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कर्नाटक : ‘टीपू सुल्तान टाइगर था’- स्कूलों में अब नहीं होगी ऐसी पढ़ाई, : मदरसों पर बैन की माँग भी

                                              साभार: जागरण/एशियानेट न्यूज
स्कूली पाठ्य-पुस्तकों में विवादित संदर्भों की पढ़ाई को लेकर कर्नाटक सरकार द्वारा गठित समीक्षा समिति ने टीपू सुल्तान पर अध्याय को बनाए रखने की सिफारिश की है, लेकिन इसके महिमामंडन वाले हिस्से को हटाने की बात कही है। समिति ने पाठ्यक्रमों में मैसूर के वाडियार राजपरिवार, सुरपुर वंश के वेंकटप्पा नायक सहित अन्य शासकों को शामिल करने की सिफारिश की है। दूसरी तरफ, राज्य के भाजपा विधायक एमपी रेणुकाचार्य ने राज्य में मरदसों को बंद कराने की अपील करते हुए कहा कि इनमें राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों को शिक्षा दी जाती है।

रोहित चक्रतीर्थ की अध्यक्षता वाली स्कूली पाठ्य-पुस्तक समीक्षा समिति ने राज्य सरकार को दिए अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 18वीं शताब्दी के मैसूर शासक टीपू सुल्तान को मैसूर का शेर कहा जाता है। चक्रतीर्थ का कहना है कि ये कोई नहीं जानता की टीपू सुल्तान को यह उपाधि किसने और किस संदर्भ में दी है।

भाजपा विधायक अपाचू रंजन सहित कई हिंदू संगठनों ने टीपू सुल्तान को लेकर आपत्ति जाहिर की थी। इनका कहना था कि वह एक कट्टर इस्लामिक सुल्तान था, जिसने बड़े पैमाने पर हिंदुओं का नरसंहार और उनका धर्मांतरण किया। उसका स्कूली पाठ्यक्रमों में अनावश्यक रूप से महिमामंडन किया गया है। इसके बाद सरकार इस समिति का गठन किया था।

समिति ने वाडियार राजवंश, उत्तर-पूर्व में 600 वर्षों तक शासन करने वाले अहोम राजवंश और कश्मीर पर 300 वर्षों तक शासन करने वाले करकोटा राजवंश को पाठ्यक्रम में शामिल करने की सिफारिश की है। इसके साथ ही रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि महर्षि बाल्मिकी के लिए पाठ्यक्रमों में एकवचन का प्रयोग किया गया है, जो अपमानजक है।

इसको लेकर भाजपा विधायक बसनगौड़ा पाटिल यतनाल ने टीपू सुल्तान, औरंगजेब सहित अन्य मुस्लिम शासकों को ‘कट्टर’ बताते हुए शनिवार (26 मार्च 2022) को उन्हें पाठ्यक्रमों से पूरी तरह हटाने की माँग की।

बंद हों राज्य के मदरसे

वहीं भाजपा के विधायक रेणुकाचार्य ने राज्य के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई से मदरसों को बंद कराने और अन्य स्कूलों में पढ़ाए जाने वाले पाठ्यक्रमों के अनुसार बनाए जाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इन मदरसों में देश विरोधी बातें बताई और पढ़ाई जाती हैं। उन्होंने देश में मदरसों की आवश्यकता पर सवाल उठाया।
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “मैं कांग्रेस से पूछना चाहता हूँ कि हिजाब का मुद्दा किसने बनाया, आपने या हमने? क्या वोट बैंक आपके लिए ज्यादा महत्वपूर्ण है? मैं कांग्रेस से पूछता हूँ कि हमें मदरसों की जरूरत क्यों है? मदरसे क्या प्रचार करते हैं? वे मासूम बच्चों को भड़काते हैं। कल वे हमारे देश के खिलाफ काम करेंगे। वे कभी भी ‘भारत माता की जय’ नहीं कहेंगे।”

