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कोरोना की भयावह स्थिति के लिए तबलीगी जमात जिम्मेदार

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
आज अगर देश में कोरोना की इतनी भयावह स्थिति बनी है तो इसके लिए सिर्फ और सिर्फ तबलीगी जमात जिम्मेदार है। यह न तो कोई अफवाह है न ही कोई कहानी बल्कि यह ठोस रूप से आंकड़े पर आधारित तथ्य है। देश के कई राज्यों में कोरोना संक्रमण पहुंचने का कारण ही तबलीगी जमात है। उदाहरण के लिए देश के पूर्वी राज्य अरुणाचल प्रदेश में तो सौ प्रतिशत कोरोना संक्रमण पहुंचाने के लिए तबलीगी जमात कसूरवार है।
जमात की इस भयंकर गलती को समूचे मुस्लिम समाज से जोड़ना उससे भी बड़ी भयंकर गलती होगी। भारत में इस वैश्चिक बीमारी को फ़ैलाने में तब्लीगी जमात और इसके अनुयायियों का सबसे बड़ा योगदान रहा है, जिन्होंने मरकज़ में सम्मिलित हुए लोगों को मस्जिदों और मदरसों में छिपाकर अपने ही उस समाज को शिकार बनाया जिसे इस्लाम की राह पर चलने के कहा जाता था। जमातियों का वास्तविक चेहरा उस समय उजागर हुआ, जब Corona Warriors पर थूकने, हॉस्पिटल लॉबी में शौच करने, नर्सों के सामने नंगा होना और उन पर अश्लील व्यंग करना एवं मौलाना साद का यह कहना कि कोरोना के नाम पर मस्जिदें बंद करवाई जा रही हैं, उस डॉक्टर से इलाज करवाओ जो अल्लाह को मानता हो आदि आदि कौन से इस्लाम में लिखा है? किस आधार पर हिन्दू मुस्लिम किया जा रहा था? इन प्रश्नों का उत्तर समस्त मुस्लिम समाज को जमात वालों से पूछना चाहिए।
विदेशों से आए पर्यटक वीज़ा पर आए जमातियों पर होती कार्यवाही पर मुस्लिम समाज में जहर घोला गया कि मजहब के नाम पर मोदी सरकार वीज़ा नहीं देती है। आखिर क्यों मुस्लिम समाज के दिमाग में इस तरह का जहर घोलकर हिन्दू-मुसलमान विनाशक हरकतें की गयीं? जमात वालों ने समझा मोदी और मोदी सरकार के विरुद्ध मुसलमानों को भड़काकर देश में अराजकता फैलाओ, पहले CAA को लेकर मुसलमानों को कितना बदनाम किया। नागरिकता संशोधक कानून विरोध करने शांति के नाम पर हुए प्रदर्शनों में पत्थरबाज़ी और पेट्रोल बम का इस्तेमाल किया गया, धरनों में हिन्दू और मोदी-योगी-अमित के विरुद्ध नारेबाजी से देश को साम्प्रदायिकता की आग में झोंकने का असफल प्रयास किया गया। लेकिन जब हिन्दुओं की तरफ से पलटवार होने पर दंगे का सारा दोष कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के सर मंढने का असफल प्रयास किया गया। फिर दिल्ली के पूर्वी-उत्तरी दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगे किसने करवाए, आखिर कब तक बेकसूर मुसलमानों को बलि का बकरा बनाया जाता रहेगा? क्या उनका खून खून नहीं? क्या उनका कोई परिवार नहीं?        
कोरोना को लेकर सचेत थी सरकार
देश के पूर्वी राज्य हो या फिर सुदूर दक्षिण राज्य 90 से 100 प्रतिशत कोरोना संक्रमण पहुंचाने के लिए तबलीगी जमात जिम्मेदार है। अगर तबलीगी जमात अपनी करतूत न दिखाई होती तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शिता के कारण भारत में दूसरी बार लॉकडाउन बढ़ाने तक की नौबत नहीं आई होती। कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए पीएम मोदी इतने चौकस थे कि दुनिया से दो कदम आगे ही सोच रहे थे और उस अनुरूप कदम भी उठा रहे थे। जब देश में कोरोना का कोई केस सामने नहीं आया था तभी से कोरोना संक्रमित देशों से आने वाले यात्रियों की भारत में स्क्रीनिंग शुरू हो गई थी।
