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दिल्ली : केजरीवाल हटाओ, डीटीसी बचाओ : केजरीवाल सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन के मूड में डीटीसी कर्मचारी, जगह-जगह लगाए पोस्टर


दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के झूठ और नाकामी का असर अब दिल्ली सरकार के सभी विभागों पर देखने को मिल रहा है। शराब घोटाला, यमुना की सफाई, शिक्षा व्यवस्था की खुलती पोल, आरटीआई का गला घोंटना, दिल्ली जल बोर्ड की नाकामी से कई इलाकों में गंदे पानी की आपूर्ति, ये कुछ झांकी है जिससे दिल्ली की जनता त्रस्त है। इसी तरह दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) लंबे समय से आंतरिक संकट से जूझ रहा है क्योंकि इसके 11,286 संविदा चालक और परिचालक बेहतर वेतन की मांग लंबे समय से कर रहे हैं। सत्ता में आने से पहले केजरीवाल ने सभी संविदा (कांट्रेक्ट) कर्मचारियों को नियमित करने और बेहतर वेतन देने की बात कही थी लेकिन पिछले नौ साल में उन्होंने डीटीसी कर्मियों की समस्याओं का कोई समाधान नहीं किया। यहां तक कि डीटीसी बसों की खरीद में घोटाले का भी आरोप लगा। अब डीटीसी कर्मचारी केजरीवाल सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई के मूड में आ गए हैं। शहर में जगह-जगह पोस्टर लगाए हैं- केजरीवाल हटाओ, डीटीसी बचाओ। कर्मचारियों ने 10 अप्रैल को एक सांकेतिक प्रदर्शन कर केजरीवाल सरकार को चेतावनी दे दी है।

कट्टर ईमानदार सरकार में घोटालों के बाद डीटीसी के निजीकरण की तैयारी

दिल्ली के कट्टर ईमानदार सरकार के नाम पानी घोटाला, दारू घोटाला, स्कूलों में घोटाला, अस्पतालों में घोटाला, यमुना नदी में घोटाला, मोहल्ला क्लीनिक में घोटाला और डीटीसी जैसे न जाने कितने घोटाले को अंजाम देने के बाद कट्टर ईमानदार सरकार अब दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के निजीकरण की तैयारी कर रही है। यही नहीं, डीटीसी बसों की जगह प्राइवेट क्लस्टर बसों को बढ़ावा देने की नीति पर काम कर रही है। इसके साथ ही संविदा कर्मचारियों का वेतन भी नहीं बढ़ाया जा रहा है। इसी वजह से डीटीसी कर्मचारियों ने 10 अप्रैल 2023 को प्रदर्शन किया।

दिल्ली सरकार के खिलाफ डीटीसी कर्मियों का बैनर कैंपेन

डीटीसी कर्मचारी एकता यूनियन ने बैनर कैंपेन के तहत शहर के प्रमुख चौराहों आईटीओ, लाजपत नगर, आनंद विहार, कश्मीरी गेट आदि जगहों पर बैनर लगाए हैं। यूनियन के प्रेसिडेंट ललित चौधरी का कहना है कि जनता को पता चलना चाहिए कि दिल्ली सरकार प्राइवेट बसों को बढ़ावा दे रही है। वहीं डीटीसी के संग सौतेला व्यवहार कर रही है। दिल्ली की जनता के साथ धोखा किया जा रहा है। 9 साल में डीटीसी की एक भी बस नहीं खरीदी गई जबकि दूसरी तरफ प्राइवेट क्लस्टर बसों को मौका दिया जा रहा है। आरोप यहां तक है कि कमीशन के लिए प्राइवेट मालिकों और अपने चाहने वालों को डीटीसी की संपत्ति बेची जा रही है। उनका कहना है कि दिल्ली सरकार अपने निजी फायदे के लिए दिल्ली की सरकारी बसों को प्राइवेट कंपनियों के हाथों में सौंप रही है, जिसका हम विरोध कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे।

डीटीसी फायदे में है तो इसे बेचा क्यों जा रहा?

