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योगी ने मुस्लिम बहुल मलेरकोटला को जिला बनाने की घोषणा पर पंजाब मुख्यमंत्री को लताड़ा, कहा- कांग्रेस अपना रही विभाजनकारी नीति

पार्टी की इतनी दुर्दशा होने पर भी कांग्रेस अपनी विघटनकारी नीति से बाज नहीं आ रही। सत्ता लोलुप्ता के लिए देश कितने प्रदेश बना दिए। उस पर दावा कि हम देशभक्त हैं। जनहित के नाम पर एक राज्य को दो हिस्सों में बांट दिया। जब नेता एक छोटे से राज्य को नहीं संभल सकता, देश को क्या संभालेगा? एक समय था, जब किसी विदेशी मेहमान का दिल्ली का प्रथम नागरिक यानि महापौर स्वागत करता था, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने उस नियम को केवल इसलिए बदल दिया कि विपक्ष पार्टी यानि जनसंघ पार्टी से महापौर विदेशी मेहमान का क्यों स्वागत करे। 
दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित इंदिरा से आगे निकल गयी, उन्होंने दिल्ली नगर निगम को ही तीन हिस्सों में विभाजित कर दिया। जब तक देश धर्म और जाति के नाम पर विभाजित होता रहेगा, देश क्या विकास करेगा। दरअसल आज जनसेवा एक व्यापार बन गयी है, और जनता इन बहरूपियों के मकरजाल में फंस रही है। 
14 मई को पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने घोषणा की कि मलेरकोटला को पंजाब का 23वाँ जिला बनाया जाएगा। पंजाब की कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा मुस्लिम बहुल क्षेत्र को अलग जिला बनाए जाने पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पंजाब सरकार की आलोचना की और कहा कि मलेरकोटला का गठन किया जाना कॉन्ग्रेस की विभाजनकारी नीति का परिचायक है।

मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने ट्वीट करके कहा कि मत और मजहब के आधार पर किसी भी प्रकार का विभेद भारत के संविधान की मूल भावना के विपरीत है और साथ ही यह भी कहा कि मलेरकोटला का गठन कॉन्ग्रेस की विभाजनकारी नीति का परिचायक है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बयान तब आया जब पंजाब सरकार द्वारा ईद के दिन एक मुस्लिम बहुल इलाके को नया जिला बनाने की घोषणा की गई।

मुस्लिम बहुल कस्बा मलेरकोटला अब तक संगरूर जिले का हिस्सा था। यह संगरूर जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। नए जिले की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने कहा कि मैं जानता हूँ कि यह लंबे समय से लंबित माँग रही है। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के वक्त पंजाब में 13 जिले थे। सिंह ने कहा कि मलेरकोटला शहर, अमरगढ़ और अहमदगढ़ नए जिले की सीमा में आएँगे। मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने ट्वीट करके कहा था कि ईद-उल-फ़ितर के मौके यह साझा करते हुए खुशी हो रही है कि मलेरकोटला पंजाब का एक नया जिला बनाया जाएगा। यह पंजाब का 23वाँ जिला होगा।

वर्चुअल कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा था कि उनकी ईद के मौके पर मलेरकोटला में आने की बहुत इच्छा थी, लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण वह आ नहीं सके। उन्होंने कहा था कि मलेरकोटला पटियाला रियासत का हिस्सा रहा है और उनके बुज़ुर्गों के मलेरकोटला के नवाब के साथ बहुत अच्छे संबंध रहे हैं। उन्होंने मलेरकोटला के विकास के लिए 6 करोड़ रुपए का अनुदान देने की भी घोषणा की थी।

‘सरकारी खजाने से प्रशांत किशोर को वेतन’: सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार से माँगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत किशोर को पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का ‘प्रधान सलाहकार’ नियुक्त किए जाने के विरोध में दायर याचिका को लेकर मई 6, 2021 को पंजाब सरकार को नोटिस जारी किया। याचिका में प्रशांत किशोर की नियुक्ति और उन्हें सरकारी खजाने से वेतन तथा सुविधाएँ दिए जाने पर आपत्ति जताई गई है।

