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उत्तर प्रदेश : साम्प्रदायिक मीडिया झाड़-फूँक करने वाले बलात्कारी मौलवी को ‘तांत्रिक’ लिखकर हिंदुओं को बदनाम कर रहा, क्यों? तलाश में जुटी पुलिस

                                                                                                                               प्रतिकात्मक तस्वीर
उत्तर प्रदेश के मथुरा में झाड़फूंक करने वाले मुस्लिम ‘आलिम’ मुश्ताक अली ने एक महिला से रेप कर उसे जान से मारने की धमकी दी है। इस महिला की कोई औलाद नहीं है और इसी के लिए वह मुश्ताक से उपाय पूछने गई थी।

मीडिया को मालूम होना चाहिए कि झाड़-फूंक करने वाले और तांत्रिक में बहुत फर्क होता है। तांत्रिक हिन्दू होता है कोई मुस्लिम नहीं, जबकि झाड़-फूंक करने वाला हिन्दू नहीं मुस्लिम होता।  

इसके बाद मुश्ताक ने कमरे में अगरबत्ती जलाकर धुआँ कर दिया और एक घंटे तक उसका रेप किया। उसने महिला को धमकी भी दी कि अगर उसने किसी को बताया वह उसकी हत्या करवा देगा। वहीं, इस खबर के सामने आने के बाद मीडिया ने वही पुराना राग अलापते हुए मुश्ताक को तांत्रिक बताना शुरू कर दिया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिला आगरा की रहने वाली और वह नौहझील में मुश्ताक से उपाय पूछने गई थी। पीड़िता का कहना है, “निकाह के 8 साल बाद भी मेरी कोई औलाद नहीं हुई। मुझे बताया गया कि नौहझील, मथुरा में बटन वाली गली, मस्जिद के पास रहने वाला मुश्ताक अली इसका इलाज कर सकता है। इससे मेरा बच्चा हो सकता है। इस पर विश्वास कर करीब 1 महीने पहले मैं अपनी ननद के साथ तांत्रिक के पास गई। उसने कहा कि हर जुमेरात (गुरुवार) मुझे वहाँ आना होगा।”

महिला का कहना है कि दूसरी बार जब वह अपने शौहर के साथ वहाँ गई। वहाँ पहुँचने के बाद मुश्ताक उसे एक कमरे में ले गया और कहा, “मैंने तुम्हें मना किया था कि ननद के अलावा किसी और को साथ मत लाना।”

गुरुवार (21 अगस्त 2025) को वह अपनी ननद के साथ फिर से उसके घर गई। वहाँ वह उसे एक कमरे में ले गया और दरवाजा बंद कर दिया, उसने कमरे में अगरबत्ती जला कर धुआँ फैला दिया।

इसका फायदा उठाकर मुश्ताक उसने उसके साथ रेप किया। महिला ने कहा, “मैंने शोर मचाने की कोशिश की लेकिन आवाज नहीं निकल पा रही थी। उसने मुझे करीब 1 घंटे कमरे में बंद रखा। साथ ही धमकी दी कि अगर मैंने किसी को बताया तो मेरी ननद और शौहर की हत्या करवा देगा।”

महिला ने बताया कि वह किसी तरह अपनी जान बचाकर ननद के साथ अपने घर आगरा वापस आई और शौहर को घटना की जानकारी दी। पीड़ित महिला ने शनिवार (24 अगस्त 2025) को एसएसपी ऑफिस में आरोपित के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।

एसपी ग्रामीण सुरेश चंद्र रावत के अनुसार, “महिला ने शिकायत दी है। इसके आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस की टीम दबिश दे रही है। आरोपित को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।”

मीडिया ने मुश्ताक को बताया ‘तांत्रिक’

इस खबर के सामने आने के बाद मीडिया ने आरोपित मुश्ताक को तांत्रिक बताना शुरू कर दिया। ऐसा मामला जहाँ पीड़िता मुस्लिम हो, उसके साथ रेप करने वाला आलिम मुश्ताक मुस्लिम को, उसे तांत्रिक बताना मीडिया की हिंदू विरोधी सोच पर सवाल खड़े करता है।

ऐसा कोई पहली बार भी नहीं हुआ है, वर्षों से ऐसे मामलों में मुस्लिम आरोपित को तांत्रिक लिखना, हवन-पूजन जैसे चित्रों का इस्तेमाल करना, जैसी चालें हिंदू विरोधी मीडिया चलता रहा है। ऐसे मामलों में जहाँ ना कोई तंत्र है, ना कोई मंत्र हैं, वहाँ तांत्रिक कहकर सिर्फ एक धर्म को बदनाम करने की साजिश ही है। पूरे धर्म को बदनाम करने के लिए हिंदुओं के खिलाफ चल रही इस साजिश को रोके जाने की जरूरत है।

CAA पर मुस्लिमों को किया गुमराह: अजमेर दरगाह के दीवान ने कबूली सच्चाई

राजस्थान के अजमेर में स्थित मुस्लिमों के लिए पाक मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के दीवान एवं सजदानशीं सैयद ज़ैनुल आबेदीन ने CAA और मथुरा-काशी को लेकर अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि CAA उन लोगों के लिए है, जो दूसरे देशों से प्रताड़ित होकर भारत आते हैं और यहाँ नागरिकता के आवेदन करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि काशी और मथुरा के मंदिर के मामले को कोर्ट के बाहर आपसी बातचीत से हल कर लेना चाहिए।

जब सैयद जैनुल आबेदीन से पूछा गया कि क्या CAA कानून मुस्लिमों को खिलाफ है। इस पर सैयद जैनुल आबेदीन ने कहा, “पार्लियामेंट के अंदर होम मिनिस्टर कह रहा है भाई। मैं थोड़े कह रहा हूँ। पार्लियामेंट के अंदर सबने ये कहा है कि CAA कानून बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, म्यांमार से जो माइग्रेट होकर यहाँ आए हैं और वर्तमान में यहाँ रह रहे हैं उनके लिए है।”

