Showing posts with label #Bareilly violence. Show all posts
Showing posts with label #Bareilly violence. Show all posts

बरेली हिंसा में मौलाना तौकीर रजा की जमानत याचिका खारिज, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा- आरोप बेहद संगीन: लगवाए थे ‘सर तन से जुदा’ के नारे, पुलिसकर्मी भी हुए थे घायल

                                                              मौलाना तौकीर रजा खान 
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली में हुई सांप्रदायिक हिंसा के मुख्य आरोपित और साजिशकर्ता मौलाना तौकीर रजा खान को बड़ा झटका देते हुए उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने मामले की गंभीरता और आरोपित के आपराधिक इतिहास को देखते हुए उसे राहत देने से साफ इनकार कर दिया। जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ ने शुक्रवार (5 जून 2026) को यह कड़ा आदेश पारित किया। जो इस मौलाना के लिए बहुत जरुरी भी था। 

हाईकोर्ट ने जमानत याचिका नामंजूर करते हुए सख्त टिप्पणी की कि आरोपित को जेल से बाहर भेजने पर समाज की शांति को खतरा पैदा हो सकता है। कोर्ट ने कहा, “मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखने से यह स्पष्ट होता है कि आवेदक(तौकीर रजा) ने एक सार्वजनिक सभा में मुस्लिम समुदाय के कई युवाओं को इस्लामिया इंटर कॉलेज में इकट्ठा होने के लिए उकसाया था। गवाहों के बयान और वीडियो क्लिप से ये संकेत मिलता है कि तौकीर रजा खान ने भड़काऊ भाषण देकर भीड़ को इकट्ठा होने के लिए प्रेरित किया। भीड़ द्वारा किए गए अपराध के लिए मुख्य साजिशकर्ता होने के नाते खान पूरी तरह जिम्मेदार हैं, क्योंकि उनके द्वारा भड़काने के बाद ही भीड़ ने कानून-व्यवस्था हाथ में ली।

सुनवाई के दौरान अदालत ने उस समय लगी पाबंदियों और उपद्रवियों के रवैये पर भी गहरी नाराजगी जताई। कोर्ट ने नोट किया कि इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS 2023) की धारा 163(पूर्व में धारा 144) के तहत निषेधाज्ञा लागू थी। इसके बावजूद आरोपित के उकसावे में आकर भारी भीड़ सड़कों पर उतरी।

अदालत ने भीड़ द्वारा लगाए गए विवादित नारों को देश की संप्रभुता के लिए खतरा बताया। जज ने आदेश में लिखा, “भीड़ द्वारा ‘गुस्ताख-ए-नबी की एक सजा, सर तन से जुदा, सर तन से जुदा’ जैसे विवादित नारे लगाना देश के कानून की सत्ता के साथ-साथ भारत की संप्रभुता और अखंडता को एक सीधी चुनौती है। ये कृत्य सीधे तौर पर एक सशस्त्र विद्रोह की अपील करता है। इस तरह की हिंसक और भड़काऊ नारेबाजी करना न केवल भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152 के तहत एक गंभीर दंडनीय अपराध है, बल्कि ये कृत्य इस्लाम के बुनियादी सिद्धांतों और शिक्षाओं के भी पूरी तरह खिलाफ है।”

जमानत याचिका खारिज करने का मुख्य आधार तौकीर रजा के पुराने रिकॉर्ड को बनाया गया। कोर्ट ने कहा, “तौकीर रजा खान का इसी तरह के मामलों में एक लंबा और विस्तृत आपराधिक इतिहास रहा है। ऐसे में इस बात का बड़ा जोखिम है कि यदि उन्हें जमानत पर रिहा किया गया, तो वो फिर से एक विशेष समुदाय को भड़का सकते हैं और समाज की शांति व सद्भाव को बिगाड़ सकते हैं।”

