ऐसा लगता है अमेरिकी कुकुर और भारतीय कुकुर के समलैंगिक संबंध हो गए जो किसी तरह भी भारत की अर्थव्यवस्था को चौपट करने का षड़यंत्र करते रहते है।
हिंडनबर्ग ने 11 अगस्त की अपनी रिपोर्ट में सेबी की Chairperson माधवी पुरी बुच पर उन बातों को लेकर आरोप लगा कर बाजार गिराने की कोशिश की जो पहले Public Domain में है। बांग्लादेश तख्तापलट के बाद मात्र 6 दिन में ऐसी फर्जी रिपोर्ट बनाने में कोई देर नहीं लग सकती और यह रिपोर्ट राहुल गांधी के निर्देश पर बनाई गई।
लेखक चर्चित YouTuber
पूरा तामझाम तैयार था कांग्रेस का और ECOSystem, खटाखट प्रदर्शन हो गए जैसे बहुत बड़ा घोटाला हो गया, X पर बारात बैठ गई मोदी और सेबी को बदनाम करने के लिए। अगले ही दिन राहुल गांधी ने रिपोर्ट पर बयान देते हुए “राष्ट्रद्रोह” कर दिया। उसने कहा कि बाह विपक्ष का नेता होने के नाते निवेशकों से कहना चाहता हूं कि भारत के शेयर बाजार में अपनी गाढ़ी कमाई न लगाएं क्योंकि Empire निष्पक्ष नहीं है।
26 जून को सेबी ने हिंडनबर्ग को 21 में जवाब देने के लिए नोटिस दिया था for violating Indian market regulations and profiting by taking short positions। उसका जवाब देने की बजाय उसने नए आरोप लगा दिए। पिछली 25th जनवरी की रिपोर्ट की वजह से भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों का 150 billion dollar का नुकसान हुआ था और अब राहुल वही दोहराना चाहता था लेकिन फेल हो गया।
सेबी ने हिंडनबर्ग पर कुछ सख्त कदम उठाने की बात कही है कि उसकी और उसकी सभी entities की शेयर ट्रेडिंग को बंद किया जाएगा और उसे blacklist किया जाएगा। उसके खिलाफ criminal case दायर करके अमेरिका से उसके प्रत्यर्पण की मांग करनी चाहिए।
इसके अलावा राहुल गांधी पर भी भारतीय न्याय संहिता के section 152 में राष्टद्रोह का केस दर्ज होना चाहिए जो कहता है -The language of Section 152 of the BNS suggests that any act that, “excites or attempts to excite, secession or armed rebellion or subversive activities” is a criminal act- लोग को जानबूझकर झूठ बोलकर भारतीय शेयर बाजार के खिलाफ भड़का कर देश की अर्थव्यवस्था को चौपट कर बलवा मचाने के लिए उकसाया है।
सेबी और उसकी Chairperson माधवी पुरी बुच को Empire बता कर उन्हें पक्षपाती बताया है और एक तरह से कहा कि इस बाजार पर विश्वास न करो। राहुल गांधी को हमारे बाजार पर इतना भी विश्वास नहीं है तो फिर अपनी घोषित सम्पत्ति का 42% शेयर बाजार में क्यों निवेश किया हुआ है। इसका निवेश 4.3 करोड़ shares में है; 3.8 करोड़ Mutual Funds में है और 15 लाख Gold Bonds में है - फिर जनता को क्यों बरगला रहा है।
राहुल गांधी और उसकी कांग्रेस हमेशा किसी का सहारा तलाश करती है।
-कभी आतंकियों का सहारा, लेकिन उन्हें मोदी ने ठोक दिया;
-कभी पाकिस्तान का सहारा लेकिन वो खुद भिखारी हो गया मोदी की मेहरबानी से ;
-कभी लंदन का सहारा, वो खुद जल रहा है “शांतिप्रिय” लोगों की वजह से’
-कभी अमेरिका का सहारा लेकिन मोदी उसकी भी नहीं सुनता;
-कभी चीन का सहारा, मोदी ने उसे भी ठोक के रखा हुआ है;
-चुनाव अकेले लड़ नहीं सकते, राज्यों के दलों का सहारा होता है फिर 99 पर Out; और
-अब हिंडनबर्ग का सहारा जो अबकी बार एक दिन में बेनकाब हो गया। `
इतनी जल्दी है प्रधानमंत्री बनने की कि देश को ही आग लगा देना चाहता है।
