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SIR West Bengal: पोल खुलने के डर से भागने लगे घुसपैठिए, रिवर्स माइग्रेशन और तुष्टिकरण वाले वोट कटने से घबराई ममता बनर्जी


पूर्वी भारत की राजनीति इन दिनों एक असामान्य करवट ले रही है। विशेषकर पश्चिम बंगाल, जहां सत्ता का समीकरण वर्षों से लगभग स्थिर दिखता था, अब वही जमीन अस्थिर होती जा रही है। एसआईआर ने राज्य की राजनीति को जिस तरह बदल दिया है, वह केवल एक चुनावी मुद्दा नहीं रह गया है; यह पहचान, सुरक्षा और शासन की विश्वसनीयता से जुड़ा भावनात्मक प्रश्न बन चुका है। बिहार में हुए चुनाव परिणामों और एसआईआर की चर्चा ने एक ऐसा माहौल बना दिया है कि इसके प्रभाव की तरंगें सीधे बंगाल तक पहुंची हैं। राजनीतिक विश्लेषक इसे सामान्य नहीं मान रहे. क्योंकि बंगाल की राजनीति, अपनी जटिलताओं के बावजूद, कभी भी एकाकी नहीं रही। यह हमेशा पड़ोसी राज्यों के प्रभाव और केंद्र–राज्य संबंधों से प्रभावित होती आई है। इसी पृष्ठभूमि में यह सच्चाई भी सामने आने लगी है कि एसआईआर के डर से घुसपैठिए पश्चिम बंगाल छोड़कर भागने लगे हैं। खासकर राज्य के सीमावर्ती जिलों में घुसपैठियों की यह हालत यह आम लोगों की बातचीत का हिस्सा बन चुकी है। एसआईआर की गूंज और घुसपैठ पर सवालिया निशान ने ममता सरकार की बेचैनी और बढ़ा दी है।

तेज रिवर्स माइग्रेशन से कठघरे में ममता बनर्जी की सरकार

पश्चिम बंगाल में एसआईआर के मुद्दे पर अब विमर्श शुरू हो गया है। भाजपा का कहना है कि बांग्लादेशी नागरिकों का पलायन उनके दावे को सच साबित कर रहा है, तो तृणमूल कांग्रेस का पलायन पर बचाव उसे कठघरे में खड़ा कर रहा है। दरअसल, पश्चिम बंगाल में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले एसआईआर की वजह से बड़ी संख्या में बांग्लादेशी नागरिक अपने देश लौट रहे हैं। भारत-बांग्लादेश की हकीमपुर सीमा पर जमे बांग्लादेशियों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जो 10-15 साल पहले दलालों की मदद से भारत में घुस आए थे। या यह भी कह सकते हैं कि इनको तुष्टिकरण की राजनीति करने वाले नेताओं का भी समर्थन प्राप्त था। यही वजह है कि इन्होंने अपने रहने के लिए अस्थायी झुग्गियां बना लीं। फिर दलालों की मदद से आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र भी बनवा लिए। इसके बाद तो कई घुसपैठिए स्थायी आवास बनाकर रहने लगे। अब जब दो दशक बाद भारत में एसआईआर शुरू हुआ तो बांग्लादेशी नागरिकों ने यहां से पलायन करना शुरू कर दिया। इस रिवर्स माइग्रेशन ने बंगाल में घुसपैठ के विमर्श को धार दे दी है।

नवंबर की शुरुआत से ही लौटने लगे बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासी

पश्चिम बंगाल के हकीमपुर में अंतरराष्ट्रीय सीमा से बांग्लादेशी अवैध प्रवासियों के अपने देश लौटने के मामले में राजनीतिक वाकयुद्ध तेज हो गया है। मतदाता सूची को सुधारने के लिए शुरू किये गये अभियान और घुसपैठ पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आक्रामक रुख अख्तियार किया है। क्योंकि एसआईआर शुरू होने के कुछ ही दिन बाद प्रवासी बांग्लादेशियों के स्वदेश लौटने का सिलसिला शुरू हो गया था। सीमावर्ती जिलों में घुसपैठियों के टोले के टोले की स्वदेश वापसी की तस्वीरें मीडिया में आने लगीं। शुरू में इसे बहुत अधिक तवज्जों नहीं दी गयी, लेकिन अब यह राजनीतिक विमर्श बन गया है, जिसने सीमा चौकी को एक ‘वैचारिक युद्धक्षेत्र’ में बदल दिया है। उत्तर 24 परगना जिले के बनगांव में भारत-बांग्लादेश सीमा पर, स्थानीय लोगों और सुरक्षाकर्मियों ने बताया कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के शुरू होने के बाद नवंबर की शुरुआत से ही बिना दस्तावेज वाले बांग्लादेशियों के वापस लौटने की कोशिशों में वृद्धि हुई है।