टीपू सुल्तान के हरम में 600 महिलाओं की कहानी

भारतीय नेता कुर्सी के कितने अधिक भूखे हैं, उसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिन मुग़ल आक्रांताओं ने हिन्दुओं पर अत्याचार किए, उन्हें ही महान बताकर भारतीय जनता को पागल बनाया गया। अकबर जो अपनी अय्याशी के लिए मीना बाजार लगवाता था, उसे महान बता दिया। एक मुग़ल शासक ऐसा नहीं था, जिसने हिन्दुओं पर अत्याचार न किये हों, विशेषकर हिन्दू  महिला समाज पर। आखिर किस आधार पर ये कुर्सी के भूखे नेता अपने आपको जनता का हितैषी और देशभक्त कहते हैं। 
देखिए उसका एक उदाहरण :
टीपू सुल्तान को अक्सर ‘टाइगर’ बता कर उसका महिमामंडन किया जाता है। मैसूर पर शासन करने वाले इस आक्रांता की याद में जयंती तक मनाई जाती है, जबकि उसकी क्रूरता के किस्से इतिहास में दर्ज हैं। ‘मुस्लिम तुष्टिकरण’ के लिए भाजपा विरोधी दलों ने उसे अपना नायक बनाया हुआ है और कर्नाटक में उसके नाम पर चुनाव जीतने की कोशिश होती है। लेकिन, क्या आपको पता है कि टीपू सुल्तान के हरम में कितनी महिलाएँ थीं?

श्रीरंगपट्टम मंदिर पर आक्रमण कर के उसे तहस-नहस करने वाले टीपू सुल्तान के कितने बच्चे थे, इसे लेकर इतिहासकारों में मतभेद है। कितने महिलाओं से उसके सम्बन्ध रहे और उसकी कितनी संतानें हुईं, इस बारे में इतिहासकारों में एकराय नहीं। यहाँ तक कि उसकी बीवियों की संख्या को लेकर भी अलग-अलग आँकड़े दिए जाते हैं। इतना स्पष्ट है कि उसकी पहली दोनों बीवियों में से एक इमाम साहिब बख्शी की बेटी थी और एक का नाम रुकैया बानू था।

इन दोनों के साथ उसने सन् 1774 में एक ही रात में निकाह किया था। 1796 में उसने खदीजा जमन बेगम से निकाह किया। लेकिन, एक साल बाद ही बच्चे को जन्म देते समय उस महिला की मौत हो गई। अंग्रेजों और मैसूर के बीच हुए चौथे युद्ध के बाद ब्रिटिश ने उसके जनानखाने को भी अपने कब्जे में ले लिया था। उस ‘जनाना’ का इंचार्ज बनाए गए एक अंग्रेज अधिकारी ने तय था कि उसकी एक चौथी पत्नी भी थी।

उसका नाम बुरांटी बेगम बताया गया था। उसी अधिकारी ने ये भी जानकारी दी कि टीपू सुल्तान के कुल 12 बेटों और 8 बेटियों के जीवित होने की बात कही थी, जिसमें सबसे बड़े वाले का नाम फतह बहादुर था। उसने इस बात पर हैरानी जताई थी कि टीपू सुल्तान की इन संतानों माँओं के बारे में कुछ जानकारी ही नहीं थी। ‘Tiger: The Life of Tipu Sultan‘ नामक पुस्तक में इतिहासकार केट ब्रिटलबैंक ने टीपू सुल्तान के हरम के बारे में जानकारी दी है।

हरम में थी 601 महिलाएं 

उन्होंने लिखा है कि 1799 में श्रीरंगपट्टम स्थित टीपू सुल्तान के हरम में 601 महिलाएँ थीं। ये महिलाएँ सिर्फ टीपू सुल्तान की ही नहीं, बल्कि उसके अब्बा हैदर अली की भी थीं। इनमें से 333 महिलाएँ टीपू सुल्तान की थीं और 268 महिलाएँ उसके अब्बा हैदर अली की। हैदर अली की मौत के बाद भी वो महिलाएँ उस हरम में थीं। ‘जनाना’ की रखवाली के लिए नपुंसकों/हिजड़ों (Eunuchus) को रखा गया था।

इस्लामी शासनकाल में ऐसे कई उदाहरण मिलते हैं, जहाँ ‘जनाना’ की रखवाली के लिए पुरुषों को नहीं रखा जाता था बल्कि ऐसे लोगों को रखा जाता था, जो ये तो नपुंसक थे या फिर नपुंसक बना दिए जाते थे। टीपू सुल्तान के हरम में शामिल इन महिलाओं में उसके परिवार की सदस्य, कई रखैलें और कामकाज के लिए रखी गई महिलाएँ भी शामिल थीं। टीपू सुल्तान का एक भाई भी था, अब्दुल करीम।