डीटीसी कर्मचारी एकता यूनियन का कहना है कि अगर डीटीसी फायदे में है तो इसे बेचा क्यों जा रहा है। और अगर डीटीसी घाटे में है तो प्राइवेट लोग क्लस्टर बस चलाने को तैयार क्यों हो रहे हैं। इतने सालों से कर्मचारी काम कर रहे हैं, लेकिन अभी तक उन्हें स्थायी नहीं किया गया है। कर्मचारी समान काम-समान वेतन मांग रहे हैं। डीटीसी में कर्मचारियों को स्थायी किया जाए। अगर मांगे नहीं मानी जाती तो कर्मचारी बड़ा आंदोलन करने के लिए तैयार हैं।

डीटीसी बसों का परिचालन निजी हाथों में सौंपने की तैयारी

देश की राजधानी दिल्ली में दिल्ली परिवहन निगम की डीटीसी बसों को लाइफ लाइन कहा जाता है और केजरीवाल सरकार डीटीसी बसों का परिचालन निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है। दिल्ली सरकार ने परिवहन आयुक्त की निगरानी में एक समिति का गठन कर दिया है। यह समिति क्लस्टर बसों की तर्ज पर परिचालन से रखरखाव तक की जिम्मेदारी निजी संचालकों को देने पर एक रिपोर्ट तैयार कर रही है।

आम आदमी पार्टी के पेट में बनने लगी सच्चाई की गैस

DTC कर्मचारी एकता यूनियन ने एक ट्वीट में 11 अप्रैल को कहा है कि डीटीसी बचाओ अभियान क्या चलाया और पूरी दिल्ली में डीटीसी बचाओ कैंपेन का बैनर क्या लगाया तो आम आदमी पार्टी के पेट में सच्चाई की गैस बनने लग गई, दर्द है तो अपना वादा पूरा करो, सच्चाई हमेशा कड़वी लगती है।

संविदा कर्मचारियों को सरकार सम्मानजनक वेतन दे

नीलम गहलोत ने ट्वीट किया- माननीय केजरीवाल जी से निवेदन है 1 अप्रैल से जो न्यूनतम वेतन बढ़ेगा उससे अलग संविदा कर्मचारियों का वेतन ₹35000 निर्धारित किया जाए। संविदा कर्मचारी कोई मजदूर नहीं है जिन्हें न्यूनतम वेतन मिले। सरकारी मंत्रालय में संविदा कर्मचारी को सम्मानजनक वेतन 35000 मिलना ही चाहिए।

डीटीसी कर्मचारियों के आंदोलन से ठप हो जाएगी परिवहन व्यवस्था

ऐसे समय में जब दिल्ली की हवा पहले से ही खराब हो रही है, अगर अस्थायी ड्राइवर और कंडक्टर लंबी हड़ताल पर जाने का फैसला करते हैं, तो दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) की 3,300 से अधिक बसों का बेड़ा शहर की सड़कों से हट जाएगा। जानकारों का कहना है कि यह कदम शहर में पहले से ही कमजोर पड़ रहे सार्वजनिक नेटवर्क को पंगु बना सकता है। इससे दिल्ली की परिवहन व्यवस्था पर खासा असर पड़ेगा और अंततः जनता को ही परेशानी उठानी पड़ेगी।

डीटीसी की इलेक्ट्रिक बसों के परिचालन की जिम्मेदारी निजी संचालकों को सौंपी

दिल्ली सरकार ने डीटीसी में आई 152 इलेक्ट्रिक बसों के परिचालन की जिम्मेदारी निजी संचालकों को सौंपी है। इसे डीटीसी के पूरे बेड़े का परिचालन निजी हाथों में सौंपने का ट्रायल माना जा रहा है।

क्लस्टर बसों का परिचालन प्राइवेट हाथों में

दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन क्षेत्र में कुल 7200 बसों का परिचालन दो मॉडल है। 3812 बसें ऐसी हैं, जिसमें चालक से लेकर परिचालक सब सरकार की निगरानी में हैं। वही दूसरा क्लस्टर मॉडल में जिसमें बसों के खरीद से लेकर परिचालन, रखरखाव प्राइवेट को सौंपा जा रहा है। दिल्ली में यह जिम्मेदारी डिम्ट्स नाम की कंपनी को सौंपी गई है।

डीटीसी बस का महंगा हो सकता है किराया

दिल्ली सरकार क्लस्टर बसों की तर्ज पर बाकी बसों को निजी कंपनी के हाथों ही सौंपना चाहती है। इसके लिए तैयारी भी की जा रही है। डीटीसी वर्कस भी यूनिट सेंटर के फैसले पर मीटिंग कर रहे हैं। हालांकि कई वर्कर सरकार के इस फैसले से खुश नहीं है लेकिन अभी सरकार बसों के निजीकरण का फैसला कर चुकी है। अगर बसों को प्राइवेट हाथों में सौंपा जाता है तो किराया महंगा हो सकता है।

2018 में कच्छा पहन-हाथ में कटोरा लेकर किया था प्रदर्शन

डीटीसी के अनुबंधित कर्मचारी 2018 में कच्छा पहनकर और हाथ में कटोरा लेकर प्रदर्शन किया था। उस दौरान अपने स्थायी करने के लिए कर्मचारियों ने तीन दिनों तक हड़ताल किया था। लेकिन झूठ बोलने के आदी केजरीवाल के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी।

