Showing posts with label CEO. Show all posts
Showing posts with label CEO. Show all posts

3250 करोड़ रूपए का घोटाला होगा और “गिरफ़्तारी” भी नहीं हो सकती, क्यों ?

सुभाष चन्द्र

ICICI बैंक की पूर्व CEO और MD चंदा कोचर और उनके पति दीपक कोचर के 3250 करोड़ के Videocon Loan Fraud Case में बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस रेवती मोहिते खेरे और जस्टिस पीके चह्वाण ने पहले 9 जनवरी, 2023 को दोनों अंतरिम जमानत देते हुए CBI को फटकार लगाईं कि उनकी गिरफ़्तारी कानून के प्रावधानों के अनुरूप नहीं की गई। गिरफतारी का आधार केवल जांच में “असहयोग एवं पूरी तरह जानकारी न देना बताया गया” जबकि यह गिरफ़्तारी का पर्याप्त कारण नहीं माना जा सकता

लेखक 
अब 6 फरवरी को बॉम्बे हाई कोर्ट की जस्टिस अनुजा प्रभुदेसाई और जस्टिस NR Borkar की पीठ ने जनवरी, 2023 के अंतरिम जमानत के आदेश की पुष्टि कर दी और कहा कि कोचर दंपति की गिरफ़्तारी CRPC के section 41 A और section 46 के अनुपालन न करने की वजह से गैर कानूनी थी

CRPC का section 41 पुलिस के सामने पेश होने के नोटिस देने की बात करता है और section 46 वर्णन करता है गिरफ़्तारी किस तरह की जाए यानी इन दो छोटे छोटे तकनीकी मुद्दों पर पहले हाई कोर्ट के 2 जजों ने जमानत दे दी और अब अन्य 2 जजों ने सवा साल लगा दिया उस आदेश की पुष्टि करने के लिए जिसकी मेरे विचार में कोई आवश्यकता थी ही नहीं

पहले 9 जनवरी को कोचर दंपति को जमानत दी गई थी हाई कोर्ट से और उसके बाद 21 जनवरी, 2023 को Videocon के मालिक वेणुगोपाल धूत को भी जमानत दे दी गई थी

लेकिन अचरज की बात है कि सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस बेला त्रिवेदी की पीठ ने CBI से 11 अक्टूबर, 2023 को इस बात के लिए नाराज़गी जताई थी कि वह (CBI) कोचर दंपति की अंतरिम जमानत को बार बार बढ़ाने का विरोध क्यों नहीं कर रही जबकि CBI ने बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की हुई थी इसका मतलब यह भी निकलता है कि सुप्रीम कोर्ट की नज़र में एक तरह कोचर दंपति को अंतरिम जमानत देना गलत था जबकि हाई कोर्ट एक के बाद एक फैसले में कोचर दंपति को राहत दे रहा है

इतने बड़े घोटाले को भी लगता है बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक तरह दबाने की कोशिश की है 3250 करोड़ रुपए की रकम कोई छोटी रकम नहीं होती जो Technical Issues पर हाई कोर्ट के जज आरोपियों की गिरफ़्तारी भी रोकने के लिए आमादा हो गए Technicalities में कमी रह गई, तो उन्हें पूरा करने के लिए कहा जा सकता है न कि गिरफ़्तारी को ही अवैध बता दिया जाये

Any person of prudent mind can reach at a conclusion that some corrupt practices are going on in the high court to protect the culprits - यदि कोई समझे कि बड़े पैमाने पर हाई कोर्ट में “न्यौछावर” चल रही है तो कुछ गलत नहीं होगा 3250 करोड़ के मामले में कुछ भी हो सकता है

कोचर दंपति के वकील ने अपनी दलील में कहा कि वह FIR रद्द करने की मांग नहीं कर रहे, अभी वह केवल गिरफ्तारी को अवैध कह रहे हैं कल को हाई कोर्ट के जज कोई नया Technical Ground तलाश कर सारा केस ही ख़त्म करने के आदेश दे सकते हैं

जिस तरह कोचर दंपति का यह “fraud case” बॉम्बे हाई कोर्ट डील कर रहा है, वह निंदनीय है सुप्रीम कोर्ट को चाहिए कि वह तुरंत संज्ञान ले कर उन सभी आरोपियों की जमानत खारिज करे जिन्होंने जनता के पैसे को लूटा है अदालत इस तरह प्रधानमंत्री मोदी के भ्रष्टाचार पर उठाए जा रहे क़दमों में रोड़े बिछाने का काम न करे।(लेखक के निजी विचार हैं)

