Showing posts with label Chhath puja. Show all posts
Showing posts with label Chhath puja. Show all posts

दिल्ली : केजरीवाल सरकार ने यमुना सफाई के 2000 करोड़ पर फेरा पानी; जल छिड़क कर टॉक्सिक फोम से छुटकारा; अब झूठ ना बोले तो वो कैसा केजरीवाल?

जनता को मूर्ख बनाने में IITian और revenue officer से मुख्यमंत्री बने अरविन्द केजरीवाल ने सबको बहुत पीछे छोड़ दिया। अगर सोनिया गाँधी ने अपनी सलाहकार समिति के इन पाखंडियों को अलग से पार्टी बनाने की बजाए इन्हीं लोगों को टिकट देकर चुनाव लड़ा होता कम से कम दिल्ली में तो कांग्रेस सत्ता में रहती। 

RTI के अनुसार 7 सालो में केजरीवाल ने प्रदूषण के विज्ञापन में 940 करोड़ रुपये उड़ा दिए है अपनी तस्वीर लगा लगाकर मगर इस बाबत ठोस धरातल पर कोई भी कार्य नही किया और आज भी दिल्ली का प्रदूषण खतरे के निशान से ऊपर है इसीलिये साँस लेने के लिये जिल्लेइलाही गोवा चले गये हैं ..अगर हवा ठीक नहीं हुई तो गोवा से वो उत्तराखंड चले जायेंगे !

Ad Man ने दिल्ली में एक Smog Tower लगाई थी,सब चैनलों में Ad दिये थे,वो उसी दिन से ख़राब पड़ी है

मुफ़्तख़ोरी और समाजवाद बर्बादी की ओर ही ले जाता है

दिल्ली सरकार और दिल्ली जल बोर्ड को ही लीजिये...... फिलहाल 4 बड़े मुद्दे हैं

1. यमुना की गंदगी

2. दिल्ली में गंदे पानी की सप्लाई

3. दिल्ली जल बोर्ड की बुरी हालत

4. पानी सप्लाई पर काम नही होना

यमुना की गंदगी - ये हर साल का रोना है, छठ आने पर यमुना नदी की तस्वीरों की बाढ़ आ जाती है, और फिर दोषारोपण का काम शुरू हो जाता है। इस बार केजरीवाल ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा पर आरोप लगाया है कि उनके कचरे से यमुना गंदी हो जाती है।

                                       साभार: सोशल मीडिया 
अब झूठ ना बोले तो वो कैसा केजरीवाल?

दोनों तस्वीरों को देखिए, दिल्ली में यमुना प्रवेश करती है वजीराबाद barrage से, और उससे पहले यमुना का पानी काफी हद तक साफ है, दिल्ली में घुसते ही नजफगढ़ से एक नाला यमुना में गिरता है, और वहां से आई कालिख आपको इस तस्वीर में दिख ही जाएगी। नजफगढ़ Drain से पहले का पानी देखिए और उसके बाद का, फर्क साफ है.....और नजगगढ़ का नाला दिल्ली सरकार के अंतर्गत ही आता है....उसे साफ करने की, उस पर सीवेज प्लांट लगाने की जिम्मेदारी किसकी हुई..... ये आपको समझ आ गया होगा।

दिल्ली में गंदे पानी की सप्लाई -  चाहे मदनपुर खादर हो, संगम विहार हो, यमुना पार के इलाके हों, या फिर राजौरी या पंजाबी बाग हो.....गंदे पानी की सप्लाई की समस्या हर जगह है......मुफ्त पानी का वादा किया गया था, शायद ऐसा ही पानी मुफ्त मिलता है.....खैर


दिल्ली जल बोर्ड की बुरी हालत - आपमे से ज्यादा लोगो को पता नही होगा कि जब शीला दीक्षित मुख्यमंत्री थी, तब दिल्ली जल बोर्ड मुनाफा कमाने वाला डिपार्टमेंट हुआ करता था। जब से IIT पास revenue officer दिल्ली के मुख्यमंत्री बने हैं, DJB की हालत खराब होती चली गयी है। आज DJB पर 20,000 करोड़ रूपए से ऊपर का कर्ज है, 2015 के बाद DJB नुकसान में ही चल रहा है, और अब ये नुकसान सैकड़ो करोड़ रुपये का हो चुका है.....2018-19 में ये 600 करोड़ था.....इसी से समझ लीजिए कि क्या हालत है।