केजरीवाल ने कहा था- सरकार बनते ही सभी कर्मचारियों को पक्का किया जाएगा

अनुबंधित कर्मचारियों ने कहा कि इस आंदोलन का मुख्य मकसद केजरीवाल सरकार को चुनावी वादा याद दिलाना था जिसमें उन्होंने कहा था कि सरकार बनते ही सभी कर्मचारियों को पक्का किया जाएगा। इससे पहले डीटीसी के अनुबंधित कर्मचारी हाथ में काली पट्टी बांध कर वेतन में कटौती का विरोध कर चुके हैं।

कर्मचारियों को स्थायी करने के बजाय वेतन में हो गई कटौती

डीटीसी के एक अनुबंधित कर्मचारी ने बताया कि स्थायी नौकरी और ‘समान काम समान वेतन’ की मांग पिछले कई सालों से की जा रही है। बीते दिनों इसको लेकर तमाम प्रदर्शन भी हुए। हालांकि नतीजा कुछ नहीं निकला। यहां तक कि पिछले दिनों कर्मचारियों के वेतन में भी कटौती कर दी गई।

DTC की वजह से दिल्ली सरकार को बड़ा नुकसान

CAG रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2019-20 में दिल्ली राज्य सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम को जो नुकसान हुआ, उसमें 99 फीसदी हिस्सेदारी DTC की थी। मतलब डीटीसी बस सर्विस दिल्ली सरकार के लिए ‘घाटे का सौदा’ साबित हो रही है। केजरीवाल की अगुवाई वाली दिल्ली सरकार के मेट्रो और बस सवारी को महिलाओं के लिए मुफ्त करने के बाद से दिल्ली परिवहन निगम अपनी हर एक बस के लिए अनुमानित 2,000 रुपये प्रति दिन नुकसान हो रहा है। इस योजना के लागू होते ही 2019-20 में डीटीसी को लगभग 5,280 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। मार्च 2019 तक डीटीसी को 38,753 करोड़ रुपये का घाटा था।

DTC बसों की खरीद में गड़बड़ी के आरोप

दिल्ली की केजरीवाल सरकार की मुश्किलें कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। अभी आबकारी नीति को लेकर सीबीआई जांच का सामना कर रही ही थी कि एक और जांच सिर पर आ पड़ा। दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने डीटीसी की ओर से 1000 लो फ्लोर बसों की खरीद में कथित भ्रष्टाचार की शिकायत पर प्रस्ताव भेजने को मंजूरी दे दी है। शिकायत में कहा गया है कि 1000 लो फ्लोर बीएस-4 और बीएस-6 बसों के लिए जुलाई 2019 में खरीद बोली और मार्च 2020 में बीएस-6 बसों के लिए सालाना रखरखाव के अनुबंध के लिए लगाई गई दूसरी बोली में अनियिमताताएं हुई हैं।

डीटीसी बस खरीद में पांच हजार करोड़ रुपए का घोटाला

भाजपा विधायक विजेंद्र गुप्ता ने आरोप लगाया था कि जुलाई 2019 में दिल्ली सरकार ने 1,000 लो-फ्लोर बसों की खरीद और उनके रखरखाव में पांच हजार करोड़ रुपए का घोटाला किया है। मेंटेनेंस का ठेका भी बस सप्लाई करने वाली कंपनी को ही दे दिया गया है जो गलत है। बसों के सड़कों पर उतरते ही मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट भी लागू हो जाएगा जबकि बसों की तीन साल की वारंटी होनी चाहिए। इस दौरान गड़बड़ियां आने पर मेंटेनेंस के लिए एक भी पैसे नहीं देने होते हैं।

डीटीसी बस घोटाले को लेकर जांच सीबीआई को सौंपी

आम आदमी पार्टी सरकार पर डीटीसी की 1000 बसों की खरीद और मेंटेनेंस में अनियमितताओं के आरोप को देखते हुए मुख्य सचिव के प्रस्ताव पर दिल्ली के एलजी वीके सक्सेना ने जांच सीबीआई को सौंप दी है।

दिल्ली : केजरीवाल सरकार ने यमुना सफाई के 2000 करोड़ पर फेरा पानी; जल छिड़क कर टॉक्सिक फोम से छुटकारा; अब झूठ ना बोले तो वो कैसा केजरीवाल?

