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बेंगलुरु दंगा : कर्नाटक सरकार ने दिए न्यायिक जाँच का आदेश

बेंगलुरु दंगा न्यायिक जाँच
कर्नाटक गृहमंत्री बसवराज बोम्मई
बेंगलुरु की सड़कों पर उग्र मुस्लिम कट्टरपंथियों की भीड़ पत्थर चलाते हुए और जम कर तोड़-फोड़ करती हुई नज़र आई। अब कर्नाटक की राज्य सरकार और प्रशासन दंगाइयों पर कार्रवाई करने की पूरी तैयारी कर चुका है। राज्य सरकार ने इस मामले में न्यायिक जाँच के आदेश जारी कर दिए हैं।
न्यायिक जाँच का फैसला कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदुराप्पा, गृहमंत्री बसवराज बोम्मई और पुलिस अधिकारियों की बैठक में लिया गया था। इस जाँच की अगुवाई मजिस्ट्रेट करेंगे। बेंगलुरु के पूर्वी और उत्तर पूर्वी इलाक़ों में हुए इन दंगों में 3 लोगों की जान जा चुकी है। साथ ही कई लोग घायल भी हुए हैं।  
कर्नाटक के गृहमंत्री बोम्मई ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा, “बेंगलुरु में हुई दंगों की न्यायिक जाँच होगी। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के तमाम नीति-निर्देशों को मद्देनज़र रखते हुए पूरे घटनाक्रम की जाँच मजिस्ट्रेट की निगरानी में होगी। इस जाँच के बाद षड्यंत्र रचने वाले असल आरोपित सामने आएँगे।”
मंगलवार की शाम कांग्रेस विधायक अखंडा श्रीनिवास मूर्थी के आवास पर हज़ारों मुस्लिमों की भीड़ इकट्ठा हुई। कुछ ही देर में भीड़ ने पूरे घर को तबाह कर दिया। इसके बाद डीजे हल्ली और केजी हल्ली पुलिस थाने पर भी जम कर तोड़ फोड़ की। पुलिस द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई में कुल 3 लोगों की जान गई थी और 6 लोग घायल हुए थे। दंगे की घटनाओं में 60 पुलिसकर्मी घायल हुए थे जिसमें से 15 नज़दीकी अस्पतालों में भर्ती हैं। 
बेंगलुरु दंगा प्लानिंग
बेंगलुरु में हुए दंगों का एक और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया था। इस वीडियो में केजी हल्ली पुलिस स्टेशन के कर्मचारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों से आत्मरक्षा के लिए गोली चलने की इजाज़त मांग रहे थे। वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि इस्लामियों की अनियंत्रित भीड़ पुलिस वालों पर टूट पड़ती है। हालात इतने भयावह हो जाने के बाद पुलिसकर्मियों ने वरिष्ठ अधिकारियों से अनुमति माँगी।
जिस पर अधिकारियों ने साफ़ तौर पर कहा कि वह भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जो ज़रूरी समझें वह करें। वीडियो में पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा “आपको जो सही लगे वह करिए! इस समय आपको कोई और नहीं बचा सकता है। आपको अपनी सुरक्षा खुद से ही करनी होगी।” टीवी 9 द्वारा प्रसारित इस वीडियो में साफ़ तौर पर देखा जा सकता है कि कैसे कट्टरंथी मुसलमानों की भीड़ ने पूरे बेंगलुरु शहर को आग में झोंक दिया।
इसके अलावा कर्नाटक के गृह मंत्री बसवराज बोम्मई ने बुधवार (अगस्त 12, 2020) को कहा था कि राज्य सरकार बेंगलुरु हिंसा की घटना में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी। बोम्मई ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि सार्वजनिक संपत्ति और वाहनों को नुकसान की भरपाई क्षति पहुँचाने वाले दंगाइयों को करना होगा। 
अब आरिफ साहब के इस पुराने वीडियो को गंभीरता से सुनिए, 
सूत्रों के अनुसार, चर्चा यह भी हो रही है कि केवल क्षति भरपाई नहीं, बल्कि दंगे में मारे गए लोगों के परिवारों का भी खर्चा इन दंगाइयों से करवाने की बात पर भी चर्चा हो सकती है, किसी महीने न देने पर ब्याज सहित भुगतान करवाने का प्रावधान हो। अपने परिवार से पहले उस पीड़ित परिवार को खर्चा देना होगा। ताकि भविष्य में कोई दंगा करने से पहले आत्म मंथन करे। अगर क्षति के साथ इस बात पर सहमति बनती है, तो यह कदम देश में साम्प्रदायिक दंगे रोकने में सहायक होगा। 
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साभार : News18 पूर्वी बेंगलुरु में पुल्केशी नगर के कांग्रेस विधायक अखं...
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वीडियो से लिए गए स्क्रीनशॉट राम मंदिर भूमि पूजन के बाद 5 अगस्त का दिन पूरे देश में दीपावली की तरह मनाया गया। हर हिंद.....
मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए, कर्नाटक के गृह मंत्री ने कहा, “मैं संपत्ति की वसूली को लेकर एक महत्वपूर्ण घोषणा करना चाहता हूँ कि सर्वोच्च न्यायालय का कहना है कि हिंसा के दौरान क्षतिग्रस्त हुई सार्वजनिक संपत्ति की भरपाई उन व्यक्तियों द्वारा किया जाना चाहिए जिन्होंने नुकसान पहुँचाया है। हम तुरंत कार्रवाई करने जा रहे हैं। हम व्यक्तियों की पहचान कर रहे हैं और नुकसान का आकलन कर रहे हैं। इसके बाद दंगाइयों द्वारा नुकसान की वसूली की जाएगी।”
हजारों मुसलमानों की भीड़ ने पुलिस स्टेशन को घेर लिया, डीसीपी सहित पुलिस की गाड़ियों को आग लगा दी गई। विधायक विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के घर में तोडफ़ोड़ और उनकी गाड़ियों को आग लगा दी,आसपास के इलाकों में दंगे शुरू हो गए, पुलिस मूकदर्शक और खुद को बचाती दिखी। फिर भी 80 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हैं एवं इसमें कितने पुलिसकर्मी, हिन्दु मरे, कितने घरों को आग लगाई, कितने लूटे इनके आँकड़े कल तक मिल सकेगें।
यहाँ विधायक तथाकथित दलित है (दृष्टि में मात्र हिन्दु है) परन्तु देखिए यहाँ एक भी दलित चिंतक इन जेहादियों के इस दंगा फसाद पर नहीं बोलेगा। अब सोचना यह है कि भारत, सनातन संस्कृति - सभ्यता - धरोहर और खुद हिन्दु क्या इन जेहादियों के बीच जिंदा रह सकता है?
वे कमलेश तिवारी की हत्या कर देते हैं हम क्या कर पाते हैं ? वे राम, कृष्ण , ब्रह्मा, विष्णु, महेश, सीता, सरस्वती सबको गाली दे जाते हैं और हम मूकदर्शक रहते हैं। हम तो इस अपमान के खिलाफ दो शब्द लिखने में भी काँप जाते हैं। इधर खुलेआम  एक बेशर्म प्रधानमंत्री घोषणा कर गया कि भारत के संसाधनों पर पहला हक मुसलमानों का है।
"वे जितने आक्रामक हैं, हमें मिटाने को हम उतने ही निश्चिंत हैं, भाईचारा निभाने को।" 
क्योंकि हमें भरोसा है - पुलिस पर, सरकार पर, न्यापालिका पर, मीडिया पर बेशक ये सब हमें कश्मीर, पंजाब, बंगाल, केरल, मेवात आदि आदि में बचा न सकें हों।

