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रिचर्ड निक्सन ने इंदिरा गाँधी को "बुढ्ढी कुतिया" क्यों कहा था?

जब अमेरिका के राष्ट्रपति ने इंदिरा गांधी को बुड्ढी कुतिया कहा Indira Gandhi  and Nixon By India IQ - YouTubeलैटिन भाषा में एक कहावत है- वर्बा वोलांट, स्क्रिप्टा मानेंट. माने- कहे हुए शब्द ख़त्म हो जाते हैं, मगर लिखे हुए शब्द हमेशा के लिए रह जाते है। ये कहावत करीब दो हज़ार साल पुरानी है। तब आवाज़ रेकॉर्ड करने की टेक्नॉलजी नहीं थी। इसीलिए इंसान के मरने के बाद भी उसकी रिकॉर्डिंग ज़िंदा रह जाती है। आज आपको ऐसी ही कुछ रिकॉर्डिंग्स के बारे में बताएंगे जब एक अमेरिकी राष्ट्रपति के दिमाग और ज़ुबान से भारत के लिए निकली गंदगी।
इस अमेरिकी राष्ट्रपति को पाकिस्तान की तानाशाही हुकूमत से हमदर्दी थी।पाकिस्तान के हाथों हो रहा भीषण नरसंहार उसके लिए कोई मुद्दा नहीं था। उसके लिए मुद्दा था भारतीय महिलाओं का रूप-रंग। उसे भारतीय महिलाएं दुनिया में सबसे ज़्यादा कुरूप लगती थीं। वो कहता था कि भारतीय महिलाओं को देखकर वो ‘टर्न ऑफ’ हो जाता है। हैरान होता है कि भारतीय महिलाएं बच्चे कैसे पैदा कर लेती हैं। उसका कहना था कि अफ्रीका के लोगों में फिर भी जानवरों वाला चार्म होता है। मगर हिंदुस्तानी, वो तो बिल्कुल बेकार और बर्बाद होते हैं।

