Showing posts with label #Red Fort. Show all posts
Showing posts with label #Red Fort. Show all posts

ड्रोन से हमले कर दिल्ली को दहराने की कोशिश को किया नाकाम; ‘जूता बम’ की भी हो रही जाँच

जैसे-जैसे बिलों में छिपे आतंकवादियों को गिरफ्तार किया जा रहा है, और उनसे पूछताछ की जा रही है चौकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े जितने भी डॉक्टर हैं सभी पर होती कार्यवाही से देश स्तब्ध है। चर्चा यह भी हो रही है कि क्या अल-फलाह यूनिवर्सिटी आतंकवाद का अड्डा है?

दिल्ली ब्लास्ट केस में ऐसे लोग सामने आ रहे हैं जिनकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। अब रोहतक की रहने वाली प्रियंका शर्मा जो कश्मीर के पुलवामा के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में लेक्चरर थी उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। डॉक्टर प्रियंका शर्मा अशांति दूतो के बीच रहते-रहते घोर सेकुलर बन चुकी थी। 

डॉक्टर नदीम ने उनसे कहा कि वह कुछ समस्या में है उसे 8,00,000 रूपए की जरूरत है और डॉक्टर प्रियंका ने उसके अकाउंट में 8,00,000 ट्रांसफर कर दिया। 

फिर वह पैसे मेवात में विस्फोटक खरीदने के लिए ट्रांसफर किए गए।

और इस तरह डॉक्टर प्रियंका इस मामले में फंस गई।

समाचार है कि डॉक्टर प्रियंका के ऊपर भी वही धाराएं लगा दी गई है जो आतंकवादी फंडिंग केस में लगती है।

मां बाप ने एमबीएस कराया एमडी कराया गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में जॉब मिली लेकिन सेकुलरिज्म की घुट्टी पीने की वजह से माथे पर आतंकवादी का ठप्पा लग गया। 

अब देखना है कि इस आतंकवादी गिरोह की जड़ें कितनी गहरी और कहां-कहां तक फैली हुई है। अगर समय रहते इस गिरोह को नहीं पकड़ा जाता है दिल्ली ही नहीं पूरे भारत को बारूद के ढेर पर बैठा दिया होता। अभी कुछ दिन पहले किसी चैनल पर बीजेपी प्रवक्ता, शायद शहजाद पूनावाला, ने बताया कि एक महीने में हमारी सुरक्षा एजेंसियों ने कम से कम 30 हमलों को नाकाम किया है। यानि Operation Sindoor के बाद से हमारी सुरक्षा एजेंसियों खामोश नहीं बैठी है। बल्कि जनता को चैन की सोने के लिए अपनी नींद हराम किए हुए हैं।         

दिल्ली में लाल किले के करीब 10 नवंबर को हुए आत्मघाती कार धमाके की जाँच में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) को एक और चौंकाने वाला सुराग मिला है। इस हमले को लेकर पकड़े गए आतंकी मॉड्यूल ने न सिर्फ आत्मघाती धमाके की योजना बनाई थी बल्कि यह मॉड्यूल हमास की तर्ज पर ड्रोन और छोटे रॉकेट का इस्तेमाल करके बड़े पैमाने पर हमला करने की तैयारी भी कर रहा था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जाँच में सामने आया है कि यह मॉड्यूल भीड़भाड़ वाले इलाकों में ड्रोन के जरिए बम गिराने की साजिश पर भी काम कर रहा था। यह हमला ठीक वैसे करने की योजना थी जैसे हमास ने 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर किया था।

जाँच एजेंसी ने जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के काजीगुंड के रहने वाले जसीर बिलाल वानी उर्फ दानिश को गिरफ्तार किया है। NIA की टीम ने उसे चार दिन पहले श्रीनगर से उठाया था जिसके बाद पूछताछ में सामने आई जानकारी से इस हमले को लेकर कई नए खुलासे हुए हैं।

दानिश को सोमवार (17 नवंबर 2025) को गिरफ्तार किया गया। एजेंसी का कहना है कि दानिश छोटे ड्रोन हथियार बनाने में सक्षम था और उसे बड़ी बैटरियों से लैस ऐसे ड्रोन डिजाइन करने का अनुभव था जो कैमरे और भारी विस्फोटक सामग्री दोनों को ढो सकें।

