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अलास्का से लौटकर रूस का ‘तोता’ बने ट्रंप ने जेलेंस्की को हड़काया - यूक्रेन को न क्रीमिया मिलेगा, न नाटो में जगह: नोबेल पुरस्कार का उतावलापन; क्या पाकिस्तान के साथ भी यही होने वाला है?

                                                                                                                          साभार: एबीसी न्यूज
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के साथ मुलाकात से पहले यूक्रेन-रूस युद्ध को लेकर उन्हें ही हड़का दिया है। ट्रंप ने कहा है कि जेलेंस्की, रूस के साथ इस युद्ध को तुरंत रोक सकते हैं। हाल ही में ट्रंप ने अलास्का में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ लंबी बैठक की थी।
ट्रम्प ने जिस तरह जेलेंस्की को हड़काया है यह अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान को भी चेतावनी है। भारत के प्रभुत्व के आगे पाकिस्तान कहीं नहीं टिक नहीं पाता। Operation Sindoor से भारत ने अमेरिका तो क्या दुनियां को बता दिया कि पाकिस्तान की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। इसलिए ट्रम्प तो क्या कोई देश ज्यादा पाकिस्तान को ज्यादा भाव नहीं देगा। क्योकि दुनिया ने देख लिया कि पाकिस्तान भारत विरुद्ध जहर फैला कर भारत विरोधियों को ब्लैकमेल कर भीख मांगता रहा है। 

ट्रंप-पुतिन की इस बैठक का कोई ठोस नतीजा तो नहीं निकला लेकिन ट्रंप ने बैठक के बाद यह लगभग साफ कर दिया था कि अब शांति स्थापित करने का जिम्मा जेलेंस्की का है। अब ट्रंप ने अपनी बात को और मुखरता के साथ दोहराया है। पुतिन के साथ बैठक को ट्रंप ने सार्थक बताया था।

ट्रंप ने क्या कहा?

ट्रंप ने जेंलेंस्की को हड़काते हुए अपने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट किया है। ट्रंप ने लिखा है, “यूक्रेन के राष्ट्रपति जेंलेंस्की चाहें तो रूस के साथ युद्ध तुरंत खत्म कर सकते हैं, या फिर वह लड़ाई जारी रख सकते हैं। याद कीजिए कि इसकी शुरुआत कैसे हुई थी।”

हालाँकि, ट्रंप ने अपने पोस्ट में साफ किया कि ना तो यूक्रेन को क्रीमिया वापस नहीं मिलेगा, जिसे 12 साल पहले बराक ओबामा के दौर में बिना गोली चले रूस ने हथिया लिया था और ना ही यूक्रेन को NATO में शामिल होने दिया जाएगा। ट्रंप ने लिखा कि कुछ चीजें कभी नहीं बदलती हैं।

रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने लगातार यूक्रेन के NATO में शामिल होने का विरोध किया है और मौजूदा रूस-यूक्रेन संघर्ष की बड़ी वजह भी यूक्रेन का NATO की सदस्यता लेने की पहल करना माना जाता है। जनवरी में ट्रंप के दोबारा अमेेरिकी राष्ट्रपति बनने से पहले NATO देशों ने यूक्रेन को सदस्यता दिए जाने पर सहमित व्यक्त कर दी थी।

वहीं, ट्रंप के साथ मुलाकात के लिए जेलेंस्की अमेरिका पहुँच गए हैं। उनका कहना है कि यूक्रेन अपनी अखंडता और संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगा। जेलेंस्की का कहना है कि वह युद्ध रोकने के लिए अपनी शर्तों पर ही तैयार होंगे।

इसके अलावा जेलेंस्की ने शांति समझौते के लिए ट्रंप की सुरक्षा की गारंटी देने की पेशकश की सराहना की है। वहीं, एक अमेरिकी प्रतिनिधि ने दावा किया कि पुतिन यूक्रेन के लिए संभावित नाटो जैसे सुरक्षा समझौते पर सहमत हो गए हैं।