पर अधिकांशतः हिंदुओं को ये बातें राजनैतिक, साम्प्रदायिक और महत्वहीन लगती हैं।

बेंगलुरु दंगा के पीछे SDPI : मुजम्मिल पाशा ने हिंसा भड़काने के लिए बाँटे थे रुपए, कांग्रेस, ओवैसी और केजरीवाल गैंग खामोश

मुजम्मिल पाशा, बेंगलुरु, SDPI
मुजम्मिल पाशा ने SDPI के अन्य नेताओं के साथ
मिल कर भड़काई हिंसा
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
देर रात हुई इस हिंसा में प्रमुख विपक्षी कांग्रेस इसके जवाब को लेकर दुविधा में नजर आ रही है और अभी तक भी यह निर्णय नहीं ले पार ही है कि आखिर उसे दंगों पर क्या राय रखनी है।
राज्य के अधिकांश कांग्रेस नेताओं ने इन दंगों पर चुप्पी साध ली है। इतना ही नहीं, दिल्ली मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल और वामपंथी भी चुप्पी साधे हुए क्यों? क्योकि दलित पर हमला किसी भाजपा या हिन्दू ने नहीं, बल्कि इनके शांतिदूत, गरीब और मजलूमों ने किया है। जिसके पीछे एक कारण इन दंगों में इस्लामिक कट्टरपंथी विचारधारा के संगठन PFI द्वारा समर्थित SDPI की संलिप्तता को माना जा सकता है। यह भी चर्चा है कि हिन्दू त्यौहार को ख़राब करने ईशनिंदा के बहाने अराजकता फ़ैलाना है। 
वहीं, AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी ने आखिरकार इन दंगों में बेहद चालाकी से अपनी जुबान खोलते हुए कहा है कि बेंगलुरु में हुई हिंसा और ‘आपत्तिजनक सोशल मीडिया’ पोस्ट बेहद निंदनीय हैं। इसके साथ ही ओवैसी ने कहा है कि सभी लोगों को शांति से पेश आना चाहिए।
बेंगलुरु दंगा-कांग्रेस
ये वही एसडीपीआई है, जिस पर दिल्ली दंगों में CAA विरोध प्रदर्शनों के दौरान यह आरोप लगा था कि इसके नेता हिंसा भड़काने में इस्लामिक कट्टरपंथी पीएफआई का सहयोग कर रहे थे। पीएफआई और एसडीपीआई नाम भले ही अलग हों, लेकिन इनके पीछे आइडलॉजी एक ही है।
हालाँकि, पीएफआई के कागजी दस्तावेज आतंकी संगठन सिमी से सम्बन्ध से इनकार करते हैं लेकिन ख़ुफ़िया एजेंसियाँ अक्सर खुलासा करती आई हैं कि पीएफ़आई की जड़ों में सिमी का जहर मौजूद है। एसडीपीआई पॉपुलर फ्रंट आफ इंडिया द्वारा शुरू की गई एक कट्टरपंथी राजनीतिक पार्टी है।
बेंगलुरु दंगों में एसडीपीआई की संलिप्तता पर भी अभी तक कांग्रेस ने चुप्पी साध रखी है, जिसके पीछे प्रमुख वजह यह हो सकती है कि यहाँ पर कॉन्ग्रेस अल्पसंख्यक वोटबैंक के मामले में एसडीपीआई के साथ सीधे टकराव में है। कुछ रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि कॉन्ग्रेस ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।

