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दिल्ली : विभव कुमार को NCW ने बुलाया; पुलिस मालीवाल के घर पहुंची; अपने वकील अभिषेक मनु सिंघवी को राज्यसभा भेजने के लिए केजरीवाल ने स्वाति मालीवाल से माँगा इस्तीफा: रिपोर्ट में दावा


राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के पूर्व निजी सचिव बिभव कुमार को तलब किया है। आयोग ने उन्हें शुक्रवार (17 मई, 2024) को इस मामले में पेश होने को कहा गया है। उन्हें AAP की राज्यसभा सांसद और दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष स्वाति मालीवाल से बदसलूकी के मामले में तलब किया गया है।

स्वाति मालीवाल से दिल्ली CM आवास में हुई बदसलूकी मामले में अब दैनिक भास्कर ने एक रिपोर्ट में बताया है कि वह घटना वाले दिन अपनी राज्यसभा सीट को लेकर बात करने गईं थी। भास्कर की रिपोर्ट दावों के अनुसार, स्वाति मालीवाल से AAP ने सांसद पद से इस्तीफ़ा देने को कहा है। वह इस इस्तीफे को लेकर दिल्ली CM अरविन्द केजरीवाल से बात करने गईं थी।


   दैनिक भास्कर की खबर का वह हिस्सा, जहाँ स्वाति की जगह सिंघवी को राज्यसभा भेजे जाने की बात कही गई है।

इसी रिपोर्ट में कहा गया है कि स्वाति मालीवाल के बदले अब AAP वकील और कांग्रेस के पूर्व राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी को राज्यसभा भेजना चाहती है। इसीलिए स्वाति से सीट खाली करने को कहा गया है। स्वाति को यह सन्देश कुछ पार्टी कार्यकर्ताओं के जरिए भिजवाया गया था। उन्हें पार्टी में बड़ा पद दिए जाने की बात भी कही गई थी।

स्वाति की जगह जिन वकील अभिषेक मनु सिंघवी को AAP से राज्यसभा भेजे जाने की बात कही जा रही है, वह पूर्व में कांग्रेस से राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। वह हाल ही में हिमाचल प्रदेश से कांग्रेस से राज्यसभा का चुनाव विधायकों की बगावत के चलते हार गए थे। अभिषेक मनु सिंघवी ही दिल्ली शराब घोटाला मामले में CM केजरीवाल की पैरवी कर रहे हैं। उनकी ही पैरवी से सुप्रीम कोर्ट ने CM केजरीवाल को 1 जून तक के लिए चुनाव प्रचार करने की अंतरिम जमानत दी है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट से पहले भी डेली पायनियर की एक रिपोर्ट में ऐसा ही दावा किया गया था। डेली पायनियर में सौम्या शुक्ला की एक रिपोर्ट के अनुसार, स्वाति मालीवाल से उनके राज्यसभा सांसद के पद से इस्तीफ़ा देने को पार्टी ने कह़ा है। हालाँकि, उस रिपोर्ट में उनकी जगह सिंघवी को भेजे जाने की बात नहीं कही गई थी।

इसके अलावा यह बात भी कही जा रही है कि स्वाति मालीवाल, CM केजरीवाल की गिरफ्तारी के समय अमेरिका में थी और इस मामले में अधिक सक्रिय नहीं रहीं थीं। कहा जा रहा इसको लेकर पार्टी का एक धड़ा उसने नाराज है, इसलिए भी उनके सांसद पद पर खतरा मंडरा रहा है।

13 मई, 2024 को सुबह AAP राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने पुलिस को फ़ोन करके बताया कि उनके साथ CM आवास में मारपीट हुई। बताया गया कि उन्होंने CM केजरीवाल के निजी सचिव बिभव कुमार पर मारपीट के आरोप लगाए लेकिन थाने में रिपोर्ट नहीं दर्ज करवाई। इस मामले में दिल्ली पुलिस के अफसर उनके घर भी पहुँचे।

AAP की तरफ से इस मामले को लेकर राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और यह बात मानी कि बिभव कुमार ने मालीवाल के साथ बदसलूकी की है। उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला CM केजरीवाल के संज्ञान में है और इस पर कार्रवाई होगी।