मनोवैज्ञानिक दबाव से हर दिन सैकड़ों लोग वापस लौट रहे बांग्लादेश

बीएसएफ के अधिकारियों के मुताबिक एसआईआर के चलते लगभग 150-200 लोग हर दिन बांग्लादेश लौट रहे हैं। कई बार यह संख्या दोगुनी भी हो जाती है। 30 नवंबर 2025 तक लगभग आठ-दस हजार लोग सीमा पार कर चुके हैं। दिसंबर माह में स्वदेश वापसी में और तेजी आने वाली है। बंगाल और बांग्लादेश की सीमा दशकों से संवेदनशील रही है। यहां अवैध आव्रजन कोई नया संकट नहीं, बल्कि ऐसी समस्या है जिसने धीरे-धीरे जनसंख्या संतुलन, रोजगार, स्थानीय राजनीति और कानून-व्यवस्था को प्रभावित किया है। अब एसआईआर के नाम पर छिड़ी राष्ट्रीय बहस ने एक ऐसा मनोवैज्ञानिक दबाव पैदा कर दिया है कि सीमावर्ती इलाकों में हलचल साफ देखी जा सकती है। स्थानीय सूत्र बताते हैं कि कई अवैध प्रवासी अपने ठिकानों से गायब हो रहे हैं, और कुछ समूह बांग्लादेश की ओर लौटने की कोशिश में निरंतर लगे हुए हैं।

जीरो लाइन की ओर बढ़ते लोग अवैध घुसपैठ की पुष्टि कर रहे – भाजपा

भाजपा का कहना है कि अपने छोटे-छोटे बैग और बच्चों को थामे जीरो लाइन की ओर बढ़ते लोगों की तस्वीरें पश्चिम बंगाल में अवैध घुसपैठ के उसके दावे को पुख्ता करती हैं। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा कि उनकी पार्टी यही तो कह रही है। एसआईआर ने घुसपैठियों को हिलाकर रख दिया है। आखिरकार सच्चाई सामने आ रही है। वे इसलिए जा रहे हैं, क्योंकि उन्हें पकड़े जाने का डर है। भाजपा का कहना है कि अवैध रूप से बसे बांग्लादेशियों ने चुनावी जनसांख्यिकी को बदला है। अब एसआईआर ने रिवर्स माइग्रेशन को तेजी दी है। भाजपा का मानना है कि ये दृश्य उसके इस दावे को पुष्ट करते हैं कि ‘अवैध रूप से बसे बांग्लादेशियों’ ने दशकों से पश्चिम बंगाल की चुनावी जनसांख्यिकी को बदल दिया है। भाजपा प्रवक्ता कीया घोष ने कहा कि बांग्लादेशियों का वापस जाना उनके दावे को किसी संदेह के परे साबित करता है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से हजारों नामों का हटना भी भाजपा की बात को साबित करता है।