ऐसे में सम्भव है कि कांग्रेस इसी एसडीपीआई के साथ शायद ही कोई जोखिम लेने के मूड में हो! अपने बढ़ते नेटवर्क के माध्यम से, SDPI यहाँ पर लोकप्रियता हासिल करने में कामयाब रही है, जिससे मुस्लिम वोटों पर कांग्रेस की पकड़ का खतरा पैदा हो गया।
कांग्रेस के मुस्लिम नेता भी, जो कि एसडीपीआई को अपने राजनीतिक अस्तित्व के लिए खतरे के रूप में देखते हैं, वे एसडीपीआई की इस सांप्रदायिक राजनीति पर बोलने के लिए तैयार नहीं हैं, और बस दबी जुबान से इन दंगों के बारे में बोल रहे हैं।
1965 इंडो-पाक युद्ध के दौरान कई गैर-फ़िल्मी देशभक्ति चर्चित हुए थे, उनमे मोहम्मद रफ़ी का गाया एक गीत "कहनी है एक बात हमें आज, इस देश के पहरेदारों से, संभल कर रहना अपने घर में छिपे हुए गद्दारों से...", यह गीत आज भी उतना ही सार्थक है जितना 1965 में था। फिर देश का दूसरा दुर्भाग्य यह रहा कि ताशकंत से तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का शव वापस आया, इसे देश का दुर्भाग्य न कहा जाए कि न उनका पोस्टमॉर्टेम करवाया गया और न ही जाँच करवाई गयी, क्यों? काश वह जीवित आ गए होते, आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जितनी मेहनत करनी पड़ रही है, उतनी नहीं करनी पड़ती है। क्योंकि शास्त्री जी ने पता नहीं कितने देशद्रोहियों को जेल में सड़ने देते। जिस नेता को देखो डॉ भीमराव आंबेडकर की बात करता है, लेकिन वोट के भूखे नेता और पार्टियां उस पर अमल करने को तैयार नहीं। इन्हें तो बस छद्दम धर्म-निरपेक्षता के नाम पर जनता को गुमराह कर उनकी लाशों पर राजनीति नहीं सियासत करनी है। जिस कारण बेगुनाह मुसलमान भी बदनाम हो रहा है। 
इन लालची और वोट के भूखे नेताओं और उनकी पार्टियों से पूछा जाए कि डॉ आंबेडकर ने मुसलमानों से सचेत रहने के लिए क्यों और क्या बोला था? लेकिन इन लालची नेताओं ने तुष्टिकरण करते मुसलमान को मुख्यधारा से ही नहीं जुड़ने दिया। धर्म-निरपेक्षता की दुहाई देने वालों से पूछो कि धर्म-निरपेक्षता क्या है, किस चिड़िया का नाम है? इन्हें धर्म-निरपेक्षता का क,ख,ग तक नहीं मालूम, अगर मालूम होता, न कोई शाहीन बाग़ होता, न साम्प्रदायिक दंगे होते और इसका मुख्य कारण भारत के गौरवमयी इतिहास को धूमिल करना।
  