तबलीगी की करतूत ने बढ़ाया मामला
इसी बीच दिल्ली स्थित निजामुद्दीन मरकज में दुनिया भर से जमा हुए तबलीगी जमात ने कोरोना का खेल कर दिया। उस घटना के बाद अभी तक के घटनाक्रम से तो यह स्पष्ट हो गया है कि जमातियों ने साजिश के तहत देश में कोरोना को फैलाया है। अब तो आंकड़े भी स्पष्ट संकेत देने लगे हैं कि तबलीगी जमात के लोगों ने जानबूझ कर इसे पूरे देश में फैलाया है।
कोरोना बढ़ाने में तबलीगियों का योगदान
अरुणाचल प्रदेश हो या अंडमान निकोबार, दिल्ली हो या तमिलनाडु या फिर आंध्र प्रदेश हो या उत्तर प्रदेश, इन सभी जगहों में 60 प्रतिशत से लेकर सौ प्रतिशत तक कोरोना संक्रमण बढ़ाने में तबलीगी का हाथ रहा है। तमिलनाडु में अभी कोरोना संक्रमितों की संख्या 1072 है, जिमसे 91 प्रतिशत लोगों में कोरोना फैलाने के तबलीगी जमात कसूरवार है। दिल्ली के 1551 एक्टिव मामले में करीब 69 प्रतिशत लोगों में तबलीगियों की करतूत के कारण कोरोना संक्रमण फैला है। 
जानिए कैसे तबलीगियों ने राज्यवार फैलाया संक्रमण
राज्यवार आंकड़ों पर नजर डाले तो देश की राजधानी दिल्ली में कोरोना से संक्रमित तबलीगी जमातियों की संख्या सबसे ज्यादा है। अमर उजाला की खबर के अनुसार दिल्ली में सोमवार को ही एक दिन में 356 नए मरीज कोरोना वायरस से संक्रमित मिले हैं और इनमें से 325 तब्लीगी जमात के हैं। इन सभी जमामियों को मरकज से निकालने के बाद क्वारंटीन केंद्रों में रखा गया था। दिल्ली स्वास्थ्य विभाग ने हेल्थ बुलेटिन के मुताबिक राजधानी में अब कुल संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर 1510 हो चुकी है। इनमें 1071 संक्रमित मरीज तब्लीगी जमात से जुड़े हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उत्तर प्रदेश में सोमवार को सर्वाधिक 151 कोरोना पॉजिटिव मिले हैं, इनमें से 84 तबलीगी जमात के हैं। वैसे यूपी में कुल कोरोना पीड़ितों की संख्या 651 और इनमें आधे से अधिक यानि 393 तबलीगी जमात के हैं। एक अन्य खबर के अनुसार इसी प्रकार तमिलनाडु में कुल कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या 1173 हैं, इनमें 90 प्रतिशत से भी अधिक तबलीगी जमात से जुड़े हैं। महाराष्ट्र में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या करीब 2334 है और इनमें आधे से अधिक लोग तबलीगी जमात जुड़े हुए हैं। तेलंगाना मरीजों की संख्या 573 के पार हो चुकी है और यहां भी लगभग आधे तबलीगी जमात से जुड़े लोग हैं। मध्यप्रदेश में कोरोना पीड़ितों का आंकड़ा 600 के पार पहुंच गया है, यहां भी 250 से अधिक मरीज तबलीगी जमात के हैं। जम्मू कश्मी में भी अधिकतर मरीज तबलीगी जमात से हैं।
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-19 वायरस से हुई मौत के आँकड़ों को छिपाने को लेकर हो रही आलोचनाओं के बीच चीन ने वुहान प्रान्त में हुई मौत के नए आँकड़े ज....