गौतम अडानी के साथ-साथ माधवी पुरी बुच और SEBI को लपेट कर भारतीय नियामक संस्थाओं को अप्रत्यक्ष रूप से धमका रहा हिंडेनबर्ग गौतम अडानी के भाई विनोद अडानी हैं, जो दुबई में रहते हैं। बरमूडा स्थित ‘Global Dynamic Opportunities Fund’ में उनका निवेश है। इस कंपनी में मॉरीशस के ‘IPE Plus Fund’ में निवेश किया।इसके बाद इस फंड में 2015 में माधवी पुरी और उनके पति धवल बुच ने अकाउंट खोला। फिर धवल बुच ने 2018 में 7.32 करोड़ रुपए निकाल लिए। कंपनी Indian Infoline ने इस लेनदेन को पूरा कराया। माधवी पुरी भारतीय नियम संस्था SEBI की अध्यक्ष हैं, वहीं उनके पति धवल बुच कॉर्पोरेट में बड़े-बड़े पदों पर रहे हैं।
अडानी को बर्बाद न कर पाने की खीझ निकाल रहा हिंडेनबर्ग
ऊपर जो दावे किए गए हैं, वो हम नहीं कह रहे बल्कि अमेरिका की एक शॉर्टसेलर संस्था ‘हिंडेनबर्ग रिसर्च’ ने कहा है। शॉर्टसेलर का अर्थ होता है, ये अंदाज़ा लगा कर शेयरों को शॉर्ट करना, कि कंपनी को लेकर कोई नकारात्मक खबर आने वाली है। पिछली बार जनवरी 2023 में हिंडेनबर्ग ये आरोप लेकर आया था कि अडानी समूह ने अपनी कंपनी के शेयरों के भाव जानबूझकर बढ़ा दिए। उस रिपोर्ट के बाद कुछ ही महीनों में गौतम अडानी की संपत्ति में 60% की गिरावट आई।
हालाँकि, मई 2024 आते-आते अडानी समूह ने सारे घाटे को रिकवर कर दिया। इसके लिए कुछ प्रोजेक्ट्स को कुछ दिनों के लिए ठण्डे बस्ते में डाला गया और कंपनी के खर्च में कटौती की गई। लंबी कानूनी लड़ाई से भी कंपनी को जूझना पड़ा। SEBI से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक में मामला गया। गौतम अडानी ने अपने 60वें जन्मदिन पर 60,000 करोड़ रुपए की चैरिटी का संकल्प लिया था, वो खबर दब है और वो दुनिया के अमीरों की सूची में शीर्ष 20 से बाहर हो गए।
उधर शॉर्टसेलिंग करने वाले हिंडेनबर्ग को जुलाई 2024 में SEBI ने ‘कारण बताओ नोटिस’ भेजा। इसके अगले ही महीने जब बांग्लादेशी हिन्दुओं पर हमले की 200+ घटनाएँ सामने आ चुकी हैं, अचानक से हिंडेनबर्ग घोषणा करता है कि वो भारत के लिए कुछ नया जारी करने वाला है और फिर ये नई रिपोर्ट आ जाती है जिसमें पुराने आरोपों और पहले से ही उपलब्ध सूचनाओं की एक खिचड़ी तैयार कर के परोस दिया गया है। इसके लिए टाइमिंग का भी बखूबी ध्यान रखा गया – शनिवार को रिपोर्ट आई, रविवार को दिन भर माहौल बना, सोमवार को बाजार गिरने की आशंका है।
पुरी-बुच दंपति का लंबा कॉर्पोरेट करियर
धवल बुच का 35 वर्षों से भी अधिक का करियर रहा है कॉर्पोरेट वर्ल्ड में। हिंडेनबर्ग का ये दावा भी झूठा निकल गया कि Blackstone नामक कंपनी में उन्हें पद दिया गया जबकि उनका रियल एस्टेट को लेकर कोई अनुभव नहीं था। क्या कॉर्पोरेट वर्ल्ड में कोई ऐसा व्यक्ति MD, CEO या एडवाइजर नहीं बन सकता, जो पहले इन पदों पर न रहा हो? ब्लैकस्टोन के रियल एस्टेट विभाग से धवल बुच का कोई लेना-देना नहीं था, ऊपर से माधवी पुरी ने SEBI में ब्लैकस्टोन से जुड़े मामलों में खुद को ‘Recusal List’ में रखा है।
जो लोग SEBI की कार्यप्रणाली से परिचित हैं, उन्हें पता है कि संस्था का अध्यक्ष कोई तानाशाह नहीं होता या फिर वो चाह कर भी एकतरफा फैसले नहीं ले सकता। अब आप सोचिए, बोर्ड में कई सदस्य होते हैं और वो कई हितधारकों और यहाँ तक की आम जनता से भी राय लेकर फैसले लेते हैं, ऐसे में आखिर कैसे माधवी पुरी ब्लैकस्टोन को फायदा पहुँचा सकती हैं? उनके पति जब इस कंपनी में गए, तब तो वो सेबी की चेयरपर्सन बनी भी नहीं थीं। ऊपर से निवेश का जो मामला लेकर आया गया है वो 2015 का है।