भारत के लिबरल गैंग जिस भी चीज का हद से ज्यादा गुणगान करे, उसके बारे में समझ जाना चाहिए कि वो उतना ही ज्यादा खतरनाक है। उदाहरण के लिए दिल्ली के शाहीन बाग को ही ले लीजिए। इसी क्रम में बेंगलुरु के बिलाल बाग को भी प्रचारित किया गया। ये वही क्षेत्र है, जिस क्षेत्र में मंगलवार (अगस्त 11,2020) की रात दंगे भड़क गए और कांग्रेस के दलित विधायक के घर को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। वहाँ नसीरुद्दीन शाह भी पहुँचे थे।
किस तरह से बेंगलुरु के इस इलाके में इस्लामिक कट्टरवाद को ऊर्जा मिलती रही, इसे समझने के लिए हमें 5 महीने पहले जाना होगा। उसी समय बिलाल बाग में महिलाओं के सीएए विरोधी प्रदर्शन का काफी महिममंडन किया जा रहा था। उसे दक्षिण भारत का शाहीन बाग साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई थी। तभी बॉलीवुड अभिनेता नसीरुद्दीन शाह भी वहाँ पहुँचे थे और उन्होंने प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया था।
नसीरुद्दीन शाह, बेंगलुरु, दंगे
जहाँ नसीरुद्दीन शाह ने उगला था जहर: बेंगलुरु में मुस्लिम भीड़ ने वहीं किया दंगा
गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवाणी और अभिनेता नसीरुद्दीन शाह फरवरी 14, 2020 के दिन वहाँ पहुँचे थे। उस दिन जुमा भी था। रात के 9 बजे उपद्रवियों को संबोधित करने पहुँचे नसीरुद्दीन शाह ने कहा था कि महिलाओं को प्रदर्शन करते हुए देख कर उन्हें बोलने का साहस मिला है। नसीरुद्दीन शाह ने उन महिलाओं को बहादुर बताते हुए कहा था कि उन्हें सड़क पर उतरने के लिए किसी की अनुमति लेने की जरूरत नहीं है।
जिग्नेश मेवाणी तो एक कदम और आगे बढ़ गए थे। उन्होंने वहाँ प्रदर्शन कर रही महिलाओं के ‘चेहरे की चमक’ की बात करते हुए दावा कर दिया था कि अगर पीएम मोदी ने उन्हें एक बार भी देख लिया तो वो इस्तीफा दे देंगे। उन्होंने उन महिलाओं को क्रांतिकारी करार देते हुए कहा कि वो उनके ज्वलंत चेहरे देखने आए हैं। उन्होंने इस दौरान वहाँ पटना और दिल्ली में महिलाओं द्वारा किए जा रहे प्रदर्शनों का जिक्र किया।
क्या आपको पता है कि ये बिलाल बाग कहाँ स्थित है? ये Tannery Road के पास है, जो केजी हल्ली थाना क्षेत्र से 5 किलोमीटर से भी कम की दूरी पर है। वही थाना क्षेत्र, जहाँ पुलिस की गाड़ियों तक को जला डाला गया। फिलहाल वहाँ कर्फ्यू लगा हुआ है। अब ये साबित हो रहा है कि भारत के विभिन्न स्थानों में, जो सीएए विरोधी प्रदर्शनों का हब बना, वहाँ दंगे भड़क रहे हैं। दिल्ली के बाद बेंगलुरु इसका उदाहरण है।
सरकारों ने इन महिलाओं को सड़क जाम करने से लेकर भारत-विरोधी नारे लगाने तक छोड़ दिया और उन्हें उपद्रव करने दिया, जिसका अंजाम आज जनता और पुलिस दोनों को ही भुगतना पड़ रहा है। अगर समय रहते इन उपद्रवियों पर कार्रवाई की गई होती तो शायद नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के दंगे और नहीं होते और केजी हल्ली में एक छोटे से फ़ेसबुक पोस्ट पर इतना बड़ा हंगामा नहीं होता। इसे समय रहते रोका जा सकता था।