स्वाति मालीवाल से हुई बदसलूकी की वजह पर कयासों के बीच इसकी सच्चाई इस घटनाक्रम से जुड़े किरदार ही बता सकते हैं। पहला किरदार पीड़ित यानी स्वाति मालीवाल हैं, जिन्होंने घटना के बाद से चुप्पी साध रखी है। दूसरा किरदार आरोपित बिभव कुमार है, जो अरविन्द केजरीवाल के साथ घूम रहा है। तीसरे किरदार CM केजरीवाल खुद हैं, जिन्होंने इससे जुड़े सवालों के कोई जवाब नहीं दिए और जिनके साथ लखनऊ में बिभव कुमार को देखा गया।

अगर सिंघवी को राज्यसभा का सदस्य बनाना ही है तो स्वाति मालिवाल ही क्यों इस्तीफा दे? संजय सिंह और बाकी सदस्य इस्तीफा क्यों ना दें? उसके लिए स्वाति को पीटना जरूरी क्यों था?

संजय का ड्रामा हजम नहीं हो रहा है। स्वाति के पूर्व पति नवीन जयहिंद ने सही बोला है। स्वाति को खुलकर सामने आना चाहिए।

1. उड़ती उड़ती खबर है के स्वाति के बाद अगला नंबर टिकट ब्लैकिया का है आप पार्टी वालों ने उसको पार्टी ऑफिस में भी एंर्टी से मना कर दिया….

आज केजरीवाल उसकी प्रेस कॉन्फ़्रेंस से नाराज़ है क्योंकि किसी भी पार्टी के लीडर को बताये बिना…संजय सिंह ने ख़ुद ही ये प्रेस कॉन्फ़्रेंस की थी ।

2.घर का मामला पब्लिक में उछाले जाने से केजरीवाल सांड को पीटने के लिये ढूँढ रहा है सुनने में ये भी है ठगबंधन की रैली में जाना भी कैंसिल कर दिया केजरीवाल ने और संजू अब घर में छुपकर बैठा है । संजय सिंह  ने कल की प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कर अपनी राज्यसभा की सीट को सुरक्षित करने के लिए की थी  ।

3.स्वाती के सीट खाली ना करने के बाद केजरीवाल संजय सिंह को बलि का बकरा बनाना चाहता था ।केजरीवाल को किसी भी प्रकार अभिषेख मनु सिंघवी को राज्यसभा पहुचना है वरना केजरीवाल को जिंदगी भर जेल की चक्की पीसनी होगी ।असली खेल शुरू हुआ है अब आप मे एक दूसरे को ढूंढा जा रहा है किस की बलि दी जाए ।

4. सजंय सिंह ने आज अपनी जान बचा वैभव की बलि दे दी।

अवलोकन करें:-

अपने मृत पिता पर यौन शोषण के आरोप से बदनाम करने वाली CM हाउस में खुद के साथ बदसलूकी पर चुप क्यों: कई

अब देखना ये है केजरीवाल किस की बलि देता है । 2 जून को केजरीवाल को वापस जेल जाना है लेकिन उस से पहले सब एक दूसरे के नारियल तोड़ चुके होंगे ।।

पिक्चर अभी बाकी है अभी तो बहुत कुछ बाहर आना बाकी है ।

‘हिंदू-सिख विभाजन के लिए कांग्रेस ने खालिस्तान मुद्दे को दिया जन्म, भिंडरांवाले को बढ़ाया’: 1 अकबर रोड की बैठक का पूर्व रॉ अधिकारी ने किया खुलासा

पूर्व रॉ अधिकारी GBS सिद्धू ने बताया कैसे पैदा हुआ भिंडरांवाले (फोटो साभार: ANI)
बोया पेड़ बबूल का, आम कहाँ से होए यानि कांग्रेस ने जिस बबूल को पेड़ यानि खालिस्तान को जन्म दिया, उसी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की जान ले ली, जिसे कांग्रेस बलिदान करार कर हर चुनाव में भुनाने की कोशिश करती है। भारत की ख़ुफ़िया एजेंसी RA&W के पूर्व स्पेशल सेक्रेटरी GBS सिद्धू ने खालिस्तान के मुद्दे पर बोलते हुए कहा कि ‘ऑपरेशन भिंडरांवाले’ की शुरुआत और इसका प्रबंधन 1, अकबर रोड स्थित प्रधानमंत्री आवास में बैठे कुछ नेता कर रहे थे, जिनमें ज्ञानी जैल सिंह, संजय गाँधी, कमलनाथ और इंदिरा गाँधी शामिल थीं। उन्होंने जानकारी दी कि ये सब 1978 के मध्य में शुरू हुआ, जब ज्ञानी जेल सिंह और संजय गाँधी ने अकाली दल और जनता पार्टी के बीच तनाव पैदा करने की साजिश रची। दूसरे, अर्थों में कहा जाए कि कांग्रेस ने किसी न किसी बहाने देश में एकता बनाने रखने की बजाए विभाजन का काम करती रही, जिसे जनमानस उस अपवाद को कांग्रेस की बजाए कांग्रेस समर्थक उपद्रवियों को कसूरवार मानती रही। 