तुष्टिकरण की राजनीति करने वाला ममता बनर्जी का खेमा बहुत बैचेन

इसके राजनीतिक निहितार्थ बहुत गहरे हैं। क्योंकि ऐसा मानना है कि तुष्टिकरण की नीति के चलते स्थानीय सरकार ने इन्हें प्रश्रय दिया हुआ था। इसीलिए सबसे ज्यादा बेचैनी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के राजनीतिक खेमे में देखी जा रही है। ममता सरकार की राजनीति एक लंबे समय से विशिष्ट समुदायों के समर्थन पर टिकी रही है, और विपक्ष का आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस ने “तुष्टिकरण” की नीति को शासन का स्थायी सूत्र बना दिया। यही कारण है कि जैसे ही घुसपैठ का सवाल राष्ट्रीय विमर्श में उभरा, तृणमूल कांग्रेस के भीतर असहजता बढ़ने लगी। ममता बनर्जी का एसआईआर के खिलाफ तीखा रुख इस बात का संकेत है कि यह मुद्दा उनके पारंपरिक वोट बैंक को अस्थिर कर सकता है। बंगाल की सामाजिक संरचना में अवैध प्रवासियों का प्रश्न हमेशा से संवेदनशील रहा है, लेकिन इस बार कथा बदल चुकी है। अब यह केवल सुरक्षा या पहचान का सवाल नहीं, बल्कि सीधा राजनीतिक अस्तित्व का सवाल बन गया है

बिहार में भाजपा की जीत की हवा बदले बंगाल में भी जमीनी समीकरण

यह भी सच है कि पड़ौसी राज्य बिहार में भाजपा-एनडीए की प्रचंड जीत ने इस बहस में एक नई परत जोड़ दी है। वहां के चुनाव परिणामों ने यह साफ कर दिया कि नागरिकता, सीमा सुरक्षा और जनसांख्यिकीय संतुलन जैसे मुद्दे अब केवल भाषणों में नहीं रह गए। ये सीधे मतदान को प्रभावित कर रहे हैं। रिजल्ट को प्रभावित कर रहे हैं। बिहार में भाजपा की सफलता और एसआईआर के प्रति सकारात्मक रुझान ने बंगाल में भाजपा को नई ऊर्जा दी है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार की हवा ने बंगाल में भी जमीन के समीकरण बदलने शुरू कर दिए हैं। भाजपा अब घुसपैठ और एसआईआर को एक केंद्रीय मुद्दे के रूप में पेश कर रही है, और तृणमूल कांग्रेस इस सच्चाई को रोक पाने में फिलहाल कमजोर दिख रही है। 

"Operation Sindoor" के साथ-साथ "Operation Push Back" : FIR-गिरफ्तारी-मुकदमा-जेल… लम्बी प्रक्रिया के लद गए दिन, घुसपैठियों को सीधे वापस भेज रही मोदी सरकार: घबरा गया बांग्लादेश

                                                                                                                साभार - न्यूज ऑफ कश्मीर
भारत ने बांग्लादेशी घुसपैठियों पर कार्रवाई तेज कर दी है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश से कहा है कि वह अपने अवैध नागरिकों को वापस लेने में तेजी लाए। इस बीच भारत ने बांग्लादेशी घुसपैठियों को निकाल बाहर करने के लिए एक नई तरकीब निकाली है। अनाधिकारिक रूप से इसे ‘ऑपरेशन पुश-बैक’ का नाम दिया गया है।

 विदेश मंत्रालय ने 22 मई, 2025 को एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि भारत में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी नागरिक मौजूद हैं, जिन्हें वापस भेजना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत ने बांग्लादेश से इन लोगों की राष्ट्रीयता की पुष्टि करने का अनुरोध किया है।

उन्होंने बताया है कि वर्तमान में 2360 से अधिक ऐसे मामलों की सूची लंबित है। जायसवाल ने यह भी बताया कि इनमें से कई लोग जेल की सजा पूरी कर चुके हैं, लेकिन राष्ट्रीयता की पुष्टि की प्रक्रिया कई मामलों में 2020 से लंबित है।

भारत ने लगातार बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्या को उनके देश वापस भेजने के लिए पहले से बने  प्रोटोकॉल का पालन किया है, लेकिन यह प्रक्रिया काफी धीमी और जटिल रही है। अदालतों में मामले लटकने, बांग्लादेश के कई बार अपने नागरिकों को स्वीकार करने से इनकार किए जाने के कारण इसे यह प्रक्रिया तेजी से नहीं चल पाई है।