जेलेंस्की समेत कई यूरोपीय नेताओं से मिलेंगे ट्रंप

रूस-यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने के लिए ट्रंप जेलेंस्की समेत कई यूरोपीय नेताओं से मुलाकात करेंगे। ट्रंप ने इस मुलाकात को लेकर कहा, “व्हाइट हाउस में एक बड़ा दिन होगा। इतने सारे यूरोपीय नेता एक साथ कभी नहीं आए। उनकी मेजबानी करना मेरे लिए सम्मान की बात है।”

NATO के महासचिव मार्क रूटे, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री सर कीर स्टारमर भी ट्रंप के साथ मुलाकात करेंगे। दावा किया गया है कि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी, जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज, फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब और यूरोपीय यूनियन की अध्यक्षा उर्सुला वॉन डेर लेयन भी बातचीत में शामिल होंगे।

इससे पहले जब व्हाइट हाउस में मुलाकात के दौरान ट्रंप, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और जेलेंस्की के बीच खूब बहसबाजी हुई थी।

हालाँकि, अब इस चर्चा को लेकर उम्मीद जताई जा रही है कि इससे रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर कोई ठोस नतीजा सामने आ सकता है। नोबेल शांति पुरस्कार के लिए उतावले ट्रंप अब इस संघर्ष को खत्म करने के लिए किसी भी हद तक जाते दिख रहे हैं।

नहीं गली दाल तो पुतिन को ‘पागल’ बताने लगे डोनाल्ड ट्रंप, कहा- वे निर्दोषों का खून बहा रहे, हड़पना चाहते हैं पूरा यूक्रेन: 3+ साल से जारी जंग को चुटकी में खत्म करवाने का कर रहे थे दावा

                    डोनाल्ड ट्रम्प ने ट्वीट कर रूस के राष्ट्रपति पुतिन को कहा 'पागल' (साभार : द हिंदू)
अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के बाद से डोनाल्ड ट्रंप लगातार कोशिश कर रहे हैं कि यूक्रेन पर रूसी हमला बंद हो जाए। इसके लिए वो टेंपररी सीजफायर से लेकर पूर्ण युद्धविराम तक की गुहार लगा चुके हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को दोस्त बताने से लेकर उनसे कई बार बातचीत कर चुके हैं, यहाँ तक कि यूक्रेनी राष्ट्रपति को सार्वजनिक तौर पर हड़का भी चुके हैं। इसके बावजूद रूसी हमले नहीं रुक रहे, जिसकी वजह से डोनाल्ड ट्रंप अब गुस्से में आ चुके हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने व्लादिमीर पुतिन को पागल तक कह दिया है।

अब इसे डोनाल्ड की बौखलाहट कहे या गिरगिट की तरह रंग बदलना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दोस्त कहे जाने वाला ट्रम्प ही उसी मोदी के बढ़ते कद से बैचैन होकर भारत के ही विरुद्ध बयानबाज़ी तक करने लगे हैं। पाकिस्तान के साथ आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई में दुश्मन की कमर टूटने पर उसके ही DGMO द्वारा सफ़ेद झंडा दिखाने का श्रेय ट्रम्प लेने से नहीं चुके। लेकिन जब फजीहत होनी शुरू हुई तो एक के बाद एक बयान बदलते रहे। ट्रम्प अपनी वाहवाही के लिए किसी भी सीमा तक जा सकते हैं चाहे जितनी बार गिरगिट की तरह रंग ही क्यों न बदलना पड़े।  

खैर, इस दौरान ट्रंप ये बताना नहीं भूले कि इनकी पुतिन से बहुत बनती है, लेकिन साथ ही जोड़ा कि बीते कुछ समय से पुतिन बदल चुके हैं। अब वो यूक्रेन का सिर्फ एक टुकड़ा नहीं, बल्कि पूरे का पूरा यूक्रेन ही कब्जाना चाहते हैं। हालाँकि ट्रंप ने ये भी जोड़ दिया कि अगर रूस यूक्रेन को पूरा कब्जाता है, तो ये रूस के पतन की शुरुआत होगी, यानी वो बर्बादी की तरफ अपने कदम बढ़ा रहा है।