जनता को मूर्ख बनाने में IITian और revenue officer से मुख्यमंत्री बने अरविन्द केजरीवाल ने सबको बहुत पीछे छोड़ दिया। अगर सोनिया गाँधी ने अपनी सलाहकार समिति के इन पाखंडियों को अलग से पार्टी बनाने की बजाए इन्हीं लोगों को टिकट देकर चुनाव लड़ा होता कम से कम दिल्ली में तो कांग्रेस सत्ता में रहती। 

RTI के अनुसार 7 सालो में केजरीवाल ने प्रदूषण के विज्ञापन में 940 करोड़ रुपये उड़ा दिए है अपनी तस्वीर लगा लगाकर मगर इस बाबत ठोस धरातल पर कोई भी कार्य नही किया और आज भी दिल्ली का प्रदूषण खतरे के निशान से ऊपर है इसीलिये साँस लेने के लिये जिल्लेइलाही गोवा चले गये हैं ..अगर हवा ठीक नहीं हुई तो गोवा से वो उत्तराखंड चले जायेंगे !

Ad Man ने दिल्ली में एक Smog Tower लगाई थी,सब चैनलों में Ad दिये थे,वो उसी दिन से ख़राब पड़ी है

मुफ़्तख़ोरी और समाजवाद बर्बादी की ओर ही ले जाता है

दिल्ली सरकार और दिल्ली जल बोर्ड को ही लीजिये...... फिलहाल 4 बड़े मुद्दे हैं

1. यमुना की गंदगी

2. दिल्ली में गंदे पानी की सप्लाई

3. दिल्ली जल बोर्ड की बुरी हालत

4. पानी सप्लाई पर काम नही होना

यमुना की गंदगी - ये हर साल का रोना है, छठ आने पर यमुना नदी की तस्वीरों की बाढ़ आ जाती है, और फिर दोषारोपण का काम शुरू हो जाता है। इस बार केजरीवाल ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा पर आरोप लगाया है कि उनके कचरे से यमुना गंदी हो जाती है।

                                       साभार: सोशल मीडिया 
अब झूठ ना बोले तो वो कैसा केजरीवाल?

दोनों तस्वीरों को देखिए, दिल्ली में यमुना प्रवेश करती है वजीराबाद barrage से, और उससे पहले यमुना का पानी काफी हद तक साफ है, दिल्ली में घुसते ही नजफगढ़ से एक नाला यमुना में गिरता है, और वहां से आई कालिख आपको इस तस्वीर में दिख ही जाएगी। नजफगढ़ Drain से पहले का पानी देखिए और उसके बाद का, फर्क साफ है.....और नजगगढ़ का नाला दिल्ली सरकार के अंतर्गत ही आता है....उसे साफ करने की, उस पर सीवेज प्लांट लगाने की जिम्मेदारी किसकी हुई..... ये आपको समझ आ गया होगा।

दिल्ली में गंदे पानी की सप्लाई -  चाहे मदनपुर खादर हो, संगम विहार हो, यमुना पार के इलाके हों, या फिर राजौरी या पंजाबी बाग हो.....गंदे पानी की सप्लाई की समस्या हर जगह है......मुफ्त पानी का वादा किया गया था, शायद ऐसा ही पानी मुफ्त मिलता है.....खैर


दिल्ली जल बोर्ड की बुरी हालत - आपमे से ज्यादा लोगो को पता नही होगा कि जब शीला दीक्षित मुख्यमंत्री थी, तब दिल्ली जल बोर्ड मुनाफा कमाने वाला डिपार्टमेंट हुआ करता था। जब से IIT पास revenue officer दिल्ली के मुख्यमंत्री बने हैं, DJB की हालत खराब होती चली गयी है। आज DJB पर 20,000 करोड़ रूपए से ऊपर का कर्ज है, 2015 के बाद DJB नुकसान में ही चल रहा है, और अब ये नुकसान सैकड़ो करोड़ रुपये का हो चुका है.....2018-19 में ये 600 करोड़ था.....इसी से समझ लीजिए कि क्या हालत है।

दुनिया भर को भ्रष्ट बोलने वाले केजरीवाल साहब खुद DJB chairman रहे हैं कई साल, लेकिन इस डिपार्टमेंट की Balance sheet और अन्य फाइनेंसियल documents आज तक तैयार नही किये गए......इसके लिए भी बाकायदा एक PIL डाली गई है कोर्ट में, कि DJB के financial status को सही से report करके बताया जाए। आम आदमी पार्टी ने इस PIL को politically motivated बता दिया.....और करते भी क्या 

पानी सप्लाई पर काम नही होना - जब IIT से पढ़े दुनिया के एकमात्र नेता मुख्यमंत्री बने थे, तब उन्होंने कुछ बड़ी घोषणाएं की थी......जैसे पानी माफ, पूरी दिल्ली में पानी की supply लाइन डालना, शुद्ध पानी पहुचाना, यमुना को साफ कर देना.......लेकिन इसमे से कोई काम नही हुआ।

पानी के पुराने बिल माफ कर दिए, कनेक्शन चार्ज हटा दिए, पेनल्टी माफ कर दी, late payment और अन्य कई तरह के सरचार्ज माफ कर दिए.....कुल मिलाकर हालात ये हुए की DJB के पास उसका काम करने तक के पैसे नही हैं.....फिर पानी सप्लाई, यमुना की सफाई और पाइपलाइन कहां से लगाएंगे।

दिल्ली वाले खुश हैं, कि 20,000 लीटर पानी मुफ्त मिल रहा है.....20,000 लीटर का अगर चार्ज लिया भी जाए तो कितना होगा.....200-300 रुपये? 

