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लालू यादव स्वयंभू अध्यक्ष बने और बेटों में उत्तराधिकार की लड़ाई, तेजस्वी सीएम फेस और तेजप्रताप किंगमेकर; तेजप्रताप को परिवार से बहिष्कृत करना गहरा षड़यंत्र

परिवार केन्द्रित पार्टियों में अध्यक्ष पद में और कोल्हू के बैल में कोई फर्क नहीं। जिस तरह कोल्हू का बैल तेल निकलने के लिए सुबह से शाम तक एक सीमा में चक्कर लगाता है, ठीक यही हालत परिवार केन्द्रित पार्टियों की है। परिवार से बाहर का नेता अध्यक्ष ही नहीं बन सकता। कांग्रेस गोलमाल कर सबको पागल बना गुमराह किये हुए है। परिवार से बाहर का बना कांग्रेस अध्यक्ष सिर्फ आँखों में धूल झोंकने से कम नहीं। क्योकि जो परिवार के हुक्म के बिना रोटी नहीं खा सकता ऐसे अध्यक्ष से क्या फायदा। देखा नहीं कांग्रेस अध्यक्ष खड़के कर्नाटक में विवाद होने पर बोलता है "फैसला high command करेगा", अब अक्ल से पैदल खड़के से पूछो कि अध्यक्ष से बड़ा high command कौन होता है? यानि खड़के ने खुद साबित कर दिया कि "कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष नहीं बल्कि गाँधी परिवार का गुलाम है।"     

बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले ही राष्ट्रीय जनता दल (राजद) में लालू प्रसाद यादव के दोनों बेटों के बीच उत्तराधिकार की लड़ाई जमीन पर आ गई है। हाल ही में लालू यादव ने बड़े बेटे तेज प्रताप को कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते पार्टी से निलंबित कर दिया। आरोप है कि वे तेजस्वी यादव को आगे बढ़ाने में लगे हैं। तेजस्वी भी चुनाव से पहले खुद को स्वंयभू सीएम के तौर पर प्रोजेक्ट करने में लगे हैं। हालांकि महागठबंधन की ओर से उन्हें सीएम फेस बनाने पर कोई सहमति नहीं बनी है। दूसरी ओर तेज प्रताप यादव ने भी चेतावनी भरे लहजे में बोल दिया है कि लालू यादव का असली उत्तराधिकारी कौन होगा, ये कोई और नहीं बल्कि बिहार की जनता तय करेगी। लेकिन इतना तो तय है कि बिहार में असली किंगमेकर की भूमिका में वे ही होंगे। तेज प्रताप यादव और राजद के अन्य वरिष्ठ नेताओं के बीच चल रही तनातनी महागठबंधन की चुनावी संभावनाओं को जरूर नुकसान पहुंचा सकती है। बिहार सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे तेज प्रताप पिछले कुछ समय से लालू यादव के उत्तराधिकारी और उनके छोटे भाई तेजस्वी प्रसाद यादव के लिए परेशानी खड़ी कर रहे हैं।