NIA के अनुसार दानिश ने आत्मघाती हमलावर डॉ. उमर उन नबी को तकनीकी सहायता दी थी। वह ड्रोन को मॉडिफाई करने और रॉकेट बनाने की कोशिशों में से शामिल था। एजेंसी का कहना है कि मॉड्यूल का मकसद भीड़भाड़ वाले इलाकों में ड्रोन से बम गिराकर अधिक से अधिक लोगों को मारना था। यह पद्धति सीरिया, इराक, अफगानिस्तान और इजरायल में हमास तथा ISIS जैसे संगठनों द्वारा किए जाने वाले हमलों से मिलती-जुलती है।

जाँच में सामने आया है कि जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा यह मॉड्यूल छोटे रॉकेट भी बनाने पर काम कर रहा था। इन रॉकेट्स को सीरियल ब्लास्ट में इस्तेमाल किया जा सकता था। एजेंसी को आशंका है कि मॉड्यूल का उद्देश्य सिर्फ एक आत्मघाती हमला ही नहीं बल्कि बड़े पैमाने पर मल्टी-स्टेज आतंकी हमला करना था। जाँच टीम को धमाके वाली जगह से एक जूता भी मिला है। इस जूते में विस्फोटक होने की आशंका जताई गई है। इस कथित ‘जूता बम’ को लेकर भी फॉरेंसिक की जाँच चल रही है। 

क्या दलवई जैसे कांग्रेस नेताओं की वजह से कश्मीर से आतंकवाद ख़त्म नहीं हो रहा? दिल्ली ब्लास्ट को कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने किया जस्टिफाई; देखिए वीडियो, आतंकवादियों को जेल से छुड़ाने मेहबूबा के अब्बू ने अपनी ही बेटी के किडनैप का ड्रामा किया था


जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटने और पत्थरबाज़ी पर अंकुश लगाने से जनता को वहां से आतंकवाद के ख़त्म होने पर राहत की साँस ली थी कश्मीर जाने से वहां के पर्यटन को बढ़ावा देकर अर्थव्यवस्था को सुधारने में लग गयी। लेकिन जिसे भीख मांगने की आदत हो राज्य को आत्मनिर्भर होते कैसे बर्दाश्त कर सकते हैं। हुसैन दलवई जैसे नेताओं ने आतंकवादियों को राज्य से बाहर जाकर अपने काम को अंजाम देने के लिए शायद भेज रहे हैं? वैसे आतंकवादियों पर होती कार्यवाही से अब्दुल्ला परिवार और मेहबूबा मुफ़्ती भी पीछे नहीं। केंद्र में मोदी सरकार को आतंकवाद को समर्थन देने वालों पर भी सख्ती करनी होगी। शंका है, शंका गलत भी हो सकती है, कश्मीर से लेकर भारत के शेष भागों में फैले आतंकवादियों की शायद इनको जानकारी हो? जब तक आतंकवाद के इन sleeper cells पर कार्यवाही नहीं होगी सच्चाई सामने नहीं आ सकती। देखना है कि सरकार कब कार्यवाही करती है।      

मेहबूबा मुफ़्ती परिवार की आतंकवादियों को समर्थन देना बहुत पुराना है। तत्कालीन वी पी सिंह की सरकार में गृह मंत्री रहे इनके अब्बू मुफ़्ती मोहम्मद सईद ने जेलों में बंद आतंकवादियों को छुड़ाने के लिए अपनी ही बेटी रुपैया सईद के अपहरण का ड्रामा खेला था। क्या ऐसे नेताओं से राज्य में शांति की उम्मीद की जा सकती है? आखिर किस लालच में मेहबूबा दामाद की तरह आतंकवादियों को संरक्षण दे रही है। देखिए रुबैया अपहरण कांड वीडियो: 

        

कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने लाल किले में हुए कार ब्लास्ट में शामिल जिहादी और आतंकी डॉक्टर मॉड्यूल के प्रति सहानुभूति जताई है। उन्होंने कहा है कि कश्मीर में जिस तरह से ‘अन्याय’ हुआ है, उसका असर तो दिखेगा। उन्होंने कहा कि चुनाव आते ही बम फटते हैं इसकी जाँच होनी चाहिए। आरएसएस जिस तरह से प्रचार करते हैं इसकी भी जाँच होनी चाहिए।

ऐसा कहते हुए उन्होंने आतंकियों के देश विरोधी और मानवता विरोधी कार्यों को सही ठहराने की कोशिश की है।

क्या कहा हुसैन दलवई ने?

कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने आतंकियों के पास मिले 2900 किलो विस्फोटक, उनकी साजिश पर पर्दा डालने की कोशिश की है। राम मंदिर को उड़ाने और देश के अहम हिस्सों में धमाका करने की साजिश को नजरअंदाज किया है। इनके मन में लालकिले में हुए कार विस्फोट में मारे गए 12 निर्दोष लोगों के प्रति कोई सहानुभूति नहीं है, कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं और जिंदगी-मौत के बीच झूल रहे हैं, ये भी मायने नहीं रखता।

सैन जैसे लोगों को सिर्फ कश्मीर में ‘अत्याचार’ नजर आता है। कश्मीर में निर्दोष पर्यटकों को मारा गया, उस वक्त इनकी बोलती बंद हो जाती है। इसमें भी इन्हें सीमा पार से मिल रहे आतंकी सहयोग नजर नहीं आते। आतंकियों की बर्बरता नजर नहीं आती। दिखाई देती है तो कथित ‘अत्याचार’ और वह भी सिर्फ कश्मीरी इस्लामिक कट्टरपंथियों के प्रति। वरना 90 के दशक में कश्मीरी हिन्दुओं पर हुए अत्याचार पर भी उनके मुँह से कभी कुछ निकल गया होता, तो ये समझा जा सकता था।

हुसैन दलवई का कहना है कि कश्मीरियों पर जो अत्याचार हुए हैं उसकी वजह से लालकिल पर कार विस्फोट हुआ। उन्होंने बिहार चुनाव की ओर इशारा करते हुए कहा कि चुनाव आते ही बम फटते हैं, इसकी जाँच होनी चाहिए। आरएसएस जिस तरह से प्रचार करते हैं इसकी भी जाँच होनी चाहिए।

कांग्रेस नेता ने पहले कश्मीरियों पर ‘अत्याचार’ की बात कही। कार विस्फोट में शामिल डॉक्टरों के गैंग को देश में क्या-क्या ‘अत्याचार’ हुए। मामूली फीस देकर सरकारी मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई, सरकारी नौकरी और बाकी सभी सुविधाएँ। हालाँकि कई डॉक्टरों ने सरकारी नौकरी छोड़ कर जिहाद फैलाने के लिए अल फलाह यनिवर्सिटी ज्वाइन किया। अब इन डॉक्टरों पर किस तरह के ‘अत्याचार’ हुए हैं, जिसकी वजह से कट्टरपंथ और जिहाद का रास्ता इनलोगों ने चुना, ये तो हुसैन दलवई ही बता पाएँगे।

आरएसएस को आतंकी संगठन कह जाँच की बात कही

आरएसएस पर हुसैन दिलवई हमेशा विवादित बयान देते रहे हैं। कांग्रेस नेता ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को आतंकवादी संगठन तक कह डाला और इसके कामकाज की जाँच करने की बात कही। उन्होंने कहा कि आरएसएस लोगों को हिंसा सिखाते हैं। इससे पहले नवंबर 2024 में दलवई RSS को आतंकी संगठन कहते हुए लोगों को हिंसा सिखाने की बात कही थी।

दलवई को दुनिया के सबसे अनुशासित समाज सेवी संगठन के काम आतंकी दिखते हैं और ‘खतरनाक’ लगते हैं, लेकिन आतंकी कार्रवाई, हिंसक घटनाएँ ‘अन्याय का बदला’ नजर आता है।

मुंबई हमले के वक्त भी आरएसएस को घसीटा गया

दिल्ली ब्लास्ट से जुड़े डॉक्टर जिहादी कंपनी के प्रति ये ‘प्यार’ कांग्रेस नेताओं का कोई नया नहीं है। पहले भी मुंबई ब्लास्ट के वक्त कॉन्ग्रेस नेता एआर अंतुले ने आतंकवादियों के प्रति नरमी बरतते हुए आरएसएस को इसमें घसीटा था।

