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जो कुरान में नहीं वह नहीं मानेगे: UCC पर रोते-बिलखते मुस्लिम कट्टरपंथी और छद्दम/ढोंगी सेक्युलरिस्ट्स को वीडियो जरूर देखना चाहिए

यूसीसी पर मुस्लिम नेताओं की प्रतिक्रिया (फोटो साभार : X_ANI)
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 6 फरवरी 2024 को उत्तराखंड विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) से जुड़ा बिल पेश कर दिया। इसको लेकर तमाम मुस्लिम नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आ रही है। कई मुस्लिम नेताओं और संगठनों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है और UCC को नकार दिया है। जिसका मुख्य कारण है शरीयत के लागू करने के रास्ते का बंद होना। 
एनजीओ आल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी द्वारा पाकिस्तान को तोड़ बांग्लादेश बनाये पर कांग्रेस से मुस्लिम वोट बैंक को दूर होते देख इसकी स्थापना की गयी थी, यानि मुस्लिम समाज को खुश कर इस वोट बैंक को कांग्रेस की झोली में रखने के लिए तुष्टिकरण के आगे घुटनों के बल बैठना पड़ा। 
UCC के विरोध करने का असली कारण है, इनकी दुकानों और तिजोरी पर प्रहार। भारत में इतने वर्षों के बाद इस कानून को पिछली सरकारों द्वारा तुष्टिकरण के आगे घुटने टेकने की वजह से इस कानून को बनाने के लिए सोंचा तक नहीं था। जिस कारण मुस्लिम कट्टरपंथी अपना वर्जस्व बनाये हुए थे और छद्दम सेक्युलरिस्ट्स सेकुलरिज्म का ढोल पीट हिन्दुओं का हनन करते रहे। 

जब मुस्लिम कट्टरपंथियों और ढोंगी सेक्युलरिस्ट्स अपनी दाल नहीं पकती देखते, तब ये समस्त ढोंगी गैंग संविधान को भूल साम्प्रदायिक भाषा पर उतर आते हैं। राष्ट्र इस गैंग से जानना चाहता है कि विश्व में एक ऐसा देश बताए जहाँ UCC न हो। आखिर कब तक अपनी भड़काऊ हरकतों से बेगुनाह लोगों-हिन्दू एवं मुस्लिम- की लाशों पर बैठ मालपुए खाने के साथ-साथ अपनी तिजोरियों को भरते रहोगे? इमरजेंसी में विपक्ष को जेलों में भर संविधान में Secular शब्द डालने से क्या संविधान सेक्युलर हो गया? देश को उसी तुष्टिकरण की नीति पर चलाया गया। समय बदल रहा है और बहुत तेजी से बदल रहा है, जिस कारण इन सब की दुकानों पर ताला पड़ने वाला है। यह शोर-शराबा, रोना-बिलखना सिर्फ अपनी पार्टियों/संस्थानों(यानि दुकान) को बचाने के लिए है, किसी नागरिक-हिन्दू अथवा मुस्लिम- के लिए नहीं। 

स्मरण हो, जब पिछली बार उत्तराखंड में भाजपा सरकार बनने के बाद, मदरसों और स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों को मिलने वाली राशि को सीधे बैंक खातों में डालने की प्रक्रिया शुरू होने पर शोर मचा था कि 'मदरसों से 98000 बच्चे गायब', कहाँ गए मदरसे जाने वाले बच्चे, किसने अगवा किया? किसी ने अगवा नहीं किया उन बच्चों को, हकीकत में जब नकद भुगतान चल रहा था, इतने बच्चों का मदरसा चालक/संरक्षक अपनी जेब में डाल रहे थे, उस हो रही लूट पर पाबन्दी हो गयी थी।  

कुछ समय से यह सुनने को मिल रहा है कि 2024 चुनाव के बाद मुस्लिम कट्टरपंथियों, सनातन विरोधियों, सर तन से जुदा गैंग, भारत के विरुद्ध षड़यंत्र रचने वाले-चाहे भारत में हो अथवा भारत से बाहर- आदि गैंग पर जबरदस्त प्रहार होने वाला है, जिसमें भारत को विदेशों से भी जबरदस्त समर्थन मिलेगा। लेकिन जब तक उस बात की पुष्टि न हो प्रसारित नहीं करनी चाहिए। यही पत्रकारिता का नियम भी है। इसी सन्दर्भ में एक वीडियो मिला, जिसकी पुष्टि नहीं कि यह कब का है और कहाँ का, लेकिन लगता वजनदार है। देखिए: 