 बिहार की जनता ही लालू का उत्तराधिकारी तय करेगी – तेजप्रताप

लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और राष्ट्रीय जनता दल से निष्कासित तेज प्रताप यादव ने कहा है कि लालू यादव का उत्तराधिकारी कौन है ये बिहार की जनता तय करेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि पिता लालू यादव का अंदाज जब मेरे अंदर आता है तो लोग पसंद करते हैं। जो जमीन से जुड़ा रहता है उसका बोली भी वैसा ही निकलता है। हम जमीन से जुड़े नेता हैं। कभी मीटिंग में जाते हैं, जनसभा करते हैं तो उस तरह का आवाज निकलता है। सब लोग कहते हैं कि आपका ठेठ लालू जी वाला आवाज है, अंदाज है। तेज प्रताप यादव ने आजतक से बातचीत में साफ-साफ कहा कि बिहार चुनाव में किंगमेकर की भूमिका में मैं ही रहूंगा। जैसे उनके पिता लालू यादव किंग मेकर की भूमिका निभाते रहे हैं। तेज प्रताप यादव ने कहा हमारे काम से दुश्मन का सफाया होगा. उन्होंने कहा कि वे कृष्ण के भक्त हैं और जो भी साजिश रचेगा उसे वे तोड़ेंगे और अपना काम करके तोड़ेंगे।
रिलेशनशिप उजागर होने पर तेजप्रताप को पार्टी से निकाला था
दरअसल, भाइयों की तनातनी के बीच बिहार चुनाव से पहले लालू यादव ने अपने एक ‘लाल’ से नाता तोड़ लिया। तेजप्रताप ने अपना रिलेशनशिप वाला शिगूफा क्या छोड़ा, उससे लालू समेत सारी पार्टी ही असहज हो गई। उन्हें लगा कि इससे चुनाव में विरोधियों को अच्छा मौका मिल जाएगा। इसलिए तेज प्रताप यादव को पार्टी से, परिवार से निकाले जाने की घोषणा लालू यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए की। लालू यादव ने अपने बेटे तेजप्रताप यादव को पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया। जिसके बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। सवाल यह है कि तेज प्रताप यादव का अगला कदम क्या होगा, क्या वे नई पार्टी बनाएंगे या किसी अन्य दल में शामिल होंगे या फिर निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे। हर सूरत में इसका नुकसान राजद को होगा। इस बीच लालू यादव की बहू ऐश्वर्या ने दावा किया कि उनके पति तेज प्रताप यादव को पार्टी से निष्कासित करना आगामी बिहार विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर किया गया एक ‘नाटक’ है। भाजपा और अन्य दलों ने भी लालू के इस कदम को चुनाव के लिए उठाया गया राजनीतिक स्टंट करार दिया है। यह तय है कि तेज प्रताप को लेकर लालू-तेजस्वी को विधानसभा चुनाव में नुकसान उठाना पड़ेगा।
मैं ही हूं सीएम फेस, बिहार को स्कॉटलैंड बना दूंगा- तेजस्वी
बिहार विधानसभा चुनावों से पहले तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री पद के लिए अपना दावा पेश किया है, जिसमें इंडिया गठबंधन की सहमति का दावा भी किया गया है। साथ ही सरकार बनने पर बिहार को स्कॉटलैंड बनाने का वादा किया। उन्होंने अपने भाई तेजप्रताप यादव को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। तेजस्वी यादव ने कहा कि तेजप्रताप यादव ने जो किया, वो मुझे पसंद नहीं है। सीएम फेस को लेकर तेजस्वी यादव से पहले कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार भी बयान दे चुके हैं। विधानसभा चुनाव को लेकर बिहार का सियासी पारा अभी से हाई हो चुका है। तमाम मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच घमासान मचा हुआ है। सीएम फेस का स्वयंभू ऐलान करने से पहले तेजस्वी यादव ने दावा किया कि बिहार में महागठबंधन की सरकार बनने पर वक्फ अधिनियम को कूड़ेदान में फेंक दिया जाएगा।
राजद फिर पार्टी नहीं प्रॉपर्टी बनी, लालू यादव 13वीं बार अध्यक्ष
इस बीच बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव 13वीं बार राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए हैं। एक तरह से उन्होंने राजद को घर की पार्टी ही बना दिया है, जिसमें पार्टीगत लोकतंत्र नाम को कोई चीज नहीं है। उनके चयन की औपचारिक घोषणा आगामी पांच जुलाई को पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में होगी। पांच जुलाई 1997 को आरडेजी के अस्तित्व में आने के बाद से लालू यादव ही लगातार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे हैं। वे सेहत संबंधी बीमारियों के चलते सार्वजनिक मंचों पर कम ही दिखते हैं और राजनीतिक रूप से उनकी सक्रियता भी काफ़ी कम हुई है, लेकिन अध्यक्ष बनने का लोभ वे अभी भी संवरण नहीं कर पा रहे हैं। जेडीयू प्रवक्ता अंजुम आरा कहती हैं, “लालू प्रसाद यादव सज़ायाफ़्ता हैं और उनको अध्यक्ष बनाना ये साबित करता है कि आरजेडी में संविधान, लोकतांत्रिक मर्यादाएँ मायने नहीं रखती।” वहीं बीजेपी नेता और बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने राजद को “पार्टी नहीं प्रॉपर्टी” की संज्ञा दी है। वो कहते हैं, “ये बार-बार नामांकन की नौटंकी क्यों की जा रही है? जब राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद तो लालू के पास ही रहेगा।”
तेज प्रताप यादव के राजद के असली उत्तराधिकारी-जीवेश कुमार
तेजस्वी और तेजप्रताप के बीच उत्तराधिकार की लड़ाई के बीच नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री जीवेश कुमार ने तार्किक रूप से अपनी बात रखी है। हाजीपुर सर्किट हाउस में मीडिया से बात करते हुए मंत्री जीवेश ने कहा कि तेज प्रताप यादव ही राजद और लालू के असली उत्तराधिकारी हैं। वे सही मायने में एक कुशल नेतृत्वकर्ता हैं, लेकिन लालू प्रसाद ने तेज प्रताप के साथ न सिर्फ नाइंसाफी की है बल्कि उन्हें हाशिए पर रखा है। आने वाले समय में उन्हें अपने अधिकारों की रक्षा और उसे पाने के लिए युद्ध करना पड़ेगा। फाइटर प्लेन उड़ाने की ट्रेनिंग लेने और पीएम मोदी से युद्ध में जाने का मौका मांगने के तेज प्रताप के बयान पर उन्होंने कहा कि राजा-महाराजा के समय से यह परंपरा चली आ रही है, कि घर के बड़े बेटे को युवराज और परिवार की वारिस का उत्तराधिकारी बनाया जाता है, लेकिन परिवारवादी पार्टी राजद में छोटे पुत्र तेजस्वी को आगे कर उन्हें उत्तराधिकारी बना दिया गया।