तब्लीग़ियों पर सरकार सख्त : डॉक्टर अपने बॉडी वियर कैमरे में कैद करेंगे बेशर्म तबलीगी जमातियों की करतूत

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
दिल्ली ने निजामुद्दीन स्थित मरकज के निकाले गए तबलीगी जमातियों ने अपने बेशर्म और जाहिलाना बर्ताव से चिकित्सकों को मुश्किल में डाल दिया है। मरकज से निकाले गए इन तबलीगी जमातियों को दिल्ली के अलग-अलग क्वारंटीन सेंटर्स और अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, लेकिन ये लोग इन जगहों पर डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ का सहयोग करने के बजाए अपनी ऊलजलूल हरकतों से परेशानी खड़ी कर रहे हैं। लेकिन अब सरकार ने इनके इलाज में जुटे डॉक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ को बॉडी वियर कैमरा उपलब्ध कराया है। यानि अब इलाज के दौरान अगर ये तबलीगी जमाती कोई भी गलत हरकत करेंगे तो उनकी ये करतूत कैमरे में कैद हो जाएगी। पुलिस-प्रशासन के अनुसार इन वीडियो के जरिए बाद में इन पर केस दर्ज किया जाएगा और यह सबूत कोर्ट में इन्हें सजा दिलाने में काम आएगा। इतना ही नहीं जिन जगहों पर कोरोना से पीड़ित इन तबलीगी जमातियों को रखा गया है, वहीं बड़ी संख्या में पुलिस और पैरा मिलिट्री फोर्स के जवानों को भी तैनात किया गया है।
कानपुर के हॉस्पिटल में जमाती इकट्ठे होकर पढ़ रहे नमाज
दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित तबलीगी जमात के मरकज से निकले कोरोना संदिग्ध पूरे देश के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। दिल्ली और यूपी के कई अस्पतालों के डॉक्टरों ने शिकायत की है कि जमात के लोग जाँच और इलाज कराने में मनमानी कर रहे हैं। कानपुर में जमातियों से परेशान डॉक्टरों ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को पूरे मामले की रिपोर्ट भेजी। इसमें कहा गया कि ये लोग सोशल डिस्टेंसिंग का मजाक उड़ा रहे हैं। अब टाइम्स नाउ का एक वीडियो सामने आया है, जो इस बात की पुष्टि करता है।

टाइम्स नाउ के मुताबिक जमात के लोग सोशल डिस्टेंसिंग को ताक पर रखकर एक साथ जमा होते हैं और फिर समूह में नमाज अदा करते हैं। इससे पहले कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज की प्राचार्या आरती लाल चंद्दानी ने जमातियों की शिकायत करते हुए कहा था, “निजामुद्दीन के मरकज में हुए आयोजनों में शामिल 22 लोग हमारे यहाँ आए थे। डॉक्टरों की टीम के साथ वार्ड ब्वाय, नर्स, टेक्निशियन सभी पूरे सुरक्षा किट के साथ मरीजों की सेवा कर रहे थे। लेकिन जमात के लोग डॉक्टरों से बदसलूकी कर रहे हैं। इतना ही नहीं उनके साथ बात-बात पर बहस कर माहौल खराब करने का काम कर रहे है। इसके साथ ही क्वारंटाइन वार्ड में थूक-थूक कर गंदगी फैला रहे हैं।”
उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए लॉकडाउन एक मजबूत कदम के रूप में सामने आया था। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग एकमात्र उपाय है। पिछले दिनों रिपोर्ट भी आईं थीं कि भारत जैसे देश में कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ने का औसत गंभीर रूप से प्रभावित और विकसित देशों से काफी कम है। 
ऐसे में ये 21 दिनों का लॉकडाउन देश को सुरक्षित रास्ते पर ले जा रहा था। लेकिन तबलीगी जमात के आयोजनों ने एक बड़ी समस्या खड़ी कर दी है। मरकज में विदेशियों सहित दो हजार से ज्यादा लोग इकट्ठा थे। इनमें से सैकड़ों संक्रमित पाए गए हैं।
निर्लज और जाहिल तबलीगी जमातियों की हरकत से मेडिकल स्टाफ परेशान
कोरोना के संक्रमण से बचने के लिए लॉकडाउन घोषित किया गया है और पूरा देश घरों में कैद है। ऐसे में देश का मेडिकल स्टाफ अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों की जान बचाने में लगा है। लेकिन देश का एक तबका ऐसा भी है, जो अपनी करतूतों से पूरे देश को शर्मसार कर रहा है। दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज से निकाले गए तबलीगी जामातियों को गाजियाबाद के एमएमजी अस्पताल में भर्ती किया गया है। जहां जमाती लगातार अस्पताल स्टाफ के साथ दुर्व्यवहार कर रहे हैं। इतना ही नहीं, ये लोग नर्सों के सामने ही कपड़े बदलने के लिए कपड़े खोल देते हैं। अब जिला प्रशासन इन लोगों को जेल की बैरक में बंद करने पर विचार कर रहा है।