जहाँ तक बिलाल बाग की बात है, वहाँ 200 महिलाओं ने डेरा डाला हुआ था। शाहीन बाग की तरह ही वहाँ महिलाओं को उनके छोटे-छोटे बच्चों के साथ बिठाया गया था। बिलाल मस्जिद के सामने पिलाना रोड को ब्लॉक कर के रखा गया। मीडिया में कई ऐसे लेख ये थे, जिनमें यहाँ की महिलाओं के बयान लेकर उन्हें बहादुर साबित करने का प्रयास किया गया था। सरकार इन चीजों को नजरअंदाज करती रही।
बेंगलुरू में फेसबुक पोस्ट को लेकर भड़की हिंसा
बेंगलुरु दंगा के पीछे SDPI : मुजम्मिल पाशा ने हिंसा भड़काने के लिए बाँटे थे रुपए
पूर्वी बेंगलुरु के पुल्केशी नगर के दलित कांग्रेस विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के घर पर 1000 से भी अधिक की मुस्लिम भीड़ ने हमला कर आगजनी, पत्थरबाजी और दंगे किए, जिसके बाद इलाक़े में कर्फ्यू लगा दिया गया है। केजी हल्ली थाना क्षेत्र में हुई इस घटना के मामले में ‘सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI)’ के नेता मुजम्मिल पाशा को गिरफ्तार किया गया है। बताया जा रहा है कि वो इन दंगों का मास्टरमाइंड है।
मुजम्मिल पाशा ने ही इन दंगों को भड़काया था। स्थानीय ‘सुवर्ण न्यूज़’ के अनुसार, SDPI का नेता मुजम्मिल पाशा नवीन नामक व्यक्ति के खिलाफ पैगम्बर मुहम्मद के बारे में अपमानजनक फेसबुक पोस्ट करने के आरोप में मामला दर्ज करवाने केजी हल्ली थाना पहुँचा था। फिर उसने भड़काऊ भाषण देते हुए पुलिस थाने के बाहर खड़ी मुस्लिम भीड़ को सम्बोधित किया। इसके बाद वो कांग्रेस विधायक श्रीनिवास के आवास पर हिंसक भीड़ के साथ प्रदर्शन करने पहुँचा।
इस दौरान मुजम्मिल पाशा के साथ SDPI के दो और नेता साथ थे जो लगातार लोगों को भड़का रहे थे। उसके सहयोगी नेताओं जफ़र और खलील ने मुस्लिम भीड़ को पत्थरबाजी करने और थाने के बाहर गाड़ियों को आग के हवाले करने के लिए भड़काया था। जहाँ पुलिस मुजम्मिल पाशा को गिरफ्तार करने में कामयाब रही है, वहीं बाकी 2 नेता फरार हो गए। सीसीटीवी फुटेज से भी इस मामले में बड़ा खुलासा हुआ है।

              सीसीटीवी फुटेज से पता चला है कि दंगाइयों को रुपए बाँटे गए थे (फोटो साभार: सुवर्ण न्यूज़)
From where all the rods and stones accumulated within 1 hour?




पुलिस को पता चला है कि पाशा दंगाइयों के बीच रुपए बाँट रहा था, जिसके बाद हिंसा भड़क गई। सीसीटीवी फुटेज से ये भी पता चला है कि पुलिस पर किए गए हमले की साजिश पहले ही अच्छी तरह से रच ली गई थी। सोशल मीडिया पोस्ट्स के जरिए पहले ही दंगाइयों को पूरी साजिश के बारे में बता दिया गया था और वो व्यवस्थित तरीके से वहाँ आए थे। पाशा ने BBMP का चुनाव भी लड़ा था लेकिन वो हार गया था।
वहीं एक अन्य आरोपित खलील स्थानीय कॉर्पोरेटर का पति है। दंगाइयों में से तीन की मौत हुई है, जिनमें से दो के नाम वाजिद और यासीन हैं। इन सबका कोरोना टेस्ट कर के पोस्टमॉर्टम किया जाएगा और फिर लाश परिवारों को सौंप दिए जाएँगे। अब तक 165 लोगों को इस मामले में हिरासत में लिया जा चुका है। राज्य के गृह मंत्री ने मुख्यमंत्री येदियुरप्पा को घटना से अवगत कराया गया है, जिसके बाद उन्होंने कड़ी कार्रवाई की बात कही।
कर्नाटक के मंत्री सीटी रवि ने भी कहा है कि ये एक योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया दंगा था। उनकी मानें तो फेसबुक पोस्ट के 1 घंटे के भीतर ही हज़ारों लोग जमा हो गए और उन्होंने 200-300 गाड़ियाँ फूँक डाली व विधायक के घर को क्षतिग्रस्त कर दिया। उन्होंने कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी। मंत्री ने कहा कि साजिशन इस हिंसा को अंजाम दिया गया है और इसके पीछे SDPI का हाथ है।




मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने कहा कि कर्नाटक सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सभी संभव कदम उठाए हैं और अधिकारियों को दंगाइयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का निर्देश दे दिया गया है। बेंगलुरु में हुई हिंसा को लेकर येदियुरप्पा ने कहा कि पत्रकारों, जनता और पुलिस के खिलाफ मंगलवार (अगस्त 11, 2020) की रात हुई हिंसा स्वीकार्य नहीं है और सरकार इस प्रकार की भड़काऊ हरकतों और अफवाहों को बर्दाश्त नहीं करेगी।
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कई प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि 10 मिनट तक पुलिस ये सब होते हुए देखती रही और उसने कुछ नहीं किया। वो असहाय नज़र आ रही थी। यहाँ तक कि आधी रात के बाद भी पुलिसकर्मी दंगाइयों से काफी कम संख्या में थे और संघर्ष कर रहे थे। कमिश्नर कमल पंत भी घटनास्थल पर पहुँचे लेकिन फिर पुलिस की एक गाड़ी को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। पुलिस ने विधायक अखंड श्रीनिवास के रिश्तेदार नवीन को गिरफ्तार कर लिया है।