कुछ समय पहले पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को अपने प्रमुख सलाहकार के तौर पर नियुक्त किया था। पंजाब सरकार की ओर से जारी आदेश में बताया गया था कि प्रशांत किशोर अपनी सैलरी के तौर पर सिर्फ एक रुपया लेंगे। इसके अलावा उन्हें प्राइवेट सेक्रेटरी, पर्सनल असिस्टेंट, डाटा एंट्री ऑपरेटर, एक क्लर्क और दो चपरासी दिए जाएँगे। किशोर को राज्य ट्रांसपोर्ट कमिश्नर की ओर से वाहन मुहैया कराया जाएगा और उनके आतिथ्य के लिए प्रति माह 5000 रुपए खर्च किए जाएँगे।

कुछ दिन पहले इसी याचिका को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने ये कहते हुए खारिज कर दिया था कि सीएम को पूरा अधिकार है कि वे जिसे चाहें उसे अपना सलाहकार चुने। इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। 

सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनाई जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस हेमंत गुप्ता की बेंच ने की। पंजाब सरकार समेत सभी पक्षकारों को नोटिस जारी कर 4 हफ्ते में जवाब माँगा गया है। याचिकाकर्ता के वकील ने अपनी दलील में कहा कि पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने उनके केस में तथ्यों को ठीक से नहीं सुना और उनकी याचिका खारिज कर दी गई।

इस केस में लभ सिंह और सतिंदर सिंह ने पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस याचिका में प्रशांत किशोर की प्रधान सलाहकार पद पर नियुक्ति को निरस्त करने की अपील की गई थी।

अपनी याचिका में याचिकाकर्ताओं ने अनुच्छेद 16(1) का हवाला देते हुए कहा था कि राज्य सरकार के कार्यालय में कोई भी अपॉइंटमेंट, इससे (अनुच्छेद में निहित प्रावधानों) अलग नहीं हो सकता। इस आर्टिकल में हर नागरिक को रोजगार में अवसर की समानता और नियुक्ति का अधिकार है। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि राज्य सरकार के लिए ये जरूरी है कि वो ऐसी नियुक्ति के लिए कोई विज्ञापन निकाले, क्योंकि याचिकार्ता समेत भारी तादाद में पढ़े-लिखे समझदार लोग राज्य में बैठे हैं।

याचिका में ये भी कहा गया था कि किशोर की नियुक्ति मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार पद पर होगी। इस तरह उन्हें कैबिनेट मंत्री का पद मिल जाएगा। उन्हें वेतन और अन्य सुविधाएँ राज्य के खजाने से दिया जाएगा।

कांग्रेस का चुनावी वादा: किसान हित से नहीं सरोकार, बिचौलियों को बचाने के लिए है ये प्रदर्शन

कृषि कानूनों के खिलाफ राज्य के बिल को राष्ट्रपति की संस्तुति नहीं मिलने पर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट जाने की चेतावनी दी है। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि वह किसानों और बिचौलियों के बीच के सदियों पुराने रिश्ते को तोड़ने की कोशिश कर रही है। अपने बयान में पंजाब के मुख्यमंत्री ने आढ़तियों और किसानों के बीच के संबंध को पुराना और आजमाया हुआ बताया।

उन्होंने कहा, “अगर भारत के राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद राज्य संशोधन विधेयकों को स्वीकृति नहीं देते हैं, तो हम सर्वोच्च न्यायालय में जाएँगे।” कैप्टन ने कहा कि राज्यपाल ने अभी भी राज्य संशोधित विधेयकों को राष्ट्रपति के पास नहीं भेजा है। विधानसभा ने इसे पारित किया है, लेकिन यह दुखद है कि शिरोमणि अकाली दल और आम आदमी पार्टी ने इस मुद्दे पर राजनीतिक खेल खेलना शुरू कर दिया है।