कांग्रेस की मुस्लिम तुष्टिकरण का ये असर था कि 26/11 मुंबई हमले में अगर कसाब नहीं पकड़ा जाता तो शायद सारे सबूत होने के बावजूद इस घटना को ‘भगवा आतंकवाद’ कह दिया जाता। पाकिस्तान को ये चाहता ही था, कांग्रेस ने भी इसकी तैयारी कर रखी थी। इसलिए कसाब का नाम समीर अजमल कसाब को ‘समीर दिनेश चौधरी’ नाम दिया गया था, उसकी पहचान बेंगलुरु के एक छात्र की बनाई गई थी और उसे कलावा पहनाया गया था। ये सब इसीलिए, ताकि वो हिन्दू दिखे।

अजमल कसाब को ‘अरुणोदय डिग्री कॉलेज’ के छात्र की नकली पहचान दी गई थी। वो हमले से कुछ दिन पहले सिद्धिविनायक मंदिर भी पहुँचा था, वहाँ तस्वीरें क्लिक करवाई थी और 15-20 कलावा खरीदे थे। उसने पाकिस्तान जाकर साजिशकर्ता साजिद मीर को ये सारा कलावा दिया था और उसे भी लगा कि ये एक अच्छा विचार है। सोचिए, अगर अजमल कसाब नहीं पकड़ा जाता तो फिर पाकिस्तान की साजिश सफल हो जाती, कॉन्ग्रेस का साथ उसे मिल तो रहा ही था।

दिसंबर 2008 में, अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री ए.आर. अंतुले ने 26/11 के मुंबई आतंकवादी हमलों को लेकर विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) के प्रमुख हेमंत करकरे की हत्या का संबंध 2006 के मालेगांव विस्फोटों में हिंदू दक्षिणपंथी समूहों की करकरे द्वारा की गई जांच से जुड़ी हो सकती है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विजय नामदेव वडेट्टीवार ने यहाँ तक कह दिया था कि IPS हेमंत करकरे की जिस गोली से हत्या हुई वो अजमल कसाब या अन्य आतंकियों ने नहीं चलाई थी, बल्कि एक RSS के समर्पित पुलिस अधिकारी के हथियार से चली थी।

लाल किला ब्लास्ट : संदेह में सुनहरी मस्जिद? 3 घंटे वहां कार क्यों रुकी रही? क्या सरकार को देश में भी Operation Sindoor चलाने का समय आ गया है? जम्मू-कश्मीर से पकड़े गए आमिर और तारिक

 

आतंकियों ने जो दिल्ली में धमाका किया है देखना यह है कि अब इस धमाके की लपेटे में कौन-कौन आएगा? आए दिन वोट चोरी को लेकर जो धमाकों की बात कही जाती थी यह बयान भी अब सबकी जबानों पर आ गया है। अगर मोदी सरकार ने इस धमाके की अति गंभीरता से जाँच की भारत में पल रहे पाकिस्तान और उनके समर्थकों की भी अब शायद खैर नहीं होगी। इस धमाके ने केंद्र सरकार ही नहीं जितनी भी गुप्तचर संस्थाएं हैं सभी को ऐसी हरकत में ला दिया है कि जिसे अंजाम तक पहुंचाए बगैर कोई चैन की नींद नहीं सोयेगा। इन लोगों ने Operation Sindoor के दूरगामी परिणामों को नहीं समझा। पूर्व सेना अध्यक्ष बिपिन रावत ने ठीक कहता था कि बाहरी दुश्मन से लड़ने के साथ हमें ढाई मोर्चे पर लड़ना होगा। ये वही रावत है जिन्हे एक कांग्रेस नेता ने सड़क का गुंडा कहा था। मुस्लिम तुष्टिकरण में कितना नीचे गिर जाते हैं अपने आपको देश रक्षक कहलाने वाले नेता। क्या सरकार को देश में भी Operation Sindoor चलाने का समय आ गया है?  

देशप्रेमी भारतीयों को याद करना होगा कि मुस्लिम आक्रांता अपने साथ कोई लम्बी-चौड़ी फ़ौज लेकर नहीं आए थे क्योकि उनको मालूम था कि भारत में बिकाऊ जयचन्दों की कोई कमी नहीं। क्या तुष्टिकरण करने वाले नेता जिन्हे जनता अपना हितैषी समझती है इतिहास को दोहरा रहे हैं?       