दुनिया भर को भ्रष्ट बोलने वाले केजरीवाल साहब खुद DJB chairman रहे हैं कई साल, लेकिन इस डिपार्टमेंट की Balance sheet और अन्य फाइनेंसियल documents आज तक तैयार नही किये गए......इसके लिए भी बाकायदा एक PIL डाली गई है कोर्ट में, कि DJB के financial status को सही से report करके बताया जाए। आम आदमी पार्टी ने इस PIL को politically motivated बता दिया.....और करते भी क्या 

पानी सप्लाई पर काम नही होना - जब IIT से पढ़े दुनिया के एकमात्र नेता मुख्यमंत्री बने थे, तब उन्होंने कुछ बड़ी घोषणाएं की थी......जैसे पानी माफ, पूरी दिल्ली में पानी की supply लाइन डालना, शुद्ध पानी पहुचाना, यमुना को साफ कर देना.......लेकिन इसमे से कोई काम नही हुआ।

पानी के पुराने बिल माफ कर दिए, कनेक्शन चार्ज हटा दिए, पेनल्टी माफ कर दी, late payment और अन्य कई तरह के सरचार्ज माफ कर दिए.....कुल मिलाकर हालात ये हुए की DJB के पास उसका काम करने तक के पैसे नही हैं.....फिर पानी सप्लाई, यमुना की सफाई और पाइपलाइन कहां से लगाएंगे।

दिल्ली वाले खुश हैं, कि 20,000 लीटर पानी मुफ्त मिल रहा है.....20,000 लीटर का अगर चार्ज लिया भी जाए तो कितना होगा.....200-300 रुपये? 

लेकिन ये 200-300 रुपये बचा कर आपने क्या पाया.......गंदा पानी, गंदी यमुना, टूटी फूटी पानी की पाइपलाइन........वहीं आप हजारो खर्च करके टैंकर लाते हैं पानी के लिए.......,वहीं DJB हजारो करोड़ के नुकसान में है.....कल को ये चुकाने के लिए आपके टैक्स का पैसा ही लगेगा......शिक्षा या स्वास्थ्य में लिए लगने वाला पैसा DJB को बचाने के लिए जाएगा.....

कल को यही काम DTC, बिजली सप्लाई कंपनियो और अन्य डिपार्टमेंट के लिए भी होगा, जो जबरदस्त financial crisis झेल रहे  हैं, और भविष्य में या तो Bankrupt हो जाएंगे, या बेकार service देने लगेंगे.........लेकिन आपको की, आपको तो बिजली हाफ और पानी माफ हो गया है......आज तो चवन्निया बचा रहे हो, लेकिन भविष्य में अपना पेट काट कर ये सब चुकाना पड़ेगा......क्योंकि मुफ़्तख़ोरी और समाजवाद आपको सिर्फ बर्बादी की तरफ ही ले जाता है......अब ये आम आदमी पार्टी करे, बीजेपी करे या कांग्रेस....इनका end result एक ही रहेगा।

देश की राजधानी दिल्ली में यमुना नदी का पानी गंदे नालों और फैक्ट्रियों से निकलने वाले केमिकल के कारण पूरी तरह से जहरीला हो गया है। छठ के मौके पर श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए अब दिल्ली जल बोर्ड के कर्मचारी जहरीले झाग से छुटकारा पाने के लिए यमुना नदी पर पानी छिड़क रहे हैं। इसको लेकर सोशल मीडिया पर लोग केजरीवाल सरकार के मजे ले रहे हैं।

इस मामले में दिल्ली जल बोर्ड के कर्मचारी अशोक कुमार ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि वे शाम तक झाग से छुटकारा पाने के लिए नदी के किनारे यमुना के जल में पानी छिड़केंगे। यह छठ पूजा के लिए जहरीले झाग को खत्म करने तैयारी का हिस्सा है जहाँ भक्त सूर्य से प्रार्थना करते हुए पानी में डुबकी लगाते हैं।

हालाँकि, यह समझ नहीं आ रहा है कि पानी छिड़कने के बाद नदी कैसे साफ की जा सकेगी। लेकिन, अब नेटिजन्स को ये बात परेशान कर रही है कि जब इतने सरल तरीके से जहरीले झाग से निपटा जा सकता था तो अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने नदी की सफाई के लिए 2000 करोड़ रुपए क्यों आवंटित किए थे।