यह पूरा मामला पिछले साल 26 सितंबर 2025 को दर्ज पुलिस एफआईआर से जुड़ा है। आरोप है कि तौकीर रजा ने प्रशासन के कड़े प्रतिबंधों को दरकिनार कर मुस्लिमों को बरेली के इस्लामिया इंटर कॉलेज में एकत्र होने का आह्वान किया था। इसके बाद करीब 200 से 250 लोगों की उग्र इस्लामी भीड़ हाथों में भड़काऊ बोर्ड लेकर मौलाना आजाद इंटर कॉलेज से श्यामगंज चौराहे की तरफ बढ़ने लगी।

जब मौके पर तैनात पुलिस टीम ने उग्र हो रही भीड़ को समझाने और आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया, तो उपद्रवी हिंसक हो गए। भीड़ ने पुलिस टीम को निशाना बनाते हुए उन पर ईंट-पत्थर, पेट्रोल बम और तेजाब (एसिड) की बोतलें फेंकनी शुरू कर दीं।

सरकार को उपद्रवियों के सरगनाओं पर कार्यवाही करने के साथ-साथ एसिड, पेट्रोल और पत्थर सप्लाई करने वालों पर भी कार्यवाही करनी चाहिए। इतना ही नहीं इन दंगाइयों को समर्थन में victim card खेल बचाने वालों पर नकेल जरुरी है।    

इस भयानक हिंसा और पथराव के दौरान उपद्रवियों ने कई राउंड फायरिंग भी की और पुलिसकर्मियों के कपड़े तक फाड़ दिए। इस हिंसक टकराव में दो वरिष्ठ पुलिस अधिकारी गंभीर रूप से घायल हो गए थे और सरकारी संपत्ति को भी भारी नुकसान पहुँचाया गया था। अदालत ने इन सभी तथ्यों को बेहद संगीन माना।

‘सरकार बदली तो इनकी डेंटिंग-पेंटिंग होगी’: हिंसा के बाद बरेली की शांत फिजाओं में सुलग रही चिंगारी, जानें ऑपइंडिया के कैमरे पर क्या बोले इस्लामी कट्टरपंथी?

                                                बरेली में लगे 'आई लव मोहम्मद' के पोस्टर
26 सितंबर की दोपहर 2 बजे से बरेली शहर ‘आई लव मुहम्मद’ के नारों से गूंज उठा, दोपहर की नमाज पढ़कर निकले मुसलमानों की भीड़ को पुलिस बार बार घर जाने के लिए कहती रही लेकिन भीड़ के मंसूबे अलग थे। कहीं भड़काऊ नारे थे, तो कहीं जहन में नफरत।

कुछ के हाथों में आइ लव मुहम्मद की तख्तियाँ थीं तो अधिकतर के हाथों मे पत्थर, लाठी-डंडे और पेट्रोल बम थे। इस भीड़ को मौलाना तौकीर रजा ने इसलामिया ग्राउंड मे एकत्रित होने के लिए कहा था। प्रशासन का सीधा आदेश था कि, बिना इजाज़त के कोई भी भीड़ इकट्ठा नहीं हो सकती है।

भीड़ फिर भी मानने को तैयार नहीं थी। जब भीड़ को पुलिस ने रोकने की कोशिश की 12 से 22 साल के GenZ मुस्लिम लड़कों ने पथराव शुरू कर दिया। एक FIR में इस बात का भी जिक्र है कि पुलिसवालों के सामने मुस्लिम लड़कों ने ‘सर तन से जुदा’ के नारे भी लगाए थे। फिर स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बरेली पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा था।

इस घटना को करीब तीन दिन हो गए हैं। मुस्लिमों के मन मे क्या है, उनके मुहल्लों में किस तरह की चर्चा चल रही है और हिन्दू इस घटना को कैसे देखते हैं यह समझने के लिए मैंने ग्राउंड पर जाने का निश्चय किया।