                                अपने देश वापस भेजे गए बांग्लादेशी नागरिकों के आंकड़ों का स्क्रीनशॉट

"Operation Sindoor" से पाकिस्तान में मची उथल-पुथल से भारत के विपक्ष का विचलित होना स्वाभाविक है। बात हिन्दू-मुस्लिम नहीं बल्कि भारत की अस्मिता की है। 2014 में मोदी सरकार बनने के बाद से नितरोज होते धमाकों से देश को बहुत राहत मिली है। आतंकियों पर कार्यवाही की जा रही है जबकि 2014 से पहले डोसियर-डोसियर का खेल खेलकर "हिन्दू आतंकवाद" और "भगवा आतंकवाद" का शोर मचाकर जनता को गुमराह किया जाता था। बेगुनाह साधु, संत और साध्वियों को गिरफ्तार कर हिन्दुओं को कलंकित किया जाता था। कालचक्र ऐसा घुमा और अभी भी घूम ही रहा है जिसे कोई बह सनातन विरोधी नहीं समझ प् रहा, फिर कहते हैं कि "हम नेता है और जनता के हितैषी हैं।"  

मुस्लिम तुष्टिकरण कर घुसपैठियों को बसाया ही नहीं उनको हर सरकारी सुविधा देकर अपना दामाद बनाकर पाल रहे थे। लेकिन जब उनको देश-निकाला किया जाने से राहुल गाँधी और अन्य विपक्षियों का परेशान होना लाजमी है।        

इस बीच एजेंटों और दलालों की मदद से भारत-बांग्लादेश की खुली सीमा से अवैध घुसपैठ लगातार जारी है, इससे स्थिति और भी गंभीर हो गई है। इसके उलट, बांग्लादेशी घुसपैठिए बाहर नहीं निकाले जा रहे। 2016  के आंकड़ों के अनुसार, भारत में 2 करोड़ से अधिक बांग्लादेशी नागरिक अवैध रूप से रह रहे हैं।

बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार को अलोकतांत्रिक तरीके से हटाने और मोहम्मद यूनुस के सत्ता में आने के बाद से यह स्थिति और भी बिगड़ गई है। युनुस सरकार के भारत-विरोधी रवैये के चलते बांग्लादेश ने निर्वासन प्रोटोकॉल को एकदम निष्प्रयोज्य बना दिया है।

इन सब चुनौतियों के बीच भारत सरकार ने अब एक कड़ा कदम उठाया है, जिसे अनौपचारिक रूप से ‘ऑपरेशन पुश-बैक’ कहा जा रहा है।

क्या है ऑपरेशन पुश-बैक?