सोशल मीडिया पर तार्किक लोग यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि जहरीले झाग को छितरा देने भर से कैसे यमुना के पानी का जहरीलापन कम होगा। लेकिन, इसमें किसी प्रकार का आतिशयोक्ति नहीं होना चाहिए, क्योंकि जब आम आदमी पार्टी की बात आती है, तो ज्यादातर समय तर्क और बेसिक सामान्य ज्ञान को झुठला दिया जाता है।

गजेंद्र नाम के यूजर ने लिखा कि गैर-मानसून महीनों में अगर इस तरह से यमुना में पानी का छिड़काव करने से नदी का जल स्तर बढ़ सकता है और शायद राष्ट्रीय राजधानी में भी जल संकट का समाधान हो सकता है। इतने अच्छे आइडिया का मजाक उड़ाने वाले लोगों को शर्म आनी चाहिए।

दरअसल, यमुना के पानी के जहरीलेपन को खत्म करने के केजरीवाल सरकार के इस आइडिया से हर कोई आश्चर्यचकित है। किसी ने भी नहीं सोचा था कि AAP सरकार यमुना के जहरीले झाग को साफ करने के लिए आगे आएगी।

वैसे भी प्राकृतिक नियमों के विपरीत यमुना नदी को पानी उपलब्ध कराने के दिल्ली के सीएम की महानता की सराहना नेटिजन्स ने की। दिल्ली सरकार के इस आश्चर्यचकित कर देने वाले कारनामे पर आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता और कवि कुमार विश्वास ने भी दिल्ली के हालात का वर्णन करते हुए एक कविता लिख दी।

हालाँकि, अगर आप दिल्ली सरकार के इस साइंटफिक सॉल्यूशन से अचंभित हो रहे हैं तो इसकी कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि दिल्ली सरकार का विज्ञान से बहुत गहरा रिश्ता है। आखिरकार, वे अपनी सरकार में बहुत पढ़े-लिखे लोगों के होने का दावा जो करते हैं। इसी तरह जनवरी 2021 में दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने एक वैज्ञानिकता भरा तर्क देते हुए कहा था कि दिल्ली में पानी की आपूर्ति करने वाले पाइपों को साफ करना असंभव था।

उनका एक वीडियो सामने आया था, जिसमें एक पत्रकार सिसोदिया से खराब गुणवत्ता वाले पानी के बारे में पूछता है। इस पर सिसोदिया ने समझाया कि जब पानी की आपूर्ति की जा रही है और मोटर चालू रहेगा तो पानी साफ हो जाएगा। उन्होंने कहा, “भौतिकी बताती है कि जब आप पानी की आपूर्ति बंद होने पर मोटर चालू करते हैं तो वो पाइप के अंदर की मिट्टी और अन्य गंदगी को अपने साथ ले जाएगा।” उन्होंने दिल्लीवासियों को सलाह दी कि पानी की सप्लाई के लिए जो समय निर्धारित किया गया है अगर वो उसमें मोटर को चालू करेंगे तो उन्हें साफ पानी मिलेगा।

उस दौरान भी किसी ने ये तनिक भी नहीं सोचा था कि #ScientistSisodia इतना अच्छा आइडिया भी सुझा सकते हैं। 

‘एक और फ्री सुविधा के लिए बधाई लघुकाय-लंपट जी’: कुमार विश्वास ने कसा केजरीवाल पर तंज

दिल्ली में जब से अरविन्द केजरीवाल की सरकार मुफ्त की रेवड़ियों बांटकर सत्ता में आयी है, हिन्दुओं को अपने त्यौहारों पर किसी न किसी मुसीबत का सामना करना पड़ता है। मुफ्त की रेवड़ी खाने वाले हिन्दुओं अब तो अपनी आंखें खोलो। दीवाली की दस्तक से पहले ही प्रदुषण का रोना शुरू हो जाता है। और अब सूर्य देवता की आराधना पर यमुना नदी के इतने गंदे पानी में खड़े होकर पूजा करने को विवश हिन्दू। यदि यही पर्व ईसाई अथवा इस्लाम में होता, तब भी क्या यमुना नदी की सफाई के लिए ऐसे ही दूसरे राज्यों को आरोपित करते?