रविवार के दिन दोपहर 1 बजे मैं बरेली के सबसे व्यस्ततम चौराहे पर पहुँचा। यहीं पर बरेली कचहरी भी मौजूद है। चौराहे पर सन्नटा था, नाम मात्र के लोग मौजूद थे। बात चीत के क्रम में टाइल्स लगाने का काम करने वाले एक अधेड़ व्यक्ति से मेरी बात हुई।

बरेली में धर्मांतरण का गिरोह

 शुरुआत मे झिझकने के बाद जब वो खुला तो उसने बताया कि उसके गाँव फैजनगर मे मुसलमान बड़ी संख्या मे हैं। यहाँ एक मदरसा है और वहाँ गुप्त रूप से धर्मांतरण का गिरोह चलता था। अभी एक महीने पहले ही बरेली पुलिस के द्वारा उस मदरसे पर छापा मारकर उसका भंडाफोड़ किया था।

पता चला था कि चौदह राज्यों से चंदा मांगकर यहाँ धर्मांतरण का काम किया जाता था। कई हिन्दू लड़के-लड़कियों और नाबालिगों का धर्मांतरण करवाया जा चुका था।इसके आगे वो बरेली मे 26 सितंबर की हुई घटना को लेकर कहा कि जहां इनकी संख्या बढ़ती है ये इसी तरह के कांड करते हैं।

मौलाना तौकीर रजा को लेकर कहा कि ये लंबे समय से इसी तरह की हरकतें करता था और इसका मन बढ़ गया था। लेकिन योगी सरकार ने अब इसको पकड़कर सही कर दिया है। अब बरेली शांत हो जाए।

इसके बाद मैं सबसे पहले उस इलाके की तरफ बढ़ा जहां 26 सितंबर को घटना हुई थी। इंटरनेट बंद होने की वजह से गूगल मैप काम नहीं कर रहा था। लोगों से रास्ता पूछने और भटकने की वजह से लगभग आधा शहर देख लिया।

इस्लामिया ग्राउंड से आँखों-देखी

बरेली पुराना शहर है। शहर के लगभग इलाकों के ज़्यादातर घरों पर इस्लामिक झंडे दिख रहे थे। हिंदुओं के इक्का दुक्का घरों पर ही कोई ऐसा निशान मौजूद था जिससे पता चले कि ये हिन्दू का घर है।

सबसे पहली जगह मिलती है। इस्लामिया ग्राउंड। इस्लामिया ग्राउंड के सामने बिहारीपुर पुलिस चौकी है। वहाँ बड़ी संख्या मे पुलिस वाले तैनात थे। ये वही जगह थी जहां आने की कोशिश उस दिन मुसलमान कर रहे थे।

गेट पर बड़ा सा ताला जड़ा हुआ था, आसपास गंदगी बिखरी थी और पुलिस वाले दोपहर की कड़ी धूप में पहरा दे रहे थे। बाहर से मैंने देखा तो एक बड़ा सा मैदान नजर आया और एक पुरानी और जर्जर इमारत जो अंग्रेजों के वक़्त से पहले के होने का सबूत देती है। उसकी झड़ रही लखौरी ईंटें अब अपनी उम्र ढल जाने का इशारा कर रही थीं।

इस मैदान के तीनों तरफ बड़ी संख्या मे मुसलमानों की घनी आबादी बसी हुई थी। चूंकि मैं केवल एक मोबाइल लेकर इस पूरे इलाके की रिकॉर्डिंग कर रहा था तो किसी ने कोई आपत्ति नहीं की। लेकिन तीन-चार 12 से 15 साल के मुस्लिम लड़के मेरे आसपास आकर खड़े हो गए। उन्होने कुछ कहा नहीं लेकिन जब तक मैं वहाँ रहा वो मेरी मोबाइल की स्क्रीन मे झाँकने की कोशिश करते रहे।