मालदीव को झटके पर झटका, ‘EaseMyTrip’ ने बंद की फ्लाइट बुकिंग: 8 हजार+ लोग करा चुके हैं होटल बुकिंग रद्द, 2500 टिकट भी कैंसिल

(चित्र साभार: EaseMyTrip & NewsMagzine)
देश की बड़ी ऑनलाइन ट्रैवल कम्पनी EaseMyTrip ने मालदीव को बड़ा झटका दिया है। इसके फाउंडर और सीईओ ने कहा है कि वह अपने पोर्टल से मालदीव की फ्लाइट टिकट बुकिंग बंद कर रहे हैं। EaseMyTrip ने यह निर्णय मालदीव के मंत्रियों के भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर की गई अपमानजनक टिप्पणियों के बाद लिया है।

EaseMyTrip के सीईओ और फाउंडर निशांत पिट्टी ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “अपने देश के साथ मजबूती से खड़े होते हुए EaseMyTrip ने मालदीव की सभी फ्लाइट बुकिंग को निलंबित कर दिया है।” EaseMyTrip भारत में ऑनलाइन ट्रैवल बाजार का बड़ा खिलाड़ी है।

EaseMyTrip की देश के ऑनलाइन ट्रैवल बाजार में लगभग 10% की हिस्सेदारी है। यह बाजार 1.5 लाख रूपए करोड़ का है। EaseMyTrip के इस कदम के बाद अन्य ट्रैवल कम्पनियों पर भी दबाव पड़ रहा है कि वह ऐसे ही कदम उठाएँ।

हाल ही में मालदीव की मुइज़्ज़ू सरकार में मंत्री मरियम शिनुआ, मालशा शरीफ और अब्दुल्ला मह्जूम समेत पार्टी के अन्य सदस्यों ने भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ काफी अपमानजनक टिप्पणियाँ की थीं। इनकी यह अभद्रता प्रधानमंत्री मोदी के लक्षद्वीप दौरे की तस्वीरें डालने के बाद सामने आई थी।

इनकी अपमानजनक टिप्पणियों के कारण भारत में मालदीव के प्रति उबाल आ गया और लोगों ने मालदीव के इस रवैये की आलोचना की। एक्स (पहले ट्विटर) पर भी इसको लेकर लगातार अभियान चलाया गया। भारत ने प्रधानमंत्री मोदी के प्रति की गई टिप्पणियों को राजनयिक स्तर पर भी मालदीव के साथ उठाया।

भारत के नाराज होने के बाद मालदीव की सरकार ने इन मंत्रियों को निलंबित कर दिया था और साथ ही एक बयान जारी करके कहा था कि मालदीव की सरकार ऐसे बयानों का समर्थन नहीं करती है और यह इन व्यक्तियों के निजी मत हैं। मालदीव के दो पूर्व राष्ट्रपति और मालदीव की राजनीतिक पार्टियों ने भी मुइज्जू सरकार के मंत्रियों की आलोचना की थी।

प्रधानमंत्री मोदी के ऊपर अपमानजनक टिप्पणियाँ करने के कारण कई बॉलीवुड सितारों और बड़ी हस्तियों ने ने मालदीव के रवैये की आलोचना की थी। कई बॉलीवुड सितारों ने लक्षद्वीप को बढ़ावा देने वाले ट्वीट किए थे और साथ ही खुद भी जाने की बात कही थी।

उधर भारतीयों के गुस्से का असर मालदीव पर लगातार पड़ रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, अब तक लगभग 2500 फ्लाइट और 8 हजार से ज्यादा होटल बुकिंग भारतीय रद्द कर चुके हैं। यह आँकड़ा अभी और बढ़ सकता है।

‘जब चाहे मालिक करेगा सेक्स, गुलाम को झुकना पड़ेगा’ : CEO ने महिला कर्मचारी से साइन कराया कॉन्ट्रैक्ट

                       यूएस कंपनी के सीईओ ने कर्मचारी से साइन कराया स्लेव कॉन्ट्रैक्ट
सैन फ्रांसिस्को टेक कंपनी का जो यौन उत्पीड़न मामला सामने आया है, कोई नयी अथवा हैरान करने वाली नहीं। सैन फ्रांसिस्को टेक कंपनी ने तो कॉन्ट्रैक्ट साइन करवाया है, लेकिन विश्व में न जाने ऐसे कितने संस्थान है, जहाँ यौन उत्पीड़न सामान्य बात है। महिला उसे नौकरी का हिस्सा मान मालिक के हर काम को करने को तैयार रहती है। अंतर केवल इतना है कि किसी का प्रकाश आ जाता है, कहीं संस्थान से बाहर हवा तक नहीं आती। कर्मचारियों को अपने परिवार की खातिर मान-मर्यादा को भूलना पड़ता है, और इस कटु सच्चाई से कोई इंकार नहीं कर सकता, चर्चा तक नहीं कर सकता। 