हैदर अली ने अपने उस बेटे की शादी सवानुर के नवाब की बेटी से कर रखी थी। ये शादी 1799 में हुई थी। अब्दुल करीम को इतिहास में अक्सर कमजोर दिमाग वाला और कम सूझबूझ वाला कहा जाता है। हालाँकि, ये भी कहा जाता है कि बुद्धिहीन होने के बावजूद वो अपनी बीवी के साथ बड़ी क्रूरता से पेश आता था। टीपू सुल्तान ने उसकी बीवी को भी अपने ही हरम में रखा हुआ था। वामपंथी इतिहासकार कहते हैं कि उसने उसकी ‘सुरक्षा’ के लिए ऐसा किया था।

हालाँकि, अपनी पुस्तक में केट ब्रिटलबैंक टीपू सुल्तान के हरम में इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं के होने और उन पर अत्याचार होने का बचाव करती हैं। वो कहती हैं कि अंग्रेज ऐसी महिलाओं को हमेशा कैदी की तरह ही समझते थे, जबकि ऐसा नहीं था। इसके पीछे वो दलील देती हैं कि ऐसी टिप्पणियाँ करने वाले कभी ऐसे हरम के भीतर तक नहीं जाते थे। सिर्फ यूरोप के कुछ डॉक्टर ही थे जो कभी-कभार वहाँ जाते थे।

लेकिन, उनकी ही पुस्तक में ये भी स्वीकार किया गया है कि टीपू सुल्तान की हरम में जो उसकी बीवियाँ, रखैलें और अन्य महिलाएँ थीं, उनमें से कइयों को दासी के रूप में खरीदा गया था तो कई अन्य राजाओं को हराने के बाद वहाँ की महिलाओं का अपहरण कर के लाया गया था। ये सभी की सभी टीपू सुल्तान की इच्छा पर ही निर्भर थीं। साथ ही वो अपने राज्य की भी किसी भी लड़की को उठा कर वहाँ मँगवा लेता था।

यूरोप में कभी इस तरह की परंपरा हुआ करती थी, जिसे ‘droit du seigneur‘ कहा जाता था। इसका अर्थ हुआ कि राजा को अधिकार है कि वो अपनी प्रजा में से किसी को भी उठा कर मँगवा ले। यूरोप के जमींदार ‘लॉर्ड्स’ इस तरह किसी भी महिलाओं को उठा लेते थे और उनके साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाते थे। वो अपने मातहत महिलाओं की शादी की रात ही उनसे सम्बन्ध बना लेते थे। इसके तहत किसी भी कुँवारी या शादीशुदा महिला को उठा लिया जाता था।

टीपू सुल्तान भी इस परंपरा से काम करता था। केट ब्रिटलबैंक ये भी लिखती हैं कि ये मानने का कोई कारण नहीं है कि वो इन महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार करता होगा। वामपंथी इतिहासकार अक्सर टीपू सुल्तान को दलित महिलाओं का उद्धारक से लेकर न जाने क्या-क्या बताते हैं और कहते हैं कि उसने अपने शासन काल में शराब पर पाबंदी लगा रखी थी। वो अपने राज्य में शरिया का शासन चलाता था, क्या ये भी ‘समाजसेवा’ है?

ईसाईयों के साथ टीपू सुल्तान के अत्याचार की जानकारियाँ अंग्रेजों ने भी अपने रिकार्ड्स में दर्ज की हैं। उसने हजारों ईसाईयों को कई वर्षों तक बंधक बना कर प्रताड़ित किया था। ‘Moon-o-theism, Volume II‘ में योएल नटन लिखते हैं कि एक बार तो उसने हजारों ईसाईयों को 338 किलोमीटर तक चलवाया, जिसमें 6 सप्ताह लगे। कई बीच में ही मर गए। अंत में उनमें से कई महिलाओं और लड़कियों को उसकी फौज में बाँटा गया।