एक जमाती ने की खुदकुशी की कोशिश
दिल्ली में स्वास्थ्यकर्मियों के ऊपर थूकने और आइसोलेशन सेंटर में जानबूझकर हंगामा खड़ा करने का मामला सामने आ चुका है। निजामुद्दीन स्थित मरकज से मंगलवार शाम को निकाल कर 167 जमातियों को तुगलकाबाद स्थित क्वारंटीन सेंटर में रखा गया है। रेलवे के प्रवक्ता दीपक कुमार ने कहा कि जमाती स्वास्थ्य कर्मियों से दुर्व्यवहार कर रहे हैं और वह यहां-वहां घूमते रहते हैं। एक व्यक्ति ने तो खुदकुशी की भी कोशिश की। वहीं, बिहार में तबलीगी जमात के लोगों की तलाश करने गई टीम पर हमला भी किया गया।

सीएमओ ने जिलाधिकारी से की शिकायत
गाजियाबाद के सीएमओ ने जिले के डीएम से क्वॉरंटाइन सेंटर में रह रहे तबलीगी जमात के लोगों की शिकायत की। सीएमओ ने कहा कि एमएमजी हॉस्पिटल में बनाए गए क्वारंटाइन सेंटर में तबलीगी जमात के लोग बिना पेंट के नंगे घूम रहे हैं और वॉर्ड में गंदे व अश्लील गाने सुन रहे हैं। स्टाफ नर्सों और कर्मचारियों से बीड़ी, सिगरेट की मांग कर रहे हैं। यही नहीं महिला कर्मियों से अश्लील इशारे कर रहे हैं।

कोरोना फैलाने के लिए सड़क पर थूक रहे थे जमाती
शुरुआत से ही तबलीगी जमात के कोरोना संदिग्ध स्वास्थ्यकर्मियों का सहयोग करने की बजाय उनसे बदसलूकी कर रहे हैं। जब जमातियों को निजामुद्दीन के मरकज से निकाल कर डीटीसी की बसों में भरकर अस्पताल ले जाया जा रहा था, तब बस के अंदर से जमातियों ने सड़कों पर थूकना शुरू कर दिया। यह सब जानते हुए कि कोरोना वायरस थूकने, छींकने और खांसने से तेजी से फैलता है।

कुमार विश्वास ने सीएम योगी से की कार्रवाई की अपील
तबलीगी जमात द्वारा अभद्र व्यवहार करने पर हिंदी कवि और नेता कुमार विश्वास ने ट्वीट कर योगी सरकार से गुहार लगाई है। कुमार विश्वास ट्वीट करते हुए लिखा, ‘का चुप साधि रहे बलवाना।’ इससे पहले कुमार विश्वास ने इंदौर की घटना पर प्रधानमंत्री मोदी से देश में इमरजेंसी लगाने की मांग की थी।