उन्होंने इसके लिए ‘एक हाईप्रोफाइल’ संत को अपनी तरफ से भेजने की बात कही। उनकी साजिश थी कि वो कथित संत अकाली दल की नरम नीतियों पर कुछ बोलेगा, जवाब में जनता पार्टी की तरफ से भी प्रतिक्रिया आएगी और अंततः दोनों एक-दूसरे से रिश्ता तोड़ लेंगे। यानी, कांग्रेस ने हिन्दुओं को डराने के लिए भिंडरांवाले को पैदा किया और खालिस्तान जैसे मुद्दे को जन्म दिया, जिससे देश की एक बड़ी जनसंख्या ये सोचने लगे कि देश की अखंडता को खतरा है।

उन्होंने बताया कि कमलनाथ ने उस समय कट्टर सिख संतों की भर्ती करने की बात कही थी। उन्होंने बताया कि पुलिस-प्रशासन से लेकर सभी लोग भिंडरांवाले को ‘सर/जनाब’ कहते थे। उसे एक बड़ा आदमी बनाया गया। उन्होंने बताया कि इंदिरा गाँधी ये कहती थीं कि उनकी हत्या हो सकती है, लेकिन उन्हें इसकी कोई चिंता नहीं है। ANI की संपादक स्मिता प्रकाश से बात करते हुए पूर्व रॉ अधिकारी ने कहा कि तब गृह मंत्री रहे ज्ञानी जैल सिंह ने मीडिया में भिंडरांवाले की छवि बनाई थी।

GBS सिद्धू ने बताया कि उस दौर में उन्हें कनाडा में भी भेजा गया था, उस दौरान उन्हें पता चला कि वहाँ सिर्फ दो ही लोग थे जो खालिस्तान की बातें करते थे। 1979 में भारत लौटने के बाद जब उन्हें रॉ में भेजा गया, तब इसकी अलग से कोई इमारत तक नहीं थी। उन्होंने बताया कि इसी दौरान सिख कट्टरवाद और ISI के संबंधों की जाँच के लिए रॉ का एक नया विभाग दिसंबर 1980 में बनाया गया, जबकि उस समय ऐसा कोई मामला आया ही नहीं था।

इसके बाद संजय गाँधी और जेल सिंह जैसों ने खालिस्तान को मुद्दा बनाने की ठानी। इस दौरान सिद्धू को रॉ के नए ब्रांचों के लिए प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया, अमेरिका-यूरोप में उन जगहों पर जहाँ सिखों की जनसंख्या ज्यादा थी। जबकि कनाडा में जब वो थे तो उन्हें 2 लोगों के अलावा खालिस्तान का कोई नामोंनिशान नहीं मिला। उन्होंने बताया कि उन्हें बाद में पता चला कि उनका इस्तेमाल हो रहा है। उन्होंने ये भी बताया कि भिंडरांवाले को गिरफ्तार करने के लिए भी पूरी साजिश रची गई थी।

उन्होंने बताया, “कांग्रेस ने अकाली दल से बातचीत की योजना बनाई, ताकि उन्हें ऐसा लगे कि समस्या का समाधान किया जा रहा है। 26 दौर की बातचीत चली, जिनमें से कुछ में इंदिरा गाँधी भी शामिल हुई। संजय गाँधी ने 1985 से पहले का चुनाव भिंडरांवाले-खालिस्तान मुद्दे पर जीतने की योजना बनाई। 1982 के मध्य के बाद हमें सूचना मिली कि इंदिरा गाँधी की जान खतरे में है। भिंडरांवाले स्वर्ण मंदिर में शिफ्ट हो गया था। उसे गिरफ्तार करने की साजिश भी ऐसे रची गई, जैसे वो बहुत बड़ा व्यक्ति था और उसे पकड़ना आसान नहीं था।”