केजरीवाल से पूर्व 15 वर्ष शीला दीक्षित की सरकार रही, न किसी का वेतन रुका, न ही प्रदुषण का रोना और न ही छठ पर यमुना का इतना गन्दा पानी। अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए कभी मोदी सरकार, कभी उपराज्यपाल और कभी दूसरे राज्यों पर आरोप लगाकर अपने आपको जनता का हितैषी साबित करने में लगे रहते हैं।  

दिल्ली में छठ पर्व की शुरुआत पर श्रद्धालुओं ने यमुना नदी के जहरीले झाग के बीच खड़े होकर पूजा अर्चना की। इसको लेकर मशहूर कवि कुमार विश्वास ने श्रद्धालुओं की तस्वीर को ट्वीट करते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर तंज कसा है। उन्होंने ट्वीट किया, ”भगीरथ जी स्वर्ग से गंगा, बादलों के जिस मार्ग से उतार कर लाए थे ‘लघुकाय-लंपट’ जी, यमुना जी को उसी रास्ते दिल्ली ले आएँ हैं और वो भी मुफ्त (और हाँ, इस बार वायु-प्रदूषण की जिम्मेदारी हरियाणा के किसानों पर रहेगी, पंजाब वालों पर नहीं, क्योंकि वहाँ कुछ महीनों में चुनाव हैं)।”

दरअसल, बीते कुछ दिनों से यमुना में सफेद-सफेद झाग बड़े पैमाने पर तैरते हुए देखे जा सकते हैं। आम आदमी पार्टी के पूर्व सदस्य रहे कुमार विश्वास ने दो दिन पहले यानी 7 नवंबर को समाचार एजेंसी एएनआई के एक ट्वीट को रिट्वीट करते हुए लिखा था, ”दिल्ली को एक और ‘फ्री’ सुविधा के लिए बधाई। अब तो यमुना में बादल भी उतार दिए, गली-गली मुफ्त का नरक कोविड के दौरान दिखा ही दिया था। टैक्सपेयर्स के पैसे पर TV में कालनेमि-लाइव देखा ही होगा। अब पंजाब में यही कौशल दिखाने का अवसर दें, स्वराज-शिरोमणि लघुकाय आत्ममुग्ध धूर्तेश्वर’ को।”

कुमार विश्वास का यह तंज केजरीवाल के उन कथित वादों को लेकर है, जो उन्होंने सरकार बनने पर यमुना की सफाई के लिए किए थे। केजरीवाल सरकार के इतने सालों से सत्ता में रहने के बाद भी यमुना नदी की हालत जस की तस है। हर साल छठ पर्व पर श्रद्धालुओं को झाग के बीच खड़े होकर पूजा करनी पड़ती है।

वहीं, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और दिल्ली जल बोर्ड के अध्यक्ष राघव चड्ढा ने एक बयान जारी कर बीते दिनों कहा था कि हरियाणा से काफी मात्रा में सीवेज और औद्योगिक कचरा छोड़े जाने के चलते दिल्ली के जल शोधन संयत्रों में उत्पादन प्रभावित हुआ है। 

बिहार : कटिहार : किन मुस्लिमों ने छठ घाट पर मल-मूत्र त्यागा? क्या यही है गंगा-जमुनी तहजीब?

कटिहार में तहस-नहस छठ घाट और अपनी पीड़ा रखते ग्रामीण
बिहार का कटिहार जिला मुस्लिम बहुत सीमांचल का हिस्सा है, जिसकी सीमाएँ पश्चिम बंगाल से लगती हैं। बीते दिनों बिहार में छठ महापर्व का समापन हुआ, लेकिन कटिहार के रतौरा में मुस्लिम भीड़ पर छठ पूजा में घाट पर आकर विघ्न डालने का आरोप लगाते हुए स्थानीय लोगों ने वीडियो बनाया और प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई। वीडियो में मुस्लिम भीड़ पर छठ पूजा न करने देने और व्यवस्था को तहस-नहस कर देने के आरोप लगते हुए स्थानीय लोगों ने उप-मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद से भी हस्तक्षेप की माँग की।