जी हाँ, 9 साल पहले का। जबकि माधवी पुरी 2018 में SEBI में पूर्णकालिक सदस्य बनती हैं। उससे पहले वो कॉर्पोरेट जगत में पदाधिकारी थीं। वेतन और बोनस से लेकर निवेश तक से पैसे कमाए इस दंपति ने, इसमें बुरा क्या है? धवल बुच यूनिलीवर में लंबे समय तक कार्यरत रहे, पत्नी माधवी ICICI में बड़े पदों पर रहीं। वो IIM से पढ़ी हैं, उनके पति IIT से निकले हुए हैं। क्या दोनों मिल कर 35 वर्षों में 84 करोड़ रुपए की संपत्ति नहीं बना सकते? ये असंभव तो नहीं है अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में शीर्ष पदों पर रहने वालों के लिए।
हिंडेनबर्ग का ये रिपोर्ट पूरी तरह शातिराना और Hitjob प्रतीत होता है। जिस ‘IPE Plus Fund’ की बात हो रही है, उसका अब तक अडानी समूह की किसी भी कंपनी से कोई संबंध नहीं निकला है। हिंडेनबर्ग ने ऐसा कोई दस्तावेज नहीं दिया है, जिससे प्रतीत हो कि इस कंपनी में अडानी समूह का या फिर अडानी समूह का इस कंपनी में निवेश हो। India Infoline कह रही है कि ये एक वैध फंड था जो सारे नियमों की परीक्षण प्रक्रिया से होकर गुजरा है और सब कुछ पारदर्शी है।
आगे चलते हैं, हिंडेनबर्ग कहता है कि माधवी पुरी ने 2018 में SEBI से जुड़ने के बाद कंपनी से अपने पैसे निकाल लिए। ये तो अच्छी बात होनी चाहिए, क्योंकि इससे ‘हितों के टकराव’ का जो आरोप लग रहा है वो खत्म ही हो गया। कॉर्पोरेट में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने वाले लोगों के कई देशों में निवेश होते हैं, जब सारी सूचनाएँ उन्होंने सेबी को पहले से दे रखी है तो उसे सार्वजनिक कर के हिंडेनबर्ग क्या साबित करना चाहता है? साफ़ है, कुछ बातें जो आम जनता को नहीं पता है उन बातों को नकारात्मक माहौल बना कर पेश करना ही इनकी मंशा है।
अडानी और पुरी-बुच दंपति ने एक-एक आरोप का दिया जवाब
अडानी समूह ने अपने वित्तीय लेनदेन को खुली किताब बताया है, Indian Infoline कह रहा है कि उसके फंड का अडानी से कोई संबंध ही नहीं है। हिंडेनबर्ग इस पूरे आरोप को अनिल आहूजा पर खेल रहा है, जो कभी अडानी की कंपनी में बड़े पद पर हुआ करते थे। 2017 में वो अडानी समूह से अलग हो गए, तो हिंडेनबर्ग का मानना गई कि ऊपर जिस कंपनी का जिक्र है उसमें बुच दंपति ने पैसे लगाए, कंपनी ‘अडानी के आदमी’ की थी, इसीलिए SEBI का अडानी से कनेक्शन था।
जबकि बुच दंपति ने बयान जारी कर के बता दिया है कि अनिल आहूजा और धवल बुच बचपन के दोस्त हैं, दोनों ने IIT दिल्ली से पढ़ाई की है। ऊपर से अनिल आहूजा कई बड़े कंपनियों से जुड़े रहे हैं, केवल अडानी समूह से ही नहीं। फिर हिंडेनबर्ग की रिपोर्ट का आधार ही गलत है। हाँ, इसे सही कहा जा सकता था जब अनिल आहूजा अब भी अडानी की कंपनी में होते। और एक और मजेदार बात, क्या आपको पता है बुच दंपति की उस कंपनी में कितने शेयर थे? डेढ़ प्रतिशत।
जी हाँ, मात्र 1.5 प्रतिशत शेयर। सवाल ये है कि क्या कोई 2 लोग जिनका किसी फंड में मात्र डेढ़ प्रतिशत शेयर हो वो उस फंड को अपने इशारे पर नचा सकते हैं और ये तय कर सकते हैं कि वो किससे क्या डील करेगा? खासकर उस कंपनी में जहाँ इस तरह के निवेशक नहीं बल्कि इन्वेस्टमेंट मैनेजर ये सब तय करते हैं। लेकिन नहीं, हिंडेनबर्ग ने ऐसा साबित करने की कोशिश की है जैसे उक्त कंपनी धवल और माधवी की ही हो। कौन सा नशा लेकर इस रिपोर्ट को तैयार किया गया है?