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास सोमवार (10 नवंबर 2025) शाम को एक चलती कार में जोरदार धमाका हुआ था। इस हमले में लगभग 8 लोगों की मौत हो गई है और कई अन्य घायल हुए हैं। इसे संदिग्ध आतंकी हमला माना जा रहा है। जाँच एजेंसियाँ अब धमाके से कुछ देर पहले के एक CCTV फुटेज पर फोकस कर रही हैं।

चर्चा यह भी है दिल्ली पुलिस सुनहरी मस्जिद में भी कार्यवाही कर रही है क्योकि कार पहले यहीं 3 घंटे तक रुकी हुई थी। संदेह किया जा रहा है कि क्या आतंकी मस्जिद में बैठ विस्फोट की योजना को अंजाम देने की प्लानिंग कर रहे थे?  

फुटेज में विस्फोट वाली I-20 कार और उसमें काला मास्क पहने संदिग्ध ड्राइवर मोहम्मद उमर नजर आ रहा है। यह फुटेज और कार की जटिल खरीद-फरोख्त की कड़ी, जाँच में अहम सुराग साबित हो रहे हैं।

जाँच का केंद्र बनी संदिग्ध I-20 कार

 धमाके से कुछ देर पहले का एक CCTV फुटेज सामने आया है। इस फुटेज में सफेद रंग की I-20 कार भीड़ वाले ट्रैफिक से गुजरते हुए दिख रही है। कार चला रहे शख़्स ने काले रंग का मास्क पहना हुआ था। यह शख्स आतंकी मोहम्मद उमर बताया जा रहा है। जाँच एजेंसियाँ फुटेज में दिख रही इस संदिग्ध कार और मास्क पहने ड्राइवर की पहचान पक्की कर रही हैं। वे तकनीकी और मानवीय खुफिया जानकारी का इस्तेमाल कर रहे हैं।

कार की लंबी खरीद-फरोख्त और पुलवामा कनेक्शन

जिस I-20 कार में धमाका हुआ, उसकी खरीद-फरोख्त की कड़ी लंबी है। यह कार पहले मोहम्मद सलमान की थी। सलमान ने इसे नदीम को बेचा था। नदीम ने इसे फरीदाबाद के एक यूज्ड कार डीलर, रॉयल कार जोन को बेच दिया।
इसके बाद तारिक अहमद ने इसे खरीदा और फिर उमर ने लिया। जानकारी के मुताबिक, दो लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। उनका नाम आमिर राशिद और तारिक अहमद है। तारिक जम्मू और कश्मीर के पुलवामा का रहने वाला है। जाँचकर्ता फरीदाबाद के एक आतंकी मॉड्यूल से उसके कनेक्शन की जाँच कर रहे हैं। माना जा रहा है कि इस मॉड्यूल ने ही बम धमाके की साजिश रची थी।
पहाड़गंज-दरियागंज से 4 संदिग्ध हिरासत में लिए गए: लाल किला मेट्रो स्टेशन किया गया बंद
दिल्ली ब्लास्ट का संदिग्ध डॉक्टर उमर फिदायीन बम हो सकता है। वह पुलवामा का रहने वाला है। न्यूज 18 के मुताबिक उसकी माँ और उसके भाई को जम्मू कश्मीर पुलिस ने पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। ब्लास्ट स्थल से धमाके वाली कार के पास से क्षतिग्रस्त हाथ के टुकड़े मिले हैं।
इस बीच दिल्ली पुलिस ने पहाड़गंज, दरियागंज और आसपास के इलाकों के होटलों में रात भर तलाशी ली। पुलिस टीम ने होटलों के रजिस्टरों की जाँच की। तलाशी के दौरान, चार संदिग्धों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया।
इस बीच दिल्ली पुलिस ने पहाड़गंज, दरियागंज और आसपास के इलाकों के होटलों में रात भर तलाशी ली। पुलिस टीम ने होटलों के रजिस्टरों की जाँच की। तलाशी के दौरान, चार संदिग्धों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया।
डीसीपी नॉर्थ राजा बंथिया के मुताबिक, “कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। यूएपीए, विस्फोटक अधिनियम और बीएनएस की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। एनएसजी, दिल्ली पुलिस और एफएसएल की टीमें मौके पर मौजूद हैं और पूरे क्राइम सीन की जाँच कर रही हैं। जाँच जारी है। जिस कार में धमाका हुआ था, उसमें कुछ बॉडी पार्ट्स हैं। एफएसएल टीम उन्हें इकट्ठा कर रही है, देखते हैं कि ये कैसे जुड़ते हैं।”
न्यूज 18 के मुताबिक, कश्मीर में दो लोगों को हिरासत में लिया गया है। पुलवामा के संबूरा निवासी तारिक अहमद डार और उमर उर्फ ​​आमिर। तारिक ने दावा किया कि उसने कार आमिर को सौंप दी थी।