सामने मौजूद चौकी मे पुलिसवाले लंबी ड्यूटी के बाद चेहरों पर थकान लेकर भी मुस्तैदी के साथ खड़े नजर आ रहे थे। इसके बाद मैं बढ़ा उन मस्जिदों की तरफ जहां से नमाज पढ़कर उस दिन भीड़ निकली थी। रास्ते मे एक बैनर टंगा मिला जिसपर बड़े बड़े अक्षरों मे आई लव मुहम्मद लिखा हुआ था।

पहले मैंने नौमहिल्ला मस्जिद तक जाना चुना। यहाँ चीजें सामान्य दिख रही थी। आसपास बड़ी संख्या मे मुसलिम आबादी थी। कुछ एक मुसलमान अपनी खिडकियों से झांककर सड़क और पुलिस की तरफ देख रहे थे।

कुछ एक दीवारों पर ताजे पोस्टर निकाले जाने के निशान थे। मैंने गली मे बैठे एक बुजुर्ग से पूछा तो अपनी टोपी संभालते हुए कहा कि उस दिन के लाठीचार्ज के बाद लोगों ने अपनी दीवारों से खुद ही ‘आई लव मुहम्मद’ के पोस्टर हटा लिए हैं।

हालाँकि, उस गली मे घुसने वाले रास्ते पर एक एक बड़ा सा पोस्टर लगा हुआ था, जो हवा की वजह से ऐसा मुड़ गया था कि लव और मुहम्मद नहीं दिखाई दे रहा था, बचा हुआ था सिर्फ आई!

मुझे याद था कि दंगे भड़काने वाला मौलाना तौकीर रजा, बरेलवी मसलक के सबसे बड़े नामों मे एक आला हजरत खानदान से आता है। वही आला हजरत जिनके नाम पर बरेली की ये एक बड़ी मस्जिद कायम है।

यहाँ से जब मैं आला हजरत मस्जिद की तरफ जाने के लिए पैदल निकाल पड़ा। रास्ते मे शटर गिराए बैठे लोग गले मे आईकार्ड देखकर ये अंदाजा लगा पा रहे थे कि मैं पत्रकार हूँ और शायद बाहर से आया हूँ। मस्जिद के करीब पहुँचते हुए एक ठेले वाले से मैंने पूछा कि उस दिन यहीं पर बवाल हुआ था?

उसने घूरकर मेरी तरफ देखा और फिर नजरें फेर ली। मैंने दुबारा ज़ोर देकर पूछा तो उसने कहा कि मैं शहर मे नया आया हूँ। वैसे, आजतक देश के जिस भी हिस्से मे किसी भी इलाके में मैंने रिपोर्टिंग की है तो अधिकतर मुसलमान जवाब न देने के लिए यही बात कहते नजर आए हैं।

ख़ैर, मैं अगले पाँच मिनट मे मस्जिद के गेट पर था। जहाँ एक 18 से 20 साल का लड़का बैठा हुआ था। आसपास कुछ पुलिसवाले कुर्सी लगाकर बैठे हुए थे। मस्जिद के दो एंटरेंस के रास्ते थे। सड़क की तरफ खुलने वाले स्टील के दरवाजे पर तीन पोस्टर लगे हुए थे। सभी मे दो बातें लिखी थीं। पहली ‘आई लव मुहम्मद’ और दूसरी ‘मैं, मेरे मा बाप, मेरी आल, सब आप पर कुर्बान या रसूल अल्लाह’।

                                                        मस्जिद आला हजरत पर लगा पोस्टर

घूमते हुये जब मैं जब मस्जिद के दूसरे दरवाजे पर पहुँचा तो शाम के 4 बजकर 40 मिनट का वक़्त हो चला था। कुछ बुजुर्ग नमाज़ी आना शुरू हो गए थे। मस्जिद से बुलाने का ऐलान हो चुका था। इस दरवाजे पर भी ‘आई लव मुहम्मद’ के पोस्टर लगे हुए थे। अंतर बस ये था कि ये प्रिंटेड नहीं थे। इन्हें हाथों से बनाया गया था।

