप खत्म हो जाएंगे। ये ऐसे रोजगार है जिनमें आमदनी बेहद कम है। ऐसे रोजगार में युवाओं को 198 रुपए प्रतिदिन से भी कम की कमाई होती है।   (एजेंसीज इनपुट्स सहित)