‘ऑपरेशन पुश-बैक’ भारत सरकार की एक नई रणनीति है, जिसका उद्देश्य पूर्वी सीमा पर पकड़े जाने वाले बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्याओं से त्वरित रूप से निपटना है। ये वे लोग हैं जो कई वर्षों से अवैध रूप से भारत में रह रहे हैं।
इस ऑपरेशन के तहत अब उस पारंपरिक प्रक्रिया जैसे पुलिस को सौंपना, FIR दर्ज करना, अदालत में पेश करना, मुकदमा चलाना और फिर निर्वासन प्रोटोकॉल के तहत वापस भेजना को किनारे कर दिया गया है। अब भारतीय सुरक्षाबल घुसपैठियों को तुरंत सीमा पार बांग्लादेश की ओर धकेल रहे हैं। यह इसलिए हो रहा है ताकि समय और संसाधनों की बचत हो और अवैध घुसपैठ पर तुरंत प्रभाव डाला जा सके।
‘ऑपरेशन पुश-बैक’ अप्रैल 2025 से चल रहा है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, “घुसपैठ एक बड़ा मुद्दा है। हमने अब तय किया है कि हम कानूनी प्रक्रिया से नहीं गुजरेंगे। पहले, निर्णय यह था कि किसी व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाए और फिर उसे भारतीय कानूनी व्यवस्था में लाया जाए… पहले भी हम 1,000-1,500 विदेशियों को गिरफ्तार करते थे…उन्हें जेल भेजा जाता था और फिर उन्हें अदालत में पेश किया जाता था।”
उन्होंने आगे कहा, “अब, हमने तय किया है कि हम उन्हें देश के अंदर नहीं लाएँगे, हम उन्हें धकेलेंगे। यह पुश-बैक एक नई घटना है। हर साल करीब 5,000 लोग देश में प्रवेश करते हैं और पुश-बैक की वजह से यह संख्या अब कम हो जाएगी।”
इस नई प्रक्रिया में बांग्लादेशी नागरिकों को भारत के दिल्ली-मुंबई या सूरत जैसे शहरों से पकड़ा जाता है। इसके बाद उन्हें पहले त्रिपुरा, असम या पश्चिम बंगाल लाया जाता है और फिर वहाँ से बांग्लादेश भेजा जाता है।
इस तरह की एक कार्रवाई 4 मई 2025 को हुई। इस दिन एयर इंडिया की दो उड़ानों के ज़रिए गुजरात से 300 बांग्लादेशी नागरिकों को अगरतला लाया गया और उन्हें ज़मीनी सीमा के रास्ते वापस भेजा गया।
इसी तरह, 14 मई 2025 को राजस्थान के मंत्री जोगाराम पटेल ने जानकारी दी कि जोधपुर से 148 बांग्लादेशी नागरिकों को कोलकाता भेजा गया, जहाँ उन्हें एक अस्थायी हिरासत केंद्र में रखने के बाद बांग्लादेश भेज दिया गया।
भारत में भी कई राज्यों ने अवैध अप्रवासियों की पहचान की प्रक्रिया को तेज़ कर दिया है। ओडिशा के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने बताया कि राज्य में रह रहे अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ने के लिए STF का गठन किया गया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना वैध कानूनी दस्तावेजों के किसी भी विदेशी नागरिक को ओडिशा में रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी। पहचान की प्रक्रिया सभी जिलों में पहले ही शुरू हो चुकी है, और राज्य सरकार ने अपने इंजीनियरिंग विभागों को ऐसे नागरिकों को काम पर न रखने का निर्देश दिया है।
त्रिपुरा पुलिस के आँकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी 2024 से 28 फरवरी 2025 के बीच राज्य में 816 बांग्लादेशी और 79 रोहिंग्या नागरिकों को अवैध रूप से भारत में प्रवेश करते समय पकड़ा गया। वहीं, 2022 से 31 अक्टूबर 2024 तक त्रिपुरा ने 1,746 बांग्लादेशी नागरिकों को निर्वासित किया है।
त्रिपुरा की बांग्लादेश के साथ 856 किलोमीटर लंबी सीमा है, जिसके कुछ हिस्सों में अभी भी बाड़ नहीं लगी है। इन कार्रवाइयों का असर इतना स्पष्ट है कि अब कुछ बांग्लादेशी नागरिक ‘स्वेच्छा से’ भारत छोड़कर अपने देश लौटने लगे हैं।

घुसपैठियों पर कार्रवाई से यूनुस सरकार सकते में

मोहम्मद युनुस की अगुवाई वाली बांग्लादेश की अंतरिम सरकार भारत की घुसपैठियों से निपटने की नई रणनीति, और विशेष कर ‘ऑपरेशन पुश-बैक’ से चिंतित है। बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने 8 मई, 2025 को भारत को पत्र लिखकर देश में अवैध रूप से प्रवेश कर रहे लोगों को वापस धकेलने पर आपत्ति जताई थी।
उन्होंने भारत से यह से आग्रह किया था कि वह पहले से स्थापित प्रक्रिया का पालन करे। इस पत्र में उन्होंने कहा था कि बांग्लादेश-भारत सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए इस तरह की घुसपैठ अस्वीकार्य है और इससे बचा जाना चाहिए।
इस बीच, भारत के गृह मंत्रालय (MHA)  ने अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं की पहचान और राष्ट्रीयता की पुष्टि के लिए 30 दिन की समय सीमा तय की है। इसके बाद उन्हें, मुख्यतः ऑपरेशन पुश-बैक के तहत, निर्वासित किया जाएगा।

केजरीवाल पर शरणार्थी आपराधिक मुकदमा दायर करें और मानवाधिकार हनन की शिकायत दर्ज करें; हिन्दू शरणार्थियों के अपमान पर सारा हिन्दू समुदाय “आप”/कांग्रेस का बहिष्कार करे