The Sunday Tribune - Spectrum
ये वही नस्लीय सोच वाला अमेरिकी राष्ट्रपति है, जिसने हमारी प्रधानमंत्री को ‘चुड़ैल’ कहा था। इस पूर्व राष्ट्रपति की भारत से जुड़ी अपमानजनक टिप्पणियां पहले भी कई बार उजागर हो चुकी हैं। जिन पर अमेरिका को काफी शर्मिंदा होना पड़ा था। अब एक बार फिर अमेरिका को अपने इस पूर्व राष्ट्रपति की भारत पर की गई नस्लीय टिप्पणियों से शर्मसार होना पड़ रहा है। 
ये किस राष्ट्रपति की बात कर रहे हैं हम?
बात 49 साल पुरानी है। तारीख़ - 25 मार्च, 1971।स्थान यूनिवर्सिटी ऑफ ढाका, जहां दो हॉस्टल हैं- इक़बाल हॉल और जगन्नाथ हॉल। इकबाल हॉल में मुस्लिम छात्र रहते थे। जगन्नाथ हॉल में हिन्दू छात्र। रात के साढ़े 11 बजे चार M-47 टैंक इन दोनों हॉस्टल्स के सामने रुके। पाकिस्तानी फ़ौज की एक टुकड़ी ये टैंक लेकर वहां पहुंची थी। बिना किसी चेतावनी के इन चारों टैंकों ने छात्रावासों पर बम दागने शुरू किए। करीब पांच मिनट बाद पाकिस्तानी सैनिक हॉस्टल में घुसे और अंधाधुंध गोलियां चलाईं और ज़िंदा बचे छात्रों को हॉस्टल के बाहर दीवार की सीध में खड़ा करके तोप से भून दिया गया। 15-20 मिनट के भीतर करीब 200 छात्रों की हत्या कर दी गई।
ये रात पूर्वी पाकिस्तान, वर्तमान बांग्लादेश, के इतिहास में काली रात कहलाती है। इसी रात के बाद पाकिस्तान के पूर्वी और पश्चिमी हिस्से के बीच गृह युद्ध शुरू हुआ। नौ महीने तक चले इस सिविल वॉर का अंत किया भारत ने। दिसंबर 1971 में भारत को इस युद्ध में शामिल होना पड़ा। हमने पाकिस्तानी सेना को हराया और इसके बाद जाकर गठन हुआ बांग्लादेश का।
President Yahya Khan interview on east Pakistan - YouTube
याहिया खान 
पूर्वी पाकिस्तान नरसंहार का दोषी कौन?
बांग्लादेश के गठन की कहानी एक भीषण नरसंहार पर लिखी गई है। इस नरसंहार में पूर्वी पाकिस्तान नरसंहार, जिसमें करीब पांच लाख लोग मारे गए। कई अनुमान मृतकों की संख्या 30 लाख तक बताते हैं। मगर इस जेनोसाइड के लिए अकेले पाकिस्तान दोषी नहीं था। इसमें पाकिस्तान के हाथ मज़बूत करने वाले, उसे नरसंहार के औज़ार देने वाले, उसके लिए इंटरनैशनल सपोर्ट जुटाने वाले उसके दो सबसे बड़े मददगार थे- निक्सन और किसिंगर।
अमेरिका के 37वें राष्ट्रपति थे रिचर्ड निक्सन। 1969 से 1974 तक वह इस पद पर रहे। निक्सन के विदेश मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार थे हेनरी किसिंगर। इन दोनों के कार्यकाल का सबसे बड़ा धब्बा है 1971 का पूर्वी पाकिस्तान नरसंहार। इन दोनों को भारत से नफ़रत थी। वो भारत और सोवियत की नज़दीकी से बिफ़रे हुए थे। उन्हें ये बर्दाश्त नहीं था कि भारत सरकार अमेरिका के खिलाफ़ जाकर पूर्वी पाकिस्तान द्वारा किए जा रहे नरसंहार पर स्टैंड ले। अपनी इस नफ़रत के कारण वो न केवल पाकिस्तान के तानाशाह याह्या ख़ान की मदद करते रहे, बल्कि पाकिस्तानी सेना जब आज के बांग्लादेश में नरसंहार कर रही थी, तब ये ही दोनों उस जेनोसाइड की कामयाबी पर खुश भी थे।
Scavengers, Sexless, Suck Up Experts, Pathetic': NYT contributor scoops  deeply misogynistic Kissinger-Nixon remarks on Indians • Canindia News
निक्सन और किसिंगर की पूर्वी पाकिस्तान पॉलिसी क्यूरिस केस है
दरअसल, निक्सन प्रशासन का एक बड़ा हिस्सा अपनी सरकार की पूर्वी पाकिस्तान पॉलिसी से असहमत था। उन दिनों भारत में अमेरिका के राजदूत थे किनिथ कीटिंग। वो निक्सन और किसिंगर से बार-बार कह रहे थे कि पाकिस्तान अपने पूर्वी हिस्से में नरसंहार कर रहा है। इसीलिए अमेरिका को उसकी मदद रोक देनी चाहिए। पता है, कीटिंग के इस स्टैंड पर निक्सन ने उनके पीठ पीछे किसिंगर से क्या कहा था? निक्सन ने कहा था-
70 साल के कीटिंग को बस में कर सके, क्या ये कला हिन्दुस्तानियों के पास है?
इसके जवाब में किसिंगर ने कहा था-
मिस्टर प्रेज़िडेंट, हिन्दुस्तान के लोग चापलूसी में महारथी होते हैं। चाटुकारिता में उनका कोई जोड़ नहीं। ऐसे ही ख़ुशामद कर-करके तो वो 600 सालों से सर्वाइव कर रहे हैं। बड़े ओहदों पर बैठे लोगों की चापलूसी में बहुत पारंगत होते हैं भारतीय।
निक्सन और किसिंगर ने इतने बरस पहले वाइट हाउस में क्या बातचीत की?
अमेरिका में डिक्लासिफ़िकेशन की एक रवायत है। यहां एक तय समय के बाद पुरानी सरकारों से जुड़े कई दस्तावेज़ सार्वजनिक किए जाते हैं। कई बार सूचना के अधिकार के तहत आए आवेदनों पर भी पुराने रेकॉर्ड्स सार्वजनिक होते हैं। इसी प्रक्रिया के तहत निक्सन अडमिनिस्ट्रेशन से जुड़े कई रेकॉर्ड्स भी पब्लिक हुए। इनमें दस्तावेज़ भी हैं और ऑडियो रिकॉर्डिंग्स भी। ये ही रिकॉर्डिंग्स हमें निक्सन और किसिंगर द्वारा भारत को लेकर कही गई अपमानजनक टिप्पणियों का ब्योरा देती हैं।
निक्सन से जुड़े रेकॉर्ड कई चरणों में सार्वजनिक हो रहे हैं। मई 2020 में भी इन दस्तावेज़ों की एक खेप आई।वाइट हाउस ने अपनी वेबसाइट पर निक्सन की कई रिकॉर्डिंग्स को पब्लिक किया। मगर काफी दिनों तक इस पर किसी की नज़र नहीं गई। फिर 3 सितंबर को गैरी बेस ने न्यू यॉर्क टाइम्स में इस पर एक लेख लिखा। गैरी बेस इंटरनैशनल अफेयर्स में प्रोफेसर हैं। निक्सन, किसिंगर और 1971 के युद्ध पर उन्होंने काफी काम किया है। इस विषय पर 2013 में ‘दी ब्लड टेलिग्राम’ नाम की उनकी क़िताब भी आई थी।
निक्सन की कुछ ओछी टिप्पणियां
NYT में छपे गैरी बेस के लेख के बाद से ही निक्सन की इन नई रिकॉर्डिंग्स पर ख़बरें होने लगीं। इनमें भारत और भारतीय महिलाओं पर की उनकी कई ओछी टिप्पणियां भी शामिल हैं। ये टिप्पणियां 1971 में पूर्वी पाकिस्तान के भीतर हो रहे नरसंहार के दौरान की गयीं थीं। देखिए उन ओछी टिप्पणियों को:-
1. हिन्दुस्तानी औरतें दुनिया में सबसे बदसूरत होती हैं। इस बात में कोई शक़ नहीं।
2. ये हिन्दुस्तानी लोग सबसे ज़्यादा सेक्सलेस इंसान हैं। लोग ब्लैक अफ्रीकन्स को लेकर बोलते हैं। मैं कहता हूं कि उनमें तो फिर भी जानवरों वाला थोड़ा सा चार्म होता है, मगर ईश्वर, वो भारतीय, छी। वो तो बिल्कुल बेकार होते हैं।
3. हिन्दुस्तानियों को देखकर मेरा मज़ा किरकिरा हो जाता है। मैं टर्न ऑफ़ हो जाता हूं। हेनरी, बताओ तो ज़रा। इनको देखकर कोई टर्न ऑन कैसे होता होगा?
4. हिन्दुस्तानियों को देखकर घृणा होती है। उन पर सख़्त होना आसान है।
5. मुझे नहीं पता कि हिन्दुस्तानी बच्चे कैसे पैदा करते हैं?