बनावट को देखकर यह भी स्पष्ट था कि, इसे किसी कम उम्र के बच्चे ने बनाया है। टूटी फूटी हैंडराइटिंग मे इसी पोस्टर पर किसी बच्चे ने लिखा था कि अगर नबी सालल्हू, अलेह, वसल्लम से मुहब्बत का इजहार करना जुर्म है तो यह जुर्म हम हर रोज करेंगे।

                                                         मस्जिद के दरवाजे पर लगा पोस्टर

आला हजरत मस्जिद की ओर इशारा करने के लिए लगे बोर्ड के ठीक पीछे समाजवादी पार्टी का एक बड़ा पोस्टर लगाया गया था। जो शायद उत्तरप्रदेश मे सियासत और मजहब के गठबंधन को साफ तौर पर दिखाने के लिए काफी है।

                                                       मस्जिद आला हजरत लिखा बोर्ड

ये वही मस्जिद है जहाँ से निकली भीड़ पैगंबर से मुहब्बत के नाम पर 26 सितंबर को बरेली शहर को जला देने पर आमादा थी। बवाल वाले दिन इस मस्जिद मे केवल नौजवान लड़के ही नमाज पढ़ने आए थे जबकि आज जो मैंने देखा उसमें एक भी व्यक्ति 40 साल से कम उम्र का नहीं था।

यहाँ मैंने नामजियों से बात करने की कोशिश की लेकिन कोई भी बात करने को राजी नहीं था। हर चेहरा पर्दे में रहने की कोशिश कर रहा था। यहाँ से चलकर मैं एक गली के अंदर गया। गली पतली थी लेकिन अंदर अधिकतर मुसलमानों से भरी एक बड़ी आबादी थी।

यहाँ भी अधिकतर मुसलमान कुछ भी बताने से बच रहे थे। एक महिला ने बताया कि नामजियों की ही भीड़ थी जिसने ये पूरा बवाल बनाया था। तभी, एक अधेड़ व्यक्ति ने आवाज देकर मुझे बुलाया। नदीम नाम के इस शख्स ने, पहले तो केवल नामजियों को बचाने की कोशिश की लेकिन लंबी बातचीत के दौरान उसकी जबान खुलती गयी।

उसने कहा, “आज तो मुख्यमंत्री जी के भी बयान थे कि हमने डेंटिंग पेंटिंग कर दी, तो इसका सीख क्या है? ये डेंटिंग पेंटिंग करेंगे हमारी?” आगे कहा, “अभी इनकी सरकार है तो डेंटिंग पेंटिंग हो रही है, सरकार बदलेगी तो इनकी डेंटिंग-पेंटिंग होगी।”

उसने बेहद उत्तेजित होते हुये कहा कि ‘आई लव मुहम्मद तो कयामत तलक रहेगा’। इसकी पूरी बात आप Opindia की विडियो रिपोर्ट मे भी देख सकते हैं।

इस व्यक्ति से मैंने करीब 16 मिनट तक बात की, पूरी बातचीत के दौरान एक बार भी यह व्यक्ति अपनी गलती मानने को तैयार नहीं हुआ बल्कि धमकी भरे लहजे मे आगे और बुरे भविष्य की ही बात करता रहा। इसके अलावा बाक़ी के मुसलमानों ने मानो चुप रहने की कसम खाई हुई हो। एक भी शख्स कैमरे पर बात करने को तैयार नहीं था।

करीब चार घंटे तक इस इलाके मे घूमने के बाद मैं हिंदुओं के मुहल्लों मे गया। एक व्यक्ति जो अपने दरवाजे पर बैठा था उसने कहा कि ‘हिन्दू त्योहार जब भी आते हैं, तभी ये लोग ऐसी हरकतें करते हैं’ इसके साथ ही उसने 2010 के बरेली के दंगों को भी याद दिलवाया जब होली खेलने के समय कर्फ़्यू लग गया था।