कर्नाटक : टीपू सुल्तान और हैदर अली 7वीं के चैप्टर से बाहर

BS Yeddyurappa: टीपू सुल्तान से जुड़े ...
कर्नाटक की येदियुरप्पा सरकार ने कक्षा 7 के छात्र-छात्राओं के इतिहास के सिलेबस में बदलाव करते हुए इसमें से वो चैप्टर हटा दिया है, जो मैसूर के शासक टीपू सुल्तान और उसके पिता हैदर अली पर आधारित था। सरकार ने बच्चों का अकादमिक सिलेब्स कम करने के मद्देनजर ये निर्णय लिया है क्योंकि कोरोना वायरस संक्रमण आपदा के बीच क्लासेज नहीं चल रही हैं। हालाँकि, कक्षा 6 और 10 में पढ़ाया जाने वाला ‘टाइगर ऑफ मैसूर’ चैप्टर फिलहाल बना रहेगा।
कर्नाटक टेक्स्ट बुक सोसाइटी के डायरेक्टर मद्दे गौड़ा ने कहा कि कोरोना वायरस के कारण स्कूलों के खुलने में देरी हो रही है और इसीलिए छात्रों का सिलेब्स 30% कम किया जा रहा है ताकि उन पर से बोझ कम हो। उन्होंने बताया कि इसी क्रम में कक्षा 7 में पढ़ाए जाने वाले टीपू सुल्तान वाले चैप्टर को निकाल बाहर किया गया है। उन्होंने कहा कि टीपू सुल्तान का चैप्टर हटाने से छात्रों को कोई हानि नहीं होगी।
टीपू सुल्तान की असली फोटो का वायरल ...
                                                                                                      साभार 
इसके पीछे उन्होंने तर्क दिया कि छात्रों ने टीपू सुल्तान के बारे में कक्षा 6 में ही पढ़ रखा है और कक्षा 10 में फिर से उसके बारे में पढ़ेंगे ही, ऐसे में इसे हटाए जाने से कोई नुकसान नहीं होगा। ‘डिपार्टमेंट स्टेट एजुकेशन रिसर्च एण्ड ट्रैनिंग’ (DSERT) की वेबसाइट पर कम हुए सिलेबस को अपलोड कर दिया गया है। यहाँ से संसाधन लेकर ऑनलाइन पढ़ाई होगी। शिक्षक और छात्र इसका फायदा उठा सकेंगे।
इस फैसले ने कांग्रेस को नाराज कर दिया है और उसने इसका विरोध किया है। कांग्रेस का कहना है कि भाजपा सांप्रदायिक राजनीति खेल रही है और इसी क्रम में उसने टीपू सुल्तान पर आधारित चैप्टर को बच्चों के सिलेब्स से हटा दिया है। राज्य की विपक्षी पार्टी ने कहा कि भाजपा अब शिक्षा में सांप्रदायिकता घुसा रही है। हालाँकि, लेखक बंगारु रामचन्द्रप्पा की अध्यक्षता में गठित विशेषज्ञों की कमिटी ने नवंबर 2019 में ही कर्नाटक सरकार को टीपू सुल्तान को सिलेब्स से हटाने की सलाह दी थी।
यही देश का दुर्भाग्य रहा कि कांग्रेस ने वामपंथियों के साथ गठजोड़ कर, मुग़ल आक्रांताओं का इस्लामीकरण, हिन्दू तीर्थों को ध्वस्त और खूनी इतिहास को हटाकर उनको महान बता कर पढ़ने के मजबूर कर साम्प्रदायिकता फ़ैलाने वाले किस मुंह से कर्नाटक सरकार पर साम्प्रदायिकता फ़ैलाने का आरोप लगा रही है। गलत इतिहास पढ़वा कर हिन्दू-मुसलमान के बीच जो गहरी खाई खोदी है, उसे सपाट करने में कितना समय लगेगा? अयोध्या इसका ज्वलंत उदाहरण है कि खुदाई में मिले मंदिर के समस्त सबूतों को छुपाकर केवल एक ही खम्बा कोर्ट में प्रस्तुत किया। भारत में रहते और खाते यहीं का गौरवमयी इतिहास सिर्फ अपनी कुर्सी की खातिर धूमिल कर क्या देशहित का काम किया है?  