निक्सन के बयान पर पहले भी कई बार हंगामा हो चुका है
इससे पहले साल 2000 और 2005 में भी अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट ने निक्सन से जुड़े कुछ दस्तावेज़ पब्लिक किए थे। इनमें सामने आया कि निक्सन चाहते थे भारत में भुखमरी और अकाल आ जाए। इन डॉक्यूमेंट्स में 5 नवंबर, 1971 को निक्सन और किसिंगर के बीच हुई एक बातचीत पर ख़ूब हंगामा हुआ था। उस समय भारत में कांग्रेस की सरकार थी। पार्टी की मुखिया सोनिया गांधी ने निक्सन और किसिंगर की इंदिरा पर की गई फब्तियों की काफी निंदा की थी। ये मामला इंटरनैशनल मीडिया में भी काफी रिपोर्ट हुआ था। इससे शर्मिंदा हेनरी किसिंगर ने तब इंदिरा पर की गई अपमानजनक टिप्पणियों के लिए माफ़ी भी मांगी थी। किसिंगर ने सफ़ाई देते हुए कहा था कि वो कोल्ड वॉर के दौर की बात है। तब तनाव और गुस्से में ग़लत बातें निकल गईं।
निक्सन और किसिंगर की इंदिरा पर कही जो बात सबसे ज़्यादा रिपोर्ट हुई, वो तब की है जब नवंबर 1971 में इन दोनों ने भारतीय प्रधानमंत्री से मुलाकात की थी। मीटिंग के बाद इंदिरा के बारे में गॉसिप करते हुए निक्सन ने किसिंगर से कहा था-
देखिए इंदिरा गांधी और अमेरिका के राष्ट्रपति के बीच क्या बात हुई थी. -  YouTubeहमने तो उस बूढ़ी चुड़ैल के ऊपर थूक ही दिया।
इसके जवाब में किसिंगर बोले- भारत के लोग वैसे भी बास्टर्ड होते हैं।
निक्सन और इंदिरा की ये मीटिंग क्यों हुई थी?
ये मीटिंग नवंबर 1971 में उस वक़्त हुई थी, जब इंदिरा गांधी अमेरिका के दौरे पर गई थीं। उनका मकसद था अमेरिका को ये बताना कि पूर्वी पाकिस्तान में कितना बड़ा नरसंहार हो रहा है। इस नरसंहार के कारण भारत में भी बड़ा मानवीय संकट पैदा हो गया। भारत के उत्तर पूर्वी इलाकों में पूर्वी पाकिस्तान से भागकर आ रहे शरणार्थियों की बाढ़ आ गई थी। एक करोड़ से ज़्यादा संख्या में आए ये शरणार्थी भारत के लिए मानवीय आपदा थे। भारत बार-बार इस संकट की तरफ दुनिया का ध्यान खींचने की कोशिश कर रहा था। मगर सोवियत के सिवाय किसी ने भारत की अपील नहीं सुनी। ऐसे में इंदिरा गांधी नवंबर 1971 में निक्सन से आमने-सामने की बातचीत के लिए अमेरिका पहुंचीं। इंदिरा ने कहा कि पूर्वी पाकिस्तान में हो रहे घटनाक्रम के कारण भारत में जो संकट पैदा हो हुआ है, उसे देखते हुए अब और चुप बैठना नई दिल्ली के लिए मुमकिन नहीं है।
मगर इंदिरा की अपील पर निक्सन ने कोई गंभीरता नहीं दिखाई
उल्टा पीठ पीछे उन्हें ‘बिच’ और ‘चुड़ैल’ कहा। भारत इसके बाद भी संयम दिखाता रहा। वो तो जब 3 दिसंबर, 1971 को पाकिस्तान ने भारत पर हवाई बमबारी शुरू की, तब भारत आधिकारिक तौर पर इस युद्ध में शामिल हुआ। इस हमले की ख़बर मिलते ही निक्सन ने किसिंगर को फोन मिलाया। इस टेलिफ़ोनिक बातचीत में निक्सन ने कहा-
हमने उस बिच (प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के संदर्भ में) को चेतावनी दी थी। उनसे कहो कि पश्चिमी पाकिस्तान के हमले पर भारत द्वारा शिकायत करना ऐसा ही है, जैसे रूस ये दावा करे कि फिनलैंड ने उस पर हमला कर दिया।
भारत और पाकिस्तान के बीच 3 दिसंबर, 1971 को शुरू हुआ ये युद्ध 14 दिन तक चला। इस दौरान शुरुआती एक हफ़्ते में ही पाकिस्तान की हालत ख़राब होने लगी। किसी भी क़ीमत पर इस्लामाबाद की मदद को आमादा निक्सन और किसिंगर, पाकिस्तान के लिए इंटरनैशनल सपोर्ट जुटाते रहे। दोनों ने चीन से भी भारत पर दबाव बनाने को कहा। मगर सोवियत के प्रेशर में चीन इस मामले से पीछे रहा। बाद के सालों में जारी इस बातचीत के ब्योरे के मुताबिक, निक्सन ने तब किसिंगर से कहा था-
वो बदनाम अमेरिकी राष्ट्रपति, जिसने भारतीय प्रधानमंत्री को गाली दी थी -  Richard Nixon called Indian prime minister Indira Gandhi a bitch in 1971ये हिंदुस्तानी तो कायर होते हैं न?
इसके जवाब में किसिंगर बोले थे-
हां, कायर तो होते हैं। मगर उनकी पीठ पर रूस है। रूस ने ईरान और तुर्की समेत कई देशों को धमकी दी है। कहा है कि अगर वो पाकिस्तान की मदद करते हैं, तो बहुत बुरा होगा। रूसियों ने सारा खेल ख़राब कर दिया है।
क्या सच में सोवियत ने ही पाकिस्तान को जिताने का अमेरिकी खेल बिगाड़ दिया था?
जवाब है, हां। अमेरिका की तमाम कोशिशों के बावजूद पाकिस्तान युद्ध में पिछड़ रहा था। ऐसे में निक्सन प्रशासन ने अमेरिकी नौसेना की 7वीं फ्लीट को बंगाल की खाड़ी के लिए रवाना किया। ये उस समय दुनिया का सबसे बड़ा वॉरशिप था। साथ ही, ब्रिटिश नौसेना ने भी अपने एयरक्राफ्ट ईगल को भारतीय समुद्री सीमा के नज़दीक रवाना कर दिया। ये दोनों फ्लीट्स न्यूक्लियर पावर्ड थे।
ख़ुद को सबसे महान बताने वाले दो देश मिलकर दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश को न्यूक्लियर हमले की धमकी दे रहे थे। वो भी किसके लिए? लाखों लोगों की जान लेने वाले पाकिस्तान को जिताने के लिए।अमेरिका और ब्रिटेन की प्लानिंग भारत पर दोतरफ़ा हमला करने की थी। ऐसे में भारत की मदद के लिए फिर आगे आया सोवियत। उसने अपनी एक न्यूक्लियर नौसैनिक फ्लीट भारत की मदद के लिए रवाना की। सोवियत ने साफ कर दिया कि अगर ये दोनों भारत पर हमला करेंगे, तो सोवियत उसका जवाब देगा।
भारत का फाइनेस्ट मिलिटरी मोमेंट
सोवियत से मिली इस मदद के कारण 16 दिसंबर, 1971 को भारत ने पाकिस्तान को हरा दिया। इतिहास इस जीत को भारत का फाइनेस्ट मिलिटरी मोमेंट मानता है। यही इतिहास निक्सन और किसिंगर की पूर्वी पाकिस्तान पॉलिसी को अमेरिका का नैतिक और सामरिक पतन भी मानता है। इतिहासकार कहते हैं कि निक्सन और किसिंगर ने अपनी कुंठा को अपनी विदेश नीति पर हावी होने दिया। भारत के प्रति अपनी नस्लीय नफ़रत के कारण उन्होंने एक नरसंहार को समर्थन दिया। ये चैप्टर न केवल निक्सन प्रशासन, बल्कि अमेरिकी इतिहास के सबसे शर्मनाक एपिसोड्स में गिनी जाती है।
निक्सन से जुड़े कई दस्तावेज़, कई रिकॉर्डिंग्स अभी पब्लिक होनी बाकी है। कई पब्लिक हुई रिकॉर्डिंग्स ऐसी हैं, जहां कई हिस्सों को बीप करके जारी किया गया है। अमेरिका के कई लोग इन रिकॉर्डिंग्स को समूचा जारी करने की मांग कर रहे हैं। इसके लिए वो सूचना के अधिकार जैसे संवैधानिक राइट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं।कितनी अद्भुत बात है कि हम अमेरिकी सिस्टम की ही बदौलत उनकी सरकार के सबसे घृणित कारनामों के बारे में जान पाए हैं।