इनमें से कइयों को हराम में भेजा गया। साथ ही उन्हें मौत और इस्लाम अपनाने में से किसी एक को चुनने को कहा गया। जिन्होंने जिद की, उनके नाम-कान काट डाले गए और उनसे शौचालय साफ़ करवाया गया। इसी पुस्तक में एक पीड़ित का जिक्र है, जिसने बताया था कि वो अपने सामने अपने परिवार को मुस्लिम बनते देख रहा था और उसकी माँ व बहन, दोनों गर्भवती थीं। उसका कहना था कि दोनों के गर्भ में मुस्लिम ही पल रहे थे। उसने बताया था कि वो अपनी माँ-बहन से आँख तक नहीं मिला पाता था, क्योंकि वो उनके दर्द का सामना नहीं कर सकता था।

स्कॉटिश डॉक्टर का टीपू सुल्तान के हरम को लेकर खुलासा

आपको टीपू सुल्तान के जनाने या हरम के बारे में एक स्कॉटिश फिजिशियन के हवाले से बताते हैं, जो कई बार इसके अंदर भी गए थे। स्कॉटिश फिजिसियन फ्रांसिस बचनन-हैमिलटन (Francis Buchanan-Hamilton) टीपू सुल्तान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच रहता था।

                                Macquarie University की वेबसाइट पर फ्रांसिस हैमिलटन के अनुभव
उसकी पुस्तक ‘A Journey From Madras Through The Countries of Mysore, Canara and Malabar…‘ में उन्होंने लिखा है कि टीपू सुल्तान के प्राइवेट कक्ष से जनाना के लिए एक रास्ता बनाया गया था। उन्होंने भी इसकी पुष्टि की है कि इसमें उसके और उसके अब्बा की 600 महिलाएँ थीं, जिनकी रखवाली के लिए नपुंसकों को लगाया गया था। लेकिन, वो महिलाएँ कौन थीं – इस बारे में उन्होंने जो लिखा है वो जानने लायक है।
वो लिखते हैं, “उनमें से कई हिंदुस्तानी थीं। कई ब्राह्मणों और राजाओं की बेटियाँ थी, जिन्हें उनके अभिभावकों के सामने ही बलपूर्वक उठाया गया था। काफी कम उम्र में ही उन्हें जनाना में बंद कर दिया गया था। उन्हें कुछ इस तरह बड़ा किया जा रहा था, जिससे उनमें इस्लाम के प्रति अच्छी भावनाएँ आएँ। मुझे नहीं लगता कि उनमें से कोई उस कैद से बाहर निकलना चाहती थीं क्योंकि उन्हें पता तक नहीं था कि बाहर क्या चल रहा है और जीवन कैसे जीते हैं।”

