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झाँसी में NSUI नेता पर हत्या का केस, घर में फंदे से लटकी मिली पत्नी: याद आई नैना साहनी, दिल्ली में कांग्रेस नेता ने टुकड़े-टुकड़े कर तंदूर में झोंक दिया था

        NSUI नेता भरत व्यास की राहुल गाँधी और पत्नी के साथ की तस्वीर (साभार: Facebook-Drx Bharat Vyas              Samthar)
उत्तर प्रदेश के झाँसी में दहेज हत्या का मामला सामने आया है। यहाँ कांग्रेस के छात्र संगठन नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के प्रदेश उपाध्यक्ष भरत व्यास की पत्नी प्रिया मिश्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में फाँसी के फंदे पर लाश लटकी मिली। प्रिया के परिवार ने NSUI नेता पर दहेज उत्पीड़न और हत्या का मामले में FIR दर्ज की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, घटना 31 मई 2026 की रात की है। प्रिया ने रात 12 बजे अपने पिता विनोद मिश्रा को फोन भी किया था लेकिन देर रात होने के चलते वह फोन नहीं उठा सके। इसके बाद सुबह जब प्रिया के ससुराल से कॉल आया तो बेटी की मौत की खबर सुनने को मिली।

प्रिया मिश्रा के परिवार का आरोप

प्रिया के परिवार ने बेटी की मौत को खुदकुशी मानने से इनकार किया है। प्रिया के परिवार ने बताया कि शुरुआत में सब कुछ ठीक था, लेकिन कुछ समय बाद भरत व्यास और उसके घरवाले ज्यादा दहेज की डिमांड करने लगे। परिवार का कहना है कि कई बाद नकदी और ऑनलाइन माध्यम से पैसे भी दिए गएं, इसके बावजूद प्रिया को परेशान किया जाता रहा है।

परिजनों ने भरत व्यास और उसके घरवालों के खिलाफ दहेज उत्पीड़न और हत्या का मुकदमा भी दर्ज करवाया है। पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि हर पहलुओं से जाँच जारी है।

कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय हैं भरत व्यास

NSUI नेता भरत व्यास और प्रिया की शादी 14 फरवरी 2025 को हुई थी। भरत व्यास राजनीति में काफी सक्रिय है। उसके कांग्रेस नेता राहुल गाँधी सहित पार्टी के तमाम नेताओं के साथ तस्वीर भी है। फेसबुक पर भी वे काफी एक्टिव हैं और आए दिन कॉन्ग्रेस समर्थित पोस्ट शेयर करते रहते हैं। भरत ने कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थन में भी पोस्ट किया हुआ है।

कांग्रेस नेता के कांड, नंबर वन पर नैना साहनी हत्याकांड

यह पहली बार नहीं है कांग्रेस के किसी युवा नेता का अपराध में नाम सामने आय़ा है। 1995 में दिल्ली में हुआ बहुचर्चित नैना साहनी हत्याकांड, जिसे तंदूर कांड भी कहा जाता है, उसमें भी यूथ कांग्रेस का नेता ही शामिल था। 

इस मामले में मुख्य आरोपित सुशील शर्मा था, जो उस समय दिल्ली युवा कांग्रेस का बड़ा नेता माना जाता था। हत्या कर नैना को तंदूर की भट्ठी में झोंकने वाला उसका ही प्रेमी सुशील शर्मा था। दोनों लिव इन में रहते थे। कई लोगों का दावा है कि चुपचाप दोनों ने शादी भी कर रखी थी। सुशील यूथ कांग्रेस का उस समय उभरता हुआ नेता था। बताते हैं कि सीधे हाईकमान तक पहुॅंच थी उसकी।

सुशील के इस कारनामे की दुनिया को भनक भी नहीं लगती यदि 2 जुलाई 1995 की उस रात दिल्ली पुलिस के कॉन्स्टेबल अब्दुल नज़ीर कुंजू और होमगार्ड चंदर पाल गश्त पर ना होते। रात के करीब साढ़े ग्यारह बज रहे थे। होटल अशोक यात्री निवास में स्थित बगिया रेस्टोरेंट से दोनों ने आग और धुआँ निकलता देखा। मौके पर पहुॅंचे तो बताया गया कि कांग्रेस पार्टी के पुराने बैनर पोस्टर जलाए जा रहे हैं। पर वे नहीं माने। पुलिस बुलाई। फायर ब्रिगेड को बुलाया गया और पता चला कि तंदूर में एक महिला की लाश जल रही है।

उस महिला की पहचान नैना साहनी के तौर पर हुई। नैना को घर में गोली मारने के बाद सुशील शर्मा जलाने के लिए लाया था। मामला खुलने के बाद सुशील ने पुलिस से बचे रहने के लिए अपने राजनीतिक संपर्कों का भरपूर इस्तेमाल किया। लेकिन, जनआक्रोश की वजह से उसे सरेंडर करना पड़ा और बाद में सजा भी हुई।


गिरफ़्तारी से बचने हैदराबाद भागा पवन खेड़ा: असम मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा, कांग्रेस नेता के घर से लौटी असम पुलिस