मजहबी मुस्लिम मर्द न छेड़छाड़ कर सकते हैं, न ही बलात्कार : सदानंद धुमे

आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
तबलीगी जमात की लापरवाही ने भारत की बड़ी आबादी को कोरोना वायरस से बचाने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देश के स्वास्थ्यकर्मियों की कोशिशों पर काफी हद तक पानी फेर दिया है। देशव्यापी लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग के जरिए कोरोना वायरस संक्रमण पर काफी हद तक लगाम लगाने की उम्मीद थी, मगर अब आलम यह है कि तबलीगी जमात से जुड़े कोरोना वायरस मामले में लगातार वृद्धि देखने को मिल रही है।
अब ये जाहिल जमाती इलाज के दौरान महिला मेडिकल स्टाफ के साथ बदतमीजियाँ कर रहे हैं और डॉक्टरों के ऊपर थूक कर उन्हें संक्रमित करने की बेहूदी कोशिश कर रहे हैं। एक तरफ जहाँ पूरा देश इन तबलीगी जमात द्वारा फैलाए गए संकट से लड़ने में जुटा है, वहीं दूसरी तरफ इतना बड़ा क्राइम करने के बाद भी ये लोग अपनी बेहूदगी से बाज नहीं आ रहे। गाजियाबाद और कानपुर समेत कई जगहों से इनके द्वारा महिला स्टाफ के साथ बदतमीजियाँ की खबरें सामने आई। गाजियाबाद के एमएमजी हॉस्पिटल के आइसोलेशन वार्ड में रखे गए तबलीगी जमाती बिना कपड़ों, पैंट के नंगे घूम रहे थे, अश्लील वीडियो चलाने के साथ ही ये जमाती नर्सों को गंदे-गंदे इशारे कर रहे थे और नर्सों से बीड़ी-सिगरेट की माँग भी कर रहे थे।
आरफा खानम शेरवानी
आरफा का मानना है कि नर्सें झूठ बोल रही हैं 
वायर की आरफा खानम का दिल है कि मानता नहीं
जैसे ही यह खबर सामने आई, इस्लामी कट्टरपंथियों की वकालत करने वाला समूह सक्रिय हो गया। इनको हमेशा माफ कर देने वाले समूह ने इनके समर्थन में उतरकर उनके बचाव की भरपूर कोशिश की। इन्हीं में से एक थे- वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) के स्तंभकार सदानंद धुमे। उन्होंने ये साबित करने का भरसक प्रयास किया कि देश को कोरोना संकट में डालने वाले तबलीगी जमात के सदस्य निर्दोष हैं।
प्रोपेगेंडा वेबसाइट द वायर की वरिष्ठ संपादक आरफा खानम शेरवानी को तबलीगी जमात के सदस्यों की नंगई पर यकीन नहीं हो रहा। उन्हें लगता है कि गाजियाबाद से एमएमजी हॉस्पिटल में नर्सों के सामने जमात के सदस्यों के पतलून उतारने की खबरें झूठी हैं। आरोप लगाने वाली नर्सें प्रोपेगेंडा में शामिल हैं। यह दूसरी बात है कि एडीएम और एसपी के ज्वाइंट इन्वेस्टीगेशन में नर्सों के आरोप सही पाए गए हैं और इस तरह की हरकत करने वाले जमात के 5 सदस्यों पर मुकदमा भी दर्ज किया गया है।
लेकिन, आरफा ने यह मानने से इनकार कर दिया है कि तबलीगी जमात वाले महिलाओं के साथ बदसलूकी या उनका शोषण कर सकते हैं। उसने ट्वीट कर रहा है, “वे नि:स्वार्थ भाव से सेवा करने वाले लोग हैं, जो मजहब/समाज की सेवा के लिए दुनियादारी यहॉं तक कि अपने परिवार से भी दूर रहते हैं।” आगे आरफा ने जोर देकर कहा है कि प्रोपेगेंडा अब बंद होना चाहिए।
आरफा ने चिर-परिचित विक्टिम कार्ड से भी तबलीगी जमात के करतूतों पर पर्दा डालने की कोशिश की है। उसके मुताबिक तबलीगी जमात को जिस तरह मीडिया निशाना बना रहा है वह सही नहीं है। इसके बहाने पूरे मुस्लिम समुदाय को नीचा दिखाया जा रहा है। उसने कहा, “खुदा न करे लेकिन जमात के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की वजह से यदि मुसलमानों पर हमला होता है तो मीडिया का प्रोपेगेंडा और अधिकारियों की चुप्पी इसके लिए जिम्मेदार होगी।”
आरफा जिन लोगों का बचाव कर रही हैं उनकी करतूतें केवल एक अस्पताल तक ही सीमित नहीं है। यूपी के अलग-अलग जिलों से जमातियों द्वारा हॉस्पिटल में बदतमीजी किए जाने की ख़बरें आ रही हैं। बिजनौर में 8 इंडोनेशियाई जमातियों ने अंडा-करी और बिरयानी की माँग की थी। साथ ही उन्होंने सफाई कर्मचारियों के साथ भी अभद्रता की थी। बस्ती और आगरा में भी बिरयानी माँग कर हॉस्पिटल कर्मचारियों को परेशान किया। मुरादाबाद में जमातियों ने दाल-रोटी खाने से इनकार कर दिया। दिल्ली के एलएनजेपी हॉस्पिटल और हैदराबाद के गॉंधी हॉस्पिटल में इनके उपद्रव के बाद पुलिस की तैनाती करनी पड़ी। इनलोगों ने सड़कों पर, अस्पतालों में, डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों पर थूक कर संक्रमण तक फैलाने की कोशिश की है। देश में जो नए मामले सामने आए हैं उनमें आधे से अधिक तबलीगी जमात के निजामुद्दीन स्थित मरकज से जुड़े हैं।