ऐसी स्थिति में बाजार के लिए यही प्रार्थना की जा सकती है कि भगदड़ की स्थिति न बने और निवेशक शांत रहें, जब शेयरों के भाव गिरें तब खरीद की जाए। पिछली बार अडानी के शेयरों के भाव गिरे थे, जिन्होंने खरीदा उन्होंने खूब फायदा कमाया। वित्तीय वर्ष 2024 में अडानी समूह ने 55% का लाभ कमाया, इतनी नकारात्मकता के बावजूद। शेयरों के भी भाव बढ़े। अडानी के खाद्य उत्पाद भी बिकते हैं, कंपनी के पास पोर्ट्स से लेकर जमीन तक अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर है – ऐसे में जो सोचते हैं कि कंपनी सिर्फ कागज पर ही लाखों करोड़ की है और ये डूब जाएगी, वो गलत हैं।
जिस ‘Agora’ नामक कंपनी में धवल बुच और माधवी पुरी का हिस्सा बताया गया है, इसका जिक्र आपको धवल बुच के LinkedIn प्रोफाइल पर भी मिल जाएगा। यानी, सब कुछ उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर भी घोषित कर रखा है, ऊपर से वो कह रहे हैं कि नियामक संस्थाओं को इस बारे में सूचित किया ही गया था। फिर इसमें गड़बड़ कहाँ है? ये भी आरोप लगाया गया कि REIT क्षेत्र को लेकर माधवी पुरी मुखर थीं, ब्लैकस्टोन भी रियल एस्टेट में डील करता है तो ये ‘हितों का टकराव’ है।
Recusal वाली बात हटा भी दें तो ये सिर्फ माधवी पुरी का ही नहीं मानना है कि REIT (रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट) भारत में उभरता हुआ क्षेत्र है लेकिन फिर भी अमेरिका वगैरह से वो काफी पीछे है। ऐसे में विश्लेषकों का भी मानना है कि शॉपिंग मॉल से लेकर दफ्तरों वगैरह के लिए रियल एस्टेट में निवेश और फिर निवेशकों को उससे मिलने वाले मुनाफे वाली व्यवस्था भारत में अभी और बढ़ेगी। अब भारत को वैश्विक शक्तियों से प्रतियोगिता करनी है तो निवेश आकर्षित करने के लिए नियम बनाने होंगे, कुछ नियमों में बदलाव करना होगा, कारोबार आसान होता जाए यही तो SEBI का काम है।
पिछले 2 वर्षों में SEBI द्वारा 300 से अधिक सर्कुलर जारी किए जाने की बात बताई गई है, तो इसमें से एकाध से ब्लैकस्टोन को सहूलियत मिल ही गई हो तो इससे क्या साबित होता है? निवेशकों और कारोबारी कंपनियों का काम और कठिन बनाना थोड़े न भारत सरकार और इसकी संस्थाओं का काम है। हाँ, हिंडेनबर्ग चाहता है कि भारत के सारे नियम-कानून कठिन होते चले जाएँ और देश 1991 से पहले वाली नेहरूवाड़ी व्यवस्था में जाकर तबाह हो जाए, तो अलग बात है।
समझिए क्या चाहता है भारत विरोधी गिरोह विशेष
ऊपर से भारत का एक गिरोह विशेष लगातार अडानी समूह और मोदी सरकार को भला-बुरा कहने में लगा है इस रिपोर्ट के आधार पर। अडानी समूह को लेकर सिर्फ एक जाँच की रिपोर्ट आनी बाक़ी है। सुप्रीम कोर्ट जनवरी 2024 में ही अडानी को क्लीनचिट दे चुका है। तब तक 24 में से 22 मामलों की जाँच पूरी हो चुकी थी, मार्च में एक और की हो गई। सिर्फ एक बाकी है। सेबी ने स्पष्ट बताया है कि वो सिर्फ REIT ही नहीं, जिस भी एसेट क्लास में देश को फायदा है उन सभी को बढ़ावा देता है।
दुनिया के कई देशों में उथल-पुथल मचाने के लिए फंडिंग करने वाले अरबपति कारोबारी जॉर्ज सोरोस के भारत को लेकर नापाक इरादे अब तक सबको पता है और वो यहाँ ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी’ को लेकर चिंता भी जता चुके हैं, ऐसे में उनकी फंडिंग वाले संगठन OCCRP द्वारा भी अडानी पर लगाए गए आरोपों को सुप्रीम कोर्ट नकार चुका है। SIT जाँच भी नकार दी गई। CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने खुद इस पीठ की अध्यक्षता की थी। उन्होंने कहा था कि किसी तीसरी संस्था की बिना सबूत की रिपोर्ट को आधार नहीं बनाया जा सकता।