कक्षा 7 के इतिहास की पुस्तक में टीपू सुल्तान को अँग्रेजों से लड़ने वाला बताया गया था और उस समय के बाकी स्वतंत्रता सेनानियों के साथ रखा गया था। सरकार ने बताया है कि टीपू सुल्तान और हैदर अली पर आधारित उस चैप्टर को डिलीट कर दिया गया है। कहा गया है कि विशेषज्ञों की समिति ने ही ये फैसला लिया है, जिसमें सरकार ने कोई हस्तक्षेप नहीं किया है। अकादमिक दिनों की संख्या अब 220 की जगह 120 रह गई है, इसीलिए इसे हटाया गया।
कर्नाटक के कोडागु जिले में टीपू सुल्तान का कोई नाम भी नहीं सुनना चाहता है और लोग उससे घृणा करते हैं क्योंकि कोडवा (कुर्गी) लोगों का मानना है कि टीपू सुल्तान ने उसके समुदाय के हजारों लोगों को निर्ममता से मौत के घाट उतार दिया था और कइयों को जबरन इस्लाम कबूल करने के लिए बाध्य किया था। लोगों को प्रताड़ित कर के इस्लाम कबूल करने के लिए जबरदस्ती की गई थी।

मांड्या जिले के मेलकोट में भी टीपू सुल्तान से लोग नफरत करते हैं। उसने मंदिरों के इस शहर में मांड्यम अयंगर समुदाय के कई लोगों को मार डाला था। उसने दीपावली के दिन ही वहाँ कत्लेआम मचाया था। वहाँ के लोगों का दोष बस इतना था कि उन्होंने मैसूर के महाराज का समर्थन किया था और टीपू सुल्तान इससे नाराज था। कांग्रेस सत्ता में आने पर ‘टीपू जयंती’ मनाती रही है, जिसका भाजपा विरोध करती है।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार भारतीय इतिहास से छेड़छाड़ सर्वविदित हैं। वामपंथियों ने बड़ी सफाई से इस्लामिक आक्रा.....
शाहीन बाग में सीएए विरोधी उपद्रवियों ने भी टीपू सुल्तान का नाम लेकर मोदी सरकार और हिंदुओं को धमकाया था। एक जिहादी कट्टरवादी ने कहा था – “सुन लो मोदी, हमारी माँ-बहनों ने टीपू सुल्तान को जन्म दिया है और तुम आजादी के 70 बाद हमसे नागरिकता का सबूत माँगते हो, कहते हो कि हमें नागरिकता रजिस्टर की प्रक्रिया से गुजरना होगा। ये लाल किला जहाँ से झंडा फहराते हो, ये क्या तुम्हारे पूर्वजों ने बनवाया? जहाँ ट्रम्प को लेकर गए थे वो ताजमहल क्या तुम्हारे पूर्वजों ने बनवाया था?”

टीपू सुल्तान पाठ्यक्रम में पढ़ाए जाने के काबिल नहीं, किताबों से होगा बाहर, जयंती भी नहीं मनेगी: मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा

Image result for yeddyurappa in tippu jayanti
Image result for yeddyurappa in tippu jayanti18वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में मैसूर पर राज करने वाले टीपू सुल्तान को लेकर एक बार फिर से चर्चा छिड़ गई है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने कहा है कि टीपू सुल्तान के बारे में राज्य के पाठ्यक्रम में जो भी चीजें शामिल की गई हैं, सभी को हटाया जाएगा। येदियुरप्पा ने कहा कि टीपू सुल्तान के बारे में कर्नाटक का पाठ्यक्रम में कुछ भी नहीं रहेगा। बता दें कि कर्नाटक की पूर्ववर्ती कॉन्ग्रेस सरकारें टीपू सुल्तान की जयंती मनाती रही है लेकिन येदियुरप्पा सरकार ने आते ही उस पर रोक लगा दी। अब पाठ्यक्रम से भी उसे हटाने का ऐलान किया गया है।
बीएस येदियुरप्पा ने कहा कि वो ऐसे किसी भी राय से इत्तेफ़ाक़ नहीं करते, जिनमें टीपू सुल्तान को स्वतंत्रता सेनानी बताया जाता है। इससे पहले मुख्यमंत्री ने कन्नड़ एंड कल्चरल डिपार्टमेंट को आदेश दिया था कि टीपू सुल्तान की जयंती नहीं मनाई जाए। जुलाई के अंतिम हफ्ते में हुई कैबिनेट मीटिंग में कर्नाटक सरकार ने इस फ़ैसले पर मुहर लगा दी थी। मुख्यमंत्री का कहना है कि टीपू सुल्तान पाठ्यक्रम में पढ़ाए जाने के काबिल नहीं है।
इससे पहले भाजपा विधायक अप्पाचु रंजन ने एक पत्र लिख कर कर्नाटक के सिलेबस से टीपू सुल्तान से जुड़ा चैप्टर हटाने की माँग की थी। इसके बाद राज्य के शिक्षा मंत्री सुरेश कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि टीपू सुल्तान से जुड़े चैप्टर को हटाने को लेकर रिपोर्ट तैयार की जाए। कर्नाटक टेक्स्ट बुक सोसाइटी के मैनेजिंग डायरेक्टर को पत्र लिख कर मंत्री ने विधायक रंजन के साथ बैठक कर उनका पक्ष सुनने और उस पर विचार करने को कहा था। उन्होंने हिस्ट्री टेक्स्ट बुक ड्राफ्टिंग कमिटी की बैठक बुला कर इस चैप्टर की समीक्षा के निर्देश दिए थे।