ऐसे में आरफा की प्रतिक्रिया से साफ है कि उम्माह के आगे उनके लिए कुछ भी मायने नहीं रखता। महिलाओं का सम्मान भी नहीं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि नारी अधिकारों की कथित पैरोकार वामपंथी और मीडिया गिरोह के दूसरे सदस्य महिलाओं के इस उत्पीड़न और तबलीगी जमात की करतूतों का किस तरह बचाव करते हैं।
सदानंद धुमे
सदानंद धुमे 
मजहबी मुस्लिम मर्द न छेड़छाड़ कर सकते हैं, न ही बलात्कार : सदानंद धुमे
सदानंद धुमे ने द वायर की पत्रकार आरफा खानम शेरवानी, जिन्होंने भी तबलीगी जमात के सदस्यों का बचाव किया और नर्सों पर झूठ बोलने का आरोप लगाया, के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वो तबलीगी जमात के विचारों के प्रशंसक नहीं है, लेकिन जिस किसी ने भी उनके साथ समय बिताया है, उनको पता है कि उनका रुढ़िवाद महिलाओं के लिए कितना उपयुक्त और पवित्र है। सदानंद धुमे यहीं पर नहीं रुके। उन्होंने आगे यह भी आरोप लगाया कि तबलीगी जमात के सदस्यों के अभद्रता की बातें झूठी हैं और सामान्य तौर पर मुसलमानों को बरगलाने की यह कोशिशें नीचता से परे है।
धुमे अपने ट्वीट के माध्यम से यह कहना चाह रहे थे कि सबसे पहली बात तो ये कि मजहबी मुस्लिम मर्द न तो छेड़छाड़ कर सकते हैं और न ही बलात्कारी हो सकते हैं और दूसरी बात उन्होंने कही कि जिन नर्सों ने तबलीगी जमात के सदस्यों के खिलाफ दुर्व्यवहार की शिकायत की थी, वे झूठ बोल रही थीं क्योंकि वो मुसलमानों की छवि को धूमिल करना चाहती थीं। धुमे ने मुसलमानों को धार्मिक पुरुष साबित करने की कोशिश और उनके बचाव में नर्सों द्वारा लिखित शिकायत को नकार दिया।
इन जाहिलों और अशिष्ट व्यक्तियों के बचाव में उतरने पर कई लोगों ने उन्हें आड़े हाथों लिया। लोगों ने ना सिर्फ उनसे कट्टरपंथी इस्लाम के लिए माफी माँगने के लिए कहा, बल्कि उन्हें महिला के खिलाफ हो रहे अपराध के लिए भी जिम्मेदार ठहराया।
दरअसल 2011 का एक मामला ही साबित करता है कि वास्तव में धूमे का ज्ञान कितना छिछला, तुच्छ और अधूरा है। 2011 में टोरंटो में एक इमाम पर यौन उत्पीड़न के लिए 13 मामलों के तहत आरोप लगाया गया था। 48 वर्षीय मोहम्मद मसरूर ने एक इमाम के रूप में काम किया और कई देशों का दौरा किया था, जिसमें बच्चों और युवाओं को कुरान की शिक्षा दी थी। पुलिस ने अपनी जाँच में मसरूर के पास से उसके खुद के पासपोर्ट के अलावा तीन अन्य नाम का पासपोर्ट पाया था। मसरूर के खिलाफ पाँच पूर्व छात्राओं ने खिलाफ दुर्व्यवहार के 13 आरोप लगाए गए थे। जानकारी के मुताबिक इमाम तबलीगी जमात का सदस्य था, जिसका उद्देश्य इस्लामिक आंदोलन को जमीनी स्तर पर चलाना था। यह आंदोलन काफी हद तक बांग्लादेश में सक्रिय है।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार केंद्र की सत्ता पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के काबिज होने पर वर्षों से सत्ता की मल.....
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साभार एक तरफ जहाँ पूरा देश कोरोना वायरस संकट...
सदानंद धुमे ने अपने ट्वीट में कहा कि चूँकि उन्होंने तबलीगी जमात के कुछ लोगों से मुलाकात की है और उनके अनुसार वो लोग ‘पवित्र’ थे, तो इसका मतलब ये है कि तबलीगी जमात का कोई भी सदस्य महिलाओं के साथ छेड़छाड़ नहीं कर सकता है। इसलिए महिलाएँ झूठ बोल रही हैं।

मोदी को गालियाँ : चरितार्थ होता फ्रेंच ज्योतिष नॉस्त्रेदमस(1555)