लेकिन ये 200-300 रुपये बचा कर आपने क्या पाया.......गंदा पानी, गंदी यमुना, टूटी फूटी पानी की पाइपलाइन........वहीं आप हजारो खर्च करके टैंकर लाते हैं पानी के लिए.......,वहीं DJB हजारो करोड़ के नुकसान में है.....कल को ये चुकाने के लिए आपके टैक्स का पैसा ही लगेगा......शिक्षा या स्वास्थ्य में लिए लगने वाला पैसा DJB को बचाने के लिए जाएगा.....

कल को यही काम DTC, बिजली सप्लाई कंपनियो और अन्य डिपार्टमेंट के लिए भी होगा, जो जबरदस्त financial crisis झेल रहे  हैं, और भविष्य में या तो Bankrupt हो जाएंगे, या बेकार service देने लगेंगे.........लेकिन आपको की, आपको तो बिजली हाफ और पानी माफ हो गया है......आज तो चवन्निया बचा रहे हो, लेकिन भविष्य में अपना पेट काट कर ये सब चुकाना पड़ेगा......क्योंकि मुफ़्तख़ोरी और समाजवाद आपको सिर्फ बर्बादी की तरफ ही ले जाता है......अब ये आम आदमी पार्टी करे, बीजेपी करे या कांग्रेस....इनका end result एक ही रहेगा।

देश की राजधानी दिल्ली में यमुना नदी का पानी गंदे नालों और फैक्ट्रियों से निकलने वाले केमिकल के कारण पूरी तरह से जहरीला हो गया है। छठ के मौके पर श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए अब दिल्ली जल बोर्ड के कर्मचारी जहरीले झाग से छुटकारा पाने के लिए यमुना नदी पर पानी छिड़क रहे हैं। इसको लेकर सोशल मीडिया पर लोग केजरीवाल सरकार के मजे ले रहे हैं।

इस मामले में दिल्ली जल बोर्ड के कर्मचारी अशोक कुमार ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि वे शाम तक झाग से छुटकारा पाने के लिए नदी के किनारे यमुना के जल में पानी छिड़केंगे। यह छठ पूजा के लिए जहरीले झाग को खत्म करने तैयारी का हिस्सा है जहाँ भक्त सूर्य से प्रार्थना करते हुए पानी में डुबकी लगाते हैं।

हालाँकि, यह समझ नहीं आ रहा है कि पानी छिड़कने के बाद नदी कैसे साफ की जा सकेगी। लेकिन, अब नेटिजन्स को ये बात परेशान कर रही है कि जब इतने सरल तरीके से जहरीले झाग से निपटा जा सकता था तो अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने नदी की सफाई के लिए 2000 करोड़ रुपए क्यों आवंटित किए थे।

सोशल मीडिया पर तार्किक लोग यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि जहरीले झाग को छितरा देने भर से कैसे यमुना के पानी का जहरीलापन कम होगा। लेकिन, इसमें किसी प्रकार का आतिशयोक्ति नहीं होना चाहिए, क्योंकि जब आम आदमी पार्टी की बात आती है, तो ज्यादातर समय तर्क और बेसिक सामान्य ज्ञान को झुठला दिया जाता है।

गजेंद्र नाम के यूजर ने लिखा कि गैर-मानसून महीनों में अगर इस तरह से यमुना में पानी का छिड़काव करने से नदी का जल स्तर बढ़ सकता है और शायद राष्ट्रीय राजधानी में भी जल संकट का समाधान हो सकता है। इतने अच्छे आइडिया का मजाक उड़ाने वाले लोगों को शर्म आनी चाहिए।

दरअसल, यमुना के पानी के जहरीलेपन को खत्म करने के केजरीवाल सरकार के इस आइडिया से हर कोई आश्चर्यचकित है। किसी ने भी नहीं सोचा था कि AAP सरकार यमुना के जहरीले झाग को साफ करने के लिए आगे आएगी।

