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जजों की बात को स्क्रीन से रिकॉर्ड कर किया वायरल: सुनीता केजरीवाल पर FIR दर्ज की उठी माँग; जो औरत कोर्ट कार्यवाही का वीडियो वायरल कर सकती, किसी गोपनीय दस्तावेज का वीडियो बनाकर देश के दुश्मन को बेच सकती है

देश को नई दिशा और स्वच्छ राजनीति देने आए अरविन्द केजरीवाल खुद उस कीजड़ में सन गए जिसके विरुद्ध दिल्ली की जनता ने अपने सिर पर बैठाया था। आम आदमी पार्टी के राज में कितना अधिक भ्रष्टाचार हुआ है, पार्टी के सत्ता से बाहर होने से पहले ही सामने आने शुरू हो गए हैं। 

इसमें केजरीवाल को ही दोषी नहीं ठहराया जा सकता। क्योकि इनका लालन-पालन ही छल-कपट के आंचल में हुआ है। जिसका आदमी बाप ही अपनी बहन को संपत्ति हड़पने के लिए अपने पिता की पत्नी बता दे, संस्कारों का अनुभव यही से हो जाता है। जब घर से ऐसी छल-कपट की शिक्षा मिली हो, ऐसे आदमी की सौबत भी ऐसे ही कपटियों की होगी। और उसी दिशा में पूरा परिवार चल निकला है। जब पत्नी सुनीता कानून को ताक पर रख कोर्ट में वीडियो बना वायरल कर सकती है, यहीं से बच्चों की दूषित मानसिकता का अंदाजा लगाया जा सकता। क्या ऐसा छल-कपट वाले परिवार से देश तो दूर एक राज्य को भी चलाने की सोंचना मूर्खता होगी।  

जो औरत कोर्ट कार्यवाही का वीडियो बनाकर वायरल कर सकती है, देश के किसी गोपनीय मीटिंग की अथवा दस्तावेज का वीडियो बनाकर देश के दुश्मनों को बेच सकती है, इसलिए सुनीता पर राज्यपाल वी के सक्सेना, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ को गंभीरता से लेना चाहिए। यह बहुत गंभीर मामला है।    

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बाद अब उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। खबर है कि उनके खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका डालकर 
एफआईआर दर्ज करने की माँग हुई है। इस याचिका में आरोप है कि उन्होंने मार्च माह में एक कोर्ट सुनवाई के दौरान अरविंद केजरीवाल की जजों के साथ होती बातचीत को रिकॉर्ड किया था और बाद में वो वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आई थी।

जानकारी के मुताबिक, दिल्ली हाईकोर्ट में इस याचिका को पेशे से वकील वैभव सिंह ने दायर किया है। इसमें अदालत के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियमों का उल्लंघन करने के लिए कार्रवाई की माँग की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि जब 28 मार्च, 2024 को दिल्ली के मुख्यमंत्री को ट्रायल कोर्ट में पेश किया गया था तो सुनीता केजरीवाल और अन्य ने ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही को अवैध रूप से रिकॉर्ड किया।

बाद में ये रिकॉर्डिंग #MoneyTrailExposedByKejriwal हैशटैग के साथ प्रसारित हुई। लोगों ने इसे केजरीवाल की धमाकेदार वीडियो कहकर शेयर किया था और दावा किया था कि इससे ईडी के बाकी सारे दावों की धज्जियाँ उड़ गईं। मालूम हो कि अब इसी वीडियो को रिकॉर्ड करने के बाबत ये याचिका डाली गई है।

याचिका में कहा गया है जिन परिस्थितियों में वीडियो रिकॉर्डिंग वायरल की गई, उससे राजनीतिक दलों द्वारा न्यायपालिका की छवि खराब करने और इस देश के आम लोगों को गुमराह करने की बू आती है ताकि लोग इसे देख यह सोचें न्यायपालिका किसके इशारे पर काम कर रही है।

सोशल मीडिया पर प्रसारित होती वीडियो में दिख रहा था कि अरविंद केजरीवाल विशेष न्यायधीशों के सामने वीडियो सोशल मीडिया पर अपनी बात रख रहे थे। वीडियो में वो अपनी गिरफ्तारी के खिलाफ कह रहे थे कि उन्हें किसी कोर्ट ने दोषी भी नहीं करार दिया फिर भी उन्हें पकड़ लिया गया