खुद को मुस्लिमों का रहनुमा मानने वाला ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने समान नागरिक संहिता की की जरूरत को ही नकार दिया। कांग्रेस नेता इमरान प्रतापगढ़ी ने समान नागरिक संहिता को मुद्दे से भटकाने वाला बताया। वहीं, सपा नेता एसटी हसन ने कहा कि यह बिल कुरान के खिलाफ होगा तो उसका विरोध किया जाएगा।

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड बोला- यूसीसी की जरूरत ही नहीं

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा, “जहाँ तक ​​यूसीसी का सवाल है, हमारी राय है कि प्रत्येक कानून में एकरूपता नहीं लाई जा सकती है। यदि आप किसी खास समुदाय को इस यूसीसी से छूट देते हैं तो इसे एक समान कोड कैसे कहा जा सकता है? संविधान का आर्टिकल 25 अभी भी है।”
फिरंगी महली ने आगे कहा, “संविधान में धार्मिक स्वतंत्रता दी गई है। मुस्लिमों में शादी विवाह के लिए के लिए शरिया लॉ 1937 से मौजूद है। हिंदुओं, सिखों के लिए कानून मौजूद है। ऐसे में किसी यूसीसी की जरूरत नहीं ही है। बाकी हमारी टीम इस बिल की कॉपी मिलने के बाद इसे पढ़ेगी, फिर आगे का फैसला लिया जाएगा।”

उत्तराखंड सरकार फेल, मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश: कॉन्ग्रेस

कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने इस मामले को सियासी बताते हुए कहा, “भारतीय जनता पार्टी की राज्य सरकारों के पास भी गिनाने के लिए काम के तौर पर कुछ नहीं है। उत्तराखंड की सरकार कानून व्यवस्था से लेकर महिला सुरक्षा तक में पूरी तरह विफल हो चुकी है। पुष्कर सिंह धामी के पास और कोई तरीका नहीं बचा है लोकसभा चुनाव में जाने के लिए। यूसीसी का प्रोपेगेंडा खड़ा करना है।”
प्रतापगढ़ी ने कहा, “इस देश में अलग-अलग रंग के फूल हैं। अलग-अलग रंग के फूलों की महत्ता है। आप पूरे देश को एक रंग में रंग देना चाहते हैं। ये कहीं से भी भारत जैसे विविधता वाले देश के लिए अच्छा नहीं है। लेकिन पूरी तरह विफल है। अंकिता भंडारी को आजतक इंसाफ नहीं मिला है। उत्तराखंड में आज भी लोगों के पास रोजगार नहीं है, अग्निवीर योजना को लेकर युवाओं में गुस्सा.. इस सारे मुद्दों पर घिरी हुई उत्तराखंड की सरकार के और कुछ नहीं है।”

असम के बदरुद्दीन अजमल बोले- कचरे में डाल देना चाहिए ये बिल

एआईयूडीएफ के अध्यक्ष और असम से सांसद बदरुद्दीन अजमल ने कहा, “हमारा हिंदुस्तान एक रंगा-रंग बगीचा है। कोई भी बगीचा कितना भी खूबसूरत क्यों न हो, अगर उसमें सिर्फ एक फूल है तो आप उसे ज्यादा देर तक देख नहीं पाएँगे। भारत में लोग सभी धर्मों की संस्कृति जीवित है। यही हमारी खूबसुरती है। एक जिन्न आकर औरत-मर्द सबको एक कर दे… तो ऊपर वाला चाहता तो वैसा ही बना देता। दुनिया में मर्द बनाते ही नहीं, सारी औरतें बन जातीं। औरत नहीं बनाता तो सारे मर्द बन जाते। प्रकृति के खिलाफ कुछ भी ज्यादा दिन चलने वाला नहीं है।”
अजमल ने आगे कहा, “जब सरकार विफल हो जाती है तो कुछ चमकदार लाना होता है। असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा भी समय-समय पर ऐसा ही करते हैं। लोगों का ध्यान भटकाने के लिए वो कुछ न कुछ बोलते रहते हैं। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पीएम मोदी को खुश करना चाहते हैं। ये चलेगा नहीं, क्योंकि ये नेचर के खिलाफ है। बाकी इस बिल को कूड़ेदान में फेंक देना चाहिए।”

