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स्वाति मालीवाल की पिटाई के बाद बिभव कुमार के साथ मौजूद थे केजरीवाल, दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में खुलासा: संजय सिंह और आतिशी के बयान बदलने को लेकर भी जाँच


दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल अपने पूर्व सचिव बिभव कुमार के साथ राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल पर हमले के बाद मौजूद थे। यह जानकारी दिल्ली पुलिस की चार्जशीट से निकल कर आई है। बिभव कुमार ने दिल्ली मुख्यमंत्री आवास में AAP की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल पर हमला किया था।

आजतक की एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस इस मामले में जाँच करके पता लगा रही है कि क्या स्वाति मालीवाल पर हमले के पीछे कोई बड़ी साजिश थी। दिल्ली पुलिस ने मामले के सभी एंगल को जाँचते हुए हाई कोर्ट में चार्जशीट दायर की है। दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में बताया गया है कि जब बिभव कुमार ने स्वाति मालीवाल को पीट दिया, उसके बाद CM केजरीवाल भी घटनास्थल पर आ गए। चार्जशीट में बिभव पर स्वाति मालीवाल को 7-8 चांटे मारने का आरोप लगा है।

दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि घटना के बाद AAP नेताओं ने अपने बयान बदले। दिल्ली पुलिस ने कहा कि AAP राज्यसभा सांसद संजय सिंह और दिल्ली सरकार में मंत्री आतिशी मार्लेना ने पहले बिभव कुमार की निंदा की लेकिन बाद में पूछताछ के दौरान अपने पुराने बयान को नहीं दोहराया और बिभव कुमार को बचाने का प्रयास किया। दिल्ली पुलिस इसी कारण से इस मामले में बड़ी साजिश का एंगल तलाश रही है।

पुलिस ने यह भी कहा है कि जहाँ मारपीट हुई, वहाँ के कुछ CCTV फुटेज मीडिया में जानबूझ कर लीक किए गए। दिल्ली पुलिस ने इसी के साथ उस ऑटो ड्राईवर का बयान भी इस घटना के विषय में लिया है, जिसने मारपीट के बाद स्वाति मालीवाल को CM आवास से उनके घर तक पहुँचाया था।

इससे पहले बिभव कुमार के CM आवास में मौजूद होने को लेकर कोर्ट ने भी प्रश्न उठाए थे। सुप्रीम कोर्ट ने बिभव कुमार की इस मामले में जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि एक गुंडे की CM आवास में क्या जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट ने स्वाति मालीवाल पर हमले को लेकर बिभव कुमार से शर्म करने को कहा था और जमानत याचिका ठुकरा दी थी।

बिभव कुमार पर आरोप है कि उन्होंने 13 मई, 2024 को CM केजरीवाल से मिलने आई AAP की राज्यसभा सांसद से मारपीट की। स्वाति मालीवाल ने आरोप लगाया है कि उन पर बिभव कुमार ने हमला किया और उनको जमीन पर गिरा कर मारा। स्वाति मालीवाल ने कहा कि उनकी पिटाई के दौरान CM केजरीवाल के आवास में मौजूद लोगों ने उनकी मदद नहीं की।

श्री हरिहर देसिका स्वामीगल सौंपेगे मोदी को राजदंड यानी सेंगोल

                                      श्री हरिहर देसिका स्वामीगल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
उनका नाम श्री हरिहर देसिका स्वामीगल (Sri Harihara Desika Swamigal) है। वे मदुरै अधीनम (Madurai Adheenam) के 293वें प्रधान पुजारी हैं। 28 मई 2023 को वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारत का राजदंड यानी सेंगोल सौंपेंगे, जो नई संसद भवन (New Parliament Building) में स्थापित किया जाएगा। 1947 में जब भारत स्वतंत्र हुआ था, तब भी इसी मदुरै अधीनम के तत्कालीन प्रधान पुजारी ने पंडित जवाहर लाल नेहरू को सेंगोल (Sengol) सौंपा था।

न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में श्री स्वामीगल ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) अच्छा काम कर रहे हैं। उन्हें वैश्विक सराहना मिली है। देश में सभी को उन पर गर्व है। उन्होंने कहा, “पीएम मोदी एक ऐसे नेता हैं जिन्हें वैश्विक सराहना मिली है। वह लोगों के लिए अच्छा काम कर रहे हैं। 2024 में उन्हें फिर से प्रधानमंत्री बनना चाहिए और लोगों का मार्गदर्शन करना चाहिए। हम सभी को बहुत गर्व है क्योंकि विश्व के नेता हमारे पीएम मोदी की सराहना कर रहे हैं।”

श्री स्वामीगल ने बताया कि वे 28 मई को प्रधानमंत्री से मिलेंगे और उन्हें सेंगोल सौंपेंगे। बता दें कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में सेंगोल और मदुरै अधीनम के पुजारियों का महत्वपूर्ण स्थान है। 1947 में भी सत्ता हस्तांतरण के समय यहीं के प्रधान पुजारी ने राजदंड सौंपा था। 28 मई को नई संसद भवन के उद्घाटन कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए थिरुवावादुठुरै अधीनम मठ के कम से कम 31 सदस्यों के आने की बात कही जा रही है। ये दो जत्थों में चार्टर्ड फ्लाइट से नई दिल्ली आएँगे।

सेंगोल इतिहास के पन्नों में गुम हो गया था। लेकिन नई संसद भवन के उद्घाटन के साथ ही यह चर्चा में आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसकी सूचना कुछ साल पहले एक वीडियो से लगी थी। 5 फीट लंबे सेंगोल पर वीडियो ‘वुम्मिडी बंगारू ज्वेलर्स (VBJ)’ ने बनाई थी। इसके मैनेजिंग डायरेक्टर आमरेंद्रन वुम्मिडी ने कहा कि उन्हें सेंगोल के बारे में खुद भी नहीं पता था। उन्होंने 2018 में एक मैग्जीन में इसका जिक्र देखा और जब इसे खोजा तो 2019 में उन्हें ये इलाहाबाद के एक म्यूजियम में रखा हुआ मिला। म्यूजियम में यह नेहरू की ‘स्वर्ण छड़ी’ के तौर पर रखा गया था।

दरअसल सत्ता हस्तांतरण का यह प्रतीक चोल राजवंश के काल से प्रेरित है। यह भारत का सबसे प्राचीन और सबसे लंबे समय तक चलने वाला शासनकाल था। उस समय एक चोल राजा से दूसरे चोल राजा को ‘सेंगोल’ देकर सत्ता हस्तांतरण की रीति निभाई जाती थी। ये एक तरह से राजदंड था, शासन में न्यायप्रियता का प्रतीक।

चोल राजवंश भगवान शिव को अपना आराध्य मानता था। इस ‘सेंगोल’ को राजपुरोहित द्वारा सौंपा जाता था, भगवान शिव के आशीर्वाद के रूप में। इस पर शिव की सवारी नंदी की प्रतिमा भी है। इसी तरह के समारोह और रिवाज की सलाह नेहरू को चक्रवर्ती राजगोपालचारी ने दी थी। इसके बाद राजाजी ने मयिलाडुतुरै स्थित ‘थिरुवावादुठुरै आथीनम’ से संपर्क किया, जिसकी स्थापना आज़ादी से 500 वर्ष पूर्व हुई थी। मठ के तत्कालीन महंत अम्बालवाना देशिका स्वामी उस समय बीमार थे, लेकिन उन्होंने ये कार्य अपने हाथ में लिया था।