उन्होंने आगे कहा, “इन देशों से आने वाले लोगों दिया गया क्या इंडियन सिटीजनशिप? नहीं दी गई। ये कानून उनके लिए ही है। हिंदुस्तान का मुसलमान डर क्यों रहा है? ये उनके लिए नहीं है। इससे सिटीजनशिप कैंसिल नहीं होती है। बस बात खत्म।” बता दें कि देश के मुस्लिमों में ये प्रोपेगेंडा फैलाई गई थी कि CAA कानून मुस्लिमों की नागरिकता खत्म करने के लिए लाई गई है।

सैयद आबेदीन ने CAA को लेकर ही नहीं, बल्कि वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर ज्ञानवापी ढाँचा विवाद तथा मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि शाही ईदगाह ढाँचे को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि काशी और मथुरा के विवाद को आपसी सहमति से दोनों पक्षों को मिलकर सुलझा लेना चाहिए। आबेदीन ने कहा कि इससे दोनों पक्षों के बीच कटुता नहीं रहेगी।

सैयद आबेदीन ने कहा, “मथुरा और काशी का विवाद अभी कोर्ट के सामने विचाराधीन है। इसलिए उसके ऊपर कोई कमेंट नहीं कर सकते। हमारा जो पुराना एक्सपीरियंस है, उसके हिसाब से हम चाहते हैं कि इस मसले का हल कोर्ट के बाहर बैठकर तय हो सकता है तो सबसे ज्यादा बेहतर है दोनों पक्षों के लिए। उससे दोनों पक्षों के अंदर कटुता भी नहीं रहेगी। अमन और शांति रहेगी।”

उन्होंने कहा, “कोर्ट के फैसले से तो जिसके पक्ष में फैसला आएगा, वह खुश होगा और जिसके हक में नहीं होगा, उसके दिल में कटुता रहेगी। तो ऐसा क्यों करना? ये देश वो पुराना नहीं है। जितने राजे-रजवाड़े, महाराजा थे, उनका एक धर्मगुरु होता था। ये धर्म के मामले में उनसे परामर्श लेकर फैसले लिया करते थे। आज जो एक नई बात पैदा की है इन्होंने कि धर्म और राजनीति….।”

धर्म और राजनीति के मिश्रण पर सैयद आबेदीन ने कहा, “गोरखपुर प्रेस सबसे ज्यादा मशहूर है इंडिया के अंदर। गीता प्रेस। उसका 1957 का एडिशन ‘श्री कल्याण’ है। बहुत मोटी बुक है। उस किताब के पेज नंबर 771 और 772 का श्लोक कहता है कि अगर राजनीति को धर्म से अलग कर दिया जाएगा तो राजनीति विधवा हो जाएगी और धर्म को राजनीति से अलग कर दिया जाएगा तो धर्म विधुर (जिसकी पत्नी की मृत्यु हो गई हो) हो जाएगा।”


राजस्थान : अब मदन दिलावर ने मथुरा के लिए एक समय ही भोजन करने का लिया संकल्प ; 370 के लिए बिस्तर छोड़ा, राम मंदिर के लिए छोड़ी पुष्पमाला

   रामगंजमंडी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान राजस्थान के मंत्री मदन दिलावर (फोटो साभारः मदन दिलावर का फेसबुक       अकाउंट)
अपने तीर्थों को गुलामी की दासता से मुक्त कराने हिन्दू क्या-क्या साधना कर रहे हैं, सनातन विरोधियों, तुष्टिकरण करने, छद्दम सेक्युलरिस्ट्स और कट्टरपंथियों को इसका अहसास नहीं। राम मन्दिर बनने के लिए किसी ने 30/32 सालों तक मौन व्रत रखा, किसी ने नंगे पैर आदि आदि। अब राजस्थान के पूर्व मंत्री और वर्तमान विधायक का मथुरा के लिए प्रण सामने आया है। 

छह बार के विधायक हैं। 3 बार के मंत्री। राजस्थान की मौजूदा बीजेपी सरकार में वे शिक्षा मंत्री हैं। उनका नाम है- मदन दिलावर। उन्होंने मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर मंदिर का निर्माण नहीं होने तक एक समय के अन्न का त्याग करने का संकल्प लिया है। इससे पहले आर्टिकल 370 हटाने और अयोध्या में राम मंदिर बनाने को लेकर भी वे इसी तरह का संकल्प ले चुके हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मदन दिलावर ने फरवरी 1990 में संकल्प लिया था कि जब तक अयोध्या में मंदिर नहीं बनता वे फूलों की माला नहीं पहनेंगे। 22 जनवरी 2024 को अयोध्या के भव्य राम मंदिर में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा हुई। इसके बाद कोटा के रामगंज मंडी में अयोजित कार्यक्रम के दौरान जय श्री राम के उद्घोष के बीच समर्थकों ने उन्हें 108 फीट लंबी फूलों की माला पहनाने की कोशिश की। लेकिन उन्होंने यह कहते हुए इनकार कर दिया कि जब तक वे रामलला का दर्शन नहीं करते माला नहीं पहनेंगे।

राम मंदिर का संकल्प पूरा होने के बाद बीजेपी नेता ने नई सौगंध ली है। उन्होंने कहा है कि जब तक मथुरा में भगवान श्री कृष्ण की जन्मस्थली पर भव्य मंदिर नहीं बन जाता, वे एक समय ही भोजन करेंगे। उन्होंने प्रभु में आस्था जताते हुए कहा कि जैसे अब तक सभी निश्चय पूरे हुए हैं, वैसे ही ये निश्चय भी पूरा होगा।