सीएम योगी ने दिया सख्ती बरतने का निर्देश
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अस्पताल में तबलीगी जमात के मरीजों द्वारा बदसलूकी करने पर नाराजगी जतायी है। सीएम ने कहा कि गाजियाबाद में जिन लोगों ने ये हरकत की है, उस प्रवृति के लोगों के साथ पूरी सख्ती करो और उन्हें कानून का पालन करना सिखाओ। सीएम योगी ने कहा कि इंदौर जैसी घटना यूपी में कहीं नहीं दिखनी चाहिए। इसके लिए कानूनन जो भी कड़ी कार्रवाई करनी पड़े, की जाए।

छह के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर
जानकारी के मुताबिक, गाजियाबाद जिला प्रशासन इन लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है और इन्हें जेल के बैरक में ही बंद करने पर विचार चल रहा है। अस्पताल में स्टाफ के साथ अश्लील हरकतें करने, हंगामा करने और नियमों का उल्लंघन करने के मामले में 6 जमातियों के खिलाफ कोतवाली घंटाघर थाने में एफआईआर दर्ज कर ली गई है।

अब जमातियों के साथ केवल पुरुष कर्मचारी रहेंगे मौजूद
गाजियाबाद में नर्सों के साथ अभद्रता के बाद बड़ा फैसला लिया गया है। अब तबलीगी जमात के लोगों की चिकित्सा एवं सुरक्षा में महिला स्वास्थ्यकर्मी और महिला पुलिसकर्मी नहीं लगाई जाएंगी। केवल पुरूष कर्मचारी ही मौजूद रहेंगे।

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार पर अक्सर तानाशाही के आरोप लगते रहते हैं। लेकिन अबक.....
डीएम ने दिए जांच के आदेश
इस मामले में डीएम ने जांच के आदेश दिए। शिकायत मिलने के बाद गुरुवार देर रात पुलिस भी एमएमजी हॉस्पिटल पहुंची। एसपी सिटी ने कहा कि शिकायत मिली है कि एमएमजी हॉस्पिटल के आइसोलेशन वॉर्ड में भर्ती कोरोना वायरस से संक्रमित छह मरीजों ने नर्सों के साथ अभद्र व्यवहार किया है।