शरियत के खिलाफ कानून बना तो मंजूर नहीं: सपा संसद

इस बिल पर सपा सांसद एसटी हसन ने कहा कि कुरान के खिलाफ कोई भी कानून मंजूर नहीं है। उन्होंने कहा, “अगर कोई कानून ऐसा बनता है, जो हमें… मुसलमानों को कुरान-ए-पाक ने दी गई हिदायत के खिलाफ बनता है। जैसे कि हम साढ़े 14 सौ साल से पैतृक संपत्ति में बेटी को हिस्सा दे रहे हैं। कितना देते हैं, वो अलग बात है। उसके खिलाफ कोई कानून बनता है तो हम उसे मानने को तैयार नहीं है।”
एसटी हसन ने आगे कहा, “अगर मुसलमानों के हित में है, अगर शरियत के हिसाब से है… हर वो कानून शरियत का जिससे दूसरे को परेशानी नहीं हो रही तो इन्हें (भाजपा को) क्यों परेशानी है? कब तक ये हिंदू-मुसलमान कहकर पोलराइज करते रहेंगे। अब लोग तंग आ चुके हैं इस राजनीति से।”
गौरतलब है कि उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) आने के बाद समाज में कई बदलाव होने वाले हैं। नए कानून में विवाह, लिव-इन रिलेशनशिप, उत्तराधिकार से लेकर तमाम सिविल मामलों को लेकर प्रावधान किए गए हैं। ये सारे प्रावधान बिन किसी धार्मिक भेदभाव के सब पर लागू होंगे। मसलन, 18 साल की उम्र में अगर लड़की की शादी होनी है तो यह कानून सारे लोगों पर लागू होगा। 

"जाओ कुत्तो,... भाग जाओ नहीं तो मैं तुम्हारा सिर फोड़ दूंगा. जाओ मेरे खिलाफ केस कर दो.' MP बदरुद्दीन अजमल

VIDEO: पत्रकार के सवाल पर भड़के MP बदरुद्दीन अजमल, धमकाते हुए बोले - सिर फोड़ दूंगा
असम के ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ)प्रमुख बदरुद्दीन अजमल कॉन्फ्रेंस के दौरान एक पत्रकार के सवाल पर भड़क गए. उन्होंने पत्रकार का सिर फोड़ने तक की धमकी दे डाली. अजमल यहीं नहीं रुके, उन्होंने पत्रकार को कई अपशब्द कहे. पत्रकार ने सिर्फ इतना सा सवाल कर लिया कि वह 2019 के चुनाव में किस पार्टी का समर्थन करेंगे. यह सवाल अजमल को रास नहीं आया और अभद्रता पर उतारू हो गए. अजमल खुद असम की धुबरी लोकसभा सीट से सांसद हैं.
एआईयूडीएफ चीफ बदरुद्दीन अजमल ने हाल ही में असम में हुए पंचायत चुनाव पर प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की थी.  इस कार्यक्रम में उन्होंने दक्षिण सलमारा जिले के पंचायत चुनाव के विजेताओं का अभिनंदन किया. पत्रकार ने बाद में लोकसभा सदस्य के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई.
Badaruddin Ajmal
एक स्थानीय टीवी चैनल के पत्रकार ने आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर गठजोड़ की एआईयूडीएफ की योजना के बारे में सवाल किया. लोकसभा सदस्य ने सीधा जवाब देने से बचते हुए कहा, "हम दिल्ली में महागठबंधन (विपक्ष) के साथ हैं."  इसके बाद पत्रकार ने पूछा कि चुनाव के बाद कौन सी पार्टी जीतती है, क्या एआईयूडीएफ इसको देखकर अपना रुख बदलेगी. इस पर अजमल भड़क गए और कहा, "तुम कितना करोड़ रुपये दोगे ? (अपशब्द).. यह पत्रकारिता है? तुम जैसे लोग पत्रकारिता को बदनाम कर रहे हैं. यह व्यक्ति पहले से ही हमारे खिलाफ है." इसके बाद अजमल ने और भी अपशब्द कहे. इसके बाद उन्होंने दूसरे पत्रकार का माइक छीनकर सवाल पूछने वाले पत्रकार को मारने की कोशिश की. यह दिखाती है जेहादी प्रवित्ति। 
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इस वेबसाइट का परिचय

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संदिग्‍धों का पकड़ा गया. फोटो ANI राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने बुधवार को दुनिया के सबसे खूंखार आतंकी संगठन इस्‍ल.....

अजमल ने कहा, "जाओ कुत्तो, बीजेपी ने तुम्हें कितने पैसों में खरीदा है. भाग जाओ नहीं तो मैं तुम्हारा सिर फोड़ दूंगा. जाओ मेरे खिलाफ केस कर दो.' वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि अजमल किस तर्ह से अपने सामने रखे टीवी चैनल का माइक उठाकर फेंक देते हैं. अजमल ने पत्रकार को धमकी देते हुए कहा कि यहां आसपास कई लोग हैं, जो मेरे एक इशारे पर तुम्हे खत्म कर देंगे. इस पूरे घटनाक्रम के दौरान अजमल के साथ बैठे उनके अन्य साथी हंसते रहे. असम में एआईयूडीएफ के कुल 13 विधायक हैं. पार्टी के 3 सांसद भी है. 2005 में पार्टी का गठन हुआ था लेकिन पार्टी ने तेजी से असम में अपना प्रभाव बढ़ाया है.