केजरीवाल को कोर्ट से मिले 'Special Treatment' के पुख्ता सबूत; मीलॉर्ड ने कुछ और भी किया जो सुनीता भी कह रही है कि “वोट दोगे तो जेल नहीं जाना पड़ेगा”

सुभाष चन्द्र

यह लेख लिखने से पहले एक बात बड़े दुःख के साथ कहना चाहता हूं कि एक Youtuber अपना चैनल चलाते हैं “coffee with Sumeet Jain”, ये साहब कोर्ट से संबंधित मेरे कई लेख उठाकर अपने वीडियो youtube पर डाल रहे हैं और पैसा बना रहे है। ऐसा ही काम पिछले दिनों एक और चैनल ONLY NEWS 24x7 ने किया था और मेरे 17 से ज्यादा लेख चोरी कर अपने वीडियो बना कर youtube पर पोस्ट किये थे। ऐसा करना उचित नहीं है क्योंकि मैं बहुत मेहनत से लेख लिखता हूं और कोई उन्हें चोरी करके पैसा कमाए तो मुझे दुःख तो होगा ही। 

लेखक 
चर्चित यूटूबर 
मेरे अपने youtube channel का तो अभी monetization भी नहीं हुआ और न होने की उम्मीद है क्योंकि youtube मेरे views हर वीडियो में 15 से 35% तक कम कर देता है।  @सुमीत जैन कृपया ऐसा करना बंद कीजिए। कोई मुझे यह शिक्षा न दे कि वो मेरे विचारों को publicity दे रहे हैं। ऐसा नहीं है, वो अपने नाम से वीडियो बना कर अपनी publicity करके पैसा कमा रहे हैं। मुझे उम्मीद है जो गंभीर विषय में यहां लिख रहा हूं Sumeet Jain उसे भी उठा लेंगे। 

जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता द्वारा केजरीवाल को अंतरिम जमानत देने पर उनके फैसले पर सोशल मीडिया पर निंदा होने के बाद और गृह मंत्री अमित शाह के कहने के बाद कि बहुत लोगों का मानना है कि केजरीवाल को special treatment मिला, जस्टिस खन्ना ने सफाई दी थी कि हमें जो सही लगा उसके अनुसार आर्डर दिया गया। 

लेकिन सबसे बड़ा पुख्ता सबूत केजरीवाल को special treatment दिए जाने का और भी दिखाई देता है और वह यह है कि गिरफ़्तारी को अवैध कहने वाली उसकी याचिका को जनहित याचिका के रूप में दायर किया गया था और इसे खन्ना/दत्ता की बेंच ने PIL मान कर ही सुनवाई की थी जो सरासर कानूनी तौर पर गलत था और यही special treatment था।

सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद 32 में PIL दायर करते हुए याचिकाकर्ता को घोषित करना होता है कि वह याचिका स्वीकार होने पर मिलने वाले लाभ में किसी तरह भागीदार नहीं है, यह केवल जनहित का मामला है और मैं किसी तरह Interested Party नहीं हूं।

केजरीवाल अपनी गिरफ़्तारी को चुनौती देने के लिए PIL कैसे दायर कर सकता है, उसमे जनहित का कोई विषय था ही नहीं, और हर तरह से वही “लाभार्थी” है। फिर मीलॉर्ड का उसकी याचिका PIL की तरह admit करना ही एक और पुख्ता सबूत है उसके प्रति special treatment दिखाने का।

मीलॉर्ड, कुछ तो हुआ लगता है जो पहले केजरीवाल कह रहा था कि “आप मुझे वोट दोगे तो मुझे वापस जेल नहीं जाना पड़ेगा”। उसकी बात को खन्ना जी ने उड़ा दी यह कह कर कि यह केजरीवाल की सोच है, उसका हम कुछ नहीं कर सकते। कल सुनीता केजरीवाल ने जनता से कहा कि “आप यदि ज्यादा से ज्यादा वोट देंगे तो केजरीवाल जी को जेल नहीं जाना पड़ेगा “। 