कटिहार जिला के कोढ़ा प्रखंड के रतौरा थाना क्षेत्र अंतर्गत हथियादियरा स्थित दिघरि पंचायत के चामापारा गाँव के लोगों को संध्या अर्घ्य के दौरान (नवम्बर 20, 2020) मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा तंग किया गया। उनके अनुसार छठ घाट पर उपद्रव कर घाट पर तोड़फोड़ किया गया, जिसके बाद स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई। वहाँ के स्थानीय लोगों का कहना था कि शाम को तो वो किसी तरह पूजा करने में कामयाब रहे, लेकिन सुबह उनके साथ जिस तरह से व्यवहार किया गया, उससे वो काफी डर गए हैं।

सबसे पहले जो वीडियो सोशल मीडिया पर आया, उसमें कई श्रद्धालु, महिलाएँ एवं पुरुष, खड़े दिख रहे हैं। एक महिला ने बताया कि वो प्रशासन के लिए यहाँ खड़ी हैं। महिलाओं ने बताया कि थोड़े से विवाद के बाद उनके बनाए घाट वगैरह को उजाड़ डाला गया। वहीं एक युवक ने दावा किया कि इलाके में 30 घर हिंदू हैं और 30,000 घर मुस्लिम हैं (हालाँकि, ये दावा अपुष्ट है)। उसने बताया कि यहाँ के कुछ लोग चाहते थे कि सुबह में छठ महापर्व हो ही नहीं।

उसने आगे उप-मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद, जो कटिहार के ही विधायक हैं, उनसे निवेदन करते हुए कहा कि वो थाना प्रभारी को निर्देश दें कि वो वहाँ पर आकर अपनी निगरानी में छठ पूजा संपन्न करवाएँ। उस वीडियो में सभी महिलाओं एवं पुरुषों ने उक्त युवक की बात से सहमति जताते हुए कहा कि उन्हें वहाँ प्रशासन की जरूरत है। उसने हिन्दुओं से अपील की कि इस वीडियो को वो फैलाएँ, जिससे उन्हें न्याय मिले।

एक अन्य महिला ने बताया कि घाट पर जब श्रद्धालु वहाँ अर्घ्य देने गए तो पटाखा उड़ाने को लेकर मुस्लिम समाज के लोगों से विवाद हुआ। महिला ने बताया कि वहाँ ‘काफी सारे मुस्लिम समाज के लोग’ थे और शाम को अर्घ्य देने के बाद वो लोग जैसे ही घर लौटे, तभी वहाँ पर केले के सारे थम उखाड़ डाले गए और मुस्लिम समाज के लोगों ने वहाँ मल-मूत्र त्याग कर दिया। साथ ही सजावट को तबाह कर देने और गुब्बारों को फोड़ देने के भी आरोप लगाए।

क्या कहना है हिन्दू पीड़ितों का 

जब हमने स्थानीय लोगों से बात की तो कई चौंकाने वाले विवरण सामने आए। कटिहार के ही एक व्यक्ति ने बताया कि इस पूरे घटनाक्रम में गाँव के स्थानीय मौलाना के दामाद की सहभागिता थी, इसी कारण प्रशासन ने भी उन पर थाने के बाहर ही सुलह कर के मामले निपटाने के लिए कहा। उक्त व्यक्ति ने हमें बताया कि उस क्षेत्र में मुस्लिम समाज के दबंगों द्वारा हिन्दुओं के खेतों की फसलें काट लेना आम बात है और ये इस तरह की पहली घटना नहीं है।

हमारी बात देवनारायण उराँव से हुई, जो इस घटना के पीड़ित हैं और उनके सामने ही ये सब कुछ हुआ। उन्होंने हमें पूरे घटनाक्रम को सिलसिलेवार तरीके से समझाते हुए बताया कि वो अन्य श्रद्धालुओं के साथ सांध्य अर्घ्य के दिन दोपहर 1 बजे घाट पर गए और पूरे मन से वहाँ पर सजावट की। उन्होंने बताया कि पूरी साफ़-सफाई करने के बाद घाट को चमकाया गया। इसके बाद सारे ग्रामीण लौट आए और स्नान-ध्यान कर के पूजा की तैयारी के साथ वापस घाट के लिए शाम 4 बजे निकले। उन्होंने बताया:

“हम जैसे ही वहाँ पहुँचे, मुस्लिम समाज के लोग हमें परेशान करने लगे। वो लोग कह रहे थे कि अगर तुम छठ करने गए तो तुम्हें घाट पर से फेंक दूँगा। इसके बाद हम लोग किसी तरह पूजा-पाठ निपटाने के बाद वापस घर आ गए। अभी हमें घर पहुँचे आधे घंटे भी नहीं हुए थे कि सारी सजावट नोच डाली गई थी। धमकियों के बाद हमारे बच्चे घाट देखने गए थे कि सब सुरक्षित है या नहीं। उन्होंने देखा कि हमारे लगाए हजार गुब्बारों में से एक भी नहीं बचा है। मुझे जैसे ही इसकी सूचना बच्चों ने दी, मैंने अन्य ग्रामीणों को बताया। इसके बाद मैं सारे ग्रामीणों के साथ थाना गया। वहाँ हमें ही शांतिपूर्वक बैठने को कहा जाने लगा। हमने पूछा कि क्या हम थाना प्रभारी से बात करने में सक्षम नहीं? तत्पश्चात रतौरा थानाध्यक्ष को हमने सारी बात बताई।”

बकौल देवनारायण उराँव, आक्रोशित ग्रामीणों ने थाने में पूछा कि यहाँ एक मंदिर टूट जाता है, फिर भी आप लोग कुछ क्यों नहीं करते? हमारे आक्रोश के बाद पुलिस हमें लेकर रात के 10 बजे घाट पर गई। वहाँ जाकर पुलिस ने वीडियो बनाया और हमारे दावे सही पाए। उन्होंने ये भी बताया कि पुलिस ने पुनः सजावट के लिए 500 रुपए की मदद की। उन्होंने बताया कि फिर से बाँस वगैरह काटने पड़े और पूरी सजावट भी करनी पड़ी।

क्या वहाँ पहले से भी हिन्दुओं को परेशानी थी? इसके जवाब में उन्होंने बताया कि स्थानीय हिन्दू ठीक से शादी-विवाह तक नहीं कर पाते हैं और पूजा-पाठ के दौरान भी तनाव का माहौल पैदा कर दिया जाता है। उन्होंने बताया कि सुबह के अर्घ्य के समय प्रशासन वहाँ मौजूद था, वरना हम छठ ठीक से नहीं कर पाते। उनका कहना है कि स्थानीय हिन्दू अपने धर्म के नियम-कायदे निभाने को भी तरस जाते हैं। साथ ही जानकारी दी कि इन चीजों के सम्बन्ध में पहले भी थाने में आवेदन दिया गया था, लेकिन पुलिस अब बड़ी घटना होने के बाद हरकत में आई है।

कई वीडियो में हिन्दू कार्यकर्ता न्याय के लिए नारेबाजी करते हुए भी दिख रहे हैं। साथ ही पुलिस की गाड़ी के पास जनता मौजूद दिख रही है। घाट पर तहस-नहस स्थिति में चीजें भी दिख रही हैं, जिनसे महिलाएँ खासी आक्रोशित हैं। एक महिला ने बताया कि वहाँ मुस्लिम समाज के लोग इतनी संख्या में जमा हो गए थे, जितने पर्व मनाने के लिए हिन्दू भी नहीं जाते हैं। महिला ने बताया कि हिन्दुओं के साथ जबरदस्ती होती है, उनके साथ मारपीट होती है और उन्हें चारों तरफ से दबा कर रखा जाता है।

महिला ने बताया कि जब तक ग्रामीणों ने थाने पहुँच कर हंगामा नहीं किया, तब तक पुलिसकर्मी नींद से नहीं जागे। उसने बताया कि मुस्लिम समाज के लोग सोचते हैं कि हिन्दू संख्या में कम हैं, इसीलिए मारपीट कर भगा देंगे। साथ ही ये भी कहा कि जमीन-जायदाद के झगड़े भी वो हिन्दू समाज के लोगों के साथ करते रहते हैं। उसने बताया कि मुस्लिम समाज के लोग बोलते हैं कि ‘मुस्लिम इलाका बनाएँगे, हिन्दुओं को यहाँ रहने नहीं देंगे और उनकी जमीनें हड़प के उन्हें भगा देंगे’।