ट्रम्प को यह भी बताना चाहिए कि अगर रूस यूक्रेन को हथियाना चाहता तो क्या अमेरिका बांग्लादेश और पाकिस्तान पर अपना अधिकार करना नहीं चाहा रहा? मुंह से आतंकवाद के विरुद्ध लेकिन अंदरखाने आतंकवाद को समर्थन, ताकि हथियारों की बिक्री होती रहे।   

ट्रंप ने अपने सोशल नेटवर्किंग साइट ट्रुथ पर रविवार (25 मई 2025) को एक पोस्ट डाला और पुतिन पर जमकर भड़ास निकाली। ट्रंप ने अपनी पोस्ट में कहा, “रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ मेरे हमेशा से बहुत अच्छे संबंध रहे हैं, लेकिन शायद उनके साथ कुछ ऐसा हुआ है। वह बिल्कुल पागल हो गए हैं! वह बेवजह बहुत से लोगों को मार रहे हैं, और मैं सिर्फ सैनिकों की बात नहीं कर रहा हूँ। यूक्रेन के शहरों में बेवजह मिसाइल और ड्रोन दागे जा रहे हैं।”

ट्रंप ने कहा, “मैंने हमेशा कहा है कि वे यूक्रेन का सिर्फ एक टुकड़ा नहीं, बल्कि पूरा यूक्रेन चाहते है, और शायद यह सही साबित हो रहा है, लेकिन अगर वह ऐसा करते हैं, तो इससे रूस का पतन हो जाएगा!”

ट्रंप ने यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की की भी आलोचना की और कहा कि उनके बोलने का तरीका समस्याएँ खड़ी करता है और इससे उनके देश को कोई भी फायदा नहीं होता। उन्होंने जेलेंस्की को सलाह दी कि वे इस तरह की बयानबाजी बंद करें। इसके साथ ही ट्रंप ने दावा किया कि अगर वे अमेरिका के राष्ट्रपति होते तो रूस-यूक्रेन युद्ध कभी शुरू ही नहीं होता।

ट्रंप ने कहा, “यह जेलेंस्की, पुतिन और बाइडेन की लड़ाई है, ‘ट्रंप’ की नहीं। मैं केवल एक बड़ी और भयानक आग को बुझाने में मदद कर रहा हूँ।” राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि यूक्रेन में रूस का हालिया हमला और राष्ट्रपति जेलेंस्की की बयानबाजी शांति के प्रयासों के लिए भी बाधा बन रही है।

राष्ट्रपति पुतिन के खिलाफ डोनाल्ड ट्रंप का तीखा बयान यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की के उस आरोप के बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिकी चुप्पी ने पुतिन को और अधिक ताकतवर बना दिया है। जेलेंस्की ने रूसी नेतृत्व पर दबाव बढ़ाने की अपील करते हुए कहा, “रूस की क्रूरता को रोका नहीं जा सकता, अगर इसे नजरअंदाज किया गया तो यह और बढ़ेगी।” उन्होंने अमेरिका और अन्य देशों की चुप्पी को पुतिन के लिए प्रोत्साहन बताया।

इस बीच, ट्रंप लगातार पुतिन के शांति वार्ता को लेकर बदलते रुख पर निराशा जताते रहे हैं। उनकी पुतिन को लेकर निराशा अब सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं है, बल्कि वे रूस के खिलाफ कुछ व्यापारिक प्रतिबंध लगाने पर भी विचार कर रहे हैं।

वैसे, पहले ट्रंप रूस पर नए प्रतिबंध लगाने के लिए इच्छुक नहीं थे, पुतिन के साथ दोस्ताना रवैया अपनाते थे और जेलेंस्की को फटकार लगाते थे, लेकिन अब उन्होंने पुतिन को ‘पागल’ तक कह दिया है और रूस के खिलाफ सेकंडरी बैन लगाने पर विचार कर रहे हैं। 