कार का पता पुलवामा से चला

जाँचकर्ताओं ने कार का पता जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के एक व्यक्ति से लगाया है, जिससे संभावित आतंकी संबंध का पता चला है। सीएनएन न्यूज़18 के सूत्रों के अनुसार, कार मूल रूप से गुरुग्राम में HR26 नंबर के तहत पंजीकृत थी और पहले मोहम्मद सलमान के पास थी। कथित तौर पर यह चार बार बदली गई। सलमान से देवेंद्र, देवेंद्र से सोनू और अंत में सोनू से पुलवामा के शंभूरा गाँव के तारिक के पास आई।
दिल्ली पुलिस ने तारिक और उसके साथियों के बारे में जानकारी की पुष्टि के लिए एक विशेष टीम श्रीनगर भेजी है। कार को कथित तौर पर फरीदाबाद के एक कार डीलर के माध्यम से अवैध रूप से खरीदा गया था।

विस्फोट में आईईडी का इस्तेमाल

प्रारंभिक जाँच से पता चलता है कि विस्फोट में एक इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) का इस्तेमाल किया गया था।विस्फोट की वजह से कार के परखच्चे उड़ गए। कश्मीरी गेट, दरियागंज, सुनहरी मस्जिद और लाल किलाविस इलाकों से 50 से ज़्यादा सीसीटीवी फुटेज इकट्ठा किए गए हैं। इससे कार के बारे में पता चला कि दोपहर से ही उत्तरी दिल्ली में कार घूम रहा था। विस्फोट से पहले वह कई घंटों तक कार सुनहरी मस्जिद के पास खड़ी थी।

‘लाल किला हमारा, इसका मालिकाना हक हमें दो’: बहादुर शाह जफर-II की वंशज सुल्ताना बेगम डिमांड लेकर पहुँचीं दिल्ली हाई कोर्ट, अदालत ने याचिका खारिज की

                                  दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज की सुल्ताना बेगम की याचिका (फोटो साभार: X)
इसे देश का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि मुस्लिम तुष्टिकरण के चलते भारत के वास्तविक इतिहास को ही बदल दिया, अगर इस तरह का दुस्साहस किसी अन्य देश में हुआ होता निश्चित रूप से ऐसे इतिहासकारों और इनके आकाओं को जेल में डाल दिया होता। देखिए संलग्न पृष्ठ जब मेरे इस स्तम्भ पर कट्टरपंथियों ने केवल मुझे ही नहीं मेरे मृतक पूजनीय माता-पिता तक को अपमानित शब्द बोले गए थे।   
दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार (13 दिसंबर 2024) को मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर-II की वंशज सुल्ताना बेगम द्वारा दायर याचिका खारिज कर दी। सुल्ताना बेगम ने लाल किले पर मालिकाना हक और 1857 से अब तक मुआवजे की माँग की थी। वह बहादुर शाह जफर-II के परपोते की विधवा हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुल्ताना बेगम ने 2021 के हाईकोर्ट के एकल बेंच के फैसले के खिलाफ यह याचिका दायर की थी, जिसमें उनकी याचिका देरी के आधार पर खारिज कर दी गई थी। अब कार्यवाहक चीफ जस्टिस विभू बखरू और जस्टिस तुषार राव गेडेला की बेंच ने भी इसे खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि 2021 के फैसले के खिलाफ अपील में ढाई साल की देरी हुई है।