मंच से श्रीकृष्ण जन्मस्थान को लेकर प्रतिज्ञा

रामगंज मंडी में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री दिलावर ने बताया कि डॉ. किरोडीलाल मीना के साथ उन्होंने लंबा प्रदर्शन किया था। उसी दौरान फरवरी 1990 में भी कसम खाई थी कि जब तक अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण नहीं हो जाता, तब तक वह माला नहीं पहनेंगे। प्राण प्रतिष्ठा समारोह समाप्त के बाद उनके समर्थकों ने उन्हें माला पहनाने की कोशिश की तो उन्होंने रोक दिया। उन्होंने कहा कि वे माला तब पहनेंगे, जब 31 जनवरी को रामलला के दर्शन कर लेंगे। इसी कार्यक्रम के दौरान उन्होंने मंच से प्रतिज्ञा ली कि जब तक भगवान कृष्ण की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण नहीं हो जाता, तब तक वह दिन में केवल एक बार भोजन करेंगे।

साल 1990 से 2019 तक जमीन पर सोए मदन दिलावर

बीजेपी विधायक मदन दिलावर ने फरवरी 1990 में एक और कसम खाई थी। ये कसम थी कि जब तक जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 निरस्त नहीं होता, तब तक वह बिस्तर पर नहीं सोएँगे। साल 2019 में जब अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया गया, तब जाकर वे बिस्तर पर सोए थे।

काशी के बाद अब मथुरा की बारी, हाईकोर्ट ने शाही ईदगाह ढाँचे के सर्वे का दिया आदेश: श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति की राह में बड़ा फैसला

कृष्ण जन्मभूमि पर मंदिर तोड़ कर बनाई गई शाही ईदगाह (चित्र साभार: HT)
मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर स्थित शाही ईदगाह के सर्वे के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अनुमति दे दी है। कोर्ट ने इस सम्बन्ध में दायर याचिका को मंज़ूरी देते हुए इस पूरे परिसर की जाँच के लिए एक एडवोकेट कमिश्नर की नियुक्ति की माँग को माना है। इसी की देखरेख में सर्वे पूरा होगा।

यह याचिका हिन्दू पक्ष की तरफ से श्रीकृष्ण विराजमान और वकील विष्णु शंकर जैन समेत 7 लोगों द्वारा लगाई गई थी। इस मामले में पूरे परिसर की वैज्ञानिक सुनवाई की याचिका स्वीकार होने की जानकारी हिन्दू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने दी है।

विष्णु शंकर जैन ने कहा, “इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हमारी याचिका को स्वीकार कर लिया है जिसमें हमने माँग की थी कि इस पूरे परिसर का एक एडवोकेट कमिश्नर द्वारा सर्वे करवाया जाए। इसकी बाकी चीजें 18 दिसम्बर को तय की जाएँगी। कोर्ट ने शाही ईदगाह मस्जिद पक्ष की दलीलों को अस्वीकार कर दिया है। हमारी माँग थी कि शाही मस्जिद के भीतर हिन्दू मंदिर के कई चिह्न हैं। इन सबकी असली स्थिति जानने के लिए एक सर्वे की आवश्यकता है। कोर्ट ने इस माँग को स्वीकार कर लिया है। यह एक ऐतिहासिक निर्णय है।”

हिन्दू पक्ष का कहना है कि मथुरा में स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर के बराबर में बनी शाही ईदगाह वाला ढाँचा जबरन वही बना दिया गया जहाँ भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। इस जगह पर कब्जा करके ढाँचा बनाया गया है। यहाँ अभी भी कई ऐसे सबूत हैं जो कि यह सिद्ध करते हैं कि यहाँ पहले एक मंदिर हुआ करता था।

हिन्दू पक्ष का दावा है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म राजा कंस के कारागार में हुआ था और यह जन्मस्थान शाही ईदगाह के वर्तमान ढाँचे के ठीक नीचे है। सन् 1670 में मुगल आक्रांता औरंगज़ेब ने मथुरा पर हमला कर दिया था और केशवदेव मंदिर को ध्वस्त करके उसके ऊपर शाही ईदगाह ढाँचा बनवा दिया था और इसे मस्जिद कहने लगे। मथुरा का मुद्दा नया नहीं है।

अदालत में इस मामले में याचिकाएँ दाखिल की गई हैं और उन पर सुनवाई होती रही है। 13.37 एकड़ जमीन पर दावा करते हुए हिन्दू यहाँ से शाही ईदगाह ढाँचे को हटाने की माँग करते रहे हैं। 1935 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वाराणसी के हिन्दू राजा को भूमि के अधिकार सौंपे थे।


उत्तर प्रदेश : ‘कन्हैयालाल की तरह तेरा भी सर तन से जुदा कर देंगे’: श्री कृष्ण जन्मभूमि के लिए लड़ रहे केस सत्यम पंडित को मिली धमकी

श्री कृष्ण जन्मभूमि का केस लड़ रहे सत्यम पंडित को 'सर तन से जुदा' की धमकी (फोटो साभार: एक्स हैंडल @SatyamS05818543 )
श्री कृष्ण जन्मभूमि को उसका हक दिलाने के लिए जो सत्यम पंडित कोर्ट तक पहुँचे, उन्हें अब ‘सर तन से जुदा’ करने की धमकी दी गई है। सत्यम पंडित ने एक लेटर दिखा कर दावा किया है कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) की तरफ से उन्हें यह धमकी दी गई है। उनको यह पत्र गाजियाबद में अपने ऑफिस खोलने के दौरान शनिवार (2 दिसंबर 2023) को मिला। इसमें लिखा गया है: “तू श्रीकृष्ण जन्मभूमि बनाम शाही मस्जिद ईदगाह मथुरा केस में पैरवी करना बंद कर दे। वरना अल्लाह का वास्ता, राजस्थान के कन्हैयालाल की तरह तेरा भी सर तन से जुदा कर देंगे, माशाल्लाह।”

सत्यम पंडित को ‘सर तन से जुदा’ की धमकी मामले के संबंध में गाजियाबाद घंटाघर कोतवाली में एफआईआर दर्ज की गई है। एसीपी निमिष पाटिल के मुताबिक, शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर लिया गया है और आगे जाँच की जा रही है। पीड़ित के ऑफिस के आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।