आशा है, हिंडेनबर्ग के खिलाफ जिन अनियमितताओं के आरोप लगे हैं और उसे जो नोटिस जारी किया गया है, बिना दबाव के उस दिशा में कार्रवाई जारी रहेगी। खासकर ऐसी स्थिति में जब महुआ मोइत्रा जैसी TMC सांसद पोस्ट पर पोस्ट करती है और वीडियो बनाती है तो लग जाता है कि गिरोह की मंशा नेक नहीं है। दर्शन हीरानंदानी याद होंगे आपको? महुआ मोइत्रा की संसद सदस्यता चली गई थी और आवास खाली करना पड़ा था, इसी में कारण छिपा है उनके आज के विरोध का।
उन पर आरोप लगे थे कि उन्होंने दुबई स्थित कारोबारी दर्शन हीरानंदानी को फायदा पहुँचाने के लिए संसद में सवाल पूछे और बदले में महँगे-महँगे तोहफे लिए जिसमें पर्स से लेकर आईफोन तक शामिल था। बड़ी बात तो ये पता चली कि सवाल ऐसे-ऐसे थे जिनसे अडानी को नुकसान हो और उनके प्रतिद्वंद्वियों को फायदा। अब आप समझ जाइए, उनकी सक्रियता का कारण। विपक्ष के सभी नेता भी अपना-अपना उल्लू सीधा करने में लगा हुआ है। इनका निशाना भारतीय बाजार है, भारत की अर्थव्यवस्था है।
Watch: Financial Expert Kishore Subramanian reacts on Hindenburg latest research report, says, "...Hindenburg's sole aim is to spread this news, instill fear among the public, and cause the market to crash. Their goal is to destabilize the country, drive down the stock market,… pic.twitter.com/rhqCNq5RRc
तर्क बार-बार ये दिया जा रहा है कि ये ‘स्मॉल रिटेल इन्वेस्टर्स’ के साथ धोखा है, यही बात राहुल गाँधी वीडियो जारी कर के कह रहे हैं। बाजार गिराने और भारत के तीसरे सबसे बड़े कंपनी समूह के तबाह होने से छोटे निवेशकों को क्या फायदा होगा? साफ़ है, उन्हें बड़ा नुकसान होगा। अब समझ जाइए छोटे निवेशकों के पक्ष में हैं ये लोग या विपक्ष में। आपको पता है पिछली बार हिंडेनबर्ग ने अडानी के शेयरों को शॉर्ट कर के कितनी कमाई की थी? लगभग 344 करोड़ रुपए। जी हाँ, संगठन ने खुद 4.10 मिलियन डॉलर कमाई की बात कबूली थी।
अडानी को डुबोने का काम चीनी जासूस अनला चेंग और उसके पति Mark Kingdon और हिंडनबर्ग का संयुक्त अभियान था जिसने भारतीय शेयर बाजार को पटक कर आर्थिक तौर पर भारत को बर्बाद करने की कोशिश जिससे करोड़ों डॉलर का नुकसान न केवल अडानी को हुआ बल्कि करोड़ों निवेशकों को भी हुआ।
अनला चेंग और Kingdon ने हिंडनबर्ग को अपना एजेंट बना कर सारा खेल खेला और यह कोई बड़ी बात नहीं होगी कि जो लोग दिन रात अडानी के पीछे पड़े रहते थे, वे भी इस धंधे में शामिल रहे होंगे। 25 जनवरी, 2023 को हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आती है और अडानी के ही शेयर नहीं गिरते बल्कि सारा शेयर बाजार लुढ़क जाता है। 9 फरवरी को एमएल शर्मा और प्रशांत भूषण, विपक्ष के दलाल वकील इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच कर जांच की मांग करते हैं और CJI चंद्रचूड़ तुरंत तैयार हो जाते हैं जबकि इस जांच से SEBI, RBI और अन्य सभी Regulatory संस्थाओं की विश्वसनीयता और साख पर प्रश्नचिन्ह लग सकता था जो देश के लिए घातक साबित हो सकता था।