सुभाष चन्द्र 

भारतीय राजनीति का जहरीला कोबरा अरविन्द केजरीवाल अपने असली रंग में आ गया और रोहिंग्या और बांग्लादेशियों की भारत में अवैध घुसपैठ को समर्थन देते हुए हिंदू शरणार्थियों को अपमानित करते हुए उन्हें “बलात्कारी” तक कह गया। पाकिस्तान/बांग्लादेश और अफगानिस्तान से प्रताड़ित होकर आए हुए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, ईसाई और पारसी कोई रोहिंग्या और बांग्लादेशियों की तरह अवैध घुसपैठिये नहीं है और उन्हें कानून के अंतर्गत ही नागरिकता दी जा रही है लेकिन विपक्ष CAA का पुरजोर विरोध कर रहा है केवल मुस्लिमों को खुश करने के लिए। 

लेखक 
इस विषय में दिल्ली के ठग और मक्कार मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सारी सीमाएं लांघते हुए शरणार्थियों का घोर अपमान करते हुए कहा है कि -

“केंद्र सरकार का लागू किया गया CAA कानून बहुत खतरनाक है जिसकी वजह से Law and Order ठप हो जाएगा और चोरी डकैतियां और बलात्कार बढ़ेंगे”।

हमारा देश एक गरीब देश है और अगर पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के 3 करोड़ लोगों में डेढ़ करोड़ लोग भी भारत में आ गए तो उनको कहां बसाया जाएगा, नौकरियां कहां से देंगे, जो रोजगार हमारे बच्चों को मिलना चाहिए वो तो वो लोग ले जाएंगे’।

CAA के बाद ये पाकिस्तानी पूरे देश में फ़ैल जाएंगे और हमारे ही मुल्क के लोगों को हड़काएंगे और हुड़दंग करेंगे; इनकी इतनी हिम्मत हो गई कि दिल्ली की जनता द्वारा भारी बहुमत से चुने गए CM को हमारे ही मुल्क में घुस कर माफ़ी मांगने को कह रहे हैं”।

पाकिस्तानियों को पूरी सुरक्षा और सम्मान के साथ मेरे घर के बाहर प्रदर्शन करने की इज़ाज़त दी गई लेकिन इस देश के किसानों को दिल्ली आने की भी इज़ाज़त नहीं है; भारत के किसानों को अश्रु गैस के गोले, लाठियां, डंडे और गोलियां? और पाकिस्तानियों को इतना सम्मान?”

अब शरणार्थियों को चाहिए कि वे केजरीवाल के खिलाफ एक तो मानहानि का आपराधिक  मुकदमा दायर करें क्योंकि केजरीवाल ने सभी शरणार्थियों को “बलात्कारी (rapist) कहा है, उन्हें चोर और डकैत और दंगाई कहा है”। NCRB के रिकॉर्ड से बताया जाए कितने शरणार्थी और कितने रोहिंग्या या बांग्लादेशी अपराधों में लिप्त रहे हैं। 

दूसरा केस शरणार्थियों को NHRC में फाइल करना चाहिए कि केजरीवाल ने अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार हम शरणार्थियों के मानवाधिकारों के हनन की कोशिश की है और ऐसी ही शिकायत उन्हें UNHCR के पास भी दायर करनी चाहिए क्योंकि जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान इस विषय को गलत ढंग से UNO में उठा सकते हैं तो शरणार्थी भी यह विषय UN संस्था तक ले जाने का अधिकार रखते हैं।

केजरीवाल के दिल में हिंदुओं के लिए कितना जहर भरा है वो इस बात से साबित होता है कि उसने हिन्दू शरणार्थियों को चोर, डकैत और बलात्कारी कहने के साथ साथ उन्हें बार बार पाकिस्तानी कहा है, न हिंदू कहा और न शरणार्थी कहा। 

दूसरी तरफ केजरीवाल, कांग्रेस और विपक्षी दल रोहिंग्या और बांग्लादेशियों को पूरे देश में बसाने और वोट बैंक बनाने के लिए आगे रहे हैं। जब पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए लोगों को नागरिकता मिल जाएगी तो यही केजरीवाल और अन्य दल उन शरणार्थियों के चरणों में लोटते फिरेंगे वोट के लिए।

केजरीवाल और विपक्ष को अगर CAA नहीं चाहिए तो पहले सभी रोहिंग्या और बांग्लादेशियों को देश से बाहर भेजने के लिए हामी भरो। उन्हें लाइन लगा कर वापस भेजो। चुनाव आयोग 2024 लोकसभा चुनाव से पहले सभी रोहिंग्या और बांग्लादेशियों के फर्जी आधार कार्ड पर बने वोटर कार्ड रद्द करे।