पीड़ित सत्यम पंडित ने शनिवार (2 दिसंबर 2023)सुबह धमकी के तौर पर मिले PFI के इस पत्र को अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर शेयर किया है। उन्होंने जब शनिवार (2 दिसंबर 2023)को गाजियाबाद के अपने ऑफिस का शटर उठाया तो वहाँ उन्हें एक कागज पड़ा मिला। इसमें उन्हें पीएफआई ने ‘सर तन से जुदा’ करने की धमकी दी है।

सत्यम पंडित ब्राह्मण एकता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और श्री कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट में केंद्रीय मंत्री के पद पर भी हैं। उन्होंने ट्रस्ट की तरफ से लगभग ढाई साल पहले कृष्ण जन्मभूमि की जमीन को विवादित शाही मस्जिद से खाली कराने के लिए सिविल कोर्ट मथुरा में केस दर्ज किया था।

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) नाम की ओर आए इस धमकी के बावजूद सत्यम पंडित ने कहा है कि वो इस केस में पैरवी करना जारी रखेंगे। उन्होंने कहा, “एक बार फिर जान से मारने की धमकी मिली। मैं बता देना चाहता हूँ कि मैं डरने वाला नहीं।”

सत्यम पंडित को धमकी देने वाला पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) शायद यह भूल रहा है कि पीड़ित राजस्थान नहीं योगी के उत्तर प्रदेश में रहता है। यदि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) अपने मकसद में सफल हो भी जाता है, फिर इसके दुष्परिणाम भुगतने को भी तैयार रहना चाहिए। क्या 'सर तन से जुदा' की धमकी देकर सच्चाई को दबाने में सफल नहीं हो पायेगा। 

सनातन विरोधी सपा नेता और मुस्लिमों ने हथिया ली बाँके बिहारी मंदिर की जमीन, ऐतिहासिक कुआँ और सिंहासन तोड़ डाला, सरकारी कागज में लिखवाया – कब्रिस्तान: अब HC बोला – वापस करो

मथुरा से 60 किलोमीटर दूर स्थित इस जमीन पर मुस्लिमों ने कर लिया था कब्ज़ा (फोटो साभार: India Daily Live)
क्या समाजवादी पार्टी से हिन्दू हित की कोई कामना की जा सकती है? ये वही पार्टी है जिसने मुस्लिम वोटों की खातिर निहत्ते रामभक्तों पर गोलियां चलवा दी थी। समाजवादी पार्टी को जवाब देना होगा कि बांके बिहारी जी मंदिर की जमीन मुसलमानों को क्यों दी? और अब इसी पार्टी के नेता सनातन धर्म पर प्रहार कर रहे हैं। 

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शुक्रवार (15 सितंबर, 2023) को छाता तहसील के अधिकारियों को आदेश दिया कि बाँके बिहारी जी महाराज मंदिर की जिस जमीन को मुस्लिम कब्रिस्तान बता दिया गया है, उस जमीन से जुड़े राजस्व के कागजात में सुधर किए जाएँ। इसमें सुधार कर के इसे बाँके बिहारी मंदिर के नाम पर करने का आदेश दिया गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस सौरभ श्रीवास्तव की एकल पीठ ने ये फैसला सुनाया। मथुरा स्थित ‘श्री बिहारी जी सेवा ट्रस्ट’ ने इस संबंध में याचिका दायर की थी।

इस याचिका में बताया गया था कि 2004 में राजस्व के रिकॉर्ड्स में बदलाव कर के उक्त जमीन को मुस्लिम कब्रिस्तान बता दिया गया था। 11 अगस्त, 2023 को छाता के तहसीलदार को मथुरा हाईकोर्ट ने इसका विवरण साझा करने का निर्देश दिया था। साथ ही पूछा था कि 2004 में आखिर कैसे इस जमीन का स्वामित्व बदल दिया गया, कागजात में छेड़छाड़ कैसे हुई। ट्रस्ट ने इस एंट्री को गलत बताते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट से गुहार लगाई थी कि इसे दुरुस्त किया जाए।

‘श्री बिहारी जी सेवा ट्रस्ट’ ने जानकारी दी थी कि ये पूरा मामला प्लॉट संख्या 1081 से जुड़ा हुआ है। ये भूमि प्राचीन काल से ही बाँके बिहारी मंदिर की रही है। भोला काला पठान ने राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर के इसे 2004 में कब्रिस्तान के रूप में पंजीकृत करवा दिया। मंदिर ट्रस्ट को इसकी सूचना मिली, जिसके बाद आपत्ति दायर की गई। वक्त बोर्ड के पास भी ये मामला पहुँचा। एक 7 सदस्यीय जाँच कमिटी ने भी पाया कि कागजात में अवैध छेड़छाड़ हुई है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ये आदेश भी दिया है कि 2 महीने के भीतर मंदिर को ये भूमि सौंप दी जाए। और पीछे जाएँ तो ये मामला 1991 तक जाता है, जब इस जमीन को तालाब के रूप में रजिस्टर किया गया था। ‘धर्म रक्षा संघ’ के राम अवतार गुर्जर भी इस मामले में हाईकोर्ट पहुँचे थे। ये जमीन शाहपुर गाँव में स्थित है। ये इलाका मथुरा से 60 किलोमीटर की दूरी पर है। यहाँ कोई आता-जाता नहीं है, लेकिन चबूतरे के पास पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगी रहती है।

यहाँ तक कि ग्रामीण भी मानते हैं कि ये बाँके बिहारी मंदिर का ही हिस्सा हुआ करता था, जिसे औरंगजेब के ज़माने में तोड़ डाला गया और फिर मुस्लिम इसे अपना कब्रिस्तान कहने लगे। ‘धर्म रक्षा संघ’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सौरभ गौड़ ने फैसले पर ख़ुशी जताते हुए कहा कि संगठन कई वर्षों से इस फर्जीवाड़े का विरोध कर रहा था। उन्होंने षड्यंत्रकारियों को सज़ा देने की भी माँग की। 1970 से ही इस 2.25 बीघा जमीन पर कब्जे की कोशिश इस्लामी कट्टरपंथी कर रहे हैं।