लेकिन चंद्रचूड़ अडिग थे कि बाजार को नियंत्रण करना ही होगा जैसे पहले कभी बाजार में उतार चढाव आया ही न हो। इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट की बनाई समिति में जब तुषार मेहता ने कहा कि उनके नाम हम Sealed Cover में देंगे तो चंद्रचूड़ भड़क गए कि सब Transparent होना चाहिए।
लेखक चर्चित YouTuber
अब SEBI ने हिंडनबर्ग को 21 पन्नों नोटिस देकर कर जवाब मांगा हैं और इसमें कहा गया है कि हिंडनबर्ग ने कैसे एक Broker कंपनी जो Kotak Mahindra Bank से संबंधित थी, के जरिए अडानी की कंपनियों के शेयर्स में 150 billion डॉलर की गिरावट कराई - हिंडनबर्ग ने Kingdon के साथ समझौते के तहत करोड़ों डॉलर कमाए। short selling की गई और गिरावट के बाद shares की position उन्हें खरीद कर Square की गई।
कोई भी Broking House किसी का भी trading account खोलते हुए उसके सारे details लेती है KYC पूरा किया जाता है फिर Kotak Mahindra International Limited (केएमआईएल) ने kingdon के बारे में पूरी जानकारी क्यों नहीं ली जो आज Kotak Bank दावा कर रहा है कि Kingdon ने अपने हिंडनबर्ग से रिश्तों के बारे में नहीं बताया था। kingdon तो KMIL का investment advisor था और जब उसने trading शेयर बाज़ार में भयंकर गिरावट के बाद की, तब तो Kotak के उदय कोटक को कुछ तो समझ लेना चाहिए था। kingdon ने प्रॉफिट का 30% हिंडनबर्ग को दिया। और हिंडनबर्ग ने अपनी रिपोर्ट 25 जनवरी, 2023 को जारी करने से 2 महीने पहले Kingdon को दे दी थी।
अब सवाल उठता है कि क्या SEBI हिंडनबर्ग और Kingdon के खिलाफ Criminal action ले सकती है। मेरे विचार में ले सकती है क्योंकि इन दोनों ने घोटाला किया भारतीय बाजार में किया और हमारे ही बाजार से पैसा कमाया।
अब बिडेन प्रशासन को चाहिए कि इन दोनों का भारत को प्रत्यर्पण करे और यह करने में कोई हिचक नहीं होनी चाहिए क्योंकि जब पन्नू के खिलाफ कथित आरोपी निखिल गुप्ता को तुरंत चेक गणराज्य से अपने यहां Extradite करा लिया -
लोकसभा चुनावों के बाद और केंद्र सरकार के दोबारा गठन से पहले खबर है कि बाजार नियामक SEBI ने गाँधी परिवार के करीबी की पत्नी को हड़बड़ी में आकर सेबी पैनल का चीफ नियुक्त कर दिया है। 5 जून को बिजनेस वर्ल्ड में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, सेबी ने उषा थोराट को स्टॉक एक्सचेंजों के सेटलमेंट गारंटी फंड की समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया है। रिपोर्ट में सेबी के इस हड़बड़ी में उठाए गए कदम पर सवाल है। दूसरा इस नियुक्ति के वक्त और कैंडिडेट के चयन पर भी सवाल है।
उषा थोराट, यशवंत थोराट की पत्नी हैं, जिन्हें नवंबर 2007 में नाबार्ड के अध्यक्ष पद से सेवानिवृत्त होने के बाद राजीव गाँधी फाउंडेशन का सीईओ बनाया गया और वे एक दशक से भी अधिक समय तक इस पद पर बने रहे। उन्हें गाँधी परिवार का करीबी का कहा जाता है। उनकी पत्नी यूपीए काल में ही भारतीय रिजर्व बैंक की डिप्टी गवर्नर नियुक्त की गई थीं। इसके अलावा जब यूपीए काल में ही उन्हें NSE बोर्ड का सदस्य भी बनाया गया था।
SEBI's Change Of Heart After Election Results ???
SEBI hurriedly Appoints Wife Of Sonia Gandhi Family Aide As Crucial Panel Chief After 2024 Election Results !!!