कुछ समय पहले ट्रंप का रूस के प्रति नरम रुख भी देखने को मिला था, जब उन्होंने पुतिन से टेलीफोन पर बातचीत के बाद मॉस्को पर नए प्रतिबंध लगाने से इनकार कर दिया था। लेकिन अब उनकी हालिया टिप्पणियाँ, जिसमें उन्होंने पुतिन पर शांति प्रयासों को नुकसान पहुँचाने का आरोप लगाया है, अमेरिका की नीति में अस्थिरता को दिखाती हैं।

गौरतलब है कि बीते साल चुनाव अभियान के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि यदि वे सत्ता में आए तो 24 घंटे में रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त करा देंगे। लेकिन अब तो करीब पाँच महीने बीत चुके हैं और उनकी तमाम कोशिशों के बावजूद रूस-यूक्रेन युद्ध में कोई कमीं नहीं आई है।

दिलचस्प बात यह है कि डोनाल्ड ट्रंप खुद को वैश्विक शांतिदूत के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। हाल ही में भारत-पाकिस्तान के तनाव के दौरान, जब भारत ने पाकिस्तानी आतंकी ठिकानों और सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुँचाया, तब ट्रंप ने बार-बार व्यापार के जरिए इस संघर्ष को सुलझाने का दावा किया। हालाँकि उनका यह दावा भी विवादित ही रहा, क्योंकि भारत ने उनके दावे को सार्वजनिक तौर पर खारिज कर दिया।

मोदी को चुनाव बाद, जेलेंस्की-पुतिन ने अपने-अपने देश आने का दिया न्योता, कहा – भारत कराए समझौता: विदेशी नेता भी मान रहे तीसरी बार सत्ता में लौट रही BJP


अभी भारत में चुनाव हुए भी नहीं हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विदेश से चुनाव बाद के आमंत्रण आने लगे हैं। रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन से बात करने के कुछ ही घंटों बाद पीएम मोदी ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की से फोन पर बातचीत की। बता दें कि रूस और यूक्रेन में पिछले 2 वर्षों से युद्ध चल रहा है और हाल ही में पुतिन ने चेताया था कि अगर NATO यूक्रेन में उतरता है तो तृतीया विश्व युद्ध होने से कोई नहीं रोक पाएगा। इस तनाव के बीच पीएम मोदी ने दोनों नेताओं से बात की।

बताया जा रहा है कि पुतिन और जेलेंस्की दोनों ने ही चुनाव बाद पीएम मोदी को अपने-अपने देश आने का न्योता दिया है। साथ ही दोनों ने ये भी कहा है कि वो भारत को समझौता करा कर शांति स्थापित कराने वाले देश के रूप में देखते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इससे पहले 2019 में रूस के दौरे पर गए थे। पीएम मोदी को न्योता मिलना ये भी दिखाता है कि अन्य देश भी ये मान कर चल रहे हैं कि बतौर प्रधानमंत्री लगातार तीसरी बार उनकी वापसी तय है और जनादेश उनके ही पक्ष में जाने वाला है।

पीएम मोदी ने वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की से रूस-यूक्रेन के आम लोगों के बीच संबंध प्रगाढ़ करने के साथ-साथ रूस से यूक्रेन का तनाव खत्म करने पर भी बात की। उन्होंने कहा कि बातचीत और कूटनीति के जरिए ही युद्ध को समाप्त किया जा सकता है। जापान के हिरोशिमा में मई 2023 में पीएम मोदी ने G7 समिट से इतर जेलेंस्की से मुलाकात भी की थी। भारत ने यूक्रेन को मानवीय सहायता भी भेजी थी, जिसके लिए जेलेसी ने पीएम मोदी को ताज़ा बातचीत के दौरान धन्यवाद दिया।

President Putin invites PM Modi to Russia hours after Modi-Zelensky talk

Ukraine and Russia see India as peacemaker@susanmtehrani joined by @siddhant for more insights