उजाड़े जाने के बाद छठ घाट का नजारा

सबसे ज्यादा चौंकाने वाली जानकारी हमें ग्रामीण विकास उराँव ने दी, जिन्होंने रुआँसे स्वर में कहा कि गाँव के लोग मीडिया में अपनी बात रखने के लिए इंतजार कर रहे हैं लेकिन एक भी मीडियाकर्मी वहाँ नहीं पहुँचा है। उन्होंने बताया कि वो भी छठ घाट पर हुई इस हरकत के गवाह हैं। साथ ही दावा किया कि मुस्लिम समाज के कुछ असामाजिक तत्व छठ पर्व कर रही महिलाओं का कपड़े बदलते हुए वीडियो बना रहे थे, जिसके लिए मना करने पर हंगामा शुरू हुआ।

विकास उराँव ने बताया, “हम क्या करें? हम शादी-विवाह तक ठीक से नहीं कर पाते। मुस्लिम समाज के युवक जबरदस्ती हमारे शादी समारोह में घुस जाते हैं और नाचने लगते हैं। हमारे घर की लड़कियों का दुपट्टा खींचा जाता है। महिलाओं के साथ छेड़खानी होती है। हम किसी से कुछ कह नहीं सकते।” विकास बार-बार कह रहे थे कि मीडिया उनके गाँव में आए तो हर ग्रामीण अपनी बात रखने के लिए बेचैन है, लेकिन साथ ही सब डरे हुए भी हैं।

क्या है पुलिस का कहना?

वहीं कटिहार के SDPO अमरकांत झा का भी इस मामले को लेकर बयान आया है। उन्होंने बताया कि रौतारा में छठ पूजा में कुछ असामाजिक तत्वों ने हल्का सा विध्वंस किया था। उन्होंने बताया कि जैसे ही पुलिस को इसकी जानकारी हुई, वो हरकत में आई और दोनों समय की छठ पूजा संपन्न हुई। उन्होंने बताया कि अब वहाँ शांति है। उनका कहना है कि ये कोई उस तरह की बड़ी घटना नहीं थी, इसीलिए अब तक कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है।

इस मामले में अब तक कोई गिरफ़्तारी भी नहीं हुई है। SDPO शर्मा ने जानकारी दी कि चीजें सुलझा ली गई हैं, क्योंकि थानाध्यक्ष ने त्वरित पहल की, वो खुद भी घटना की निगरानी कर रहे थे और एसपी ने भी आवश्यक निर्देश जारी कर दिए थे। देर रात की सामने आई कई वीडियो में पीड़ित हिन्दू और पुलिस की गाड़ियाँ घटनास्थल पर जाती हुई दिख रही हैं। साथ ही इसकी सूचना मिलते ही बजरंग दल और विहिप के पदाधिकारी भी वहाँ पहुँचे।

विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने ऑपइंडिया से कहा कि बिहार सरकार को संवेदनशील सीमांचल के इलाके में हिन्दू धर्म स्थलों की सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि वहाँ हिन्दू डर कर रह रहे हैं। उन्होंने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि उप-मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद को वहाँ जाकर लोगों की बातें सुननी चाहिए। बंसल ने कहा कि ये बहुत ही बड़ी घटना है और सीमांचल में बढ़ती इस्लामी कट्टरता खतरनाक है।

बिहार में चुनाव के दौरान दुर्गा पूजा विसर्जन में मुंगेर में हुई घटना को लेकर हिन्दू पहले से ही आक्रोशित हैं। उस घटना में दो युवकों की मौत की बात सामने आई थी। ‘मुंगेर बड़ी दुर्गा पूजा समिति’ ने ऑपइंडिया को बताया था की उनके साथ ऐसा दुर्व्यवहार हुआ कि पूरा मुंगेर देख कर रो पड़ा। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि फायरिंग प्रशासन ने ही की है और पुलिसकर्मी इंसास राइफल और पिस्टल लहराते नज़र आ रहे थे।

                            साभार:-अनुपम कुमार सिंह, http://anupamkrsin.wordpress.com


झारखण्ड : छठ पर लगाया बैन: घाट पर स्नान, सजावट और पटाखों पर प्रतिबंध – हेमंत सरकार का आदेश जारी