हिंदुओं का कहना यह भी है कि मुसलमान सुनियोजित ढंग से हिन्दू त्योहारों के समय ही ऐसी हरकतें करते हैं। जबकि मुसलमानों के त्योहारों के समय हिन्दू शांत रहते हैं। कई हिंदुओं ने सीधे तौर पर बरेली मे होने वाली हर इस्लामी उन्माद के लिए मौलाना तौकीर रजा और उसको राजनीतिक संरक्षण देने वाली कुछ राजनीतिक पार्टियों को जिम्मेदार ठहराया।

हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि आज प्रदेश मे योगी आदित्यनाथ की सरकार नहीं होती तो शायद बरेली जल रहा होता। सरकार बदलने की वजह से मौलाना तौकीर रजा जैसे लोग अब कोशिश तो करते हैं लेकिन पुलिस उनका सही से इलाज कर देती है।

दोनों पक्षों से बात करने के बाद मैं बरेली से दिल्ली की तरफ निकला। बरेली के प्रसिद्ध झुमका चौक के पहले अवेधनाथ द्वार था, जिसके ऊपर भगवान शंकर की योग मुद्रा मे मूर्ति स्थापित की गयी है।

                                                                       अवेधनाथ द्वार

कुछ देर वहाँ मैं रुका और वहाँ मौजूद दुकानों के बोर्ड पढ़कर मुझे आभास हुआ कि वहाँ एक ही पक्ष की 70 फीसदी से ज्यादा दुकाने थी। यानि शहर का एंट्री पॉइंट एक ही पक्ष के कब्जे मे था। और शहर के अंदर की पूरी बसावट मैं देख ही चुका था।

आगस्टे काम्टे की पंक्ति ‘डेमोग्राफी इज डेस्टिनी’ मेरे दिमाग मे घूमने लगी थी। हालाँकि प्रदेश के मुख्यमंत्री के मंचों से दिए जाने वाले बयान और ऐसी घटनाओं मे प्रशासनिक तत्परता अभी भी समाज के दूसरे पक्ष को चैन की सांस लेने का मौका दे रहे हैं।(साभार) 

उत्तर प्रदेश : बरेली में साजिश के तहत भड़काई गई हिंसा : पत्थरों का ढेर, पेट्रोल वाली बोतलें और 5 दिनों की प्लानिंग

                                                   बरेली में हिंसा (फोटो साभार: दैनिक जागरण)
उत्तर प्रदेश के बरेली में जुमे की नमाज के बाद 26 सितंबर 2025 को ‘I Love Muhammad’ को लेकर प्रदर्शन के दौरान इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने हिंसा और पथराव किया है। इस हिंसा पर अब लगातार पुलिस अधिकारियों की और से बड़े खुलासे किए जा रहे हैं। पुलिस ने बताया कि यह हिंसा प्लान बनाकर की गई थी।

सत्ता के गलियारों में चर्चा है कि अक्सर मुस्लिम कट्टरपंथी और इनके समर्थक दंगाइयों को बचाने "बाहरी लोगों" द्वारा दंगा करने का बचाव करने वालों को बेनकाब करने tear gas के दो राउंड के बाद तीसरा राउंड जब तक blind firing का नहीं होगा दंगों पर अंकुश नहीं पाया जा सकता। दूसरे, blind firing में जख्मी होने वाले सभी स्थानीय ही मिलेंगे बाहरी नहीं। उसके बाद कोई किसी बच्चे या महिला को पत्थरबाज़ी करने आगे नहीं करेगा। 

सोशल मीडिया पर ज्योतिषों द्वारा यह भी चर्चा चल रही जो योग बन रहे हैं वह आंदोलन और दंगा जीवियों के लिए बहुत ही दर्दनाक होने वाला है। मानवाधिकार का शोर भी खूब मचेगा लेकिन सभी औंधे मुंह गिरेंगे।

     

कैसे शुरू हुई हिंसा ?

