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पाकिस्तान के दलालों कहां हो? दिल्ली को फिर दहलाने की साजिश को पुलिस ने किया नाकाम, ISI के 4 आतंकी गिरफ्तार: पाकिस्तान भेजे थानों-मंदिरों के Video, भीड़भाड़ वाले इलाके में अंधाधुंध फायरिंग का था प्लान

                          दिल्ली पुलिस ने ISI के चार आतंकी गिरफ्तार किए (फोटो साभार : News18)
एक तरफ भारत में पल रहे पाकिस्तानी दलाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख अपने आका पाकिस्तान से बातचीत और व्यापार शुरू करने की वकालत कर रहे हैं ताकि उनके गुर्गे फिर से भारत में खून-खराबा कर अशांति फ़ैलाने में कामयाब हो सके और पकडे जाने पर victim card खेल आतंकिस्तान यानि पाकिस्तान को बेकसूर बताने की कहानियां गढ़ने लगे। पाकिस्तान के दलालों देखो दिल्ली पुलिस ने तुम्हारे आका के मंसूबों पर पानी फेर दिया। अब मुस्लिम की बजाए हिन्दुओं को फंसा खुनी खेल खेलने की तैयारी चल रही है।    

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक बड़े ऑपरेशन में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI समर्थित आतंकी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने दिल्ली और पंजाब से चार खतरनाक आतंकियों को गिरफ्तार किया है। इनके नाम साजन उर्फ हनी, गगनप्रीत, रिषी, शुभदीप है।

ये चारों आतंकी पाकिस्तान में बैठे हैंडलर शाहजाद भट्टी के इशारे पर राजधानी को दहलाने की साजिश रह रहे थे। पुलिस ने इनके पास से तुर्की की मशहूर जिगाना पिस्टल समेत विदेशी हथियार और कारतूस बरामद किए हैं।

जाँच में सामने आया है कि पकड़े गए आतंकियों में से गगनप्रीत को बेहद खतरनाक काम सौंपा गया था। वह दिल्ली के पुलिस थानों, चौकियों और प्रमुख धार्मिक स्थलों की रेकी कर रहा था। उसने इन जगहों के Video बनाकर पाकिस्तान भी भेजे थे।

उसे दिल्ली में किसी भीड़भाड़ वाली जगह पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दहशत फैलाने का टास्क मिला था। इस नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए पुलिस ने पंजाब के अमृतसर और दिल्ली में ताबड़तोड़ छापेमारी की थी।

अवलोकन करें:-

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सबसे पहले शुभदीप सिंह को पकड़ा गया, जो ड्रोन से आने वाले हथियारों की खेप लेता था। उसकी निशानदेही पर गुरजंत सिंह, और गगनप्रीत को दबोचा गया। पुलिस अब इनके बाकी मददगारों की तलाश कर रही है।

जाकिर नाइक और चीन से मिले पैसों की डिटेल दो- राजीव गाँधी फाउंडेशन को नोटिस, राहुल गाँधी के भारत विरोधी बयान पर ओडिशा पुलिस ने बढ़ाया जाँच का दायरा: IG हिमांशु लाल ने दी जानकारी

                          राहुल गाँधी पर FIR की जाँच के तहत राजीव गाँधी फाउंडेशन को भेजा गया नोटिस
राहुल गाँधी अपनी उल्टी-पुल्टी बयानबाज़ी से जनता में जो अपनी जनछवि बनाने का ढोंग रच पागल बना रहे हैं, वही बयानबाज़ी के तीर उलटे राहुल और परिवार की ओर मुड़ गए हैं। आखिर बकरे की माँ कब तक खैर मनाएगी, एक दिन उसे भी शिकार होना है। ओडिशा पुलिस ने कांग्रेस और राहुल गाँधी की जिस नब्ज को पकड़ा है लोक/राज्य सभा में विपक्ष द्वारा हंगामा करने पर एनडीए को सदन में इन मद्दों को उठाना था।     

ओडिशा पुलिस ने राहुल गाँधी के ‘इंडियन स्टेट से लड़ रहे’ वाले बयान के खिलाफ दर्ज FIR में जाँच आगे बढ़ा दी है। पुलिस की जाँच अब राजीव गाँधी फाउंडेशन (RGF) तक पहुँच गई है। फाउंडेशन को फाइनेंशियल रिकॉर्ड पेश करने का नोटिस भेजा गया है। इसमें इस्लामी कट्टरपंथी जाकिर नाइक और चीन से फंडिंग का ब्योरा माँगा गया है।

ओडिशा की झारसुगुडा पुलिस मामले की जाँच कर रही है। पुलिस ने 03 सितंबर 2025 को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS),2023 की धारा 94 के तहत RGF को नोटिस भेजा है। SDPO उमाशंकर सिंह द्वारा RGF के वित्त निदेशक संदीप आनंद को जारी किए गए नोटिस में माँग की:

  1. 1991 से विदेशी योगदान का पूरा रिकॉर्ड।
  2. बैंक खाता विवरण और अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता।
  3. लेखा परीक्षकों के नाम और संपर्क।
  4. FCRA लाइसेंस की कॉपी।
  5. जाकिर नाइक (2011) और चीन से 2005-6 के बीच ₹2.49 करोड़ के कथित दान पर स्पष्टीकरण।
  6. UPA शासन के दौरान PM राहत कोष के कथित दुरुपयोग पर स्पष्टीकरण।
                  ओडिशा पुलिस द्वारा राजीव गाँधी फाउंडेशन को जारी किए गए नोटिस के पहले पन्ने का स्क्रीनशॉट
RGF को 04 नवंबर 2025 तक इन सब जानकारियों के साथ दस्तावेज जमा करने होंगे। नोटिस का पालन न करने पर BNS की धारा 210 के तहत कार्रवाई करने की भी चेतावनी दी गई है।
मामले की जानकारी देते हुए IG संबलपुर हिमांशु लाल ने बताया, “जाँच अब उस चरण में पहुँच गई है जहाँ राजीव गाँधी फाउंडेशन (RGF) जैसी संबंधित संस्थाओं को रिकॉर्ड प्रस्तुत करने होंगे। यह एक कानूनी प्रक्रिया है। कानून अपना काम करेगा।”
गौरतलब है कि राहुल गाँधी भी राजीव गाँधी फाउंडेशन के बोर्ड सदस्यों में से एक हैं। इस फाउंडेशन की अध्यक्ष सोनिया गाँधी है। बोर्ड के अन्य सदस्यों में प्रियंका गाँधी वाड्रा, पी. चिदंबरम, सुमन दुबे, अशोक गांगुली, मोंटेक सिंह अहलूवालिया और विजय महाजन शामिल हैं।

राहुल गाँधी के खिलाफ FIR

यह नोटिस राहुल गाँधी पर जनवरी 2025 में दर्ज FIR से जुड़ा है। जब हिंदू संगठनों और BJP नेताओं ने राहुल गाँधी के ‘इंडियन स्टेट’ वाले विवादित बयान पर ओडिशा के झारसुगुडा में पुलिस से शिकायत की थी।
शिकायत में बताया गया कि राहुल गाँधी के बयान से भारत की एकता और अखंडता को खतरा है। शिकायतकर्ता राम हरि पुजारी ने कहा कि गाँधी ने ‘इंडियन स्टेट’ के खिलाफ युद्ध घोषित कर देशद्रोह भड़काया है।
मामले की जाँच के बाद IG हिमांशु लाल ने आरोपों को सही पाया और FIR दर्ज करने का निर्देश दिया था। यह मामला झारसुगुडा थाने में धारा 152 (भारत की एकता और संप्रभुता को खतरा) और धारा 197(1)(d) (झूठी या भ्रामक सूचना फैलाना) के तहत दर्ज हुआ।

राहुल गाँधी का देश-विरोधी बयान

यह पूरा विवाद राहुल गाँधी के 15 जनवरी 2025 को दिए गए बयान से शुरू हुआ। जब दिल्ली के कोटला रोड स्थित कांग्रेस मुख्यालय के उद्घाटन समारोह में राहुल गाँधी ने भाषण के दौरान देश-विरोधी बयान दिया। उन्होंने कहा था कि BJP और RSS ने देश के हर एक संस्थान पर कब्जा कर लिया है और कांग्रेस, BJP, RSS और ‘इंडियन स्टेट’ के खिलाफ संघर्ष कर रही है।
राहुल गाँधी ने कहा था, “मुझे नहीं लगता कि हम एक निष्पक्ष लड़ाई लड़ रहे हैं। इसमें कोई निष्पक्षता नहीं है। अगर आप मानते हैं कि हम BJP या RSS नामक किसी राजनीतिक संगठन से लड़ रहे हैं, तो आप समझ नहीं पाए हैं कि क्या हो रहा है। BJP और RSS ने हमारे देश की हर संस्था पर कब्ज़ा कर लिया है। अब हम BJP, RSS और इंडियन स्टेट से ही लड़ रहे हैं।”
इस बयान का हिंदू संगठनों और बीजेपी ने कड़ा विरोध किया। इसे भारतीय राज्य के खिलाफ और राष्ट्रीय एकता के लिए खतरा बताया।
जाँच में अब मामला गहराया गया है और राजीव गाँधी फाउंडेशन की फाइनेंसियल हिस्ट्री की भी पड़ताल की जा रही है। विदेशी और विवादित फंडिंग के आरोप साबित होने पर राजनीतिक और कानूनी गंभीर परिणाम हो सकते हैं। फाउंडेशन को नवंबर तक जरूरी दस्तावेज जमा करने के लिए कहा गया है।
अब यह मामला केवल भाषण नहीं, बल्कि गाँधी परिवार से जुड़े संस्थान की जाँच में बदल गया है।

‘3 दिन में माँफी माँगो, वरना तुम्हारे पैसे से तुम्हीं पर करेंगे कार्रवाई’ : कांग्रेस को नितिन गडकरी ने भेजा लीगल नोटिस


मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की ओर से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और महासचिव जयराम रमेश को कानूनी नोटिस भेजा गया है। ये नोटिस इसलिए है क्योंकि कॉन्ग्रेस ने केंद्रीय मंत्री के इंटरव्यू की एक वीडियो से क्लिप काटकर भ्रामक जानकारी प्रसारित करने की कोशिश की थी। इस नोटिस में कहा गया है कि कांग्रेस पार्टी नितिन गडकरी से लिखित में माफी माँगे वरना वो आगे कार्रवाई करेंगे।

केंद्रीय मंत्री के वकील बालेंदु शेखर द्वारा भेजे गए नोटिस में कांग्रेस नेताओं को कहा गया, “ये कानूनी नोटिस आपको एक्स से तुरंत उस पोस्ट को हटाने के लिए कहता है। कानूनी नोटिस मिलने के बाद किसी भी हालत में पोस्ट को अगले 24 घंटे में हटाया जाए। साथ ही तीन दिनों के भीतर मेरे मुवक्किल से लिखित माफी माँगी जाए।” नोटिस में आगे कहा गया, “अगर कांग्रेस द्वारा ऐसा नहीं किया जाता है, तो मेरे मुवक्किल के पास आपके जोखिम और खर्च (At your risk and expense) पर नागरिक एवं आपराधिक (Civil and Criminal) सभी कार्रवाइयों का सहारा लेने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचेगा।”

नितिन गडकरी की ओर से भेजे गए नोटिस में कांग्रेस द्वारा शेयर वीडियो क्लिप को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया गया है। साथ ही कहा गया कि कांग्रेस ने ऐसा जानबूझकर किया है ताकि भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों के बीच वैचारिक दरार पैदा हो सके।

नोटिस में कहा गया कि कांग्रेस की ऐसी हरकत से सोशल मीडिया पर बड़े स्तर पर लोगों ने उस वीडियो को देखा जो कि बिलकुल तथ्यात्मक नहीं है। इससे नितिन गडकरी की प्रतिष्ठा में क्षति, मानहानि और विश्वसनीयता में बड़ी हानि हुई है।

इंटरव्यू की वीडियो को तोड़-मरोड़कर, संदर्भहीन और प्रासंगिक अर्थ के बिना पेश किया गया है। कॉन्ग्रेस ने उन हिस्सों को काट दिया, जहाँ बताया गया था कि हालातों को सुधारने के लिए मोदी सरकार द्वारा कितने प्रयास किए जा रहे हैं जिसके वर्तमान में अच्छे परिणाम भी हैं।

क्यों है वीडियो पर विवाद?

कल (1 मार्च 2024) कांग्रेस ने अपने हैंडल पर एक वीडियो शेयर की थी जिसमें नितिन गडकरी को बोलते दिखाया गया था कि आज गाँव, गरीब, मजदूर और किसान दुखी हैं। गाँव में अच्छे रोड नहीं हैं, पीने के लिए शुद्ध पानी नहीं है, अच्छे अस्पताल नहीं हैं, अच्छे स्कूल नहीं।
इस वीडियो को शेयर करते हुए कांग्रेस ने ऐसा दिखाया जैसे नितिन गडकरी ने ये कहकर मोदी सरकार के कार्यों की पोल खोली हो। लेकिन इस वीडियो में हकीकत में जो पूरी बात केंद्रीय मंत्री ने कही थी वो थी कि- “कृषि पर जो पॉपुलेशन डिपेंड है वो 65 प्रतिशत है जब गाँधी जी थे जब 90% की आबादी गाँव में रहती थी और धीरे-धीरे 30% पलायन क्यों हुआ। इसका मतलब है कि आज गाँव गरीब, मजदूर, किसान दुखी है। इसका कारण है कि जल जंगल जमीन और जानवर… ये जो ग्रामीण इकोनॉमी है यहाँ अच्छे रोड नहीं है, पीने के लिए पानी नहीं है, अच्छा अस्पताल नहीं है, अच्छा स्कूल नहीं है, किसान के फसल को अच्छे भाव नहीं है… ऐसा नहीं है कि यहाँ विकास नहीं हुआ, लेकिन जिस हिसाब से बाकी जगह हुआ है उतना नहीं है। हमारी सरकार आने के बाद हम इसपर बहुत काम कर रहे हैं। ऐसे ब्लॉक निकाले गए हैं जहाँ विशेष रूप से कार्य करने की जरूरत है।”
वीडियो से साफ था कि गडकरी के बयान पर जो संदेश फैलाने का काम हो रहा है वो सरासर भ्रामक है। असल में केंद्रीय मंत्री ये बता रहे थे कि पलायन इसलिए हुआ क्योंकि ग्रामीणों को अच्छे संसाधन नहीं मिले और उनकी सरकार इस मुद्दे पर महत्वपूर्ण रूप से काम कर रही है। न कि वो ये कह रहे हैं कि मोदी सरकार में देश के ये हालात हैं।

कांग्रेस की इसी हरकत पर उन्हें नोटिस भेजा गया है। लेकिन अभी नोटिस का उनकी ओर से कोई जवाब नहीं आया।