इसका मतलब यही निकलता है कि चुनाव के नतीजे 4 जून तक आने तक तो केजरीवाल Surrender नहीं करेगा जिसके लिए गोली जमानत मिलते हुए ही फिट हो गई थी, इंडी गठबंधन की जीत के बाद वो ऐलान कर ही चुका है कि 5 जून को जेल से बाहर आ जाएगा। अब दाल में क्या काला था, यह या तो मीलॉर्ड जानते हैं, या सिंघवी जानता है और या केजरीवाल जानता है पर कुछ तो गड़बड़ जरूर हुई थी।

अब मेट्रो में कोई कुछ लिखा गया, उस पर केजरीवाल की पार्टी चालू हो गई कि PMO में केजरीवाल की हत्या की साजिश हो रही है।

 जबकि जो लिखा गया है, उसे देख कर लगता है इसकी पार्टी की खुद का ही षड़यंत्र है। केजरीवाल की ऐसी क्या औकात है जो PM उसके लिए अपना समय बर्बाद करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल PIL, विदेशी आक्रांताओं द्वारा रखे गए नामों को बदला जाए: वकील अश्विनी उपाध्याय कहा- नाम पता करने के लिए बने रीनेमिंग कमीशन

वकील अश्विनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल दाखिल कर विदेशी आक्रमणकारियों के नामों पर रखे गए शहरों व स्थानों के नाम बदलने की माँग की है। उपाध्याय ने कोर्ट से एक रीनेमिंग कमीशन बनाने की माँग की है, जिसका काम बदले गए स्थानों के वास्तविक नाम का पता लगाना होगा। उन्होंने अपनी याचिका के साथ 1,000 नामों की एक सूची भी कोर्ट सौंपी है। याचिका में उन्होंने न्यायालयों द्वारा पूर्व में दिए गए निर्णयों का भी उल्लेख किया है।

सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दिए जाने की जानकारी देते हुए अश्विनी उपाध्याय ने अपने ट्विटर हैंडल से एक वीडियो पोस्ट किया है। वीडियो में वे इस पीआईएल के विषय की जानकारी दे रहे हैं। उपाध्याय ने जानकारी दी कि पीआईएल में उन्होंने रीनेमिंग कमीशन बनाने की माँग की है। कमीशन आक्रांताओं द्वारा बदले गए स्थानों के नामों की पहचान कर उसके वास्तविक नाम का पता लगाएगा। इसके बाद सरकारें उसे बदलने का काम करेंगी।

वकील उपाध्याय ने याचिका के साथ 1000 स्थानों के नाम कोर्ट के सामने रखे, जिन्हें आक्रान्ताओं ने बदल दिया था। याचिका के अनुसार, बिहार के बेगूसराय का नाम अजातशत्रु नगर था, जो बर्बर बेगू के नाम पर बेगूसरया बन गया। मुजफ्फरपुर को विदेहपुर के नाम से जाना जाता था। हरिपुर का नाम हाजीपुर किया गया। द्वार बंगा को क्रूर दरभंग खान के कारण दरभंगा कहा जाने लगा।

नालंदा को जलाने वाले बख्तियार के नाम पर पटना के पास बख्तियारपुर शहर है। इसके अलावा उन्होंने याचिका में बिहार शरीफ और जमालपुर जैसे बिहार के शहरों का उल्लेख किया है। याचिका में बिहार के शहरों के अलावा देश भर के अन्य शहरों का भी नाम दिया गया है। उनमें अहमदाबाद, होशंगाबाद, दौलताबाद, औरंगाबाद, उस्मानाबाद, गाजियाबाद, फिरोजाबाद, फरीदाबाद, गाजीपुर, जौनपुर, आजमगढ़ जैसे स्थान शामिल हैं।

पिछले दिनों ही राष्ट्रपति भवन स्थित मुगल गार्डन का नाम बदलकर अमृत उद्यान कर दिया गया था। हालाँकि, दिल्ली में अब भी कई जगहों के नाम मुगल आक्रान्ताओं के नामों पर ही हैं। दिल्ली में ही बाबर रोड, अकबर रोड, जहाँगीर रोड, औरंगजेब रोड, तुगलक रोड जैसे सड़कों के नाम हैं। याचिका में शहरों के साथ-साथ सड़कों और ऐतिहासिक स्थानों के नाम बदलने के लिए भी कदम उठाने की माँग की गई है।