Nobody from Corporate India Congratulating PM Modi Yet
उल्लेखनीय है कि रिपोर्ट में बिजनेस वर्ल्ड की पलक शाह ने इस जानकारी को साझा करते हुए गौर कराया कि संभव है कि चुनाव परिणामों के ठीक बाद इस तरह से गाँधी परिवार के करीबी को चीफ का पद दिया जाना इस ओर इशारा करता है कि सेबी के अधिकारियों को पीएम मोदी की सत्ता में वापसी पर शंका थी, इसिलए उन्होंने हड़बड़ी में गाँधी परिवार के लोगों की नियुक्तियाँ कीं। हालाँकि संयोग है कि नई समिति के अध्यक्ष के रूप में केवल उषा थोराट के नाम की घोषणा की गई। वहीं पैनल के बाकी लोगों के नाम अभी नहीं तय किए गए हैं।
रिपोर्ट में पलक शाह के हवाले से कहा गया कि भारतीय व्यवसायी समझदार हैं, लेकिन फिर भी चुनाव परिणामों पर उन्होंने असामान्य चुप्पी बनाई हुई है। ऐसा लगता है वो इस मुद्दे पर बोलना नहीं चाहते। उन्हें पता चल गया है कि एनडीए के पास बहुमत है और प्रधानमंत्री मोदी लगातार तीसरी बार पीएम बनेंगे। वह जवाहरलाल नेहरू के बाद दूसरे नेता हैं जो लगातार तीसरी बार पीएम बनने जा रहे हैं, मगर फिर भी कॉरपोरेट जगत ने इस मुद्दे पर अब तक कुछ नहीं बोला है। ये हाल तब हैं जब मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल में उदय कोटक, आनंद महिंद्रा, सुनील मित्तल, कुमार बिड़ला जैसे बड़े व्यापारियों को पद्म भूषण से सम्मानित किया। रिपोर्ट के अनुसार चुनाव नतीजों के दिन सोशल मीडिया एक्स पर प्रधानमंत्री को तीसरे कार्यकाल के लिए बधाई देने वाला पहला और एकमात्र ट्वीट एनएसई के एमडी और सीईओ अशोक चौहान का था।
सुप्रीम कोर्ट के CJI डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने अडानी पर हिंडेनबर्ग की “फर्जी” रिपोर्ट में लगाए गए सभी आरोपों पर क्लीन चिट दे दी और वामपंथी याचिकाकर्ताओं की CBI और SIT से जांच की मांग खारिज कर दी। अदालत ने SEBI की जांच में कोई खामी नहीं पाई और साफ़ कहा कि मीडिया और OCCPR जैसी “थर्ड पार्टी” की “unverified” रिपोर्ट को SEBI की जांच पर उंगली उठाने का आधार नहीं माना जा सकता
ज्ञात हो, भारत में उद्योगपतियों का शुरू से बोलबाला रहा है। ब्रिटिश युग में भारत में दो उद्योगपतियों सेठ छुन्ना मल और सत्यनारायण गुड़वाले, स्वतन्त्रता के बाद आगमन हुआ, टाटा और बिरला का और अब कुछ समय से अम्बानी और अडानी। यानि ब्रिटिश युग से लेकर आज तक हर सरकार, सरकार किसी भी पार्टी की हो, उद्योगपतियों के इर्दगिर्द ही घूमती दिखी है। लेकिन अम्बानी और अडानी का विरोध केवल इसलिए हो रहा है कि केंद्र में मोदी सरकार है। जबकि जिन राज्यों में बीजेपी की सरकार नहीं है, वहां की सरकारों द्वारा अम्बानी और अडानी के निवेश से मुंह नहीं मोड़ा, कहने का मतलब केवल इतना ही है कि मोदी-योगी-अमित के विरोध में विपक्ष असली मुद्दों से भटक, इन उद्योगपतियों के विरोध में उतर जनता को गुमराह कर रही है।
करीब एक वर्ष पहले जब George Soros प्रायोजित हिंडेनबर्ग रिपोर्ट अडानी को निशाना बनाने के लिए राहुल कालनेमि & कंपनी लेकर आई और प्रशांत भूषण समेत कांग्रेस और वामपंथी मंडली ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके विधवा विलाप किया था, तब सुप्रीम कोर्ट ने जांच बिठा कर इस मंडली को “उम्मीद” से कर दिया था - बस ये मंडली प्रतीक्षा में बैठी थी कि कब सुप्रीम कोर्ट का फैसला अडानी के खिलाफ आए और उनकी “delivery” हो लेकिन आज के फैसले ने तो उस मंडली का जैसे “गर्भपात” ही कर दिया -
X पर इस वामपंथी मंडली के लोगों का विधवा विलाप देखिए कैसे तड़प रहे हैं और कैसे चंद्रचूड़ को कोस रहे हैं - कुछ तो मोदी को “पनौती” बता रहे हैं जबकि सच्चाई तो यह है कि चीन से लेकर अमेरिका के सभी उन लोगों के लिए अडानी स्वयं एक “पनौती” बन गया जिसे ये सब उखाड़ फेंकना चाहते थे - महुआ मोइत्रा की तो अडानी की “पनौती” नौकरी ही ले गई -
लेखक
वामपंथी मंडली बस यह चाहती है कि इधर इसके लोग सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाएं और उधर तुरंत अदालत मोदी की बिना सोचे समझे one two three कर दे -
