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खुद को ‘ईसा मसीह’ मानने वाले नासिरे बेस्ट ने व्हाइट हाउस के बाहर बरसाईं ताबड़तोड़ गोलियाँ, चर्च में क्यों नहीं बरसाईं?

                                    व्हाइट हाउस और हमलावर नासिरे बेस्ट (फोटो साभार - आज तक)
पिछले दो/तीन दिनों से अमेरिका में फायरिंग के समाचार सुर्खी बने हुए हैं, आखिर हो रही फायरिंग के पीछे क्या कोई षड़यंत्र हैं?  

अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन DC में शनिवार (23 मई 2026) की शाम व्हाइट हाउस के बाहर अचानक गोलियाँ चलने लगीं। यह फायरिंग व्हाइट हाउस के बेहद सुरक्षित इलाके में बने एक सिक्योरिटी चेकपॉइंट के पास हुई।

घटना के समय राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व्हाइट हाउस के अंदर मौजूद थे, जिसके बाद पूरे इलाके में तुरंत हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया। अमेरिकी सीक्रेट सर्विस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए हमलावर को गोली मार दी। बाद में अस्पताल में उसकी मौत हो गई।

कैसे शुरू हुई पूरी घटना?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शाम करीब 6 बजे एक युवक 17th स्ट्रीट और पेनसिल्वेनिया एवेन्यू के पास बने सिक्योरिटी चेकपॉइंट तक पहुँचा। कुछ ही देर बाद उसने अपने बैग से रिवॉल्वर निकाली और सीक्रेट सर्विस अधिकारियों पर फायरिंग शुरू कर दी। बताया जा रहा है कि उसने शुरुआती दौर में कम से कम तीन गोलियाँ चलाईं।

सीक्रेट सर्विस के जवानों ने तुरंत मोर्चा संभाला और जवाबी फायरिंग की आवाज सुनते ही अफरा-तफरी मच गई। अधिकारियों ने मीडिया कर्मियों और आसपास मौजूद लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुँचाया।

कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि घटना के दौरान 20 से 30 राउंड तक गोलियाँ चलीं। घटना में एक आम नागरिक भी गोली लगने से घायल हो गया, जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

हालाँकि राहत की बात यह रही कि किसी भी सीक्रेट सर्विस अधिकारी को चोट नहीं आई। व्हाइट हाउस ने साफ किया कि राष्ट्रपति ट्रंप पूरी तरह सुरक्षित हैं और हमलावर सुरक्षा घेरे को पार नहीं कर पाया।

 घटना के बाद पूरे व्हाइट हाउस इलाके को कई घंटों तक घेराबंदी में रखा गया। अमेरिकी जाँच एजेंसी FBI और वॉशिंगटन DC पुलिस अब इस मामले की जाँच कर रही हैं। जाँच एजेंसियाँ CCTV फुटेज, चश्मदीदों के बयान और बैलिस्टिक सबूतों की जाँच कर रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि आरोपित का मकसद क्या था।

कौन था नासिरे बेस्ट?

पुलिस ने हमलावर की पहचान 21 साल के नासिरे बेस्ट के रूप में की है, जो मैरीलैंड का रहने वाला था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वह पहले भी सीक्रेट सर्विस की नजर में आ चुका था। उस पर व्हाइट हाउस से दूर रहने का आदेश भी जारी किया गया था, लेकिन इसके बावजूद वह कई बार प्रतिबंधित इलाके के आसपास देखा गया।

बताया जा रहा है कि जून 2025 में उसने सीक्रेट सर्विस एजेंटों को रोककर धमकी दी थी, जिसके बाद उसे हिरासत में लिया गया था। जुलाई 2025 में भी वह प्रतिबंधित क्षेत्र में घुसने की कोशिश करते पकड़ा गया था।

नासिरे बेस्ट मानसिक रूप से परेशान था और खुद को ईसा मसीह मानता था। शनिवार की घटना में उसने रिवॉल्वर का इस्तेमाल किया लेकिन सीक्रेट सर्विस की जवाबी कार्रवाई में वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

सवाल यह है कि अगर आरोपी मानसिक रूप से परेशान था तो व्हाइट हाउस ही क्यों चुना, चर्च क्यों नहीं चुना? यह निश्चितरूप से कोई सुनियोजित षड़यंत्र है।   

 ताबड़तोड़ गोलीबारी से दहला होंडुरास, दो हमलों में 25 लोगों की मौत: बंदूकधारियों ने मजदूरों और पुलिसकर्मियों पर बरसाईं गोलियाँ