सुल्ताना बेगम ने दावा किया था कि 1857 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने जबरन लाल किले का कब्जा छीन लिया था। उनका कहना था कि यह किला उनके पूर्वज बहादुर शाह जफर-II से उन्हें विरासत में मिला है। बेगम ने वकील विवेक मोरे के माध्यम से दायर याचिका में यह भी तर्क दिया कि भारत सरकार लाल किले पर अवैध कब्जा किए हुए है। उन्होंने केंद्र सरकार से माँग की थी कि या तो लाल किला उन्हें लौटाया जाए या 1857 से अब तक का मुआवजा दिया जाए।

लाल कोट यानी लाल किला का निर्माण मुगल बादशाह शाहजहाँ ने किया था। शाहजहाँ ने आगरा से दिल्ली राजधानी स्थानांतरित करने के बाद इसे बनवाया। पहले यह लाल और सफेद संगमरमर का भव्य महल था। 1747 में नादिर शाह के आक्रमण के दौरान लाल किले की कला और बहुमूल्य गहने लूट लिए गए, जिनमें प्रसिद्ध मयूर सिंहासन भी शामिल था। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के बाद ब्रिटिशों ने किले का लगभग 80% हिस्सा नष्ट कर दिया, संगमरमर की संरचनाएँ हटा दीं और सेना के लिए पत्थर की बैरकें बना लीं।

आजादी के बाद लाल किले का इस्तेमाल भी सैन्य बेस के रूप में किया गया। 2003 में वाजपेयी सरकार ने इसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को सौंप दिया, जो अब इसके संरक्षण और देखरेख का कार्य करता है। दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब सुल्ताना बेगम की याचिका पर कोई कानूनी राहत मिलने की संभावना नहीं है। 

स्वतंत्रता दिवस पर भी राजनीति से बाज नहीं आई कांग्रेस, लाल किला नहीं पहुँचे खड़गे

मल्लिकार्जुन खड़गे ने कॉन्ग्रेस कार्यालय में फहराया झंडा, लाल किले पर खाली रही कुर्सी (फोटो साभार: ट्विटर @INCIndia/एएनआई)
देश के 77वें स्वतंत्रता दिवस पर भी कांग्रेस राजनीति से बाज नहीं आई। लाल किले पर आयोजित पारंपरिक समारोह में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे नहीं पहुँचे। बाद में सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि आँखों से संबंधित समस्या होने और पार्टी ऑफिस में समय से राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए उन्होंने इससे दूरी बनाई। लेकिन कांग्रेस मुख्यालय में अपने संबोधन के दौरान बीजेपी और केंद्र सरकार पर आरोप लगाने से वे खुद को दूर नहीं रख पाए।

खड़गे ने कहा, “मुझे आँखों में थोड़ी दिक्कत है। प्रोटोकॉल के मुताबिक मुझे सुबह 9:20 पर अपने घर पर झंडा फहराना था। इसके बाद मुझे पार्टी दफ़्तर पर झंडा फहराना था। इसलिए मैं वहाँ ​नहीं पहुँच सका।” आगे उन्होंने कहा, “सुरक्षा इतनी कड़ी है कि वे पीएम के निकलने से पहले किसी और को वहाँ से जाने नहीं देते। मुझे लगा कि मैं यहाँ समय पर नहीं पहुँच पाऊँगा, साथ ही मैंने सुरक्षा स्थिति और समय की कमी के कारण वहाँ न जाना ही बेहतर समझा।”

कांग्रेस मुख्यालय में केंद्र सरकार पर लगाए आरोप

खड़गे ने कांग्रेस मुख्यालय में ध्वाजारोहण किया। इस दौरान सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी सहित अन्य कॉन्ग्रेस नेता भी मौजूद रहे। इस मौके पर भी कांग्रेस आरोप प्रत्यारोप वाली राजनीति को आगे बढ़ाने का काम किया। उन्होंने कहा, “लोकतंत्र, संविधान और संस्थान तीनों पर बहुत बड़ा खतरा है। संसद में विपक्ष के नेताओं के माइक बंद कर दिए जाते हैं और बाहर कहा जाता है कि हम दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र हैं। संसद में जब मैं खुद ही बात करने के लिए उठता हूँ, तो मेरा माइक बंद हो जाता है। एक तरफ हम लोकतंत्र का ढोल बजाते हैं, तो दूसरी तरफ हमारा मुँह बंद कर दिया जाता है।”