Narendra Modi
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
देश में गर्मी, जाड़े और बारिश का मौसम एक तय समयावधि के बाद दस्तक देता है। उसी तरह हर 5 साल के बाद देश में आम चुनाव का मौसम भी आता है। यह मौसम जनता को अपनी नुमाइंदगी करने के लिए केंद्र की सत्ता पर सबसे बड़े राजनीतिक दल को बैठाने का अवसर देता है। देश में लोकसभा चुनाव के 5वें चरण का मतदान संपन्न हो चुका है। इस दौरान चुनावी पारा अपने उफान पर है।
चुनाव के दरम्यान नेता अपने बयानों के तरकश से एक-दूसरे पर रोज नए-नए प्रहार कर रहे हैं। इस दौरान सियासी बदजुबानी भी अपने पूरे शबाब पर है। विपक्ष पूरी तरह से सत्ता पक्ष पर हमलावर है तो वहीं मौजूदा हूकूमत भी विपक्ष पर पलटवार करने में पीछे नहीं है। आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति में नेता एक-दूसरे निजी हमले करने और विवादित बयान देने से भी परहेज नहीं कर रहे हैं।
चुनावी माहौल में सत्ता के लिए राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप सामान्य घटना है, लेकिन लगता है कि हार के डर से विरोधी पार्टी के नेता सामान्य शिष्टाचार भी भूल गए हैं और पीएम मोदी के खिलाफ गाली-गलौज से भी बाज नहीं आ रहे…बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और राजद नेता राबड़ी देवी ने मोदी को जल्लाद कहा है। वहीं, पश्चिम बंगाल की सीएम ने पीएम को थप्पड़ लगाने की इच्छा जताते हुए उन्हें दंगाई कह दिया। कांग्रेस को छोड़ भी दें तो दूसरी विपक्षी पार्टियों के नेता पीएम को अब तक आधी सेंचुरी से अधिक गालियां दे चुके हैं।
जिन लोगों ने फ्रेंच ज्योतिष नॉस्त्रेदमस को पढ़ा हो, उन्हें मोदी को देने वाली गालियों को सुन कोई नई बात नहीं, बल्कि 1555 में की गयी भविष्यवाणियाँ चरितार्थ हो रही हैं। उस महान ज्योतिष ने एक युक्ति में 2014 में देश की बागडोर संभालने वाले अधेड़ उम्र के सख्त प्रशासक के चाहने वालों के साथ-साथ आलोचक भी होंगे। गालियाँ भी देने वालों की कमी नहीं होगी। परन्तु 2014 से 2025 तक राज करेगा और देश को ऊंचाइयों पर पहुंचा कर विश्व गुरु बनाएगा। पूत के पावं पालने में इस अधेड़ उम्र प्रशासक ने दिखा दिए हैं। जो इस बात को भी प्रमाणित करता है कि 2019 में 2014 से अधिक संख्या से भारत की बागडोर इस व्यक्ति के हाथ में होगी।  
दूसरे, अंग्रेजी में एक कहावत है "Think positive, Act positive, Everything will go positive", जनता केवल यह न सोंचे की प्रधानमन्त्री के लिए अपशब्दों का प्रयोग किया जा रहा है, प्रधानमंत्री को गालियाँ देने वाले इतिहास की उन बातों को उजागर कर रहे हैं, जिन्हे अब तक जनता से छुपाकर तुष्टिकरण अपनाते हुए मुग़ल युग का गुणगान करते थे। महाराष्ट्र कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने मोदी की औरंगज़ेब से तुलना करते इस बात को स्वीकार कर लिया कि "मुग़ल युग में हिन्दुओं पर अत्याचार हुए थे", जब उन्होंने कहा कि "औरंगज़ेब ने इतने मन्दिर नहीं तोड़े, जितने अब वाराणसी में तोड़े गए हैं।" और जब यही बात वास्तविक इतिहास के जानकर कहते थे कि मुग़ल युग में हिन्दू मन्दिर तोड़े गए थे, उन्हें "साम्प्रदायिक, फिरकापरस्त, गंगा-जमुना तहजीब का दुश्मन, दंगाई" आदि उपनामों से बदनाम किया जाता था, क्या अब समस्त छद्दम धर्म-निरपेक्ष, तुष्टिकरण के पुजारी, #not in my name, #intolerance, #mob lynching, #award vapsi, #metoo आदि गैंग निरुपम के विरुद्ध नहीं बोलेगा? क्या ये गैंग अपने बिलों से बाहर नहीं आएंगे?        

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कांग्रेस के नेता और उनके रागदरबारियों ने पीएम मोदी को क्या कुछ नहीं कहा, कितनी अभद्र गालियां दीं...
यहां तक की उनकी मां तक को गाली दे डाली।
मर्यादा की सारी हदें लांघने वालों...
जनता माफ नहीं करेगी।


कांग्रेस के नामदार जिस तरह अपने प्रेम की डिक्शनरी दिखा रहे हैं, उस पर कोई उन पर सवाल नहीं उठा रहा है।
मुझे गाली देते हुए उन्होंने कितनी बार मर्यादा तार-तार की है, ये भी इनकी प्रेम वाली डिक्शनरी से पता चलता है: पीएम मोदी pic.twitter.com/7oNmrzG3of

इन्होंने भारत की संस्कृति को बदनाम करने का अभियान छेड़ा हुआ था।

पानीपत के पास समझौता एक्सप्रेस में ब्लास्ट हुआ था, तो कांग्रेस ने हिन्दू आतंकवाद का झूठ गढ़ने के लिए निर्दोष लोगों को सालों तक जेल में रखा।

लेकिन कांग्रेस के इस षड्यंत्र का पर्दाफाश हो गया : पीएम
मैं कांग्रेस और उसके साथियों को मनमानी नहीं करने देता हूं, उनके भ्रष्टाचार को रोकता हूं, उनके वंशवाद की बात करता हूं, इसलिए ये लोग बार-बार प्रेम का नकाब पहनकर मुझे गालियां देते रहते हैं: पीएम मोदी

मैं कांग्रेस और उसके साथियों को मनमानी नहीं करने देता हूं, उनके भ्रष्टाचार को रोकता हूं, उनके वंशवाद की बात करता हूं, इसलिए ये लोग बार-बार प्रेम का नकाब पहनकर मुझे गालियां देते रहते हैं: पीएम मोदी

कांग्रेस के एक नेता ने मुझे गंदी नाली का कीड़ा कहा, तो दूसरा मुझे गंगू तेली कहने आ गया।

इनके एक नेता ने मुझे पागल कुत्ता कहा, तो दूसरे नेता ने भस्मासुर की उपाधि दे दी

इनके एक और मंत्री ने मुझे वायरस कहा तो दूसरे ने दाऊद इब्राहिम का दर्जा दे दिया: पीएम मोदी pic.twitter.com/t6naLGoYcM
मोदी ने कहा, ' इनके एक नेता ने मुझे हिटलर, तो दूसरे ने मुझे बदतमीज नालायक बेटा कहा। इतना ही नहीं, मुझे रैबीज बीमारी से पीड़ित बंदर, चूहा बोला गया। कांग्रेस वालों ने मुझे रावण, सांप, बिच्छू, गंदा आदमी, जहर बोने वाला तक बोला।'

कांग्रेस के एक नेता ने मुझे गंदी नाली का कीड़ा कहा, तो दूसरा मुझे गंगू तेली कहने आ गया।

इनके एक नेता ने मुझे पागल कुत्ता कहा, तो दूसरे नेता ने भस्मासुर की उपाधि दे दी

इनके एक और मंत्री ने मुझे वायरस कहा तो दूसरे ने दाऊद इब्राहिम का दर्जा दे दिया: पीएम मोदी

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इनके एक नेता ने मुझे हिटलर, तो दूसरे ने मुझे बदतमीज नालायक बेटा कहा।