वैसे भी प्राकृतिक नियमों के विपरीत यमुना नदी को पानी उपलब्ध कराने के दिल्ली के सीएम की महानता की सराहना नेटिजन्स ने की। दिल्ली सरकार के इस आश्चर्यचकित कर देने वाले कारनामे पर आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता और कवि कुमार विश्वास ने भी दिल्ली के हालात का वर्णन करते हुए एक कविता लिख दी।

हालाँकि, अगर आप दिल्ली सरकार के इस साइंटफिक सॉल्यूशन से अचंभित हो रहे हैं तो इसकी कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि दिल्ली सरकार का विज्ञान से बहुत गहरा रिश्ता है। आखिरकार, वे अपनी सरकार में बहुत पढ़े-लिखे लोगों के होने का दावा जो करते हैं। इसी तरह जनवरी 2021 में दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने एक वैज्ञानिकता भरा तर्क देते हुए कहा था कि दिल्ली में पानी की आपूर्ति करने वाले पाइपों को साफ करना असंभव था।

उनका एक वीडियो सामने आया था, जिसमें एक पत्रकार सिसोदिया से खराब गुणवत्ता वाले पानी के बारे में पूछता है। इस पर सिसोदिया ने समझाया कि जब पानी की आपूर्ति की जा रही है और मोटर चालू रहेगा तो पानी साफ हो जाएगा। उन्होंने कहा, “भौतिकी बताती है कि जब आप पानी की आपूर्ति बंद होने पर मोटर चालू करते हैं तो वो पाइप के अंदर की मिट्टी और अन्य गंदगी को अपने साथ ले जाएगा।” उन्होंने दिल्लीवासियों को सलाह दी कि पानी की सप्लाई के लिए जो समय निर्धारित किया गया है अगर वो उसमें मोटर को चालू करेंगे तो उन्हें साफ पानी मिलेगा।

उस दौरान भी किसी ने ये तनिक भी नहीं सोचा था कि #ScientistSisodia इतना अच्छा आइडिया भी सुझा सकते हैं। 

दिल्ली : बंद पड़े इंदिरा गाँधी अस्पताल में दिखाए 150 बेड खाली को लेकर केजरीवाल सरकार को फिर पड़ी फटकार

                                                                                              सभी चित्र साभार : नवभारत टाइम्स 
ऐसा जान पड़ता है कि दिल्ली मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को फटकार खाने की आदत हो गयी है। दिल्ली वालों ने केजरीवाल को भरपूर समर्थन दिया, पलटे में जनता को क्या मिल रहा है, सबके सामने है। वास्तव कोरोना एक महामारी जरूर है, लेकिन अरविंद केजरीवाल और इसकी पार्टी को पूरी तरह से बेनकाब कर दिया है। जब ऑक्सीजन ऑडिट के लिए सुप्रीम कोर्ट ने इजाजत दे दी और केजरीवाल मंत्री और इनके समर्थकों के पास से सिलेंडर आदि मिलने के स्थिति यह हो गयी कि सुनने में आ रहा है कि ऑक्सीजन स्टोर करने की जगह नहीं।

दिल्ली में ऑक्सीजन की किल्लत और अस्पतालों में बेड की कमी के कारण लगातार दिल्लीवासी परेशान हैं। ऐसे में केजरीवाल सरकार अपनी लापरवाहियाँ करने से बाज नहीं आ रही। हाल में दिल्ली सरकार की वेबसाइट पर खाली बेडों की संख्या बिना सत्यापन के अपलोड कर दी गई। बाद में परेशानी किसे हुई? उन लोगों को जो सरकार की इस वेबसाइट पर भरोसा करके अस्पताल तक गए।

जानकारी के मुताबिक द्वारका स्थित इंदिरा गाँधी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल को लेकर दिल्ली सरकार ने दावा किया कि ये अस्पताल चालू हो गया और दो दिन बाद भी यहाँ अस्पताल खाली पड़े हैं। दिल्ली सरकार द्वारा की गई इस घोषणा के प्रमाण दिल्ली सरकार की ऐप पर भी है। यहाँ भी द्वारका में स्थित इंदिरा गाँधी अस्पताल में 150 बेड खाले दिखाए जा रहे हैं।

इस लापरवाही के मद्देनजर दिल्ली हाई कोर्ट ने अब दिल्ली सरकार से जवाब माँगा है। दिल्ली सरकार के वकील का कहना है कि एसओ सर्टिफिकेट देर से मिलने के कारण ऐसा हुआ।

कोर्ट ने सरकार को कहा, “दिल्ली सरकार के लिए ऐसी चीजें करना उचित नहीं है। शनिवार को कहा गया कि अस्पताल शुरू हो गया और अब मंगलवार दोपहर कहा जा रहा है कि अब भी चालू नहीं।”

मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस विपिन संघी और रेखा पल्ली की पीठ ने दिल्ली सरकार को फटकार लगाते हुए भविष्य में दोबारा ऐसी लापरवाही न करने के निर्देश दिया। जिसके बाद कोर्ट की बात सुन दिल्ली सरकार के वकील ने अदालत में माफी माँगी। कोर्ट ने उनसे हलफनामा दायर करने को कहा। साथ ही सख्ती से कहा कि अधिकारियों से सरकार बोले कि वो गलत जानकारी न दें।

इस दौरान दिल्ली के प्रधान सचिव स्वास्थ्य डॉ आशीष वर्मा ने अदालत को बताया कि परिचालन में देरी हुई क्योंकि अस्पताल में उपलब्ध कराए गए ऑक्सीजन सिलेंडर का उपयोग नहीं किया जा सकता था, क्योंकि पीईएसओ प्रमाणन प्राप्त नहीं हुआ था। वर्मा ने अदालत को बताया कि अभी प्रमाणन प्राप्त किया गया है और आज से अस्पताल प्रवेश के लिए खुला है।

अवलोकन करें:-

केजरीवाल जी हर समय रोना कब होगा बंद? कभी किसी फण्ड, कभी बेड, कभी ऑक्सीजन और अब वेक्सिनेशन पर रोना
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दिल्ली सरकार ने इससे पहले भी इस अस्पताल को लेकर दावा किया था कि शनिवार से इंदिरा गाँधी अस्पताल कोविड अस्पताल में तब्दील हो जाएगा। आदेशानुसार इस अस्पताल में प्रारंभ में 250 बिस्तर होंगे और बाद में संख्या बढ़ाई जाएगी। हालाँकि, दो दिन बाद जब ऐसा नहीं हुआ तो मामला कोर्ट पहुँचा और दिल्ली सरकार की लापरवाहियों पर उन्हें फटकार लगी।

दिल्ली बनाम केंद्रः केजरीवाल सरकार को झटका

Delhi Govt vs LG Supreme Court, Supreme Court, Anti Corruption Branch, Justice AK Sikri, Arvind Kejariwal, Home Ministry, दिल्ली बनाम एलजी, दिल्ली बनाम केंद्र, दिल्ली एलजी, दिल्ली उपराज्यपाल, दिल्ली बनाम एलजी पर सुप्रीम कोर्ट का फैसलादिल्ली और केंद्र सरकार के बीच अधिकारों को लेकर जारी लड़ाई के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है. हालांकि, इस फैसले में कई ऐसी चीजें हैं जिसको लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है. दिल्ली सरकार बनाम उपराज्यपाल मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है. सर्विसेज को छोड़कर एंटी करप्शन ब्यूरो, रेवेन्यू, कमिशन बैठाने का अधिकार समेत कई मामलों पर जजों की राय एक रही. दिल्ली में अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग का मामला एलजी के पास रहे या दिल्ली सरकार के पास, इस पर जजों की राय अलग-अलग रही. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को बड़ी बेंच को भेज दिया. 
जस्टिस सीकरी ने कहा है कि ज्वाइंट सेक्रेटरी और ऊपर के अधिकारियों की ट्रांसफर व पोस्टिस एलजी करेंगे जबकि ग्रेड 3, 4 के अधिकारियों की ट्रांसफर व पोस्टिंग सीएम ऑफिस करेगा. अगर कोई मतभेद होता है तो एलजी के विचार को तरजीह दी जाएगी. दो जजों की बेंच में शामिल जस्टिस अशोक भूषण ने कहा सर्विसेज केंद्र के पास रहेगा.
Related imageदोनों जजों ने सर्वसम्मति से जांच आयोग बैठाने का अधिकार केंद्र के पास रहने का फैसला दिया. सुप्रीम कोर्ट के जज ने कहा, चुनी हुई दिल्ली की सरकार कमशिन ऑफ इन्क्वायरी का गठन नहीं कर सकती. जस्टिस सीकरी ने कहा, ‘जरूरी है ज्वाइंट सेक्रेटरी के ऊपर के अफसरों की पोस्टिंग और ट्रांसफर का अधिकार उपराज्यपाल के पास रहे.
पहली नजर में ये फैसला केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली की सरकार के लिए झटका लग रहा है, क्योंकि प्रदेश के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की सरकार ने जिस सबसे अहम अधिकार की मांग की थी वो उसे नहीं मिला है. जस्टिस एके सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण की पीठ हालांकि भ्रष्टाचार निरोधक शाखा, जांच आयोग गठित करने, बिजली बोर्ड पर नियंत्रण, भूमि राजस्व मामलों और लोक अभियोजकों की नियुक्ति संबंधी विवादों पर अपने विचारों पर सहमत रही. शीर्ष अदालत के इस फैसले को आम आदमी पार्टी ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया है. पार्टी ने कहा कि इसमें कोई स्पष्टता नहीं है, दिल्ली के लोग परेशान होते रहेंगे. आइए हम 10 प्वाइंट्स में आपको इस फैसले के बारे में बताते हैं….
1. सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ की इस सवाल पर अलग-अलग राय है कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सेवाओं पर नियंत्रण किसके पास हो
2. सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी में सेवाओं के नियंत्रण पर अपना खंडित फैसला वृहद पीठ के पास भेज दिया है
3. दो सदस्यीय पीठ भ्रष्टाचार रोधी शाखा, राजस्व, जांच आयोग और लोक अभियोजक की नियुक्ति के मुद्दे पर सहमत हुई.
4. शीर्ष अदालत ने केंद्र की इस अधिसूचना को बरकरार रखा कि दिल्ली सरकार का एसीबी भ्रष्टाचार के मामलों में केंद्र के कर्मचारियों की जांच नहीं कर सकता.
5. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र के पास जांच आयोग नियुक्त करने का अधिकार होगा.
6. बहरहाल, दिल्ली सरकार के पास बिजली आयोग या बोर्ड नियुक्त करने या उससे निपटने का अधिकार मिल गया है.
7. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उपराज्यपाल के बजाय दिल्ली सरकार के पास लोक अभियोजकों या कानूनी अधिकारियों को नियुक्त करने का अधिकार होगा.
8. भूमि राजस्व की दरें तय करने समेत भूमि राजस्व के मामलों को लेकर अधिकार दिल्ली सरकार के पास होगा.
9. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उपराज्यपाल को अनावश्यक रूप से फाइलों को रोकने की जरुरत नहीं है.
10. राय को लेकर मतभेद होने की स्थिति में फाइलों को राष्ट्रपति के पास भेजा जाना चाहिए.