अमरिंदर सिंह का यह बयान साफ बताता है कि वह खुले तौर पर आढ़तियों के पक्ष से बात कर रहे हैं। उनकी पार्टी कांग्रेस जो कुछ समय पहले तक किसान हित का राग अलाप रही थी, उसके लिए भी किसान हित दूसरे नंबर की बात हो गई है। पूरी पार्टी आढ़तियों के पक्ष से बोलने लगी है। पंजाब के फूड एंड सप्लाई मिनिस्टर भरत भूषण आशु ने 13 मार्च को कहा था कि किसानों को ‘आढ़तियों के जरिए डायरेक्ट पेमेंट’ जाएगी।

साल 2012 में भी केंद्र में बैठी यूपीए सरकार ने किसानों को प्रत्यक्ष भुगतान करने की बात का सुझाव दिया था। हालाँकि, स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने तब भी इसका विरोध किया था। उस समय राज्य में SAD-BJP की गठबंधन सरकार थी। तब केंद्रीय मंत्री व पटियाला की सांसद परणीत कौर, संगरूर के सांसद विजयेंद्र सिंगला और अन्य कांग्रेस सांसदों ने राज्य आढ़ती संघ के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए उपभोक्ता मामलों के तत्कालीन केंद्रीय मंत्री केवी थॉमस से मुलाकात की थी। उस समय भी इन सबने मिलकर केंद्रीय सरकार के सामने आढ़तियों के पक्ष में आवाज उठाई थी। तब कहा गया था कि बिना आढ़तियों के पंजाब में खाद्यान्नों की खरीद के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। वर्तमान व्यवस्था को समाप्त करने से केवल किसानों को परेशानी होगी।

आज 9 साल बाद ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ भी नहीं बदला है। बस बदला है तो किसान संघ का मत। किसान यूनियन ने उस समय कांग्रेस नेताओं के विरुद्ध आवाज उठाई थी, क्योंकि वे आढ़तियों के समर्थन में थे। 

भारतीय किसान यूनियन के राज्य अध्यक्ष बूटा सिंह ने कहा था, “कांग्रेस को स्पष्ट होना चाहिए। ये पलटा-पलटी क्यों? कई बार पार्टी ने सिस्टम को खत्म करने के लिए आवाज उठाई। अब ये उन्हीं आढ़तियों का समर्थन कर रहे जो कमीशन के नाम पर किसानों को लूटते हैं।”

किसान संघ के राज्य अध्यक्ष सतनाम सिंह ने कहा था, “जब कैप्टन अमरिंदर सिंह मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने हमें आश्वासन दिया था कि वे किसानों के साथ दु:ख-दर्द दूर करने की बात करेंगे। पिछले दिनों भी कांग्रेस ने समर्थन दिया था। अब ये यू-टर्न जरूर आढ़तियों की लॉबी के कारण लिया गया है, क्योंकि उनके पास पैसे की ताकत है।”

मालूम हो कि साल 2016 में चुनाव कैंपेन के समय अमरिंदर सिंह ने कहा था कि राज्य में कांग्रेस सरकार बनने पर आढ़ती सिस्टम को समाप्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस  सरकार कोई ऐसा फैसला नहीं लेगी और न ही व्यापार के साथ अन्य समुदायों से जनादेश लिए बिना नई नीति बनाएगी।

2018 में पंजाब सरकार आढ़तियों को रेगुलेट करने के लिए एक विधेयक लाई थी, जिससे पार्टी में काफी बहस हुई। हालाँकि, अब अमरिंदर सिंह किसानों और आढ़तियों के बीच के संबंध को पुराना व आजमाया हुआ बता रहे हैं, जबकि उनके एक विधायक ने खुद कहा था कि एक समय में किसानों और कमीशन एजेंट्स में अच्छी तालमेल थी, लेकिन अब परिदृश्य बदल चुके हैं।