सेंट्रल अमेरिका के देश होंडुरास में गुरुवार (21 मई 2026) को हुई दो अलग-अलग गोलीबारी की घटनाओं ने पूरे देश को हिला दिया। इन हमलों में अब तक कम से कम 25 लोगों की मौत हो चुकी है जिनमें 6 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।

सबसे बड़ा हमला ट्रूजिलो इलाके के एक खेत और प्लांटेशन में हुआ, जहाँ हथियारबंद हमलावरों ने मजदूरों पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। इस हमले में 19 लोगों की जान चली गई।

यह इलाका लंबे समय से जमीन और प्राकृतिक संसाधनों को लेकर चल रहे विवादों से प्रभावित है। यहाँ पर्यावरण और जमीन के अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले लोगों को पहले भी धमकियाँ मिलती रही हैं।

दूसरी घटना ग्वाटेमाला सीमा के पास ओमोआ इलाके में हुई, जहाँ बदमाशों ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया। पुलिसकर्मी राजधानी तेगुसिगल्पा से एंटी-गैंग मिशन पर जा रहे थे, तभी उन पर गोलियाँ बरसा दी गईं।

इस हमले में एक वरिष्ठ अधिकारी समेत 6 पुलिसकर्मियों की मौत हो गई। पुलिस और सेना ने दोनों इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी है और जाँच के लिए फॉरेंसिक टीमों को भेजा गया है।

अमेरिका के कैथोलिक स्कूल में ट्रांस शूटर रॉबिन वेस्टमैन ने की 2 बच्चों की हत्या-17 घायल, हथियारों पर लिखे ‘माशाल्लाह’ और ‘न्यूक इंडिया’ जैसे नारे: भारत-इजरायल विरोधी नफरत से भरा था हत्यारा

                                                      रॉबिन वेस्टमैन (फोटो साभार: X_LauraLoomer)
अमेरिका के मिनियापोलिस में 23 साल के ट्रांसजेंडर रॉबिन वेस्टमैन ने एक कैथोलिक चर्च और स्कूल में गोलीबारी कर दी। इस हमले में दो बच्चों की मौत हो गई और 17 लोग घायल हुए, जिनमें 14 बच्चे और 3 बड़े शामिल हैं। रॉबिन वेस्टमैन ने अपने हथियारों पर ‘माशाल्लाह’ और ‘न्यूक इंडिया’ लिखा था।

इस्लामी शब्द और भारत को परमाणु हथियारों से खत्म करने की बात के अलावा, रॉबिन ने इजरायल को बर्बाद करने की कसम भी खाई थी। उसने अपनी बंदूक पर ‘इजरायल को खत्म करना होगा’ लिखा था।

 रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना बुधवार (27 अगस्त 2025) सुबह करीब 8:30 बजे हुई, जब बच्चे चर्च में प्रार्थना सभा में शामिल थे। रॉबिन ने चर्च की खिड़कियों के बाहर से गोलियाँ चलाईं, जिससे वहाँ मौजूद लोग दहशत में आ गए। मिनियापोलिस पुलिस प्रमुख ब्रायन ओ’हारा ने बताया कि यह हमला एक सुनियोजित ‘घरेलू आतंकवाद’ और ‘कैथोलिक समुदाय के खिलाफ हेट क्राइम’ के तौर पर जाँचा जा रहा है। रॉबिन ने हमले के बाद खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली।

भारत और यहूदी विरोधी नफरत से भरा था हत्यारा

रॉबिन वेस्टमैन ने अपने हथियारों पर कुछ चौंकाने वाले नारे लिखे थे। उसकी राइफल, शॉटगन और पिस्तौल पर ‘माशाल्लाह’, ‘न्यूक इंडिया’ और ‘इजरायल को खत्म करना होगा’ जैसे शब्द लिखे थे। उसने अपने हथियारों पर ‘बच्चों के लिए’, ‘तुम्हारा भगवान कहाँ है?’ और ‘डोनाल्ड ट्रंप को मारो’ जैसे नारे भी लिखे थे। इसके अलावा, एक गोला-बारूद की मैगजीन पर ‘स्किबिडी’ शब्द लिखा था, जो एक ऑनलाइन चरमपंथी मंच से जुड़ा हो सकता है।