केंद्र के पक्ष में फैसले

दिल्ली सरकार बनाम एलजी मामले में अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 6 मामलों पर फैसला दिया. इनमें से 4 फैसले केंद्र के पक्ष में रहे. एंटी करप्शन ब्यूरो, ग्रेड 1 व ग्रेड 2 के अधिकारियों के ट्रांसफर, पोस्टिंग का अधिकार और जांच आयोग गठित करने का अधिकार केंद्र सरकार के अधिकार में रहेगा.
Supreme Court refers the issue to a larger bench to decide whether the Delhi government or Lieutenant Governor should have jurisdiction over ‘Services’ in Delhi.

दिल्ली सरकार को मिले ये अधिकार

अश्विनी उपाध्याय ने बताया कि इलेक्ट्रिसिटी डिपार्टमेंट, रेवेन्यू डिपार्टमेंट, ग्रेड 3 और ग्रेड 4 के अधिकारियों के ट्रांसफर पोस्टिंग का अधिकार दिल्ली सरकार के अधीन रहेगा. मतभेद की स्थिति में एलजी के विचार को तरजीह मिलेगी.

दिल्ली सरकार करेगी स्पेशल पब्लिक प्रॉसीक्यूटर की नियुक्ति

शीर्ष अदालत के फैसले के तहत स्पेशल पब्लिक प्रॉसीक्यूटर की नियुक्ति का अधिकार दिल्ली सरकार के पास रहेगा. वहीं, एंटी-करप्शन ब्रांच केंद्र के अधीन रहेगी क्योंकि पुलिस केंद्र के पास है. रेवेन्यू पर एलजी की सहमति लेनी होगी. इलेक्ट्रिसिटी मामले में डायरेक्टर की नियुक्ति सीएम के पास होगी.

जमीन का मामला दिल्ली सरकार के पास

सुप्रीम कोर्ट के फैसले में कहा गया है कि जमीन से जुड़े मामले दिल्ली सरकार के नियंत्रण में रहेंगे। इसके मुताबिक दिल्ली सरकार जमीनों के रेट और मुआवजे की राशि तय कर सकती है। दिल्ली सरकार को राहत मिली है कि जमीनों का सर्किल सीएम ऑफिस के कंट्रोल में होगा।

क्या कहता है 2015 का नोटिफिकेशन?

गृह मंत्रालय की ओर से 21 मई 2015 को एक नोटिफिकेशन जारी किया था जिसमें सर्विस मैटर, पब्लिक ऑर्डर, पुलिस और भूमि से जुड़े मामले एलजी के अधिकार क्षेत्र में दिए गए थे. ब्यूरोक्रेट की सर्विस के मामले भी एलजी को दिए गए थे. केंद्र सरकार ने दिल्ली सरकार की कार्यकारी शक्तियों को सीमित कर दिया था.