इतना ही नहीं, मुझे रैबीज बीमारी से पीड़ित बंदर, चूहा और लहू पुरुष बोला गया।

कांग्रेस वालों ने मुझे रावण, सांप, बिच्छू, गंदा आदमी, जहर बोने वाला तक बोला: पीएम मोदी
इसके पहले भी कई विपक्षी नेता प्रधानमंत्री मोदी के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल कर चुके हैं-
बदरुद्दीन अजमल ने कहा, मोदी चाय-पकौड़े बेचेंगेअसम की ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के अध्यक्ष बदरुद्दीन अजमल ने प्रधानमंत्री मोदी पर विवादित बयान दिया है। असम के चिरांग में उन्होंने कहा कि वह उन्हें देश से बाहर निकालेंगे। बदरुद्दीन अजमल यहीं नहीं रुके उन्होंने कहा कि पीएम मोदी कहीं भी जाकर चाय या पकौड़े बेच सकते हैं। बदरुद्दीन अजमल ने कहा, ‘मोदी विरोधी जितने भी गठबंधन हैं उसमें हम भी हैं। वो सब मिलकर मोदी जी को देश से बाहर निकालेंगे। मोदी जी जाकर कहीं न कहीं चाय की दुकान चलाएंगे या फिर पकौड़े भी बेच सकते हैं।’
सपा नेता अबू आजमी ने पीएम मोदी को दी गाली
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र में सपा के अध्यक्ष अबू आसिम आजमी ने प्रधानमंत्री मोदी के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल किया है। पिछले साल दिसंबर में उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर में अबू आजमी ने मीडिया से बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को अनपढ़ और गधा तक कह डाला। उन्होंने ये भी कहा कि पीएम मोदी की बातों पर उनके मातहत अधिकारी हंसते हैं।

स्टालिन ने पीएम मोदी को ‘पॉलिटिकल ब्रोकर’ कहा
अबू आजमी के अलावा डीएमके के नेता एम के स्टालिन ने भी प्रधानमंत्री मोदी को गाली दी है। स्टालिन ने प्रधानमंत्री को पॉलिटिकल ब्रोकर यानि राजनीतिक दलाल कहा है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी अपने पद की मर्यादा को भूलकर राजनीतिक दलाली में लगे हुए हैं।

कन्हैया कुमार ने पीएम मोदी को नालायक कहा
25/11/2018
मुंबई में कांग्रेस, लेफ्ट और एनसीपी द्वारा आयोजित संविधान बचाओ कार्यक्रम में जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने प्रधानमंत्री मोदी को गाली दी थी। कन्हैया कुमार ने पीएम मोदी को नालायाक कहा था।

चंद्रबाबू के करीबी मंत्री ने की आपत्तिजनक टिप्पणी
आंध्र प्रदेश के वित्त मंत्री और टीडीपी पोलित ब्यूरो के सदस्य यनमाला रामकृष्णुडू ने प्रधानमंत्री मोदी को लेकर आपत्तिजनक बयान दिया। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के करीबी रामकृष्णुडू ने 3 नवंबर को प्रधानमंत्री मोदी की तुलना ‘एनाकोंडा’ से की। प्रधानमंत्री मोदी के बारे में अपशब्द का प्रयोग करते हुए उन्होंने कहा कि उनसे बड़ा कोई एनाकोंडा नहीं है। वह सीबीआई, आरबीआई और उन जैसी दूसरी संस्थाओं को निगल रहे हैं। वह रक्षक कैसे हो सकते हैं।

केजरीवाल शेर हैं, मोदी खिसयानी बिल्ली: सिसोदिया
दिल्ली के विवादित मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के करीबी और उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने रविवार 4 नवंबर को प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल किया। दिल्ली में सिग्नेचर ब्रिज के उद्घाटन के मौके पर सिसोदिया ने कहा कि केजरीवाल शेर हैं, जिन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा पैदा की गई अड़चनों के बावजूद ब्रिज का उद्घाटन किया, अब अड़चनें पैदा करने वाले खिसयानी बिल्ली की तरह खंभा नोच रहे हैं।

एनसीपी नेता माजिद मेनन ने कहा धोबी का कुत्ता
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेता माजिद मेमन ने प्रधानमंत्री मोदी के 14 सितंबर को इंदौर में दाऊदी बोहरा मुसलमानों के कार्यक्रम में पहुंचने पर विवादित बयान दिया। माजिद मेमन ने प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर 17 सितंबर को कहा कि, ‘मोदी जी बोहरा समाज के पास गए इस विचार से कि शायद मुस्लमानों को रिझा लिया जाएगा, लेकिन ना वो इधर के रहेंगे ना उधर के रहेंगे। धोबी के कुत्ते वाली बात हो जाती है।’

येचुरी ने कहा दुर्योधन
सीपीआई (एम) के महासचिव सीताराम येचुरी भी ऐसे ही नेताओं में से एक हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए दुर्योधन कहा। सीताराम येचुरी ने 22 अप्रैल, 2018 को कहा कि महाभारत में कौरव सौ भाई थे लेकिन ज्यादातर लोग सिर्फ दो भाई दुर्योधन और दुशासन को ही जानते हैं। इसी तरह भाजपा में लोग नरेन्द्र मोदी और अमित शाह को जानते हैं। सीताराम येचुरी की यह टिप्पणी उनकी पार्टी की मानसिकता को दर्शाती है।

‘हिमालय जाकर अपनी हड्डियां गलानी चाहिए।’ –  जिग्नेश मेवानी 
जिग्नेश मेवानी ने न्यूज चैनल आजतक पर 19 दिसंबर, 2017 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए कहा कि वे ‘मानसिक तौर पर बूढ़े हो चले हैं, उन्हें रिटायर हो जाना चाहिए, उन्हें हिमालय में जाकर हड्डियां गलानी चाहिए। बहुत बोरिंग आदमी हो गया है।’ इस दौरान जिग्नेश के अलावा राहुल के दो और सियासी गुर्गे हार्दिक पटेल और अल्पेश ठाकोर भी मौजूद थे। 

खाल उधेड़वा लेंगे- लालू का बेटा
आरजेडी नेता लालू यादव के बड़े बेटे और बिहार के पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव की छवि हमेशा से संदिग्ध रही है, लेकिन इस बात की उम्मीद शायद ही किसी ने की हो की वह देश के प्रधानमंत्री के लिए आपराधिक भाषा का इस्तेमाल करेंगे। मोदी सरकार द्वारा पिता की सुरक्षा में हुई कटौती से वह काफी बौखला गए और कहा, “हम लोग कार्यक्रमों में जाते रहते हैं। लालू प्रसाद जी भी इन कार्यक्रमों में जाते रहते हैं। ऐसे में सुरक्षा वापस लेना, उनकी हत्या कराने की साजिश है। हम इसका मुहतोड़ जवाब देंगे, नरेंद्र मोदी जी की खाल उधड़वा देंगे।”

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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार लोकसभा चुनावों के लिए पांचवें चरण की वोटिंग के बाद देश में अगली सरकार फिर से नरेन्द्र ...