मजहबी मुस्लिम मर्द न छेड़छाड़ कर सकते हैं, न ही बलात्कार : सदानंद धुमे

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
तबलीगी जमात की लापरवाही ने भारत की बड़ी आबादी को कोरोना वायरस से बचाने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देश के स्वास्थ्यकर्मियों की कोशिशों पर काफी हद तक पानी फेर दिया है। देशव्यापी लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग के जरिए कोरोना वायरस संक्रमण पर काफी हद तक लगाम लगाने की उम्मीद थी, मगर अब आलम यह है कि तबलीगी जमात से जुड़े कोरोना वायरस मामले में लगातार वृद्धि देखने को मिल रही है।
अब ये जाहिल जमाती इलाज के दौरान महिला मेडिकल स्टाफ के साथ बदतमीजियाँ कर रहे हैं और डॉक्टरों के ऊपर थूक कर उन्हें संक्रमित करने की बेहूदी कोशिश कर रहे हैं। एक तरफ जहाँ पूरा देश इन तबलीगी जमात द्वारा फैलाए गए संकट से लड़ने में जुटा है, वहीं दूसरी तरफ इतना बड़ा क्राइम करने के बाद भी ये लोग अपनी बेहूदगी से बाज नहीं आ रहे। गाजियाबाद और कानपुर समेत कई जगहों से इनके द्वारा महिला स्टाफ के साथ बदतमीजियाँ की खबरें सामने आई। गाजियाबाद के एमएमजी हॉस्पिटल के आइसोलेशन वार्ड में रखे गए तबलीगी जमाती बिना कपड़ों, पैंट के नंगे घूम रहे थे, अश्लील वीडियो चलाने के साथ ही ये जमाती नर्सों को गंदे-गंदे इशारे कर रहे थे और नर्सों से बीड़ी-सिगरेट की माँग भी कर रहे थे।
आरफा खानम शेरवानी
आरफा का मानना है कि नर्सें झूठ बोल रही हैं 
वायर की आरफा खानम का दिल है कि मानता नहीं
जैसे ही यह खबर सामने आई, इस्लामी कट्टरपंथियों की वकालत करने वाला समूह सक्रिय हो गया। इनको हमेशा माफ कर देने वाले समूह ने इनके समर्थन में उतरकर उनके बचाव की भरपूर कोशिश की। इन्हीं में से एक थे- वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) के स्तंभकार सदानंद धुमे। उन्होंने ये साबित करने का भरसक प्रयास किया कि देश को कोरोना संकट में डालने वाले तबलीगी जमात के सदस्य निर्दोष हैं।
प्रोपेगेंडा वेबसाइट द वायर की वरिष्ठ संपादक आरफा खानम शेरवानी को तबलीगी जमात के सदस्यों की नंगई पर यकीन नहीं हो रहा। उन्हें लगता है कि गाजियाबाद से एमएमजी हॉस्पिटल में नर्सों के सामने जमात के सदस्यों के पतलून उतारने की खबरें झूठी हैं। आरोप लगाने वाली नर्सें प्रोपेगेंडा में शामिल हैं। यह दूसरी बात है कि एडीएम और एसपी के ज्वाइंट इन्वेस्टीगेशन में नर्सों के आरोप सही पाए गए हैं और इस तरह की हरकत करने वाले जमात के 5 सदस्यों पर मुकदमा भी दर्ज किया गया है।
लेकिन, आरफा ने यह मानने से इनकार कर दिया है कि तबलीगी जमात वाले महिलाओं के साथ बदसलूकी या उनका शोषण कर सकते हैं। उसने ट्वीट कर रहा है, “वे नि:स्वार्थ भाव से सेवा करने वाले लोग हैं, जो मजहब/समाज की सेवा के लिए दुनियादारी यहॉं तक कि अपने परिवार से भी दूर रहते हैं।” आगे आरफा ने जोर देकर कहा है कि प्रोपेगेंडा अब बंद होना चाहिए।
आरफा ने चिर-परिचित विक्टिम कार्ड से भी तबलीगी जमात के करतूतों पर पर्दा डालने की कोशिश की है। उसके मुताबिक तबलीगी जमात को जिस तरह मीडिया निशाना बना रहा है वह सही नहीं है। इसके बहाने पूरे मुस्लिम समुदाय को नीचा दिखाया जा रहा है। उसने कहा, “खुदा न करे लेकिन जमात के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की वजह से यदि मुसलमानों पर हमला होता है तो मीडिया का प्रोपेगेंडा और अधिकारियों की चुप्पी इसके लिए जिम्मेदार होगी।”
आरफा जिन लोगों का बचाव कर रही हैं उनकी करतूतें केवल एक अस्पताल तक ही सीमित नहीं है। यूपी के अलग-अलग जिलों से जमातियों द्वारा हॉस्पिटल में बदतमीजी किए जाने की ख़बरें आ रही हैं। बिजनौर में 8 इंडोनेशियाई जमातियों ने अंडा-करी और बिरयानी की माँग की थी। साथ ही उन्होंने सफाई कर्मचारियों के साथ भी अभद्रता की थी। बस्ती और आगरा में भी बिरयानी माँग कर हॉस्पिटल कर्मचारियों को परेशान किया। मुरादाबाद में जमातियों ने दाल-रोटी खाने से इनकार कर दिया। दिल्ली के एलएनजेपी हॉस्पिटल और हैदराबाद के गॉंधी हॉस्पिटल में इनके उपद्रव के बाद पुलिस की तैनाती करनी पड़ी। इनलोगों ने सड़कों पर, अस्पतालों में, डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों पर थूक कर संक्रमण तक फैलाने की कोशिश की है। देश में जो नए मामले सामने आए हैं उनमें आधे से अधिक तबलीगी जमात के निजामुद्दीन स्थित मरकज से जुड़े हैं।