जब से नए कृषि कानूनों पर विरोध शुरू हुआ है, कांग्रेस पार्टी पूरी तरह से आढ़तियों के साथ है। पंजाब के मुख्यमंत्री तो केंद्र सरकार पर इल्जाम लगा चुके हैं कि वह आढ़तियों पर आईटी रेड जैसे नए-नए हथकंडे आजमाकर उन्हें डरा रही है।

आढ़तियों को लेकर किसानों में गुस्सा और नाराजगी बहुत पुरानी बातें हैं। नोटबंदी के समय इन्हीं आढ़तियों को लेकर एक किसान ने कहा था, “ जब हम अपने पैसे के लिए या ऋण या अग्रिम भुगतान के लिए इन आढ़तियों के पास जाते हैं, तो वे हमें पूरे दिन बैठाए रखते हैं चाहे बात 5,000 रुपए की ही हो। वे हमसे उम्मीद कैसे करते हैं कि हम उनके काले धन को रातोंरात सफेद में बदल दें?”

आज भले ही किसान के नाम पर किसान आंदोलन भड़काया जा रहा हो। लेकिन हकीकत यही है कि ये प्रदर्शन सिर्फ़ और सिर्फ़ बिचौलियों के लिए किया जा रहा है। हाल में आया पंजाब मुख्यमंत्री का बयान केवल इस प्रदर्शन का एक विस्तार है।

किसान आंदोलन : ‘…केजरीवाल अपनी आत्मा तक बेच देंगे’: अमरिंदर सिंह, पंजाब मुख्यमंत्री

केंद्र सरकार के तीनों कृषि कानूनों को लेकर चल रहे ‘किसान आंदोलन’ का क्रेडिट लेने के लिए आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस में होड़ मची हुई है। दिल्ली और पंजाब, दोनों ही राज्यों के मुख्यमंत्री आपस में लड़ रहे हैं। दिसंबर 14, 2020 को अरविंद केजरीवाल ने किसान संगठनों के ऐलान का समर्थन करते हुए अपनी पार्टी के नेताओं के साथ उपवास रखा। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने उन पर निशाना साधा।

पंजाब मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरा पंजाब जानता है कि वो प्रवर्तन निदेशालय (ED) या किसी भी अन्य एजेंसियों के केस से डरने वाले नहीं हैं। वहीं, उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल तो अपनी आत्मा तक बेच देंगे, अगर इससे उनके राजनीतिक स्वार्थ की पूर्ति होती हो। उन्होंने दिल्ली मुख्यमंत्री से कहा कि अगर आपको लगता है कि आपके ‘ड्रामे’ से किसान आपके पक्ष में जाएँगे, तो ये आपकी ग़लतफ़हमी ही है।

अमरिंदर ने जो केजरीवाल पर "आत्मा तक बेच देंगे" का आरोप लगाया है, केवल आरोप नहीं सच्चाई है। ज्ञात हो, पहली पर मुख्यमंत्री बनने पर केजरीवाल ने कहा था कि 'अपने बच्चों की कसम खाकर कहा था कांग्रेस से समर्थन नहीं लूंगा', लेकिन ले लिया कांग्रेस का समर्थन। यानि जो अपने ही बच्चों का नहीं हुआ, किसी अन्य का क्या होगा? दूसरे, पंजाब के मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से केंद्र के बिलों को मानने से मना कर दिया था, परन्तु केजरीवाल ने लागू कर दिया, तथाकथित किसानों की सहानुभूति बटोरने आंदोलन को समर्थन देना, क्या सिद्ध करता है, केजरीवाल का दोहरा चरित्र एवं चाल? 

कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने ट्विटर पर दिल्ली की AAP सरकार को याद दिलाया कि उसने नवंबर 23, 2020 को ही केंद्र सरकार के कृषि कानूनों को दिल्ली गैजेट के माध्यम से अधिसूचित कर दिया था। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि पूरे पंजाब को पता है कि केजरीवाल ने किसानों के हित को बेच दिया है। उन्होंने केजरीवाल से पूछा कि आप पर मोदी सरकार का कौन सा दबाव था, जो आपने ऐसा किया? हालाँकि, इसके बाद केजरीवाल ने भी उन पर पलटवार किया।

अरविन्द केजरीवाल और अमरिंदर सिंह की ट्विटर लड़ाई में दोनों के अहंकार पर जनता भी प्रहार करने से नहीं चूक रही, एक ट्विटर ने तो इन दोनों के झगडे को सास-बहु के झगडे का नाम दे दिया :- 

AAP के मुखिया ने कहा कि रिकार्ड्स ये कहते हैं कि कैप्टेन अमरिंदर सिंह भी उस समिति का हिस्सा थे, जिसने इन कृषि कानूनों का मसौदा तैयार किया था। उन्होंने दावा किया कि अमरिंदर सिंह के पास इन कानूनों को रोकने की शक्ति थी। साथ ही उन्होंने पूछा कि जब इन कानूनों को लेकर केंद्र तैयारियाँ कर रहा था, तब आप मोदी सरकार के साथ क्यों थे? केजरीवाल ने इसे पूंजीपतियों का कानून बताते हुए दावा किया कि इससे महँगाई दोगुनी हो जाएगी।

कभी-कभी सच्चाई भी स्वतः जबान पर आ ही जाती है, आप नेता संजय सिंह भी अप्रत्यक्ष रूप से स्वीकार कर रहे हैं कि इस लड़ाई में जीत भारत के लाल की ही होगी, क्योकि किसानों के नाम पर इस जमावड़े में किसान कम और दलाल एवं अराजक तत्वों की भरमार है। क्या इससे पूर्व हुए किसान आंदोलनों में क्या जिम, मसाज, मेवा, पिज़ा एवं अन्य स्वादिष्ट भोजन की व्यवस्था नहीं देखी गयी?  

इसके बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने दावा कि समिति की किसी भी बैठक में इन कृषि कानूनों को लेकर विचार-विमर्श हुआ ही नहीं था। उन्होंने दिल्ली CM पर लगातार झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए कहा कि केजरीवाल का भाजपा के साथ गठजोड़ है। उन्होंने कहा कि भाजपा उन पर आरोप नहीं लगा सकती, क्योंकि उसे आपके साथ गठजोड़ को छिपाना है। वहीं केजरीवाल ने इन कानूनों को ‘जनता को कैप्टेन का गिफ्ट’ करार दिया।

ये पहली बार नहीं है, जब सोशल मीडिया पर दोनों के बीच झड़प हुई हो। किसान आंदोलन को लेकर दोनों पहले भी लड़ चुके हैं। जब अमरिंदर सिंह ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी, तब भी AAP उन पर हमलावर हो गई थी और ‘दिल्ली दरबार में हाजिरी’ लगाने का आरोप मढ़ा था। कॉन्ग्रेस की परेशानी ये है कि दिल्ली सरकार प्रदर्शनकारियों को जो सुविधा दे रही है, ऐसे में उसकी मेहनत बेकार न चली जाए।

पंजाब में राजनीति चमकाने की इच्छा रखने वाले केजरीवाल वहाँ के मामलों में हस्तक्षेप करते रहते हैं। जुलाई-अगस्त 2020 में जब जहरीली शराब के कारण हूच में 100 से अधिक लोग मारे गए थे, जिसके बाद केजरीवाल ने इस काण्ड की सीबीआई जाँच की माँग की थी। अरविंद केजरीवाल को आड़े हाथों लेते हुए अमरिंदर सिंह ने एक बयान में आरोप लगाया कि, इतने सारे लोग मारे गए हैं और अरविंद केजरीवाल को इस घटना से राजनीतिक मुद्दा बनाने में दिलचस्पी है। उन्होंने केजरीवाल को अपने काम से काम रखने की भी सलाह दी थी।