सैन फ्रांसिस्को टेक कंपनी ‘Tradeshift’ के सीईओ क्रिश्चियन लैंग पर आरोप लगा है कि वो अपने असिस्टेंट से एक कॉन्ट्रैक्ट साइन करवाकर उसका यौन उत्पीड़न करते थे। आरोप है कि क्रिश्चियन ने अपनी एग्जिक्यूटिव असिस्टेंट को हायर करने के कुछ महीने बाद ही गुलाम बनाने का ये कॉन्ट्रैक्ट साइन करवाया था।

पीड़िता का नाम कोर्ट डॉक्यूमेंट में जेन डो कहा गया है। उसने अपनी शिकायत में कहा कि उसका रेप सालों से किया जा रहा था। पीड़िता ने कहा कि उसे विभिन्न तरीरकों से शारीरिक दर्द दिए गए। कभी उसके ऊपर पेशाब किया गया तो कभी विदेशी चीजों को उसके प्राइवेट पार्ट में डाला जाता था।

कॉन्ट्रैक्ट के अनुसार ‘स्लेव’ को हमेशा अपने मालिक के लिए सेक्सुअल फेवर देने के लिए उपलब्ध रहना था, जब भी उसके मालिक को सेक्स की जरूरत लगती तो कॉन्ट्रैक्ट के हिसाब से वो उन्हें नहीं मना कर सकती थीं चाहे उसका मन हो या नहीं। इतना ही नही कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक लड़की को ये भी करने को कहा गया था कि वो जब भी अपने मालिक को अकेले में देखें तो घुटनों पर झुककर उनसे पूछे कि वो उनके लिए क्या कर सकती है।

                                                                                                  साभार: NYTimes

दस्तावेज में कहा गया था महिला को गुलाम बनाकर दी जाने सजाओं का भी जिक्र था। इसमें लिखा था कि मालिक जो चाहे वो सजा गुलाम को दे सकता है। लेकिन मालिक की ये जिम्मेदारी होगी कि वो सजा देते समय महिला को जान से नहीं मारेगा और न उसे पर्मानेंट इंजरी देगा। इतना ही नहीं कॉन्ट्रैक्ट में ये भी था गुलाम कैसे भी करके इन सजाओं को पाकर नाराज नहीं हो सकती थी और न ही अपने मालिक से नाराजगी जाहिर कर सकती थी।

महिला ने शिकायत में कहा कि उसे लैंग ने खून निकालने तक मारा और निर्जीव वस्तुओं के जरिए उसका उत्पीड़न किया। उसे कॉन्ट्रैक्ट में कहा गया था कि वो हमेशा ढंग से तैयार होकर रहे और खुद का वजन 130 से 155 पाउंड रखे। इसके अलावा गुलाम का समर्पण मालिक के प्रति हर प्रकार से रहना चाहिए। उसका शरीर मालिक का होना चाहिए। वो अगर उसे फिट देखना चाहता है तो शरीर को फिट ही होना चाहिए।

                                                                                                                      साभार: NYTimes

कोर्ट में दी शिकायत के अनुसार, महिला को अपनी जॉब Tradeshift में प्यारी थी इसलिए उसे ये सब करना पड़ा। बाद में उसने शारीरिक प्रताड़नाओं से तंग आकर शिकायत दी। इस शिकायत के बाद ट्रेडशिफ्ट ने अपने ऊपर लगाए इल्जामों को नकारा और कड़ा निर्णय लेते हुए क्रिश्चियन को उसके पद से टर्मिनेट कर दिया। मेल में कंपनी ने कहा कि लैंग के विरुद्ध बहुत सारी शिकायतें मिल रही थीं।

वहीं लैंग ने कहा कि उन दोनों के बीच बने संबंध रजामंदी के थे न कि किसी जोर जबरदस्ती के। उसने कोर्ट में डाली गई शिकायत पर को मानहानि करने वाला बताया। उसने कहा पूरा मुकदमा झूठा है। उसके मुताबिक सीईओ रहते हुए उसने किसी का यौन उत्पीड़न नहीं किया। महिला से संबंध थे लेकिन वो पहले के थे। उसके कंपनी ज्वाइन करने के बाद वो सब खत्म हो गया।