इब्राहिम रईसी : जिसके राज में 1 साल में 853 को मिली सजा-ए-मौत, जिसे कहते थे ‘तेहरान का कसाई’; उसके इंतकाल के बाद किस राह जाएगा ईरान?

                                            इब्राहिम रईसी (चित्र साभार: The New Arab)
ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की रविवार (19 मई, 2024) को हुई एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में 8 अन्य लोगों समेत मौत हो गई। इब्राहिम रईसी का हेलीकॉप्टर एक दुर्गम इलाके में जाकर क्रैश हो गया। राहत बचाव टीमों ने उनकी तलाश में कई घंटे का अभियान चलाया, जिसके बाद उनके शव सोमवार को बरामद किए जा सके।

 इब्राहिम रईसी के साथ ही इस दुर्घटना में ईरान के विदेश मंत्री हुसैन अमीर अब्दोल्लाहियान की भी मौत हो गई। रईसी के साथ यह दुर्घटना ईरान के पूर्वी अजरबैजान प्रांत से लौटते समय हुई। यहाँ वह एक बाँध का उद्घाटन करने गए हुए थे। उनके साथ अन्य कई महत्वपूर्ण लोग मौजूद थे। रईसी की मौत के बाद ईरान में नए नेतृत्व के लिए कवायद चालू हो गई है।

कौन थे इब्राहिम रईसी

हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मारे गए इब्राहिम रईसी 63 वर्ष के थे। वह 2021 में चुनाव जीत कर ईरान के 13वें राष्ट्रपति बने थे। इससे पहले 2017 में वह राष्ट्रपति चुनाव हार चुके थे। कट्टरपंथी माने जाने वाले रईसी ईरान के मुख्य न्यायाधीश भी रहे थे। उन्हें 2019 में ईरान का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया था। रईसी ईरान के आयतुल्लाह खुमैनी और आयतुल्लाह खामनेई दोनों के करीबी माने जाते थे। इब्राहिम रईसी मूल रूप से ईरान के मश्दाद के रहने वाले थे और 1979 में ईरान में हुए तख्तापलट के प्रदर्शनों में शामिल रहे थे।
इब्राहिम रईसी ने सरकार में अन्य कई महत्वपूर्व जिम्मे भी सम्भाले थे। रईसी ने ईरान के सबसे बड़े दीनी तालीम के मदरसे, कोम से शिक्षा हासिल की थी। रईसी के दो बेटियाँ हैं। उन्होंने 1982 में निकाह किया था। रईसी को सेना, न्यायपालिका और IRGC का बेहद करीबी माना जाता था। ईरान के वर्तमान सुप्रीम लीडर आय्तोल्लाह खामनेई के उत्तराधिकारी के रूप में उन्हें ही देखा जाता था, वह उनके काफी नजदीकी थे। उनकी मौत के बाद नया राष्ट्रपति बनाए की प्रकिया चालू हो गई है।

इब्राहिम रईसी को कहते थे ‘तेहरान का कसाई’

इब्राहिम रईसी एक धड़े ने ‘तेहरान का कसाई’ की संज्ञा दी है। यह संज्ञा उन्हने उन्हने 1988 में एक समिति में रहने कारण दी गई है। इस समिति ने 1988 में 500 लोगों को फांसी की सजाएँ दी थी। यह सजाएँ राजनीतिक कैदियों को दी गई थीं। रईसी को कट्टरपंथी माना जाता था, वह 2015 में ईरान-अमेरिका और यूरोपियन देशों के बीच JCPOA डील के विरुद्ध थे, इसके अंतर्गत ईरान पर से प्रतिबन्ध हटाए जाने थे। बदले में ईरान ने अपना परमाणु प्रोग्राम रोकने का वादा किया था।