कर्नाटक : टीपू सुल्तान और हैदर अली 7वीं के चैप्टर से बाहर

BS Yeddyurappa: टीपू सुल्तान से जुड़े ...
कर्नाटक की येदियुरप्पा सरकार ने कक्षा 7 के छात्र-छात्राओं के इतिहास के सिलेबस में बदलाव करते हुए इसमें से वो चैप्टर हटा दिया है, जो मैसूर के शासक टीपू सुल्तान और उसके पिता हैदर अली पर आधारित था। सरकार ने बच्चों का अकादमिक सिलेब्स कम करने के मद्देनजर ये निर्णय लिया है क्योंकि कोरोना वायरस संक्रमण आपदा के बीच क्लासेज नहीं चल रही हैं। हालाँकि, कक्षा 6 और 10 में पढ़ाया जाने वाला ‘टाइगर ऑफ मैसूर’ चैप्टर फिलहाल बना रहेगा।
कर्नाटक टेक्स्ट बुक सोसाइटी के डायरेक्टर मद्दे गौड़ा ने कहा कि कोरोना वायरस के कारण स्कूलों के खुलने में देरी हो रही है और इसीलिए छात्रों का सिलेब्स 30% कम किया जा रहा है ताकि उन पर से बोझ कम हो। उन्होंने बताया कि इसी क्रम में कक्षा 7 में पढ़ाए जाने वाले टीपू सुल्तान वाले चैप्टर को निकाल बाहर किया गया है। उन्होंने कहा कि टीपू सुल्तान का चैप्टर हटाने से छात्रों को कोई हानि नहीं होगी।
टीपू सुल्तान की असली फोटो का वायरल ...
                                                                                                      साभार 
इसके पीछे उन्होंने तर्क दिया कि छात्रों ने टीपू सुल्तान के बारे में कक्षा 6 में ही पढ़ रखा है और कक्षा 10 में फिर से उसके बारे में पढ़ेंगे ही, ऐसे में इसे हटाए जाने से कोई नुकसान नहीं होगा। ‘डिपार्टमेंट स्टेट एजुकेशन रिसर्च एण्ड ट्रैनिंग’ (DSERT) की वेबसाइट पर कम हुए सिलेबस को अपलोड कर दिया गया है। यहाँ से संसाधन लेकर ऑनलाइन पढ़ाई होगी। शिक्षक और छात्र इसका फायदा उठा सकेंगे।
इस फैसले ने कांग्रेस को नाराज कर दिया है और उसने इसका विरोध किया है। कांग्रेस का कहना है कि भाजपा सांप्रदायिक राजनीति खेल रही है और इसी क्रम में उसने टीपू सुल्तान पर आधारित चैप्टर को बच्चों के सिलेब्स से हटा दिया है। राज्य की विपक्षी पार्टी ने कहा कि भाजपा अब शिक्षा में सांप्रदायिकता घुसा रही है। हालाँकि, लेखक बंगारु रामचन्द्रप्पा की अध्यक्षता में गठित विशेषज्ञों की कमिटी ने नवंबर 2019 में ही कर्नाटक सरकार को टीपू सुल्तान को सिलेब्स से हटाने की सलाह दी थी।
यही देश का दुर्भाग्य रहा कि कांग्रेस ने वामपंथियों के साथ गठजोड़ कर, मुग़ल आक्रांताओं का इस्लामीकरण, हिन्दू तीर्थों को ध्वस्त और खूनी इतिहास को हटाकर उनको महान बता कर पढ़ने के मजबूर कर साम्प्रदायिकता फ़ैलाने वाले किस मुंह से कर्नाटक सरकार पर साम्प्रदायिकता फ़ैलाने का आरोप लगा रही है। गलत इतिहास पढ़वा कर हिन्दू-मुसलमान के बीच जो गहरी खाई खोदी है, उसे सपाट करने में कितना समय लगेगा? अयोध्या इसका ज्वलंत उदाहरण है कि खुदाई में मिले मंदिर के समस्त सबूतों को छुपाकर केवल एक ही खम्बा कोर्ट में प्रस्तुत किया। भारत में रहते और खाते यहीं का गौरवमयी इतिहास सिर्फ अपनी कुर्सी की खातिर धूमिल कर क्या देशहित का काम किया है?  

कक्षा 7 के इतिहास की पुस्तक में टीपू सुल्तान को अँग्रेजों से लड़ने वाला बताया गया था और उस समय के बाकी स्वतंत्रता सेनानियों के साथ रखा गया था। सरकार ने बताया है कि टीपू सुल्तान और हैदर अली पर आधारित उस चैप्टर को डिलीट कर दिया गया है। कहा गया है कि विशेषज्ञों की समिति ने ही ये फैसला लिया है, जिसमें सरकार ने कोई हस्तक्षेप नहीं किया है। अकादमिक दिनों की संख्या अब 220 की जगह 120 रह गई है, इसीलिए इसे हटाया गया।
कर्नाटक के कोडागु जिले में टीपू सुल्तान का कोई नाम भी नहीं सुनना चाहता है और लोग उससे घृणा करते हैं क्योंकि कोडवा (कुर्गी) लोगों का मानना है कि टीपू सुल्तान ने उसके समुदाय के हजारों लोगों को निर्ममता से मौत के घाट उतार दिया था और कइयों को जबरन इस्लाम कबूल करने के लिए बाध्य किया था। लोगों को प्रताड़ित कर के इस्लाम कबूल करने के लिए जबरदस्ती की गई थी।