Watch more on https://t.co/AXC5qRugeb pic.twitter.com/dh7NbihQRT

— WION (@WIONews) March 20, 2024

इससे पहले पुतिन के फिर से रूस का राष्ट्रपति चुने जाने पर पीएम मोदी ने उन्हें फोन कॉल कर के बधाई दी थी। इस दौरान दोनों ने भारत-रूस के रणनीतिक संबंधों को प्रगाढ़ करने पर सहमति जताई। पुतिन 87.17% वोटों से फिर से रूस के प्रेजिडेंट चुने गए हैं। इससे पहले 2000, 2004, 2012 और 2018 में भी वो राष्ट्रपति का चुनाव जीत चुके हैं। पश्चिमी देशों ने इस चुनाव को अलोकतांत्रिक करार दिया है। यूक्रेन ने यूएस कॉन्ग्रेस से 60 बिलियन डॉलर के पैकेज को अनब्लॉक करने की माँग की है, जो राजनीतिक खींचातानी में अटकी हुई है।

रूस : 10 बच्चे पैदा करने पर माँ को मिलेगा 'Mother Heroine' अवॉर्ड, स्टालिन जमाने का ‘मदर हिरोइन’ अवॉर्ड लौटा

                                                                                                                 तस्वीर-स्पुतनिक डॉट कॉम
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 10 या इससे ज्यादा बच्चे पैदा करने वाली महिलाओं को सम्मानित करने का फैसला लिया है। 10 या उससे ज्यादा बच्चों को पैदा करके पालने वाली महिला को ‘मदर हीरोइन’ (Mother Heroin) अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच तेजी से गिरती जनसंख्या को देखते हुए ये फैसला लिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस पुरस्कार के साथ माताओं को 16,138 डॉलर यानी एक मिलियन रूबल की एकमुश्त राशि दी जाएगी। 10 या उससे ज्यादा बच्चे पैदा करने वाली माँ का रूसी संघ की नागरिक होना जरूरी है। जिनका 10वाँ बच्चा एक साल की उम्र पूरी कर लेगा वो माताएँ भी इस पुरस्कार की हकदार होंगी। इसके अलावा युद्ध, आतंकवादी हमले या किसी आपात स्थिति में अगर माँ अपना बच्चा खो देती है तो भी वो इस अवॉर्ड की हकदार होंगी।

कब और क्यों हुई थी ‘मदर हीरोइन’ अवॉर्ड की शुरुआत

दरअसल, “मदर हीरोइन” अवॉर्ड की शुरुआत पहली बार 1944 में पूर्व सोवियत नेता जोसेफ स्टालिन ने की थी। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान एक बड़ी आबादी के मारे जाने के कारण इसकी घोषणा की गई थी। हालाँकि, 1991 में सोवियत संघ के पतन के साथ ही इस अवॉर्ड से माताओं को सम्मानित किया जाना भी बंद कर दिया गया था।
मदर हीरोइन अवॉर्ड को ‘हीरो ऑफ रूस और ‘हीरो ऑफ लेबर’ जैसी उपाधियों के बराबर ही प्रतिष्ठित माना जाता है। रूस के बाल दिवस समारोह से एक दिन पहले 1 जून को, पुतिन ने मूल रूप से मदर हीरोइन की उपाधि की घोषणा करने का सुझाव दिया था।
हाल के दशकों में, रूस की जनसंख्या में लगातार गिरावट देखी गई है। 2022 की शुरुआत में 400,000 लोगों की गिरावट के बाद यहाँ कुल जनसंख्या गिरकर 145.1 मिलियन हो गई। इसी कारण से जनसंख्या को एक बार फिर से बढ़ाने के लिए रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने ‘मदर हीरोइन’ अवॉर्ड की शुरुआत की है। जिससे महिलाओं को अधिक से अधिक बच्चे पैदा करने के लिए प्रेरित किया जा सके।

कौन हैं ये तातार मुस्लिम? जो रूस के यूक्रेन पर हमले से सिहर उठे हैं: कभी स्टालिन ने 15 मिनट में बँधवा दिया था बोरिया-बिस्तर

प्रतीकात्मक तस्वीर/ फोटो साभार: middleeasteye
दुनिया को जिस बात का डर था, वह हो गया है। रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया है, दुनिया के तमाम देशों की अपील को दरकिनार करते हुए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन पर हमले का आदेश दिया। रूसी सेना ने तबाही मचाना शुरू किया तो यूक्रेन का मंजर पूरी तरह से बदल गया। इस युद्ध से क्रीमियाई तातार मुस्लिम भी सिहर उठे हैं।