‘दैनिक भास्कर’ से बात करते हुए राम अवतार गुर्जर ने बताया कि भोला पठान समाजवादी पार्टी का बूथ अध्यक्ष था और लेखपाल से मिल कर उसने पूरा षड्यंत्र रचा था। इतना ही नहीं, मुस्लिम पक्ष के लोग बुलडोजर लेकर आए और चबूतरे के पास स्थित ऐतिहासिक कुएँ को भी तोड़ डाला था। जमीन पर कँटीले तार लगाए जाने लगे। बाँके बिहारी जी का सिंहासन तोड़ कर मजार बना दी गई। पूरा फर्जीवाड़ा कैसे किया गया, ग्रामीणों के पास इसका कागज भी मौजूद है।

‘जामा मस्जिद की सीढ़ियाँ खोद कर निकाली जाए प्रतिमाएँ’: देवकी नंदन ठाकुर, कथावाचक


कथावाचक देवकी नंदन ठाकुर ने कहा है कि बहुत ही जल्द मथुरा कृष्ण जन्मभूमि के लिए बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा। इसकी रूप रेखा तैयार कर ली गई है। शुक्रवार (14 अप्रैल, 2023) को आगरा पहुँचे देवकी नंदन ठाकुर ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि आगरा की जामा मस्जिद के नीचे भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा है। मस्जिद की सीढ़ियों को खोदकर वहाँ से मूर्तियाँ निकालनी चाहिए।

आगरा के कुबेरपुर के ग्राम बिहारीपुर स्थित गर्ग वेयर हाउस में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पहले दिन देवकी नंदन ठाकुर ने जानकारी दी कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि को मुक्त कराने के लिए बहुत जल्द बागेश्वर धाम सरकार के साथ मिलकर राष्ट्रव्यापी आंदोलन चलाया जाएगा। इस आंदोलन में युवाओं की भूमिका अहम होगी। आंदोलन ब्रज भूमि से शुरू होकर आगरा, कानपुर, प्रयागराज होते हुए पूरे देश में पहुँचेगा। इसकी रूप रेखा तैयार कर ली गई है।

पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए देवकी नंदन ठाकुर ने कहा कि हमारे श्रीकृष्ण का मंदिर तोड़कर उनकी मूर्तियाँ आगरा की शाही जामा मस्जिद लाई गई थीं। इसके बाद प्रतिमाएँ मस्जिद की सीढ़ियों में चुनवा दीं गई थीं। यह जानते हुए भी हम मौन हैं। हम कोर्ट व नेताओं से अपील करेंगे कि उन सीढ़ियों को खुदवाकर मूर्तियाँ निकलवा ली जाएँ। उन्होंने कहा कि इस कार्य में मस्जिद को कोई नुकसान नहीं होगा।

देवकी नंदन ठाकुर ने ओटीटी फ्लेटफॉर्म पर वेबसीरीज में दिखाई जा रही अश्लीलता पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि फिल्मों में रिश्तों की मर्यादा तार-तार हो रही हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए ओटीटी फ्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराए जा रहे आपत्तिजनक कंटेट पर रोक लगाया जाना चाहिए।

श्रीमद्भागवत कथा के पहले दिन कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में भक्त कथा स्थल पर पहुँचे थे। इस दौरान देवकी नंदन ठाकुर ने भागवत कथा सुनने से मिलने वाले पुण्य और इसकी महिमा का बखान किया। कथा शुरू होने से पहले कलश यात्रा भी निकाली गई जिसमें बड़ी तादाद में महिलाओं ने हिस्सा लिया।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर कब्जा : हजम कर रहे थे मुफ्त की बिजली: काटी गई शाही ईदगाह मस्जिद की लाइट, 3 लाख रुपए का जुर्माना भी


उत्तर प्रदेश के मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद के चलते शाही ईदगाह मस्जिद चर्चा में रही है। यह श्रीकृष्ण जन्मभूमि के पास ही स्थित है। इस मस्जिद की बिजली काट दी गई। साथ ही बिजली चोरी को लेकर मुकदमा दर्ज हुआ और 3 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया। मस्जिद में बिना कनेक्शन के बिजली का उपयोग किया जा रहा था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मस्जिद में बिजली चोरी के इस मामले को लेकर हिंदूवादी संगठनों और श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट समेत अन्य ने ऊर्जा मंत्री एके शर्मा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत की थी। इस शिकायत में मस्जिद में बिजली कनेक्शन न होने की जानकारी देते हुए कार्रवाई करने की माँग की थी।

इस शिकायत के बाद बिजली विभाग ने मामले की जाँच कर शिकायत को सही पाया। इसके बाद, अधिकारियों ने बिजली थाना और गोविंद नगर थाने की पुलिस के साथ लेते छापेमारी की। इस छापेमारी में करीब 50 लोग शामिल थे। छापेमारी के बाद कार्रवाई करते हुए शाही ईदगाह मस्जिद की बिजली काट दी गई।

चूँकि, माहौल खराब होने का डर था इसलिए प्रशासन ने इस पूरी कार्रवाई को गुप्त रखा था। साथ ही, कार्रवाई के दौड़ा पूरी तरह से वीडियोग्राफी की गई है। बिजली चोरी के इस मामले में एसडीओ ने कृष्णा नगर स्थित बिजली थाना में शाही ईदगाह कमेटी का संचालन कर रही इंतजामिया कमेटी के सचिव तनवीर अहमद के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई।

     हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिनेश शर्मा द्वारा मुख्यमंत्री को लिखा गया शिकायती पत्र (फोटो साभार : भास्कर)

छापेमारी के दौरान बिजली विभाग ने मस्जिद में 4035 वॉट का लोड पाया। इस कारण मस्जिद कमेटी पर 3 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। कहा जा रहा है कि मस्जिद द्वारा जब तक कनेक्शन नहीं लिया जाता, तब तक बिजली नहीं जोड़ी जाएगी।

इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष दिनेश शर्मा ने दावा किया है कि उन्होंने गत 28 जनवरी को पत्र लिखकर योगी आदित्यनाथ से बिजली चोरी की शिकायत की थी। इसके बाद ही बिजली विभाग ने यह कार्रवाई की है।

मथुरा : राजा पटनीमल, जिनके वंशजों ने 112 साल लड़ा श्रीकृष्ण जन्मभूमि का केस: कर्जदार हो गए लेकिन नहीं मानी हार

                                          श्रीकृष्ण जन्मभूमि (फाइल फोटो साभार: IndiaTV News)
मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि से शाही ईदगाह मस्जिद हटाने को लेकर कोर्ट में सुनवाई चल रही है। इस मामले की सुनवाई के लिए कोर्ट ने मई 2022 में याचिका स्वीकार की थी। हालाँकि, श्रीकृष्ण जन्मभूमि को लेकर केस की शुरुआत साल 1832 में यानी 190 साल पहले ही हो गई थी। वाराणसी के राजा पटनीमल ने पहला केस लड़ा था। इसके बाद, उनके वारिसों ने 112 साल केस लड़ा। केस लड़ते-लड़ते राजा पटनीमल के वारिसों के सिर पर कर्ज हो गया था। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

दरअसल, साल 1803 में अंग्रेजों ने ईस्ट इंडिया कंपनी के नेतृत्व में मराठा शासक दौलत राव सिंधिया को हराकर मथुरा में कब्जा कर लिया था। इसके बाद, साल 1815 में अंग्रेजों ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि की जमीन को नीलाम कर दिया। नीलामी में वाराणसी के राजा पटनीमल ने इसे खरीद लिया।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि को लेकर पहला केस साल 1832 ईदगाह मस्जिद के मुअज्जिन अताउल्लाह खातिब ने किया था। खातिब ने कलेक्टर के सामने बिक्री रद्द करने और मस्जिद को रिपेयर कराने की अर्जी लगाई। हालाँकि, कलेक्टर ने यह कहते हुए केस खारिज कर दिया कि मराठा शासन के दौरान मुअज्जिन मस्जिद छोड़कर भाग गया था।

इसके बाद, अगला केस साल 1897 में अहमद शाह नामक व्यक्ति ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि के पास की रोड को रिपेयर कर रहे गोपीनाथ पर केस कर दिया। उसने आरोप लगाया था कि यह जमीन मुस्लिमों की है। लेकिन मजिस्ट्रेट ने उसकी अपील खारिज कर दी और कहा कि ये साबित नहीं होता कि जमीन मुस्लिमों की है।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर अगला केस साल 1920 में अंजुमन इस्लामिया के सेकेट्री काजी मुहम्मद अमीर ने दायर किया। अमीर ने कोर्ट में कहा था कि मस्जिद के आसपास प्रह्लाद नामक व्यक्ति मंदिर बनवा रहा है। यह जमीन मुस्लिमों की है। इस अपील को भी कोर्ट ने खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा था कि यह जमीन राजा पटनीमल ने खरीदी थी। साथ ही, यहाँ कोई नया मंदिर नहीं बन रहा है। क्योंकि यहाँ सालों से पुराना मंदिर था।

इसके बाद, इस मामले में मुस्लिम पक्ष की ओर से साल 1928 में मोहम्मद अब्दुल खाँ नामक व्यक्ति ने एक और केस दायर किया गया। लेकिन, साल 1935 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस विवाद का निपटारा किया और राजा राय कृष्णदास के पक्ष में फैसला सुनाया। तमाम केस लड़ते हुए राजा राय कृष्णदास पर कर्ज हो गया था। हालाँकि, उन्होंने कर्ज के बोझ तले दबने के बाद भी लड़ाई लड़ने का ही फैसला किया। दरअसल, वह नहीं चाहते थे कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुस्लिमों के पास जाए।

हालाँकि, विवादों और उलझनों के बीच 8 फरवरी, 1944 को राजा राय कृष्णदास और उनके पुत्र आनंदकृष्ण ने पंडित मदन मोहन मालवीय, गणेश दत्त और भीखनलाल आत्रेय को इस संकल्प के साथ यह भूमि बेच दी कि वे यहाँ मंदिर निर्माण कराएँगे।

‘श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान’ के सचिव कपिल शर्मा राजा पटनीमल के वारिसों को लेकर कहते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण की जमीन के लिए लड़ते-लड़ते पैरोकारों पर 13,400 रुपए का कर्ज हो गया था। उन्होंने जब बेची तब केवल कर्ज उतारने के लिए 13,400 रुपए ही लिया। उनके इस कर्ज पर ब्याज करीब दस हजार रुपए हो गया था। लेकिन, राजा पटनीमल के वारिसों ने ब्याज धीरे-धीरे अपने पैसों से चुकाने की बात कही थी।

‘हिन्दुओं के कारण भारत सेक्युलर, काशी-मथुरा में गलती सुधारने का वक्त’: अयोध्या पर आर्कियोलॉजिस्ट केके मुहम्मद

अयोध्या में खुदाई कर मंदिर का सबूत जुटाने वाले पुरातत्वविद् केके मुहम्मद (Archeologist KK Mohammad) का कहना है कि बाबरी की तरह देश में अभी कई मुद्दे हैं और अगर सभी पक्षों ने इसका हल नहीं निकाला तो ये बड़ी समस्या बन जाएँगी। उन्होंने कहा कि देश में कई मंदिर हैं, जिन्हें तोड़कर मस्जिद बनाया गया है। उन्होंने कहा कि देश में धर्मनिरपेक्षता हिंदुओं के कारण है।