रॉबिन ने अपने हथियारों पर दो अन्य हत्यारों के नाम भी लिखे थे – ‘रुपनो’ और ‘ब्रेविक’। ‘रुपनो’ का जिक्र संभवतः नटाली रुपनो से है, जिसेने पिछले साल विस्कॉन्सिन में एक स्कूल में गोलीबारी की थी। वहीं ‘ब्रेविक’ का संबंध नॉर्वे के कुख्यात हत्यारे एंडर्स ब्रेविक से हो सकता है, जिसने 2011 में 77 लोगों की हत्या की थी।

रॉबिन ने हमले से पहले यूट्यूब पर दो वीडियो पोस्ट किए थे, जिन्हें अब हटा दिया गया है। पहले वीडियो में उसने सिरिलिक अक्षरों में लिखा एक दस्तावेज़ दिखाया, जो अंग्रेजी में था। दूसरे वीडियो में उसने चार पेज का एक पत्र दिखाया, जिसमें उसने अपने परिवार और दोस्तों से माफी माँगी और अपने दर्द और पीड़ा की बात की।

इन वीडियो में उसने अपने हथियारों का जखीरा भी दिखाया, जिसमें राइफल, पिस्तौल, शॉटगन और कई मैगजीन शामिल थे। हथियारों पर सिल्वर रंग मार्कर से लिखे गए राजनीतिक और नफरत भरे नारे साफ दिख रहे थे। पुलिस ने बताया कि रॉबिन ने ये हथियार पूरी तरह कानूनी तौर पर खरीदे थे।

एफबीआई निदेशक काश पटेल ने इस हमले को कैथोलिक समुदाय के खिलाफ हेट क्राइम बताया है। जाँच में पता चला कि रॉबिन पहले इसी चर्च और स्कूल का छात्र रह चुका था, लेकिन यह साफ नहीं है कि उसने इस जगह को निशाना क्यों बनाया।

एंटी-डिफेमेशन लीग के विश्लेषण के मुताबिक, रॉबिन के लेखन में कैथोलिक, यहूदी, अश्वेत, एलजीबीटीक्यू+ समुदाय, मुस्लिम और हिस्पैनिक लोगों के खिलाफ नफरत भरे संदेश थे। उसने अपने हथियारों पर ‘बच्चों के लिए’, ‘तुम्हारा भगवान कहाँ है?’ और ‘डोनाल्ड ट्रंप को मारो’ जैसे नारे भी लिखे थे।

रॉबिन की माँ मैरी वेस्टमैन ने 2019 में कोर्ट में याचिका दायर कर अपने बच्चे का नाम बदलवाया था, क्योंकि रॉबिन खुद को महिला के रूप में पहचानता था। 2020 में जब रॉबिन 17 साल का था, जज ने इस बदलाव को मँजूरी दी थी। रॉबिन का आखिरी पता साउथ सेंट पॉल इलाके का एक अपार्टमेंट था।

पुलिस ने बताया कि हमले के दौरान स्कूल में पहली हफ्ते की प्रार्थना सभा चल रही थी। बच्चे और शिक्षक नए स्कूल साल की शुरुआत कर रहे थे।

सेंट क्लाउड के बिशप पैट्रिक एम. नियरी ने कहा, “यह एक बेगुनाह लोगों पर किया गया क्रूर हमला है। बच्चे प्रार्थना कर रहे थे, जब गोलियाँ चलीं। हम इस दुख से उबरने की कोशिश कर रहे हैं।” घायलों में दो बच्चे गंभीर हालत में हैं और तीन बुजुर्ग पैरिशनर भी गोलीबारी में घायल हुए हैं।

रॉबिन की ऑनलाइन गतिविधियों से पता चलता है कि वह नफरत फैलाने वाले ऑनलाइन समुदायों से जुड़ा था। जाँचकर्ता अभी यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि उसकी इस हिंसा के पीछे की वजह क्या थी।

साउदर्न पॉवर्टी लॉ सेंटर की रेचल कैरोल-रिवास ने कहा, “यह समझना मुश्किल है कि इस हिंसा की जड़ में क्या था। रॉबिन के विचारों में कई तरह की विचारधाराएँ और नफरत थी, जो किसी एक बॉक्स में फिट नहीं होती।”

यह घटना न केवल मिनियापोलिस बल्कि पूरे अमेरिका के लिए एक बड़ा झटका है। लोग इस बात से दुखी और गुस्से में हैं कि मासूम बच्चों को निशाना बनाया गया। यूएस होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी क्रिस्टी नोएम ने कहा, “हम उन परिवारों के साथ हैं, जिन्होंने अपने बच्चों को खोया। हम उनके लिए प्रार्थना करते हैं।”