अब कौन होगा ईरान का राष्ट्रपति

इब्राहिम रईसी की मौत के बाद अब मोहम्मद मोखबर को ईरान का राष्ट्रपति बनाया जाएगा। वह वर्तमान में ईरान के पहली वरीयता के उपराष्ट्रपति हैं। मोखबर अगले 50 दिनों के लिए अंतरिम राष्ट्रपति का रोल निभाएँगे। मोखबर ईरान की सेताद नाम की संस्था के प्रमुख रहे हैं। यह संस्था ईरान में भलाई के काम देखती है। इसे ईरान के पहले सुप्रीम लीडर खुमैनी के आदेश पर स्थापित किया गया था। मोखबर ईरान की एक बैंक के भी मुखिया रहे हैं।
जहाँ ईरान में अधिकांश नेता मजहबी पृष्ठभूमि से आते हैं, मोखबर की छवि एक एक्सक्युटिव वाली है। मोखबर ने 2017 में ईरान के राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए पर्चा भरा था, लेकिन बाद में उन्होंने रईसी के समर्थन में अपना नाम वापस ले लिया था। अब राष्ट्रपति पद के लिए होने वाले अगले चुनावों में मोखबर के भी प्रत्याशी बनने की संभावना है।

मोखबर को क्यों बनाया जा रहा राष्ट्रपति

दरअसल, मोखबर को राष्ट्रपति बनाए जाने के पीछे ईरान का एक कानून है। इसके अंतर्गत यदि राष्ट्रपति की आकस्मिक मौत हो जाती है, या फिर वह लम्बी बीमारी के कारण अपना काम करने में सक्षम नहीं रहता, तो उसकी जगह सबसे वरिष्ठ उपराष्ट्रपति को अंतरिम राष्ट्रपति बनाया जाता है और 50 दिनों के भीतर पूर्णकालिक राष्ट्रपति के लिए चुनाव करवाए जाते हैं। ईरान में एक से अधिक उपराष्ट्रपति होते हैं, इनको राष्ट्रपति स्वयं नियुक्त करता है। जो पहली वरीयता का उपराष्ट्रपति होता है, वह राष्ट्रपति का रोल किसी समस्या के कारण निभाता है।

रईसी की मौत: ईरान के लिए संकट

इब्राहिम रईसी की मौत ऐसे समय में हुई जब ईरान कई समस्याओं से गुजर रहा है। रईसी की मौत के कारण ईरान में नेतृत्व का संकट खड़ा हो गया है। वर्तमान में ईरान, इजरायल से सीधा खतरा झेल रहा है। उसने हाल ही में इजरायल पर हमला भी किया था। हमास के आतंकियों के समर्थन में ईरान होर्मुज की खाड़ी में भी कई जहाजों को निशाना बना चुका है। रईसी के ही कार्यकाल में ऐसा पहली बार हुआ है कि ईरान ने इजरायल पर सीधा हमला किया हो।
इसके अलावा ईरान पर अमेरिका समेत पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबन्ध अभी भी जारी हैं। इस कारण से ईरान में जनजीवन प्रभावित हुआ है। ईरान को अपना कच्चा तेल बेचने में भी समस्या आ रही है। ईरान के साथ हुई सामान्यीकरण की डील JCPOA से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाथ खींच लिए थे। अमेरिका में सत्ता परिवर्तन के बाद भी ईरान पर लगे प्रतिबंधों में कोई ढील नहीं दी गई है। ऐसे में रईसी की मौत इस समस्या को और गहरा कर रही है।
रईसी के कार्यकाल में ईरान को मात्र बाहरी नहीं बल्कि आंतरिक समस्याओं से भी जूझना पड़ा है। 2022 में ईरान में एक महिला महशा अमीनी की हिजाब ना पहनने के कारण सुरक्षाबलों द्वारा हत्या किए जाने के बाद पूरा देश उबल पड़ा था। ईरान में तब बड़ी संख्या में प्रदर्शन हुए थे। महिलाओं ने इस दौरान हिजाब जला और बाल काट कर अपना रोष प्रकट किया था। इसके बाद सड़कों अपर सुरक्षाबलों को उतरना पड़ा था। एक रिपोर्ट बताती है कि ईरान ने प्रदर्शनों को रोकने के लिए 800 से अधिक लोगों को मौत की सजा दी थी।

रईसी की मौत से ईरान की जनता को मौका

रईसी की मौत से ईरान की जनता को एक बार फिर अपना नेतृत्व चुनने का मौक़ा मिलेगा। ईरान की जनता ने रईसी से पहले हसन रूहानी को चुना था जो कि उदारवादी माने जाते थे। उनके मुकाबले रईसी को कट्टर समझा जाता था। रूहानी के राष्ट्रपति रहते हुए ही ईरान और अमेरिका तथा पश्चिमी देशों के बीच JCPOA समझौता हुआ था जिसके कारण ईरान पर लगे प्रतिबंधों में ढील दी गई थी। अब ईरान की जनता को फिर से यह मौक़ा मिलेगा कि वह रईसी की तरह ही किसी कट्टरपंथी को दोबारा मौका देती है या फिर कोई उदारवादी नेता सत्ता में आता है।(साभार)