मांड्या जिले के मेलकोट में भी टीपू सुल्तान से लोग नफरत करते हैं। उसने मंदिरों के इस शहर में मांड्यम अयंगर समुदाय के कई लोगों को मार डाला था। उसने दीपावली के दिन ही वहाँ कत्लेआम मचाया था। वहाँ के लोगों का दोष बस इतना था कि उन्होंने मैसूर के महाराज का समर्थन किया था और टीपू सुल्तान इससे नाराज था। कांग्रेस सत्ता में आने पर ‘टीपू जयंती’ मनाती रही है, जिसका भाजपा विरोध करती है।
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आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार भारतीय इतिहास से छेड़छाड़ सर्वविदित हैं। वामपंथियों ने बड़ी सफाई से इस्लामिक आक्रा.....
शाहीन बाग में सीएए विरोधी उपद्रवियों ने भी टीपू सुल्तान का नाम लेकर मोदी सरकार और हिंदुओं को धमकाया था। एक जिहादी कट्टरवादी ने कहा था – “सुन लो मोदी, हमारी माँ-बहनों ने टीपू सुल्तान को जन्म दिया है और तुम आजादी के 70 बाद हमसे नागरिकता का सबूत माँगते हो, कहते हो कि हमें नागरिकता रजिस्टर की प्रक्रिया से गुजरना होगा। ये लाल किला जहाँ से झंडा फहराते हो, ये क्या तुम्हारे पूर्वजों ने बनवाया? जहाँ ट्रम्प को लेकर गए थे वो ताजमहल क्या तुम्हारे पूर्वजों ने बनवाया था?”

‘सुन लो मोदी, हमारी माँ-बहनों ने टीपू सुल्तान को जन्म दिया है’

शाहीन बाग़
आर्थिक बहिष्कार की धमकी देता शाहीन बाग़ का प्रदर्शनकारी
आर.बी.एल.निगम, वरिष्ठ पत्रकार 
देश भले युद्ध स्तर पर कोरोना वायरस संक्रमण से बचने में दिन-रात एक किए हुए हो, शाहीन बाग अभी भी पब्लिक सेफ्टी पर दी जा रही सारी सलाहों को धता बता झूठ, घृणा और डर की खेती में मशगूल है। ‘जामिया वर्ल्ड’ नामक फेसबुक पेज ने एक वीडियो अपलोड किया है। यह वीडियो इस बात की बानगी है कि कैसे कुछ लोग नियम, व्यवस्था, कानून और सरकारी एजेंसियों की हरेक सलाह की नाफ़रमानी के लिए कटिबद्ध हैं। कोरोना को देखते हुए पब्लिक गैदरिंग के खिलाफ सरकार ने स्पष्ट गाइडलाइन्स जारी कर रखी हैं, इसके बावजूद न सिर्फ शाहीन बाग़ में धरना बदस्तूर जारी है बल्कि नागरिकता रजिस्टर आदि पर झूठ और घृणा फैलाने से भी बाज नहीं आ रहे।
3 मिनट 30 सेकण्ड्स लम्बे इस वीडियो में वक्ता जिहादी इस्लामिस्ट टीपू सुल्तान का जिक्र करता हुआ कहता है – सुन लो मोदी, हमारी माँ-बहनों ने टीपू सुल्तान को जन्म दिया है और तुम आजादी के 70 बाद हमसे नागरिकता का सबूत माँगते हो, कहते हो कि हमें नागरिकता रजिस्टर की प्रक्रिया से गुजरना होगा। ये लालकिला जहाँ से झंडा फहराते हो, ये क्या तुम्हारे पूर्वजों ने बनवाया? जहाँ ट्रम्प को लेकर गए थे वो ताजमहल क्या तुम्हारे पूर्वजों ने बनवाया था?
ताजमहल, क़ुतुब मीनार और लालकिला पर अपना दावा ठोंकने के बाद बोलने वाला कहता है कि तुमने शौचालय बनवाए हैं, जाओ और वहाँ से झंडा फहराओ। 



हिंसा करने की खुलेआम अपील करते हुए यह फ़सादी वीडियो में शाहीन बाग़ में धरने पर बैठे लोगों और बाकी मुस्लिमों को कहता दिखता है कि अगर तुमने बाबरी मस्जिद की शहादत को चुपचाप स्वीकार न कर लिया होता तो ये नौबत न आती, हमारी माँ-बहनों को यूँ सड़कों पर न बैठना पड़ता, आज हमारे भाई-बहनों को बेइज्जत किया जा रहा है अगर अब भी तुम बाहर न निकले तो अगला नंबर तुम्हारा होगा।
एक दूसरे वीडियो में एक दूसरा वक्ता रिलायंस और अडानी के आर्थिक बहिष्कार की अपील करते हुए कहता है कि अगर रिलायंस और अडानी को नुकसान होगा तो वह सीधे मोदी-शाह को हिट करेगा। वह आगे कहता है कि कोरोना-वोरोना सिर्फ एक साजिश है इनकी, जिससे ये हमें हमारे घरों में बंद कर सकें, हमें इससे कुछ नहीं होगा। वो लक्ष्मी की पूजा करते हैं वो डरें कोरोना से, हम लक्ष्मी की पूजा नहीं करते हमें क्या डर है इससे?
दिल्ली सरकार के कोरोना के फैलाव को रोकने के लिए हर तरह के सामुदायिक जुटाव पर रोक लगा रखी है, इसके बावजूद भी वहाँ प्रदर्शन जारी है जो सरकारी नियम कानून की खुली अवहेलना है।