जो फैसला हुआ वह अच्छा हुआ परंतु मैं ऐसा पहले भी लिख चुका हूं और आज फिर कहता हूं कि अडानी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट को यह जांच बैठाने की जरूरत ही नहीं थी क्योंकि जो हिंडनबर्ग और मीडिया रिपोर्ट को ख़ारिज करने का आधार अदालत ने आज बताया है, वह उस दिन भी था जब याचिका दायर हुई थी - इसलिए यह याचिका उस दिन सुनवाई के लिए स्वीकार ही नहीं होनी चाहिए थी -
सुप्रीम कोर्ट ने अडानी के खिलाफ याचिका सुनवाई के स्वीकार करते हुए एक शक का बीज तो पैदा कर ही दिया जिससे हिंडनबर्ग की रिपोर्ट की वजह से पहले से नुकसान झेल रहे अडानी को और ज्यादा नुकसान हुआ - जब Third Party और media की रिपोर्ट भरोसे के काबिल थी ही नहीं तो जांच का मतलब ही नहीं था - लेकिन सुप्रीम कोर्ट को भी हर मामले में “पंचायत” लगाने का चसका लगा हुआ है -
अभी एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में विशाल तिवारी वकील ने लगाई है जिसमें उसने 3 आपराधिक कानूनों को चुनौती दी है और आधार बनाने के लिए कहा है कि संसद के जब 150 सदस्य निलंबित थे तो कानून पास करना गलत है - सुप्रीम कोर्ट को इस याचिका को सुनने के लिए स्वीकार करने से पहले फैसला कर लेना चाहिए कि क्या वह इमरजेंसी में संसद द्वारा पास किये गए सभी कानूनों को खारिज कर सकती है क्योंकि उस समय में सांसद “निलंबित” नहीं थे बल्कि जेल में ठूंस दिए गए थे -
एक याचिका “secular socialist” शब्द संविधान में जोड़ने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अभी भी लंबित है - इसलिए कहता हूं हर मामले में टांग अड़ाना बंद कीजिए, वकीलों का गिरोह काम कर रहा है, उस पर लगाम लगनी चाहिए
वाहन एवं अन्य कृषि उपकरण बनाने वाली भारत की मशहूर कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M) ने कनाडा की कम्पनी रेसन एयरोस्पेस से अपने संबंध तोड़ लिए हैं। महिंद्रा का यह निर्णय ऐसे समय में आया है, जब भारत और कनाडा के बीच कूटनीतिक लड़ाई चरम पर है।
रेसन एयरोस्पेस में महिंद्रा एंड महिंद्रा की 11.18% हिस्सेदारी थी। अब महिंद्रा का उससे व्यापारिक संबंध खत्म हो गया। कंपनी ने इसकी जानकारी शेयर मार्केट नियामक SEBI को दी है। दरअसल, रेसन एरोस्पेस ने कनाडा में आवेदन करके अपना कारोबार बंद करने की घोषणा की है।
रेसन खेती से जुड़े टेक सॉल्यूशन बनाती थी। महिंद्रा एंड महिंद्रा भी खेती से जुड़े कई कारोबार करती है। वह खेती के उपकरण बनाने से लेकर अन्य कार्यों में संलग्न है और विश्व की सबसे बड़ी ट्रैक्टर निर्माता है। महिंद्रा अमेरिका तथा कनाडा में भी अपना ट्रैक्टर आदि बेचती है।
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, भारतीय उद्योगपति आनंद महिंद्रा के मालिकाना हक वाली महिंद्रा ने SEBI को बताया है कि उसे रेसन से कम्पनी बंद होने की सूचना मिली है। रेसन के बंद होने पर महिंद्रा को 2.8 मिलियन कनाडाई डॉलर (28.7 करोड़ रुपए) मिलेंगे।
हालाँकि, रेसन एयरोस्पेस के बंद होने से महिंद्रा एंड महिंद्रा के कारोबार पर कोई विशेष फर्क नहीं पड़ेगा। भारत और कनाडा के बीच जारी कूटनीतिक लड़ाई के बीच इस खबर को लोग दूसरे नजरिए से भी देख रहे हैं।
वित्त वर्ष 2022-23 में भारत और कनाडा के बीच का व्यापार लगभग 8 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा है। दोनों देशों के बीच आयात और निर्यात लगभग बराबर है। भारत, कनाडा का 10वाँ सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है जबकि कनाडा भारत का 17वाँ बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
भारत-कनाडा की कूटनीतिक लड़ाई
18 सितम्बर 2023 को कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कनाडा की संसद में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आरोप भारत पर लगाया था। अज्ञात अपराधियों ने 18 जून 2023 को कनाडा के सरे में निज्जर की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
निज्जर की हत्या के बाद कनाडा ने सितंबर में भारत के एक राजनयिक को निष्कासित कर दिया था। इसके जवाब में भारत ने भी कनाडा के एक राजनयिक को निष्कासित कर दिया है। भारत ने कनाडा के नागरिकों को वीजा देने पर भी रोक लगा दी है और उसे आतंकियों तथा गैंगस्टरों की शरणस्थली बताया है।