1991 में यूक्रेन द्वारा खुद को स्वतंत्र देश घोषित किए जाने के बाद यूक्रेन लौटे 53 वर्षीय क्रीमियाई तातार मुस्लिम एरफान कुडुसोव ने अलजजीरा से बात करते हुए कहा, “जब बुजुर्गों ने पहली बार हवाई जहाज से उतरकर यूक्रेन की जमीन पर कदम रखा तो उन्होंने यूक्रेन की धरती को चूम लिया। लोग खुशी से रो रहे थे। वो अपने घर लौट आए थे।”

कौन हैं तातार मुस्लिम 

तातार मुस्लिम मंगोलों के वंशज हैं। जिन्होंने कई सदियों तक क्रीमिया पर शासन किया था। जब 1783 में रूस की महारानी ‘कैथरीन द ग्रेट’ ने क्रीमिया पर कब्जा किया, तब उनकी हैसियत घटने लगी थी। तातार अपने ही मुल्क़ में दोयम दर्ज़े के हो गए। वर्ष 1991 में सोवियत संघ विघटित हुआ। यूक्रेन रुस के तत्कालीन राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की महत्वाकांक्षा की जद में रहा।

तातार मुस्लिमों के पलायन का इतिहास

इधर 1922 में जोसेफ स्टालिन सोवियत संघ का सर्वेसर्वा बन गया। क्रीमिया के तातार भी जोसेफ स्टालिन के निशाने पर थे। वो बस एक मौका चाहता था। ये मिला एक रिपोर्ट की शक्ल में। अप्रैल 1944 में सीक्रेट सर्विस का मुखिया लावरेन्त बेरिया एक फाइल लेकर स्टालिन से मिला। इसमें उन तातार मुस्लिमों की लिस्ट थी, जिन्होंने जर्मन सेना का सहयोग किया था। स्टालिन ने फाइल पर नजर डाली और एक क्रूर आदेश लिखा। 
इसके बाद जब तातार लोग नींद की आगोश में थे, अचानक उनके दरवाजे खटखटाए जाने लगे। लोग अवाक रह गए। स्टालिन का फरमान था कि 15 मिनट में सामान समेटो और घर छोड़ दो। इन 180,000 बेघर अभागे तातारों को मालगाड़ियों में पशुओं की तरह ठूँस दिया गया। हफ्तों का कठिन कष्टप्रद सफर। कई तो यात्रा के दौरान ही मर गए। पूरे क्रीमिया से करीब 2.30 लाख तातार मुस्लिमों को उज्बेक प्रांत, उराल अंचल और साइबेरिया ले जाया गया। बाद में कुछ तातार लौटे भी, लेकिन व्लादिमीर पुतिन के क्रीमिया में आने के बाद तातारों के बुरे दिन फिर लौट आए। 
मार्च, 2014 में जनमत संग्रह हुआ और सेवस्तोपोल समेत क्रीमिया को रूस शासित प्रांत घोषित कर दिया गया। उसी साल यूक्रेन में सत्ता परिवर्तन हुआ। 1991 में सोवियत संघ से आजाद होने के बाद ये पहला मौका था, जब यूक्रेन में रूस विरोधी सरकार बनी। वहाँ पर उठे विरोधी स्वर को देखते हुए 2014 में ही रूस ने यूक्रेन पर हमला बोला और क्रीमिया पर कब्जा कर लिया। इसके बाद हालात और बिगड़ने शुरू हो गए। तातार मुस्लिमों को क्रीमिया छोड़कर यूक्रेन भागना पड़ा। रुस की तरफ से युद्ध की शुरुआत करने के बाद अब उन्हें एक बार फिर से पलायन का डर सता रहा है। पिछले वर्षों में लाखों की संख्या में तातार पलायन कर चुके हैं और बड़ी संख्या में तातार प्रताड़ित, कत्ल या गिरफ्तार हुए हैं।