टीपू सुल्तान पाठ्यक्रम में पढ़ाए जाने के काबिल नहीं, किताबों से होगा बाहर, जयंती भी नहीं मनेगी: मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा

Image result for yeddyurappa in tippu jayanti
Image result for yeddyurappa in tippu jayanti18वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में मैसूर पर राज करने वाले टीपू सुल्तान को लेकर एक बार फिर से चर्चा छिड़ गई है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने कहा है कि टीपू सुल्तान के बारे में राज्य के पाठ्यक्रम में जो भी चीजें शामिल की गई हैं, सभी को हटाया जाएगा। येदियुरप्पा ने कहा कि टीपू सुल्तान के बारे में कर्नाटक का पाठ्यक्रम में कुछ भी नहीं रहेगा। बता दें कि कर्नाटक की पूर्ववर्ती कॉन्ग्रेस सरकारें टीपू सुल्तान की जयंती मनाती रही है लेकिन येदियुरप्पा सरकार ने आते ही उस पर रोक लगा दी। अब पाठ्यक्रम से भी उसे हटाने का ऐलान किया गया है।
बीएस येदियुरप्पा ने कहा कि वो ऐसे किसी भी राय से इत्तेफ़ाक़ नहीं करते, जिनमें टीपू सुल्तान को स्वतंत्रता सेनानी बताया जाता है। इससे पहले मुख्यमंत्री ने कन्नड़ एंड कल्चरल डिपार्टमेंट को आदेश दिया था कि टीपू सुल्तान की जयंती नहीं मनाई जाए। जुलाई के अंतिम हफ्ते में हुई कैबिनेट मीटिंग में कर्नाटक सरकार ने इस फ़ैसले पर मुहर लगा दी थी। मुख्यमंत्री का कहना है कि टीपू सुल्तान पाठ्यक्रम में पढ़ाए जाने के काबिल नहीं है।
इससे पहले भाजपा विधायक अप्पाचु रंजन ने एक पत्र लिख कर कर्नाटक के सिलेबस से टीपू सुल्तान से जुड़ा चैप्टर हटाने की माँग की थी। इसके बाद राज्य के शिक्षा मंत्री सुरेश कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि टीपू सुल्तान से जुड़े चैप्टर को हटाने को लेकर रिपोर्ट तैयार की जाए। कर्नाटक टेक्स्ट बुक सोसाइटी के मैनेजिंग डायरेक्टर को पत्र लिख कर मंत्री ने विधायक रंजन के साथ बैठक कर उनका पक्ष सुनने और उस पर विचार करने को कहा था। उन्होंने हिस्ट्री टेक्स्ट बुक ड्राफ्टिंग कमिटी की बैठक बुला कर इस चैप्टर की समीक्षा के निर्देश दिए थे।

भाजपा विधायक रंजन ने कहा कि टीपू सुल्तान ने हजारों ईसाईयों व कोडवा समुदाय के लोगों को जबरन इस्लाम कबूल करवाया था। साथ ही उन्होंने बताया कि टीपू ने अपने शासनकाल के दौरान फ़ारसी को आधिकारिक भाषा का दर्जा दिया था। साथ ही उन्होंने टीपू सुल्तान के स्वतंत्रता सेनानी होने के दावों का भी खंडन किया। उन्होंने कहा कि बिना इतिहास के तथ्यों को जाने हुए उसके नाम को पाठ्यक्रम में घुसेड़ दिया गया और उसे जबरदस्ती महिमामंडित किया गया। विधायक ने बताया कि इस चैप्टर में लिखी गई बातें झूठ हैं।