भाजपा विधायक रंजन ने कहा कि टीपू सुल्तान ने हजारों ईसाईयों व कोडवा समुदाय के लोगों को जबरन इस्लाम कबूल करवाया था। साथ ही उन्होंने बताया कि टीपू ने अपने शासनकाल के दौरान फ़ारसी को आधिकारिक भाषा का दर्जा दिया था। साथ ही उन्होंने टीपू सुल्तान के स्वतंत्रता सेनानी होने के दावों का भी खंडन किया। उन्होंने कहा कि बिना इतिहास के तथ्यों को जाने हुए उसके नाम को पाठ्यक्रम में घुसेड़ दिया गया और उसे जबरदस्ती महिमामंडित किया गया। विधायक ने बताया कि इस चैप्टर में लिखी गई बातें झूठ हैं।

हिन्दी पर अमित शाह के बयान से मचे घमासान के बीच BJP के अंदर से ही उठने लगीं आवाजें

हिन्दी पर अमित शाह के बयान से मचे घमासान के बीच BJP के अंदर से ही उठने लगीं आवाजें, बीएस येदियुरप्पा ने कही यह बातहिन्दी दिवस पर BJP अध्यक्ष अमित शाह (Amit Shah) द्वारा दिए गए भाषण पर सियासत जारी है. हिन्दी दिवस के मौके पर गृहमंत्री अमित शाह ने हिंदी के माध्यम से पूरे देश को जोड़ने की अपील की थी. अमित शाह ने कहा था कि विभिन्न भाषाएं और बोलियां हमारे देश की ताकत हैं. लेकिन अब देश को एक भाषा की जरूरत है ताकि यहां पर विदेशी भाषाओं को जगह न मिल पाए. गृहमंत्री अमित शाह ने इस दौरान हिन्दी को राष्ट्रीय भाषा बनाने की अपील की थी. अब इसके विरोध में बीजेपी की तरफ से ही आवाजें उठनी शुरू हो गई हैं. दक्षिण भारत में बीजेपी के सबसे कद्दावर नेता और कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा (BS Yediyurappa) ने पार्टी प्रमुख अमित शाह की 'देश भर में हिन्दी भाषा को एक आम भाषा के रूप में इस्तेमाल' करने की अपील को अप्रत्यक्ष रूप से 'ना' कह दिया.
कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने ट्वीट किया, 'हमारे देश में सभी आधिकारिक भाषाएं समान हैं. हालांकि, जहां तक कर्नाटक की बात है, कन्नड़ यहां की प्रमुख भाषा है. हम कभी भी इसके महत्व से समझौता नहीं करेंगे. हम कन्नड़ भाषा और हमारे राज्य की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं.'
उधर, पुद्दुचेरी की राज्यपाल किरण बेदी ने भी इस पर बयान दिया. किरण बेदी (Kiran Bedi) ने दक्षिण भारतीय लोगों से अपील करते हुए हिन्दी भाषा को सीखकर भारत सरकार से जुड़ने को कहा. भारत की पहली महिला आईपीएस अधिकारी रहीं बेदी ने आगे कहा कि भाषाएं लोगों के बीच एक भावनात्मक रिश्ता बनातीं थीं. उन्होंने यह भी कहा कि मैं यहां हर समय ट्रांसलेटर का इस्तेमाल करती हूं. लेकिन जो गैर हिन्दी भाषी वक्ता हैं वह हमारी भाषा सीखते हैं और अपनी संस्कृति और विरासत से दूरी महसूस नहीं करते.

वहीं, पुद्दुचेरी के मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता वी नारायणसामी ने गृहमंत्री अमित शाह को दक्षिण भारतीय राज्यों पर हिंदी को न थोपने को लेकर चेतावनी भी दी थी. सामी ने कहा था कि हिन्दी को थोपकर हम देश को एक नहीं रख सकते. उन्होंने न्यूज एजेंसी ANI से कहा कि हमें सभी धर्मों, संस्कृतियों और भाषाओं का सम्मान करना चाहिए और काम करने का यही तरीका होना चाहिए.
तमिलनाडु में विपक्ष के नेता एमके स्टालिन भी अमित शाह को तमिलनाडु में हिंदी विरोधी भड़काने को लेकर चेताया था.  स्टालिन ने कहा 'यह इंडिया है हिंडिया नहीं'. उन्होंने कहा कि केंद्र दूसरे भाषाई युद्ध के लिए तैयार रहे अन्यथा पीएम मोदी इस पर अपनी सफाई दें. केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने भी अमित शाह के बयान को युद्ध की चीख बताया. 
हिंदी के विरोध में दक्षिणी राज्यों में प्रदर्शन