केके मुहम्मद ने कहा कि मथुरा और काशी के ज्ञानवापी मामले को जल्द हल करना चाहिए। यहाँ प्रमाण की कमी नहीं है। बस सच को स्वीकार करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, “मैं हमेशा मुसलमानों से कहता हूँ कि पाकिस्तान से अलग होने के बावजूद भारत सेक्युलर है, क्योंकि यहाँ हिंदुओं की मैजॉरिटी है।”

गौरतलब करने की बात है कि सेवानिर्वित होने के बाद तमिल भाषा में लिखी पुस्तक में इन्होने स्पष्ट शब्दों में लिखा कि अयोध्या में राममन्दिर कभी का बन गया होता, अगर कांग्रेस और वामपंथियों ने कोर्ट से खुदाई में मिले अनेकों प्रमाणों को छुपाकर केवल एक ही खम्बा नहीं दिखाया होता। उन्होंने लिखा है कि इन्हीं के निरीक्षण में अयोध्या में खुदाई हुई थी, जिसमें मन्दिर के ही सारे सबूत मिले थे।  

दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने कहा कि जब बात साइंटिफिक रिसर्च की हो तो उस पर विश्वास करना चाहिए। उन्होंने कहा, “मैं कहता हूँ कि भारत जैसे देश में मंदिरों को तोड़कर मस्जिद बनाए जाने पर कई मामले सामने आएँगे। ऐसे में पहले जो गलती की है, उसे सुधारने के पक्ष में सोचना चाहिए।”

देश में आर्कियोलॉजिस्ट के भविष्य के सवाल पर उन्होंने कहा कि भात में इनका कोई भविष्य नहीं है। इसके लिए ना स्टूडेंट्स आगे आ रहे हैं और न ही सरकार सपोर्ट कर रही है। बीजेपी गवर्नमेंट से कुछ उम्मीद थी, लेकिन उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया। उन्होंने कहा, मैं कहता हूँ कि आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) का सबसे खराब समय BJP के राज में ही है।”

अयोध्या मामले में हिंदू मंदिर की बात रखने के कारण केके मुहम्मद को मुस्लिम समुदाय का विरोध झेलना पड़ता। उन्होंने कहा, “लोगों के विरोध को फेस न करना पड़े, इसके लिए मैं अपने प्रोफेशन से धोखा नहीं कर सकता। खुदाई में मंदिर के अवशेष मिले। ये फैक्ट था। इतिहास के तथ्यों को रखना ही मेरा धर्म है।”

केके मुहम्मद ने कहा था कि 27 मंदिरों को तोड़कर दिल्ली के कुतुब मीनार परिसर में स्थित कुव्वत उल इस्लाम मस्जिद बनाई गई है। उन्होंने कहा था कि मंदिरों को तोड़कर निकाले गए और उन पत्थरों से ही यह मस्जिद बनी है। उन्होंने कहा था कि उस जगह पर अरबी में लिखे अभिलेखों और ताजूर मासिर नामक किताब में इसका जिक्र है।

केके मुहम्मद 1976-77 में पहली बार अयोध्या में जाकर राम मंदिर और बाबरी मस्जिद वाली विवादित जगह पर खुदाई की थी। उन्होंने बाबरी के नीचे मंदिर के अवशेषों का पता लगाने वाले पहले व्यक्ति थे। उन्होंने कहा था कि मंदिर के खंम्भों पर मस्जिद बनाई गई थी।

मथुरा : घर में घुस के एक गाँव में हिंदू को धमकाया, कहा- जान और जमीन से हाथ धो लोगे : ‘मुस्लिम यहाँ 90%, हमारे मजहब में आओ या गाँव छोड़ो’


कहाँ है 'हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई', 'गंगा जमुनी तहजीब', 'सेकुलरिज्म' और संविधान के नाम पर जनता को गुमराह करने छद्दम सेक्युलरिस्ट्स? क्या इसीका नाम सेकुलरिज्म है? जहाँ बहुसंख्यक हो जाने पर हिन्दुओं को धमकियां, क्यों नहीं अब आवाज़ निकल रही? हिन्दू राष्ट्र पर बहुत बढ़-बढ़कर 
'हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई', 'गंगा जमुनी तहजीब', 'सेकुलरिज्म' और 'संविधान' की दुहाई देने वाले अब क्यों खामोश हैं? आखिर कब तक कुर्सी की खातिर तुष्टिकरण कर हिन्दू को अपमानित किया जाता रहेगा?  

उत्तर प्रदेश के मथुरा के एक मुस्लिम बहुल गाँव में हिंदू बुजुर्ग को धमकी दिए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि गाँव के ही कुछ मुस्लिमों ने घर में घुसकर बुजुर्ग को धमकी दी। इस्लाम कबूलने का दबाव डाला। पीड़ित ने इस संबंध में 25 जुलाई 2022 को शिकायत की थी। इस पर संज्ञान लेते हुए मथुरा पुलिस ने 31 अगस्त को कार्रवाई के आदेश दिए हैं।

इस गाँव का नाम महरौली है, जो कोसीकलां थाना क्षेत्र में आता है। 60 वर्षीय पीड़ित तेजराम ने इस संबंध में पुलिस को जी शिकायत दी है, उसकी कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। इसमें उन्होंने बताया है कि करीब 18 साल पहले उन्हें और कुछ अन्य हिन्दुओं को गाँव में सरकारी प्लॉट मिले थे। कुछ समय पहले गाँव के ही ताहिर, तारिफ, आशी, आमिर, इदरीश, गुन्ना, आमिर, अमसर, बब्बू, शब्बीर व सग्गन ने उनके प्लॉट के पेड़ काट लिए। गाँव के ही गोधरन नाम के एक व्यक्ति के खेतों की मेड तोड़ कर अपने खेत में मिला लिया। इस घटना की शिकायत तेजराम ने पुलिस और पटवारी से की थी। इससे आरोपित नाराज हो गए।