पूरे देश में, खासकर पूर्वी भारत में छठ महापर्व का विशेष महत्व है। नवंबर 18, 2020 से 4 दिवसीय छठ महापर्व की शुरुआत हो रही है और नहाय-खाय के साथ व्रती इसे प्रारम्भ करते हैं। झारखण्ड में इस बार तालाबों और नदियों के किनारे छठ महापर्व के आयोजन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने रविवार( नवम्बर 15) की रात ही इसे लेकर दिशा-निर्देश जारी कर दिए, जिसके बाद श्रद्धालुओं में मायूसी का माहौल बन गया है।

झारखण्ड की हेमंत सोरेन सरकार का कहना है कि अभी कोरोना महामारी का समय गया नहीं है और नदियों एवं तालाबों के घाटों पर सोशल डिस्टेंसिंग को बनाए रखना संभव नहीं है। कोरोना को लेकर केंद्र सरकार के निर्देशों के पालन का हवाला देकर ऐसा किया गया है। सरकार ने कहा है कि लोग इस बार अपने घरों से ही छठ महापर्व मनाएँ और बाहर न निकलें। उन्हें पिछले सालों की भाँति घाट पर जाने की अनुमति नहीं होगी।

झारखण्ड के आपदा प्रबंधन विभाग ने अपने दिशा-निर्देशों में स्पष्ट कहा है कि छठ महापर्व के दौरान किसी भी नदी, झील, बाँध या तालाब के छठ घाट पर किसी भी तरह के कार्यक्रम के आयोजन की अनुमत नहीं होगी। साथ ही घाट के समीप किसी भी प्रकार के दुकान या स्टॉल लगाने पर भी प्रतिबंध रहेगा। किसी भी सार्वजनिक स्थलों पर पटाखे छोड़ना या लाइटिंग व मनोरंजन के कार्यक्रम आयोजित करने की भी मनाही होगी।

झारखण्ड के अधिकारियों का कहना है कि जलीय स्थलों पर डुबकी लगाने के दौरान सबका मास्क पहनना संभव नहीं है। साथ ही दो गज की दूरी का पालन न होने की बात भी कही जा रही है, क्योंकि इसमें एक जगह पर कई परिवारों के लोग शामिल होते हैं। सैकड़ों भक्तों के पानी में जमा होने के कारण कोरोना फैलने की संभावना का हवाला देते हुए ये प्रतिबंध लगाए गए हैं। लोगों को घर से ही अर्घ्य देने के लिए कहा गया है। सरकार के इस निर्णय से जनता में उपजे रोष से राजनीतिक नहीं सियासती जमावड़ों में भाग लेने पर प्रश्नचिन्ह लगा रहे हैं :-

सरकार का कहना है कि घाट पर स्नान करने आई भीड़ को नियंत्रित करना भी उसके लिए संभव नहीं है, ताकि लोग बारी-बारी से स्नान कर सकें। घाट के आसपास सार्वजनिक जगहों पर बिजली के बल्ब इत्यादि से सजावट भी नहीं की जा सकेगी। संगीत का कोई कार्यक्रम नहीं हो सकेगा। मुख्य सचिव सुखदेव सिंह ही आपदा प्रबंधन विभाग के अध्यक्ष हैं और उनके द्वारा हस्ताक्षरित आदेश में ही ये बातें कही गई हैं।

इसके बाद झारखण्ड के लोगों ने भी बाजारों से टब की खरीददारी शुरू कर दी है और कइयों ने घर में ही हौदा बनवा लिया है। वहीं बिहार में ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के तालाबों में छठ महापर्व मनाने की अनुमति दी गई है। तालाब क्षेत्र को सैनिटाइज किए जाने की व्यवस्था भी हुई है। नगर निकायों और ग्राम पंचायतों को इसके लिए तैयार किया गया है। हालाँकि, घाट के आसपास भोज या प्रसाद वितरण नहीं हो सकेगा।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने भी मंगलवार (नवंबर 10, 2020) को पश्चिम बंगाल में छठ पर्व मनाने सम्बन्धी जुलूस पर प्रतिबंध लगा दिया था। कोलकाता की दो सबसे बड़ी झीलों रवींद्र सरोवर और सुभाष सरोवर में भी छठ महपर्व के आयोजन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया। एक परिवार से दो लोग से ज्यादा पानी में उतर कर पूजा नहीं कर सकते। जिसके घर में छठ पर्व हो रहा है, उस परिवार के अन्य सदस्यों को घर में रह कर ही इसे देखना पड़ेगा।