कई लोगों को क्रिश्चियन लैंग की हरकत देखने के बाद फिफ्टी शेड्स ऑफ ग्रे फिल्म की स्क्रिप्ट याद आ रही है। इस फिल्म में भी एक बिजनेसमैन ने महिला को सेक्स के लिए कॉन्ट्रैक्ट साइन करने को कहा था।

एलन मस्क अब नहीं खरीदेंगे Twitter : कहा- कंपनी बार-बार छुपा रही सूचनाएँ, 79 अरब रूपए का हो सकता नुकसान

एलन मस्क और Twitter समझौता
टेस्ला (Tesla) कंपनी के मालिक और दुनिया के सबसे धनी व्यक्ति एलन मस्क (Elon Musk) ने 8 जुलाई 2022 को सोशल मीडिया साइट ट्विटर (Twitter) की डील को रद्द करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि कंपनी ने विलय (Merger) के कई प्रावधानों का उल्लंघन किया है। वहीं, ट्विटर ने इस पर कानूनी कार्रवाई करने की बता कही है।

मस्क ने कहा कि वह सौदे से इसलिए भी अलग हो रहे हैं, क्योंकि ट्विटर ने कंपनी के उच्च अधिकारियों और एक तिहाई प्रतिभा अधिग्रहण टीम को निकाल दिया, जो कि ‘वर्तमान व्यावसायिक संगठन के भौतिक घटकों को काफी हद तक संरक्षित करने’ के अपने दायित्व का ट्विटर द्वारा उल्लंघन है।

मस्क ने अप्रैल 2022 में माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर के 100% शेयर खरीदने के लिए $54.20 (करीब 4000 रुपए) प्रति शेयर के हिसाब से भुगतान करने का ऑफर दिया था, जिसकी कुल कीमत करीब 44 बिलियन डॉलर (करीब 3400 अरब रुपए) है। बाद में यह सौदा तय हो गया था।

मस्क द्वारा विलय से पीछे हटने के बाद ट्विटर के चेयरमैन ब्रेट टेलर ने माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म पर कहा कि बोर्ड ने विलय समझौते को लागू करने के लिए कानूनी कार्रवाई करने की योजना बनाई है। उन्होंने कहा, “ट्विटर बोर्ड श्री मस्क के साथ सहमत मूल्य और शर्तों पर लेनदेन को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है और विलय समझौते को लागू करने के लिए कानूनी कार्रवाई करने की योजना बना रहा है। हमें विश्वास है कि हम डेलावेयर कोर्ट ऑफ चांसरी में जीत हासिल करेंगे।”

एक फाइलिंग में मस्क के वकीलों ने कहा कि ट्विटर प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नकली या स्पैम खातों की जानकारी के लिए कई अनुरोधों का जवाब देने में विफल रहा या मना कर दिया। यह किसी भी कंपनी के व्यवसायिक प्रदर्शन के लिए प्रमुख है।

अंतरराष्ट्रीय न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, फाइलिंग में कहा गया है, “ट्विटर उस समझौते के कई प्रावधानों का उल्लंघन कर रहा है। ऐसा लगता है कि उस गलत और भ्रामक जानकारियों पर विश्वास करके मस्क ने विलय समझौता किया था।”

मस्क की घोषणा के बाद ट्विटर के शेयर में गिरावट जारी है। कारोबार के दिन ट्विटर के शेयर 6% गिरकर 34.58 डॉलर पर पहुँच गए। यह मस्क द्वारा अप्रैल में प्रति शेयर $54.20 भुगतान करने की सहमत मूल्य से 36% कम है। हालाँकि, जब मस्क द्वारा ट्विटर के अधिग्रहण की खबर आई तो शेयरों में उछाल देखने को मिला, लेकिन जल्दी ही इस सौदे पर छाए ग्रहण को लेकर शेयरों में बिकवाली शुरू हो गई।

मई में मस्क में ट्विटर के अधिग्रहण के डील को होल्ड कर दिया था। मस्क का कहना था कि यह डील तब तक होल्ड पर रहेगा, जब तक कि कंपनी यह साबित नहीं कर देती कि प्लेटफॉर्म के कुल यूजर में स्पैम बोट 5 प्रतिशत से कम हैं।

मस्क द्वारा सौदे से पीछे हटने के बाद उन्हें 1 बिलियन डॉलर (लगभग 79.33 अरब रुपए) की पेनाल्टी देनी पड़ सकती है। विलय समझौता पत्र के अनुसार, अगर मस्क इस सौदे पर पूरा नहीं करते हैं या उससे अलग होते हैं तो उन्हें ट्विटर को 79.33 अरब रुपए देना होगा।