        पवन खेड़ा के घर पहुँची पुलिस, गिरफ़्तारी से बचने के लिए हैदराबाद भागे (Aajtak & Prabhatkhabar)
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी द्वारा दर्ज कराई गई FIR के बाद कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के घर असम पुलिस की एक टीम पूछताछ के लिए पहुँची थीं। लेकिन दिल्ली स्थित आवास पर पवन खेड़ा नहीं मिले।

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने जानकारी दी कि पवन खेड़ा कल सुबह ही गुवाहाटी से निकल गए थे। दिल्ली में पुलिस की छापेमारी के दौरान पता चला कि वे अब हैदराबाद भाग गए हैं। मुख्यमंत्री हिमंता ने स्पष्ट कहा कि कानून अपना काम करेगा और कोई भी बच नहीं पाएगा।

पवन खेड़ा ने दो दिन पहले आरोप लगाया था कि असम के CM हिमंता की पत्नी रिंकी भुइयाँ सरमा के पास मिस्र, एंटीगा-बरबूडा और UAE के पासपोर्ट हैं। सीएम और उनकी पत्नी ने इन आरोपों को पूरी तरह गलत बताया है। इसी मामले में सोमवार(अप्रैल 7) को FIR दर्ज की गई थी।

आखिर झूठ पर झूठ बोलकर और फर्जीवाड़ा कर के कांग्रेस कब तक जनता को पागल बनाकर वोट लेती रहेगी? अगर पवन खेड़ा के आरोपों में दम था तो हैदराबाद क्यों भागा?  

कांग्रेस नेता के असम में बांग्लादेश का राष्ट्रगान गाने पर हंगामा, बीजेपी बोली- इनका असली एजेंडा ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ है: Video हुआ वायरल

                    कांग्रेस की बैठक में गाया गया बांग्लादेश का राष्ट्रगान (फोटो: X/Ashok Singhal)
असम में कांग्रेस नेता के द्वारा एक बैठक में बांग्लादेश का राष्ट्रगान गान गाए जाने को लेकर विवाद हो गया है। असम के श्रीभूमि जिले के कांग्रेस सेवा दल की बैठक में सोमवार(27 अक्टूबर 2025) को वरिष्ठ कांग्रेस नेता बिधु भूषण दास ने सार्वजनिक मंच पर बांग्लादेश का राष्ट्रगान ‘आमार सोनार बांग्ला’ गा दिया।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता बिधु भूषण दास द्वारा बांग्लादेश के राष्ट्रगान को गाना एक सोंची-समझी सियासत है। पाकिस्तान के साथ-साथ अब बांग्लादेश की गोद में बैठने की तैयारी हो चुकी है। यानि जहाँ-जहाँ हिन्दुओं का दमन किया जा रहा है उस देश को कांग्रेस गले लगा रही है।     

यह घटना करीमगंज (श्रीभूमि) के इंदिरा भवन में हुई, जहाँ सेवा दल की कार्यकारिणी की बैठक चल रही थी। दास ने भाषण की शुरुआत ही ‘आमार सोनार बांग्ला’ गाकर की। यह सुनते ही वहाँ मौजूद लोग हैरान रह गए।

वीडियो सोशल मीडिया पर पहुँचा तो असम के मंत्री कृष्णेंदु पॉल ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “कांग्रेस कुछ भी कर सकती है। उस पार्टी में सब कुछ अजीब है, उन्हें तो यह भी नहीं पता कि कब क्या गाना है।”

असम के कैबिनेट मंत्री अशोक सिंघल ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने X पर दास का वीडियो शेयर कर लिखा, “असम के श्रीभूमि में कांग्रेस की एक बैठक में बांग्लादेश का राष्ट्रगान ‘आमार सोनार बांग्ला’ गाया गया, वही देश जो पूर्वोत्तर को भारत से अलग करना चाहता है!”

उन्होंने आगे कहा, “अब यह स्पष्ट है कि कांग्रेस ने दशकों तक असम में अवैध मिया घुसपैठ को क्यों अनुमति दी और प्रोत्साहित किया और इसका मकसद वोट बैंक की राजनीति के लिए राज्य की जनसांख्यिकी को बदलना और ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ का निर्माण करना था।”

कांग्रेस ने दी सफाई

कांग्रेस की ओर से हमेशा की तरह इस बार भी लीपापोती शुरू हो गई है। करीमगंज कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रमुख शहादत अहमद चौधरी ने बचाव करते हुए कहा है कि वह रवीन्द्र संगीत गा रहे थे। शहादत ने कहा, “दास ने तो बस एक रवीन्द्र संगीत गाया था, कोई राष्ट्रगान नहीं। वह हर स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा फहराते हैं।”

यह वही गीत है जिसे रवीन्द्रनाथ टैगोर ने 1905 में बंगाल विभाजन के दौरान लिखा था और इसे आज बांग्लादेश अपने राष्ट्रीय गीत के रूप में गाता है। कांग्रेस भले ही इस पर सफाई दे लेकिन कई सवाल जरूर इससे खड़े हुए हैं।

अब जब वही गीत आज बांग्लादेश का राष्ट्रगान है तब सार्वजनिक मंच पर उसे गाना क्या देश की गरिमा का अपमान नहीं है? लोग अब यह भी पूछ रहे हैं कि फिर तो कल को कोई पाकिस्तान का राष्ट्रगान भी किसी की रचना बताकर गाना शुरू कर देगा।