हाथ और गला काटने वाले भी बहुत लोग हैं-राबड़ी देवी
कहते हैं कि बच्चे अपने मां-बाप से ही संस्कार सीखते हैं। तेज प्रताप ने पीएम मोदी के बारे में जिस भाषा का इस्तेमाल किया उसकी शिक्षा उन्हें शायद अपना माता और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी से ही मिली है। राबड़ी देवी ने पार्टी के एक कार्यक्रम में देश के पीएम को यह कहकर धमकाया कि, “बिहार में नरेंद्र मोदी का हाथ और गला काटने वाले भी बहुत लोग हैं।”

जुमला जयंती पर आनंदित वैशाखनंदन- मृणाल पांडे 
राजनीतिक विरोधियों की बौखलाहट को तो कुछ हद तक समझी भी जा सकती है, लेकिन सवाल तब उठता है जब बुद्धिजीवी होने का दंभ भरने वाले लोग भी घटिया हरकत कर बैठते हैं। कुछ निहित स्वार्थी पत्रकार इसी श्रेणी में शामिल हैं। जैसे कांग्रेस की करीबी माने जाने वाली मृणाल पांडे ने प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर भी अशोभनीय भाषा लिखकर अपना असली एजेंडा जाहिर कर दिया। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “जुमला जयंती पर पर आनंदित, पुलकित, रोमांचित वैशाखनंदन।” इससे भी घिनौनी हरकत तो यह रही कि उन्होंने इसके साथ एक गदहे की तस्वीर पोस्ट की।

खून का सौदागर- लालू यादव
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की लाइन पर जाते हुए उनके सियासी चहेते लालू यादव ने भी एक बार नरेन्द्र मोदी के विरोध में सोनिया की तर्ज पर ही बेहद अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया था। लालू ने कहा था, “नरेंद्र मोदी खून का सौदागर है।”

%&$ भाइयों की तरह ताली बजाता है- लालू यादव
लालू यादव के बेटे और पत्नी देश के प्रधानमंत्री को खुलेआम अपराधियों की तरह धमकाते हैं, तो उसकी वजह यही है कि लालू खुद अभद्रता करने के बहुत बड़े उदाहरण रहे हैं। उन्होंने एक चुनावी रैली में पीएम मोदी के लिए कहा- “%&$ भाइयों की तरह ताली बजा बजाके बोलता है”

Coward and Psychopath- अरविंद केजरीवाल
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपनी गंदी जुबान से अबतक राजनीति को जितना नुकसान पहुंचाया है, उससे देश की छवि बहुत खराब हुई है। प्रधानमंत्री मोदी की ईमानदार नीतियों से वह एक बार इतने परेशान हो गए कि उन्होंने कहा, “मोदी कायर और मनोरोगी हैं।”

बेशर्म तानाशाह- अरविंद केजरीवाल
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल देश के बच्चे-बच्चे के लिए बदजुबानी के पर्याय बन चुके हैं। उन्होंने अपनी गंदी जुबान से न सिर्फ राजनीतिक को गंदा किया है, बल्कि मुख्यमंत्री के संवैधानिक पद को भी कलंकित किया है। इसी कड़ी में पंजाब चुनाव के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बेशर्म तानाशाह कहकर संबोधित किया था।

आप जालिम हैं- असदुद्दीन ओवैसी
नोटबंदी के फैसले को मुसलमानों के खिलाफ बताते हुए एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने पीएम मोदी के लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा, “आप फकीर नहीं हैं, आप तो जालिम हैं।”

यमराज- सतीश चंद्र मिश्रा
प्रधानमंत्री के नोटबंदी के फैसले से बीएसपी और उसके नेतृत्व की बौखलाहट और उसके पीछे की वजहों से पूरा देश परिचित है। शायद यही वजह है कि पार्टी नेता सतीश चंद्र मिश्रा ने नोटबंदी के दौरान जो भी मौतें हुईं उन्हें नोटबंदी से तो जोड़ा ही, बिना सीधा नाम लिए पीएम मोदी को यमराज तक कहने में संकोच नहीं किया।

सबसे बड़ा रावण- आजम खान
समाजवादी पार्टी नेता और यूपी के पूर्व मंत्री आजम खान अपनी दंगी जुबान के लिए ही ज्यादा मशहूर हैं। यही वजह है कि एक बार उन्होंने अपनी खीज मिटाने के लिए बिना नाम लिए प्रधानमंत्री को सबसे बड़ा रावण बता दिया। उन्होंने कहा कि, ”वो 131 करोड़ का बादशाह है, रावण जलाने लखनऊ जाता है लेकिन ये भूल जाता है कि सबसे बड़ा रावण लखनऊ में नहीं दिल्ली में रहता है।”

चूहे के बच्चे की तरह बिल में घुस जाएंगे- कल्याण बनर्जी
तृणमूल कांग्रेस नेता कल्याण बनर्जी ने पीएम मोदी को लेकर बहुत ही अमर्यादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था, “मोदी चूहे के बच्चे की तरह गुजरात में अपने बिल में घुस जाएंगे।”

इमाम ने दिया सिर मुंडकर मुंह काला करने का फतवा
कोलकाता के टीपू सुल्तान मस्जिद के शाही इमाम सैयद मोहम्मद नुरूर रहमानी बरकती ने नोटबंदी के फैसले के विरोध में देश के प्रधानमंत्री के खिलाफ बहुत ही अपमानजनक फतवा जारी किया। फतवे के मुताबिक प्रधानमंत्री का सिर मुंडकर उनका मुंह काला करने वाले को 25 लाख रुपये का इनाम देने की बात कही गई। जब इमाम ये गुस्ताखी कर रहा था, वहां पर पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी टीएमसी के सांसद मोहम्मद इदरीस भी मौजूद थे।