26 सितंबर 2025 को दोपहर 2 बजे आला हजरत मस्जिद में जुमे की नमाज के बाद कुछ लोग ‘I Love Muhammad’  लिखे पोस्टर लेकर बाहर आए। इसके बाद नौमहला मस्जिद में 3 बजे तक नमाज हुई। नमाज के बाद भीड़ इस्लामिया ग्राउंड की ओर बढ़ने लगी। पुलिस ने रोका तो पथराव शुरू हो गया।

धीरे-धीरे यह विवाद शहर के कई इलाकों में फैल गया, जिसमें नौमहला मस्जिद, शहर कोतवाली, नॉवेल्टी चौराहा, आजमनगर, जिला अस्पताल रोड, श्यामगंज मार्केट, बिहारीपुर शामिल है। इन इलाकों के साथ-साथ पूरे बरेली शहर के बाजार बंद करा दिए गए। माहौल इतना बिगड़ा कि शहर में अघोषित कर्फ्यू जैसे हालात हो गए।

प्लान बनाकर कट्टरपंथियों ने किया बवाल

घटना के बाद करीब 10 हजार पुलिसकर्मी, PAC और पैरामिलिट्री फोर्स बरेली में तैनात की गई। शहर के अलग-अलग हिस्सों में बैरिकेडिंग कर दी गई। माहौल बिगड़ने के बाद पुलिस ने हिंसा रोकने के लिए लाठीचार्ज और आँसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया।

DIG अजय कुमार साहनी ने बताया, “बाहर से भी कुछ लोग आए थे। अभी फोटो-वीडियो के आधार पर देखा जा रहा है कि कौन लोग थे और कहाँ से आए थे। निश्चित रूप से इसमें FIR दर्ज होगी। इसके पीछे जो भी जिम्मेदार लोग हैं, सबके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। किसी भी प्रकार की कोई परमिशन नहीं थी।”

उन्होंने कहा, “सबको पहले ही बता दिया गया था कि यहाँ किसी तरह की धरना-प्रदर्शन की अनुमति नहीं है। 90 प्रतिशत लोगों ने इस बात को समझा और नमाज पढ़कर घर लौट गए। लेकिन, बाद में कुछ शरारती तत्व प्लान बनाकर आए और उन्होंने बवाल किया।”

DIG ने आगे कहा, “फायरिंग की घटनाओं में छर्रे लगे हैं। कुछ हथियार भी बरामद किए गए हैं। यह साफ है कि पहले से साजिश की गई थी। तभी अचानक इतने लोग सामने आए और पूरी तैयारी के साथ आए। ऐसे लोगों को चिह्नित किया गया है। मीडिया कर्मियों और प्रेस के लोगों को भी चोटें आई हैं। पथराव सबने देखा और वीडियो फुटेज की कवरेज भी की।”

इस हिंसा में 10 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, जिनका इलाज जारी है। वहीं कई लोगों को हिरासत में लिया गया है, गिरफ्तारी की संख्या एकत्र की जा रही है। कुछ हथियार भी बरामद किए गए हैं, कुछ जगह फायरिंग के भी प्रमाण मिले हैं।

पुलिस को मिलीं खाली बोतलों से आ रही थी पेट्रोल की बदबू

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यहाँ तक भी दावा किया गया है कि बरेली में हिंसा की प्लानिंग पिछले करीब 5 दिनों से चल रही थी। साथ ही, इस प्रदर्शन के आयोजक के खिलाफ NSA लगाने की भी कार्रवाई पुलिस शुरू करने जा रही है। वहीं, पुलिस ने इस भीड़ को इकट्ठा करने वाले मौलाना तौकीर रजा को गिरफ्तार कर लिया है।

वहीं, पुलिस ने बताया कि घटनास्थल से पत्थरों का ढेर, कारतूस का खोखा, जिंदा कारतूस, एक तमंचा, लाठी-डंडा और खाली बोतल मिली हैं। इन खाली बोतलों से पेट्रोल की बदबू आ रही थी।