ऐसे में आरफा की प्रतिक्रिया से साफ है कि उम्माह के आगे उनके लिए कुछ भी मायने नहीं रखता। महिलाओं का सम्मान भी नहीं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि नारी अधिकारों की कथित पैरोकार वामपंथी और मीडिया गिरोह के दूसरे सदस्य महिलाओं के इस उत्पीड़न और तबलीगी जमात की करतूतों का किस तरह बचाव करते हैं।
सदानंद धुमे
सदानंद धुमे 
मजहबी मुस्लिम मर्द न छेड़छाड़ कर सकते हैं, न ही बलात्कार : सदानंद धुमे
सदानंद धुमे ने द वायर की पत्रकार आरफा खानम शेरवानी, जिन्होंने भी तबलीगी जमात के सदस्यों का बचाव किया और नर्सों पर झूठ बोलने का आरोप लगाया, के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वो तबलीगी जमात के विचारों के प्रशंसक नहीं है, लेकिन जिस किसी ने भी उनके साथ समय बिताया है, उनको पता है कि उनका रुढ़िवाद महिलाओं के लिए कितना उपयुक्त और पवित्र है। सदानंद धुमे यहीं पर नहीं रुके। उन्होंने आगे यह भी आरोप लगाया कि तबलीगी जमात के सदस्यों के अभद्रता की बातें झूठी हैं और सामान्य तौर पर मुसलमानों को बरगलाने की यह कोशिशें नीचता से परे है।
धुमे अपने ट्वीट के माध्यम से यह कहना चाह रहे थे कि सबसे पहली बात तो ये कि मजहबी मुस्लिम मर्द न तो छेड़छाड़ कर सकते हैं और न ही बलात्कारी हो सकते हैं और दूसरी बात उन्होंने कही कि जिन नर्सों ने तबलीगी जमात के सदस्यों के खिलाफ दुर्व्यवहार की शिकायत की थी, वे झूठ बोल रही थीं क्योंकि वो मुसलमानों की छवि को धूमिल करना चाहती थीं। धुमे ने मुसलमानों को धार्मिक पुरुष साबित करने की कोशिश और उनके बचाव में नर्सों द्वारा लिखित शिकायत को नकार दिया।
इन जाहिलों और अशिष्ट व्यक्तियों के बचाव में उतरने पर कई लोगों ने उन्हें आड़े हाथों लिया। लोगों ने ना सिर्फ उनसे कट्टरपंथी इस्लाम के लिए माफी माँगने के लिए कहा, बल्कि उन्हें महिला के खिलाफ हो रहे अपराध के लिए भी जिम्मेदार ठहराया।
दरअसल 2011 का एक मामला ही साबित करता है कि वास्तव में धूमे का ज्ञान कितना छिछला, तुच्छ और अधूरा है। 2011 में टोरंटो में एक इमाम पर यौन उत्पीड़न के लिए 13 मामलों के तहत आरोप लगाया गया था। 48 वर्षीय मोहम्मद मसरूर ने एक इमाम के रूप में काम किया और कई देशों का दौरा किया था, जिसमें बच्चों और युवाओं को कुरान की शिक्षा दी थी। पुलिस ने अपनी जाँच में मसरूर के पास से उसके खुद के पासपोर्ट के अलावा तीन अन्य नाम का पासपोर्ट पाया था। मसरूर के खिलाफ पाँच पूर्व छात्राओं ने खिलाफ दुर्व्यवहार के 13 आरोप लगाए गए थे। जानकारी के मुताबिक इमाम तबलीगी जमात का सदस्य था, जिसका उद्देश्य इस्लामिक आंदोलन को जमीनी स्तर पर चलाना था। यह आंदोलन काफी हद तक बांग्लादेश में सक्रिय है।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार केंद्र की सत्ता पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के काबिज होने पर वर्षों से सत्ता की मल.....
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साभार एक तरफ जहाँ पूरा देश कोरोना वायरस संकट...
सदानंद धुमे ने अपने ट्वीट में कहा कि चूँकि उन्होंने तबलीगी जमात के कुछ लोगों से मुलाकात की है और उनके अनुसार वो लोग ‘पवित्र’ थे, तो इसका मतलब ये है कि तबलीगी जमात का कोई भी सदस्य महिलाओं के साथ छेड़छाड़ नहीं कर सकता है। इसलिए महिलाएँ झूठ बोल रही हैं।