CAA पर बुरे फँसे अरविंद केजरीवाल: रोहिंग्या, अवैध बांग्लादेशी और पाकिस्तानियों का विरोध करने की बजाए CAA का विरोध, हिंदू शरणार्थियों ने दिल्ली CM का घर घेरा

        सीएए का विरोध करने पर केजरीवाल को अमित शाह ने सुनाई (फोटो साभार: एचटी, ANI, इंडिया टाइम्स)
नागरिकता संशोधन कानून के लागू होने के बाद जिस तरह विपक्षी नेता मोदी सरकार को घेर रहे हैं उसे देखते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने अपने हालिया इंटरव्यू में सबको करारा जवाब दिया है। इसी लिस्ट में चूँकि आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल भी थे इसलिए उनको भी अमित शाह ने खरी-खरी सुनाई और कहा कि भ्रष्टाचार की पोल खुलने से केजरीवाल जो हैं वो आपा खो बैठे हैं।

दरअसल, देश में सीएए लागू होने पर अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि अगर सीएए लागू होगा तो देश में अंधाधुंध लोग आएँगे, जैसा कि स्वतंत्रता के बाद हुआ था। इससे कानून व्यवस्था बिगड़ेगी और चोरियाँ, डकैतियाँ और बलात्कार आदि होंगे।

उनकी इसी चिंता का जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा, “दिल्ली मुख्यमंत्री अपने भ्रष्टाचार के उजागर होने से अपना आपा खो चुके हैं। उनको मालूम नहीं है सारे लोग आ चुके हैं और भारत में ही रह रहे हैं। सिर्फ उनको अधिकार नहीं मिला है। ये उनको अधिकार देने की बात है। 2014 तक जो आ गए उनको नागरिकता देने की बात हो रही है। इतनी ही चिंता है तो क्यों बांग्लादेश घुसपैठियों की बात क्यों नहीं करते, रोहिंग्याओं की बात क्यों नहीं करते… क्योंकि वो वोटबैंक की पॉलिटिक्स कर रहे हैं। दिल्ली के चुनाव उनके लिए लोहे के चने चबाने जैसे हैं इसलिए वो वोटबैंक की राजनीति कर रहे हैं।

अमित शाह से जब पूछा गया कि अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि सरकार अपने लोगों को नौकरी नहीं दे पा रही, फिर इन्हें कैसे देगी। इस पर अमित शाह ने कहा कि केजरीवाल ने कभी भी रोहिंग्याओं के लिए तो कुछ नहीं कहा। सिर्फ जो बौद्ध, हिंदू, पारसी, ईसाई, सिख शरणार्थी आए हैं, वो उन्हीं का विरोध कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, “ये लोग विभाजन का समय भूल गए हैं। ये शरणार्थी अपनी करोड़ों की संपत्ति छोड़कर यहाँ आए थे। हम उनकी समस्याएँ क्यों नहीं सुनेंगे? उन्हें यहाँ नौकरी और शिक्षा नहीं मिलती। हम उनके प्रति सहानुभूति क्यों नहीं व्यक्त करेंगे? देश का बँटवारा करना उनका फैसला नहीं था। यह कॉन्ग्रेस थी जिसने यह निर्णय लिया और उन्होंने उन्हें नागरिकता देने का वादा किया। अब वे अपने वादे से मुकर रहे हैं।”

एक तरफ अमित शाह ने अरविंद केजरीवाल को उनके बयान पर उन्हें ये सब कहा। वहीं दूसरी ओर हिंदू शरणार्थी भी सड़कों पर दिल्ली सीएम के विरोध में उतर आए। इन लोगों ने अरविंद केजरीवाल के आवास के बाहर हाथ में झंडे लेकर प्रदर्शन किया। इस दौरान मोदी-मोदी के नारे लगे। साथ ही केजरीवाल माफी माँगो का नारा लगाती भी महिलाएँ दिखीं। महिलाओं के हाथ में लगे पोस्टरों में लिखा दिखा- “झूठे केजरीवाल CAA कानून पर भ्रम मत फैलाओ जनता को सच बताओ।”