तेजराम का आरोप है कि आरोपित उनसे चुनावी और धार्मिक रंजिश भी रखते हैं। तेजराम के अनुसार 23 जुलाई 2022 की शाम आशी, तारिफ, आमिर, इदरीश, बब्बू व अन्य उनके घर में घुस गए। गालियाँ दी। कहा कि पुलिस और पटवारी से शिकायत कर तुमने क्या उखाड़ लिया। जब तेजराम ने गाली-गलौज का विरोध किया तो उन्हें बुरी तरह पीटा गया।

शिकायत में कहा गया है कि पड़ोसियों ने तेजराम को बचाने की कोशिश की तो उन्हें भी धमकी दी गई। तेजराम के मुताबिक हमलावरों ने कहा, “ये गाँव हमारा है। यहाँ हमारे तौर-तरीकों से रहना होगा। हम मुस्लिम यहाँ 90% हैं। ज्यादा परेशान करोगे तो जान और जमीन से हाथ धो लोगे। हमारे मजहब में आ जाओ या ये गाँव छोड़ कर चले जाओ।” शिकायत के मुताबिक हमलावरों ने जाते-जाते तेजराम के घर का सामान भी तोड़ डाला।

तेजराम के अनुसार कुछ अन्य ग्रामीणों के साथ भी मारपीट और धमकाने की घटना हो चुकी है। लेकिन आरोपितों के डर से कोई आगे नहीं आता। उन्होंने आरोपितों के पास हथियार होने और स्थानीय अपराधियों से संपर्क उनके का भी दावा किया है। साथ ही आरोप लगाया है कि कोसीकलां पुलिस और राजस्व कर्मचारी भी आरोपितों के दबाव में काम करते हैं। तेजराम की शिकायत पर मथुरा पुलिस ने थाना प्रभारी कोसीकलां को जाँच और जरूरी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

ऑपइंडिया से बात करते हुए तेजराम ने बताया, “जब वे युवा थे तब गाँव में इतनी मुस्लिम आबादी नहीं थी। बाद के सालों में न केवल मुस्लिमों की आबादी तेजी से बढ़ी है, बल्कि गाँव के कुछ हिंदू घर छोड़कर जाने को भी मजबूर किए गए हैं। करीब 20 साल से गाँव में हिन्दू प्रधान नहीं बना है। वर्तमान मुस्लिम प्रधान भी आरोपितों का ही साथ देता है।” उनका दावा है कि कुछ समय पहले मुस्लिमों ने एक दलित महिला को बुरी तरह पीटा, फिर उसे समझौता करने को मजबूर किया। हिंदुओं को फँसाने के लिए फर्जी केस भी कई बार दर्ज करवाने की बात उन्होंने कही है।

‘मथुरा के शाही ईदगाह मस्जिद को पूरी तरह हटाया जाए’: अदालत ने स्वीकार की याचिका

औरंगजेब ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि का अतिक्रमण कर बनवाया था शाही ईदगाह मस्जिद
मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि का अतिक्रमण कर औरंगज़ेब द्वारा बनवाए गए शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने के लिए दायर की गई याचिका को अदालत ने स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही अब इस मामले में अन्य पक्षकारों के जुड़ने के बाद सुनवाई चालू हो जाएगी। कोर्ट ने शनिवार (फ़रवरी 6, 2021) को शाही ईदगाह मस्जिद प्रबंधन समिति समेत सभी पक्षों को नोटिस जारी कर अपना-अपना पक्ष रखने को कहा है।

‘आज तक’ की खबर के अनुसार, मथुरा में जिला राजकीय अधिवक्ता संजय गौड़ ने जानकारी दी है कि अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश देवकांत शुक्ला ने याचिका को सुनवाई हेतु स्वीकार करते हुए सभी पक्षों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने वाद को स्वीकार करने योग्य माना और इसकी विस्तृत सुनवाई भी होगी। सभी पक्षों को मार्च 8, 2021 तक अदालत के समक्ष पेश होकर अपना पक्ष रखना पड़ेगा।

जिन्हें समन जारी किया गया है, उनमें उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन, शाही ईदगाह प्रबंधन समिति के सचिव, श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के प्रबंधन न्यासी और श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव शामिल हैं। ज्ञात हो कि पुराने केशवदेव मंदिर के देवता ठाकुर केशव देव जी महाराज विराजमान की तरफ से उनके सेवायत पवन कुमार शास्त्री/गोस्वामी ने ये याचिका अदालत में दायर की है। याचिका में 3 अनुरोध किए गए हैं:

  • शाही ईदगाह मस्जिद वाली जमीन समेत कटरा केशव देव मंदिर परिसर के संपूर्ण 13.7 एकड़ जमीन पर दावा। पूरे मंदिर परिसर के प्रबंधन का अधिकार मिले। दलील दी गई है कि उनके पूर्वज दशकों से बतौर पुजारी भगवान की सेवा में लगे हैं। उन्होंने खुद को मंदिर का वास्तविक सेवायत बताते हुए इसकी विरासत के प्रबंधन योग्य बताया।
  • श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान एवं शाही ईदगाह प्रबंधन समिति के बीच हुए समझौते का अनुमोदन करने वाले मथुरा अदालत के 1967 के फैसले को रद्द किया जाए। इसके तहत ही मस्जिद को मंदिर के नजदीक बनाए रखने की अनुमति दी गई थी।
  • शाही ईदगाह प्रबंधन समिति एवं लखनऊ स्थित सुन्नी वक्फ बोर्ड अध्यक्ष को मौजूदा स्थान से मस्जिद को हटाने का निर्देश दिया जाए।

इससे पहले जिला जज मथुरा साधनी रानी ठाकुर की कोर्ट में 12 अक्टूबर को इस सम्बन्ध में याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं का दावा था कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि के 13 एकड़ के कटरा केशव देव मंदिर के परिसर पर 17वीं शताब्दी में शाही ईदगाह बनाया गया था। उनका कहना था कि इस समय जहाँ मस्जिद है, कभी वहाँ कंस का कारागार था और वहीं पर कृष्ण का मंदिर था। मुगलों ने इसे तुड़वा कर वहाँ शाही ईदगाह मस्जिद बनवा दी।